भारतीय संगीत के सात शुद्ध स्वर कौनसे हैं? ...

शुद्ध स्वर से उपर या नीचे विकृत स्वर आते है। सा और प के कोई विकृत स्वर नही होते। रे, ग, ध और नी के विकृत स्वर नीचे होते है और उन्हे कोमल' कहा जाता है। म का विकृत स्वर उपर होता है और उसे तीव्र कहा जाता है। समकालीन भारतीय शास्त्रीय संगीत में ज्यादातर यह बारह स्वर इस्तमाल किये जाते है। पुरातन काल से ही भारतीय स्वर सप्तक संवाद-सिद्ध है। महर्षि भरत ने इसी के आधार पर 22 श्रुतियों का प्रतिपादन किया था जो केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की ही विशेषता है।
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शुद्ध स्वर से उपर या नीचे विकृत स्वर आते है। सा और प के कोई विकृत स्वर नही होते। रे, ग, ध और नी के विकृत स्वर नीचे होते है और उन्हे कोमल' कहा जाता है। म का विकृत स्वर उपर होता है और उसे तीव्र कहा जाता है। समकालीन भारतीय शास्त्रीय संगीत में ज्यादातर यह बारह स्वर इस्तमाल किये जाते है। पुरातन काल से ही भारतीय स्वर सप्तक संवाद-सिद्ध है। महर्षि भरत ने इसी के आधार पर 22 श्रुतियों का प्रतिपादन किया था जो केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की ही विशेषता है।Shudh Swar Se Upar Ya Neeche Vikrit Swar Aate Hai Sa Aur P Ke Koi Vikrit Swar Nahi Hote Ray G Dh Aur Ni Ke Vikrit Swar Neeche Hote Hai Aur Unhe Komal Kaha Jata Hai M Ka Vikrit Swar Upar Hota Hai Aur Use Tivarr Kaha Jata Hai Samkalin Bharatiya Shashtriya Sangeet Mein Jyadatar Yeh Barah Swar Istmaal Kiye Jaate Hai Puratan Kaal Se Hi Bharatiya Swar Saptak Sanvaad Siddh Hai Maharshi Bharat Ne Isi Ke Aadhar Par 22 Shrutiyon Ka Pratipadan Kiya Tha Jo Kewal Bharatiya Shashtriya Sangeet Ki Hi Visheshata Hai
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शुद्ध स्वर से उपर या नीचे विकृत स्वर आते है। सा और प के कोई विकृत स्वर नही होते। रे, ग, ध और नी के विकृत स्वर नीचे होते है और उन्हे कोमल' कहा जाता है। म का विकृत स्वर उपर होता है और उसे तीव्र कहा जाता है। समकालीन भारतीय शास्त्रीय संगीत में ज्यादातर यह बारह स्वर इस्तमाल किये जाते है। पुरातन काल से ही भारतीय स्वर सप्तक संवाद-सिद्ध है। महर्षि भरत ने इसी के आधार पर 22 श्रुतियों का प्रतिपादन किया था जो केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की ही विशेषता है।
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शुद्ध स्वर से उपर या नीचे विकृत स्वर आते है। सा और प के कोई विकृत स्वर नही होते। रे, ग, ध और नी के विकृत स्वर नीचे होते है और उन्हे कोमल' कहा जाता है। म का विकृत स्वर उपर होता है और उसे तीव्र कहा जाता है। समकालीन भारतीय शास्त्रीय संगीत में ज्यादातर यह बारह स्वर इस्तमाल किये जाते है। पुरातन काल से ही भारतीय स्वर सप्तक संवाद-सिद्ध है। महर्षि भरत ने इसी के आधार पर 22 श्रुतियों का प्रतिपादन किया था जो केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की ही विशेषता है।Shudh Swar Se Upar Ya Neeche Vikrit Swar Aate Hai Sa Aur P Ke Koi Vikrit Swar Nahi Hote Ray G Dh Aur Ni Ke Vikrit Swar Neeche Hote Hai Aur Unhe Komal Kaha Jata Hai M Ka Vikrit Swar Upar Hota Hai Aur Use Tivarr Kaha Jata Hai Samkalin Bharatiya Shashtriya Sangeet Mein Jyadatar Yeh Barah Swar Istmaal Kiye Jaate Hai Puratan Kaal Se Hi Bharatiya Swar Saptak Sanvaad Siddh Hai Maharshi Bharat Ne Isi Ke Aadhar Par 22 Shrutiyon Ka Pratipadan Kiya Tha Jo Kewal Bharatiya Shashtriya Sangeet Ki Hi Visheshata Hai
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