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मुझे दूसरों की बात का बहुत ही जल्दी बुरा लग जाता है, ऐसा क्यों होता है? ...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सारे होते हो और वह नहीं बोलता बुरा लगता है क्यों करता है उसी ऐसा कर दिया था कि कौन सी मुद्रा सबसे प्यारा कलर कौन सा लगता है पहन रखा हरी मिर्ची लग गई तो फिर यार तुम्हारी जो जितना ज्यादा किशन MP3
सारे होते हो और वह नहीं बोलता बुरा लगता है क्यों करता है उसी ऐसा कर दिया था कि कौन सी मुद्रा सबसे प्यारा कलर कौन सा लगता है पहन रखा हरी मिर्ची लग गई तो फिर यार तुम्हारी जो जितना ज्यादा किशन MP3
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नहीं यह बात है साधारण सी बातें कॉमन सी बात है हर इंसान के साथ ऐसी होता है बुरा लगने का मतलब क्या हुआ कि आप कैसा महसूस करते हैं आपके अंदर आ क्या फीलिंग चाहती है कि मुंह स्टेट आपका क्या हो जाता है वह सारी बातें सुनने का या उस आशीष वेस्ट में रहने पर जहां पर आप का किसी के साथ इंटरेक्शन है या फिर इंटरेक्शन होने के बाद भी जवाब कर आते हैं और आप सोचते हैं उसके बारे में आपको अच्छा नहीं लगता होगा जी यह तो आपकी ही नहीं है जो आपको ऐसा महसूस कराती है ऐसा क्यों होता है क्योंकि भाई आप कुछ सोचते हैं कुछ कहते हैं और फिर अचानक से कहीं और से कुछ और आता है तो आपको लगता है कि यह थोड़ा मिसमैच है आपके हिसाब से नहीं है तो जब चीजें मेरे हिसाब से नहीं होती तो हमको लगता है कि नहीं यार यह तो सही नहीं है अब हिसाब से कुछ भी हो सकता है क्या उसका बोलने का तरीका अच्छा नहीं हुआ हो सकता है उसका एग्जांपल सही नहीं है हो सकता है जिस कौन टेक्स्ट मैसेज बात को बोली गई है वह सही नहीं हो सकते टाइमिंग चैन बहुत सारी चीज़ें हो सकती हैं और हमारे अंदर जो दिमाग गया हमारा वह बहुत सारे कैलकुलेशन करके हम एक नतीजे पर पहुंच जाता है तो वह नतीजा अगर यह बोलता है कि नहीं यह ठीक नहीं है तो उसके बाद आप उसे फील करते हैं आप महसूस करते हैं तो अगर आपका दिमाग इस परिपेक्ष में देखता है और बताता है अंतर स्पष्ट करता है और बताते हैं कि नहीं नीनी यह सही नहीं है ऐसा है वैसा है जो कि आप एक तरीके के हिंदी विषय को एक तरीके का इंटरनेशनल है तो आपकी सोच आपका व्यवहार आपका 11 का वह उनके साथ जरूरी नहीं है कि हर चीज में हर समय मैच करेगा ही करेगा तो बॉडी बनाई हुई है कि आप एक अलग इंसान एक अलग इंसान है आपके नजरिए अलग है आपका मेजरिंग इंस्ट्रूमेंट अलग है आपके संस्कार आपके विचार सब कुछ अलग है तो जैसे नेता अगर वहां पर किसी के साथ मैच मैच तू चीज है आपको अच्छी नहीं लगी यार आपको देखने के लिए बुरा लगेगा अब आप यह देखे कि मैं बुरा लगते रहे मुझे तो मैं और मैं उसी स्थिति में रहूं वह सही है या फिर आप समझ जाएं सतर्क हो जाएं कि मुझे क्या ऐसे इंसान के साथ ऐसे देश में रहना चाहिए या नहीं रहना चाहिए मेरी लिमिट क्या है मेरे दायरे क्या है कहां तक इसके साथ ही जाना चाहिए कहां तक नहीं जाना चाहिए क्या मुनासिब है क्या नहीं है यह सारी आप सोच लीजिए क्योंकि ताकि ऐसा ना हो कि बार-बार आपके हर एक इंटरेक्शन में आपको बुरा लगता है तो फायदा क्या आप ही देखिए कि आपके लिए सही क्या है और उस हिसाब से किसी एक तो यह हो गया दूसरा ही हो गया कि आप अपने आप को कैसे मैनेज करें भाई मेरे को तो उसके साथ रहना है क्योंकि काम पर चुनाव हो सकता है वह इंसान ऑफिस का हो मेरा क्लास का हो कहीं पर भी हो सकते पड़ोसी भी हो सकता है अब क्योंकि वहां पर रहने में अपने आप को अलग नहीं कर सकता या कर सकते तो आप यह देखिए की सबसे बेस्ट तरीका क्या होगा अपने आप को मैनेज करने का देखे कोई भी चीज जो होती है वह आपके बाहर होती है लेकिन आप उसे अनुभव अपने अंदर करते हैं तो आप यह देखें कि आप उसको कैसे अनुभव करना चाहते हैं एक सिंपल तरीका यह भी होता है कि आप मन में यह बना लें कि यह इंसान ऐसा है और इसकी बातों पर मुझे मुझे ज्यादा गोरिया ध्यान करने की जरूरत नहीं है सिंपल जेंट्स शर्ट
जी नहीं यह बात है साधारण सी बातें कॉमन सी बात है हर इंसान के साथ ऐसी होता है बुरा लगने का मतलब क्या हुआ कि आप कैसा महसूस करते हैं आपके अंदर आ क्या फीलिंग चाहती है कि मुंह स्टेट आपका क्या हो जाता है वह सारी बातें सुनने का या उस आशीष वेस्ट में रहने पर जहां पर आप का किसी के साथ इंटरेक्शन है या फिर इंटरेक्शन होने के बाद भी जवाब कर आते हैं और आप सोचते हैं उसके बारे में आपको अच्छा नहीं लगता होगा जी यह तो आपकी ही नहीं है जो आपको ऐसा महसूस कराती है ऐसा क्यों होता है क्योंकि भाई आप कुछ सोचते हैं कुछ कहते हैं और फिर अचानक से कहीं और से कुछ और आता है तो आपको लगता है कि यह थोड़ा मिसमैच है आपके हिसाब से नहीं है तो जब चीजें मेरे हिसाब से नहीं होती तो हमको लगता है कि नहीं यार यह तो सही नहीं है अब हिसाब से कुछ भी हो सकता है क्या उसका बोलने का तरीका अच्छा नहीं हुआ हो सकता है उसका एग्जांपल सही नहीं है हो सकता है जिस कौन टेक्स्ट मैसेज बात को बोली गई है वह सही नहीं हो सकते टाइमिंग चैन बहुत सारी चीज़ें हो सकती हैं और हमारे अंदर जो दिमाग गया हमारा वह बहुत सारे कैलकुलेशन करके हम एक नतीजे पर पहुंच जाता है तो वह नतीजा अगर यह बोलता है कि नहीं यह ठीक नहीं है तो उसके बाद आप उसे फील करते हैं आप महसूस करते हैं तो अगर आपका दिमाग इस परिपेक्ष में देखता है और बताता है अंतर स्पष्ट करता है और बताते हैं कि नहीं नीनी यह सही नहीं है ऐसा है वैसा है जो कि आप एक तरीके के हिंदी विषय को एक तरीके का इंटरनेशनल है तो आपकी सोच आपका व्यवहार आपका 11 का वह उनके साथ जरूरी नहीं है कि हर चीज में हर समय मैच करेगा ही करेगा तो बॉडी बनाई हुई है कि आप एक अलग इंसान एक अलग इंसान है आपके नजरिए अलग है आपका मेजरिंग इंस्ट्रूमेंट अलग है आपके संस्कार आपके विचार सब कुछ अलग है तो जैसे नेता अगर वहां पर किसी के साथ मैच मैच तू चीज है आपको अच्छी नहीं लगी यार आपको देखने के लिए बुरा लगेगा अब आप यह देखे कि मैं बुरा लगते रहे मुझे तो मैं और मैं उसी स्थिति में रहूं वह सही है या फिर आप समझ जाएं सतर्क हो जाएं कि मुझे क्या ऐसे इंसान के साथ ऐसे देश में रहना चाहिए या नहीं रहना चाहिए मेरी लिमिट क्या है मेरे दायरे क्या है कहां तक इसके साथ ही जाना चाहिए कहां तक नहीं जाना चाहिए क्या मुनासिब है क्या नहीं है यह सारी आप सोच लीजिए क्योंकि ताकि ऐसा ना हो कि बार-बार आपके हर एक इंटरेक्शन में आपको बुरा लगता है तो फायदा क्या आप ही देखिए कि आपके लिए सही क्या है और उस हिसाब से किसी एक तो यह हो गया दूसरा ही हो गया कि आप अपने आप को कैसे मैनेज करें भाई मेरे को तो उसके साथ रहना है क्योंकि काम पर चुनाव हो सकता है वह इंसान ऑफिस का हो मेरा क्लास का हो कहीं पर भी हो सकते पड़ोसी भी हो सकता है अब क्योंकि वहां पर रहने में अपने आप को अलग नहीं कर सकता या कर सकते तो आप यह देखिए की सबसे बेस्ट तरीका क्या होगा अपने आप को मैनेज करने का देखे कोई भी चीज जो होती है वह आपके बाहर होती है लेकिन आप उसे अनुभव अपने अंदर करते हैं तो आप यह देखें कि आप उसको कैसे अनुभव करना चाहते हैं एक सिंपल तरीका यह भी होता है कि आप मन में यह बना लें कि यह इंसान ऐसा है और इसकी बातों पर मुझे मुझे ज्यादा गोरिया ध्यान करने की जरूरत नहीं है सिंपल जेंट्स शर्ट
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखे इसका एक ही वजह इसकी हो सकती है कि आप इमोशनल ज्यादा है और किसी बात पर जल्दी से रिजेक्ट कर देते हैं सबकी अपनी अपनी सोच होती है क्या कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ बोलेगा आप कितनों की बात सुनते रहेंगे आप दूसरों की बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से ज्यादातर निकाल दीजिए तो फिर आपको बुरा नहीं लगेगा यहां पर किसी के मुंह पर पट्टी नहीं बन सकते हैं सब बोलने वाले हैं तो आपको अपनी मन की करनी चाहिए लेकिन जो अच्छा हो अपने और सब के लिए वही करना चाहिए और दूसरों की बातों को निकलेट करना चाहिए ऐसा अगर आप करने लगे कि बिंदास हो जाएगी एकदम लोग बोलते हैं दुनिया बोलती रहेगी मुझे क्या है इस तरह का एटीट्यूड जब आप अपने मिलेंगे तब आपको यह दूसरों की बातों का बुरा लगना बंद हो जाएगा
देखे इसका एक ही वजह इसकी हो सकती है कि आप इमोशनल ज्यादा है और किसी बात पर जल्दी से रिजेक्ट कर देते हैं सबकी अपनी अपनी सोच होती है क्या कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ बोलेगा आप कितनों की बात सुनते रहेंगे आप दूसरों की बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से ज्यादातर निकाल दीजिए तो फिर आपको बुरा नहीं लगेगा यहां पर किसी के मुंह पर पट्टी नहीं बन सकते हैं सब बोलने वाले हैं तो आपको अपनी मन की करनी चाहिए लेकिन जो अच्छा हो अपने और सब के लिए वही करना चाहिए और दूसरों की बातों को निकलेट करना चाहिए ऐसा अगर आप करने लगे कि बिंदास हो जाएगी एकदम लोग बोलते हैं दुनिया बोलती रहेगी मुझे क्या है इस तरह का एटीट्यूड जब आप अपने मिलेंगे तब आपको यह दूसरों की बातों का बुरा लगना बंद हो जाएगा
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सवाल है मुझे दूसरों की बात बहुत ही जल्दी बुरा लग जाता क्यों नहीं लगता है क्योंकि हम पहले से ही उसके प्रति भावना रख लेते हैं या मूल रूप से किसी कारणवश हम पूरा ठोक देते हैं कि यह पूरा वैसे ही है उसके हर बातों पर अविश्वसनीय स्थिति बनती है बनी रहती है और कितनी भी इंसान प्रिय बात का बुरा ही लगती है पेपर लेकिन बात काहे का महत्व होता है उसकी भावनाएं होती इन बातों को समझना चाहिए और बुरा लगता किसको है शाम को लग रहा है तो इसमें फायदा खुद का नहीं है नुकसान है ऐसी चीज होनी नहीं चाहिए कि हमें बुरा लगे अकाली बाद बुरा लगने से किसका फायदा किसका नुकसान है खुद अपने ज्ञान से समझना चाहिए और जब हम किसी चीज़ को आत्मसात कर लेते हैं उमेश को गहराई से अपने हृदय में उतार रखते हैं तो उसके पति का प्रभाव बहुत तेजी से मुंडे पड़ता है तो पहली बार तो अपना दिल दिमाग साफ कर लेना चाहिए और हमें अलग से अपने आपको एडवांस में बना कर रखना चाहिए अपनी खूबियों के प्रति अपने आप के प्रति ध्यान रखना चाहिए अपने प्रति रुझान रखना चाहिए आपको बुरा लगने की कोई दशा नहीं होती हमारी सोच और समझ का दायरा है उसको बदलना चाहिए शिव ही भलाई
सवाल है मुझे दूसरों की बात बहुत ही जल्दी बुरा लग जाता क्यों नहीं लगता है क्योंकि हम पहले से ही उसके प्रति भावना रख लेते हैं या मूल रूप से किसी कारणवश हम पूरा ठोक देते हैं कि यह पूरा वैसे ही है उसके हर बातों पर अविश्वसनीय स्थिति बनती है बनी रहती है और कितनी भी इंसान प्रिय बात का बुरा ही लगती है पेपर लेकिन बात काहे का महत्व होता है उसकी भावनाएं होती इन बातों को समझना चाहिए और बुरा लगता किसको है शाम को लग रहा है तो इसमें फायदा खुद का नहीं है नुकसान है ऐसी चीज होनी नहीं चाहिए कि हमें बुरा लगे अकाली बाद बुरा लगने से किसका फायदा किसका नुकसान है खुद अपने ज्ञान से समझना चाहिए और जब हम किसी चीज़ को आत्मसात कर लेते हैं उमेश को गहराई से अपने हृदय में उतार रखते हैं तो उसके पति का प्रभाव बहुत तेजी से मुंडे पड़ता है तो पहली बार तो अपना दिल दिमाग साफ कर लेना चाहिए और हमें अलग से अपने आपको एडवांस में बना कर रखना चाहिए अपनी खूबियों के प्रति अपने आप के प्रति ध्यान रखना चाहिए अपने प्रति रुझान रखना चाहिए आपको बुरा लगने की कोई दशा नहीं होती हमारी सोच और समझ का दायरा है उसको बदलना चाहिए शिव ही भलाई
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए जनरले ऐसा होता है कि हमें दूसरों की बात का बुरा लग जाता है इसका सिर्फ एक ही कारण होता है जब हमें कोई गाली देता है या फिर कुछ बुरा होता है बुरा बोलता है तो हम क्या करते हैं वह जो बोलता है हमें दिमाग ऐसा है कि जो इंसान बोलता है वह हमारा दिमाग वीडियो में तब्दील कर देता है मतलब जो भी आपको जो भी कुछ बोलता है वह सोचने लगते हो क्या ऐसा होता है ऐसा हो ऐसा वह करेगा ऐसा हमें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है
देखिए जनरले ऐसा होता है कि हमें दूसरों की बात का बुरा लग जाता है इसका सिर्फ एक ही कारण होता है जब हमें कोई गाली देता है या फिर कुछ बुरा होता है बुरा बोलता है तो हम क्या करते हैं वह जो बोलता है हमें दिमाग ऐसा है कि जो इंसान बोलता है वह हमारा दिमाग वीडियो में तब्दील कर देता है मतलब जो भी आपको जो भी कुछ बोलता है वह सोचने लगते हो क्या ऐसा होता है ऐसा हो ऐसा वह करेगा ऐसा हमें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है
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जैसे कि आप ऐसे नहीं दूसरों की बातों की जानकारी आपको दूर व्हाट्सएप
जैसे कि आप ऐसे नहीं दूसरों की बातों की जानकारी आपको दूर व्हाट्सएप
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स्कैंडल पेशेंस यानी धैर्य की कमी है आप अपने दायरे को बढ़ाइए आदमी नियंत्रित नियंत्रित करिए तो आपको लोगों की बातों पर चली गुस्सा नहीं आएगा
स्कैंडल पेशेंस यानी धैर्य की कमी है आप अपने दायरे को बढ़ाइए आदमी नियंत्रित नियंत्रित करिए तो आपको लोगों की बातों पर चली गुस्सा नहीं आएगा
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इसलिए होता है क्योंकि आप हर बातों को अपने दिल से ले लेते हैं मतलब कि हर बातों को गहराई से सोचते हैं कोई कुछ बोला था आप उनकी बातों को बार-बार याद करते बार बार सोचते हैं और अपने दिमाग को फिर से वही स्थिति में उसे सिचुएशन में बार-बार ले जाते हैं इस कारण से आपको आपकी मानसिकता में आपका यह प्रभाव पड़ता है इस वजह से आपको किसी की बात जब भी दूसरी बार वह आती है तो आपको तुरंत वह याद आ जाता है और आपके मुंह से निकल जाते हैं और इसी वजह से आपको बुरा लगता है इसका उपाय यह है कि आप सारी बातों को सीरियसली ना लें जो भी बात बोलता उसे एक हंसी मजाक के तौर पर ले जिससे क्या होगा कि आपको बुरा नहीं लगेगा और बातों को यदि लोग कुछ बोल रहे हैं तो उसका जवाब देना सीखे यदि आप जवाब नहीं देंगे तो हर बात आपको बुरा ही लेंगे
इसलिए होता है क्योंकि आप हर बातों को अपने दिल से ले लेते हैं मतलब कि हर बातों को गहराई से सोचते हैं कोई कुछ बोला था आप उनकी बातों को बार-बार याद करते बार बार सोचते हैं और अपने दिमाग को फिर से वही स्थिति में उसे सिचुएशन में बार-बार ले जाते हैं इस कारण से आपको आपकी मानसिकता में आपका यह प्रभाव पड़ता है इस वजह से आपको किसी की बात जब भी दूसरी बार वह आती है तो आपको तुरंत वह याद आ जाता है और आपके मुंह से निकल जाते हैं और इसी वजह से आपको बुरा लगता है इसका उपाय यह है कि आप सारी बातों को सीरियसली ना लें जो भी बात बोलता उसे एक हंसी मजाक के तौर पर ले जिससे क्या होगा कि आपको बुरा नहीं लगेगा और बातों को यदि लोग कुछ बोल रहे हैं तो उसका जवाब देना सीखे यदि आप जवाब नहीं देंगे तो हर बात आपको बुरा ही लेंगे
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दूसरों की बात का बुरा लग जाता है देखिए अगर कोई चीज पर जो है आप दोनों एक दूसरे को बुरा भला बोल रहा था वह तो मजाक होता है उसमें कोई प्रॉब्लम वाली बात नहीं है लेकिन अगर आपको कोई पर्सनल ही बुरा बोल रहा है तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए कोई इंसान अगर बुरा बोल रहा है वह बुरा है क्योंकि वह अपने मुंह से बुरी चीज निकाल रहा है आपने तो कुछ बुरा कहा कहा ना कुछ किया तो इसलिए इंसान अगर कुछ बुरा बोला तो वह इंसान बुरा होता है क्योंकि वह बुरी चीज कर रहा है इसलिए हमें कभी भी किसी चीज का बुरा नहीं मानना चाहिए उसको आराम सैंडल करना चाहिए और कोई कुछ बोल भी देता तो उसको कोई फर्क नहीं पड़ता है और कोई अगर चीज आपने खराब है या कोई चीज बुरी है वैसी की वैसी ही रहेगी या आपको भी ऐसा लगता है कि वह चीज बुरी है तो आप उसको चेंज कर सकते हैं सही कर सकते हैं अगर कोई आपको समझा रहा है तो वह बात अलग है अगर कोई पर्सनल ही आपको बुरा भला बोल रहा था उसके बुरा नहीं मानना क्योंकि वह चीज बुरी कर रहा है बॉस सीजन में बुरा बोल रहा है हम लोग तो कुछ बोल ही नहीं रहे करना चाहिए
दूसरों की बात का बुरा लग जाता है देखिए अगर कोई चीज पर जो है आप दोनों एक दूसरे को बुरा भला बोल रहा था वह तो मजाक होता है उसमें कोई प्रॉब्लम वाली बात नहीं है लेकिन अगर आपको कोई पर्सनल ही बुरा बोल रहा है तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए कोई इंसान अगर बुरा बोल रहा है वह बुरा है क्योंकि वह अपने मुंह से बुरी चीज निकाल रहा है आपने तो कुछ बुरा कहा कहा ना कुछ किया तो इसलिए इंसान अगर कुछ बुरा बोला तो वह इंसान बुरा होता है क्योंकि वह बुरी चीज कर रहा है इसलिए हमें कभी भी किसी चीज का बुरा नहीं मानना चाहिए उसको आराम सैंडल करना चाहिए और कोई कुछ बोल भी देता तो उसको कोई फर्क नहीं पड़ता है और कोई अगर चीज आपने खराब है या कोई चीज बुरी है वैसी की वैसी ही रहेगी या आपको भी ऐसा लगता है कि वह चीज बुरी है तो आप उसको चेंज कर सकते हैं सही कर सकते हैं अगर कोई आपको समझा रहा है तो वह बात अलग है अगर कोई पर्सनल ही आपको बुरा भला बोल रहा था उसके बुरा नहीं मानना क्योंकि वह चीज बुरी कर रहा है बॉस सीजन में बुरा बोल रहा है हम लोग तो कुछ बोल ही नहीं रहे करना चाहिए
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