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Equality


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हिंदी के जी हां मैं आपकी बात से पूरी तरह से आरक्षण व्यवस्था जो है वह समानता के अधिकार का उल्लंघन है और योग्य व्यक्ति को जो है वह मौका कब मिल रहा है कि पहले के जमाने में क्या होता था वह जाते जाते हैं उ...
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हिंदी के जी हां मैं आपकी बात से पूरी तरह से आरक्षण व्यवस्था जो है वह समानता के अधिकार का उल्लंघन है और योग्य व्यक्ति को जो है वह मौका कब मिल रहा है कि पहले के जमाने में क्या होता था वह जाते जाते हैं उनको रिजर्वेशन दिया गया है और आज के दर्शन की जरूरत है क्योंकि यह सब चीज है जो है बहुत ही कम हो गई है आज के डेट में तो मैं भी आरक्षण को हटा दिया जाए और मेरिट के बीच में हो देखा जाए मैदान में आकर जो है वह गेम खेला जाए ना की रिजर्वेशन की बेसिस पर जो है वह कई लोगों सीट मिलाHindi Ke Ji Haan Main Aapki Baat Se Puri Tarah Se Aarakshan Vyavastha Jo Hai Wah Samanata Ke Adhikaar Ka Ullanghan Hai Aur Yogya Vyakti Ko Jo Hai Wah Mauka Kab Mil Raha Hai Ki Pehle Ke Jamaane Mein Kya Hota Tha Wah Jaate Jaate Hain Unko Reservation Diya Gaya Hai Aur Aaj Ke Darshan Ki Zaroorat Hai Kyonki Yeh Sab Cheez Hai Jo Hai Bahut Hi Kum Ho Gayi Hai Aaj Ke Date Mein To Main Bhi Aarakshan Ko Hata Diya Jaye Aur Merit Ke Beech Mein Ho Dekha Jaye Maidan Mein Aakar Jo Hai Wah Game Khela Jaye Na Ki Reservation Ki Basis Par Jo Hai Wah Kai Logon Seat Mila
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हनी में एक आंकड़ा सामने आया किसने बताया गया था कि दुनिया में सबसे ज्यादा अरबपति भारत में इस मामले में हमारे देश में रूस और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद अपनी जगह बना ली है इस समय भारत म...
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हनी में एक आंकड़ा सामने आया किसने बताया गया था कि दुनिया में सबसे ज्यादा अरबपति भारत में इस मामले में हमारे देश में रूस और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद अपनी जगह बना ली है इस समय भारत में 97 अरबपति हैं अब गरीबी की बात करले भारत के लगभग 35% आबादी सब भारत सरकार के पैमाने पर गरीबी रेखा के नीचे इसके पीछे आबादी शिक्षा तो है ही सरकार भी कोई कम जी पर बात नहीं है मेरी समझ में तो आर्थिक असमानता का सबसे बड़ा कारण सरकारी नीति है एक तरफ सरकार पूंजीपतियों को ध्यान में रखकर कानून बनाती है तो दूसरी तरफ सरकार की नीतियों पर पूंजीपतियों का प्रभाव ज्यादा रहता है वैसे भी आजकल दुनिया भर में यह नया ट्रेन चल पड़ा है कि बड़े बड़े उद्योगपति तमाम सरकारी चला रहे हैंHoney Mein Ek Akanda Samane Aaya Kisne Bataya Gaya Tha Ki Duniya Mein Sabse Jyada Arabpati Bharat Mein Is Mamle Mein Hamare Desh Mein Rus Aur Britain Ko Piche Chodkar America Aur Chin Ke Baad Apni Jagah Bana Lee Hai Is Samay Bharat Mein 97 Arabpati Hain Ab Garibi Ki Baat Karle Bharat Ke Lagbhag 35% Aabadi Sab Bharat Sarkar Ke Paimane Par Garibi Rekha Ke Neeche Iske Piche Aabadi Shiksha To Hai Hi Sarkar Bhi Koi Kum Ji Par Baat Nahi Hai Meri Samajh Mein To Aarthik Asamanta Ka Sabse Bada Kaaran Sarkari Niti Hai Ek Taraf Sarkar Punjipatiyon Ko Dhyan Mein Rakhakar Kanoon Banati Hai To Dusri Taraf Sarkar Ki Nitiyon Par Punjipatiyon Ka Prabhav Jyada Rehta Hai Waise Bhi Aajkal Duniya Bhar Mein Yeh Naya Train Chal Pada Hai Ki Bade Bade Udyogpati Tamam Sarkari Chala Rahe Hain
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नहीं सर जी जो पुलिस होती है वह कभी आग नहीं बचाती आग बुझाने वाले 5:00 वाले होते हैं जो आग बुझाते हैं पुलिस तो ज्ञानी चोर चोर उचक्कों को पढ़ कर देखो आप हो जाती है...
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नहीं सर जी जो पुलिस होती है वह कभी आग नहीं बचाती आग बुझाने वाले 5:00 वाले होते हैं जो आग बुझाते हैं पुलिस तो ज्ञानी चोर चोर उचक्कों को पढ़ कर देखो आप हो जाती हैNahi Sar Ji Jo Police Hoti Hai Wah Kabhi Aag Nahi Bachati Aag Bujhaane Wale 5:00 Wale Hote Hain Jo Aag Bujhaate Hain Police To Gyani Chor Chor Uchakkon Ko Padh Kar Dekho Aap Ho Jati Hai
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जी हां मुझे लगता है आरक्षण हटाने से लोगों को एक लिस्ट कॉलेज में एडमिशन या फिर जो भी जॉब अच्छी अपॉर्चुनिटी मिलती है उसमें तो समान अधिकार मिल पाएगा क्या आरक्षण के चलते कहीं ना कहीं जाति जाति के नाम पर भ...
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जी हां मुझे लगता है आरक्षण हटाने से लोगों को एक लिस्ट कॉलेज में एडमिशन या फिर जो भी जॉब अच्छी अपॉर्चुनिटी मिलती है उसमें तो समान अधिकार मिल पाएगा क्या आरक्षण के चलते कहीं ना कहीं जाति जाति के नाम पर भेदभाव होता है लोगों में वह बहुत गलत है और जिसके चलते जो काबिलियत रखते हैं लोग वह पीछे रह जाते हैं और आरक्षण के थ्रू जो लोग कम काबिलियत रखते हैं आगे निकल जाते क्योंकि बहुत गलत है और हमारी कॉन्स्टिट्यूशन नेम इस चीज को गलत माना है और उसमें सभी को समान अधिकार दिया है तो आरक्षण कहीं ना कहीं कॉन्स्टिट्यूशन कि उस बात को कंट्रोल करता है तो आरक्षण को हटा देने से मुझे लगता है कि वहां पर लोगों को समान अधिकार मिलने लग जाएगा जो भी वह किसी जॉब के पार्किंग जी गवर्नमेंट जॉब की अपॉर्चुनिटी के लिए ट्राई करेंगे या फिर किसी कॉलेज में एडमिशन के लिए ट्राई करेंगे तुमको वहां पर समान अधिकार मिलने लगेंगे और एक बहुत अच्छा तरीका होगा जिससे आप सभी को सामान लेकर आएंगे और जो लोग सिर्फ कास्ट के नाम पर चलते हैं या फिर वह सोचते हैं कास्ट ऑफ लो कास्ट वाले लोग हैं तो उनको आरक्षण के तू आगे में आगे बढ़ने का मौका मिल जाएगा वह बहुत गलत है और जो सामान्य वर्ग के लोग यह सोचते हैं कि उनकी कास्ट सामान्य है तो उनको बहुत ज्यादा मेहनत करी कि तुम को किस चीज का डर खत्म हो जाएगा और जो लोग हैं वह एक दूसरे को समान मानने लगेंगे और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं रहेगा लोगों के बीचJi Haan Mujhe Lagta Hai Aarakshan Hatane Se Logon Ko Ek List College Mein Admission Ya Phir Jo Bhi Job Acchi Opportunity Milti Hai Usamen To Saman Adhikaar Mil Payega Kya Aarakshan Ke Chalte Kahin Na Kahin Jati Jati Ke Naam Par Bhedbhav Hota Hai Logon Mein Wah Bahut Galat Hai Aur Jiske Chalte Jo Kabiliyat Rakhate Hain Log Wah Piche Rah Jaate Hain Aur Aarakshan Ke Through Jo Log Kum Kabiliyat Rakhate Hain Aage Nikal Jaate Kyonki Bahut Galat Hai Aur Hamari Constitution Name Is Cheez Ko Galat Mana Hai Aur Usamen Sabhi Ko Saman Adhikaar Diya Hai To Aarakshan Kahin Na Kahin Constitution Ki Us Baat Ko Control Karta Hai To Aarakshan Ko Hata Dene Se Mujhe Lagta Hai Ki Wahan Par Logon Ko Saman Adhikaar Milne Lag Jayega Jo Bhi Wah Kisi Job Ke Parking Ji Government Job Ki Opportunity Ke Liye Try Karenge Ya Phir Kisi College Mein Admission Ke Liye Try Karenge Tumko Wahan Par Saman Adhikaar Milne Lagenge Aur Ek Bahut Accha Tarika Hoga Jisse Aap Sabhi Ko Saamaan Lekar Aayenge Aur Jo Log Sirf Caste Ke Naam Par Chalte Hain Ya Phir Wah Sochte Hain Caste Of Lo Caste Wale Log Hain To Unko Aarakshan Ke Tu Aage Mein Aage Badhne Ka Mauka Mil Jayega Wah Bahut Galat Hai Aur Jo Samanya Varg Ke Log Yeh Sochte Hain Ki Unki Caste Samanya Hai To Unko Bahut Jyada Mehnat Kari Ki Tum Ko Kis Cheez Ka Dar Khatam Ho Jayega Aur Jo Log Hain Wah Ek Dusre Ko Saman Manane Lagenge Aur Kisi Bhi Tarah Ka Bhedbhav Nahi Rahega Logon Ke Beech
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मुझे अच्छा नहीं लगता कि रिजर्वेशन बंद कर देना चाहिए इसी लिए स्पेशल है क्योंकि क्वालिटी नहीं आई है अभी तक हालांकि है सिर्फ 10 साल के लिए ही लगाया गया था वह मुझे लगता है आगे तक हमें बढ़ाना है इसलिए पड़ा...
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मुझे अच्छा नहीं लगता कि रिजर्वेशन बंद कर देना चाहिए इसी लिए स्पेशल है क्योंकि क्वालिटी नहीं आई है अभी तक हालांकि है सिर्फ 10 साल के लिए ही लगाया गया था वह मुझे लगता है आगे तक हमें बढ़ाना है इसलिए पड़ा क्योंकि क्वालिटी नहीं आई थी तो इसका रीजन यह नहीं है कि रिजर्वेशन सिस्टम खराब है इसका रीजन यह कि उसका इंप्लीमेंटेशन खराब है और हम लोग ठीक नहीं रहे हैं हम लोग जो डिस्क्रिमिनेशन उस टाइम पर था वह अभी तक काफी कम हो जाना चाहिए था अभी तक वह नकली दूध अभी तक होना ही नहीं चाहिए था लेकिन हम लोग अभी तक क्योंकि डिसकनेक्ट करते हैं इसलिए रिजर्वेशन की भी जरूरत अभी तक मुझे लगता है है और अगर हम अपने देश का रिजर्वेशन हटाना चाहते हैं तो हमें अपनी सोसाइटी से डिस्क्रिमिनेशन हटाना पड़ेगा क्योंकि उसके बिना हम लोगों को जोड़ो पॉजिटिव डिज़र्व करते हैं वह नहीं दे पाएंगे और फिर रिजर्वेशन को रहना पड़ेगा उनको वह पॉजिटिव देने के लिएMujhe Accha Nahi Lagta Ki Reservation Band Kar Dena Chahiye Isi Liye Special Hai Kyonki Quality Nahi Eye Hai Abhi Tak Halanki Hai Sirf 10 Saal Ke Liye Hi Lagaya Gaya Tha Wah Mujhe Lagta Hai Aage Tak Hume Badhana Hai Isliye Pada Kyonki Quality Nahi Eye Thi To Iska Reason Yeh Nahi Hai Ki Reservation System Kharab Hai Iska Reason Yeh Ki Uska Kharab Hai Aur Hum Log Theek Nahi Rahe Hain Hum Log Jo Discrimination Us Time Par Tha Wah Abhi Tak Kafi Kam Ho Jana Chahiye Tha Abhi Tak Wah Nakli Dudh Abhi Tak Hona Hi Nahi Chahiye Tha Lekin Hum Log Abhi Tak Kyonki Disconnect Karte Hain Isliye Reservation Ki Bhi Zaroorat Abhi Tak Mujhe Lagta Hai Hai Aur Agar Hum Apne Desh Ka Reservation Hatana Chahte Hain To Hume Apni Society Se Discrimination Hatana Padega Kyonki Uske Bina Hum Logon Ko Jodon Positive Karte Hain Wah Nahi De Paenge Aur Phir Reservation Ko Rehna Padega Unko Wah Positive Dene Ke Liye
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अनदेखी मेरे सबसे समानता जो है वह आर्थिक स्थिति में थोड़ी आई एम एस वर्ड थोड़ी आई है आई है और उसका फर्क पड़ा है कि अच्छी चीज है हम और अभी कितने साल और तक रिजर्वेशन होना चाहिए आरक्षण होना चाहिए यह जो है ...
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अनदेखी मेरे सबसे समानता जो है वह आर्थिक स्थिति में थोड़ी आई एम एस वर्ड थोड़ी आई है आई है और उसका फर्क पड़ा है कि अच्छी चीज है हम और अभी कितने साल और तक रिजर्वेशन होना चाहिए आरक्षण होना चाहिए यह जो है मेरे ख्याल से इसका मतलब कोई भी सरकार की राजनीति पर नहीं बेस्ट होना चाहिए और यह डिसीजन प्रॉब्लम एक हमें सोशल सोसायटी की स्टडी के बाद ही ट्रैक स्पोर्ट्स किराए हो उसी के हिसाब से होना चाहिए इसमें भी राजनीति डालेंगे तो हमेशा से बिल्कुल सही नहीं होगाAndekha Mere Sabse Samanata Jo Hai Wah Aarthik Sthiti Mein Thodi Eye Em S Word Thodi Eye Hai Eye Hai Aur Uska Fark Pada Hai Ki Acchi Cheez Hai Hum Aur Abhi Kitne Saal Aur Tak Reservation Hona Chahiye Aarakshan Hona Chahiye Yeh Jo Hai Mere Khayal Se Iska Matlab Koi Bhi Sarkar Ki Rajneeti Par Nahi Best Hona Chahiye Aur Yeh Decision Problem Ek Hume Social Sociaty Ki Study Ke Baad Hi Track Sports Kiraye Ho Ussi Ke Hisab Se Hona Chahiye Isme Bhi Rajneeti Dalenge To Hamesha Se Bilkul Sahi Nahi Hoga
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पुरुष और महिला की मानव शरीर की संरचना समान होती है इसमें नाना प्रकार के ऊतक (tissue) मिलकर शरीर के विभिन्न अंगों (organs) का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार, एक प्रकार के कार्य करनेवाले विभिन्न अंग मिलकर एक अंग तंत्र (organ system) का निर्माण करते हैं। कई अंग तंत्र मिलकर जीव (जैसे, मानव शरीर) की रचना कर
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पुरुष और महिला की मानव शरीर की संरचना समान होती है इसमें नाना प्रकार के ऊतक (tissue) मिलकर शरीर के विभिन्न अंगों (organs) का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार, एक प्रकार के कार्य करनेवाले विभिन्न अंग मिलकर एक अंग तंत्र (organ system) का निर्माण करते हैं। कई अंग तंत्र मिलकर जीव (जैसे, मानव शरीर) की रचना करPurush Aur Mahila Ki Manav Sharir Ki Sanrachna Saman Hoti Hai Isme Nana Prakar Ke Utak (tissue) Milkar Sharir Ke Vibhinn Angon (organs) Ka Nirman Karte Hain Isi Prakar Ek Prakar Ke Karya Karnevale Vibhinn Ang Milkar Ek Ang Tantra (organ System) Ka Nirman Karte Hain Kai Ang Tantra Milkar Jeev Jaise Manav Sharir Ki Rachna Kar
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भारतीय संविधान के प्रस्तावना में घोषणा के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यह एक खास धर्म, जाति, धर्म, जाति, जन्म की सेक्स या जगह के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव है। अवधि धर्मनिरपेक्षता के लिए भारतीय धारणा अवधि के लिए फ्रेंच राष्ट्र से अलग है [1]. धर्मनिरपेक्ष शब्द प्रस्तावना में बयालीसवाँ संशोधन (1976) [2] द्वारा डाला गया था यह सभी धर्मों और धार्मिक सहिष्णुता और सम्मान की समानता का अर्थ है। भारत, इसलिए एक आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है। हर व्यक्ति को उपदेश, अभ्यास और किसी भी धर्म वे चुनाव प्रचार करने का अधिकार है। सरकार के पक्ष में या किसी भी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं करना चाहिए. यह बराबर सम्मान के साथ सभी धर्मों का इलाज करना होगा. सभी नागरिकों, चाहे उनकी धार्मिक मान्यताओं के कानून के सामने बराबर हैं। कोई धार्मिक अनुदेश सरकार या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में दिया जाता है।
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भारतीय संविधान के प्रस्तावना में घोषणा के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यह एक खास धर्म, जाति, धर्म, जाति, जन्म की सेक्स या जगह के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव है। अवधि धर्मनिरपेक्षता के लिए भारतीय धारणा अवधि के लिए फ्रेंच राष्ट्र से अलग है [1]. धर्मनिरपेक्ष शब्द प्रस्तावना में बयालीसवाँ संशोधन (1976) [2] द्वारा डाला गया था यह सभी धर्मों और धार्मिक सहिष्णुता और सम्मान की समानता का अर्थ है। भारत, इसलिए एक आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है। हर व्यक्ति को उपदेश, अभ्यास और किसी भी धर्म वे चुनाव प्रचार करने का अधिकार है। सरकार के पक्ष में या किसी भी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं करना चाहिए. यह बराबर सम्मान के साथ सभी धर्मों का इलाज करना होगा. सभी नागरिकों, चाहे उनकी धार्मिक मान्यताओं के कानून के सामने बराबर हैं। कोई धार्मिक अनुदेश सरकार या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में दिया जाता है।Bhartiya Samvidhan Ke Prastavna Mein Ghoshana Ke Anusar Bharat Ek Dharmanirapeksh Desh Hai Yeh Ek Khas Dharm Jati Dharm Jati Janm Ki Sex Ya Jagah Ke Sadasyon Ke Khilaf Bhedbhav Hai Avadhi Dharmanirapekshata Ke Liye Bhartiya Dharan Avadhi Ke Liye French Rashtra Se Alag Hai Dharmanirapeksh Shabdh Prastavna Mein Bayalisavan Sanshodhan (1976) [2] Dwara Dala Gaya Tha Yeh Sabhi Dharmon Aur Dharmik Sahishnuta Aur Samman Ki Samanata Ka Arth Hai Bharat Isliye Ek Adhikarik Rajya Dharm Nahi Hai Har Vyakti Ko Updesh Abhyas Aur Kisi Bhi Dharm Ve Chunav Prachar Karne Ka Adhikaar Hai Sarkar Ke Paksh Mein Ya Kisi Bhi Dharm Ke Khilaf Bhedbhav Nahi Karna Chahiye Yeh Barabar Samman Ke Saath Sabhi Dharmon Ka Ilaj Karna Hoga Sabhi Naagrikon Chahe Unki Dharmik Manyataon Ke Kanoon Ke Samane Barabar Hain Koi Dharmik Anudesh Sarkar Ya Sarkari Sahaayata Prapt Schoolon Mein Diya Jata Hai
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इक्विटी और समानता दो रणनीतियां हैं जिनका उपयोग हम निष्पक्षता के प्रयास में कर सकते हैं। इक्विटी उन सभी को दे रही है जो उन्हें सफल होने की आवश्यकता है। समानता सभी का इलाज कर रही है।निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए समानता, लेकिन यह केवल तभी काम कर सकती है जब हर कोई एक ही स्थान से शुरू होता है और उसे एक ही मदद की आवश्यकता होती है।
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इक्विटी और समानता दो रणनीतियां हैं जिनका उपयोग हम निष्पक्षता के प्रयास में कर सकते हैं। इक्विटी उन सभी को दे रही है जो उन्हें सफल होने की आवश्यकता है। समानता सभी का इलाज कर रही है।निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए समानता, लेकिन यह केवल तभी काम कर सकती है जब हर कोई एक ही स्थान से शुरू होता है और उसे एक ही मदद की आवश्यकता होती है।Equity Aur Samanata Do Rananeetiyaan Hain Jinka Upyog Hum Nishpakshata Ke Prayas Mein Kar Sakte Hain Equity Un Sabhi Ko De Rahi Hai Jo Unhen Safal Hone Ki Avashyakta Hai Samanata Sabhi Ka Ilaj Kar Rahi Hai Nishpakshata Ko Badhawa Dene Ke Liye Samanata Lekin Yeh Kewal Tabhi Kaam Kar Sakti Hai Jab Har Koi Ek Hi Sthan Se Shuru Hota Hai Aur Use Ek Hi Madad Ki Avashyakta Hoti Hai
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हम यह नहीं कह सकते कि भारत में समानता है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारे पास भारत में सकारात्मक कार्रवाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे पास भारत में प्रचलित जाति और लिंग आधारित भेदभाव है। जाति, लिंग द्वारा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच भारत में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक असमानता के इस भेदभाव का परिणाम है।
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हम यह नहीं कह सकते कि भारत में समानता है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारे पास भारत में सकारात्मक कार्रवाई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे पास भारत में प्रचलित जाति और लिंग आधारित भेदभाव है। जाति, लिंग द्वारा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच भारत में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक असमानता के इस भेदभाव का परिणाम है।Hum Yeh Nahi Keh Sakte Ki Bharat Mein Samanata Hai Aisa Isliye Nahi Hai Kyonki Hamare Paas Bharat Mein Sakaratmak Karyawahi Hai Aisa Isliye Hai Kyonki Hamare Paas Bharat Mein Prachalit Jati Aur Ling Aadharit Bhedbhav Hai Jati Ling Dwara Vibhinn Samajik Samuho Ke Bich Bharat Mein Samajik Aarthik Shaikshik Aur Rajnitik Asamanta Ke Is Bhedbhav Ka Parinam Hai
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भारत के सभी नागरिकों के बीच में भारत का सारा जमीन सभी को बराबर से बांध देना चाहिए इससे भारत में समानता है कि देख ऐसा हो नहीं सकता ना मिली क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई जाती है कितने लोग जिनके पास जमीन न...
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भारत के सभी नागरिकों के बीच में भारत का सारा जमीन सभी को बराबर से बांध देना चाहिए इससे भारत में समानता है कि देख ऐसा हो नहीं सकता ना मिली क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई जाती है कितने लोग जिनके पास जमीन नहीं हो तो मान जाएंगे पर जिनके पास जमीन ज्यादा है वह नहीं मानेगी वह बोले कि नहीं मेरा जमीन है उस को मिल जाएगा यह तो पॉसिबल नहीं है क्योंकि अभी तक किसी में हुआ नहीं है कि हमारी दोस्ती हुई जो आबादी उस पर कंट्रोल किया जाए ताकि हमारे यहां जन्म दिवस कार्यक्रम हुआ ऑपरेशन कम होने से यहां जो है यह सबBharat Ke Sabhi Naagrikon Ke Bich Mein Bharat Ka Saara Jameen Sabhi Ko Barabar Se Bandh Dena Chahiye Isse Bharat Mein Samanata Hai Ki Dekh Aisa Ho Nahi Sakta Na Mili Kyonki Aisa Karne Ke Liye Koi Jati Hai Kitne Log Jinke Paas Jameen Nahi Ho To Maan Jaenge Par Jinke Paas Jameen Jyada Hai Wah Nahi Manegi Wah Bole Ki Nahi Mera Jameen Hai Us Ko Mil Jayega Yeh To Possible Nahi Hai Kyonki Abhi Tak Kisi Mein Hua Nahi Hai Ki Hamari Dosti Hui Jo Aabadi Us Par Control Kiya Jaye Taki Hamare Yahan Janm Divas Karyakram Hua Operation Kam Hone Se Yahan Jo Hai Yeh Sab
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एक पुरुष होने के बावजूद मैया मानता हूं कि पुरुष और महिला के बीच की समानता की बातें तो की जा रही है परंतु अभी भी समाज में महिलाओं को एक उचित स्थान प्राप्त नहीं है महिलाओं को विधान सभा विधान पालिका विधा...
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एक पुरुष होने के बावजूद मैया मानता हूं कि पुरुष और महिला के बीच की समानता की बातें तो की जा रही है परंतु अभी भी समाज में महिलाओं को एक उचित स्थान प्राप्त नहीं है महिलाओं को विधान सभा विधान पालिका विधान परिषद तथा लोकसभा व राज्यसभा में आरक्षण देना ही होगा उसी के साथ ही लोकसभा में तथा राज्यसभा में एक पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा महिला वर्ग को तथा उनका विकास की जो सीढ़ियां है उस पर हार्दिक पड़ेगी देखिए हम महानगर में रहने वाले लोग हैं स्मार्टफोन यूज करने वाले लोग हैं तथा बड़ी-बड़ी एप्लिकेशंस पर को राहु कल जैसी एप्लीकेशन अपने प्रश्न देते हैं उत्तर पूछते हैं विदेश यात्राएं करते हैं परंतु आज भी हमें देखना होगा कि भारत का जो ग्रामीण इलाका है भारत के जो छोटे शहर है वहां पर महिलाओं की स्थिति क्या है विशेषकर अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं की तथा निम्न वर्ग की महिलाओं की गरीब महिलाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय है आज भी उनकी स्थिति 11 जो प्राचीन काल में जिस प्रकार से महिलाओं की स्थिति उसी प्रकार के वर्क बाकी मैं मारूंगा कि भूल से भी बुरी है तो इन सब समस्याओं से निजात पाने का कुछ तरीके हैं उनमें से एक तरीका है महिलाओं को पर्याप्त समानता देना समानता के अवसर प्रदान करना तथा उन्हें आरक्षण देना कि शेष तो हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली है उसमें उनके लिए कोई स्थान सुनिश्चित करना जिससे वह अपने समाज वर्क महिलाओं की प्रतिनिधित्व कर सके परंतु हमें इसके पहले यह भी ध्यान रखना होगा कि जिन महिलाओं के जो परिवारजन है वह पहले से ही अगर राजनीति में है तो उनको इस सुविधा का लाभ नहीं मिलना चाहिए तभी इसका समानता के अवसर का तथा आरक्षण की जो बात हो रही है महिलाओं का उसका चित्र सिद्ध हो पाएगा अर्थात मुझे ऐसा लगता है कि यह एक समय की आवश्यकता है तथा धीरे-धीरे इसका जो प्रभाव बढ़ता जाएगाEk Purush Hone Ke Bawajud Maiya Manata Hoon Ki Purush Aur Mahila Ke Bich Ki Samanata Ki Batein To Ki Ja Rahi Hai Parantu Abhi Bhi Samaaj Mein Mahilaon Ko Ek Uchit Sthan Prapt Nahi Hai Mahilaon Ko Vidhan Sabha Vidhan Palika Vidhan Parishad Tatha Lok Sabha V Rajya Sabha Mein Aarakshan Dena Hi Hoga Ussi Ke Saath Hi Lok Sabha Mein Tatha Rajya Sabha Mein Ek Paryapt Pratinidhitva Milega Mahila Varg Ko Tatha Unka Vikash Ki Jo Sidhiyan Hai Us Par Hardik Padegi Dekhie Hum Mahanagar Mein Rehne Wale Log Hain Smartphone Use Karne Wale Log Hain Tatha Badi Badi Eplikeshans Par Ko Rahu Kal Jaisi Application Apne Prashna Dete Hain Uttar Poochte Hain Videsh Yaatraen Karte Hain Parantu Aaj Bhi Hume Dekhna Hoga Ki Bharat Ka Jo Gramin Ilaka Hai Bharat Ke Jo Chote Sheher Hai Wahan Par Mahilaon Ki Sthiti Kya Hai Visheshakar Alpsankhyak Varg Ki Mahilaon Ki Tatha Nimn Varg Ki Mahilaon Ki Garib Mahilaon Ki Sthiti Bahut Hi Dayaniye Hai Aaj Bhi Unki Sthiti 11 Jo Prachin Kaal Mein Jis Prakar Se Mahilaon Ki Sthiti Ussi Prakar Ke Work Baki Main Marunga Ki Bhul Se Bhi Buri Hai To In Sab Samasyaon Se Nijat Pane Ka Kuch Tarike Hain Unmen Se Ek Tarika Hai Mahilaon Ko Paryapt Samanata Dena Samanata Ke Avsar Pradan Karna Tatha Unhen Aarakshan Dena Ki Shesh To Hamari Loktantrik Pranali Hai Usamen Unke Liye Koi Sthan Sunishchit Karna Jisse Wah Apne Samaaj Work Mahilaon Ki Pratinidhitva Kar Sake Parantu Hume Iske Pehle Yeh Bhi Dhyan Rakhna Hoga Ki Jin Mahilaon Ke Jo Parivaarjan Hai Wah Pehle Se Hi Agar Rajneeti Mein Hai To Unko Is Suvidha Ka Labh Nahi Milna Chahiye Tabhi Iska Samanata Ke Avsar Ka Tatha Aarakshan Ki Jo Baat Ho Rahi Hai Mahilaon Ka Uska Chitra Siddh Ho Payega Arthat Mujhe Aisa Lagta Hai Ki Yeh Ek Samay Ki Avashyakta Hai Tatha Dhire Dhire Iska Jo Prabhav Badhta Jayega
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मुझे नहीं लगता कि कभी भी हमारे देश में समानता का अधिकार खत्म हो सकता है क्योंकि यह एक मौलिक अधिकार है और सभी लोगों को संविधान के नजर में समान समझा जाता है और ऐसा होना भी उचित है क्योंकि अगर किसी भी दे...
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मुझे नहीं लगता कि कभी भी हमारे देश में समानता का अधिकार खत्म हो सकता है क्योंकि यह एक मौलिक अधिकार है और सभी लोगों को संविधान के नजर में समान समझा जाता है और ऐसा होना भी उचित है क्योंकि अगर किसी भी देश के संविधान में ऐसा लिखा हो कि वहां पर अलग-अलग धर्मों के नाम पर या फिर कास्ट के नाम पर लोगों में भेदभाव किया जाए तो वहां पर अराजक माहौल बन जाएगा और लोग एक दूसरे से नफरत या फिर रैना करने लगेंगे यह हमारा कानून ही है या फिर हमारा संविधान ही है जिसकी वजह से आज हम सब मिल जुल कर रहते हैं क्योंकि कई बार संविधान होने के बाद भी हम देखते हैं कि लोग एक दूसरे से धर्म के नाम पर घृणा करते हैं या फिर जाति के नाम पर लोगों से भेदभाव किया जाता है तो इस तरह की चीजें कानूनन अपराध है और लोगों के मन में एक बात का डर तो जरूर रहता है कि हमारे देश में सभी लोगों को समान समझा जाता है और अगर किसी ने भेदभाव किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है इस डर की वजह से भी हमारे समाज में धीरे-धीरे करके भेदभाव जो जाति के नाम पर या फिर धर्म के नाम पर होता है वह खत्म हो रहा है तो मुझे नहीं लगता कि कभी भी हमारे देश में इस तरह कि जो भी संविधान में बातें लिखी गई है वह खत्म हो सकती हैMujhe Nahi Lagta Ki Kabhi Bhi Hamare Desh Mein Samanata Ka Adhikaar Khatam Ho Sakta Hai Kyonki Yeh Ek Maulik Adhikaar Hai Aur Sabhi Logon Ko Samvidhan Ke Nazar Mein Saman Samjha Jata Hai Aur Aisa Hona Bhi Uchit Hai Kyonki Agar Kisi Bhi Desh Ke Samvidhan Mein Aisa Likha Ho Ki Wahan Par Alag Alag Dharmon Ke Naam Par Ya Phir Caste Ke Naam Par Logon Mein Bhedbhav Kiya Jaye To Wahan Par Arajak Maahaul Ban Jayega Aur Log Ek Dusre Se Nafrat Ya Phir Raina Karne Lagenge Yeh Hamara Kanoon Hi Hai Ya Phir Hamara Samvidhan Hi Hai Jiski Wajah Se Aaj Hum Sab Mil Jul Kar Rehte Hain Kyonki Kai Bar Samvidhan Hone Ke Baad Bhi Hum Dekhte Hain Ki Log Ek Dusre Se Dharm Ke Naam Par Ghrina Karte Hain Ya Phir Jati Ke Naam Par Logon Se Bhedbhav Kiya Jata Hai To Is Tarah Ki Cheezen Kanunan Apradh Hai Aur Logon Ke Man Mein Ek Baat Ka Dar To Jarur Rehta Hai Ki Hamare Desh Mein Sabhi Logon Ko Saman Samjha Jata Hai Aur Agar Kisi Ne Bhedbhav Kiya To Uske Khilaf Kanooni Karyawahi Ho Sakti Hai Is Dar Ki Wajah Se Bhi Hamare Samaaj Mein Dhire Dhire Karke Bhedbhav Jo Jati Ke Naam Par Ya Phir Dharm Ke Naam Par Hota Hai Wah Khatam Ho Raha Hai To Mujhe Nahi Lagta Ki Kabhi Bhi Hamare Desh Mein Is Tarah Ki Jo Bhi Samvidhan Mein Batein Likhi Gayi Hai Wah Khatam Ho Sakti Hai
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प्रगतिशील स्थितियों वाले लोगों को विकलांग के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालांकि, आप एचआईवी संक्रमण से निदान होने वाले दिन से समानता अधिनियम 2010 के तहत विकलांगता परिभाषा को स्वचालित रूप से पूरा करते हैं,
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प्रगतिशील स्थितियों वाले लोगों को विकलांग के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालांकि, आप एचआईवी संक्रमण से निदान होने वाले दिन से समानता अधिनियम 2010 के तहत विकलांगता परिभाषा को स्वचालित रूप से पूरा करते हैं,Pragatisheel Sthitiyo Wale Logon Ko Viklaang Ke Roop Mein Vargikrit Kiya Ja Sakta Hai Halanki Aap HIV Sankraman Se Nidan Hone Wale Din Se Samanata Adhiniyam 2010 Ke Tahat Vikalaangata Paribhasha Ko Svachalit Roop Se Pura Karte Hain
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कानून से पहले समानता, यह भी कहा जाता है: कानून के तहत समानता, कानून की आंखों में समानता, या कानूनी समानता, सिद्धांत है कि प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए और सभी एक ही कानून के अधीन हैं न्याय।
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कानून से पहले समानता, यह भी कहा जाता है: कानून के तहत समानता, कानून की आंखों में समानता, या कानूनी समानता, सिद्धांत है कि प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए और सभी एक ही कानून के अधीन हैं न्याय।Kanoon Se Pehle Samanata Yeh Bhi Kaha Jata Hai Kanoon Ke Tahat Samanata Kanoon Ki Aakhon Mein Samanata Ya Kanooni Samanata Siddhant Hai Ki Pratyek Swatantra Vyakti Ko Kanoon Dwara Saman Roop Se Vyavhar Kiya Jana Chahiye Aur Sabhi Ek Hi Kanoon Ke Adhin Hain Nyay
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संविधान में "समानता" शब्द या अवधारणा की सबसे नज़दीकी चीज चौदहवें संशोधन में पाई जाती है। 1868 में संविधान में जोड़ा गया, इस संशोधन में एक खंड है जिसमें कहा गया है कि "कोई भी राज्य अपने क्षेत्राधिकार के भीतर किसी भी व्यक्ति को कानूनों की समान सुरक्षा से इनकार नहीं करेगा।"
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संविधान में "समानता" शब्द या अवधारणा की सबसे नज़दीकी चीज चौदहवें संशोधन में पाई जाती है। 1868 में संविधान में जोड़ा गया, इस संशोधन में एक खंड है जिसमें कहा गया है कि "कोई भी राज्य अपने क्षेत्राधिकार के भीतर किसी भी व्यक्ति को कानूनों की समान सुरक्षा से इनकार नहीं करेगा।"Samvidhan Mein Samanata Shabdh Ya Awdharna Ki Sabse Nazadeeki Cheez Chaudahaven Sanshodhan Mein Payi Jati Hai 1868 Mein Samvidhan Mein Joda Gaya Is Sanshodhan Mein Ek Khand Hai Jisme Kaha Gaya Hai Ki Koi Bhi Rajya Apne Kshetradhikar Ke Bheetar Kisi Bhi Vyakti Ko Kanuno Ki Saman Suraksha Se Inkar Nahi Karega
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भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 (1) में यह भी बताया गया है कि राज्य किसी भी नागरिक के खिलाफ धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान या उनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, अनुच्छेद 15 (3) , शब्दों में यह भी प्रदान करता है कि अनुच्छेद 15 में कुछ भी राज्य को विशेष बनाने से रोक देगा !
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भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 (1) में यह भी बताया गया है कि राज्य किसी भी नागरिक के खिलाफ धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान या उनमें से किसी के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, अनुच्छेद 15 (3) , शब्दों में यह भी प्रदान करता है कि अनुच्छेद 15 में कुछ भी राज्य को विशेष बनाने से रोक देगा ! Bharat Ke Samvidhan Ke Anuched 15 (1) Mein Yeh Bhi Bataya Gaya Hai Ki Rajya Kisi Bhi Nagarik Ke Khilaf Dharm Jati Ling Janm Sthan Ya Unmen Se Kisi Ke Aadhar Par Bhedbhav Nahi Karega Anuched 15 (3) , Shabdon Mein Yeh Bhi Pradan Karta Hai Ki Anuched 15 Mein Kuch Bhi Rajya Ko Vishesh Banane Se Rok Dega !
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समानता का अधिकार। सामाजिक समानता और सार्वजनिक क्षेत्रों के बराबर पहुंच: संविधान के अनुच्छेद 15 में कहा गया है कि धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी व्यक्ति से भेदभाव नहीं किया जाएगा।
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समानता का अधिकार। सामाजिक समानता और सार्वजनिक क्षेत्रों के बराबर पहुंच: संविधान के अनुच्छेद 15 में कहा गया है कि धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी व्यक्ति से भेदभाव नहीं किया जाएगा।Samanata Ka Adhikaar Samajik Samanata Aur Sarvajanik Kshetro Ke Barabar Pahunch Samvidhan Ke Anuched 15 Mein Kaha Gaya Hai Ki Dharm Jati Jati Ling Ya Janm Sthan Ke Aadhar Par Kisi Bhi Vyakti Se Bhedbhav Nahi Kiya Jayega
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भारत के संविधान में "समानता" शब्द पर एक बहुत बड़ा तनाव रखा गया है। हमने इस प्रस्ताव को हमारे प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और निर्देश सिद्धांतों में वर्णित देखा है। जिस कारण से मैं उपर्युक्त पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं, वह उन सभी लाभों पर ध्यान आकर्षित करना है जो सभी नागरिकों पर लागू होते हैं और हम संविधान के अनुदान के आधार पर परिवर्तनों का पालन !
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भारत के संविधान में "समानता" शब्द पर एक बहुत बड़ा तनाव रखा गया है। हमने इस प्रस्ताव को हमारे प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और निर्देश सिद्धांतों में वर्णित देखा है। जिस कारण से मैं उपर्युक्त पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं, वह उन सभी लाभों पर ध्यान आकर्षित करना है जो सभी नागरिकों पर लागू होते हैं और हम संविधान के अनुदान के आधार पर परिवर्तनों का पालन !Bharat Ke Samvidhan Mein Samanata Shabdh Par Ek Bahut Bada Tanaav Rakha Gaya Hai Humne Is Prastaav Ko Hamare Prastavna Maulik Adhikaaro Aur Nirdesh Siddhanto Mein Varnit Dekha Hai Jis Kaaran Se Main Uparyukt Par Dhyan Kendrit Kar Raha Hoon Wah Un Sabhi Laabhon Par Dhyan Aakarshit Karna Hai Jo Sabhi Naagrikon Par Laagu Hote Hain Aur Hum Samvidhan Ke Anudan Ke Aadhar Par Parivartanon Ka Palan !
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भारत के संविधान के अनुच्छेद -14। राज्य कानून के समक्ष किसी भी व्यक्ति की समानता से इनकार नहीं करता है या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों की समान सुरक्षा नहीं देता है। धर्म, जाति, जाति, लिंग, या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव की सुरक्षा निषेध।
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भारत के संविधान के अनुच्छेद -14। राज्य कानून के समक्ष किसी भी व्यक्ति की समानता से इनकार नहीं करता है या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों की समान सुरक्षा नहीं देता है। धर्म, जाति, जाति, लिंग, या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव की सुरक्षा निषेध।Bharat Ke Samvidhan Ke Anuched Rajya Kanoon Ke Samaksh Kisi Bhi Vyakti Ki Samanata Se Inkar Nahi Karta Hai Ya Bharat Ke Kshetra Ke Bheetar Kanuno Ki Saman Suraksha Nahi Deta Hai Dharm Jati Jati Ling Ya Janm Sthan Ke Aadhar Par Bhedbhav Ki Suraksha Nishde
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आज आपका क्वेश्चन है कि अनेकता में एकता एक संदेश है तो वह जो प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी है तो उन्होंने मन की बात में यह बोले कि जो भारत है उस में अनेकता में भी एकता है और यही उसकी विशेषताओं पर अलग ...
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आज आपका क्वेश्चन है कि अनेकता में एकता एक संदेश है तो वह जो प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी है तो उन्होंने मन की बात में यह बोले कि जो भारत है उस में अनेकता में भी एकता है और यही उसकी विशेषताओं पर अलग अलग अलग धर्म के अलग-अलग जाति के लोग रहते हैं पर फिर भी वह साथ में मिलकर हर त्योहार मनाते हैं 30 मनाते हैं या फिर अगर किसी को जरूरत पड़े तो वह उसके में आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं तो यही भारत में अनेकता में एकता का प्रतीक हैAaj Aapka Question Hai Ki Anekata Mein Ekta Ek Sandesh Hai To Wah Jo Pradhanmantri Narendra Singh Modi Hai To Unhone Man Ki Baat Mein Yeh Bole Ki Jo Bharat Hai Us Mein Anekata Mein Bhi Ekta Hai Aur Yahi Uski Visheshtaon Par Alag Alag Alag Dharm Ke Alag Alag Jati Ke Log Rehte Hain Par Phir Bhi Wah Saath Mein Milkar Har Tyohaar Manate Hain 30 Manate Hain Ya Phir Agar Kisi Ko Zaroorat Pade To Wah Uske Mein Aage Badh Chadhakar Hissa Lete Hain To Yahi Bharat Mein Anekata Mein Ekta Kangaroo Prateek Hai
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समानता का अधिकार:- संविधान का कहना है कि सरकार कानून में समान सुरक्षा के समक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति से समानता से इनकार नहीं करेगी। इसका मतलब यह है कि कानून किसी भी व्यक्ति के साथ भेद भाव नहीं करेगा और ये समान तरीके से लागू होता हैं। इसे कानून का नियम कहा जाता है।
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समानता का अधिकार:- संविधान का कहना है कि सरकार कानून में समान सुरक्षा के समक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति से समानता से इनकार नहीं करेगी। इसका मतलब यह है कि कानून किसी भी व्यक्ति के साथ भेद भाव नहीं करेगा और ये समान तरीके से लागू होता हैं। इसे कानून का नियम कहा जाता है।Samanata Ka Adhikaar Samvidhan Ka Kehna Hai Ki Sarkar Kanoon Mein Saman Suraksha Ke Samaksh Bharat Mein Kisi Bhi Vyakti Se Samanata Se Inkar Nahi Karegi Iska Matlab Yeh Hai Ki Kanoon Kisi Bhi Vyakti Ke Saath Bhed Bhav Nahi Karega Aur Yeh Saman Tarike Se Laagu Hota Hain Ise Kanoon Ka Niyam Kaha Jata Hai
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समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार: - समानता और गैर-भेदभाव का सामान्य सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का एक मूल तत्व है। ... इस प्रकार, समान उपचार के अधिकार के लिए आवश्यक है कि सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के कानून के समक्ष समान व्यवहार किया जाए।
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समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार: - समानता और गैर-भेदभाव का सामान्य सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का एक मूल तत्व है। ... इस प्रकार, समान उपचार के अधिकार के लिए आवश्यक है कि सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के कानून के समक्ष समान व्यवहार किया जाए।Samanata Aur Gair Bhedbhav Ka Adhikaar - Samanata Aur Gair Bhedbhav Ka Samanya Siddhant Antar Rashtriya Manavadhikar Kanoon Ka Ek Mul Tatva Hai ... Is Prakar Saman Upchaar Ke Adhikaar Ke Liye Aavashyak Hai Ki Sabhi Vyaktiyon Ko Bina Kisi Bhedbhav Ke Kanoon Ke Samaksh Saman Vyavhar Kiya Jaye
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कानून से पहले समानता, जिसे इस कानून के तहत समानता, कानून की आंखों में समानता, या कानूनी समानता, के रूप में भी जाना जाता है, यह सिद्धांत है कि प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को कानून (समानता के सिद्धांत) द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए और सभी विषय हैं न्याय के समान कानूनों (उचित प्रक्रिया) के लिए।
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कानून से पहले समानता, जिसे इस कानून के तहत समानता, कानून की आंखों में समानता, या कानूनी समानता, के रूप में भी जाना जाता है, यह सिद्धांत है कि प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को कानून (समानता के सिद्धांत) द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए और सभी विषय हैं न्याय के समान कानूनों (उचित प्रक्रिया) के लिए।Kanoon Se Pehle Samanata Jise Is Kanoon Ke Tahat Samanata Kanoon Ki Aakhon Mein Samanata Ya Kanooni Samanata Ke Roop Mein Bhi Jana Jata Hai Yeh Siddhant Hai Ki Pratyek Swatantra Vyakti Ko Kanoon Samanata Ke Siddhant Dwara Saman Roop Se Vyavhar Kiya Jana Chahiye Aur Sabhi Vishay Hain Nyay Ke Saman Kanuno Uchit Prakriya Ke Liye
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समानता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17 और 18 में प्रदान किया गया एक महत्वपूर्ण और सार्थक अधिकार है। यह है अन्य सभी अधिकारों और स्वतंत्रताओं की मूल नींव, और गारंटी देता है निम्नलिखित: कानून से पहले समानता, सामाजिक समानता और सार्वजनिक क्षेत्रों के बराबर पहुंच, समानता सार्वजनिक रोजगार के मामलों, अस्पृश्यता का उन्मूलन,टाइटल का उन्मूलन ।
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समानता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17 और 18 में प्रदान किया गया एक महत्वपूर्ण और सार्थक अधिकार है। यह है अन्य सभी अधिकारों और स्वतंत्रताओं की मूल नींव, और गारंटी देता है निम्नलिखित: कानून से पहले समानता, सामाजिक समानता और सार्वजनिक क्षेत्रों के बराबर पहुंच, समानता सार्वजनिक रोजगार के मामलों, अस्पृश्यता का उन्मूलन,टाइटल का उन्मूलन ।Samanata Ka Adhikaar Samvidhan Ke Anuched 14, 15, 16, 17 Aur 18 Mein Pradan Kiya Gaya Ek Mahatvapurna Aur Sarthak Adhikaar Hai Yeh Hai Anya Sabhi Adhikaaro Aur Swatantrataon Ki Mul Neev Aur Guarantee Deta Hai Nimnlikhit Kanoon Se Pehle Samanata Samajik Samanata Aur Sarvajanik Kshetro Ke Barabar Pahunch Samanata Sarvajanik Rojgar Ke Mamlon Asprishyata Ka Unmulan Title Ka Unmulan
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समानता का अधिकार भारत के लोगों को पहला मौलिक अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 14-18 भारत के हर नागरिक के लिए यह अधिकार गारंटी देता है। समानता भारतीय लोकतंत्र के शानदार कोने-पत्थरों में से एक है। "अन्य संविधानों में आमतौर पर यह अनुच्छेद 14 में शामिल किया गया था। इस तरह के अधिकार को किसी व्यक्ति का नकारात्मक अधिकार माना जाता था, जिसे सार्वजनिक कार्यालयों या स्थानों या सार्वजनिक मामलों में आम तौर पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
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समानता का अधिकार भारत के लोगों को पहला मौलिक अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 14-18 भारत के हर नागरिक के लिए यह अधिकार गारंटी देता है। समानता भारतीय लोकतंत्र के शानदार कोने-पत्थरों में से एक है। "अन्य संविधानों में आमतौर पर यह अनुच्छेद 14 में शामिल किया गया था। इस तरह के अधिकार को किसी व्यक्ति का नकारात्मक अधिकार माना जाता था, जिसे सार्वजनिक कार्यालयों या स्थानों या सार्वजनिक मामलों में आम तौर पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।Samanata Ka Adhikaar Bharat Ke Logon Ko Pehla Maulik Adhikaar Hai Samvidhan Ke Anuched 14-18 Bharat Ke Har Nagarik Ke Liye Yeh Adhikaar Guarantee Deta Hai Samanata Bhartiya Loktantra Ke Shandar Kone Pattharon Mein Se Ek Hai Anya Sanvidhanon Mein Aamtaur Par Yeh Anuched 14 Mein Shamil Kiya Gaya Tha Is Tarah Ke Adhikaar Ko Kisi Vyakti Ka Nakaratmak Adhikaar Mana Jata Tha Jise Sarvajanik Kaaryaalayon Ya Sthanon Ya Sarvajanik Mamlon Mein Aam Taur Par Bhedbhav Nahi Kiya Jana Chahiye
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समानता क्यों जरूरी है बहुत ही सिंपल सा क्वेश्चन है रब को मन से सोच कर देखें इक्वल की हर एक व्यक्ति को सामान्य तौर पर जीने का अधिकार है हर एक व्यक्ति जो इंसान है और कोई और भी किसी से लेकर लाइव से लाइव ...
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समानता क्यों जरूरी है बहुत ही सिंपल सा क्वेश्चन है रब को मन से सोच कर देखें इक्वल की हर एक व्यक्ति को सामान्य तौर पर जीने का अधिकार है हर एक व्यक्ति जो इंसान है और कोई और भी किसी से लेकर लाइव से लाइव कर रहा है इस तरह की इज्जत दी जा रही है वैसे दूसरे लोगों को भी दी जाने बहुत जरूरी है क्योंकि हर एक व्यक्ति इंसान हैं सभी से प्लेटफार्म पर हैं सब कुछ सही इज्जत दी जानी चाहिए थी क्या किसी को नीचा दिखाते हैं किसी को ऊंचा दिखाते हैं कहीं भी हद तक जायज नहीं हैSamanata Kyon Zaroori Hai Bahut Hi Simple Sa Question Hai Rub Ko Man Se Soch Kar Dekhen Equal Ki Har Ek Vyakti Ko Samanya Taur Par Jeene Ka Adhikaar Hai Har Ek Vyakti Jo Insaan Hai Aur Koi Aur Bhi Kisi Se Lekar Live Se Live Kar Raha Hai Is Tarah Ki Izzat Di Ja Rahi Hai Waise Dusre Logon Ko Bhi Di Jaane Bahut Zaroori Hai Kyonki Har Ek Vyakti Insaan Hain Sabhi Se Platform Par Hain Sab Kuch Sahi Izzat Di Jani Chahiye Thi Kya Kisi Ko Nicha Dikhate Hain Kisi Ko Uncha Dikhate Hain Kahin Bhi Had Tak Jayaj Nahi Hai
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प्रमोबल भारत के लोगों को 'संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य' में भारत बनाने का गंभीर संकल्प घोषित करता है। संविधान के साथ संविधान के साथ प्रस्तावना अपनाया गया था। समाजवादी शब्द का भी बहुत महत्व है क्योंकि यह आर्थिक और सामाजिक समानता का तात्पर्य है।
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प्रमोबल भारत के लोगों को 'संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य' में भारत बनाने का गंभीर संकल्प घोषित करता है। संविधान के साथ संविधान के साथ प्रस्तावना अपनाया गया था। समाजवादी शब्द का भी बहुत महत्व है क्योंकि यह आर्थिक और सामाजिक समानता का तात्पर्य है।Pramobal Bharat Ke Logon Ko Samprabhu Samajwadi Dharmanirapeksh Loktantrik Ganrajya Mein Bharat Banane Ka Gambhir Sankalp Ghoshit Karta Hai Samvidhan Ke Saath Samvidhan Ke Saath Prastavna Apnaya Gaya Tha Samajwadi Shabdh Ka Bhi Bahut Mahatva Hai Kyonki Yeh Aarthik Aur Samajik Samanata Ka Tatparya Hai
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