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वर्तमान शिक्षा प्रणाली के गुण दोषों का अवलोकन करें? ...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखे जो हमारी शिक्षा प्रणाली है उसकी सबसे बड़ी खामी है कि वह हमारी मेमोरी सिर्फ मेमोरी हमारी वह चेक करती है मतलब आपने कितना पढ़ा और आपको कितना याद रहा बस इससे आधा चीजों पर ध्यान नहीं देती और अगर प्रैक्टिकल के नाम पर भी आपको है जो कि प्रैक्टिकल एस्पेक्ट्स जरूरी है पढ़ाई में उसको वह जगह ही नहीं दी जाती और अगर बीवी जाती है तो उसके प्रैक्टिकल ऐसे होते हैं कि एक ऑफिस उठाकर दूसरे में लोग छाप देते हैं और टेस्ट कोई करता नहीं है और अगर टेस्ट करता है तो एक ग्रुप कर लेता होगा बाकी सब उसी का छाप देते हैं रीडिंग तो ऐसे होता है प्रैक्टिकल तो आदमी सीखेगा कहां से तो जब सीखेगा नहीं तो फिर इसके लिए आएगी इसके लिए आएगी तो जवाब नहीं मिलेगी तो यह सब चीजें होती हैं इसीलिए इंडिया में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की जनसंख्या बताएं जी से बढ़ रही है क्योंकि कुकुरमुत्ता की तरह कॉलेज खुल गए हर जगह तो उसकी वजह से वहां सुविधा तो होती नहीं अच्छे टीचर होते नहीं है तो वह सिर्फ एक तरीके से फॉर्मेट अपनाते हैं कि ऐसे से पढ़ाना है जो यूनिवर्सिटी ने यूनिवर्सिटी को जो कंट्रोल करती हो ना सब बता रखा है यूजीसी ने कि ऐसे से पढ़ाना है ठीक वैसे ही पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके पास वह इक्विपमेंट्स नहीं है कि वह उस चीजों को अच्छे से बता सकें लेकिन वह कंप्लीट करा रहे बस तो आप पढ़ लेते हैं नंबर भी ले आते हैं लेकिन आपके अंदर इसकी नहीं आती है फिर आपको जवाब नहीं मिलती है यह शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी है और इसमें प्रैक्टिकल टीका बहुत दिक्कत है और मैं मिल टेस्ट किया कि आपके सिर्फ क्या आपको क्लास में जो पढ़ाया है आप कैसे जाकर पूरा छाप आएंगे और आप खा पाए तो आपकी मेमोरी बहुत अच्छी आपको यह लीजिए नंबर आप अच्छे से है ना तो सिर्फ मेमोरी पर कंसंट्रेट किया था प्रैक्टिकल इटी पर कोई ध्यान नहीं गया था और हमारे यहां शिक्षा का जो सिस्टम है अब यह भी है कि जनसंख्या कितनी बड़ी है उसके बाद में टीचर बहुत कम है और जो टीचर है वह भी उनका भी रिक्रूटमेंट वैसे होता जैसे स्टूडेंट को पढ़ाया भाई वह भी तो आए इसलिए जुकेशन सिस्टम सही है ना तो वह भी ऐसे टीचर आते हैं जिनको प्रैक्टिकल कोई नहीं होती वह भी सिर्फ पढ़ाई रहे सिर्फ पढ़ा कर लिखवा कर नंबर ले आएंगे वहीं पर ध्यान नहीं देते कि बहुत कम स्कूलों में बताया जाता है कि जब आप कुछ पढ़ रहे हैं तो उस पर स्पेशली जोर दिया जाता है कि इस पर सवाल करिए कहां कोई जवाब देता है एक सवाल के मर कहां कोई कहता है कि सवाल करने चाहिए है ना सिर्फ आपको जो उसमें सवाल दिया किताब में वही उठाकर जोआन्ने एग्जाम में इंपॉर्टेंट निपोटेंट यह इंपॉर्टेंट टेक मार दिया और इन्हीं सब से आएगा तो इसकी वजह से दिक्कत आती है कि बच्चे के मन में क्वेश्चन ही नहीं बनते जब क्वेश्चन नहीं बनते हैं तो उसको कौन से जितना अच्छे समझ में आ सकता था वह नहीं आता है ना तो यह क्वेश्चन नहीं होनी चाहिए और उसके लिए टीचर भी उसी हिसाब से लैंड होना चाहिए उसी सबसे बड़े होने चाहिए कि वह बच्चों को भी वैसे ही पड़ा सके यह दिक्कत आती है बहुत ज्यादा आती है और हमारे गांव में तो कैसे स्कूल चलता है आपने देखा ही होगा बच्चों के स्कूल टीचर आते ही नहीं है आते हैं तो क्लास में सोते रहते हैं ना तो यह सब देखते हैं बहुत ज्यादा बुरी हालत है हमारे शिक्षा प्रणाली की तो देखें तभी सही होता है कि नहीं आर्गुण की बात करें तो ढूंढना बड़ा मुश्किल का काम है मुझे तो नहीं दिखते हैं वहां काफी अच्छी पढ़ाई होती है प्राइवेट स्कूल शिव तहसील आपने देखा गांव में भी लोग नहीं मिल सके और कपड़े मिल सके बस था मिल सके बाकी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में क्योंकि इनको पता है कि उनका बच्चा थोड़ा वो तो चिल्लाया लेबोरेटरी हो रही लाइब्रेरी है सब का जो है यह प्राइवेट स्कूल में मिल रही है सरकारी में है ही नहीं तो इसलिए प्राइवेट स्कूल अच्छा काम कर रहे हैं और बहुत बढ़िया बढ़िया स्कूल से जैसे यहां लखनऊ में जो है सिटी मांटेसरी स्कूल लखनऊ का नंबर वन स्कूल से खाता है क्योंकि वह नंबर वन माना जाता है क्योंकि उसके रिजल्ट भी बढ़िया है और वह प्रैक्टिकल नॉलेज भी दे रहा है और है लखनऊ में बहुत सारे स्कूल जो उन्होंने खोला होता है प्राइवेट लोगों ने प्राइवेट स्कूल खोल रखा होता है और वह बहुत अच्छा चल रहा होता है क्योंकि वहां वैसे पढ़ाई हो रही है सरकारी में कोई पढ़ाई नहीं होती है जल्दी बहुत कम है जैसे केंद्रीय विद्यालय दिल्ली में फिर भी होती है बाकी नॉर्मल ही जो सरकारी होते हैं उसमें कुछ आसपास ही नहीं होती है फिर वाही करता है गुण के बात करें तो एक चीज अच्छी है सरकारी ना वह यह है कि लोगों की पहुंच में है प्राइवेट में यह खराबी है कि किसी से इतनी ज्यादा होती है कि नॉर्मल आदमी पहुंची नहीं सकता है और सरकारी की फीस कम होती है लेकिन फिर सुविधाएं भी कम हो जाती है पढ़ पढ़ने के लिए अच्छा है कि सरकारी स्कूल में आप पढ़ सकते हैं कम पैसे में पढ़ाई हो जाती है
लिखे जो हमारी शिक्षा प्रणाली है उसकी सबसे बड़ी खामी है कि वह हमारी मेमोरी सिर्फ मेमोरी हमारी वह चेक करती है मतलब आपने कितना पढ़ा और आपको कितना याद रहा बस इससे आधा चीजों पर ध्यान नहीं देती और अगर प्रैक्टिकल के नाम पर भी आपको है जो कि प्रैक्टिकल एस्पेक्ट्स जरूरी है पढ़ाई में उसको वह जगह ही नहीं दी जाती और अगर बीवी जाती है तो उसके प्रैक्टिकल ऐसे होते हैं कि एक ऑफिस उठाकर दूसरे में लोग छाप देते हैं और टेस्ट कोई करता नहीं है और अगर टेस्ट करता है तो एक ग्रुप कर लेता होगा बाकी सब उसी का छाप देते हैं रीडिंग तो ऐसे होता है प्रैक्टिकल तो आदमी सीखेगा कहां से तो जब सीखेगा नहीं तो फिर इसके लिए आएगी इसके लिए आएगी तो जवाब नहीं मिलेगी तो यह सब चीजें होती हैं इसीलिए इंडिया में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की जनसंख्या बताएं जी से बढ़ रही है क्योंकि कुकुरमुत्ता की तरह कॉलेज खुल गए हर जगह तो उसकी वजह से वहां सुविधा तो होती नहीं अच्छे टीचर होते नहीं है तो वह सिर्फ एक तरीके से फॉर्मेट अपनाते हैं कि ऐसे से पढ़ाना है जो यूनिवर्सिटी ने यूनिवर्सिटी को जो कंट्रोल करती हो ना सब बता रखा है यूजीसी ने कि ऐसे से पढ़ाना है ठीक वैसे ही पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके पास वह इक्विपमेंट्स नहीं है कि वह उस चीजों को अच्छे से बता सकें लेकिन वह कंप्लीट करा रहे बस तो आप पढ़ लेते हैं नंबर भी ले आते हैं लेकिन आपके अंदर इसकी नहीं आती है फिर आपको जवाब नहीं मिलती है यह शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी है और इसमें प्रैक्टिकल टीका बहुत दिक्कत है और मैं मिल टेस्ट किया कि आपके सिर्फ क्या आपको क्लास में जो पढ़ाया है आप कैसे जाकर पूरा छाप आएंगे और आप खा पाए तो आपकी मेमोरी बहुत अच्छी आपको यह लीजिए नंबर आप अच्छे से है ना तो सिर्फ मेमोरी पर कंसंट्रेट किया था प्रैक्टिकल इटी पर कोई ध्यान नहीं गया था और हमारे यहां शिक्षा का जो सिस्टम है अब यह भी है कि जनसंख्या कितनी बड़ी है उसके बाद में टीचर बहुत कम है और जो टीचर है वह भी उनका भी रिक्रूटमेंट वैसे होता जैसे स्टूडेंट को पढ़ाया भाई वह भी तो आए इसलिए जुकेशन सिस्टम सही है ना तो वह भी ऐसे टीचर आते हैं जिनको प्रैक्टिकल कोई नहीं होती वह भी सिर्फ पढ़ाई रहे सिर्फ पढ़ा कर लिखवा कर नंबर ले आएंगे वहीं पर ध्यान नहीं देते कि बहुत कम स्कूलों में बताया जाता है कि जब आप कुछ पढ़ रहे हैं तो उस पर स्पेशली जोर दिया जाता है कि इस पर सवाल करिए कहां कोई जवाब देता है एक सवाल के मर कहां कोई कहता है कि सवाल करने चाहिए है ना सिर्फ आपको जो उसमें सवाल दिया किताब में वही उठाकर जोआन्ने एग्जाम में इंपॉर्टेंट निपोटेंट यह इंपॉर्टेंट टेक मार दिया और इन्हीं सब से आएगा तो इसकी वजह से दिक्कत आती है कि बच्चे के मन में क्वेश्चन ही नहीं बनते जब क्वेश्चन नहीं बनते हैं तो उसको कौन से जितना अच्छे समझ में आ सकता था वह नहीं आता है ना तो यह क्वेश्चन नहीं होनी चाहिए और उसके लिए टीचर भी उसी हिसाब से लैंड होना चाहिए उसी सबसे बड़े होने चाहिए कि वह बच्चों को भी वैसे ही पड़ा सके यह दिक्कत आती है बहुत ज्यादा आती है और हमारे गांव में तो कैसे स्कूल चलता है आपने देखा ही होगा बच्चों के स्कूल टीचर आते ही नहीं है आते हैं तो क्लास में सोते रहते हैं ना तो यह सब देखते हैं बहुत ज्यादा बुरी हालत है हमारे शिक्षा प्रणाली की तो देखें तभी सही होता है कि नहीं आर्गुण की बात करें तो ढूंढना बड़ा मुश्किल का काम है मुझे तो नहीं दिखते हैं वहां काफी अच्छी पढ़ाई होती है प्राइवेट स्कूल शिव तहसील आपने देखा गांव में भी लोग नहीं मिल सके और कपड़े मिल सके बस था मिल सके बाकी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में क्योंकि इनको पता है कि उनका बच्चा थोड़ा वो तो चिल्लाया लेबोरेटरी हो रही लाइब्रेरी है सब का जो है यह प्राइवेट स्कूल में मिल रही है सरकारी में है ही नहीं तो इसलिए प्राइवेट स्कूल अच्छा काम कर रहे हैं और बहुत बढ़िया बढ़िया स्कूल से जैसे यहां लखनऊ में जो है सिटी मांटेसरी स्कूल लखनऊ का नंबर वन स्कूल से खाता है क्योंकि वह नंबर वन माना जाता है क्योंकि उसके रिजल्ट भी बढ़िया है और वह प्रैक्टिकल नॉलेज भी दे रहा है और है लखनऊ में बहुत सारे स्कूल जो उन्होंने खोला होता है प्राइवेट लोगों ने प्राइवेट स्कूल खोल रखा होता है और वह बहुत अच्छा चल रहा होता है क्योंकि वहां वैसे पढ़ाई हो रही है सरकारी में कोई पढ़ाई नहीं होती है जल्दी बहुत कम है जैसे केंद्रीय विद्यालय दिल्ली में फिर भी होती है बाकी नॉर्मल ही जो सरकारी होते हैं उसमें कुछ आसपास ही नहीं होती है फिर वाही करता है गुण के बात करें तो एक चीज अच्छी है सरकारी ना वह यह है कि लोगों की पहुंच में है प्राइवेट में यह खराबी है कि किसी से इतनी ज्यादा होती है कि नॉर्मल आदमी पहुंची नहीं सकता है और सरकारी की फीस कम होती है लेकिन फिर सुविधाएं भी कम हो जाती है पढ़ पढ़ने के लिए अच्छा है कि सरकारी स्कूल में आप पढ़ सकते हैं कम पैसे में पढ़ाई हो जाती है
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सबसे बड़ी कमी तो मुझे लगती है अपनी शिक्षा प्रणाली में लिया है कि प्रैक्टिकल की बहुत कमी है अभी मेरे साथ के व्यक्ति भी दिन भर पढ़ते रहते हैं रहते रहते हैं उन्हें नहीं पता कि चीज किस तरह से काम करनी है क्या काम करना है लेकिन दिन भर यही करते रहते हो तो मेरा मन है प्रैक्टिकल नॉलेज ज्यादा होना चाहिए टेस्ट पास करने के लिए नहीं होनी चाहिए किसी का ना होना चाहिए आपको पढ़ाई को इंडस्ट्री में आना चाहिए टीचरों की भी जिम्मेदारी है क्या पढ़ाई को स्ट्रांग बनाएं आप उनको अगर करें दूसरी बात है कि शिक्षक रानी की संसद आपको खेल और बाकी सारी चीजें ऑफिसर को प्रमोट करना चाहिए कोई बच्चा अगर पढ़ाई नहीं कर रहा है 7:00 बजे उसका इंटरेस्ट नहीं है वह तलाशना चाहिए और उसके पीछे उस बच्चे को ध्यान देना चाहिए जैसे यूरोपियन कंट्रीज या अमेरिका में होता है तो अगर जिस दिन से हमारी यह सारी चीजें कंट्री में हो जाएंगी शिक्षा प्रणाली थोड़ा बेहतर होगी और हमें अच्छी रिजल्ट भेजें मिलेंगे इस कम पर ट्यूब आज के रिजल्ट के बाद
सबसे बड़ी कमी तो मुझे लगती है अपनी शिक्षा प्रणाली में लिया है कि प्रैक्टिकल की बहुत कमी है अभी मेरे साथ के व्यक्ति भी दिन भर पढ़ते रहते हैं रहते रहते हैं उन्हें नहीं पता कि चीज किस तरह से काम करनी है क्या काम करना है लेकिन दिन भर यही करते रहते हो तो मेरा मन है प्रैक्टिकल नॉलेज ज्यादा होना चाहिए टेस्ट पास करने के लिए नहीं होनी चाहिए किसी का ना होना चाहिए आपको पढ़ाई को इंडस्ट्री में आना चाहिए टीचरों की भी जिम्मेदारी है क्या पढ़ाई को स्ट्रांग बनाएं आप उनको अगर करें दूसरी बात है कि शिक्षक रानी की संसद आपको खेल और बाकी सारी चीजें ऑफिसर को प्रमोट करना चाहिए कोई बच्चा अगर पढ़ाई नहीं कर रहा है 7:00 बजे उसका इंटरेस्ट नहीं है वह तलाशना चाहिए और उसके पीछे उस बच्चे को ध्यान देना चाहिए जैसे यूरोपियन कंट्रीज या अमेरिका में होता है तो अगर जिस दिन से हमारी यह सारी चीजें कंट्री में हो जाएंगी शिक्षा प्रणाली थोड़ा बेहतर होगी और हमें अच्छी रिजल्ट भेजें मिलेंगे इस कम पर ट्यूब आज के रिजल्ट के बाद
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देवात्मा शिक्षक पानी का एक मुख्य कौन यह है कि आजकल जो भी पढ़ाया जा रहा है बस उसी में से पूछते हैं पेपर पर चावल के आटा लगवा लो जो टीचर ने पढ़ा है बस वही और अगर इसका दोष यह है कि इसमें खुशी प्रैक्टिकल नहीं पूछा जाता है शिप्रा टीवी चाहिए थ्योरी वगैरह ही पूछे जाते अगर व्यक्ति को बच्चे को मन से सोचने के लिए कुछ ऐसा कार्य दिया जाए तो बच्चों से नहीं कर पाते हैं मेरा मानना यह है कि आजकल जो शिक्षा चल रही है उसमें परिवर्तन की आवश्यकता है बच्चों को कुछ ऐसा कार्य दिया जाए एक करवाई जाए जिससे बच्चों को सोचने की आवश्यकता पड़े बचे हुए रोटी हुई चोरी बस वही पढ़ते आते हैं पर बदमाश लिखा दे समझा दे कर दिया बस कोई चीज कैसे वास्तव में कार्य करते जिसे पवन ऊर्जा कैसे कार्य करती है कैसे उत्पन्न होती है सब चीजों सिलेबस में उसको वाकई में बच्चों को दिखाया जाए समझा जाए तो बच्चे बिल्कुल समझेंगे शिफ्ट करने से कोई मतलब नहीं धन्यवाद
देवात्मा शिक्षक पानी का एक मुख्य कौन यह है कि आजकल जो भी पढ़ाया जा रहा है बस उसी में से पूछते हैं पेपर पर चावल के आटा लगवा लो जो टीचर ने पढ़ा है बस वही और अगर इसका दोष यह है कि इसमें खुशी प्रैक्टिकल नहीं पूछा जाता है शिप्रा टीवी चाहिए थ्योरी वगैरह ही पूछे जाते अगर व्यक्ति को बच्चे को मन से सोचने के लिए कुछ ऐसा कार्य दिया जाए तो बच्चों से नहीं कर पाते हैं मेरा मानना यह है कि आजकल जो शिक्षा चल रही है उसमें परिवर्तन की आवश्यकता है बच्चों को कुछ ऐसा कार्य दिया जाए एक करवाई जाए जिससे बच्चों को सोचने की आवश्यकता पड़े बचे हुए रोटी हुई चोरी बस वही पढ़ते आते हैं पर बदमाश लिखा दे समझा दे कर दिया बस कोई चीज कैसे वास्तव में कार्य करते जिसे पवन ऊर्जा कैसे कार्य करती है कैसे उत्पन्न होती है सब चीजों सिलेबस में उसको वाकई में बच्चों को दिखाया जाए समझा जाए तो बच्चे बिल्कुल समझेंगे शिफ्ट करने से कोई मतलब नहीं धन्यवाद
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