भारत में लोग एजुकेटेड होते हुए भी कचरा क्यों फैलाते हैं ? ...

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मुझे लगता है यह एजुकेशन से ज्यादा आदत की बात है क्योंकि काफी सारी कंट्री कैसी है जिनकी एजुकेशन यही कहें लिटरेसी रेट है वह इंडिया से काफी कम है l लेकिन फिर भी वहां पर बहोत ज्यादा सफाई है भारत की अपेक्ष...
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मुझे लगता है यह एजुकेशन से ज्यादा आदत की बात है क्योंकि काफी सारी कंट्री कैसी है जिनकी एजुकेशन यही कहें लिटरेसी रेट है वह इंडिया से काफी कम है l लेकिन फिर भी वहां पर बहोत ज्यादा सफाई है भारत की अपेक्षा l तो मुझे लगता है कि कचरा फैलाना यह एक आदत है और उसे छुड़ाना आवश्यक है l इसके लिए जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया, शौचालय बनाने की योजना बनाई योजना काम करनी चाहिए l परेशानी है कि जो हमारे नेता हैं या ब्यूरोक्रेट्स है वह इन चीजों को प्रजेंट नहीं कर पाते हैं l ब्यूरोक्रेट्स तो अपने दम तक जहां तक कर सकते हैं कर लेते लेकिन नेता लोग नहीं कर पाते हैं l अब देखिए कोई जगह शौचालय बने उंगली के नए शौचालय में खड़ा है खड़ा नहीं हुआ जा सकता तो आदत हमें बनानी होगी l हमें एजुकेट होने पड़ेगा l इस तरह से आप कैसे बचा कर क्या करेंगे कि आप अपना शरीर खराब कर ले या अपनी आने वाली जनरेशन को खराब कर ले l शौचालय करने के लिए आप सोच नहीं बनाएंगे तो जो बीमारियां होंगी उसमें लाखों करोड़ों रुपए खर्च हो जायेंगे लेकिन हो सकता है आगे डेथ भी हो जाये lलेकिन वह चीज ना सोचते हो अपने 10,000 15,000 रुपये पर बचाकर पहुंचाने नहीं बनवाते हैं l मुझे लगता है यह चीजें थोड़ी परिवर्तित करने की आवश्यकता है और देश में सफाई का अभियान चल रहा है जिसे स्तर पर चल रहा है मुझे उम्मीद है l और मैं यही चाहता हूं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि जल्दी से जल्दी हमारा देश साफ हो और लोगों में आदत बनी सफाई रखने की l एजुकेट होनी चाहिए कि जैसे अपने घर को साफ रखते हैं वैसे हमारे देश को साफ रखें, हर व्यक्ति कोई भी हो आप और मैं हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम कचरा कहीं भी ना फेंके, कचरे के डिब्बे में डालें l इसके अलावा जो भी बेसिक चीजें आप कर सकते हैं बस वो कीजिए l आप अपना जिम्मेदारी से काम करेंगे पूरा देश सुधर जाएगा, धन्यवाद lMujhe Lagta Hai Yeh Education Se Jyada Aadat Ki Baat Hai Kyonki Kafi Saree Country Kaisi Hai Jinaki Education Yahi Kahen Literacy Rate Hai Wah India Se Kafi Kum Hai L Lekin Phir Bhi Wahan Par Bahut Jyada Safaai Hai Bharat Ki Apeksha L To Mujhe Lagta Hai Ki Kachra Faillana Yeh Ek Aadat Hai Aur Use Chhudaana Aavashyak Hai L Iske Liye Jo Pradhanmantri Narendra Modi Ji Ne Swach Bharat Abhiyan Chalaya Sauchalay Banane Ki Yojana Banai Yojana Kaam Karni Chahiye L Pareshani Hai Ki Jo Hamare Neta Hain Ya Bureaucrats Hai Wah In Chijon Ko Present Nahi Kar Paate Hain L Bureaucrats To Apne Dum Tak Jahan Tak Kar Sakte Hain Kar Lete Lekin Neta Log Nahi Kar Paate Hain L Ab Dekhie Koi Jagah Sauchalay Bane Ungali Ke Naye Sauchalay Mein Khada Hai Khada Nahi Hua Ja Sakta To Aadat Hume Banani Hogi L Hume Educate Hone Padega L Is Tarah Se Aap Kaise Bacha Kar Kya Karenge Ki Aap Apna Sharir Kharab Kar Le Ya Apni Aane Wali Generation Ko Kharab Kar Le L Sauchalay Karne Ke Liye Aap Soch Nahi Banayenge To Jo Bimariyan Hongi Usamen Laakhon Karodo Rupaiye Kharch Ho Jayenge Lekin Ho Sakta Hai Aage Death Bhi Ho Jaye Lekin Wah Cheez Na Sochte Ho Apne 10,000 15,000 Rupaye Par Bachakar Pahunchane Nahi Banvaate Hain L Mujhe Lagta Hai Yeh Cheezen Thodi Parivartit Karne Ki Avashyakta Hai Aur Desh Mein Safaai Ka Abhiyan Chal Raha Hai Jise Sthar Par Chal Raha Hai Mujhe Ummid Hai L Aur Main Yahi Chahta Hoon Bhagwan Se Prarthana Karta Hoon Ki Jaldi Se Jaldi Hamara Desh Saaf Ho Aur Logon Mein Aadat Bani Safaai Rakhne Ki L Educate Honi Chahiye Ki Jaise Apne Ghar Ko Saaf Rakhate Hain Waise Hamare Desh Ko Saaf Rakhen Har Vyakti Koi Bhi Ho Aap Aur Main Hamari Yeh Jimmedari Banti Hai Ki Hum Kachra Kahin Bhi Na Fenke Kachre Ke Dibbe Mein Daalein L Iske Alava Jo Bhi Basic Cheezen Aap Kar Sakte Hain Bus Vo Kijiye L Aap Apna Jimmedari Se Kaam Karenge Pura Desh Sudhar Jayega Dhanyavad L
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भारत में लोग एजुकेटेड तो हैं लेकिन अवेयर नहीं है l लोग जो है एजुकेटेड हैं उनमें यह अवेयरनेस नहीं है कि जो वह कचरा फैलाते हैं उसे उन्हें ही कभी ना कभी परेशानी का सामना करना पड़ेगा l क्योंकि कई बार हम ...
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भारत में लोग एजुकेटेड तो हैं लेकिन अवेयर नहीं है l लोग जो है एजुकेटेड हैं उनमें यह अवेयरनेस नहीं है कि जो वह कचरा फैलाते हैं उसे उन्हें ही कभी ना कभी परेशानी का सामना करना पड़ेगा l क्योंकि कई बार हम देखते हैं कि कार में बैठे हुए लोग अपनी गाड़ी में कुछ खाते हैं और जो रैपर या फिर छिलके होते हैं उसे सड़कों पर फेंक देते हैं यहां वहां जिससे गंदगी फैलती है l और अभी भी हमारे देश में बहुत सी ऐसी जनता लिखी नहीं है यानी कि अन एजुकेटेड है l तो उन्हें तो और भी बिल्कुल समझ नहीं है कि गंदगी फैलाने से कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है l तो सबसे पहले लोगों को जागरुक करने की जरूरत है उनके अंदर यह भावना पैदा हो कि अगर हम कहीं पर भी गंदगी फैलाएंगे तो इससे हमें ही नुकसान होगा l क्योंकि अगर हर इंसान ऐसा सोचा कि अगर हम यहां पर गंदगी फैला रहे हैं लेकिन हम यहां रहते नहीं है तो इसे हम क्यों साफ़ करें या फिर हमें क्या नुकसान होगा l तो इससे ऐसा हो जाएगा कि हर एक इंसान जहां से भी जाएगा वहां पर गंदगी उसे मिलेगी ही मिलेगी l तो वैसे तो पूरा शहर और हमारा पूरा देश गंदा हो जाएगा l तो मेरे मुताबिक सबसे पहले हर एक इंसान को यह बात अपने दिमाग में बिठा लेनी चाहिए कि यह जो हमारा देश है वह एक प्रकार से हमारा घर है और जिस प्रकार हम अपने घर को गंदा नहीं रखते हैं उसी प्रकार हमें हमारे देश को भी गंदा नहीं करना चाहिए l और जहां पर भी संभव हो हमें जो भी कचरा है उसे सही स्थान पर ही डालना चाहिए l और अगर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है तो उस कचरे को हम केरी करके रख सकते हैं और डस्टबिन जहां पर भी दिखे वहां पर ही उसे हमें फेंकना चाहिए l तो अगर हम थोड़ा सा अवेयरनेस दिखाएं तो धीरे-धीरे करके कुछ समय में हमारा देश पूरी तरह से साफ हो जाएगा और कहीं पर भी हमें कचरा देखने को नहीं मिलेगा जिससे सारी समस्याएं जो है गंदगी से रिलेटेड वह समाप्त होंगी lBharat Mein Log Educated To Hain Lekin Aveyar Nahi Hai L Log Jo Hai Educated Hain Unmen Yeh Awareness Nahi Hai Ki Jo Wah Kachra Failate Hain Use Unhen Hi Kabhi Na Kabhi Pareshani Ka Samana Karna Padega L Kyonki Kai Baar Hum Dekhte Hain Ki Car Mein Baithey Hue Log Apni Gaadi Mein Kuch Khate Hain Aur Jo Raipar Ya Phir Chilake Hote Hain Use Sadkon Par Fenk Dete Hain Yahan Wahan Jisse Gandagi Failati Hai L Aur Abhi Bhi Hamare Desh Mein Bahut Si Aisi Janta Likhi Nahi Hai Yani Ki An Educated Hai L To Unhen To Aur Bhi Bilkul Samajh Nahi Hai Ki Gandagi Phailane Se Kitni Pareshaaniyon Ka Samana Karna Padh Sakta Hai L To Sabse Pehle Logon Ko Jagaruk Karne Ki Zaroorat Hai Unke Andar Yeh Bhavna Paida Ho Ki Agar Hum Kahin Par Bhi Gandagi Failaenge To Isse Hume Hi Nuksan Hoga L Kyonki Agar Har Insaan Aisa Socha Ki Agar Hum Yahan Par Gandagi Faila Rahe Hain Lekin Hum Yahan Rehte Nahi Hai To Ise Hum Kyun Saaf Karen Ya Phir Hume Kya Nuksan Hoga L To Isse Aisa Ho Jayega Ki Har Ek Insaan Jahan Se Bhi Jayega Wahan Par Gandagi Use Milegi Hi Milegi L To Waise To Pura Sheher Aur Hamara Pura Desh Ganda Ho Jayega L To Mere Mutabik Sabse Pehle Har Ek Insaan Ko Yeh Baat Apne Dimag Mein Bitha Leni Chahiye Ki Yeh Jo Hamara Desh Hai Wah Ek Prakar Se Hamara Ghar Hai Aur Jis Prakar Hum Apne Ghar Ko Ganda Nahi Rakhate Hain Ussi Prakar Hume Hamare Desh Ko Bhi Ganda Nahi Karna Chahiye L Aur Jahan Par Bhi Sambhav Ho Hume Jo Bhi Kachra Hai Use Sahi Sthan Par Hi Daalna Chahiye L Aur Agar Aisi Koi Vyavastha Nahi Hai To Us Kachre Ko Hum Carry Karke Rakh Sakte Hain Aur Dustbin Jahan Par Bhi Dikhe Wahan Par Hi Use Hume Phenkana Chahiye L To Agar Hum Thoda Sa Awareness Dikhaen To Dhire Dhire Karke Kuch Samay Mein Hamara Desh Puri Tarah Se Saaf Ho Jayega Aur Kahin Par Bhi Hume Kachra Dekhne Ko Nahi Milega Jisse Saree Samasyaen Jo Hai Gandagi Se Related Wah Samapt Hongi L
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यह आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न उठाया है जब हमारे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है जबकि मैं कौन हूं ओशो वर्ल्ड स्वच्छता अभियान चल रहा है तब ऐसे मौके पर यह सवाल और यह सोच जो है उठा लाल निबंध भारत में अब ...
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यह आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न उठाया है जब हमारे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है जबकि मैं कौन हूं ओशो वर्ल्ड स्वच्छता अभियान चल रहा है तब ऐसे मौके पर यह सवाल और यह सोच जो है उठा लाल निबंध भारत में अब देखिए कि ज्यादातर अपलोड करेंगे जहां जहां कचरा होता है यह जो जो कचरा फैलाते हैं वह खास तौर में बुरे लोग होते हैं जो हमसे बात करते हैं निचले वर्ग से नीचे का पानी की कमी के बच्चों को बच्चों से शुरू करते हैं जो कॉलेजों में स्कूल में पढ़ने क्या शिक्षा प्राप्त करना है मुझे लाखों रुपए उनके पेरेंट्स खर्च कर रहे हैं वह किस लिए कर रहे हैं वह इसलिए कर रहे हो ना एजुकेशन मिले और एजुकेशन में हमें कहीं नहीं सिखाया जाता है कि कचरा फैला ओ जो चीज है कि हम अपने घर में है जब अपने रूम में बैठे हैं जहां खाते हैं जमीन पर फेंक देते हैं नहीं बे कोई भी चिप्स वगैरह खायरा प्रवाही धातु की दिक्कत क्या है भारत में एक धारणा है लोगों के मन में कि जो कचरा फेंकने का काम है यह केवल जो है जो यह सफाई कर्मचारी होते हैं इन लोगों में एजुकेटेड क्लास यानी कि सफाई कर्मचारी हमारे देश को साफ रख सकते हैं तो एजुकेटेड लोग यदि नहीं रख पा रहे हैं तो उनके एजुकेटेड होने का कोई फायदा नहीं है जो अन्य देशों में है उसमें हर्जाना यह चीजों का ध्यान रखता है आप कह सकते माफ होता है यह होता है वह होता है प्लान होता कि नहीं फाइन होता है लेकिन लोगों में इतनी समझ है क्यों नहीं गंदगी नहीं चलानी है और यहां पर चाय-पानी भी रखते हैं उसका पालन नहीं होगा क्योंकि लोग इस मेंटलिटीYeh Aapne Bahut Hi Accha Prashna Uthaya Hai Jab Hamare Desh Mein Svachchhata Abhiyan Chal Raha Hai Jabki Main Kaun Hoon Osho World Svachchhata Abhiyan Chal Raha Hai Tab Aise Mauke Par Yeh Sawal Aur Yeh Soch Jo Hai Utha Lal Nibandh Bharat Mein Ab Dekhie Ki Jyadatar Upload Karenge Jahan Jahan Kachra Hota Hai Yeh Jo Jo Kachra Failate Hain Wah Khas Taur Mein Bure Log Hote Hain Jo Humse Baat Karte Hain Neechle Varg Se Neeche Ka Pani Ki Kami Ke Bacchon Ko Bacchon Se Shuru Karte Hain Jo Collegeon Mein School Mein Padhne Kya Shiksha Prapt Karna Hai Mujhe Laakhon Rupaiye Unke Parents Kharch Kar Rahe Hain Wah Kis Liye Kar Rahe Hain Wah Isliye Kar Rahe Ho Na Education Mile Aur Education Mein Hume Kahin Nahi Sikhaya Jata Hai Ki Kachra Faila O Jo Cheez Hai Ki Hum Apne Ghar Mein Hai Jab Apne Room Mein Baithey Hain Jahan Khate Hain Jameen Par Fenk Dete Hain Nahi Be Koi Bhi Chips Vagairah Khayra Pravaahi Dhatu Ki Dikkat Kya Hai Bharat Mein Ek Dharan Hai Logon Ke Man Mein Ki Jo Kachra Fenkne Ka Kaam Hai Yeh Kewal Jo Hai Jo Yeh Safaai Karmchari Hote Hain In Logon Mein Educated Class Yani Ki Safaai Karmchari Hamare Desh Ko Saaf Rakh Sakte Hain To Educated Log Yadi Nahi Rakh Pa Rahe Hain To Unke Educated Hone Ka Koi Fayda Nahi Hai Jo Anya Deshon Mein Hai Usamen Harjaana Yeh Chijon Ka Dhyan Rakhta Hai Aap Keh Sakte Maaf Hota Hai Yeh Hota Hai Wah Hota Hai Plan Hota Ki Nahi Fine Hota Hai Lekin Logon Mein Itni Samajh Hai Kyun Nahi Gandagi Nahi Chalani Hai Aur Yahan Par Chai Pani Bhi Rakhate Hain Uska Palan Nahi Hoga Kyonki Log Is Mentaliti
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आई थिंक मेन कारण यह हो गया कि हम लोग जैसे छोटे से जैसे दिखते आते हैं वही आगे भी करते रहते हैं l वह देखा नहीं जाता क्या एजुकेटेड हो या नहीं हो lअगर आप आसपास के लोगों को देखते हुए छोटे ग्रोइंग आपसे ही ज...
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आई थिंक मेन कारण यह हो गया कि हम लोग जैसे छोटे से जैसे दिखते आते हैं वही आगे भी करते रहते हैं l वह देखा नहीं जाता क्या एजुकेटेड हो या नहीं हो lअगर आप आसपास के लोगों को देखते हुए छोटे ग्रोइंग आपसे ही जैसे आप बड़े हो रहे हो वैसे ही देखते आ रहे हो तो आय थिंक वह थोड़ा बहुत एक्सपीरियंस के कारण, वह थोड़ा मेमोरी के कारण वह वहीं आ जाता है l एंड आय थिंक एक मैन अधर रीज़न होगा क्योंकि इतने लॉज़ उतने पनिशमेंट नहीं है और स्ट्रांग स्ट्रिक्ट लॉस जैसे अलग-अलग कंट्री में है l यहां पर यह हो गया कि हां कोई कुछ करेगा नहीं तो हम लोग फेक देते हैं तो कुछ होय गा भी नहीं तो बस फेंकना ही है l फिर आय थिंक नेक्स्ट रीज़न फॉर ग्रांटेड फॉर हो गया है कि हां पता है कि कोई कुछ करने वाला है नहीं, कोई कुछ बोलने वाला है नहीं तो तो बस जाते ही रोड में फेंक देते हो या इधर उधर भी कोई फेक देता है lEye Think Main Kaaran Yeh Ho Gaya Ki Hum Log Jaise Chote Se Jaise Dikhte Aate Hain Wahi Aage Bhi Karte Rehte Hain L Wah Dekha Nahi Jata Kya Educated Ho Ya Nahi Ho Agar Aap Aaspass Ke Logon Ko Dekhte Hue Chote Growing Aapse Hi Jaise Aap Bade Ho Rahe Ho Waise Hi Dekhte Aa Rahe Ho To Aay Think Wah Thoda Bahut Experience Ke Kaaran Wah Thoda Memory Ke Kaaran Wah Wahin Aa Jata Hai L End Aay Think Ek Man Adhar Rizan Hoga Kyonki Itne Loz Utne Punishment Nahi Hai Aur Strong Strict Loss Jaise Alag Alag Country Mein Hai L Yahan Par Yeh Ho Gaya Ki Haan Koi Kuch Karega Nahi To Hum Log Fake Dete Hain To Kuch Hoy Ga Bhi Nahi To Bus Phenkana Hi Hai L Phir Aay Think Next Rizan For Granted For Ho Gaya Hai Ki Haan Pata Hai Ki Koi Kuch Karne Wala Hai Nahi Koi Kuch Bolne Wala Hai Nahi To To Bus Jaate Hi Road Mein Fenk Dete Ho Ya Idhar Udhar Bhi Koi Fake Deta Hai L
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देखिए इस बात से तो मैं बिल्कुल सहमत है रखती हूं और यह बात बिल्कुल सच है कि भारत में लोग एजुकेटेड हो तो मेडिटेट होते हुए भी बहुत ज्यादा कचरा फैलाते हैं इसमें कोई दो राय है ही नहीं असली प्रॉब्लम क्या है...
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देखिए इस बात से तो मैं बिल्कुल सहमत है रखती हूं और यह बात बिल्कुल सच है कि भारत में लोग एजुकेटेड हो तो मेडिटेट होते हुए भी बहुत ज्यादा कचरा फैलाते हैं इसमें कोई दो राय है ही नहीं असली प्रॉब्लम क्या है भारत के लोगों क्योंकि उनमें बहुत ज्यादा नॉलेज है मैहर से समझते तो है लेकिन भारत में अवेयरनेस बहुत ज्यादा काम है तो इसके लिए पूछा कि जैसे हमने देखा कि काफी से उठाए गए हैं और कचरा फैलाने के लिए और यह कचरे को अलग-अलग कहां से डिस्को साफ करने के लिए गीले कचरे को अलग करना और XX को साफ करना एवं उन दोनों को अलग अलग कहा फेकना अलग-अलग डस्टबिन में साइंस साइंस में बहुत ज्यादा फर्क है और इसके अंदर हमें अभी भी चेचक से उठाए गए हैं अवैध इसके एंड सेकंड ईयर रिजल्ट हो सकता है कि भारत में ऑलरेडी इतनी गंदगी है ऑलरेडी इतना कचरा हम देखते हैं सड़कों में पार्क में तू ऐसा लोगों को लगता है कि यार यहां पर तो ऑलरेडी कचरा पड़ा हुआ एक बार थोड़ा और सेंड किया तो क्या बताया जा रहा है तो ऐसे करते-करते पहले किसी एक इंसान ने फेंका कूड़ा कचरा प्रदूषण सामने फेंका यही सोचकर करते-करते एक था गुल एक साधे सब थोड़ा सा कचरा चाहता हूं चाहता है तो 1 किलो की इस को सुधारने चाहिए थोड़ी आसानी से निवेदन है कि भारत में लोग एजुकेटेड होता है वह कचरा फैलाते हैंDekhie Is Baat Se To Main Bilkul Sahmat Hai Rakhti Hoon Aur Yeh Baat Bilkul Sach Hai Ki Bharat Mein Log Educated Ho To Meditate Hote Hue Bhi Bahut Jyada Kachra Failate Hain Isme Koi Do Rai Hai Hi Nahi Asli Problem Kya Hai Bharat Ke Logon Kyonki Unmen Bahut Jyada Knowledge Hai Maiher Se Samajhte To Hai Lekin Bharat Mein Awareness Bahut Jyada Kaam Hai To Iske Liye Poocha Ki Jaise Humne Dekha Ki Kafi Se Uthye Gaye Hain Aur Kachra Phailane Ke Liye Aur Yeh Kachre Ko Alag Alag Kahan Se Disco Saaf Karne Ke Liye Gile Kachre Ko Alag Karna Aur XX Ko Saaf Karna Evam Un Dono Ko Alag Alag Kaha Fekana Alag Alag Dustbin Mein Science Science Mein Bahut Jyada Fark Hai Aur Iske Andar Hume Abhi Bhi Chechak Se Uthye Gaye Hain Awaidh Iske End Second Year Result Ho Sakta Hai Ki Bharat Mein Already Itni Gandagi Hai Already Itna Kachra Hum Dekhte Hain Sadkon Mein Park Mein Tu Aisa Logon Ko Lagta Hai Ki Yaar Yahan Par To Already Kachra Pada Hua Ek Baar Thoda Aur Send Kiya To Kya Bataya Ja Raha Hai To Aise Karte Karte Pehle Kisi Ek Insaan Ne Fainkaa Kuda Kachra Pradushan Samane Fainkaa Yahi Sochkar Karte Karte Ek Tha Gul Ek Saadhe Sab Thoda Sa Kachra Chahta Hoon Chahta Hai To 1 Kilo Ki Is Ko Sudhaarne Chahiye Thodi Aasani Se Nivedan Hai Ki Bharat Mein Log Educated Hota Hai Wah Kachra Failate Hain
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