क्या भारत की जनता भविष्य में राहुल गाँधी जैसे कम अनुभव वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व देगी? ...

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देखिए राहुल गांधी को अनुभव कम है इसमें कोई दो राय नहीं है| हम सभी जानते हैं कि उनके पास एक्सपीरियंस कम है और हम टाइम टू टाइम उनको उनका अनुभव देख सकते हैं कि उनके पास अनुभव की बहुत ज्यादा कमी है चाहे वह राहुल गांधी जी की स्पीच हो या उनका कोई एक्शन| कल ही के बजट की बात करूं कल जो बजट पेश हुआ था 2018 का उसमें उन्होंने कोई भी आंसर नहीं दिया| उनसे काफी क्वेश्चन पूछे गए उन्होंने हमेशा की तरह कोई रिस्पांस उस टाइम नहीं दिया| क्योंकि उनके पास एक्सपीरियंस नहीं है हालांकि वह पढ़े लिखे काफी है लेकिन उनके पास अनुभव और एक्सपीरियंस कम है जिसकी वजह से वह इंस्टंट आंसर नहीं दे पाते|इतने पढ़े लिखे होने के बाद भी वह सत्ता में नहीं आ पा रहे हैं उसका रीजन यही है कि उनके पास एक्सपीरियंस की कमी है और देश को एक व्यक्ति चाहिए होता है जो एक्सपीरियंस हो जो कि राहुल गांधी नहीं है| तो फिलहाल के लिए मैं अगर बात करूं तो राहुल गांधी को हमारे देश की जनता नहीं देख पाएगी एजे PM या एजे लीडर| हो सकता है कि आने वाले कुछ सालों बाद राहुल गांधी जी भी एक्सपीरियंस हो जाए, अनुभव हो जाए धीरे-धीरे, तो लोग हमारे देश की जनता उनको देख ले| फिलहाल में मुझे नहीं लगता कि वह सत्ता में आ सकते हैं| और जो 2019 के इलेक्शन्स है जो होने वाले हैं उसमें भी मुझे जादा तर जो उम्मीद लग रही है जितने की वो मोदी जी की लग रही है क्योंकि वह ज्यादा अनुभवी है| और जिस तरीके से उनका अलग-अलग प्रदेशों में जो उनका जो रिजल्ट रहा है जो सत्ता बनाई है कि जैसे गुजराती हो, चाहे यूपी हो, चाहे हिमाचल हो काफी अच्छी रही है| तो आने वाले टाइम में उम्मीद जो लग रही है वह मोदी जी की लग रही है और राहुल गांधी नहीं आ सकते सत्ता में ऐसे ज्यादा उम्मीद है|Dekhie Rahul Gandhi Ko Anubhav Kum Hai Isme Koi Do Rai Nahi Hai Hum Sabhi Jante Hain Ki Unke Paas Experience Kum Hai Aur Hum Time To Time Unko Unka Anubhav Dekh Sakte Hain Ki Unke Paas Anubhav Ki Bahut Jyada Kami Hai Chahe Wah Rahul Gandhi Ji Ki Speech Ho Ya Unka Koi Action Kal Hi Ke Budget Ki Baat Karun Kal Jo Budget Pesh Hua Tha 2018 Ka Usamen Unhone Koi Bhi Answer Nahi Diya Unse Kafi Question Puche Gaye Unhone Hamesha Ki Tarah Koi Response Us Time Nahi Diya Kyonki Unke Paas Experience Nahi Hai Halanki Wah Padhe Likhe Kafi Hai Lekin Unke Paas Anubhav Aur Experience Kum Hai Jiski Wajah Se Wah Instant Answer Nahi De Paate Itne Padhe Likhe Hone Ke Baad Bhi Wah Satta Mein Nahi Aa Pa Rahe Hain Uska Reason Yahi Hai Ki Unke Paas Experience Ki Kami Hai Aur Desh Ko Ek Vyakti Chahiye Hota Hai Jo Experience Ho Jo Ki Rahul Gandhi Nahi Hai To Filhal Ke Liye Main Agar Baat Karun To Rahul Gandhi Ko Hamare Desh Ki Janta Nahi Dekh Payegi Ezay PM Ya Ezay Leader Ho Sakta Hai Ki Aane Wale Kuch Salon Baad Rahul Gandhi Ji Bhi Experience Ho Jaye Anubhav Ho Jaye Dhire Dhire To Log Hamare Desh Ki Janta Unko Dekh Le Filhal Mein Mujhe Nahi Lagta Ki Wah Satta Mein Aa Sakte Hain Aur Jo 2019 Ke Elections Hai Jo Hone Wale Hain Usamen Bhi Mujhe Jada Tar Jo Ummid Lag Rahi Hai Jitne Ki Vo Modi Ji Ki Lag Rahi Hai Kyonki Wah Jyada Anubhavi Hai Aur Jis Tarike Se Unka Alag Alag Pradeshon Mein Jo Unka Jo Result Raha Hai Jo Satta Banai Hai Ki Jaise Gujarati Ho Chahe Up Ho Chahe Himachal Ho Kafi Acchi Rahi Hai To Aane Wale Time Mein Ummid Jo Lag Rahi Hai Wah Modi Ji Ki Lag Rahi Hai Aur Rahul Gandhi Nahi Aa Sakte Satta Mein Aise Jyada Ummid Hai
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देश को अभी इस वक्त जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है वह मेरे हिसाब से तो अनुभव ही है| तो मुझे तो नहीं लगता है कि देश अपना भविष्य, अपना सब कुछ दाव पर लगाएगे कि राहुल गांधी जैसे कम अनुभव वाले नेता को अपने भविष्य में चुनकर| मैं मानती हूं कि नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए बहुत सारे वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं| उनके द्वारा किए गए बहुत सारे काम अभी तक आधे अधूरे पड़े हैं और जैसे कि जीएसटी के बाद हमें काफी नुकसान भी हुआ है| पर एक बात की गारंटी कि मोदी जी के पास अनुभव काफी साल का है और जहां तक राहुल गांधी की बात है तो मैं भी इस बात से सहमत हूं कि उनके पास गांधी टाइटल के अलावा और कोई अनुभव है गांधी टाइटल के अलावा और कोई उपलब्धि भी नहीं है उनके पास| तो मुझे तो नहीं लगता है कि भारत राहुल गांधी को अपना नेता चुनेगी भविष्य में| अगर इस बीच वो कांग्रेस में कुछ बेहतर कर जाते हैं या फिर कांग्रेस की सोच को बदल देते हैं और कुछ बेहतर काम करके दिखाते हैं विपक्ष में रहते हुए| तो शायद जनता उन्हें इस साल तो नहीं पर मेरा मतलब 2019 के चुनाव में तो नहीं पर उसके बाद 2024 वाले चुनाव में शायद उनके बारे में सोच सकती है|Desh Ko Abhi Is Waqt Jis Cheez Ki Sabse Jyada Zaroorat Hai Wah Mere Hisab Se To Anubhav Hi Hai To Mujhe To Nahi Lagta Hai Ki Desh Apna Bhavishya Apna Sab Kuch Daav Par Lagaege Ki Rahul Gandhi Jaise Kum Anubhav Wale Neta Ko Apne Bhavishya Mein Chunkar Main Maanati Hoon Ki Narendra Modi Dwara Kiye Gaye Bahut Sare Waade Abhi Tak Poore Nahi Hue Hain Unke Dwara Kiye Gaye Bahut Sare Kaam Abhi Tak Aadhe Adhure Pade Hain Aur Jaise Ki Gst Ke Baad Hume Kafi Nuksan Bhi Hua Hai Par Ek Baat Ki Guarantee Ki Modi Ji Ke Paas Anubhav Kafi Saal Ka Hai Aur Jahan Tak Rahul Gandhi Ki Baat Hai To Main Bhi Is Baat Se Sahmat Hoon Ki Unke Paas Gandhi Title Ke Alava Aur Koi Anubhav Hai Gandhi Title Ke Alava Aur Koi Upalabdhi Bhi Nahi Hai Unke Paas To Mujhe To Nahi Lagta Hai Ki Bharat Rahul Gandhi Ko Apna Neta Chunegi Bhavishya Mein Agar Is Beech Vo Congress Mein Kuch Behtar Kar Jaate Hain Ya Phir Congress Ki Soch Ko Badal Dete Hain Aur Kuch Behtar Kaam Karke Dikhate Hain Vipaksh Mein Rehte Hue To Shayad Janta Unhen Is Saal To Nahi Par Mera Matlab 2019 Ke Chunav Mein To Nahi Par Uske Baad 2024 Wale Chunav Mein Shayad Unke Baare Mein Soch Sakti Hai
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मुझे लगता है कि अभी हमारे देश को एक परिपक्व और दृढ़ निश्चय नेता की जरूरत है जो निर्भीक होकर अपने निर्णय दुनिया के सामने रख सके| भारत अभी एक विशाल देश है और कई सारी समस्याओं से भी घिरा हुआ है इन समस्याओं के समाधान के लिए पाकिस्तान में चीन से अपने हक के लिए लड़ने के लिए एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो इन सभी से पूरी नम्रता और कूटनीति से निपट सके| मुझे नहीं लगता है कि राहुल गांधी को कूटनीति और राजनीति दोनों ही में इतना ज्ञान और इतनी परिपक्वता है कि वह इन समस्याओं का सामना अपने बूते पर कर सकें| अगर वह प्रधानमंत्री बन भी जाते हैं तो कांग्रेस के जो दिग्गज नेता हैं सरकार वही जलाएंगे| राहुल गांधी को अभी काफी कुछ सीखना है, अनुभव करना है| अच्छा है कि वह इस पर ध्यान देकर आने वाले वक्त में एक मजबूत विपक्ष को खड़ा कर सके| मजबूत विपक्ष होने से सत्ताधारी सरकार को भी काम करके दिखाना पड़ेगा| उनके सामने चुनौती होगी कि अगर उन्होंने जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा तो जनता विपक्ष की ओर जा सकती है| वर्तमान सरकार ने अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में जितने भी वादे किए थे, उन्हें पूरा करने की एक कोशिश जरूर की है| और मुझे लगता है कि मोदी सरकार को जनता को एक और मौका देना चाहिए| अभी हमारे देश को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की आवश्यकता है| भारत को विश्व के सामने शक्तिशाली बनकर खड़ा होने के लिए यह नेतृत्व जरूरी है|निर्भीक, दूर दर्शनीय और पारदर्शी प्रधानमंत्री आज की जरूरत है|Mujhe Lagta Hai Ki Abhi Hamare Desh Ko Ek Paripakva Aur Dridh Nishchay Neta Ki Zaroorat Hai Jo Nirbhik Hokar Apne Nirnay Duniya Ke Samane Rakh Sake Bharat Abhi Ek Vishal Desh Hai Aur Kai Saree Samasyaon Se Bhi Ghira Hua Hai In Samasyaon Ke Samadhan Ke Liye Pakistan Mein Chin Se Apne Haq Ke Liye Ladane Ke Liye Ek Aise Netritva Ki Zaroorat Hai Jo In Sabhi Se Puri Namratha Aur Kutneeti Se Nipat Sake Mujhe Nahi Lagta Hai Ki Rahul Gandhi Ko Kutneeti Aur Rajneeti Dono Hi Mein Itna Gyaan Aur Itni Paripakvata Hai Ki Wah In Samasyaon Ka Samana Apne Bute Par Kar Saken Agar Wah Pradhanmantri Ban Bhi Jaate Hain To Congress Ke Jo Diggaj Neta Hain Sarkar Wahi Jalaenge Rahul Gandhi Ko Abhi Kafi Kuch Sikhna Hai Anubhav Karna Hai Accha Hai Ki Wah Is Par Dhyan Dekar Aane Wale Waqt Mein Ek Mazboot Vipaksh Ko Khada Kar Sake Mazboot Vipaksh Hone Se Sattadhari Sarkar Ko Bhi Kaam Karke Dikhana Padega Unke Samane Chunauti Hogi Ki Agar Unhone Janta Ki Ummidon Par Khara Nahi Utara To Janta Vipaksh Ki Oar Ja Sakti Hai Vartaman Sarkar Ne Apne 4 Varsh Ke Karyakal Mein Jitne Bhi Waade Kiye The Unhen Pura Karne Ki Ek Koshish Jarur Ki Hai Aur Mujhe Lagta Hai Ki Modi Sarkar Ko Janta Ko Ek Aur Mauka Dena Chahiye Abhi Hamare Desh Ko Pradhanmantri Modi Ke Netritva Ki Avashyakta Hai Bharat Ko Vishwa Ke Samane Shaktishaali Bankar Khada Hone Ke Liye Yeh Netritva Zaroori Hai Nirbhik Dur Darshaneey Aur Pardarshi Pradhanmantri Aaj Ki Zaroorat Hai
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जी नहीं बिल्कुल भी नहीं, भारत की जनता कभी भी भविष्य में राहुल गांधी है जैसे कम अनुभव रखने वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व नहीं देगी| उसके कारण बहुत सारे हैं क्योंकि जब भी कोई आदमी, कोई इंसान कम अनुभव रखता है राजनीति में, याने के कम एक्सपीरियंस होता है उनको राजनीति में, तो कैसे वह हमारे देश को आगे बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं? कैसे हो इतनी देश की जनता को संभाल सकते हैं? तो यही कारण है कि कोई भी जनता उनको नहीं चाहिए कि वह इस प्राइम मिनिस्टर बने या प्रेसिडेंट बने या कुछ भी ऐसा बने जिससे वह देश का नेतृत्व करें| उसके अलावा जितना मैं जानती हूं उतना राहुल गांधी जी हमेशा देश से बाहर पढे हैं, देश से बाहर रहे हैं और इसी वजह से उनको देश की जो जरूरते है देश के लोगों की जो जरूरते है और ऐसी चीजें हैं जिन चीजों की वजह से देश आगे बढ़ सकता है हमारा और उसमें तरक्की हो सकती है वह सब उन चीजों को जानते ही नहीं है क्योंकि उनको देश में वो रहे ही नहीं है| और इसी वजह से वह देश की जो हिस्ट्री है और बाकी सब चीजें हैं उसके बारे में उनको कुछ जादा पता भी नहीं है| तो यही कारण है कि उस इंसान को आप कैसे देश का नेतृत्व दे सकते हैं? जब उनको उस देश के बारे में कुछ पता ही नहीं है| और छोटी-छोटी चीजों के लिए भी उनको लोगों से सहायता लेनी पड़ती है या फिर लोगों से पूछना पड़ता है कि क्या यह चीज एसे होती है क्या नहीं| और सबसे सिंपल सी बात वो जो भी कुछ करते हैं उसमें साफ पता चलता है कि यह सिर्फ एक वोट बैंक बढ़ाने की स्ट्रेटेजी है ना कि वह खुद से कर रहे हैं| और जब इंसान किसी राजनेता से, किसी भी नेता से भावनात्मक जुड़ाव नहीं महसूस कर पाता, तब तक वो नेतृत्व देना पसंद बिल्कुल भी नहीं करता है| तो मेरे हिसाब से भविष्य में कभी भी राहुल गांधी को देश का नेतृत्व नहीं मिलेगा|

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जी नहीं बिल्कुल भी नहीं, भारत की जनता कभी भी भविष्य में राहुल गांधी है जैसे कम अनुभव रखने वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व नहीं देगी| उसके कारण बहुत सारे हैं क्योंकि जब भी कोई आदमी, कोई इंसान कम अनुभव रखता है राजनीति में, याने के कम एक्सपीरियंस होता है उनको राजनीति में, तो कैसे वह हमारे देश को आगे बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं? कैसे हो इतनी देश की जनता को संभाल सकते हैं? तो यही कारण है कि कोई भी जनता उनको नहीं चाहिए कि वह इस प्राइम मिनिस्टर बने या प्रेसिडेंट बने या कुछ भी ऐसा बने जिससे वह देश का नेतृत्व करें| उसके अलावा जितना मैं जानती हूं उतना राहुल गांधी जी हमेशा देश से बाहर पढे हैं, देश से बाहर रहे हैं और इसी वजह से उनको देश की जो जरूरते है देश के लोगों की जो जरूरते है और ऐसी चीजें हैं जिन चीजों की वजह से देश आगे बढ़ सकता है हमारा और उसमें तरक्की हो सकती है वह सब उन चीजों को जानते ही नहीं है क्योंकि उनको देश में वो रहे ही नहीं है| और इसी वजह से वह देश की जो हिस्ट्री है और बाकी सब चीजें हैं उसके बारे में उनको कुछ जादा पता भी नहीं है| तो यही कारण है कि उस इंसान को आप कैसे देश का नेतृत्व दे सकते हैं? जब उनको उस देश के बारे में कुछ पता ही नहीं है| और छोटी-छोटी चीजों के लिए भी उनको लोगों से सहायता लेनी पड़ती है या फिर लोगों से पूछना पड़ता है कि क्या यह चीज एसे होती है क्या नहीं| और सबसे सिंपल सी बात वो जो भी कुछ करते हैं उसमें साफ पता चलता है कि यह सिर्फ एक वोट बैंक बढ़ाने की स्ट्रेटेजी है ना कि वह खुद से कर रहे हैं| और जब इंसान किसी राजनेता से, किसी भी नेता से भावनात्मक जुड़ाव नहीं महसूस कर पाता, तब तक वो नेतृत्व देना पसंद बिल्कुल भी नहीं करता है| तो मेरे हिसाब से भविष्य में कभी भी राहुल गांधी को देश का नेतृत्व नहीं मिलेगा|Ji Nahi Bilkul Bhi Nahi Bharat Ki Janta Kabhi Bhi Bhavishya Mein Rahul Gandhi Hai Jaise Kum Anubhav Rakhne Wale Vyakti Ko Desh Ka Netritva Nahi Degi Uske Kaaran Bahut Sare Hain Kyonki Jab Bhi Koi Aadmi Koi Insaan Kum Anubhav Rakhta Hai Rajneeti Mein Yaane Ke Kum Experience Hota Hai Unko Rajneeti Mein To Kaise Wah Hamare Desh Ko Aage Badhane Ke Baare Mein Soch Sakte Hain Kaise Ho Itni Desh Ki Janta Ko Sambhaala Sakte Hain To Yahi Kaaran Hai Ki Koi Bhi Janta Unko Nahi Chahiye Ki Wah Is Prime Minister Bane Ya President Bane Ya Kuch Bhi Aisa Bane Jisse Wah Desh Ka Netritva Karen Uske Alava Jitna Main Jaanti Hoon Utana Rahul Gandhi Ji Hamesha Desh Se Bahar Padhe Hain Desh Se Bahar Rahe Hain Aur Isi Wajah Se Unko Desh Ki Jo Jarurate Hai Desh Ke Logon Ki Jo Jarurate Hai Aur Aisi Cheezen Hain Jin Chijon Ki Wajah Se Desh Aage Badh Sakta Hai Hamara Aur Usamen Tarakki Ho Sakti Hai Wah Sab Un Chijon Ko Jante Hi Nahi Hai Kyonki Unko Desh Mein Vo Rahe Hi Nahi Hai Aur Isi Wajah Se Wah Desh Ki Jo History Hai Aur Baki Sab Cheezen Hain Uske Baare Mein Unko Kuch Jada Pata Bhi Nahi Hai To Yahi Kaaran Hai Ki Us Insaan Ko Aap Kaise Desh Ka Netritva De Sakte Hain Jab Unko Us Desh Ke Baare Mein Kuch Pata Hi Nahi Hai Aur Choti Choti Chijon Ke Liye Bhi Unko Logon Se Sahaayata Leni Padhti Hai Ya Phir Logon Se Poochna Padata Hai Ki Kya Yeh Cheez Ese Hoti Hai Kya Nahi Aur Sabse Simple Si Baat Vo Jo Bhi Kuch Karte Hain Usamen Saaf Pata Chalta Hai Ki Yeh Sirf Ek Vote Bank Badhane Ki Strategy Hai Na Ki Wah Khud Se Kar Rahe Hain Aur Jab Insaan Kisi Rajneta Se Kisi Bhi Neta Se Bhavnatmak Judaav Nahi Mahsus Kar Pata Tab Tak Vo Netritva Dena Pasand Bilkul Bhi Nahi Karta Hai To Mere Hisab Se Bhavishya Mein Kabhi Bhi Rahul Gandhi Ko Desh Ka Netritva Nahi Milega
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देखिये सर मुझे ऐसा लगता है कि भारत की जनता शायद राहुल गांधी को डायरेक्टली ये नेतृत्व ना सोंपे| लेकिन देखिये हमारे पास ऑप्शन क्या है? बीजेपी, कांग्रेस बसपा जो इतना मतलब मेंन स्ट्रीम पार्टी नहीं है तो इसके अलावा हमारे पास और कोई ऑप्शन नहीं है तो फिर बीजेपी आती है तो शायद नरेंद्र मोदी दोबारा आएंगे और अगर कांग्रेस आई तो जरूर वह पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी| तो मेरे हिसाब से तो राहुल गांधी को ही लेकर आएंगे, वह देश का नेतृत्व सोपेगे, देश का प्रधानमंत्री उन्हें बनाएंगे| तो ये हमारे हाथ में नहीं है अगर यह सरकार बीजेपी सरकार नहीं परफॉर्म कर पाई अच्छे से और सरकार अगर लोगों ने इन्हें नहीं चुना नेक्स्ट टाइम तो कांग्रेस ही आएगी मेरे हिसाब से| जिस तरह केजरीवाल के टाइम पर हुआ था तो मुझे लगता नहीं वैसा कोई दोबारा रिस्क लेना चाहेगा| तो नेतृत्व देना ना चाहते हुए भी उन्हें ही दिया जाएगा क्योंकि ऑप्शन नहीं है| ज्यादा लोग पॉलिटिक्स में जो आ रहे हैं वह उतने केपेबल या उतने एबल नहीं है कि वह एक सेंटर पार्टी बन सके या फिर एक रिकोगनाइज्ड पार्टी बन सके| छोटे छोटे इलाको में अपनी अपनी पार्टीज है बट देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए तो आपके पास पूरे देश में बहुमत होनी चाहिए ना| तो उसके लिए मुझे लगता है कि अभी कुछ मुझे लगता है ऐसा कि अभी एक आधी बार और ऐसे ही राहुल गांधी या फिर बीजेपी के बीच में यह होता रहेगा अदला-बदली| लेकिन इसके बाद में आने वाले समय में नए पार्टी लीडर्स आए और नए कोई आए लीडर्स वगैरह या कोई भी तो शायद हो सकता है कि चेंजेस आ जाए वरना अभी के लिए चेंजेस पॉसिबल नहीं है|

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देखिये सर मुझे ऐसा लगता है कि भारत की जनता शायद राहुल गांधी को डायरेक्टली ये नेतृत्व ना सोंपे| लेकिन देखिये हमारे पास ऑप्शन क्या है? बीजेपी, कांग्रेस बसपा जो इतना मतलब मेंन स्ट्रीम पार्टी नहीं है तो इसके अलावा हमारे पास और कोई ऑप्शन नहीं है तो फिर बीजेपी आती है तो शायद नरेंद्र मोदी दोबारा आएंगे और अगर कांग्रेस आई तो जरूर वह पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी| तो मेरे हिसाब से तो राहुल गांधी को ही लेकर आएंगे, वह देश का नेतृत्व सोपेगे, देश का प्रधानमंत्री उन्हें बनाएंगे| तो ये हमारे हाथ में नहीं है अगर यह सरकार बीजेपी सरकार नहीं परफॉर्म कर पाई अच्छे से और सरकार अगर लोगों ने इन्हें नहीं चुना नेक्स्ट टाइम तो कांग्रेस ही आएगी मेरे हिसाब से| जिस तरह केजरीवाल के टाइम पर हुआ था तो मुझे लगता नहीं वैसा कोई दोबारा रिस्क लेना चाहेगा| तो नेतृत्व देना ना चाहते हुए भी उन्हें ही दिया जाएगा क्योंकि ऑप्शन नहीं है| ज्यादा लोग पॉलिटिक्स में जो आ रहे हैं वह उतने केपेबल या उतने एबल नहीं है कि वह एक सेंटर पार्टी बन सके या फिर एक रिकोगनाइज्ड पार्टी बन सके| छोटे छोटे इलाको में अपनी अपनी पार्टीज है बट देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए तो आपके पास पूरे देश में बहुमत होनी चाहिए ना| तो उसके लिए मुझे लगता है कि अभी कुछ मुझे लगता है ऐसा कि अभी एक आधी बार और ऐसे ही राहुल गांधी या फिर बीजेपी के बीच में यह होता रहेगा अदला-बदली| लेकिन इसके बाद में आने वाले समय में नए पार्टी लीडर्स आए और नए कोई आए लीडर्स वगैरह या कोई भी तो शायद हो सकता है कि चेंजेस आ जाए वरना अभी के लिए चेंजेस पॉसिबल नहीं है|Dekhiye Sar Mujhe Aisa Lagta Hai Ki Bharat Ki Janta Shayad Rahul Gandhi Ko Directly Ye Netritva Na Sonpe Lekin Dekhiye Hamare Paas Option Kya Hai Bjp Congress Basapa Jo Itna Matlab Man Stream Party Nahi Hai To Iske Alava Hamare Paas Aur Koi Option Nahi Hai To Phir Bjp Aati Hai To Shayad Narendra Modi Dobara Aayenge Aur Agar Congress Eye To Jarur Wah Party Ke Adhyaksh Rahul Gandhi To Mere Hisab Se To Rahul Gandhi Ko Hi Lekar Aayenge Wah Desh Ka Netritva Sopege Desh Ka Pradhanmantri Unhen Banayenge To Ye Hamare Hath Mein Nahi Hai Agar Yeh Sarkar Bjp Sarkar Nahi Perform Kar Payi Acche Se Aur Sarkar Agar Logon Ne Inhen Nahi Chuna Next Time To Congress Hi Aayegi Mere Hisab Se Jis Tarah Kejriwal Ke Time Par Hua Tha To Mujhe Lagta Nahi Waisa Koi Dobara Risk Lena Chahega To Netritva Dena Na Chahte Hue Bhi Unhen Hi Diya Jayega Kyonki Option Nahi Hai Jyada Log Politics Mein Jo Aa Rahe Hain Wah Utne Capable Ya Utne Able Nahi Hai Ki Wah Ek Center Party Ban Sake Ya Phir Ek Rikognaijd Party Ban Sake Chote Chote Ilako Mein Apni Apni Parties Hai But Desh Ka Pradhanmantri Banane Ke Liye To Aapke Paas Poore Desh Mein Bahumat Honi Chahiye Na To Uske Liye Mujhe Lagta Hai Ki Abhi Kuch Mujhe Lagta Hai Aisa Ki Abhi Ek Aadhi Baar Aur Aise Hi Rahul Gandhi Ya Phir Bjp Ke Beech Mein Yeh Hota Rahega Adala Badli Lekin Iske Baad Mein Aane Wale Samay Mein Naye Party Leaders Aaye Aur Naye Koi Aaye Leaders Vagairah Ya Koi Bhi To Shayad Ho Sakta Hai Ki Changes Aa Jaye Varana Abhi Ke Liye Changes Possible Nahi Hai
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