भारत अभी भी स्वच्छ भारत क्यों नहीं है? ...

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भारत अभी भी स्वच्छ नहीं है उसकी शुरुआत में मेरे खुद से करूंगा क्योंकि हमारी एक तो ऐसी एक आदत रही है कहीं भी हमने तो कुछ लिया या फिर भी 10 दिन पड़ा है फिर भी यह हम नहीं करेंगे जैसे ही हुआ था खुद अपने हाथ साफ कर के कागज का छोटा का टुकड़ा अपनी जेब में रख लेते हैं यही हमारी पुरानी होती है खुद पूरी करनी होगी जब तक रहने वाले लोग काम शुरू नहीं करेंगे तब तक तो स्वच्छ हमारा घर जो है हमें सोच रखना होता है उसी तरह यह बताओ
भारत अभी भी स्वच्छ नहीं है उसकी शुरुआत में मेरे खुद से करूंगा क्योंकि हमारी एक तो ऐसी एक आदत रही है कहीं भी हमने तो कुछ लिया या फिर भी 10 दिन पड़ा है फिर भी यह हम नहीं करेंगे जैसे ही हुआ था खुद अपने हाथ साफ कर के कागज का छोटा का टुकड़ा अपनी जेब में रख लेते हैं यही हमारी पुरानी होती है खुद पूरी करनी होगी जब तक रहने वाले लोग काम शुरू नहीं करेंगे तब तक तो स्वच्छ हमारा घर जो है हमें सोच रखना होता है उसी तरह यह बताओ
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क्योंकि फिल्म भारत अभी भी स्वच्छ भारत नहीं है यह कहना अतिशयोक्ति होगा लेकिन क्योंकि किसी ने पहले से जो बिगड़ मंत्री जी के द्वारा या किसी के द्वारा संदेश देते हैं उसे आम जनता नहीं कर सकती ऐसे में हम सभी को एक साथ स्वच्छ भारत के निर्माण के लिए समानता का निर्गुण करना जरूरी होता है
क्योंकि फिल्म भारत अभी भी स्वच्छ भारत नहीं है यह कहना अतिशयोक्ति होगा लेकिन क्योंकि किसी ने पहले से जो बिगड़ मंत्री जी के द्वारा या किसी के द्वारा संदेश देते हैं उसे आम जनता नहीं कर सकती ऐसे में हम सभी को एक साथ स्वच्छ भारत के निर्माण के लिए समानता का निर्गुण करना जरूरी होता है
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स्वच्छ भारत मिशन है वह उसमें सबसे बड़ी जो बाधा है लोगों के अंदर अभिनीत की कमी है जागरूकता की कमी है जो तेल और लोगों को जागरूकता आएगी तो स्वच्छ भारत मिशन अपने हंड्रेड परसेंट सौ परसेंट लक्ष्य को प्राप्त करेगा अगर यूरोपियन कंट्रीज को देखा जाए जो यूरोप के देश हैं तो वहां के लोगों के अंदर सिविक सेंस हमारे यहां पर बहुत अधिक है इसलिए वहां स्वच्छता और इन सब चीजों को लेकर काफी लोग अवेयर हैं उनको लगता है कि यह हमारा देश है हमारा शहर है हमारा मोहल्ला है कैसे साफ रखना भारत में यह नहीं है भारत में थोड़ा सा लोगों के अंदर जागरूकता भी है वह अपना घर तो साफ रखते हैं लेकिन गली में कूड़ा और गंदगी है तो सबसे पहला काम ही गवर्नमेंट के लेबल पर और नॉन गवर्नमेंट एजेंसीज के माध्यम से एनजीओ के माध्यम से दूसरे तरीकों के माध्यम से सारे चाहिए तो लेकिन लोगों को जागरूक करना लोगों के अंदर इस तरह का सिविक सेंस नागरिकता बहुत बोलते हैं शायद तो नागरिकता बोल पैदा करना ज्यादा जरूरी है
स्वच्छ भारत मिशन है वह उसमें सबसे बड़ी जो बाधा है लोगों के अंदर अभिनीत की कमी है जागरूकता की कमी है जो तेल और लोगों को जागरूकता आएगी तो स्वच्छ भारत मिशन अपने हंड्रेड परसेंट सौ परसेंट लक्ष्य को प्राप्त करेगा अगर यूरोपियन कंट्रीज को देखा जाए जो यूरोप के देश हैं तो वहां के लोगों के अंदर सिविक सेंस हमारे यहां पर बहुत अधिक है इसलिए वहां स्वच्छता और इन सब चीजों को लेकर काफी लोग अवेयर हैं उनको लगता है कि यह हमारा देश है हमारा शहर है हमारा मोहल्ला है कैसे साफ रखना भारत में यह नहीं है भारत में थोड़ा सा लोगों के अंदर जागरूकता भी है वह अपना घर तो साफ रखते हैं लेकिन गली में कूड़ा और गंदगी है तो सबसे पहला काम ही गवर्नमेंट के लेबल पर और नॉन गवर्नमेंट एजेंसीज के माध्यम से एनजीओ के माध्यम से दूसरे तरीकों के माध्यम से सारे चाहिए तो लेकिन लोगों को जागरूक करना लोगों के अंदर इस तरह का सिविक सेंस नागरिकता बहुत बोलते हैं शायद तो नागरिकता बोल पैदा करना ज्यादा जरूरी है
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जेटली ने किस गांव में जो शिक्षा शिक्षा और रोजगार शिक्षा और रोजगार और सड़क वाली काली मैया का जो है वह सब पीरा जो कजरा कजरा कजरा कजरा करने का मतलब के दूसरे अप्रैल को कैसे किया जाता है कि को जलाना है कि उसको संसाधन है वह जितना चाहिए स्वच्छता तो बहुत कुछ तो सफल हो रही है चित्र में कुछ मुझे कुछ क्षेत्रों में तो यह भी धीरे-धीरे अगर इतने करे लगातार में लगे रहे तो स्वच्छता सफल हो जाएगा कुछ भारत का जो अभियान है यह एक बड़ा एक दिन में बहुत विदेशी जो भी है वह अपना चीज है थोड़ा सा और अच्छा गुप्ता का बनता है देख यह सब अपने नागरिकों की जवाबदारी है बबीता की बातें
जेटली ने किस गांव में जो शिक्षा शिक्षा और रोजगार शिक्षा और रोजगार और सड़क वाली काली मैया का जो है वह सब पीरा जो कजरा कजरा कजरा कजरा करने का मतलब के दूसरे अप्रैल को कैसे किया जाता है कि को जलाना है कि उसको संसाधन है वह जितना चाहिए स्वच्छता तो बहुत कुछ तो सफल हो रही है चित्र में कुछ मुझे कुछ क्षेत्रों में तो यह भी धीरे-धीरे अगर इतने करे लगातार में लगे रहे तो स्वच्छता सफल हो जाएगा कुछ भारत का जो अभियान है यह एक बड़ा एक दिन में बहुत विदेशी जो भी है वह अपना चीज है थोड़ा सा और अच्छा गुप्ता का बनता है देख यह सब अपने नागरिकों की जवाबदारी है बबीता की बातें
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एक्सपेरिमेंट किया गया जिसमें एक कमरे में 10 लोगों को बिठाया क्या उनमें से 9 लोग एक्टिंग कर रहे थे और जो दसवां व्यक्ति था उसको यह नहीं पता था कि बाकी लोग एक्टिंग कर रहे हैं तो 1 आदमी भारी से बैग लेकर अंदर घुसता है और नीचे उसके हाथ से नीचे गिर जाता है वैसे एक्टिंग करते हैं जैसे कि उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता इनवेरिएबली जो बनता है वह भी वही बता दिखाता है यह पेमेंट जब अकेले में किया जाता है तो 3 में से एक व्यक्ति फौरन मदद करता है स्वच्छता अभियान का भी कुछ ऐसा ही रिएक्शन है दूसरों को देखकर हर कोई यही सोचता है कि मेरे एक अकेले से क्या फर्क पड़ता करना लोंग चॉकलेट के रहर में करें तो 10 आदमी कहता मेरे उठाने से बिना फेंकने से क्या फर्क पड़ता है चलो मैं भी फेंक देता हूं कि मेरे ना फेंकने से अखिलेश थोड़ा से सफाई रहेगी इस वजह से देश की यह हाल है जब तक हर भारतीय देश को अपना घर नहीं मानता भारत का जो स्वच्छ अभियान हो सकता फुल नहीं हो सकता स्वच्छ भारत अभियान है इसके नसीब करने के और भी कारण यह है कि गवर्नमेंट कापूस चूहे टॉयलेट बनाने में था 9 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट घरों और पब्लिक प्लेसिस ने बनाई गई है लेकिन शोर नहीं किया गया कि पानी का सप्लाई तथा सफाई सही तरह से हो जाए उसमें तो अब आधे से ज्यादा जो टॉयलेट्स है पिछले 3 साल से खाली पड़े हैं अन्य न्यूज़ पड़े हैं दूसरों की मैनेजमेंट नहीं किया जा रहा सही तरीके से कलेक्शन अभी भी उसी पुल उल्टे सीधे तरीके से किया जा रहा है जहां क्रिएशन नहीं होता छटाई नहीं होती की साईकिल के नाम पर जो जाती है वह थोड़ी बहुत दस परसेंट रीसायकल होते हैं वेस्ट प्रोसेसिंग के लिए फंक्शन नहीं है हजार्ड मैनेजमेंट नहीं ठीक से होता जैसे गाजीपुर जैसी इंसीडेंट होती रहती है और जब तक कि अवेयरनेस नहीं क्रिएट होता स्वच्छ भारत नहीं हो सकता और जब तक हर एक भारतीय अपने आप अंदर से उसमें स्वच्छता कि वह नहीं आती तब तक
एक्सपेरिमेंट किया गया जिसमें एक कमरे में 10 लोगों को बिठाया क्या उनमें से 9 लोग एक्टिंग कर रहे थे और जो दसवां व्यक्ति था उसको यह नहीं पता था कि बाकी लोग एक्टिंग कर रहे हैं तो 1 आदमी भारी से बैग लेकर अंदर घुसता है और नीचे उसके हाथ से नीचे गिर जाता है वैसे एक्टिंग करते हैं जैसे कि उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता इनवेरिएबली जो बनता है वह भी वही बता दिखाता है यह पेमेंट जब अकेले में किया जाता है तो 3 में से एक व्यक्ति फौरन मदद करता है स्वच्छता अभियान का भी कुछ ऐसा ही रिएक्शन है दूसरों को देखकर हर कोई यही सोचता है कि मेरे एक अकेले से क्या फर्क पड़ता करना लोंग चॉकलेट के रहर में करें तो 10 आदमी कहता मेरे उठाने से बिना फेंकने से क्या फर्क पड़ता है चलो मैं भी फेंक देता हूं कि मेरे ना फेंकने से अखिलेश थोड़ा से सफाई रहेगी इस वजह से देश की यह हाल है जब तक हर भारतीय देश को अपना घर नहीं मानता भारत का जो स्वच्छ अभियान हो सकता फुल नहीं हो सकता स्वच्छ भारत अभियान है इसके नसीब करने के और भी कारण यह है कि गवर्नमेंट कापूस चूहे टॉयलेट बनाने में था 9 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट घरों और पब्लिक प्लेसिस ने बनाई गई है लेकिन शोर नहीं किया गया कि पानी का सप्लाई तथा सफाई सही तरह से हो जाए उसमें तो अब आधे से ज्यादा जो टॉयलेट्स है पिछले 3 साल से खाली पड़े हैं अन्य न्यूज़ पड़े हैं दूसरों की मैनेजमेंट नहीं किया जा रहा सही तरीके से कलेक्शन अभी भी उसी पुल उल्टे सीधे तरीके से किया जा रहा है जहां क्रिएशन नहीं होता छटाई नहीं होती की साईकिल के नाम पर जो जाती है वह थोड़ी बहुत दस परसेंट रीसायकल होते हैं वेस्ट प्रोसेसिंग के लिए फंक्शन नहीं है हजार्ड मैनेजमेंट नहीं ठीक से होता जैसे गाजीपुर जैसी इंसीडेंट होती रहती है और जब तक कि अवेयरनेस नहीं क्रिएट होता स्वच्छ भारत नहीं हो सकता और जब तक हर एक भारतीय अपने आप अंदर से उसमें स्वच्छता कि वह नहीं आती तब तक
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किस देश की सरकार अरबों रुपए खर्च कर गई हो पब्लिक तक भेजने के लिए पुलक सागर करोड़ों अरबों रुपए खर्च कर रही है क्या आप टॉयलेट में जाकर प्रेस को कैसे रखा जा सकता बहुत प्रयास तो हुआ है रोकथाम तो हुई है लेकिन आप तो बिल्कुल नहीं करेंगे और क्या अरबों करोड़ों रुपए पब्लिक भेजने में
किस देश की सरकार अरबों रुपए खर्च कर गई हो पब्लिक तक भेजने के लिए पुलक सागर करोड़ों अरबों रुपए खर्च कर रही है क्या आप टॉयलेट में जाकर प्रेस को कैसे रखा जा सकता बहुत प्रयास तो हुआ है रोकथाम तो हुई है लेकिन आप तो बिल्कुल नहीं करेंगे और क्या अरबों करोड़ों रुपए पब्लिक भेजने में
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यह तो यह स्वच्छ भारत नहीं है इसलिए क्योंकि यह आम पब्लिक ही बात है आम पब्लिक जब तक नहीं करेगी तब तक तब तक सारे लोग मिलकर इस को स्वच्छता अभियान को उसको चलाएंगे सारे लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे तोता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझेंगे वेतन
यह तो यह स्वच्छ भारत नहीं है इसलिए क्योंकि यह आम पब्लिक ही बात है आम पब्लिक जब तक नहीं करेगी तब तक तब तक सारे लोग मिलकर इस को स्वच्छता अभियान को उसको चलाएंगे सारे लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे तोता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझेंगे वेतन
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