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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कुछ भगवान से मेरा भरोसा उठ चुका है या फिर भगवान या लो की शक्तियों के मैं विश्वास नहीं करता वैसे तुम्हारी मां ने खुद के लिए यह नहीं कह रहा कि मेरी इच्छा नहीं पूरी हुई या फिर मेरे को सपने को साकार नहीं मैं हार गया ऐसी बातों से निमाई रिलेटिव होकर नहीं बोल रहा हूं आज के समाज में जिस हिसाब से हिंसात्मक गतिविधियां बढ़ रही हैं आप जानते हैं कि बच्चियों के साथ जोड़ी पूरा यह भगवान होते तो सारी गतिविधियां नहीं होती इसलिए मैं नहीं मानता हो के बाद फ्रेंड
कुछ भगवान से मेरा भरोसा उठ चुका है या फिर भगवान या लो की शक्तियों के मैं विश्वास नहीं करता वैसे तुम्हारी मां ने खुद के लिए यह नहीं कह रहा कि मेरी इच्छा नहीं पूरी हुई या फिर मेरे को सपने को साकार नहीं मैं हार गया ऐसी बातों से निमाई रिलेटिव होकर नहीं बोल रहा हूं आज के समाज में जिस हिसाब से हिंसात्मक गतिविधियां बढ़ रही हैं आप जानते हैं कि बच्चियों के साथ जोड़ी पूरा यह भगवान होते तो सारी गतिविधियां नहीं होती इसलिए मैं नहीं मानता हो के बाद फ्रेंड
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रशन है भगवान है या नहीं यह मनुष्य खुद की सूची ने की प्रक्रिया है भगवान को तलाश किया कर रखो रहा है और प्रयास में हैं और उसमें लगा हुआ है तो यह प्रश्न भाव सही बनता है और एक उत्कंठा में जो प्रश्न आता कि भगवान है या नहीं यह दूसरे पर्सनल टीका प्रसन्न हो जाता है तो दोनों में से आप जिस दीवारों में पहले आपको फूल वाले भाव बताना चाहिए था जो खोज में लगे रहते हैं कि भगवान है या नहीं तो कुछ लक्षण के कारण हमारे अंदर कृष्ण आता है कि ऐसे तत्वों की विवेचना करते हैं यानी एक ऐसी सत्या संज्ञा को जानना चाहते हैं जो हम उससे बात भी किए हैं और एक शाब्दिक विषय का एक भाव हो रहा है प्रैक्टिकल के दौर में हूं थोड़ा सा बहुत जटिल अवस्था में आ जाता है क्योंकि यह करोड़ों के सोच का प्रशन है भगवान है या नहीं तो इनमें से बहुत से लोगों को भी ऐसे विश्वास अवधारणा प्राप्त होती है किसी भी बल से विवेक बुद्धि की बस से या कोई और विशेष घटनाक्रम के एवज में और यह व्यक्तिगत अनुभव होती का दायरा हो जाता है जिसको शेयर करना भी बहुत ही खूबसूरत वाली बात हो जाती है क्योंकि 1 बुद्धि के रास्ते के लिए कोई सिद्धांत प्रवचन शालिनी मंत्री साहब अगर उनकी का रास्ता बताते हैं दूसरे उस स्तर में नहीं आता तो वही सोच अलग हो जाती है वह कहेगा कि प्रत्युत्तर में के बरम आत्मक संख्या में वृद्धि करेगा भगवान है या नहीं यह वास्तव में शुरुआती भूमिका होती है जो लोग इस सर्च पॉइंट पर आते हैं कि भगवान है नहीं तो वह बॉस 7 विज्ञान और अपने मन का निरीक्षण करते हैं और अपने अंत करण से ही सिद्ध करते भगवान है या नहीं और ऐसी कुछ पर्टिकुलर चीज नहीं है कि किसी को भी उंगली पकड़कर दिखा देंगे रा बाबा और दूसरा कोई माने ऐसा नहीं हो पाता है खरबों लोग खड़े होंगे इस सारे के लिए आत्मा की गहराई के अंतिम चरण के इस जगत का एक प्रश्न बनता है उस ईश्वर की शक्ति से ही सारी सूचनाएं और प्रक्रिया चल रही है और उन प्रक्रियाओं में हम अवश्य बस मतलब वश में नहीं होता तो उसके धारों से हम प्रभावित रहते हैं उसकी ऊर्जा में गोते लगाते रहते हैं यह ऊर्जा स्रोत से क्षेत्र से उसके अंदर का दायरा केंद्र बिंदु मिलता है और जो यहां तक कि पहुंच बना लेते हैं तब वह इस बारे में सलमान लगाता है लेकिन उस ईश्वर से भी परे आगे प्रकृति होती जड़ मिटी दुआओं की सुविधा केंद्र जब प्रवेश होता है साक्षी करण के मूल देश में प्रवेश होने की क्षमता करता है जो साक्षात करण भाव केंद्र ज्ञान होता है उसमें जो पृष्ठ होता है तो उसके हाथ में अनुसंधान का विषय बन जाता है और इश्वर व्यक्त करने की चीज नहीं है एक बार भी लाकर खींच के आगे खड़ा कर दो पांच बनानी पड़ती है और जब हम इतने सूक्ष्म नेशन में चलते हैं तो इतने प्रकृतिक चीजों का ज्ञान हो जाता हमारे अंदर उपलब्ध हो जाता है कि आम आम आदमियों में अगर आप पर चर्चा करेंगे या कुछ विशेष एडवांस में बात करेंगे उनकी सोच और दिमाग के ऊपर बात करेंगे तो वह समझेगा कि वास्तव में आप कितने पहुंचे हुए लोग तो यह अलग पर्सनैलिटी है और बहुत ऊंचाई की प्रकृति है इसमें शरम अपने आत्मा में ही परिपूर्णता का बहुत जाने की प्रक्रिया आती है और इतनी संकेत से आप समझ सकते हैं जब आपको जानकारी पड़ती जाती है और आप दूसरे को एक क्षण के चित्र से ध्यान लगाने से उसका ब्यौरा आपके पास मौजूद होने लगता है तो आपकी संवेदना चेतन मंडल बहुत प्रखर और नमक रहती है अनुमति से स्तर पर आने पर भगवान है भगवान का मतलब एक ऐसा जो करता फंक्शन निहित है यानी कि उसके द्वारा रचना रचना का जो मूल स्त्रोत बिंदु है वह चित्र युक्त जानता सब कुछ है तो भौतिकवादी माना जाता है क्योंकि वो सोचते कीजिए पकड़ते पकड़ते पर आक्रमण करती रहती है प्रकृति के वशीभूत है जब किस तत्व के बारे में बताया है 9 से आग जला सकते ना पानी गीला कर सकता है ना भाई तू सुना सकती है ना दुनिया का कोई ऐसा शख्स को चेतन कर सकें सही है विवेचना है बहुत जबरदस्त है 10 उत्पत्ति क्वींस है जिसके द्वारा यह सारी चीज 29 हो जाती है उसको उसको और मुलायम को यह सब करती थी जो बताती है चित्र में उसका आभामंडल है इस पर एक बहुत शुक्रिया जाती है यह सारा संसार जगत हर प्राणी माता की कोई एक सत्ता जरूर है जो उसकी स्थापना करता है लेकिन जो लोग राजनीतिक में या कोई और मौत इस प्रक्रिया में विजय हुए लोग हैं उसका यह विषय बिल्कुल एक परसेंट नहीं रहता यह फिजूल की चीज है इतना ही नहीं समाज पालक दिशा देना चाहते हैं उसने की कटाक्ष बच्चन के अंदर रहती है तो उसका परिणाम वही जानते विश्रांति तो नहीं लोगे पागल पावर की अनुभूति होती है मान के चलो आप भी हैं ईश्वर हैं तो आप भी हैं आप उसके बाद आप की मातृभाषा पर डिपेंड होता है अब से लाभ ले सकते नहीं दे सकते एक बोनस प्वाइंट है जो कि स्वतंत्रता सभी जीवो को उसने तेरा लेकिन परिणाम ही रास्ता को बताता कि कौन गलत है कौन सही था हमें क्या चना करके रहना चाहिए तनाव के कारण निकल जाए और हम किसी संकट में आ जाए उसके बाद हमेशा कबीर दास जी का बहुत अच्छा आता है दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे का हो तो मैं यही विवेचना कर रहा हूं रन कारण किन बातों की गहराई से आप मंथन करेंगे तो आपको सचिन जवाब आप कल करेंगे धन्यवाद
प्रशन है भगवान है या नहीं यह मनुष्य खुद की सूची ने की प्रक्रिया है भगवान को तलाश किया कर रखो रहा है और प्रयास में हैं और उसमें लगा हुआ है तो यह प्रश्न भाव सही बनता है और एक उत्कंठा में जो प्रश्न आता कि भगवान है या नहीं यह दूसरे पर्सनल टीका प्रसन्न हो जाता है तो दोनों में से आप जिस दीवारों में पहले आपको फूल वाले भाव बताना चाहिए था जो खोज में लगे रहते हैं कि भगवान है या नहीं तो कुछ लक्षण के कारण हमारे अंदर कृष्ण आता है कि ऐसे तत्वों की विवेचना करते हैं यानी एक ऐसी सत्या संज्ञा को जानना चाहते हैं जो हम उससे बात भी किए हैं और एक शाब्दिक विषय का एक भाव हो रहा है प्रैक्टिकल के दौर में हूं थोड़ा सा बहुत जटिल अवस्था में आ जाता है क्योंकि यह करोड़ों के सोच का प्रशन है भगवान है या नहीं तो इनमें से बहुत से लोगों को भी ऐसे विश्वास अवधारणा प्राप्त होती है किसी भी बल से विवेक बुद्धि की बस से या कोई और विशेष घटनाक्रम के एवज में और यह व्यक्तिगत अनुभव होती का दायरा हो जाता है जिसको शेयर करना भी बहुत ही खूबसूरत वाली बात हो जाती है क्योंकि 1 बुद्धि के रास्ते के लिए कोई सिद्धांत प्रवचन शालिनी मंत्री साहब अगर उनकी का रास्ता बताते हैं दूसरे उस स्तर में नहीं आता तो वही सोच अलग हो जाती है वह कहेगा कि प्रत्युत्तर में के बरम आत्मक संख्या में वृद्धि करेगा भगवान है या नहीं यह वास्तव में शुरुआती भूमिका होती है जो लोग इस सर्च पॉइंट पर आते हैं कि भगवान है नहीं तो वह बॉस 7 विज्ञान और अपने मन का निरीक्षण करते हैं और अपने अंत करण से ही सिद्ध करते भगवान है या नहीं और ऐसी कुछ पर्टिकुलर चीज नहीं है कि किसी को भी उंगली पकड़कर दिखा देंगे रा बाबा और दूसरा कोई माने ऐसा नहीं हो पाता है खरबों लोग खड़े होंगे इस सारे के लिए आत्मा की गहराई के अंतिम चरण के इस जगत का एक प्रश्न बनता है उस ईश्वर की शक्ति से ही सारी सूचनाएं और प्रक्रिया चल रही है और उन प्रक्रियाओं में हम अवश्य बस मतलब वश में नहीं होता तो उसके धारों से हम प्रभावित रहते हैं उसकी ऊर्जा में गोते लगाते रहते हैं यह ऊर्जा स्रोत से क्षेत्र से उसके अंदर का दायरा केंद्र बिंदु मिलता है और जो यहां तक कि पहुंच बना लेते हैं तब वह इस बारे में सलमान लगाता है लेकिन उस ईश्वर से भी परे आगे प्रकृति होती जड़ मिटी दुआओं की सुविधा केंद्र जब प्रवेश होता है साक्षी करण के मूल देश में प्रवेश होने की क्षमता करता है जो साक्षात करण भाव केंद्र ज्ञान होता है उसमें जो पृष्ठ होता है तो उसके हाथ में अनुसंधान का विषय बन जाता है और इश्वर व्यक्त करने की चीज नहीं है एक बार भी लाकर खींच के आगे खड़ा कर दो पांच बनानी पड़ती है और जब हम इतने सूक्ष्म नेशन में चलते हैं तो इतने प्रकृतिक चीजों का ज्ञान हो जाता हमारे अंदर उपलब्ध हो जाता है कि आम आम आदमियों में अगर आप पर चर्चा करेंगे या कुछ विशेष एडवांस में बात करेंगे उनकी सोच और दिमाग के ऊपर बात करेंगे तो वह समझेगा कि वास्तव में आप कितने पहुंचे हुए लोग तो यह अलग पर्सनैलिटी है और बहुत ऊंचाई की प्रकृति है इसमें शरम अपने आत्मा में ही परिपूर्णता का बहुत जाने की प्रक्रिया आती है और इतनी संकेत से आप समझ सकते हैं जब आपको जानकारी पड़ती जाती है और आप दूसरे को एक क्षण के चित्र से ध्यान लगाने से उसका ब्यौरा आपके पास मौजूद होने लगता है तो आपकी संवेदना चेतन मंडल बहुत प्रखर और नमक रहती है अनुमति से स्तर पर आने पर भगवान है भगवान का मतलब एक ऐसा जो करता फंक्शन निहित है यानी कि उसके द्वारा रचना रचना का जो मूल स्त्रोत बिंदु है वह चित्र युक्त जानता सब कुछ है तो भौतिकवादी माना जाता है क्योंकि वो सोचते कीजिए पकड़ते पकड़ते पर आक्रमण करती रहती है प्रकृति के वशीभूत है जब किस तत्व के बारे में बताया है 9 से आग जला सकते ना पानी गीला कर सकता है ना भाई तू सुना सकती है ना दुनिया का कोई ऐसा शख्स को चेतन कर सकें सही है विवेचना है बहुत जबरदस्त है 10 उत्पत्ति क्वींस है जिसके द्वारा यह सारी चीज 29 हो जाती है उसको उसको और मुलायम को यह सब करती थी जो बताती है चित्र में उसका आभामंडल है इस पर एक बहुत शुक्रिया जाती है यह सारा संसार जगत हर प्राणी माता की कोई एक सत्ता जरूर है जो उसकी स्थापना करता है लेकिन जो लोग राजनीतिक में या कोई और मौत इस प्रक्रिया में विजय हुए लोग हैं उसका यह विषय बिल्कुल एक परसेंट नहीं रहता यह फिजूल की चीज है इतना ही नहीं समाज पालक दिशा देना चाहते हैं उसने की कटाक्ष बच्चन के अंदर रहती है तो उसका परिणाम वही जानते विश्रांति तो नहीं लोगे पागल पावर की अनुभूति होती है मान के चलो आप भी हैं ईश्वर हैं तो आप भी हैं आप उसके बाद आप की मातृभाषा पर डिपेंड होता है अब से लाभ ले सकते नहीं दे सकते एक बोनस प्वाइंट है जो कि स्वतंत्रता सभी जीवो को उसने तेरा लेकिन परिणाम ही रास्ता को बताता कि कौन गलत है कौन सही था हमें क्या चना करके रहना चाहिए तनाव के कारण निकल जाए और हम किसी संकट में आ जाए उसके बाद हमेशा कबीर दास जी का बहुत अच्छा आता है दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे का हो तो मैं यही विवेचना कर रहा हूं रन कारण किन बातों की गहराई से आप मंथन करेंगे तो आपको सचिन जवाब आप कल करेंगे धन्यवाद
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यहां पर प्रश्न दिया है कि भगवान है या नहीं भगवान का मतलब है हम सब को बनाने वाला हम सब को बनाने वाला तो मां और बाप है इसीलिए भगवान है क्योंकि हमें बनाने वाला तो मां-बाप है और मां-बाप को तो भगवान बनाया है भगवान किसी को दिखता नहीं है लेकिन भगवान का नाम है इसीलिए तो सब उसे मानते हैं और पूछते हैं और भगवान को याद करते हैं इसीलिए भगवान होता है लेकिन जो कोई मानते हैं उसे और कोई भी नहीं मानते हैं बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं कि भगवान को याद करते हैं और कोई ऐसा है कि सोचता है कि भगवान है या नहीं जब भगवान नहीं है तो बुरे वक्त में हमें बोलते हैं कि यदि भगवान हमारा साथ देगा लेकिन जो लोग हैं वह बोलते हैं भगवान तो है नहीं लेकिन बहुत सारे लोग हैं जो भगवान को मानते हैं वह तो मानते ही हैं और जो नहीं मानते हैं वह उस पर डिपेंड करता है
यहां पर प्रश्न दिया है कि भगवान है या नहीं भगवान का मतलब है हम सब को बनाने वाला हम सब को बनाने वाला तो मां और बाप है इसीलिए भगवान है क्योंकि हमें बनाने वाला तो मां-बाप है और मां-बाप को तो भगवान बनाया है भगवान किसी को दिखता नहीं है लेकिन भगवान का नाम है इसीलिए तो सब उसे मानते हैं और पूछते हैं और भगवान को याद करते हैं इसीलिए भगवान होता है लेकिन जो कोई मानते हैं उसे और कोई भी नहीं मानते हैं बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं कि भगवान को याद करते हैं और कोई ऐसा है कि सोचता है कि भगवान है या नहीं जब भगवान नहीं है तो बुरे वक्त में हमें बोलते हैं कि यदि भगवान हमारा साथ देगा लेकिन जो लोग हैं वह बोलते हैं भगवान तो है नहीं लेकिन बहुत सारे लोग हैं जो भगवान को मानते हैं वह तो मानते ही हैं और जो नहीं मानते हैं वह उस पर डिपेंड करता है
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देखिए सर यह तो आम क्वेश्चन हो गया हर कोई काफी सालों से यही पूछता सुनता कहता है कि भगवान है या नहीं पाता है कोई धर्मात्मा से कोई धर्म का व्यक्ति के तहत जो नास्तिक होते हैं इतनी शक्ति तुम्हारे अंदर भी होनी चाहिए अपने पास बुलाओ एक्सेप्ट
देखिए सर यह तो आम क्वेश्चन हो गया हर कोई काफी सालों से यही पूछता सुनता कहता है कि भगवान है या नहीं पाता है कोई धर्मात्मा से कोई धर्म का व्यक्ति के तहत जो नास्तिक होते हैं इतनी शक्ति तुम्हारे अंदर भी होनी चाहिए अपने पास बुलाओ एक्सेप्ट
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