क्या 2019 में BSP की सर्कार बन सकती है? ...

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इसकी कोई दूर तक संभावना तो फिलहाल नहीं दिखती है क्योंकि मायावती केवल यूपी में ही चुनाव लड़ रही हैं और बाहर में छिटपुट कहीं-कहीं 12 कैंडिडेट है तो मायावती की सरकार बन जाएगी अच्छा संस्था थोड़ा मुश्किल अतार्किक और संभावना और लोगों को लगता है कि नेताओं के समझौते करने से नीचे के लेवल पर समझाते हो जाते हैं ऐसा होता नहीं एक पार्टी दूसरे खिलाफ लंबे समय तक विरोध दर्ज कराती रही है उसके कार्य करता है एक दूसरे से सवाल करते रहे और केवल नेता के गठबंधन करने से सारे लोग का दिल मिल जाएगा या उनकी समरसता बन जाएगी या में सहयोग करने का एक कल्चर डेवलप हो जाएगा यह सोचना फिजूल है औरैया तार की गई है इसलिए ऐसा नहीं हो पाता है जिस पर जा रे गठबंधन इस बार भी हुए हैं जो अगर पहले से नहीं है तो उनके बीच में कोई सामान्य या एकरूपता या चुनाव अभियान में एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की स्थिति जिस जगह बीजेपी का कैंडिडेट रिलायंस की दूसरी पार्टियों के उम्मीदवार रहते हैं वहां बीजेपी का जोर लगता है क्योंकि उसको सरकार बनाने की सारी जवाबदेही उसी के ऊपर रहती इसलिए नीचे के लेवल पर नेताओं के मिलने के बावजूद बहुत संगठन के स्तर पर सकारात्मक काम नहीं हो पाता है इसलिए बहुत सारे चुनाव परिणाम मनांकू नहीं आते
इसकी कोई दूर तक संभावना तो फिलहाल नहीं दिखती है क्योंकि मायावती केवल यूपी में ही चुनाव लड़ रही हैं और बाहर में छिटपुट कहीं-कहीं 12 कैंडिडेट है तो मायावती की सरकार बन जाएगी अच्छा संस्था थोड़ा मुश्किल अतार्किक और संभावना और लोगों को लगता है कि नेताओं के समझौते करने से नीचे के लेवल पर समझाते हो जाते हैं ऐसा होता नहीं एक पार्टी दूसरे खिलाफ लंबे समय तक विरोध दर्ज कराती रही है उसके कार्य करता है एक दूसरे से सवाल करते रहे और केवल नेता के गठबंधन करने से सारे लोग का दिल मिल जाएगा या उनकी समरसता बन जाएगी या में सहयोग करने का एक कल्चर डेवलप हो जाएगा यह सोचना फिजूल है औरैया तार की गई है इसलिए ऐसा नहीं हो पाता है जिस पर जा रे गठबंधन इस बार भी हुए हैं जो अगर पहले से नहीं है तो उनके बीच में कोई सामान्य या एकरूपता या चुनाव अभियान में एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की स्थिति जिस जगह बीजेपी का कैंडिडेट रिलायंस की दूसरी पार्टियों के उम्मीदवार रहते हैं वहां बीजेपी का जोर लगता है क्योंकि उसको सरकार बनाने की सारी जवाबदेही उसी के ऊपर रहती इसलिए नीचे के लेवल पर नेताओं के मिलने के बावजूद बहुत संगठन के स्तर पर सकारात्मक काम नहीं हो पाता है इसलिए बहुत सारे चुनाव परिणाम मनांकू नहीं आते
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