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मुक्ति और मोकष में क्या अन्तर है? ...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नशा मुक्ति काश के रो-रोकर तड़पकर प्राण त्यागने से मिल सकती नहीं मिलती है बहुत महंगी है अगर इतनी में भी मिल जाती कि कोई वेदना में छटपटा करो के प्राण त्याग दें और मुक्त हो जाय तो भी मुक्ति सस्ती थी ऐसे भी नहीं मिलती कैसे पाओगे मुक्ति का तो एक ही तरीका है एक एक करके अपने बंधनों को पहचानो और काटते चलो रोने तड़पने बरसे कुछ और नहीं परिवेदना समझता हूं अपनी वेदना समझता हूं चल सकते हो क्या अनुभव करता हूं लेकिन यह भी जानता हूं कि यह वेतन अधिकांशतः व्यर्थ आंसू मत बनाओ नादान बनाओ चलाओ नहीं कल तो नहीं संयमित रहकर अपने दर्द को अपनी ताकत बनाओ आंसुओं से तो सिर्फ गाल की लेकिन आज चाहिए तुम्हें अपनी बेटियां पर लानी है कोई वेदना का सार्थक उपयोग हसनपुर पुरी रखता हूं एक दल पर तुम्हारे दर्द से यह था लेकिन फिर भी यही कहूंगा कि जो कर रहे हो इसीलिए ज्ञान आवश्यक है भावनाओं का आवेग बल है तो ज्ञान उस पल को सही दिशा दी थी इसीलिए शास्त्रों का अध्ययन जरूरी है ताकि तुम्हारे भीतर की बेचैन ऊर्जा को सही दिशा दी जा सके सही दिशा नहीं दोगे तभी तो की बेचैनी तुम्हें खा जाएगी ऐसा तुमने लिखा है कुछ-कुछ वैसा ही हो भी जाएगा आज नहीं तो कल यूं ही दुख में मल्लिका में अवसाद में जान दे ही दोगे या नहीं दोगे दिए जाओगे जाओगे तू जीना भी अच्छा ही रहेगा यह बात सबके लिए सब पर लागू होती है उर्जा है प्रकार की उसका सदुपयोग करो तो उस घटना को सुखदेव को व्यर्थ मत जाने दो दुख का ही इस्तेमाल कर दो दुख के मूल को काटने के लिए जैसे सांप के जहर का इस्तेमाल होता है सांप का जहर उतारने के लिए और भी तरीका भी नहीं तो को काटने का मीठा खाने में बिहार तुक तुक गो भाग समझकर कल्लू यादव को लपक लपक लपक लपक मैं कह रहा हूं पगलू बुक बारूद है उसका इस्तेमाल करो सब जगजीवन फटा पुराना अनावश्यक है गा दो उसको करो विस्फोट बेचैनी बेकरारी बेसबाब नहीं होती कोई बहुत पहले मैंने कहा था कि तेरा परम का पैगाम होती है पैगाम आया है उसको पढ़ो रोना पीटना बहुत हुआ हंस पूछो साफ-साफ पड़ो क्या कहा जा रहा है इसीलिए यह ग्रंथ हो इसीलिए आदि शंकराचार्य के साथ हो मनुष्य में खासतौर पर स्त्रियों में भावुकता तो होती है भावुकता माने गांव की उर्जा उसी भावुकता को अगर ज्ञान की दिशा मिल जाए तो फिर कुछ सार्थक होता है अन्यथा वह भावुकता भावुक व्यक्ति को ही भारी पड़ती है
नशा मुक्ति काश के रो-रोकर तड़पकर प्राण त्यागने से मिल सकती नहीं मिलती है बहुत महंगी है अगर इतनी में भी मिल जाती कि कोई वेदना में छटपटा करो के प्राण त्याग दें और मुक्त हो जाय तो भी मुक्ति सस्ती थी ऐसे भी नहीं मिलती कैसे पाओगे मुक्ति का तो एक ही तरीका है एक एक करके अपने बंधनों को पहचानो और काटते चलो रोने तड़पने बरसे कुछ और नहीं परिवेदना समझता हूं अपनी वेदना समझता हूं चल सकते हो क्या अनुभव करता हूं लेकिन यह भी जानता हूं कि यह वेतन अधिकांशतः व्यर्थ आंसू मत बनाओ नादान बनाओ चलाओ नहीं कल तो नहीं संयमित रहकर अपने दर्द को अपनी ताकत बनाओ आंसुओं से तो सिर्फ गाल की लेकिन आज चाहिए तुम्हें अपनी बेटियां पर लानी है कोई वेदना का सार्थक उपयोग हसनपुर पुरी रखता हूं एक दल पर तुम्हारे दर्द से यह था लेकिन फिर भी यही कहूंगा कि जो कर रहे हो इसीलिए ज्ञान आवश्यक है भावनाओं का आवेग बल है तो ज्ञान उस पल को सही दिशा दी थी इसीलिए शास्त्रों का अध्ययन जरूरी है ताकि तुम्हारे भीतर की बेचैन ऊर्जा को सही दिशा दी जा सके सही दिशा नहीं दोगे तभी तो की बेचैनी तुम्हें खा जाएगी ऐसा तुमने लिखा है कुछ-कुछ वैसा ही हो भी जाएगा आज नहीं तो कल यूं ही दुख में मल्लिका में अवसाद में जान दे ही दोगे या नहीं दोगे दिए जाओगे जाओगे तू जीना भी अच्छा ही रहेगा यह बात सबके लिए सब पर लागू होती है उर्जा है प्रकार की उसका सदुपयोग करो तो उस घटना को सुखदेव को व्यर्थ मत जाने दो दुख का ही इस्तेमाल कर दो दुख के मूल को काटने के लिए जैसे सांप के जहर का इस्तेमाल होता है सांप का जहर उतारने के लिए और भी तरीका भी नहीं तो को काटने का मीठा खाने में बिहार तुक तुक गो भाग समझकर कल्लू यादव को लपक लपक लपक लपक मैं कह रहा हूं पगलू बुक बारूद है उसका इस्तेमाल करो सब जगजीवन फटा पुराना अनावश्यक है गा दो उसको करो विस्फोट बेचैनी बेकरारी बेसबाब नहीं होती कोई बहुत पहले मैंने कहा था कि तेरा परम का पैगाम होती है पैगाम आया है उसको पढ़ो रोना पीटना बहुत हुआ हंस पूछो साफ-साफ पड़ो क्या कहा जा रहा है इसीलिए यह ग्रंथ हो इसीलिए आदि शंकराचार्य के साथ हो मनुष्य में खासतौर पर स्त्रियों में भावुकता तो होती है भावुकता माने गांव की उर्जा उसी भावुकता को अगर ज्ञान की दिशा मिल जाए तो फिर कुछ सार्थक होता है अन्यथा वह भावुकता भावुक व्यक्ति को ही भारी पड़ती है
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुक्ति रोता है सांसारिक लोग और को सेंड संपूर्ण कर्म होता है उसे उसे पढ़ते हो जाना मुक्ति कल आता है मुक्ति को सिद्धि कहते हैं मुख्य मुक्ति प्राप्त हो जाती है तो वह शादी हो जाती है लेकिन तुम मुझ होता है और सांसारिक जम्मू से प्राप्त कर लेता है इंसान तो सांसारिक दुनिया में लौटकर दोबारा नहीं होता वह अमर अशरीरी अविनाशी हो जाता है उसे दर्द दुख पीड़ा आदि का जो होता है वह सब नष्ट हो जाता है वह सांसारिक जीवन से संलिप्त नहीं रहते हैं
मुक्ति रोता है सांसारिक लोग और को सेंड संपूर्ण कर्म होता है उसे उसे पढ़ते हो जाना मुक्ति कल आता है मुक्ति को सिद्धि कहते हैं मुख्य मुक्ति प्राप्त हो जाती है तो वह शादी हो जाती है लेकिन तुम मुझ होता है और सांसारिक जम्मू से प्राप्त कर लेता है इंसान तो सांसारिक दुनिया में लौटकर दोबारा नहीं होता वह अमर अशरीरी अविनाशी हो जाता है उसे दर्द दुख पीड़ा आदि का जो होता है वह सब नष्ट हो जाता है वह सांसारिक जीवन से संलिप्त नहीं रहते हैं
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मुक्ति और मोक्ष में बेसिकली अंतर यह होता है कि मुक्ति टेंपरेरी होती है और मौखिक तरीके से हमेशा के लिए होता है
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