मुझमें बहुत ज़्यादा इन्फ़िरीऑरिटी काम्प्लेक्स है। इससे मुझे बाहर की दुनिया से क़दम मिलाने में मुश्किलें आ रही है। मैं इसे कैसे ठीक करूँ? ...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंटरसिटी कांपलेक्स पहले तो मैं आपको यह बता दूं कि इन सिटी कॉन्प्लेक्स कोई डिसेबिलिटी नहीं है यदि कोई अंधा है या बहरा है या गूंगा है तो वह एक डिसेबिलिटी है या एक स्पेशल एबिलिटी है विकास अंधे होने पर आप...
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इंटरसिटी कांपलेक्स पहले तो मैं आपको यह बता दूं कि इन सिटी कॉन्प्लेक्स कोई डिसेबिलिटी नहीं है यदि कोई अंधा है या बहरा है या गूंगा है तो वह एक डिसेबिलिटी है या एक स्पेशल एबिलिटी है विकास अंधे होने पर आपकी बाकी सेंसस काफी स्ट्रॉन्ग हो जाते हैं वह रोने पर आपके दूसरे सेंड से ज्यादा सॉन्ग हो जाते स्पेशल एबिलिटी और डिसेबिलिटी हाउ वे वैल्यू कॉलेज इन सिटी कॉन्प्लेक्स ऐसा कुछ नहीं है इन सिटी कॉन्प्लेक्स सिर्फ ऐसे थॉट प्रोसेस का एक गहरा है जिसमें आप सोचते हैं कि आप लोगों से कम है तो अगर यह सिर्फ थॉट प्रोसेस की वजह से है तू इसको चेंज करना तो बहुत ही दी है अगर आप अपना जस्ट थॉट प्रोसेस चेंज कर दें कि मैं दूसरों से कम नहीं हूं तो आपका इंफिनिटी कांपलेक्स एकदम से चला जाएगा मैं मानती हूं कि आप सोचते हो कि नहीं है मेरे अंदर तो यह कमी है तो फिर तो इंफिनिटी कॉन्प्लेक्स रहेगा ही तू वैसी दूसरे टाइप की कमी दूसरे लोगों में है जिसे मुझ में कमी है कि मैं मेरी मॉम जितना अच्छा खाना नहीं बना सकती तो मुझे मेरी मॉम सन सिटी कंपलेक्स नहीं होना चाहिए ना खुद नैनो की मत किसी की सबसे अच्छी भी हूं तो हर व्यक्ति किसी न किसी चीज में ऊपर नीचे रहेगा उसमें आपको यह नहीं सोचना है कि आप सबसे नीचे हैं आप अपने आप को प्रोत्साहन दीजिए कि मैं मैं दूसरी चीजों में अच्छा हूं मैं दूसरे की से अच्छी करता हूं तो फिर मुझे लोगों से दबना क्यों है मुझे लोगों के सामने लोग क्यों फील करना है आज जब आप यह विचार रखने लगेंगे आपका इंटरव्यू कॉन्प्लेक्स धीरे धीरे चला जाएगा
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इंटीरियर सी कॉन्प्लेक्स आपका अपना बनाया हुआ नहीं है लोगों के विचार है जो अपने उधार लिए तो हम उठाते हैं जब हम अपनी इमेज दूसरों के बोले हुए शब्दों से या विचारों से या उनके व्यक्त किए हुए जवानों से हम अप...
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इंटीरियर सी कॉन्प्लेक्स आपका अपना बनाया हुआ नहीं है लोगों के विचार है जो अपने उधार लिए तो हम उठाते हैं जब हम अपनी इमेज दूसरों के बोले हुए शब्दों से या विचारों से या उनके व्यक्त किए हुए जवानों से हम अपने आप को ऐसा समझते हैं यह बनाते हैं सभी वहीं पर थे कंपलीट दी जाती है और दूसरा कि हम कंपेयर करने लग जाते हैं अपने आप को दूसरों से जबकि हमें भूल जाते हैं कि हमारे अंदर जो हैं कुछ ऐसे विचार हैं कुछ ऐसे संगठित विचारधारा में काम करने के तरीके इसमें हम हर चीज में उसकी कंडीशन में ना रखें बल्कि अपने आप को अपने आने वाले एप्लीकेशन में आपकी तरह से फिट कर रहे हो कि सपना को आगे बढ़ा रहे हैं
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इंफेरियारिटी कंपलेक्स यानी कि अपने आप को किसी दूसरे से कम समझना बिना जाने पर रखे हुए इसे कहते हैं 3rd कंप्यूटर क्वेश्चन यह प्रॉब्लम आती है और यह पुराण शिव आपकी सॉल्व कर सकते हैं अपने खुद के लिए आप शीश...
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इंफेरियारिटी कंपलेक्स यानी कि अपने आप को किसी दूसरे से कम समझना बिना जाने पर रखे हुए इसे कहते हैं 3rd कंप्यूटर क्वेश्चन यह प्रॉब्लम आती है और यह पुराण शिव आपकी सॉल्व कर सकते हैं अपने खुद के लिए आप शीशे में खड़ी हुई है रोज सुबह बोलिए कि ऊपर वाले ने क्या चीज बनाएंगे वह ऊपर वाले ने क्या चीज बनाई है ऐसा कौन सा काम है जो भी चीज नहीं कर सकती रोज सुबह अपने आप को यह शीशे में खड़े होकर बोलिए देखिए आपको कितनी हिम्मत मिलती है और सबसे बड़ी चीज इंफेरियारिटी कंपलेक्स को दूर करने के लिए है एक बेसिक प्रिंसिपल ऑफ लाइफ सेटिस्फेक्शन आफ एक्सेप्ट कीजिए जब आप एक्सेप्ट करेंगे कि आप ऐसे हैं जैसे भी हैं तो आपको जो कनफ्लिक्ट है सिर्फ के साथ दूसरे की इमेज के साथ वह खत्म हो जाए और जैसे ही है कांटेक्ट खत्म होगा अब ऑटोमेटिकली अपने आपको कॉन्फिडेंट महसूस करना स्टार्ट करेंगे क्योंकि आपने एक्सेप्ट कर लिया सिर्फ खुद को खुद का बेंचमार्क लेकर चलिए ना कि सामने वाले को या किसी और को ऑटोमेटिकली आप इंप्रूव करते रहेंगे और आपको इनफीरियर रोटी कंपलेक्स टोटली खत्म हो जाएगा
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क्या आप मुझे बता सकती है कि शेर और चीते में कौन इंटीरियर और कौन सी पीरियड है जी हां दोनों की अपनी-अपनी प्लेस है वैसे ही हम जो ह्यूमंस है कोई भी इंसान दूसरे इंसान से से मिले नहीं है कि उसकी सारी चीजें ...
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क्या आप मुझे बता सकती है कि शेर और चीते में कौन इंटीरियर और कौन सी पीरियड है जी हां दोनों की अपनी-अपनी प्लेस है वैसे ही हम जो ह्यूमंस है कोई भी इंसान दूसरे इंसान से से मिले नहीं है कि उसकी सारी चीजें सेम हो तो हम कंपैरिजन करते ही क्यों हैं तो सबसे पहले लॉजी के लिए आप अपने आप को यह समझाओ कि आपको अपने आप को किसी से प्यार करने की कोई जरूरत नहीं है आप इस दुनिया में यूनिक को जो खास बात आप में है वह आप में ही है और अगर किसी और में कुछ है वह आप में नहीं दी है तो कोई दिक्कत नहीं है आपके पास भी कुछ स्पेशल जरूर होगा उसे पहचानो अपने लिए कुछ एफर्मेशंस लिखो कि मैं बहुत अच्छी हूं मैं यू नहीं हूं और जो भी आप अपने बारे में जाते हो जिस भी फील्ड में आप हो उसमें आपके अंदर क्या क्या खास बात है उसको लिखो और दिन रात सुबह शाम अपने दिमाग में बार-बार बार-बार उसी बात को दोहरा हो और कुछ ही दिनों में आपको अपने अंदर अंदर तिल होना शुरू हो जाएगा
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आपका दिन सिटी कॉन्प्लेक्स है किसी और का दिया हुआ होता है बचपन में मां बाप जो होते हैं खासतौर पर जब माय माय जो होते हैं कुछ जो दिन में समझदारी नहीं होती है फिर जानबूझकर करती है तो उनका जो मेंटल मेकअप ह...
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आपका दिन सिटी कॉन्प्लेक्स है किसी और का दिया हुआ होता है बचपन में मां बाप जो होते हैं खासतौर पर जब माय माय जो होते हैं कुछ जो दिन में समझदारी नहीं होती है फिर जानबूझकर करती है तो उनका जो मेंटल मेकअप है वह लोकेशन करंट होता है वह बैलेंस नहीं होता है तो वह अपने बच्चों पर अपने बस स्टेशन से निकालती है बेटियों को कहती है कि तुम काली हो मोटी हो वाले से रखो ऐसे बैठे ऐसे मत हंसो जोर से मत बोलो या फिर तुम मां तुम्हें वो कोई गुड नहीं है तुम्हें यह नहीं आता वह नहीं आता तो उसे क्या होता कि एक तरह का लाइक कोई कमी के साथ बच्चे बड़े होते हैं तो वह कमी जब हम विक्रम टीनएजर्स तो तब वह बहुत खलता है और तब जाकर इंसान जो है उनको यह टॉम जिसको हम बोलते हैं सिटी कॉन्प्लेक्स फोन में आ जाता है जबकि यह सब जो है यह सब बाहर बाहर से आया हुआ थॉट होता है आप मेरी फ्रेंड कंपलेक्स नहीं है क्योंकि आप जैसे भी हो अगर आप कॉन्फिडेंट हो आपका जो ज्ञान है वह लोगों तक पहुंच रहा हो आप क्सक्स फुल हो तो यह सब चीजें मैटर नहीं करती हैं लाइफ में तो आपको चाहिए कि अगर आप का लुक बदल ना हो तो अपने हेयरस्टाइल अपने कपड़े अपना वार्डरोब अपनी नॉलेज को चेंज कीजिए फिर कोर्स लीजिए आपको लगता है कोई कमी है उसका पूरा कीजिए और किसी की बातों पर ना जाइए बिग अस आप जो है वह आप जानती हैं आपको पूरा हक है कि अपनी जिंदगी आराम से हंसते हुए सक्सेसफुल तरीके से जिन्हें बाहर के लोग हैं वह भी काफी लोग इसमें परेशान है जो कभी यह पड़ाव को जेल के आगे पहुंचते कोई भी ऐसा नहीं है जो पैदाइशी डिस्क्राइब कंप्यूटर पर रही हो कि सब की सब देखें परेशानी आती है बस उसे कैसे खेलते हैं और आगे कैसे बढ़ते हैं दूसरों को हम क्या ज्ञान है सीख देते हैं उस पर वारंट है लाइफ तो प्लीज आप दूसरों की बात बताइए आपने कोई कमी नहीं है जहां पर भी आपको लगता है कि कोई कमी है उसको अपडेट कीजिए और अपने आपको एक बेहतर इंसान बनाई है बहुत जल्द आप कोई प्रॉब्लम सॉल्व हो जाए अगर नहीं होता है तो प्लीज सीएसआई कॉलेजेस एंड प्रॉब्लम
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इन सिटी कंपलेक्स बेनी हीन भावना नकारात्मक भावना यानी चीजों के साथ कंफर्ट महसूस ना करना यह सेक्सी समस्या इन ब्यूटी कांपलेक्स ब्यूटी कांपलेक्स बेसिकली हमारे स्वयं के द्वारा यह हमारे आसपास के लोगों के द्...
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इन सिटी कंपलेक्स बेनी हीन भावना नकारात्मक भावना यानी चीजों के साथ कंफर्ट महसूस ना करना यह सेक्सी समस्या इन ब्यूटी कांपलेक्स ब्यूटी कांपलेक्स बेसिकली हमारे स्वयं के द्वारा यह हमारे आसपास के लोगों के द्वारा हमारे अंदर आ जाती है लोग हमें इन्फ्यूजर या कम कम तरह होते हैं या हम खुद अपने आप को कम तो रिवैल्यूड करते हैं और अपने आप को छोटा साबित कर दें ऐसा समझते हैं कि हमारे अंदर कम पावर से दूसरों से हम हम वह नहीं कर सकते जो दूसरे कर सकते हैं तो इन सिटी कंपलेक्स बेसिकली पूरी तरह से आत्मविश्वास की कमी होना है यानी कि हम अपने अंदर हम अपने ऊपर ही विश्वास नहीं करते हैं हम अपनी एक्जिस्टेंस को ही हम अपने अस्तित्व को ही नकार देते हैं तो हम हमें सबसे पहले यह विश्वास करना होगा हमारा भी अस्तित्व है हमारे हमारे भी सकता है हमारे बॉडी की भी पागल है तो हम अक्सर से अंदर सबसे पहले अपने अंदर आत्मविश्वास जगाएं और यह सोचे कि आप किसी से कमतर नहीं है क्योंकि ईश्वर या प्रकृति ने किसी के साथ अन्याय नहीं किया है सबको एक समान हो सकती है जब भी हम पैदा होते हैं सब एक समान ही होते हैं धीरे-धीरे हम जब ग्रुप होते हैं तो हमारे अंदर उसी हिसाब से पॉलिश होती रहते हैं और ग्रुप होते रहते नर्चर होकर हमारे अंदर शक्तियां आती रहती हैं यह हमारे आसपास के नए रसिया समाज के लोगों द्वारा हमारे गलत व्यवहार हमारा इन सिटी कंप्लीट का कारण बनता है तो इसको धीरे-धीरे ओवर कम करना चाहिए हमारे अंदर कॉन्फिडेंस हमें विश्वास से गाना चाहिए अपने अंदर अपने आप को मोटिवेट करना चाहिए और इन सिटी कंप्यूटर इसका केवल एक कारण नकारात्मक नेगेटिविटी तो आपके अंदर जो भी नेगेटिव थी इसकी वजह से ही सब है तो आपको ज्यादा से ज्यादा पोस्ट ओं रहना है नेगेटिव लोगों से दूर रहना है पोस्टर उनके पास है
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अगर बहुत ज्यादा इंफिनिटी कॉन्प्लेक्स है तो मतलब बहुत कॉन्शियस हैं आप और इससे नाचुली बाहर की दुनिया में कदम रखने में मुश्किल आएगी तो इसके लिए यह है कि अच्छे महापुरुष है जो भी आज गांधीजी है विवेकानंद है...
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अगर बहुत ज्यादा इंफिनिटी कॉन्प्लेक्स है तो मतलब बहुत कॉन्शियस हैं आप और इससे नाचुली बाहर की दुनिया में कदम रखने में मुश्किल आएगी तो इसके लिए यह है कि अच्छे महापुरुष है जो भी आज गांधीजी है विवेकानंद है रामकृष्ण परमहंस इन की किताबें पढ़े कि यह लोग अपनी जिंदगी में कैसे आगे बढ़े जैसे महात्मा गांधी टेबल शुरू में बहुत ज्यादा इतने होशियार नहीं थे यह मतलब उनमें वह महापुरुष वाली बात नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने किस तरह से जिंदगी में क्या किताबें पढ़कर किस तरह से सफलता पाई है तो इस तरह का कॉन्प्लेक्स तो होना नहीं चाहिए क्योंकि कॉन्प्लेक्स आना मतलब नेगेटिविटी आना और बात का नेगेटिविटी आने से काम अच्छा नहीं होगा उसे सफलता नहीं मिलेगी तो सबसे बेस्ट है थोड़ी देर में डिटेल शंकर ना अच्छी किताबें पढ़ना इंटेलिजेंट है आदर्श है जो कुछ बने हैं उनसे बातें करना उनसे बातें करने में बहुत कुछ पता चलता है कि क्या कैसे विचार है उनके विचारों को पढ़ना इन सब चीजों से अंदर की इंफेरियारिटी कंपलेक्स एक दम निकल जाएगी हमारे विचारों में भी शुद्धता आएगी हमारे विचार में कॉन्फिडेंस आएगा कि जब कॉन्फिडेंस आ जाएगा उसके बाद में फिर सफलता है हम किसी से भी बात नहीं बात कर सकते हैं इसलिए यह सारी चीजें अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ने से अच्छे लेक्चर सुनना बड़े लोगों के लेक्चर सुनना इन सब से अंदर की मूर्ति कॉन्पलेक्स एकदम खत्म हो जाएगी
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