क्या कभी तिब्बत को स्वतंत्रता मिलेगी? ...

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तिब्बत भारत का एक पड़ोसी देश है जो साउथ चाइना का हिस्सा माना जाता है चाइना ने उसे अपना एक राज्य घोषित किया है और जिस तरह से तिब्बत अभी संघर्ष कर रहा है मुझे लगता तो नहीं है कि उनका संघर्ष इतनी जल्दी एक फल देने वाला है क्योंकि चाइना में डेमोक्रेसी नहीं है हमारा देश लोकतांत्रिक गणराज्य देश है लेकिन चीन में ऐसा नहीं है इसी की वजह से ही वहां पर जो व्यक्ति अगर गणराज्य की मांग करता है लोकतंत्र की मांग करता है अभी कुछ समय पहले वहां के लोकतंत्र की मांग करने वाले सबसे बड़े नेता का निधन हुआ है तो आप समझ सकते हैं यहां की स्थिति कैसी है वहां पर केवल डिक्टेटरशिप चलती है जैसी नॉर्थ कोरिया में लेकिन नॉर्थ कोरिया में सामाजिक हितों के लिए नहीं की जाती है वहां पर स्वयं के देखा जाता है चाइना में सामाजिक देखा जाता है इसके अलावा चाइना की जो परेशानी है वह यह है कि चाइना विस्तारवादी निर्देश है विस्तार में आज देश होने के कारण देखी मैं आपको उसका कांटेक्ट Action बताता हूं ध्यान से सुनिएगा चाइना ने ब्रिटेन के साथ हुई 1890 की एक संधि को इसका कारण बताया जिसमें लिखा हुआ है कि तिब्बत चाइना का हिस्सा है इंग्लैंड नहीं है संधि की थी चाइना के साथ अब चाइना ने जब इंग्लैंड में को छोड़ कर गया चाइना को अपने वश को छोड़ कर गया तो उस स्थान को चीन ने कब्जा कर लिया यह बोलकर कि आप हमारी स्थिति पहले आरा पर मीटिंग बैठा हुआ था और इसी तरीके से जो मैकमोहन संधि हुई थी 1916 में भारत में बैठे हुए अंग्रेजों और चाइना के साथ कि यह जो मैक मोहन लाइन है वह बॉर्डर है कि आप लिखा हमारा उसे कहना नहीं मानता है अब दिखे दोनों संधि चाइना ने ब्रिटेन के साथ करी थी एक को मानता है एक को नहीं मानता वह उसका कारण यही है कि वह अपना स्वयं का हित देखता है देश हित दिखता है और जो संधि से अच्छी लगती है कि मानता है उसको नहीं मानता अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत घोषित कर चुका है हमें कि इंडिया का स्टैंड अच्छा है मुझे लगता है तिब्बत को संघर्ष करना चाहिए दुनिया की काफी दिन के साथ हैं लेकिन निकट भविष्य मुझे लगता नहीं कि स्वतंत्रता इतनी आसानी से तो नहीं मिलने वाली तिब्बत को धन्यवादTibet Bharat Ka Ek Padoshi Desh Hai Jo South China Ka Hissa Mana Jata Hai China Ne Use Apna Ek Rajya Ghoshit Kiya Hai Aur Jis Tarah Se Tibet Abhi Sangharsh Kar Raha Hai Mujhe Lagta To Nahi Hai Ki Unka Sangharsh Itni Jaldi Ek Fal Dene Wala Hai Kyonki China Mein Democracy Nahi Hai Hamara Desh Loktantrik Ganrajya Desh Hai Lekin Chin Mein Aisa Nahi Hai Isi Ki Wajah Se Hi Wahan Par Jo Vyakti Agar Ganrajya Ki Maang Karta Hai Loktantra Ki Maang Karta Hai Abhi Kuch Samay Pehle Wahan Ke Loktantra Ki Maang Karne Wale Sabse Bade Neta Ka Nidhan Hua Hai To Aap Samajh Sakte Hain Yahan Ki Sthiti Kaisi Hai Wahan Par Kewal Diktetaraship Chalti Hai Jaisi North Korea Mein Lekin North Korea Mein Samajik Hiton Ke Liye Nahi Ki Jati Hai Wahan Par Swayam Ke Dekha Jata Hai China Mein Samajik Dekha Jata Hai Iske Alava China Ki Jo Pareshani Hai Wah Yeh Hai Ki China Vistaravadi Nirdesh Hai Vistar Mein Aaj Desh Hone Ke Kaaran Dekhi Main Aapko Uska Contact Action Batata Hoon Dhyan Se Suniega China Ne Britain Ke Saath Hui 1890 Ki Ek Sandhi Ko Iska Kaaran Bataya Jisme Likha Hua Hai Ki Tibet China Ka Hissa Hai England Nahi Hai Sandhi Ki Thi China Ke Saath Ab China Ne Jab England Mein Ko Chod Kar Gaya China Ko Apne Vash Ko Chod Kar Gaya To Us Sthan Ko Chin Ne Kabja Kar Liya Yeh Bolkar Ki Aap Hamari Sthiti Pehle Aara Par Meeting Baitha Hua Tha Aur Isi Tarike Se Jo Macmohan Sandhi Hui Thi 1916 Mein Bharat Mein Baithey Hue Angrejo Aur China Ke Saath Ki Yeh Jo Mac Mohan Line Hai Wah Border Hai Ki Aap Likha Hamara Use Kehna Nahi Manata Hai Ab Dikhe Dono Sandhi China Ne Britain Ke Saath Kari Thi Ek Ko Manata Hai Ek Ko Nahi Manata Wah Uska Kaaran Yahi Hai Ki Wah Apna Swayam Ka Hit Dekhta Hai Desh Hit Dikhta Hai Aur Jo Sandhi Se Acchi Lagti Hai Ki Manata Hai Usko Nahi Manata Arunachal Pradesh Ko South Tibet Ghoshit Kar Chuka Hai Hume Ki India Ka Stand Accha Hai Mujhe Lagta Hai Tibet Ko Sangharsh Karna Chahiye Duniya Ki Kafi Din Ke Saath Hain Lekin Nikat Bhavishya Mujhe Lagta Nahi Ki Swatantrata Itni Aasani Se To Nahi Milne Wali Tibet Ko Dhanyavad
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जिस तरह से दीपक संघर्ष कर रहा है और भारत सहित विश्व से भी उसे समर्थन मिला है एक दिन ऐसा जरुर आएगा जब तिब्बत की जनता चीनी अत्याचारों से मुक्त होकर स्वतंत्रता की सांस लेगी आजादी से जी पाएगी 1952 के चीनी आक्रमण से पहले तक तिब्बत कम से कम 13 वर्षों तक एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में रहा था दलाई लामा को अपना स्वामी मारने वाला तिब्बत राष्ट्रीय कि अपनी मुद्रा व डाक टिकट चीनी हम लेकर चलते थे यहां तक कि तिब्बत की अपनी सेना थी जिसने 1952 के प्रतिरोध के अतिरिक्त छठी शताब्दी में 200 वर्षों तक चीन से युद्ध किया था चीन के दुष्प्रचार में चाहे अरुणाचल सिक्किम भूटान की तरह तिब्बती चिंता में बताए जाते हैं परंतु सच तो यही है कि स्वतंत्र होने के बावजूद भी तिब्बत का ऐसा नाता भारत व पाक नेपाल के साथ रहा है वैसा चीन के साथ कभी नहीं रहा तिब्बत की भाषा व लिपि भी चीन से एकदम अलग है बल्कि वह हिमालय क्षेत्रों से मिलती जुलती है निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ लोबसांग ने कहा है कि शक्तिशाली चीनी ताकत से तिब्बत अपने अहिंसात्मक संघर्ष के जरिए उसी तरह तरह स्वतंत्र होकर रहेगा जैसे कि भारत दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश साम्राज्य देते तिब्बत की स्वतंत्रता भारत के भी हित में है विश्व से भी तिब्बत को समर्थन मिल रहा है भारत की जनता व सरकार दोनों ही कुछ बस का साथ देना चाहिए और दे रहे हैं तिब्बत की स्वतंत्रता को लेकर शुरू की गई भारत जागरण यात्रा 2017 दिसंबर में शुरू हुई थी 20 जनवरी तक चलने वाली है यात्रा 22 राज्यों के 150 शहरों में पहुंचेगी प्रधानमंत्री मोदी की भी यही राय है कि तिब्बत स्वतंत्र हो उन्होंने दलाई लामा की तिब्बत को स्वतंत्र करने के अभियान को नैतिक समर्थन देने की बात कही हैJis Tarah Se Dipak Sangharsh Kar Raha Hai Aur Bharat Sahit Vishwa Se Bhi Use Samarthan Mila Hai Ek Din Aisa Zaroor Aayega Jab Tibet Ki Janta Chini Atyacharo Se Mukt Hokar Swatantrata Ki Saans Legi Azadi Se Ji Payegi 1952 Ke Chini Aakraman Se Pehle Tak Tibet Kum Se Kum 13 Varshon Tak Ek Swatantra Rashtra Ke Roop Mein Astitv Mein Raha Tha Dalai Lama Ko Apna Swami Maarne Wala Tibet Rashtriya Ki Apni Mudra V Dak Ticket Chini Hum Lekar Chalte The Yahan Tak Ki Tibet Ki Apni Sena Thi Jisne 1952 Ke Pratirodh Ke Atirikt Chathi Shatabdi Mein 200 Varshon Tak Chin Se Yudh Kiya Tha Chin Ke Dushprachar Mein Chahe Arunachal Sikkim Bhutan Ki Tarah Tibbati Chinta Mein Bataye Jaate Hain Parantu Sach To Yahi Hai Ki Swatantra Hone Ke Bawajud Bhi Tibet Ka Aisa Nataa Bharat V Pak Nepal Ke Saath Raha Hai Waisa Chin Ke Saath Kabhi Nahi Raha Tibet Ki Bhasha V Lipi Bhi Chin Se Ekdam Alag Hai Balki Wah Himalaya Kshetro Se Milti Julati Hai Nirvasit Tibet Sarkar Ke Pradhanmantri Dr Lobsang Ne Kaha Hai Ki Shaktishaali Chini Takat Se Tibet Apne Ahinsatmak Sangharsh Ke Jariye Ussi Tarah Tarah Swatantra Hokar Rahega Jaise Ki Bharat Dakshin Africa Mein British Samrajya Dete Tibet Ki Swatantrata Bharat Ke Bhi Hit Mein Hai Vishwa Se Bhi Tibet Ko Samarthan Mil Raha Hai Bharat Ki Janta V Sarkar Dono Hi Kuch Bus Ka Saath Dena Chahiye Aur De Rahe Hain Tibet Ki Swatantrata Ko Lekar Shuru Ki Gayi Bharat Jagran Yatra 2017 December Mein Shuru Hui Thi 20 January Tak Chalne Wali Hai Yatra 22 Rajyo Ke 150 Shaharon Mein Pahunchegi Pradhanmantri Modi Ki Bhi Yahi Rai Hai Ki Tibet Swatantra Ho Unhone Dalai Lama Ki Tibet Ko Swatantra Karne Ke Abhiyan Ko Naitik Samarthan Dene Ki Baat Kahi Hai
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तिब्बत के मुताबिक आजादी मिलने पर कर कभी भी जल्द ही नहीं मिलती क्योंकि वह चीन के खिलाफ आजादी के लिए विद्रोह के लिए तैयार नहीं थे तो इससे मुझे यह नहीं लगता कि तिब्बत को कभी भी स्वतंत्रता मिलेगीTibet Ke Mutabik Azadi Milne Par Kar Kabhi Bhi Jald Hi Nahi Milti Kyonki Wah Chin Ke Khilaf Azadi Ke Liye Vidroh Ke Liye Taiyaar Nahi The To Isse Mujhe Yeh Nahi Lagta Ki Tibet Ko Kabhi Bhi Swatantrata Milegi
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