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बौद्ध धर्म

डॉ भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार क्यों किया यह प्रश्न बहुत ही निजी व वैयक्तिक है l मुझे ऐसा लगता है कि किसी भी धर्म को छोड़ना अथवा स्वीकार करना सभी का अपना नीजे विषय है, उनकी अपना निजी अवधारणा है जिसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करना का हमारा कोई अधिकार नहीं है l हालांकि मैं भी मानता हूं कि जब कोई बड़ा व्यक्ति अथवा एक बहुत बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति जैसे कि डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर थे उनका किसी एक धर्म को स्वीकार करना हालांकि कोतूहल का विषय बना लाजमी है l तो मुझे ऐसा लगता है कि जिस प्रकार से उन्होंने हिंदू धर्म के अंदर कई कठिनाई आ पाई अपने संप्रदाय के लिए, अपने वर्ग के लिए, अपनी जाति के लिए तो उन्होंने विरोध स्वरूप एक अन्य धर्म को स्वीकार किए जाने की बहुत धर्म को स्वीकार किया और उस में कुछ भी गलत नहीं था l यह विरोध करने का है उनका अपने एक निजी तरीका था l हालांकि मैं यह भी मानता हूं कि जिस प्रकार से उस आवेश में आकर तो उस हवा में बहकर बहुत अन्य लोगों ने उनके संप्रदाय के बौद्ध धर्म अथवा अन्य किसी धर्म को अपनाया तथा हिंदू धर्म का त्याग किया हुआ एक जल्दबाजी में उठाया गया कदम भी मान सकते है और साथ ही मानता हूं कि अभी उनके निजी उनकी एक चॉइस थी उनका निजी अवधारणा थी जिसको कि नाकारा और जाना है स्वीकार आ जाना हमारे वश की बात नहीं है l और इन सब चीजों को और लोगों की निजी अवधारणा पर छोड़ देना चाहिए ना कि इसमें कोई हस्तक्षेप करना, किसी भी प्रकार की समझदारी है l तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि इस प्रकार के विषय को उठाया जाना विशेषकर आज के समय में जब भारत विकास तथा प्रगति की राह पर चल पड़ा है तथा भारत के पास एक बहुत ही काबिल नेता है जातिगत जो झगड़े थे वह लगभग खात्मे के कगार पर है l इस प्रकार की राजनीति को तथा इस प्रकार के विचारों को उठाया जाना मैं आज के समय ठीक नहीं मानता हूं l धन्यवाद, यह मेरी निजी राय है अगर इससे आप को कष्ट पहुंचता है तो इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी lDr Bhimrao Ambedkar Ne Baudh Dharm Sweekar Kyun Kiya Yeh Prashna Bahut Hi Niji V Vaiyaktik Hai L Mujhe Aisa Lagta Hai Ki Kisi Bhi Dharm Ko Chodna Athwa Sweekar Karna Sabhi Ka Apna Nije Vishay Hai Unki Apna Niji Awdharna Hai Jisme Kisi Bhi Prakar Ka Hastakshep Karna Ka Hamara Koi Adhikaar Nahi Hai L Halanki Main Bhi Manata Hoon Ki Jab Koi Bada Vyakti Athwa Ek Bahut Bade Varg Ka Pratinidhitva Karne Wala Vyakti Jaise Ki Doctor Babasaheb Ambedkar The Unka Kisi Ek Dharm Ko Sweekar Karna Halanki Kotuhal Ka Vishay Bana Lajmi Hai L To Mujhe Aisa Lagta Hai Ki Jis Prakar Se Unhone Hindu Dharm Ke Andar Kai Kathinai Aa Payi Apne Sampraday Ke Liye Apne Varg Ke Liye Apni Jati Ke Liye To Unhone Virodh Swaroop Ek Anya Dharm Ko Sweekar Kiye Jaane Ki Bahut Dharm Ko Sweekar Kiya Aur Us Mein Kuch Bhi Galat Nahi Tha L Yeh Virodh Karne Ka Hai Unka Apne Ek Niji Tarika Tha L Halanki Main Yeh Bhi Manata Hoon Ki Jis Prakar Se Us Aavesh Mein Aakar To Us Hawa Mein Behkar Bahut Anya Logon Ne Unke Sampraday Ke Baudh Dharm Athwa Anya Kisi Dharm Ko Apnaya Tatha Hindu Dharm Ka Tyag Kiya Hua Ek Jaldbaji Mein Uthaya Gaya Kadam Bhi Maan Sakte Hai Aur Saath Hi Manata Hoon Ki Abhi Unke Niji Unki Ek Choice Thi Unka Niji Awdharna Thi Jisko Ki Naakaaraa Aur Jana Hai Sweekar Aa Jana Hamare Vash Ki Baat Nahi Hai L Aur In Sab Chijon Ko Aur Logon Ki Niji Awdharna Par Chod Dena Chahiye Na Ki Isme Koi Hastakshep Karna Kisi Bhi Prakar Ki Samajhadari Hai L To Mujhe Aisa Nahi Lagta Ki Is Prakar Ke Vishay Ko Uthaya Jana Visheshkar Aaj Ke Samay Mein Jab Bharat Vikash Tatha Pragati Ki Raah Par Chal Pada Hai Tatha Bharat Ke Paas Ek Bahut Hi Kaabil Neta Hai Jaatigat Jo Jhagde The Wah Lagbhag Khatme Ke Kagar Par Hai L Is Prakar Ki Rajneeti Ko Tatha Is Prakar Ke Vicharon Ko Uthaya Jana Main Aaj Ke Samay Theek Nahi Manata Hoon L Dhanyavad Yeh Meri Niji Rai Hai Agar Isse Aap Ko Kasht Pahunchta Hai To Iske Liye Main Kshama Prarthi L
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ऐसा बिल्कुल भी नहीं कि देश पूजा से बुद्धा को मानता है वह देखना है कुछ जगह पर कुछ कमी थी जो फॉलो करती हैं हर कमेटी कॉल नहीं करती सबकी अपनी अपनी धर्म जाति और फॉलो करते हैं कुछ हिंदू भी नहीं मानते हैं कुछ मुस्लिम कंट्री मुस्लिम लोग मुस्लिम फॉलो करते हैं मुस्लिम समुदाय को रोका जा सकता है
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ऐसा बिल्कुल भी नहीं कि देश पूजा से बुद्धा को मानता है वह देखना है कुछ जगह पर कुछ कमी थी जो फॉलो करती हैं हर कमेटी कॉल नहीं करती सबकी अपनी अपनी धर्म जाति और फॉलो करते हैं कुछ हिंदू भी नहीं मानते हैं कुछ मुस्लिम कंट्री मुस्लिम लोग मुस्लिम फॉलो करते हैं मुस्लिम समुदाय को रोका जा सकता हैAisa Bilkul Bhi Nahi Ki Desh Puja Se Buddha Ko Manata Hai Wah Dekhna Hai Kuch Jagah Par Kuch Kami Thi Jo Follow Karti Hain Har Committee Call Nahi Karti Sabaki Apni Apni Dharm Jati Aur Follow Karte Hain Kuch Hindu Bhi Nahi Manate Hain Kuch Muslim Country Muslim Log Muslim Follow Karte Hain Muslim Samuday Ko Roka Ja Sakta Hai
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महात्मा बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था उस दिन बुद्ध बुद्ध बुद्ध पूर्णिमा थी और उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ यूपी में दिया था और सबसे ज्यादा उपदेश उन्होंने अपना श्रावस्ती में दिया था अपना बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति भी बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बोधगया में हुई थी और महात्मा बुद्ध का महानिर्वाण जी से कहा गया था कि महात्मा बुद्ध की मृत्यु हुई बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही हुई थी इसी कारण पूर्णिमा को बौद्धिस्ट में बहुत ही शुभ माना गया है और महात्मा बुद्ध का जन्म निर्धनता को 463 ईसापूर्व में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ था
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महात्मा बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था उस दिन बुद्ध बुद्ध बुद्ध पूर्णिमा थी और उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ यूपी में दिया था और सबसे ज्यादा उपदेश उन्होंने अपना श्रावस्ती में दिया था अपना बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति भी बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बोधगया में हुई थी और महात्मा बुद्ध का महानिर्वाण जी से कहा गया था कि महात्मा बुद्ध की मृत्यु हुई बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही हुई थी इसी कारण पूर्णिमा को बौद्धिस्ट में बहुत ही शुभ माना गया है और महात्मा बुद्ध का जन्म निर्धनता को 463 ईसापूर्व में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ थाMahatma Buddha Ka Janm Nepal Ke Lumbini Mein Hua Tha Us Din Buddha Buddha Buddha Poornima Thi Aur Unhone Apna Pratham Updesh Sarnath Up Mein Diya Tha Aur Sabse Jyada Updesh Unhone Apna Shravasti Mein Diya Tha Apna Buddha Ko Gyaan Prapti Bhi Buddha Poornima Ke Din Hi Bodhgaya Mein Hui Thi Aur Mahatma Buddha Ka Mahanirvan Ji Se Kaha Gaya Tha Ki Mahatma Buddha Ki Mrityu Hui Buddha Poornima Ke Din Hi Hui Thi Isi Kaaran Poornima Ko Bauddhist Mein Bahut Hi Shubha Mana Gaya Hai Aur Mahatma Buddha Ka Janm Nirdhanta Ko 463 Isapurv Mein Uttar Pradesh Ke Kushinagar Mein Hua Tha
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बोल संगीत बौद्ध धर्म और बौद्ध कला के बाद के लिए निमृत या प्रेरित संगीत है
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बोल संगीत बौद्ध धर्म और बौद्ध कला के बाद के लिए निमृत या प्रेरित संगीत हैBol Sangeet Baudh Dharm Aur Baudh Kala Ke Baad Ke Liye Nimrit Ya Prerit Sangeet Hai
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जिन आपको कुछ बुद्धा जी की सबसे अच्छी सिखाई बातें बताना चाहता हूं उन्होंने एक बात बोलिए मन सब कुछ है आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे हम अपने विचारों से आकार लेते हैं जैसे हम सोचते हैं वैसे ही हो जाते हैं जब हम जब हमारा मन शुद्ध होता है तो खुशी एक छाया की तरह होती है जो कभी नहीं जाती अतीत में मत रहो भविष्य का सपना मत देखो वर्तमान सन पर दिमाग पर ध्यान केंद्रित करते रहो
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जिन आपको कुछ बुद्धा जी की सबसे अच्छी सिखाई बातें बताना चाहता हूं उन्होंने एक बात बोलिए मन सब कुछ है आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे हम अपने विचारों से आकार लेते हैं जैसे हम सोचते हैं वैसे ही हो जाते हैं जब हम जब हमारा मन शुद्ध होता है तो खुशी एक छाया की तरह होती है जो कभी नहीं जाती अतीत में मत रहो भविष्य का सपना मत देखो वर्तमान सन पर दिमाग पर ध्यान केंद्रित करते रहोJin Aapko Kuch Buddha Ji Ki Sabse Acchi Sikhai Batein Batana Chahta Hoon Unhone Ek Baat Bolie Man Sab Kuch Hai Aapko Kya Lagta Hai Aap Kya Banenge Hum Apne Vicharon Se Aakaar Lete Hain Jaise Hum Sochte Hain Waise Hi Ho Jaate Hain Jab Hum Jab Hamara Man Shudh Hota Hai To Khushi Ek Chaya Ki Tarah Hoti Hai Jo Kabhi Nahi Jati Atit Mein Mat Raho Bhavishya Ka Sapna Mat Dekho Vartaman Sun Par Dimag Par Dhyan Kendrit Karte Raho
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अंबेडकर लग रहा था
अंबेडकर लग रहा था
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बुद्ध को मानने ना मानने से वह कंट्री आगे नहीं है साउथ कोरिया भी बहुत आगे साउथ कोरिया मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में Samsung मां से आती है उससे आगे मुझे नहीं लगता कि ह्यूमन मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में टेक्नोलॉजी में कोई और आ गया है साउथ कोरिया बहुत आगे है अमेरिका बहुत आगे है तो इन दोनों देशों में तो बुद्ध की कोई पूजा नहीं होती वहां तो क्रिश्चन है लेकिन वह भी आ गए हैं वहां का सरकार वहां के लोग वहां की जनता डिसाइड करती है कि देश कितने आगे तक जाएगा वहां की गवर्नमेंट आखिर नौकरशाह डिसाइड करते हैं भगवान का पूजा करने से कोई आज तक आगे नहीं किया है तो यह बुद्ध का कव्वाली है भाई यह वहां की गवर्नमेंट वहां के लोगों का दिमाग की यूनिटी का कमाल है कि वह देश कितने आगे हैं और बिल्कुल भारत क्रोध कर रहा है भारत भी एक दिन ऐसा होगा कि वहां भारत भी उस लेवल पर पहुंचेगा डेवलपिंग से कभी ना कभी तो डेवलप कंट्री बनेगा
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बुद्ध को मानने ना मानने से वह कंट्री आगे नहीं है साउथ कोरिया भी बहुत आगे साउथ कोरिया मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में Samsung मां से आती है उससे आगे मुझे नहीं लगता कि ह्यूमन मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में टेक्नोलॉजी में कोई और आ गया है साउथ कोरिया बहुत आगे है अमेरिका बहुत आगे है तो इन दोनों देशों में तो बुद्ध की कोई पूजा नहीं होती वहां तो क्रिश्चन है लेकिन वह भी आ गए हैं वहां का सरकार वहां के लोग वहां की जनता डिसाइड करती है कि देश कितने आगे तक जाएगा वहां की गवर्नमेंट आखिर नौकरशाह डिसाइड करते हैं भगवान का पूजा करने से कोई आज तक आगे नहीं किया है तो यह बुद्ध का कव्वाली है भाई यह वहां की गवर्नमेंट वहां के लोगों का दिमाग की यूनिटी का कमाल है कि वह देश कितने आगे हैं और बिल्कुल भारत क्रोध कर रहा है भारत भी एक दिन ऐसा होगा कि वहां भारत भी उस लेवल पर पहुंचेगा डेवलपिंग से कभी ना कभी तो डेवलप कंट्री बनेगाBuddha Ko Manane Na Manane Se Wah Country Aage Nahi Hai South Korea Bhi Bahut Aage South Korea Mobile Manufacturing Mein Samsung Maa Se Aati Hai Usse Aage Mujhe Nahi Lagta Ki Human Mobile Manufacturing Mein Technology Mein Koi Aur Aa Gaya Hai South Korea Bahut Aage Hai America Bahut Aage Hai To In Dono Deshon Mein To Buddha Ki Koi Puja Nahi Hoti Wahan To Krishchan Hai Lekin Wah Bhi Aa Gaye Hain Wahan Ka Sarkar Wahan Ke Log Wahan Ki Janta Decide Karti Hai Ki Desh Kitne Aage Tak Jayega Wahan Ki Government Aakhir Naukarashah Decide Karte Hain Bhagwan Ka Puja Karne Se Koi Aaj Tak Aage Nahi Kiya Hai To Yeh Buddha Ka Kawwali Hai Bhai Yeh Wahan Ki Government Wahan Ke Logon Ka Dimag Ki Unity Ka Kamal Hai Ki Wah Desh Kitne Aage Hain Aur Bilkul Bharat Krodh Kar Raha Hai Bharat Bhi Ek Din Aisa Hoga Ki Wahan Bharat Bhi Us Level Par Pahunchega Developing Se Kabhi Na Kabhi To Develop Country Banega
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बोधगया का बोधिवृक्ष सीधे-सीधे इतिहासिक बुद्धा सिद्धार्थ गौतम से जुड़ा हुआ है जो अपनी ध्यान प्रक्रिया के दौरान वहां प्रबोधन करते थे वहां बना मंदिर भी बोधि वृक्ष के पूर्व में बनाया गया है बुद्ध धर्म शास्त्र के अनुसार यदि उस जगह पर बोधि वृक्ष का आगमन नहीं होता तो वहां शाहीबाग बनाया जाता था लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका महात्माओं के अनुसार बोधिवृक्ष का हुक्म भी उसी दिन हुआ था जिस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था
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बोधगया का बोधिवृक्ष सीधे-सीधे इतिहासिक बुद्धा सिद्धार्थ गौतम से जुड़ा हुआ है जो अपनी ध्यान प्रक्रिया के दौरान वहां प्रबोधन करते थे वहां बना मंदिर भी बोधि वृक्ष के पूर्व में बनाया गया है बुद्ध धर्म शास्त्र के अनुसार यदि उस जगह पर बोधि वृक्ष का आगमन नहीं होता तो वहां शाहीबाग बनाया जाता था लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका महात्माओं के अनुसार बोधिवृक्ष का हुक्म भी उसी दिन हुआ था जिस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ थाBodhgaya Ka Bodhivriksh Seedhe Seedhe Itihasik Buddha Siddharth Gautam Se Juda Hua Hai Jo Apni Dhyan Prakriya Ke Dauran Wahan Prabodhan Karte The Wahan Bana Mandir Bhi Bodhee Vriksh Ke Purv Mein Banaya Gaya Hai Buddha Dharm Shastra Ke Anusar Yadi Us Jagah Par Bodhee Vriksh Ka Aagaman Nahi Hota To Wahan Shahibaug Banaya Jata Tha Lekin Aisa Sambhav Nahi Ho Saka Mahatmaon Ke Anusar Bodhivriksh Ka Huqm Bhi Ussi Din Hua Tha Jis Din Bhagwan Gautam Buddha Ka Janm Hua Tha
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बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है!!!!!
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बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है!!!!!Baudh Dharm Bharat Ki Shraman Parampara Se Nikla Dharm Aur Mahaan Darshan Hai Isha Purv 6 V Shatabdhi Mein Baudh Dharm Ki Sthapana Hui Hai Baudh Dharm Ke Sansthapak Mahatma Buddha Hai Baudh Dharm Duniya Ka Chautha Sabse Bada Dharm Hai Aaj Poore Vishwa Mein Lagbhag 54 Crore Log Baudh Dharm Ke Anuyaayi Hai
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बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और महान दर्शन है। ईसा पूर्व 6वी सताब्दी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पांच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षो में मध्य, पूर्वी, और दक्षिण पूर्वी जम्बू महाद्वीप में फैल गया। बौद्ध धर्म मे पांच सम्प्रदाय है।
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बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और महान दर्शन है। ईसा पूर्व 6वी सताब्दी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पांच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षो में मध्य, पूर्वी, और दक्षिण पूर्वी जम्बू महाद्वीप में फैल गया। बौद्ध धर्म मे पांच सम्प्रदाय है।Baudh Dharm Bharat Ki Shraman Parampara Se Nikla Dharm Aur Mahaan Darshan Hai Isa Purv V Satabdi Mein Baudh Dharm Ki Sthapana Hui Hai Baudh Dharm Ke Sansthapak Mahatma Buddha Hai Unke Mahaparinirvan Ke Agle Paanch Shatabdiyon Mein Baudh Dharm Poore Bhartiya Upmahadweep Mein Faila Aur Agle Do Hazar Varsho Mein Madhya Purvi Aur Dakshin Purvi Jambu Mahadwip Mein Fail Gaya Baudh Dharm Me Paanch Sampraday Hai
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बौद्ध धर्म ने पहले अशोक की अवधि से थेरावाडा थाईलैंड में शुरू किया था। तीसरी शताब्दी बीसी के दौरान पातालिलबुट्टा शहर में राजा अशोक द्वारा बौद्ध धर्म की शुरुआत और स्थापना की गई थी। राजा अशोक ने देश के बाहर भिक्षुओं को बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में जानने और सीखने के लिए भेजा। 30 अप्रैल, 2011
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बौद्ध धर्म ने पहले अशोक की अवधि से थेरावाडा थाईलैंड में शुरू किया था। तीसरी शताब्दी बीसी के दौरान पातालिलबुट्टा शहर में राजा अशोक द्वारा बौद्ध धर्म की शुरुआत और स्थापना की गई थी। राजा अशोक ने देश के बाहर भिक्षुओं को बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में जानने और सीखने के लिए भेजा। 30 अप्रैल, 2011Baudh Dharm Ne Pehle Ashok Ki Avadhi Se Therawada Thailand Mein Shuru Kiya Tha Teesri Shatabdi BC Ke Dauran Patalilbutta Sheher Mein Raja Ashok Dwara Baudh Dharm Ki Shuruvat Aur Sthapana Ki Gayi Thi Raja Ashok Ne Desh Ke Bahar Bhikshuon Ko Buddha Ki Shikshaon Ke Baare Mein Jaanne Aur Seekhne Ke Liye Bheja 30 April 2011
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बौद्ध धर्म का इतिहास 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक फैलता है। बौद्ध धर्म प्राचीन भारत के पूर्वी हिस्से में, मगध के प्राचीन और आसपास (अब बिहार, भारत में) के आसपास उभरा, और सिद्धार्थ गौतम की शिक्षाओं पर आधारित है। यह आज के सबसे पुराने धर्मों में से एक बनाता है।
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बौद्ध धर्म का इतिहास 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक फैलता है। बौद्ध धर्म प्राचीन भारत के पूर्वी हिस्से में, मगध के प्राचीन और आसपास (अब बिहार, भारत में) के आसपास उभरा, और सिद्धार्थ गौतम की शिक्षाओं पर आधारित है। यह आज के सबसे पुराने धर्मों में से एक बनाता है।Baudh Dharm Ka Itihas 5 Vi Shatabdi Isa Purv Se Lekar Vartaman Tak Failata Hai Baudh Dharm Prachin Bharat Ke Purvi Hisse Mein Magadh Ke Prachin Aur Aaspass Ab Bihar Bharat Mein Ke Aaspass Ubhra Aur Siddharth Gautam Ki Shikshaon Par Aadharit Hai Yeh Aaj Ke Sabse Purane Dharmon Mein Se Ek Banata Hai
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19वीं शताब्दी में एशियाई आप्रवासियों द्वारा बौद्ध धर्म को संयुक्त राज्य अमेरिका में पेश किया गया था, जब पूर्वी एशिया से आप्रवासियों की बड़ी संख्या नई दुनिया में पहुंचने लगी। संयुक्त राज्य अमेरिका में, चीन से आप्रवासियों ने 1820 के आसपास प्रवेश किया, लेकिन 1849 कैलिफ़ोर्निया गोल्ड रश के बाद बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।
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19वीं शताब्दी में एशियाई आप्रवासियों द्वारा बौद्ध धर्म को संयुक्त राज्य अमेरिका में पेश किया गया था, जब पूर्वी एशिया से आप्रवासियों की बड़ी संख्या नई दुनिया में पहुंचने लगी। संयुक्त राज्य अमेरिका में, चीन से आप्रवासियों ने 1820 के आसपास प्रवेश किया, लेकिन 1849 कैलिफ़ोर्निया गोल्ड रश के बाद बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।Vi Shatabdi Mein Asia Apravasiyon Dwara Baudh Dharm Ko Sanyukt Rajya America Mein Pesh Kiya Gaya Tha Jab Purvi Asia Se Apravasiyon Ki Badi Sankhya Nayi Duniya Mein Pahuchne Lagi Sanyukt Rajya America Mein Chin Se Apravasiyon Ne 1820 Ke Aaspass Pravesh Kiya Lekin 1849 Kailiforniya Gold Rush Ke Baad Badi Sankhya Mein Pahuchne Lage
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कम से कम 5 वीं शताब्दी से बौद्ध धर्म कंबोडिया में अस्तित्व में है, और इसके पहले के रूप में महायान बौद्ध धर्म का एक प्रकार था।
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कम से कम 5 वीं शताब्दी से बौद्ध धर्म कंबोडिया में अस्तित्व में है, और इसके पहले के रूप में महायान बौद्ध धर्म का एक प्रकार था।Kum Se Kum 5 Vi Shatabdi Se Baudh Dharm Cambodia Mein Astitv Mein Hai Aur Iske Pehle Ke Roop Mein Mhayaan Baudh Dharm Ka Ek Prakar Tha
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प्रारंभिक चीनी बौद्ध धर्म। बौद्ध शिक्षक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आ सकते हैं क्योंकि इस बात का सबूत है कि क्यून सम्राट ने 213 ईसा पूर्व धर्म के विनाश का आदेश दिया था। उस समय जब पहली बौद्ध ग्रंथ चीन आए, तो हान साम्राज्य अस्तित्व में था।
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प्रारंभिक चीनी बौद्ध धर्म। बौद्ध शिक्षक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आ सकते हैं क्योंकि इस बात का सबूत है कि क्यून सम्राट ने 213 ईसा पूर्व धर्म के विनाश का आदेश दिया था। उस समय जब पहली बौद्ध ग्रंथ चीन आए, तो हान साम्राज्य अस्तित्व में था।Prarambhik Chini Baudh Dharm Baudh Shikshak Teesri Shatabdi Isa Purv Mein Aa Sakte Hain Kyonki Is Baat Ka Sabut Hai Ki Kyun Samrat Ne 213 Isa Purv Dharm Ke Vinash Ka Aadesh Diya Tha Us Samay Jab Pehli Baudh Granth Chin Aaye To Han Samrajya Astitv Mein Tha
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महायान बौद्ध धर्म कोरिया से छठी शताब्दी में (पारंपरिक रूप से, 538 या 552 में, एक राजनयिक मिशन के हिस्से के रूप में जापान से पेश किया गया था जिसमें शाक्यमुनी बुद्ध की छवि और बौद्ध पाठ के कई खंड शामिल थे)।
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महायान बौद्ध धर्म कोरिया से छठी शताब्दी में (पारंपरिक रूप से, 538 या 552 में, एक राजनयिक मिशन के हिस्से के रूप में जापान से पेश किया गया था जिसमें शाक्यमुनी बुद्ध की छवि और बौद्ध पाठ के कई खंड शामिल थे)।Mhayaan Baudh Dharm Korea Se Chathi Shatabdi Mein Paramparik Roop Se 538 Ya 552 Mein Ek Rajanayik Mission Ke Hisse Ke Roop Mein Japan Se Pesh Kiya Gaya Tha Jisme Shakyamuni Buddha Ki Chawi Aur Baudh Path Ke Kai Khand Shamil The
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बौद्ध धर्म की उत्पत्ति। बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।
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बौद्ध धर्म की उत्पत्ति। बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।Baudh Dharm Ki Utpatti Baudh Dharm 6 Vi Shatabdi Ke Utaraardh Mein Sthapit Bisii Siddharth Gautam Buddha Dwara Asia Ke Adhikaansh Deshon Mein Ek Mahatvapurna Dharm Hai
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पहला विशिष्ट बौद्ध समूह, बौद्ध अध्ययन समूह मेलबोर्न, 1938 में मेलबर्न में लेन बुलेन द्वारा गठित किया गया था, लेकिन यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ध्वस्त हो गया.
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पहला विशिष्ट बौद्ध समूह, बौद्ध अध्ययन समूह मेलबोर्न, 1938 में मेलबर्न में लेन बुलेन द्वारा गठित किया गया था, लेकिन यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ध्वस्त हो गया. Pehla Vishist Baudh Samuh Baudh Adhyayan Samuh Melborn 1938 Mein Melbourne Mein Lane Bulen Dwara Gathit Kiya Gaya Tha Lekin Yeh Dvitiya Vishwa Yudh Ke Dauran Dhvast Ho Gaya
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ऐतिहासिक रूप से, अधिकांश वियतनामी ने खुद को बौद्ध धर्म के साथ पहचाना है, जिसका जन्म अब दक्षिणी नेपाल में 530 बीसी के आसपास है। हिंदू धर्म के एक शाखा के रूप में।
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ऐतिहासिक रूप से, अधिकांश वियतनामी ने खुद को बौद्ध धर्म के साथ पहचाना है, जिसका जन्म अब दक्षिणी नेपाल में 530 बीसी के आसपास है। हिंदू धर्म के एक शाखा के रूप में।Aetihasik Roop Se Adhikaansh Viyatanami Ne Khud Ko Baudh Dharm Ke Saath Pehchana Hai Jiska Janm Ab Dakshini Nepal Mein 530 BC Ke Aaspass Hai Hindu Dharm Ke Ek Sakha Ke Roop Mein
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8 वीं शताब्दी सीई के अंत में तिब्बत में बौद्ध धर्म एक प्रमुख उपस्थिति बन गया। इसे तिब्बती राजा, त्रिसोंग डात्सेन के निमंत्रण पर भारत से लाया गया था, जिन्होंने दो बौद्ध स्वामी को तिब्बत में आमंत्रित किया था और महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथों का अनुवाद तिब्बती में किया गया था।
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8 वीं शताब्दी सीई के अंत में तिब्बत में बौद्ध धर्म एक प्रमुख उपस्थिति बन गया। इसे तिब्बती राजा, त्रिसोंग डात्सेन के निमंत्रण पर भारत से लाया गया था, जिन्होंने दो बौद्ध स्वामी को तिब्बत में आमंत्रित किया था और महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथों का अनुवाद तिब्बती में किया गया था। 8 Vi Shatabdi Seyie Ke Ant Mein Tibet Mein Baudh Dharm Ek Pramukh Upasthitee Ban Gaya Ise Tibbati Raja Trisong Datsen Ke Nimantran Par Bharat Se Laya Gaya Tha Jinhone Do Baudh Swami Ko Tibet Mein Aamantrit Kiya Tha Aur Mahatvapurna Baudh Granthon Ka Anuvad Tibbati Mein Kiya Gaya Tha
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प्रारंभिक चीनी बौद्ध धर्म। बौद्ध शिक्षक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आ सकते हैं क्योंकि इस बात का सबूत है कि क्यून सम्राट ने 213 ईसा पूर्व धर्म के विनाश का आदेश दिया था। उस समय जब पहली बौद्ध ग्रंथ चीन आए, तो हान साम्राज्य अस्तित्व में था।
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प्रारंभिक चीनी बौद्ध धर्म। बौद्ध शिक्षक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आ सकते हैं क्योंकि इस बात का सबूत है कि क्यून सम्राट ने 213 ईसा पूर्व धर्म के विनाश का आदेश दिया था। उस समय जब पहली बौद्ध ग्रंथ चीन आए, तो हान साम्राज्य अस्तित्व में था।Prarambhik Chini Baudh Dharm Baudh Shikshak Teesri Shatabdi Isa Purv Mein Aa Sakte Hain Kyonki Is Baat Ka Sabut Hai Ki Kyun Samrat Ne 213 Isa Purv Dharm Ke Vinash Ka Aadesh Diya Tha Us Samay Jab Pehli Baudh Granth Chin Aaye To Han Samrajya Astitv Mein Tha
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बौद्ध धर्म की उत्पत्ति। बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।
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बौद्ध धर्म की उत्पत्ति। बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।Baudh Dharm Ki Utpatti Baudh Dharm 6 Vi Shatabdi Ke Utaraardh Mein Sthapit Bisii Siddharth Gautam Buddha Dwara Asia Ke Adhikaansh Deshon Mein Ek Mahatvapurna Dharm Hai
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वज्रयान की ऐतिहासिक उत्पत्ति अस्पष्ट है, सिवाय इसके कि यह बौद्ध धर्म के मानसिक विद्यालयों के प्रसार के साथ हुआ। यह 6 वीं से 11 वीं शताब्दी तक विकसित हुआ और भारत के पड़ोसी देशों पर स्थायी प्रभाव डाला।
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वज्रयान की ऐतिहासिक उत्पत्ति अस्पष्ट है, सिवाय इसके कि यह बौद्ध धर्म के मानसिक विद्यालयों के प्रसार के साथ हुआ। यह 6 वीं से 11 वीं शताब्दी तक विकसित हुआ और भारत के पड़ोसी देशों पर स्थायी प्रभाव डाला।Vajrayan Ki Aetihasik Utpatti Aspast Hai Shivaay Iske Ki Yeh Baudh Dharm Ke Mansik Vidyaalayon Ke Prasaar Ke Saath Hua Yeh 6 Vi Se 11 Vi Shatabdi Tak Viksit Hua Aur Bharat Ke Padoshi Deshon Par Sthayi Prabhav Dala
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बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है। बौद्ध धर्म ने कई अलग-अलग रूपों को ग्रहण किया है, लेकिन प्रत्येक मामले में बुद्ध, उनकी शिक्षाओं, और हिस्टाचिंग (जिसे धामा या धर्म कहा जाता है) के "आत्मा" या "सार" के जीवन के अनुभवों से आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, धार्मिक जीवन हालांकि, पहली या दूसरी शताब्दी सी। में अश्वघोसा द्वारा बुद्ध चरिता (बुद्ध का जीवन) के लेखन तक नहीं। क्या हमारे पास उनके जीवन का व्यापक विवरण है। बुद्ध का जन्म हिमालयी तलहटी के पास लुंबिनी नामक एक जगह पर हुआ था (सीए 563 बीसीई), और उन्होंने बनारस (सारनाथ में) के आसपास पढ़ना शुरू किया। उनका युग सामान्य आध्यात्मिक, बौद्धिक और सामाजिक किण्वन में से एक था। यह वह उम्र थी जब धर्म की त्याग करने वाले पवित्र व्यक्तियों द्वारा परिवार और समाज की त्याग के हिंदू आदर्श पहले सत्य बन गए थे, और जब उपनिषद लिखे गए थे। दोनों वैदिक अग्नि बलिदान की केंद्रीयता से दूर कदम के रूप में देखा जा सकता है।
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बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है। बौद्ध धर्म ने कई अलग-अलग रूपों को ग्रहण किया है, लेकिन प्रत्येक मामले में बुद्ध, उनकी शिक्षाओं, और हिस्टाचिंग (जिसे धामा या धर्म कहा जाता है) के "आत्मा" या "सार" के जीवन के अनुभवों से आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, धार्मिक जीवन हालांकि, पहली या दूसरी शताब्दी सी। में अश्वघोसा द्वारा बुद्ध चरिता (बुद्ध का जीवन) के लेखन तक नहीं। क्या हमारे पास उनके जीवन का व्यापक विवरण है। बुद्ध का जन्म हिमालयी तलहटी के पास लुंबिनी नामक एक जगह पर हुआ था (सीए 563 बीसीई), और उन्होंने बनारस (सारनाथ में) के आसपास पढ़ना शुरू किया। उनका युग सामान्य आध्यात्मिक, बौद्धिक और सामाजिक किण्वन में से एक था। यह वह उम्र थी जब धर्म की त्याग करने वाले पवित्र व्यक्तियों द्वारा परिवार और समाज की त्याग के हिंदू आदर्श पहले सत्य बन गए थे, और जब उपनिषद लिखे गए थे। दोनों वैदिक अग्नि बलिदान की केंद्रीयता से दूर कदम के रूप में देखा जा सकता है।Baudh Dharm 6 Vi Shatabdi Ke Utaraardh Mein Sthapit Bisii Siddharth Gautam Buddha Dwara Asia Ke Adhikaansh Deshon Mein Ek Mahatvapurna Dharm Hai Baudh Dharm Ne Kai Alag Alag Roopon Ko Grahan Kiya Hai Lekin Pratyek Mamle Mein Buddha Unki Shikshaon Aur Histaching Jise Dhama Ya Dharm Kaha Jata Hai Ke Aatma Ya Saar Ke Jeevan Ke Anubhavon Se Aakarshit Karne Ka Prayas Kiya Gaya Hai Dharmik Jeevan Halanki Pehli Ya Dusri Shatabdi Si Mein Ashwaghosa Dwara Buddha Charita Buddha Ka Jeevan Ke Lekhan Tak Nahi Kya Hamare Paas Unke Jeevan Ka Vyapak Vivran Hai Buddha Ka Janm Himaalayi Talhati Ke Paas Lumbini Namak Ek Jagah Par Hua Tha Ca 563 Bisii Aur Unhone Banaras Sarnath Mein Ke Aaspass Padhna Shuru Kiya Unka Yug Samanya Aadhyatmik Baudhik Aur Samajik Kidvan Mein Se Ek Tha Yeh Wah Umar Thi Jab Dharm Ki Tyag Karne Wale Pavitra Vyaktiyon Dwara Parivar Aur Samaaj Ki Tyag Ke Hindu Adarsh Pehle Satya Ban Gaye The Aur Jab Upanishad Likhe Gaye The Dono Vaidik Agni Balidaan Ki Kendriyata Se Dur Kadam Ke Roop Mein Dekha Ja Sakta Hai
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महायान बौद्ध धर्म में, महायान सूत्रों को प्रायः अंगों की तुलना में अधिक अधिकार दिया जाता है। इन महायान-विशिष्ट लेखनों में से पहला संभवतः पहली शताब्दी ईसा पूर्व या पहली शताब्दी सीई के आसपास लिखा गया था।
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महायान बौद्ध धर्म में, महायान सूत्रों को प्रायः अंगों की तुलना में अधिक अधिकार दिया जाता है। इन महायान-विशिष्ट लेखनों में से पहला संभवतः पहली शताब्दी ईसा पूर्व या पहली शताब्दी सीई के आसपास लिखा गया था।Mhayaan Baudh Dharm Mein Mhayaan Sootro Ko Prayah Angon Ki Tulna Mein Adhik Adhikaar Diya Jata Hai In Mhayaan Vishist Lekhanon Mein Se Pehla Sanbhavatah Pehli Shatabdi Isa Purv Ya Pehli Shatabdi Seyie Ke Aaspass Likha Gaya Tha
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बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।
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बौद्ध धर्म, 6 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित बीसीई। सिद्धार्थ गौतम ("बुद्ध") द्वारा, एशिया के अधिकांश देशों में एक महत्वपूर्ण धर्म है।Baudh Dharm 6 Vi Shatabdi Ke Utaraardh Mein Sthapit Bisii Siddharth Gautam Buddha Dwara Asia Ke Adhikaansh Deshon Mein Ek Mahatvapurna Dharm Hai
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बौद्ध धर्म की गिरावट को विभिन्न साम्राज्यों, विशेष रूप से गुप्त साम्राज्य (320-650 सीई) के अंत के बाद भारत के क्षेत्रीयकरण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसने हिंदू धर्म और जैन धर्म और संरक्षण और दान के नुकसान के साथ प्रतिस्पर्धा की शुरुआत की; और हंस, तुर्क और फारसियों द्वारा विजय और बाद के उत्पीड़न।
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बौद्ध धर्म की गिरावट को विभिन्न साम्राज्यों, विशेष रूप से गुप्त साम्राज्य (320-650 सीई) के अंत के बाद भारत के क्षेत्रीयकरण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसने हिंदू धर्म और जैन धर्म और संरक्षण और दान के नुकसान के साथ प्रतिस्पर्धा की शुरुआत की; और हंस, तुर्क और फारसियों द्वारा विजय और बाद के उत्पीड़न।Baudh Dharm Ki Giravat Ko Vibhinn Samrajyon Vishesh Roop Se Gupt Samrajya (320-650 Seyie Ke Ant Ke Baad Bharat Ke Kshetriykaran Ke Liye Zimmedar Thahraya Gaya Hai Jisne Hindu Dharm Aur Jain Dharm Aur Sanrakshan Aur Daan Ke Nuksan Ke Saath Pratispardha Ki Shuruvat Ki Aur Hans Turq Aur Farsiyon Dwara Vijay Aur Baad Ke Utpidan
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500 ईसा पूर्व हिंदूवाद और बौद्ध धर्म उत्पन्न हुआ l 500 ईसा पूर्व तथाकथित "दूसरा शहरीकरण" के दौरान उत्तरी भारत की गंगा संस्कृति में हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की आम उत्पत्ति है । उन्होंने समानांतर मान्यताओं को साझा किया है जो कि एक तरफ मौजूद हैं, लेकिन मतभेद भी कहते हैं।
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500 ईसा पूर्व हिंदूवाद और बौद्ध धर्म उत्पन्न हुआ l 500 ईसा पूर्व तथाकथित "दूसरा शहरीकरण" के दौरान उत्तरी भारत की गंगा संस्कृति में हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की आम उत्पत्ति है । उन्होंने समानांतर मान्यताओं को साझा किया है जो कि एक तरफ मौजूद हैं, लेकिन मतभेद भी कहते हैं।500 Isa Purv Hinduwaad Aur Baudh Dharm Utpann Hua L 500 Isa Purv Tathakathin Doosra Shaharikaran Ke Dauran Uttari Bharat Ki Ganga Sanskriti Mein Hindu Dharm Aur Baudh Dharm Ki Aam Utpatti Hai Unhone Samanantar Manyataon Ko Sajha Kiya Hai Jo Ki Ek Taraf Maujud Hain Lekin Matbhed Bhi Kehte Hain
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अशोक ने बुद्ध की शिक्षाओं को साझा करने के लिए आस-पास के क्षेत्रों में भिक्षुओं को भेजकर बौद्ध विस्तार को बढ़ावा दिया। रूपांतरण की लहर शुरू हुई, और बौद्ध धर्म न केवल भारत के माध्यम से बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल गया। ... आज दुनिया में लगभग 350 मिलियन बौद्ध हैं।
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अशोक ने बुद्ध की शिक्षाओं को साझा करने के लिए आस-पास के क्षेत्रों में भिक्षुओं को भेजकर बौद्ध विस्तार को बढ़ावा दिया। रूपांतरण की लहर शुरू हुई, और बौद्ध धर्म न केवल भारत के माध्यम से बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल गया। ... आज दुनिया में लगभग 350 मिलियन बौद्ध हैं।Ashok Ne Buddha Ki Shikshaon Ko Sajha Karne Ke Liye Aas Paas Ke Kshetro Mein Bhikshuon Ko Bhejkar Baudh Vistar Ko Badhawa Diya Rupantaran Ki Lahar Shuru Hui Aur Baudh Dharm N Kewal Bharat Ke Maadhyam Se Balki Antararashtriya Sthar Par Bhi Fail Gaya ... Aaj Duniya Mein Lagbhag 350 Million Baudh Hain
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