गांधीजी ने देश के विभाजन को क्यों स्वीकार किया ? ...

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गांधीजी के पास देश के विभाजन को स्वीकारने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था क्योंकि मुस्लिम लीग की अध्यक्ष जिन्ना ने उस समय कह दिया था कि पाकिस्तान के विभाजन के बिना मुस्लिम लीग नहीं मानेगी और इसके लिए उन्होंने दंगे करवाना शुरू कर दिए| आपको पता होगा आजादी के समय भारत में बंगाल में दंगे हुए थे| दंगो को शांत कराने के लिए महात्मा गांधी जी उस समय बंगाल पहुंच गए और कोलकाता में आमरण अनशन पर बैठ गए उसके बाद उनको देश विभाजन की स्वीकृति देनी ही पड़ी तब जाकर दंगे शांत हुए और भारत पश्चिम तथा पूर्व से अलग हो गया और पूर्व पाकिस्तान और पश्चिम पाकिस्तान का उदय हुआ जो कि बाद में 1971 में पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश के नाम से प्रसिद्ध हुआ| बांग्लादेश देश, नए देश का गठन हुआ और पाकिस्तान केवल पश्चिम में रह गया| धन्यवाद|Gandhiji Ke Paas Desh Ke Vibhajan Ko Sweekaarne Ke Alava Koi Aur Rasta Nahi Tha Kyonki Muslim League Ki Adhyaksh Jinna Ne Us Samay Keh Diya Tha Ki Pakistan Ke Vibhajan Ke Bina Muslim League Nahi Manegi Aur Iske Liye Unhone Denge Karwana Shuru Kar Diye Aapko Pata Hoga Azadi Ke Samay Bharat Mein Bengal Mein Denge Hue The Dango Ko Shaant Karane Ke Liye Mahatma Gandhi Ji Us Samay Bengal Pahunch Gaye Aur Kolkata Mein Aamaran Anshan Par Baith Gaye Uske Baad Unko Desh Vibhajan Ki Swikriti Deni Hi Padi Tab Jaakar Denge Shaant Hue Aur Bharat Paschim Tatha Purv Se Alag Ho Gaya Aur Purv Pakistan Aur Paschim Pakistan Ka Uday Hua Jo Ki Baad Mein 1971 Mein Purvi Pakistan Bangladesh Ke Naam Se Prasiddh Hua Bangladesh Desh Naye Desh Ka Gathan Hua Aur Pakistan Kewal Paschim Mein Rah Gaya Dhanyavad
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यह प्रश्न वह लोग ज्यादा करते हैं जो गांधी जी को इस चीज के लिए क्रिटिसाइज करते हैं कि गांधीजी ने देश का विभाजन स्वीकार किया या गांधीजी रिस्पॉन्सिबल हैं यह तक बोलते हैं लोग कि गांधी जी देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन एक किस में सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि गांधीजी थे कौन इसको स्वीकार या अस्वीकार ना करने वाले वह किस पोजीशन किस हैसियत से इसमें ना कहने वाले थे उनके पास क्या ऑप्शन था वह कोई उनके पास पैसा पर छाया अंग्रेजों ने उनको ऑप्शन दिया है या किसी पार्टी ने भी कांग्रेस पार्टी हो या कोई और पार्टी मुस्लिम लीग जिन्होंने उनसे पूछा वह कि यह करना है कि नहीं करना है तो गांधीजी अपने आप में एक उस समय सामाजिक नेता थे वह कांग्रेस से जुड़े हुए थे कांग्रेस में उनका सबसे ज्यादा इंस्टा देश की जनता पर उनका बहुत ज्यादा इंसुरेंस था उसी ने फैंस को इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने उन्होंने इसके लिए चर्बी किया उन्होंने जो दंगे हो रहे थे उसके लिए व्यंजन क्या कोलकाता में जाकर लेकिन ऐसा तो नहीं है कि गांधी जी का हाथ में कोई बटन था और वह बटन दबाते हैं और उनकी बात मान ली जाती उनकी बात को अगर मान लिया गया होता तो बहुत कुछ अलग हो रहा होता देश में तो गांधीजी और किसी ऐसे पद पर भी नहीं थे कि उनके उन्होंने कोई पेपर साइन किया इसके लिए कि हम कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट कर लेते हैं तो यह उन्होंने जितना इंसान स्थापना यूज़ किया लेकिन उनका इंश्योरेंस भी अनलिमिटेड नहीं था कि वह देश के विभाजन को रोक पाते गांधीजी के ऊपर प्रयास अगर आप देखें तो बहुत है लेकिन कुछ चीजें होती हैं और गांधीजी Back हमारे जैसे व्यक्ति थे जो बहुत-बहुत आदर्शवादी बहुत मजबूत है लेकिन उनकी इंसुरेंस की भी कुछ सीमाएं थी तो वह भी देश के विभाजन को रोक नहीं पाएYeh Prashna Wah Log Jyada Karte Hain Jo Gandhi Ji Ko Is Cheez Ke Liye Criticize Karte Hain Ki Gandhiji Ne Desh Ka Vibhajan Sweekar Kiya Ya Gandhiji Responsible Hain Yeh Tak Bolte Hain Log Ki Gandhi Ji Desh Ke Vibhajan Ke Liye Zimmedar Hain Lekin Ek Kis Mein Sabse Bada Prashna Yeh Tha Ki Gandhiji The Kaun Isko Sweekar Ya Aswikar Na Karne Wale Wah Kis Position Kis Haisiyat Se Isme Na Kehne Wale The Unke Paas Kya Option Tha Wah Koi Unke Paas Paisa Par Chaya Angrejo Ne Unko Option Diya Hai Ya Kisi Party Ne Bhi Congress Party Ho Ya Koi Aur Party Muslim League Jinhone Unse Poocha Wah Ki Yeh Karna Hai Ki Nahi Karna Hai To Gandhiji Apne Aap Mein Ek Us Samay Samajik Neta The Wah Congress Se Jude Hue The Congress Mein Unka Sabse Jyada Insta Desh Ki Janta Par Unka Bahut Jyada Insurens Tha Ussi Ne Fans Ko Istemal Karne Ke Liye Unhone Unhone Iske Liye Charbi Kiya Unhone Jo Denge Ho Rahe The Uske Liye Vyanjan Kya Kolkata Mein Jaakar Lekin Aisa To Nahi Hai Ki Gandhi Ji Ka Hath Mein Koi Button Tha Aur Wah Button Dabate Hain Aur Unki Baat Maan Lee Jati Unki Baat Ko Agar Maan Liya Gaya Hota To Bahut Kuch Alag Ho Raha Hota Desh Mein To Gandhiji Aur Kisi Aise Pad Par Bhi Nahi The Ki Unke Unhone Koi Paper Sign Kiya Iske Liye Ki Hum Constitution Ko Except Kar Lete Hain To Yeh Unhone Jitna Insaan Sthapana Use Kiya Lekin Unka Insurance Bhi Unlimited Nahi Tha Ki Wah Desh Ke Vibhajan Ko Rok Paate Gandhiji Ke Upar Prayas Agar Aap Dekhen To Bahut Hai Lekin Kuch Cheezen Hoti Hain Aur Gandhiji Back Hamare Jaise Vyakti The Jo Bahut Bahut Aadarshavaadi Bahut Mazboot Hai Lekin Unki Insurens Ki Bhi Kuch Simayen Thi To Wah Bhi Desh Ke Vibhajan Ko Rok Nahi Paye
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वैसे तो ऐसा ही कहा जाता है कि देश का विभाजन को स्वीकार करने की गांधीजी की एक मजबूरी थी लेकिन मेरी नजर में मेरी व्यक्तिगत नजर में देश का विभाजन का काम का मूल कारण ही कांग्रेस थी और गांधीजी और कांग्रेस तो यह भी चाहते थे कि पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच एक 3 किलोमीटर का गलियारा बना दिया जाए और शायद इसी बात से नाखुश होकर के नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी मेरी नजर में देश का विभाजन को स्वीकार करने कि गांधीजी की मजबूरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह एक सर्वमान्य नेता थे हिंदुओं के भी और मुसलमानों के बीच जब दंगे हुए तो उन्हें लोगों को समझाना चाहिए था लोगों के साथ बातें करनी चाहिए थी और उस मामले को सुलझा सकते थे और देश का बंटवारा भी उन्होंने स्वीकार किया तो दो टुकड़ों में पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान पूर्वी पूर्वी ओरिया पश्चिमी दोनों में से किसी एक का ही बंटवारा कर सकते थे नाम और बंटवारा करने के बावजूद भी आज भी वही समस्या है हिंदू और मुस्लिम की बटवारा करने के बाद भी हिंदुस्तान को भी और गाली जी को कुछ भी ज्यादा हाथ नहीं लगा तो बंटवारा करना कोई समस्या का समाधान नहीं हुआ जब किसी को कोई समस्या समाधान नहीं हो तो उस समाधान को स्वीकार नहीं करना चाहिए गांधी जी को देश का विभाजन को स्वीकार नहीं करना चाहिए थाWaise To Aisa Hi Kaha Jata Hai Ki Desh Ka Vibhajan Ko Sweekar Karne Ki Gandhiji Ki Ek Majburi Thi Lekin Meri Nazar Mein Meri Vyaktigat Nazar Mein Desh Ka Vibhajan Ka Kaam Ka Mul Kaaran Hi Congress Thi Aur Gandhiji Aur Congress To Yeh Bhi Chahte The Ki Purvi Pakistan Aur Pashchimi Pakistan Ke Beech Ek 3 Kilometre Ka Galiyara Bana Diya Jaye Aur Shayad Isi Baat Se Nakhush Hokar Ke Nathuram Godse Ne Unki Hatya Kar Di Thi Meri Nazar Mein Desh Ka Vibhajan Ko Sweekar Karne Ki Gandhiji Ki Majburi Nahi Honi Chahiye Kyonki Wah Ek Sarvmanya Neta The Hinduon Ke Bhi Aur Musalmano Ke Beech Jab Denge Hue To Unhen Logon Ko Samajhana Chahiye Tha Logon Ke Saath Batein Karni Chahiye Thi Aur Us Mamle Ko Sulajha Sakte The Aur Desh Ka Batwara Bhi Unhone Sweekar Kiya To Do Tukadon Mein Purvi Pakistan Aur Pashchimi Pakistan Purvi Purvi Oriya Pashchimi Dono Mein Se Kisi Ek Ka Hi Batwara Kar Sakte The Naam Aur Batwara Karne Ke Bawajud Bhi Aaj Bhi Wahi Samasya Hai Hindu Aur Muslim Ki Batwara Karne Ke Baad Bhi Hindustan Ko Bhi Aur Gaali Ji Ko Kuch Bhi Jyada Hath Nahi Laga To Batwara Karna Koi Samasya Ka Samadhan Nahi Hua Jab Kisi Ko Koi Samasya Samadhan Nahi Ho To Us Samadhan Ko Sweekar Nahi Karna Chahiye Gandhi Ji Ko Desh Ka Vibhajan Ko Sweekar Nahi Karna Chahiye Tha
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गांधी जी ने देश का विभाजन चुपचाप होने दिया वह नेहरू जी पर कोई अंकुश नहीं लगा पाए सूत्रों के अनुसार गांधी जी का विभाजन के बाद आग रहा था कि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए देने ही चाहिए क्योंकि पाकिस्तान भारत का एक तिहाई हिस्सा था इसकी भारत के खजाने से एक तिहाई रकम पाकिस्तान को मिलनी ही चाहिए जब सरकार ने इसके लिए मना किया तो वह बोले कि मैं आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा और भूख हड़ताल कर दूंगा अगर यह पैसा पाकिस्तान को नहीं दिया गया तो यही अनशन पर बैठने वाली बात गांधी जी ने विभाजन से पहले भी कही थी कि अगर भारत का विभाजन होता है तो वह भूख हड़ताल करेंगे लेकिन जब उस वक्त के प्रधानमंत्री नेहरु जी ने विभाजन के लिए स्वीकृति दे दी गांधीजी ने उनका कोई विरोध नहीं किया और ना ही भूख हड़ताल पर बैठे जनता के के पर उनका जवाब था मैं इस हालत में नहीं हूं कि मैं अनशन करूं और जब जवाहर ने यह फैसला ले ही लिया है तो मैं क्या कर सकता हूं गांधीजी विभाजन रोक नहीं पाए लेकिन विभाजन के लिए वह उतने ही दोषी हैं जितने द्रोपदी चीर हरण के समय भीष्म पितामह थे क्योंकि वह नेहरू जी को कुछ भी नहीं कह पाए चुप रहे इतना ही नहीं पाकिस्तान से निर्वासित हिंदुओं के लिए दिल्ली में रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी तब खाली पड़ी मस्जिद में उन्होंने शरण ली तब भी गांधी जी ने अपने भाषण में कहा कि दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश है कि मस्जिदों में हिंदुओं को नहीं रहना चाहिए उन्हें खाली किया जाए तू इस तरह से गांधी जी ने हिंदुओं के बनिस्पत मुस्लिम का ज्यादा ध्यान रखा उन पर ज्यादा ध्यान दिया और विभाजन नहीं रोक पाए

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गांधी जी ने देश का विभाजन चुपचाप होने दिया वह नेहरू जी पर कोई अंकुश नहीं लगा पाए सूत्रों के अनुसार गांधी जी का विभाजन के बाद आग रहा था कि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए देने ही चाहिए क्योंकि पाकिस्तान भारत का एक तिहाई हिस्सा था इसकी भारत के खजाने से एक तिहाई रकम पाकिस्तान को मिलनी ही चाहिए जब सरकार ने इसके लिए मना किया तो वह बोले कि मैं आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा और भूख हड़ताल कर दूंगा अगर यह पैसा पाकिस्तान को नहीं दिया गया तो यही अनशन पर बैठने वाली बात गांधी जी ने विभाजन से पहले भी कही थी कि अगर भारत का विभाजन होता है तो वह भूख हड़ताल करेंगे लेकिन जब उस वक्त के प्रधानमंत्री नेहरु जी ने विभाजन के लिए स्वीकृति दे दी गांधीजी ने उनका कोई विरोध नहीं किया और ना ही भूख हड़ताल पर बैठे जनता के के पर उनका जवाब था मैं इस हालत में नहीं हूं कि मैं अनशन करूं और जब जवाहर ने यह फैसला ले ही लिया है तो मैं क्या कर सकता हूं गांधीजी विभाजन रोक नहीं पाए लेकिन विभाजन के लिए वह उतने ही दोषी हैं जितने द्रोपदी चीर हरण के समय भीष्म पितामह थे क्योंकि वह नेहरू जी को कुछ भी नहीं कह पाए चुप रहे इतना ही नहीं पाकिस्तान से निर्वासित हिंदुओं के लिए दिल्ली में रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी तब खाली पड़ी मस्जिद में उन्होंने शरण ली तब भी गांधी जी ने अपने भाषण में कहा कि दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश है कि मस्जिदों में हिंदुओं को नहीं रहना चाहिए उन्हें खाली किया जाए तू इस तरह से गांधी जी ने हिंदुओं के बनिस्पत मुस्लिम का ज्यादा ध्यान रखा उन पर ज्यादा ध्यान दिया और विभाजन नहीं रोक पाएGandhi Ji Ne Desh Ka Vibhajan Chupchap Hone Diya Wah Nehru Ji Par Koi Ankush Nahi Laga Paye Sootro Ke Anusar Gandhi Ji Ka Vibhajan Ke Baad Aag Raha Tha Ki Pakistan Ko 55 Crore Rupaiye Dene Hi Chahiye Kyonki Pakistan Bharat Ka Ek Tihai Hissa Tha Iski Bharat Ke Khajane Se Ek Tihai Rakam Pakistan Ko Milani Hi Chahiye Jab Sarkar Ne Iske Liye Mana Kiya To Wah Bole Ki Main Aamaran Anshan Par Baith Jaunga Aur Bhukh Hartal Kar Dunga Agar Yeh Paisa Pakistan Ko Nahi Diya Gaya To Yahi Anshan Par Baithne Wali Baat Gandhi Ji Ne Vibhajan Se Pehle Bhi Kahi Thi Ki Agar Bharat Ka Vibhajan Hota Hai To Wah Bhukh Hartal Karenge Lekin Jab Us Waqt Ke Pradhanmantri Nehru Ji Ne Vibhajan Ke Liye Swikriti De Di Gandhiji Ne Unka Koi Virodh Nahi Kiya Aur Na Hi Bhukh Hartal Par Baithey Janta Ke Ke Par Unka Jawab Tha Main Is Halat Mein Nahi Hoon Ki Main Anshan Karun Aur Jab Jawahar Ne Yeh Faisla Le Hi Liya Hai To Main Kya Kar Sakta Hoon Gandhiji Vibhajan Rok Nahi Paye Lekin Vibhajan Ke Liye Wah Utne Hi Doshi Hain Jitne Dropadi Chir Haran Ke Samay Bhishma Pitamah The Kyonki Wah Nehru Ji Ko Kuch Bhi Nahi Keh Paye Chup Rahe Itna Hi Nahi Pakistan Se Nirvasit Hinduon Ke Liye Delhi Mein Rehne Ki Koi Vyavastha Nahi Thi Tab Khaali Padi Masjid Mein Unhone Sharan Lee Tab Bhi Gandhi Ji Ne Apne Bhashan Mein Kaha Ki Delhi Police Ko Mera Aadesh Hai Ki Masjidon Mein Hinduon Ko Nahi Rehna Chahiye Unhen Khaali Kiya Jaye Tu Is Tarah Se Gandhi Ji Ne Hinduon Ke Banispat Muslim Ka Jyada Dhyan Rakha Un Par Jyada Dhyan Diya Aur Vibhajan Nahi Rok Paye
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यह गांधी जी ने देश के विभाजन को स्वीकार किया था इसके पीछे रीजन बहुत सारे थे जिससे कि जब भी बंटवारा होता हो रहा था उस वक्त वायसराय को गांधी जी ने बोला सही से माउंट बेटन से उन्हें उनको जो बोला गया था कि बंटवारा नहीं कीजिए वरना मत कीजिए तो उनका एक ही विकल्प था वायसराय का विकल्प क्या है मतलब उसका क्या ऑप्शन है तो लेकिन हां जिन्ना के नेतृत्व में बैठ उन्होंने ऐसा बोला गांधी जी ने की अंतिम सरकार को जो है अब बर्खास्त करके जिन्ना के नेतृत्व में जो बैग चलती सरकार बना लीजिए लेकिन शायद जिंदा ऐसा नहीं चाहते थे इस प्रस्ताव को वरना नेहरू जी माने नहीं पटेल जो होते हैं उन्होंने माना तो सभी से काम जो है भारत को भारत का विभाजन करना पड़ा उसके बाद से जो मुस्लिम समुदाय थे वहां पर काफी दंगे होने शुरू हो गए लेख हर जगह जो मुस्लिम कम्युनिटी है वह दंगा होने लगा कि नहीं हमें अलग से देश चाहिए उस वक्त जिन्ना साहब ने बोला था उनको कि नहीं हमें मतलब अलग मतलब राजे चाहिए ताकि जो है शांति से रह पाए तो आई थिंक शांति की खातिर जो है महात्मा गांधी ने अलग राज्य भारत का विभाजन होने पर स्वीकार कर लिया और जवाहरलाल नेहरु उनको ऐसा महात्मा गांधी को से उम्मीद नहीं था कि जवाहर नेहरू भी नहीं मानेंगे और इस कुर्सी पर स्वयं गांधी जी को पहुंचाया गया पटेल नवीन कॉल कर कर दिया था तो हिसार से प्रधानमंत्री नेहरू के लिए उन्होंने छोड़ दी और यही अंतिम स्वीकार थी और नेहरू प्रधानमंत्री रहे और पटेल जो है गृह मंत्री और नियत अली खान वित्त मंत्री बने तो इन सभी चीजों का नथिंग सब को पीड़ा उठाना पड़ रहा है वही सम्मान जाते तो भारत का बंटवारा होता ही नहीं भारत के विभाजन नहीं होता

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यह गांधी जी ने देश के विभाजन को स्वीकार किया था इसके पीछे रीजन बहुत सारे थे जिससे कि जब भी बंटवारा होता हो रहा था उस वक्त वायसराय को गांधी जी ने बोला सही से माउंट बेटन से उन्हें उनको जो बोला गया था कि बंटवारा नहीं कीजिए वरना मत कीजिए तो उनका एक ही विकल्प था वायसराय का विकल्प क्या है मतलब उसका क्या ऑप्शन है तो लेकिन हां जिन्ना के नेतृत्व में बैठ उन्होंने ऐसा बोला गांधी जी ने की अंतिम सरकार को जो है अब बर्खास्त करके जिन्ना के नेतृत्व में जो बैग चलती सरकार बना लीजिए लेकिन शायद जिंदा ऐसा नहीं चाहते थे इस प्रस्ताव को वरना नेहरू जी माने नहीं पटेल जो होते हैं उन्होंने माना तो सभी से काम जो है भारत को भारत का विभाजन करना पड़ा उसके बाद से जो मुस्लिम समुदाय थे वहां पर काफी दंगे होने शुरू हो गए लेख हर जगह जो मुस्लिम कम्युनिटी है वह दंगा होने लगा कि नहीं हमें अलग से देश चाहिए उस वक्त जिन्ना साहब ने बोला था उनको कि नहीं हमें मतलब अलग मतलब राजे चाहिए ताकि जो है शांति से रह पाए तो आई थिंक शांति की खातिर जो है महात्मा गांधी ने अलग राज्य भारत का विभाजन होने पर स्वीकार कर लिया और जवाहरलाल नेहरु उनको ऐसा महात्मा गांधी को से उम्मीद नहीं था कि जवाहर नेहरू भी नहीं मानेंगे और इस कुर्सी पर स्वयं गांधी जी को पहुंचाया गया पटेल नवीन कॉल कर कर दिया था तो हिसार से प्रधानमंत्री नेहरू के लिए उन्होंने छोड़ दी और यही अंतिम स्वीकार थी और नेहरू प्रधानमंत्री रहे और पटेल जो है गृह मंत्री और नियत अली खान वित्त मंत्री बने तो इन सभी चीजों का नथिंग सब को पीड़ा उठाना पड़ रहा है वही सम्मान जाते तो भारत का बंटवारा होता ही नहीं भारत के विभाजन नहीं होताYeh Gandhi Ji Ne Desh Ke Vibhajan Ko Sweekar Kiya Tha Iske Piche Reason Bahut Sare The Jisse Ki Jab Bhi Batwara Hota Ho Raha Tha Us Waqt Viceroy Ko Gandhi Ji Ne Bola Sahi Se Mount Betan Se Unhen Unko Jo Bola Gaya Tha Ki Batwara Nahi Kijiye Varana Mat Kijiye To Unka Ek Hi Vikalp Tha Viceroy Ka Vikalp Kya Hai Matlab Uska Kya Option Hai To Lekin Haan Jinna Ke Netritva Mein Baith Unhone Aisa Bola Gandhi Ji Ne Ki Antim Sarkar Ko Jo Hai Ab Barkhast Karke Jinna Ke Netritva Mein Jo Bag Chalti Sarkar Bana Lijiye Lekin Shayad Zinda Aisa Nahi Chahte The Is Prastaav Ko Varana Nehru Ji Mane Nahi Patel Jo Hote Hain Unhone Mana To Sabhi Se Kaam Jo Hai Bharat Ko Bharat Ka Vibhajan Karna Pada Uske Baad Se Jo Muslim Samuday The Wahan Par Kafi Denge Hone Shuru Ho Gaye Lekh Har Jagah Jo Muslim Community Hai Wah Danga Hone Laga Ki Nahi Hume Alag Se Desh Chahiye Us Waqt Jinna Sahab Ne Bola Tha Unko Ki Nahi Hume Matlab Alag Matlab Raje Chahiye Taki Jo Hai Shanti Se Rah Paye To Eye Think Shanti Ki Khatir Jo Hai Mahatma Gandhi Ne Alag Rajya Bharat Ka Vibhajan Hone Par Sweekar Kar Liya Aur Jawaharlal Nehru Unko Aisa Mahatma Gandhi Ko Se Ummid Nahi Tha Ki Jawahar Nehru Bhi Nahi Maneange Aur Is Kursi Par Swayam Gandhi Ji Ko Pahunchaya Gaya Patel Naveen Call Kar Kar Diya Tha To Hisar Se Pradhanmantri Nehru Ke Liye Unhone Chod Di Aur Yahi Antim Sweekar Thi Aur Nehru Pradhanmantri Rahe Aur Patel Jo Hai Grah Mantri Aur Niyat Ali Khan Vitt Mantri Bane To In Sabhi Chijon Ka Nothing Sab Ko Peeda Uthaana Padh Raha Hai Wahi Samman Jaate To Bharat Ka Batwara Hota Hi Nahi Bharat Ke Vibhajan Nahi Hota
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अजब शुरुआत में देश के विभाजन की बात हुई या ने जब लोन अकाउंट ब्रिटेन और जो मुस्लिम लीग और हमारे कांग्रेस पार्टी ने जो मिलकर जो एक बात कही थी कि विभाजन महानायक लिए सब तैयार हो गए थे शिवाय महात्मा गांधी के लिए और कई जितने बड़े नेता थे सरदार पटेल नेहरू जिन्ना उन्होंने महात्मा गांधी को मनाया विभाजन के लिए महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि देश का विभाजन वह मानते थे कि हिंदू हो चाहे मुस्लिम हो वह सब भाई हैं और सब इस धरती के बेटे हैं यह महात्मा गांधी ऐसा मानते थे तो वह बिल्कुल नहीं चाहते थे शुरुआत में कि ऐसा हो लेकिन बढ़ते हालात और हिंसा को देखकर उनके पास कोई चारा ही नहीं था विभाजन की

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अजब शुरुआत में देश के विभाजन की बात हुई या ने जब लोन अकाउंट ब्रिटेन और जो मुस्लिम लीग और हमारे कांग्रेस पार्टी ने जो मिलकर जो एक बात कही थी कि विभाजन महानायक लिए सब तैयार हो गए थे शिवाय महात्मा गांधी के लिए और कई जितने बड़े नेता थे सरदार पटेल नेहरू जिन्ना उन्होंने महात्मा गांधी को मनाया विभाजन के लिए महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि देश का विभाजन वह मानते थे कि हिंदू हो चाहे मुस्लिम हो वह सब भाई हैं और सब इस धरती के बेटे हैं यह महात्मा गांधी ऐसा मानते थे तो वह बिल्कुल नहीं चाहते थे शुरुआत में कि ऐसा हो लेकिन बढ़ते हालात और हिंसा को देखकर उनके पास कोई चारा ही नहीं था विभाजन कीAjab Shuruvat Mein Desh Ke Vibhajan Ki Baat Hui Ya Ne Jab Loan Account Britain Aur Jo Muslim League Aur Hamare Congress Party Ne Jo Milkar Jo Ek Baat Kahi Thi Ki Vibhajan Mahanayak Liye Sab Taiyaar Ho Gaye The Shivaay Mahatma Gandhi Ke Liye Aur Kai Jitne Bade Neta The Sardar Patel Nehru Jinna Unhone Mahatma Gandhi Ko Manaya Vibhajan Ke Liye Mahatma Gandhi Nahi Chahte The Ki Desh Ka Vibhajan Wah Manate The Ki Hindu Ho Chahe Muslim Ho Wah Sab Bhai Hain Aur Sab Is Dharti Ke Bete Hain Yeh Mahatma Gandhi Aisa Manate The To Wah Bilkul Nahi Chahte The Shuruvat Mein Ki Aisa Ho Lekin Badhte Halaat Aur Hinsa Ko Dekhkar Unke Paas Koi Chara Hi Nahi Tha Vibhajan Ki
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