आपके जीवन में ऐसा क्या हुआ है जिसने आपको परिपक्व होने पर मजबूर कर दिया? ...

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करो कि लाइफ में ऐसे सिचुएशन आते हैं जहां पर उन्हें वक्त से पहले हमें जो रोजाना पड़ता है रिस्पांसिबिलिटीज मदारियों को अपने कंधों पर लेना पड़ता है मैं भी उनमें से एक हूं जब मैं 24 वर्ष की थी तब मेरे जो बड़े भाई हैं जो आदमी मेजर थे मेजर टेप श्यामसुंदर उन्होंने कारगिल के 2 साल पहले देश के लिए अपनी जान दे दी थी और उस घटना ने मेरे पुलिस ने की को बदल दिया मेरे लाइफ बदल गई मेरी सोच बदल गई और मेरी जिंदगी का एम भी बदल गया लक्ष्य भी बदल गया क्योंकि मेरे भाई ऐसे थे जो दूसरों के लिए जीते थे दूसरों के लिए उन्होंने अपनी जान दे दी देश के लिए अपनी जान दे दी हमसे दूसरों का भला करते थे आखिरी वक्त तक उन्हें दूसरों की अपनी पलटन के बारे में ही सोचे तो उनके जो अच्छे क्वालिटी है दूसरों के लिए जीना है वह मैंने भी अपना लिया है फिर मैंने पढ़कर साइकॉलजिस्ट बनी और मैं अपने इस विद्या और प्राइस के एक्सपीरियंस दूसरों का भला करती हूं और मैं चाहती हूं कि हर एक घर में अगर हम एक इंसान को उसकी लास्ट बस ले तो पूरी फैमिली बदल सकती है तो मेरा जो सोचना यह है कि इसमें चेंज वन लाइफ डेफिनेटली वह एक लाइक और काफी लाईफ को बदलेगी और काफी लाईफ को बदलेंगे और बदलाव जो आएगा वह अच्छा बदलाव आएगा और इस औरत को एक अच्छा पीसफुल जगह बनाएगा रहने के लिए तो डेफिनेट लिए फिर मेरे पैरंट्स मदारी मेरे पर आ गई और बहुत ही आगे से मुझे काफी कुच कुच होता है फ्रीडम का जहां पर आपको जो चाहिए आप कर सकते हो मैं नहीं कर पाई लेकिन मैं आई एम थैंकफूल क्योंकि एक तरीके से मैं जानती हूं कि कठिनाई क्या है जिम्मेदारी क्या है जिंदगी कैसे बहुत करीब से देखा है उसके बाद मेरे फिर पिताजी के देहांत हो गया तो फिर मेरी मां की जिम्मेदारी मेरे पर आ गई तो और भी जिम्मेदारी बड़ी बहुत बड़ा और मेरे को समझदारी आई और विद्युत आया और मैंने पढ़ाई की और आज आपके सामने हूं वह कल में एक्सपर्ट की तरह तो आए हो मेरी लाइफ एंड चेंज व्हाट एवरीवन थैंक यू
करो कि लाइफ में ऐसे सिचुएशन आते हैं जहां पर उन्हें वक्त से पहले हमें जो रोजाना पड़ता है रिस्पांसिबिलिटीज मदारियों को अपने कंधों पर लेना पड़ता है मैं भी उनमें से एक हूं जब मैं 24 वर्ष की थी तब मेरे जो बड़े भाई हैं जो आदमी मेजर थे मेजर टेप श्यामसुंदर उन्होंने कारगिल के 2 साल पहले देश के लिए अपनी जान दे दी थी और उस घटना ने मेरे पुलिस ने की को बदल दिया मेरे लाइफ बदल गई मेरी सोच बदल गई और मेरी जिंदगी का एम भी बदल गया लक्ष्य भी बदल गया क्योंकि मेरे भाई ऐसे थे जो दूसरों के लिए जीते थे दूसरों के लिए उन्होंने अपनी जान दे दी देश के लिए अपनी जान दे दी हमसे दूसरों का भला करते थे आखिरी वक्त तक उन्हें दूसरों की अपनी पलटन के बारे में ही सोचे तो उनके जो अच्छे क्वालिटी है दूसरों के लिए जीना है वह मैंने भी अपना लिया है फिर मैंने पढ़कर साइकॉलजिस्ट बनी और मैं अपने इस विद्या और प्राइस के एक्सपीरियंस दूसरों का भला करती हूं और मैं चाहती हूं कि हर एक घर में अगर हम एक इंसान को उसकी लास्ट बस ले तो पूरी फैमिली बदल सकती है तो मेरा जो सोचना यह है कि इसमें चेंज वन लाइफ डेफिनेटली वह एक लाइक और काफी लाईफ को बदलेगी और काफी लाईफ को बदलेंगे और बदलाव जो आएगा वह अच्छा बदलाव आएगा और इस औरत को एक अच्छा पीसफुल जगह बनाएगा रहने के लिए तो डेफिनेट लिए फिर मेरे पैरंट्स मदारी मेरे पर आ गई और बहुत ही आगे से मुझे काफी कुच कुच होता है फ्रीडम का जहां पर आपको जो चाहिए आप कर सकते हो मैं नहीं कर पाई लेकिन मैं आई एम थैंकफूल क्योंकि एक तरीके से मैं जानती हूं कि कठिनाई क्या है जिम्मेदारी क्या है जिंदगी कैसे बहुत करीब से देखा है उसके बाद मेरे फिर पिताजी के देहांत हो गया तो फिर मेरी मां की जिम्मेदारी मेरे पर आ गई तो और भी जिम्मेदारी बड़ी बहुत बड़ा और मेरे को समझदारी आई और विद्युत आया और मैंने पढ़ाई की और आज आपके सामने हूं वह कल में एक्सपर्ट की तरह तो आए हो मेरी लाइफ एंड चेंज व्हाट एवरीवन थैंक यू
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं वैसे ऐसा कोई एक पार्टी कूलर इंसीडेंट नहीं है जिसकी वजह से मुझे लाइफ में या परिपक्व होने के लिए मुझे यह लगा कि मुझे अनुभवी या फिर आगे चलना चाहिए यह सब है तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने अपने पिताजी को देखा और उनसे मैं काफी इंस्पायरर हुई हूं प्रभावित हुई हूं और वह एक वजह तो नहीं वह एक व्यक्ति हैं जिनके वजह से मुझे आगे बढ़ने का हमेशा ही यह मेडिसिन मैंने हर अपने मोड में जिंदगी मिली है कि मुझे आगे बढ़ना है और मुझे मुझे कुछ करना है मुझे अपने लिए ही कुछ करना है और अपना एक नाम बनाना है पहचान बनाना है तो मैंने मैंने उनसे इंस्पिरेशन लिया है वैराम उस कारण उस कारण ही मुझे काफी प्रेरणा मिली है कि मुझे आगे जाना चाहिए मुझे अपनी लाइफ का कुछ करना है तो वहां एक वजह और एक व्यक्ति मेरे पिताजी हैं तो यही मैं सोचती हूं और तुम मुझे कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा है थैंक यू
नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं वैसे ऐसा कोई एक पार्टी कूलर इंसीडेंट नहीं है जिसकी वजह से मुझे लाइफ में या परिपक्व होने के लिए मुझे यह लगा कि मुझे अनुभवी या फिर आगे चलना चाहिए यह सब है तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने अपने पिताजी को देखा और उनसे मैं काफी इंस्पायरर हुई हूं प्रभावित हुई हूं और वह एक वजह तो नहीं वह एक व्यक्ति हैं जिनके वजह से मुझे आगे बढ़ने का हमेशा ही यह मेडिसिन मैंने हर अपने मोड में जिंदगी मिली है कि मुझे आगे बढ़ना है और मुझे मुझे कुछ करना है मुझे अपने लिए ही कुछ करना है और अपना एक नाम बनाना है पहचान बनाना है तो मैंने मैंने उनसे इंस्पिरेशन लिया है वैराम उस कारण उस कारण ही मुझे काफी प्रेरणा मिली है कि मुझे आगे जाना चाहिए मुझे अपनी लाइफ का कुछ करना है तो वहां एक वजह और एक व्यक्ति मेरे पिताजी हैं तो यही मैं सोचती हूं और तुम मुझे कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा है थैंक यू
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मुझे एक समय की बात है जब नहीं किया मेरे बचपन की बातें मेरी काफी हद तक मेरी चीजें
मुझे एक समय की बात है जब नहीं किया मेरे बचपन की बातें मेरी काफी हद तक मेरी चीजें
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देखिए यह उस समय की बात है जब मैंने हाल फिलाल में ग्रैजुएशन कंप्लीट की थी और मैं सीए कर रहा था तब अचानक से मुझे एक जगह जाना था इन नकली मेरी वह मीटिंग कैंसिल हो गई मेरे पापा कब बहुत ही भयानक इमरजेंसी में तबीयत खराब हुआ और इतना भयंकर बाकी मैंने उनको लेकर निर्मल क्लीनिक द्वारा किस्मत से मुझे ड्राइविंग आती थी इसलिए मैच काल चला सकता था लाइसेंस भी था मेरे पास अवेलेबल ओं सिक लीव लेकर गया तो वहां भी हो चुके गिरने लग गए जैसे को बेहोश अगर गिरने लगे डॉक्टर ने तुरंत कमेंट किया तो थोड़ा ही क्यों नहीं इंजेक्शन लगाना पड़ेगा एक सरकारी अस्पताल ले के चली जाओ खाओ इंजेक्शन बिलिया के प्राइवेट में बल्कि सकता नहीं मिल सकता है मैं तो बिन ट्राई करके सरकारी हॉस्पिटल गया वहां की जो स्थिति मैंने देखी डॉक्टर डॉक्टर एक ही बार करते कि मेरे पिताजी डेंजर में है संभालना मुश्किल है मैं डर गया था वह समझ में नहीं आ रहा था और उसके बाद मैंने तुरंत अपने भैया को बड़े भैया का फोन क्यों बड़े भैया ने मुझे तुरंत इन प्राइवेट हॉस्पिटल में कहा मैं तुरंत वहां से जाकर प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया वह दिन मेरा ऐसा देश था जिस दिन मैं समझ नहीं आ रहा था कि जिंदगी में मैं बड़ा हूं या अकेला पड़ गया हूं सबसे बड़ी बात तो यह थी लेकिन मेरे साथ एक और थे मेरे दोस्त ने में बड़े भैया कहके बुलाता हूं शायद भैया वह ठीक होने में भी समझाया मुझे यह साथ में थे वह मेरे जब मैं हॉस्पिटल ने लिखे अपने पिताजी को गाड़ी में जा रहा था कि मेरे पिताजी एक ही बार बार तुम्हें सांस नली पार में सांस मिली भगवान की असीम कृपा से मुक्ति भी हो गए स्वस्थ भी हो गए उनका अलार्म्स लोकेश वादक किडनी डैमेज आया था ब्लड क्लॉटिंग हो गया था कि तीनों एक साथ हुई कृष्णा हॉस्पिटल जाना पड़ा और उस दिन के बाद उस इंसीडेंट है मुझे जिंदगी परिपक्व बना दिया और मैं जो रोने पर मजबूर कर दिया
देखिए यह उस समय की बात है जब मैंने हाल फिलाल में ग्रैजुएशन कंप्लीट की थी और मैं सीए कर रहा था तब अचानक से मुझे एक जगह जाना था इन नकली मेरी वह मीटिंग कैंसिल हो गई मेरे पापा कब बहुत ही भयानक इमरजेंसी में तबीयत खराब हुआ और इतना भयंकर बाकी मैंने उनको लेकर निर्मल क्लीनिक द्वारा किस्मत से मुझे ड्राइविंग आती थी इसलिए मैच काल चला सकता था लाइसेंस भी था मेरे पास अवेलेबल ओं सिक लीव लेकर गया तो वहां भी हो चुके गिरने लग गए जैसे को बेहोश अगर गिरने लगे डॉक्टर ने तुरंत कमेंट किया तो थोड़ा ही क्यों नहीं इंजेक्शन लगाना पड़ेगा एक सरकारी अस्पताल ले के चली जाओ खाओ इंजेक्शन बिलिया के प्राइवेट में बल्कि सकता नहीं मिल सकता है मैं तो बिन ट्राई करके सरकारी हॉस्पिटल गया वहां की जो स्थिति मैंने देखी डॉक्टर डॉक्टर एक ही बार करते कि मेरे पिताजी डेंजर में है संभालना मुश्किल है मैं डर गया था वह समझ में नहीं आ रहा था और उसके बाद मैंने तुरंत अपने भैया को बड़े भैया का फोन क्यों बड़े भैया ने मुझे तुरंत इन प्राइवेट हॉस्पिटल में कहा मैं तुरंत वहां से जाकर प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया वह दिन मेरा ऐसा देश था जिस दिन मैं समझ नहीं आ रहा था कि जिंदगी में मैं बड़ा हूं या अकेला पड़ गया हूं सबसे बड़ी बात तो यह थी लेकिन मेरे साथ एक और थे मेरे दोस्त ने में बड़े भैया कहके बुलाता हूं शायद भैया वह ठीक होने में भी समझाया मुझे यह साथ में थे वह मेरे जब मैं हॉस्पिटल ने लिखे अपने पिताजी को गाड़ी में जा रहा था कि मेरे पिताजी एक ही बार बार तुम्हें सांस नली पार में सांस मिली भगवान की असीम कृपा से मुक्ति भी हो गए स्वस्थ भी हो गए उनका अलार्म्स लोकेश वादक किडनी डैमेज आया था ब्लड क्लॉटिंग हो गया था कि तीनों एक साथ हुई कृष्णा हॉस्पिटल जाना पड़ा और उस दिन के बाद उस इंसीडेंट है मुझे जिंदगी परिपक्व बना दिया और मैं जो रोने पर मजबूर कर दिया
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अब हम को एकदम से बात करते हैं कौन कितनी परेशानी झेलने की क्षमता है और अक्सर कुछ लोग यह देखा भी गया जान से भी ज्यादा रीसेंट होते हैं बाकी लोगों के मुकाबले इसका कोई जो लोग ज्यादा इमोशनल इमेज और वचन को समझ में आता है कि हम इस ब्रह्मांड का इस दुनिया का केंद्र नहीं है दुनिया में हर चीज मेरी वजह से नहीं हो रही है मेरे लिए नहीं हो रही और मेरे लिए नहीं होगी वह अपने आप जो उनका दायरा होता है वह बढ़ जाए दूसरों की बातें सुनने और समझने के लिए तैयार होते हैं वह अपने अंदर अपने उनकी जो भी इमोशंस होते हैं उसको समझने के लिए उसको देखने के लिए अपने हाथ के प्रति बहुत ज्यादा सतर्क हो तो उन्हें समझ में आ रहा है कि उनके साथ अगर वह ऐसा कुछ ऐसा हो रहा है और कुछ ऐसा महसूस करें छोटे बच्चों में भी दिखे तो इसका मतलब हर बच्चे का जो चले जो उनको मोड़ करता है वह उनके पैरों पैरों है वह कुमार के तारे उनके हाथ में गीली मिट्टी है और मिट्टी को मोल्ड करके उसका कैसा भी पत्र टीचर के पास एक बहुत बड़ी होती है कैसे डील कर रहा है कैसे बनाते हैं या उनका तरीका सीधा बच्चे को डांटने का है उस पर डिपेंड करता है कि वह बच्चा अपने इमोशन को कितना बोनस पाते मतलब उसको कितना समझ पाता बच्चों का मन जो होता है वह
अब हम को एकदम से बात करते हैं कौन कितनी परेशानी झेलने की क्षमता है और अक्सर कुछ लोग यह देखा भी गया जान से भी ज्यादा रीसेंट होते हैं बाकी लोगों के मुकाबले इसका कोई जो लोग ज्यादा इमोशनल इमेज और वचन को समझ में आता है कि हम इस ब्रह्मांड का इस दुनिया का केंद्र नहीं है दुनिया में हर चीज मेरी वजह से नहीं हो रही है मेरे लिए नहीं हो रही और मेरे लिए नहीं होगी वह अपने आप जो उनका दायरा होता है वह बढ़ जाए दूसरों की बातें सुनने और समझने के लिए तैयार होते हैं वह अपने अंदर अपने उनकी जो भी इमोशंस होते हैं उसको समझने के लिए उसको देखने के लिए अपने हाथ के प्रति बहुत ज्यादा सतर्क हो तो उन्हें समझ में आ रहा है कि उनके साथ अगर वह ऐसा कुछ ऐसा हो रहा है और कुछ ऐसा महसूस करें छोटे बच्चों में भी दिखे तो इसका मतलब हर बच्चे का जो चले जो उनको मोड़ करता है वह उनके पैरों पैरों है वह कुमार के तारे उनके हाथ में गीली मिट्टी है और मिट्टी को मोल्ड करके उसका कैसा भी पत्र टीचर के पास एक बहुत बड़ी होती है कैसे डील कर रहा है कैसे बनाते हैं या उनका तरीका सीधा बच्चे को डांटने का है उस पर डिपेंड करता है कि वह बच्चा अपने इमोशन को कितना बोनस पाते मतलब उसको कितना समझ पाता बच्चों का मन जो होता है वह
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बाय मैं तो 24:00 पहले फेल हुआ था और उस पर समय 24:00 से लड़के मेरे घर वाले ने मुझे कुछ नहीं कहा कि कि मैं बीमार था उनको भी बताता हूं उस टाइम पर मुझे ऐसी बार आया हुआ था दिलाना एग्जाम को देने के लिए गया था फिर भी उतना नहीं लिख पाया मेरा सरदर्द वगैरह सब प्रॉब्लम है फिर भी मैंने लिखने की कोशिश की फिर भी मुझे 34 परसेंटेज आए मेरा जो मराठी सब्जेक्ट में फेवरेट है उसमें ज्यादा ठंडी लगने का क्या समय ऑफिस हो गया उसके बाद मेरे मुझे डॉक्टर के पास ही आ गया शाम में उसे बाद में एडमिट होना पड़ा था इसलिए दूसरा एग्जाम पेपर था कंटिन्यू मैं नहीं दे पाया और उसके बाद मेरा उसी ईयर में मैंने अक्टूबर में मेरे तीनों सब्जेक्ट देख रहे थे उन तीन सज्जन ने एग्जाम दिया और की नहीं में अच्छे परसेंटेज में पास हुआ तब से मैं बहुत नर्वस होने लगा मैं फेल होने के बाद मेरा तीन जो सब देख रहे थे मैंने ऑफ तोमर में मेरे तीन ही सब्जेक्ट कंप्लीट की है उसकी बात तो मैसेज मेरा 1 साल का आई है वह मैं सोचा उसके बाद मैंने आईटीआई ज्वाइन किया और आईटीआई में में ज्वाइन होने के बाद मेरे इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक्स को जॉइन किया था और वहां पर मैं डिस्ट्रिक्ट लेवल पर टॉपर आया तब मुझे बहुत खुशी हुई और तभी मैं समझा कि लाइफ में कुछ बनना है तो कुछ करना ही पड़ेगा उसके बिना कुछ नहीं होता तभी मुझे अपने आप को मुझे कौन पढ़ाता है तब से
बाय मैं तो 24:00 पहले फेल हुआ था और उस पर समय 24:00 से लड़के मेरे घर वाले ने मुझे कुछ नहीं कहा कि कि मैं बीमार था उनको भी बताता हूं उस टाइम पर मुझे ऐसी बार आया हुआ था दिलाना एग्जाम को देने के लिए गया था फिर भी उतना नहीं लिख पाया मेरा सरदर्द वगैरह सब प्रॉब्लम है फिर भी मैंने लिखने की कोशिश की फिर भी मुझे 34 परसेंटेज आए मेरा जो मराठी सब्जेक्ट में फेवरेट है उसमें ज्यादा ठंडी लगने का क्या समय ऑफिस हो गया उसके बाद मेरे मुझे डॉक्टर के पास ही आ गया शाम में उसे बाद में एडमिट होना पड़ा था इसलिए दूसरा एग्जाम पेपर था कंटिन्यू मैं नहीं दे पाया और उसके बाद मेरा उसी ईयर में मैंने अक्टूबर में मेरे तीनों सब्जेक्ट देख रहे थे उन तीन सज्जन ने एग्जाम दिया और की नहीं में अच्छे परसेंटेज में पास हुआ तब से मैं बहुत नर्वस होने लगा मैं फेल होने के बाद मेरा तीन जो सब देख रहे थे मैंने ऑफ तोमर में मेरे तीन ही सब्जेक्ट कंप्लीट की है उसकी बात तो मैसेज मेरा 1 साल का आई है वह मैं सोचा उसके बाद मैंने आईटीआई ज्वाइन किया और आईटीआई में में ज्वाइन होने के बाद मेरे इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक्स को जॉइन किया था और वहां पर मैं डिस्ट्रिक्ट लेवल पर टॉपर आया तब मुझे बहुत खुशी हुई और तभी मैं समझा कि लाइफ में कुछ बनना है तो कुछ करना ही पड़ेगा उसके बिना कुछ नहीं होता तभी मुझे अपने आप को मुझे कौन पढ़ाता है तब से
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इस बारे में कोई नहीं जान सकता लेकिन एक लक्षण से पता चलता है जिसको हम एक शब्द में कहते हैं संस्कार और संस्कार आज का नहीं कई जन्म जन्म जन्मांतर का संस्करण है और संस्करण से ही संस्कार की उत्पत्ति होती है संस्कार से ही शुरू बनता है शुरू से ही पहचान होती है तो आपकी जैसे प्रश्न में कहा कि आपके जीवन में ऐसा क्या हुआ जिसने आप को परिपक्व होने पर मजबूर कर दिया यह बहुत ज्ञान प्रशन है बहुत अच्छा और आधारित प्रश्न है क्योंकि परिपक्वता आती है जब हमें सजगता होती है और 120 मिल ही जाता है जिन लोगों के जीवन में 120 की उत्पत्ति होती है और एक विचार का विकल्प शाखा अभी जंकृत होकर बढ़ने लगता है तो निसंदेह वह परी पकता की भूमिका में ले ही जाता है और उसी में देखा जाए तो कई लोग किसकी ढंग से रूचि रखते हैं उसी रूचि के अनुसार अपने जनसमूह में मिलते हैं तो रुचि क्यों है क्या कारण है इसके बारे में तो बहुत ही अच्छी बात है कि जो लोग सूक्ष्म से मिले हो सकते हैं मन के अंदर प्रेरित हो जाते हैं मन में मन का वास करने लग सकते हैं तो प्रवक्ता का यही है कि एक मजबूती आती है पक जाता है पकाया जाता है पता जब है पकाया जब जाता है जब हम उस अग्नि को अपने नजदीक हमेशा लाकर रखते तापित करते हैं तो हर चीज स्थापित होकर परिपाक होगी जिससे हम भागते हैं जिससे डरते हैं तो अच्छा कौन हो जाता है इसलिए दुख ही सबसे बड़ा परिपक्व बनाने की चीज है और दुख को ईश्वर की तरफ से भी मिल जाता है क्योंकि इनको सही बता पर चलना पड़ता है और कुछ लोगों के माध्यम से भी दुख मिलता है तो भी फायदा ही होता है और समझदारी पर पक्का यह है रानी दुख से संकट से फायदा उठा रहे हो मजबूती बना रहे यही परित्यक्ता की सबसे बड़ी कहानी है
इस बारे में कोई नहीं जान सकता लेकिन एक लक्षण से पता चलता है जिसको हम एक शब्द में कहते हैं संस्कार और संस्कार आज का नहीं कई जन्म जन्म जन्मांतर का संस्करण है और संस्करण से ही संस्कार की उत्पत्ति होती है संस्कार से ही शुरू बनता है शुरू से ही पहचान होती है तो आपकी जैसे प्रश्न में कहा कि आपके जीवन में ऐसा क्या हुआ जिसने आप को परिपक्व होने पर मजबूर कर दिया यह बहुत ज्ञान प्रशन है बहुत अच्छा और आधारित प्रश्न है क्योंकि परिपक्वता आती है जब हमें सजगता होती है और 120 मिल ही जाता है जिन लोगों के जीवन में 120 की उत्पत्ति होती है और एक विचार का विकल्प शाखा अभी जंकृत होकर बढ़ने लगता है तो निसंदेह वह परी पकता की भूमिका में ले ही जाता है और उसी में देखा जाए तो कई लोग किसकी ढंग से रूचि रखते हैं उसी रूचि के अनुसार अपने जनसमूह में मिलते हैं तो रुचि क्यों है क्या कारण है इसके बारे में तो बहुत ही अच्छी बात है कि जो लोग सूक्ष्म से मिले हो सकते हैं मन के अंदर प्रेरित हो जाते हैं मन में मन का वास करने लग सकते हैं तो प्रवक्ता का यही है कि एक मजबूती आती है पक जाता है पकाया जाता है पता जब है पकाया जब जाता है जब हम उस अग्नि को अपने नजदीक हमेशा लाकर रखते तापित करते हैं तो हर चीज स्थापित होकर परिपाक होगी जिससे हम भागते हैं जिससे डरते हैं तो अच्छा कौन हो जाता है इसलिए दुख ही सबसे बड़ा परिपक्व बनाने की चीज है और दुख को ईश्वर की तरफ से भी मिल जाता है क्योंकि इनको सही बता पर चलना पड़ता है और कुछ लोगों के माध्यम से भी दुख मिलता है तो भी फायदा ही होता है और समझदारी पर पक्का यह है रानी दुख से संकट से फायदा उठा रहे हो मजबूती बना रहे यही परित्यक्ता की सबसे बड़ी कहानी है
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देहाती आपके जिंदगी में ऐसा क्या हुआ जिससे अधिक समझदारी भी ज्ञानी हो गया है फिर मुझे दुनिया का समझदारी सबसे पहली बात जो जानते हैं कि दिमाग बदाम खाने से नहीं ठोकर खाने से आती बड़ी पुरानी कहावत है और बहुत ही ज्यादा प्रचलित भी है तो मुझे भी यही ठोकर मिला मानिक मैंने लोगों पर ट्रस्ट किया और उन्होंने मुझे धोखा दिया सबसे पहली बात मेरे खास दोस्त था जिसे मैंने अपनी जिंदगी में सबसे अहम हिस्सा माना था उसने जब मेरे घरवालों के ऊपर गंदी नजर फिर तो मुझे माने सबक मिल गया कि कभी भर किसी भर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए फिर किसी के ऊपर इतना भी भरोसा ना कभी जिंदगी में आपको ऐसे कदम उठा डाले जिससे आप को शर्मसार होना पड़ा और जितना हो सके लोगों के ऊपर इतना ही भरोसा करें या फिर अपने घर वाले को यह परिवार वालों से उतना ही विश्वास करवाना ठीक रहेंगे हर किसी पर नजर रखें
देहाती आपके जिंदगी में ऐसा क्या हुआ जिससे अधिक समझदारी भी ज्ञानी हो गया है फिर मुझे दुनिया का समझदारी सबसे पहली बात जो जानते हैं कि दिमाग बदाम खाने से नहीं ठोकर खाने से आती बड़ी पुरानी कहावत है और बहुत ही ज्यादा प्रचलित भी है तो मुझे भी यही ठोकर मिला मानिक मैंने लोगों पर ट्रस्ट किया और उन्होंने मुझे धोखा दिया सबसे पहली बात मेरे खास दोस्त था जिसे मैंने अपनी जिंदगी में सबसे अहम हिस्सा माना था उसने जब मेरे घरवालों के ऊपर गंदी नजर फिर तो मुझे माने सबक मिल गया कि कभी भर किसी भर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए फिर किसी के ऊपर इतना भी भरोसा ना कभी जिंदगी में आपको ऐसे कदम उठा डाले जिससे आप को शर्मसार होना पड़ा और जितना हो सके लोगों के ऊपर इतना ही भरोसा करें या फिर अपने घर वाले को यह परिवार वालों से उतना ही विश्वास करवाना ठीक रहेंगे हर किसी पर नजर रखें
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मेरे एक बहुत गहरे मित्र थे उनका नाम था रमेश शर्मा हम दोनों अक्सर साथ साथ रहते थे एक बार फर्स्ट अप्रैल की बात है मेरे घर पर आया और भयंकर एक्सीडेंट हो गया है और भी हॉस्पिटल एडमिट हैं अंतिम सांसें दे रहे हैं तुम जल्दी जाओ उसके पास तो मैं याद कर रहे हैं मेरे यहां से कम से कम 12 किलोमीटर दूर था मैं भागा भागा वहां से जैसे-तैसे किसी की सहायता देता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा 1 घंटे बाद देखी जब मैंने वहां देखा तुम हॉस्टल में रमेश जी नहीं मैं उनके परिवारों के लोगों को ढूंढा फोन लगाया लेकिन कहीं नहीं जा रही थी नहीं रहे थे मेरा मिर्ची के घर पहुंचा करता हुआ था मैंने मां का बिल के बारे में पूछा उन्होंने कहा कि कहीं बाहर गए हुए हैं तब तुमने उनका लड़का और मैं दोनों उनके स्कूल में पहुंचे वहां से तो कल देखा उन्होंने कहा कि आप क्या बात हो गई मैंने कहा यार खवा मित्र ने अपने ने मुझसे यह कहा था कि रमेश जी का भयंकर एक्सीडेंट हो गया है और मैं भागा भागा हॉस्पिटल पहुंचा तुम्हारे घर पहुंचा अब मैं देख कर खुश हूं दिमाग सही हो उस दिन के बाद मैंने उसे मेरे मित्र तुमने ऐसा क्यों बोला किसी के दूसरे के लायक हो इस तरह से परेशान करना मुझ को कितनी परेशानी हुई तुमने नहीं जाना उसके परिवार के लोगों की परेशानी हुई यह तो मैं नहीं महसूस किया क्या इसी को फर्स्ट अप्रैल कहेंगे क्या यह उचित है मतलब आदमी को मेट्रोड होना बहुत आवश्यक है मजाक भी कीजिए तो मजाक ऐसी चीजें जिससे किसी को मानसिक प्रताड़ना ना हो शारीरिक कष्ट ना हो ना हो और हमारी ऐसी मजाक जो किसी के दिल पर अटक जाए मानसिक टेंशन का कारण बन जाए किसी की परेशानी का कारण बन जाए क्या वह उचित है यह बिल्कुल बात को सूचित करते हैं कि आप हमें छोड़ हैं आप समझ नहीं पाते हैं आप वक्त की नजाकत नहीं जानते हैं आप गंभीरता से एकदम रहित है उस दिन से वह मेरा मित्र ऐसा सुधर गया अब मैंने उसको ऐसी गंदी मजाक करते हुए नहीं देखा है मित्रों मैं इस टाइप के माध्यम से आपसे यही कहना चाहता हूं कि कभी ऐसी मजाक मत करो जो किसी के दिल को लग जाए किसी को मानसिक परेशानी हो जाए किसी को टेंशन हो जाए और यह आपको ऐसी मजाक सूचित करते हैं कि आप अंदर छोड़ हैं वह क्वालिफाइड नहीं है हम क्वालिफाइड हैं आप आप बीटी का बाप है आप लोग सामाजिकता से रहित हैं इसलिए कभी भी ऐसी मजाक नहीं करनी चाहिए
मेरे एक बहुत गहरे मित्र थे उनका नाम था रमेश शर्मा हम दोनों अक्सर साथ साथ रहते थे एक बार फर्स्ट अप्रैल की बात है मेरे घर पर आया और भयंकर एक्सीडेंट हो गया है और भी हॉस्पिटल एडमिट हैं अंतिम सांसें दे रहे हैं तुम जल्दी जाओ उसके पास तो मैं याद कर रहे हैं मेरे यहां से कम से कम 12 किलोमीटर दूर था मैं भागा भागा वहां से जैसे-तैसे किसी की सहायता देता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा 1 घंटे बाद देखी जब मैंने वहां देखा तुम हॉस्टल में रमेश जी नहीं मैं उनके परिवारों के लोगों को ढूंढा फोन लगाया लेकिन कहीं नहीं जा रही थी नहीं रहे थे मेरा मिर्ची के घर पहुंचा करता हुआ था मैंने मां का बिल के बारे में पूछा उन्होंने कहा कि कहीं बाहर गए हुए हैं तब तुमने उनका लड़का और मैं दोनों उनके स्कूल में पहुंचे वहां से तो कल देखा उन्होंने कहा कि आप क्या बात हो गई मैंने कहा यार खवा मित्र ने अपने ने मुझसे यह कहा था कि रमेश जी का भयंकर एक्सीडेंट हो गया है और मैं भागा भागा हॉस्पिटल पहुंचा तुम्हारे घर पहुंचा अब मैं देख कर खुश हूं दिमाग सही हो उस दिन के बाद मैंने उसे मेरे मित्र तुमने ऐसा क्यों बोला किसी के दूसरे के लायक हो इस तरह से परेशान करना मुझ को कितनी परेशानी हुई तुमने नहीं जाना उसके परिवार के लोगों की परेशानी हुई यह तो मैं नहीं महसूस किया क्या इसी को फर्स्ट अप्रैल कहेंगे क्या यह उचित है मतलब आदमी को मेट्रोड होना बहुत आवश्यक है मजाक भी कीजिए तो मजाक ऐसी चीजें जिससे किसी को मानसिक प्रताड़ना ना हो शारीरिक कष्ट ना हो ना हो और हमारी ऐसी मजाक जो किसी के दिल पर अटक जाए मानसिक टेंशन का कारण बन जाए किसी की परेशानी का कारण बन जाए क्या वह उचित है यह बिल्कुल बात को सूचित करते हैं कि आप हमें छोड़ हैं आप समझ नहीं पाते हैं आप वक्त की नजाकत नहीं जानते हैं आप गंभीरता से एकदम रहित है उस दिन से वह मेरा मित्र ऐसा सुधर गया अब मैंने उसको ऐसी गंदी मजाक करते हुए नहीं देखा है मित्रों मैं इस टाइप के माध्यम से आपसे यही कहना चाहता हूं कि कभी ऐसी मजाक मत करो जो किसी के दिल को लग जाए किसी को मानसिक परेशानी हो जाए किसी को टेंशन हो जाए और यह आपको ऐसी मजाक सूचित करते हैं कि आप अंदर छोड़ हैं वह क्वालिफाइड नहीं है हम क्वालिफाइड हैं आप आप बीटी का बाप है आप लोग सामाजिकता से रहित हैं इसलिए कभी भी ऐसी मजाक नहीं करनी चाहिए
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बहुत सी चीजें हैं लाइफ में ऊपर नीचे शांतनु सब कुछ आते रहते लेकिन खुद को भूल के उसको हटा के जीवन को आगे बढ़ना बहुत सारी होता है और एक आपको जीवन में परिपक्व करने के लिए को मजबूत करने की बहुत जरूरत होती है
बहुत सी चीजें हैं लाइफ में ऊपर नीचे शांतनु सब कुछ आते रहते लेकिन खुद को भूल के उसको हटा के जीवन को आगे बढ़ना बहुत सारी होता है और एक आपको जीवन में परिपक्व करने के लिए को मजबूत करने की बहुत जरूरत होती है
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एक बार मुझे किसी ने कह दिया था कि अभी मैं मैच्योर नहीं हूं वह दिन है और आज का दिन है मैंने उस दिन से मैं चोटी के लिए काफी कुछ किया और मेरा मरका के हक में चोटी आ गई है धन्यवाद
एक बार मुझे किसी ने कह दिया था कि अभी मैं मैच्योर नहीं हूं वह दिन है और आज का दिन है मैंने उस दिन से मैं चोटी के लिए काफी कुछ किया और मेरा मरका के हक में चोटी आ गई है धन्यवाद
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शादी से पहले और शादी के बाद भी मुल्क टोटल तीन लड़कियों ने मुझे धोखा दिया जिस कारण से मुझे एक ऐसी फिलिंग आएगी शायद लड़की पर विश्वास करना उचित नहीं है कि मानसिकता भी हो सकती है लेकिन उन चीजों ने मुझे परिपक्व खाने पर मजबूर कर दिया कि अब मुझे अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा इन सब चीजों में कुछ नहीं रखा
शादी से पहले और शादी के बाद भी मुल्क टोटल तीन लड़कियों ने मुझे धोखा दिया जिस कारण से मुझे एक ऐसी फिलिंग आएगी शायद लड़की पर विश्वास करना उचित नहीं है कि मानसिकता भी हो सकती है लेकिन उन चीजों ने मुझे परिपक्व खाने पर मजबूर कर दिया कि अब मुझे अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा इन सब चीजों में कुछ नहीं रखा
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मेरी लाइफ में कई सारे ऐसे इंसान है जिन्होंने मेरी लाइफ को पूरी चेंज कर दिया स्पेशली वन पर्सन विच यू चेंज माय लाइफ कंपलीटली घोषित किया और उचित को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी उस चीज की वजह से मैं अपने करियर में कुछ ऐसा बनकर दिखाऊंगी कि उस लड़के को एकदम पछतावा हो कि उसने मेरे साथ किया
मेरी लाइफ में कई सारे ऐसे इंसान है जिन्होंने मेरी लाइफ को पूरी चेंज कर दिया स्पेशली वन पर्सन विच यू चेंज माय लाइफ कंपलीटली घोषित किया और उचित को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी उस चीज की वजह से मैं अपने करियर में कुछ ऐसा बनकर दिखाऊंगी कि उस लड़के को एकदम पछतावा हो कि उसने मेरे साथ किया
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देखिए सिर्फ मेरे जीवन में नहीं आप सभी लोगों के जीवन में जो कठिन समय आता है वह आप को शक्तिशाली बनाने के लिए प्रेरित करता है वह आपके पास एक मौका होता है कि आप कुछ नया कर सकते हैं कुछ अच्छा कर सकते हैं हमारे जीवन में जब कठिनाई आती है तो हम घबरा जाते हैं हम परेशान हो जाते हैं और परेशान होकर अपनी परेशानी को और ज्यादा बढ़ा लेते हैं अगर डिफिकल्टीज आपके जीवन में आती है तो आप उसे एक और सर की तरह लीजिए क्योंकि वह जीवन में हमारे लिए अवसर होता है कुछ सीखने के लिए कुछ करने के लिए जोर से पहुंची पॉजिटिव तरीके से लेता है सकारात्मक तरीके से लेता है वह समाज के लिए मिसाल बनता है सपोर्ट करिए आपका जन्म किसी गरीब परिवार में हुआ है तू जन्म गरीब परिवार में हुआ है अगर मृत्यु आपकी गरीब फैमिली में हो रही है तो यह इसका मतलब यह है कि आपने अच्छा कर्म नहीं किया गरीब होना बुरी बात नहीं है लेकिन गरीब होकर गरीब मर जाना बुरी बात तो आप आपका जन्म चाहे जिस फैमिली में हुआ है जिस बैकग्राउंड में हुआ है आप मेहनत करिए कोशिश करिए एक सफल होने की देखिए जितने भी आईएएस पीसीएस अधिकारी बनते हैं जितने भी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं राष्ट्रपति बनते हैं सारे लोग बड़ी फैमिली से बिलॉन्ग करते हैं और किसी के फादर एग्री के किसान हैं किसी के फादर रिक्शा चलाने वाले हैं किसी के फादर मजदूरी करने वाले हैं तो ऐसी स्थिति है तो आप कभी अपने मनोबल को गिरने मत दीजिए किसी भी स्थिति किसी भी परिस्थिति में आप अपने धैर्य को बरकरार रखिए अपने दिमाग को स्थिर रखें और अपने टारगेट को फिक्स करके रखिए हमारा क्या होता है दिल्ली टारगेट चेंज होता है आज मन करेगा कि पॉलिटिक्स में जाऊंगा कल मन करेगा क्या रे पुलिस में भर्ती हो जाता तो सही रहता परसों मन करता है कि अरे यार फौज में भर्ती हो जाता तो बढ़िया होता भैया आपका टारगेट एक होना चाहिए जो आईएएस तैयारी करने जाते हैं बंदे वह बच्चे उनके पास आईएस फिक्स होता है उनका टारगेट कि मुझे आईएएस बनना है उनका पीसीएस बहुत सारे स्टूडेंट ऐसे होते दिन का पीसीएस क्वालीफाई हो जाता है कई बार लेकिन वह लेकिन उनका टारगेट रहता आईएस व्हो आईएस के लिए पुनः तैयारी करने में लग जाते हैं बहुत सारी स्टूडेंट अस्सी परसेंट ऐसे जाते हैं तैयारी करने मैं आईएसबी बनूंगा मैं पीसीएस भी बनूंगा मैं रेलवे में भी फॉर्म भर दूंगा मैं बैंक में भी भर दूंगा तो ऐसे लोग कुछ नहीं कर पाते अपने टारगेट को फिक्स रखिए और फिर से टारगेट के पीछे आप भागी दौड़ी उसके पीछे जवाब उसके लिए कर्म करेंगे तो हो सकता है कि आपको कुछ टाइम असफलता प्राप्त हो लेकिन एक दिन ऐसा आएगा कि आपको सफलता अवश्य अब तो होगा तो कर्म प्रधान है और डिफिकल्टीज से कभी घबराइए मत कठिन समय से कभी घबराइए मत कठिन समय हमारे जीवन में अवसर के रूप में होता है ऑफिस को सकारात्मक तरीके से अपना कर्म करते रहिए आप मजबूत बनेंगे समाज के लिए मिसाल बनेंगे समाज के लिए आदर्श बनेंगे धन्यवाद
देखिए सिर्फ मेरे जीवन में नहीं आप सभी लोगों के जीवन में जो कठिन समय आता है वह आप को शक्तिशाली बनाने के लिए प्रेरित करता है वह आपके पास एक मौका होता है कि आप कुछ नया कर सकते हैं कुछ अच्छा कर सकते हैं हमारे जीवन में जब कठिनाई आती है तो हम घबरा जाते हैं हम परेशान हो जाते हैं और परेशान होकर अपनी परेशानी को और ज्यादा बढ़ा लेते हैं अगर डिफिकल्टीज आपके जीवन में आती है तो आप उसे एक और सर की तरह लीजिए क्योंकि वह जीवन में हमारे लिए अवसर होता है कुछ सीखने के लिए कुछ करने के लिए जोर से पहुंची पॉजिटिव तरीके से लेता है सकारात्मक तरीके से लेता है वह समाज के लिए मिसाल बनता है सपोर्ट करिए आपका जन्म किसी गरीब परिवार में हुआ है तू जन्म गरीब परिवार में हुआ है अगर मृत्यु आपकी गरीब फैमिली में हो रही है तो यह इसका मतलब यह है कि आपने अच्छा कर्म नहीं किया गरीब होना बुरी बात नहीं है लेकिन गरीब होकर गरीब मर जाना बुरी बात तो आप आपका जन्म चाहे जिस फैमिली में हुआ है जिस बैकग्राउंड में हुआ है आप मेहनत करिए कोशिश करिए एक सफल होने की देखिए जितने भी आईएएस पीसीएस अधिकारी बनते हैं जितने भी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं राष्ट्रपति बनते हैं सारे लोग बड़ी फैमिली से बिलॉन्ग करते हैं और किसी के फादर एग्री के किसान हैं किसी के फादर रिक्शा चलाने वाले हैं किसी के फादर मजदूरी करने वाले हैं तो ऐसी स्थिति है तो आप कभी अपने मनोबल को गिरने मत दीजिए किसी भी स्थिति किसी भी परिस्थिति में आप अपने धैर्य को बरकरार रखिए अपने दिमाग को स्थिर रखें और अपने टारगेट को फिक्स करके रखिए हमारा क्या होता है दिल्ली टारगेट चेंज होता है आज मन करेगा कि पॉलिटिक्स में जाऊंगा कल मन करेगा क्या रे पुलिस में भर्ती हो जाता तो सही रहता परसों मन करता है कि अरे यार फौज में भर्ती हो जाता तो बढ़िया होता भैया आपका टारगेट एक होना चाहिए जो आईएएस तैयारी करने जाते हैं बंदे वह बच्चे उनके पास आईएस फिक्स होता है उनका टारगेट कि मुझे आईएएस बनना है उनका पीसीएस बहुत सारे स्टूडेंट ऐसे होते दिन का पीसीएस क्वालीफाई हो जाता है कई बार लेकिन वह लेकिन उनका टारगेट रहता आईएस व्हो आईएस के लिए पुनः तैयारी करने में लग जाते हैं बहुत सारी स्टूडेंट अस्सी परसेंट ऐसे जाते हैं तैयारी करने मैं आईएसबी बनूंगा मैं पीसीएस भी बनूंगा मैं रेलवे में भी फॉर्म भर दूंगा मैं बैंक में भी भर दूंगा तो ऐसे लोग कुछ नहीं कर पाते अपने टारगेट को फिक्स रखिए और फिर से टारगेट के पीछे आप भागी दौड़ी उसके पीछे जवाब उसके लिए कर्म करेंगे तो हो सकता है कि आपको कुछ टाइम असफलता प्राप्त हो लेकिन एक दिन ऐसा आएगा कि आपको सफलता अवश्य अब तो होगा तो कर्म प्रधान है और डिफिकल्टीज से कभी घबराइए मत कठिन समय से कभी घबराइए मत कठिन समय हमारे जीवन में अवसर के रूप में होता है ऑफिस को सकारात्मक तरीके से अपना कर्म करते रहिए आप मजबूत बनेंगे समाज के लिए मिसाल बनेंगे समाज के लिए आदर्श बनेंगे धन्यवाद
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लेकिन मेरे अपने जो मेरा एक बीता हुआ जो कल है मैंने उस वक्त में जो कुछ भी देखा है जिस हालात से मैं पूछ रहा हूं मैंने ऐसा वक्त देखा कि जब मेरी बेटी की डेथ हुई तो मेरे पास कफन के लिए भी पैसा नहीं था मैं सड़क में खड़ा था मेरे पास किराया भी नहीं था हॉस्पिटल तक जाने के लिए छिंदवाड़ा यहां से मेरे घर के पास से 30 किलोमीटर दूर था वह हॉस्पिटल मगर मैं को अपने वालिद साहब की यह बात हमेशा ध्यान रहे कि बेटा जिंदगी में कभी किसी का बुरा मत करना तुम्हारा बुरा कभी नहीं होगा इस बात ने मुझे जब से लेकर आज तक यह बात तो मेक आया हूं और उस वक्त मैंने सब्र का दामन हाथ थाम के रखो तभी उसी वक्त मेरे दोस्त आया जिसने मुझे वहां तक लेकर गया मेरे साथ पूरी कफन दफन का भी पूरे इंतजाम किया यह चीज जो है मैं कोई चीज से की प्रेरणा जरूर मिली है किस दुनिया में कोई किसी का सगा नहीं है बुरे वक्त में कोई आपका साथ नहीं देता आपका एक अच्छा दोस्त एक आपका एक अच्छा पिता या आप की अच्छी माया आपके ची पहनी आपका अच्छा भाई जो जरूरत पड़ने पर हमेशा खड़े हो जाएं यही आपके सब कुछ है मगर जरूरत पड़ने पर जब आपके साथ खड़ा ना होकर आपका तो खून भी आपका नहीं रह जाता यह हकीकत है कि हमें अपनी औलाद से भी उम्मीद नहीं रखना चाहिए क्योंकि उम्मीद ही सब परेशानी की जड़ है कि सब को मैंने अपने 29 सालों में सीखा है और सिर्फ एक बात में हमेशा की यही बोलता हूं और एक बार फिर से बोलना भी चाहूंगा कि आप जिंदगी में कभी किसी का बुरा मत आपका पूरा कभी नहीं होगा
लेकिन मेरे अपने जो मेरा एक बीता हुआ जो कल है मैंने उस वक्त में जो कुछ भी देखा है जिस हालात से मैं पूछ रहा हूं मैंने ऐसा वक्त देखा कि जब मेरी बेटी की डेथ हुई तो मेरे पास कफन के लिए भी पैसा नहीं था मैं सड़क में खड़ा था मेरे पास किराया भी नहीं था हॉस्पिटल तक जाने के लिए छिंदवाड़ा यहां से मेरे घर के पास से 30 किलोमीटर दूर था वह हॉस्पिटल मगर मैं को अपने वालिद साहब की यह बात हमेशा ध्यान रहे कि बेटा जिंदगी में कभी किसी का बुरा मत करना तुम्हारा बुरा कभी नहीं होगा इस बात ने मुझे जब से लेकर आज तक यह बात तो मेक आया हूं और उस वक्त मैंने सब्र का दामन हाथ थाम के रखो तभी उसी वक्त मेरे दोस्त आया जिसने मुझे वहां तक लेकर गया मेरे साथ पूरी कफन दफन का भी पूरे इंतजाम किया यह चीज जो है मैं कोई चीज से की प्रेरणा जरूर मिली है किस दुनिया में कोई किसी का सगा नहीं है बुरे वक्त में कोई आपका साथ नहीं देता आपका एक अच्छा दोस्त एक आपका एक अच्छा पिता या आप की अच्छी माया आपके ची पहनी आपका अच्छा भाई जो जरूरत पड़ने पर हमेशा खड़े हो जाएं यही आपके सब कुछ है मगर जरूरत पड़ने पर जब आपके साथ खड़ा ना होकर आपका तो खून भी आपका नहीं रह जाता यह हकीकत है कि हमें अपनी औलाद से भी उम्मीद नहीं रखना चाहिए क्योंकि उम्मीद ही सब परेशानी की जड़ है कि सब को मैंने अपने 29 सालों में सीखा है और सिर्फ एक बात में हमेशा की यही बोलता हूं और एक बार फिर से बोलना भी चाहूंगा कि आप जिंदगी में कभी किसी का बुरा मत आपका पूरा कभी नहीं होगा
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जब जवाबदारी के साथ जिम्मेदारी भी सर पर आई तुम मजबूर होना पड़ा उसे पूरा करने के लिए बहुत सारे वो मिली बहुत सारे धोखे बहुत सारे सहयोग यह सब ऐसा कुछ हुआ उसे मुझे परिपक्व बना दिया
जब जवाबदारी के साथ जिम्मेदारी भी सर पर आई तुम मजबूर होना पड़ा उसे पूरा करने के लिए बहुत सारे वो मिली बहुत सारे धोखे बहुत सारे सहयोग यह सब ऐसा कुछ हुआ उसे मुझे परिपक्व बना दिया
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rinku kumar meena

managing director (MD)life expert hindi writer tourist guides writing self employed मैं चाहता हूं हर व्यक्ति को अपने जीवन में खुश रहने का पूरा अधिकार है चाहे वह लड़का या लड़की और वह जो चाहे कर सकती अपनी लाइफ से उसका भी अधिकार होना चाहिए और मैं चाहता हूं लड़कियां भी अपना जीवन पूरी तरीके से खुश हो कर दिया चाहे वह अपने परिवार में हो या ससुराल में विश्वास करता हूं

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घटनाक्रम की बात की जाए तो काफी घटनाक्रम वैसे मैंने आपसे चार-पांच साल पहले डायरेक्ट सेलिंग वगैरह की कंपनी ज्वाइन की थी और वहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और वह मेरे लाइफ में मुझे मजबूत होने पर या ना चाहूं मेरे जो आत्मविश्वास बढ़ाने में पूछा था सहयोग दिया और उनकी वजह से आज मैं क्षेत्र में इस में मैं खेलना चाहता हूं कहना चाहूं जिस फिल्म में मैं एक कंपनी खड़े करना चाहता हूं लोगों को रोजगार देने के लिए उसके लिए परिपक्व किया है मैंने देखा है कि जब भी व्यक्ति है जो कुछ हटके या कहना चाहूं लोगों से मिली वाला करने का कार्य करता तो बाकी लोग हैं जो आप का साथ छोड़ने लग जाएंगे लेकिन अगर आपका लक्ष्य जो राइट है पर आप खुश रहना चाहती हूं आपको लगता है कि आप ऐसा करके खुश रहेंगे तो आप अपने कार्य कीजिए अब कोई नहीं तोड़ सकता अगर आप 100 मिनट आपका आत्मविश्वास मजबूत है दूसरा मेरी लाइफ में काफी होती क्या हाल है जो में गुजारे काफी जगह और उनकी वजह से मुझे काफी शायद और जॉब की बात की जाए तो जैसे चंडीगढ़ हुआ लखनऊ हैदराबाद और भी काफी बिगेस्ट सिटी थोड़ा सा भाग जाते हो तो आपको जो भारी मात्रा में है या भारी लोगों से मिलकर नई सीख मिलती है कि होता क्या है लोग जब एक जगह रहते हैं तो वह केवल उसी जगह के माहौल के अंत हो सकते हैं लेकिन जैसे-जैसे आप बाहर निकलोगे तो आपकी चौक कैटेगरी हैं या माहौल क्या सोचने की क्षमता है वह भी अब सोचने की क्षमता का विरोध और यही कुछ चीजें हैं जो मुझे मजबूत बनाती है धन्यवाद
घटनाक्रम की बात की जाए तो काफी घटनाक्रम वैसे मैंने आपसे चार-पांच साल पहले डायरेक्ट सेलिंग वगैरह की कंपनी ज्वाइन की थी और वहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और वह मेरे लाइफ में मुझे मजबूत होने पर या ना चाहूं मेरे जो आत्मविश्वास बढ़ाने में पूछा था सहयोग दिया और उनकी वजह से आज मैं क्षेत्र में इस में मैं खेलना चाहता हूं कहना चाहूं जिस फिल्म में मैं एक कंपनी खड़े करना चाहता हूं लोगों को रोजगार देने के लिए उसके लिए परिपक्व किया है मैंने देखा है कि जब भी व्यक्ति है जो कुछ हटके या कहना चाहूं लोगों से मिली वाला करने का कार्य करता तो बाकी लोग हैं जो आप का साथ छोड़ने लग जाएंगे लेकिन अगर आपका लक्ष्य जो राइट है पर आप खुश रहना चाहती हूं आपको लगता है कि आप ऐसा करके खुश रहेंगे तो आप अपने कार्य कीजिए अब कोई नहीं तोड़ सकता अगर आप 100 मिनट आपका आत्मविश्वास मजबूत है दूसरा मेरी लाइफ में काफी होती क्या हाल है जो में गुजारे काफी जगह और उनकी वजह से मुझे काफी शायद और जॉब की बात की जाए तो जैसे चंडीगढ़ हुआ लखनऊ हैदराबाद और भी काफी बिगेस्ट सिटी थोड़ा सा भाग जाते हो तो आपको जो भारी मात्रा में है या भारी लोगों से मिलकर नई सीख मिलती है कि होता क्या है लोग जब एक जगह रहते हैं तो वह केवल उसी जगह के माहौल के अंत हो सकते हैं लेकिन जैसे-जैसे आप बाहर निकलोगे तो आपकी चौक कैटेगरी हैं या माहौल क्या सोचने की क्षमता है वह भी अब सोचने की क्षमता का विरोध और यही कुछ चीजें हैं जो मुझे मजबूत बनाती है धन्यवाद
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हेलो हां दोस्तों सही कहा आपने कि मेरी जीवन में भी ऐसा मोड़ आया था कि मैं भी मैं भी एक दिन वह सोचने लगा कि मेरे को भी कुछ एक मेडिकल लाइन में जानना है कि मैं 12th क्लास में था मेरे पापा का एक्सीडेंट हुआ था जो मेरे ध्यान है कि जब हम एस एम एस हॉस्पिटल में आए थे तो वहां पर पापा से एडमिट करवाया था और ग्रेनाइट का तीन 3:30 बज रहे थे और इमरजेंसी में थे एमरजैंसी से वार्ड में शिफ्ट कर दिया था और ब्लीडिंग हो रही थी तो मैंने एक डॉक्टर को बोला था जो असिस्टेंट होते हैं वहां पर जो मैंने बोला था कि सर उनके पेन हो रहा है एक बार कृपया कीजिए कि उनको तो उन्होंने बोल रहे हैं कि मैं 15 या 16 या तो मैंने बोला प्लीज सर आप देख लो उनके पेन हो रहा है मेरे पापा हैं तो उन्होंने अभी डॉक्टर बनूंगा मैं भी एक दिन इन मेडिकल लाइन में काम करूंगा सर लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा कि कभी किसी को एक बार नहीं करूंगा कि कोई बोलेगा तो मैं उसको मना करूंगा मैं उसको उसके काम के लिए उसे जाऊंगा तो छोटा हो तो बड़ा हो उस काम को अवश्य पूरा करूंगा इसलिए सर आप ऐसा ना बोले कृपया चले तो वह नहीं आए और मैं पापा के आकर पर पापा के पास आके रोने लग गया था इसीलिए मैंने जिस दिन से मैंने सोचा कि मैं भी एक दिन मेडिकल लाइन में आऊंगा और अपने सपने को सच करके दिखाऊंगा उसके बाद में कुछ और करूंगा इसलिए मैं सही कहा आपने कि मजबूर हो मजबूरी इंसान को बना देती है और उसके बाद में मैं 2015 में धनवंतरी हॉस्पिटल से मैंने डीएमएलडी डिप्लोमा इन मेडिकल मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन का कोर्स किया उसके बाद मैं वहीं पर धनवंतरी में जॉब किया और मैंने नौ से नौ से 10 महीने जो की थी इतना बेहतर जोगिया मजा आ गया था और पेशेंट की सेवा करता था मौका मिला थैंक यू सो मच दोस्त
हेलो हां दोस्तों सही कहा आपने कि मेरी जीवन में भी ऐसा मोड़ आया था कि मैं भी मैं भी एक दिन वह सोचने लगा कि मेरे को भी कुछ एक मेडिकल लाइन में जानना है कि मैं 12th क्लास में था मेरे पापा का एक्सीडेंट हुआ था जो मेरे ध्यान है कि जब हम एस एम एस हॉस्पिटल में आए थे तो वहां पर पापा से एडमिट करवाया था और ग्रेनाइट का तीन 3:30 बज रहे थे और इमरजेंसी में थे एमरजैंसी से वार्ड में शिफ्ट कर दिया था और ब्लीडिंग हो रही थी तो मैंने एक डॉक्टर को बोला था जो असिस्टेंट होते हैं वहां पर जो मैंने बोला था कि सर उनके पेन हो रहा है एक बार कृपया कीजिए कि उनको तो उन्होंने बोल रहे हैं कि मैं 15 या 16 या तो मैंने बोला प्लीज सर आप देख लो उनके पेन हो रहा है मेरे पापा हैं तो उन्होंने अभी डॉक्टर बनूंगा मैं भी एक दिन इन मेडिकल लाइन में काम करूंगा सर लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा कि कभी किसी को एक बार नहीं करूंगा कि कोई बोलेगा तो मैं उसको मना करूंगा मैं उसको उसके काम के लिए उसे जाऊंगा तो छोटा हो तो बड़ा हो उस काम को अवश्य पूरा करूंगा इसलिए सर आप ऐसा ना बोले कृपया चले तो वह नहीं आए और मैं पापा के आकर पर पापा के पास आके रोने लग गया था इसीलिए मैंने जिस दिन से मैंने सोचा कि मैं भी एक दिन मेडिकल लाइन में आऊंगा और अपने सपने को सच करके दिखाऊंगा उसके बाद में कुछ और करूंगा इसलिए मैं सही कहा आपने कि मजबूर हो मजबूरी इंसान को बना देती है और उसके बाद में मैं 2015 में धनवंतरी हॉस्पिटल से मैंने डीएमएलडी डिप्लोमा इन मेडिकल मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन का कोर्स किया उसके बाद मैं वहीं पर धनवंतरी में जॉब किया और मैंने नौ से नौ से 10 महीने जो की थी इतना बेहतर जोगिया मजा आ गया था और पेशेंट की सेवा करता था मौका मिला थैंक यू सो मच दोस्त
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जो व्यक्ति समाज से संघर्ष करता है तू और भी मजबूत बन जाता है और समाज में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए वह कई प्रयत्न करता है खुद को बेहतर बनाता है ताकतवर बनाता है मजबूर होता है और ऐसे ही मेरे भी जीवन के साथ में और इस तरह से मेरे जीवन में परिपक्व आने पर मजबूर हुआ
जो व्यक्ति समाज से संघर्ष करता है तू और भी मजबूत बन जाता है और समाज में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए वह कई प्रयत्न करता है खुद को बेहतर बनाता है ताकतवर बनाता है मजबूर होता है और ऐसे ही मेरे भी जीवन के साथ में और इस तरह से मेरे जीवन में परिपक्व आने पर मजबूर हुआ
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हमारे जीवन में ऐसा हुआ है सबसे बड़ी चीज मेरी गरीबी उसमें क्या हुआ कि मेरी गरीबी नहीं हमको हर परिस्थितियों में रहना सिखाया और कई लोगों से मेरा ऐसे लोगों से पाला पड़ा है धोखेबाज लोगों से पाला पड़ा है लेकिन हमने अपने आप को उनके को धोखेबाज लोगों से बचा बचा के बचाया है आप अपने आप को अपने आप को बचाते रहे हैं इससे कि हमने हम पूरी तरह से परिपक्व हो चुके हैं अपने जीवन में इतना परिपक्व परिपक्व हो चुके हैं कि उनको कोई धोखा नहीं दे सकता सबसे बड़ी चीज है मेरी गरीबी इसलिए हमको परिपक्व होने पर मजबूर कर दिया है मेरा भाव
हमारे जीवन में ऐसा हुआ है सबसे बड़ी चीज मेरी गरीबी उसमें क्या हुआ कि मेरी गरीबी नहीं हमको हर परिस्थितियों में रहना सिखाया और कई लोगों से मेरा ऐसे लोगों से पाला पड़ा है धोखेबाज लोगों से पाला पड़ा है लेकिन हमने अपने आप को उनके को धोखेबाज लोगों से बचा बचा के बचाया है आप अपने आप को अपने आप को बचाते रहे हैं इससे कि हमने हम पूरी तरह से परिपक्व हो चुके हैं अपने जीवन में इतना परिपक्व परिपक्व हो चुके हैं कि उनको कोई धोखा नहीं दे सकता सबसे बड़ी चीज है मेरी गरीबी इसलिए हमको परिपक्व होने पर मजबूर कर दिया है मेरा भाव
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देखिए हर इंसान को चाहिए कि वह अपने पैरों पर खड़े हो सफल इंसान बने जिम्मेवारी को समझे कुछ इंसानों के जिंदगी में कुछ मजबूरी आ जाती है जिससे उम्र से पहले ही हो अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं और अपने पैरों को खड़े हो जाते हैं
देखिए हर इंसान को चाहिए कि वह अपने पैरों पर खड़े हो सफल इंसान बने जिम्मेवारी को समझे कुछ इंसानों के जिंदगी में कुछ मजबूरी आ जाती है जिससे उम्र से पहले ही हो अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं और अपने पैरों को खड़े हो जाते हैं
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मेरी जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुई जिन्हें जिन्होंने मुझे परिपक्व और मजबूत बनाया है कई ऐसे क्षण होते हैं व्यक्ति के जीवन में जब वो पूर्ण रूप से टूट चुका होता है उसे समझ नहीं आता है कि उसे अब क्या करना है वह अपनी फ्यूचर को लेकर चिंतित हो जाता है बट ऐसी सिचुएशन में इंसान दो भागों में बंट जाता है एक टूट के बिखर जाता है टूट के बिखर जाता है तो आपको पॉजिटिव थिंकिंग के साथ नहीं करना है ना कि बिखरना है यदि आप उस समय टूटे हैं और अगर बिखर जाएंगे तो फिर आप सब कुछ खो देते हैं कुछ नहीं बचता कुछ कर नहीं पाते इसलिए हमेशा पॉजिटिव थिंकिंग रखे दे रहा है दुरुस्त आएगा देर से मिलेगा लेकिन अच्छा मिलेगा आप परिश्रम करते रहे मेहनत करते रहिए इस यही चीज आपको और ज्यादा परिपक्व बनाएगी
मेरी जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुई जिन्हें जिन्होंने मुझे परिपक्व और मजबूत बनाया है कई ऐसे क्षण होते हैं व्यक्ति के जीवन में जब वो पूर्ण रूप से टूट चुका होता है उसे समझ नहीं आता है कि उसे अब क्या करना है वह अपनी फ्यूचर को लेकर चिंतित हो जाता है बट ऐसी सिचुएशन में इंसान दो भागों में बंट जाता है एक टूट के बिखर जाता है टूट के बिखर जाता है तो आपको पॉजिटिव थिंकिंग के साथ नहीं करना है ना कि बिखरना है यदि आप उस समय टूटे हैं और अगर बिखर जाएंगे तो फिर आप सब कुछ खो देते हैं कुछ नहीं बचता कुछ कर नहीं पाते इसलिए हमेशा पॉजिटिव थिंकिंग रखे दे रहा है दुरुस्त आएगा देर से मिलेगा लेकिन अच्छा मिलेगा आप परिश्रम करते रहे मेहनत करते रहिए इस यही चीज आपको और ज्यादा परिपक्व बनाएगी
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मेरे जीवन में एक ऐसी घटना घटी गरीबी और लाचारी और लोगों की तानाशाह जैसे कि मैं हमारे घर में पहले मेरे पिताजी बहुत दारु पीते थे और उसके बाद उसके एक गुरु ने कहा कि एक बेटा एक घर बार छोड़कर हमारे गांव के पास में एक मंदिर महामाया हथिया गांव है मेरा तो महामाया में मेरे पिताजी एक बाबा जी रहते थे उसके पास आए मुलाकात दिवस बैठने के लिए उन्होंने सलाह दी कि हर तुम जहां पूजा करने लगी और मेरे पिताजी पूजा करने लगे हम लोग गांव के लोग बोलते थे कि देखो गिरवा लगाकर जा रहे लोग ऐसे बोलते थे जब मैं पढ़ता के मेरे पिताजी मैं तो एक अच्छे आदमी बन गए तो दारू छोड़ कर मंदिर में पूजा पाठ करने लगे हालांकि काम धाम नहीं करते थे लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत काम कर लेते थे और उससे हम लोग की मंजू मन से जो खर्चा होती थी वह बगिया और उससे मेरा पढ़ाई बढ़ता गया और वह मंदिर में आता था पूजा पाठ करता था शाम को पढ़ने बैठता था मैंने कि भगवान ने मुझे आशीर्वाद दिया ऐसा कुछ होता है मन में होता है होता है कि 12वीं पास के एकदम गधा था गुरुजी में ऐसा होता है तब जाकर कुछ आगे कुछ ऐसा कर सकता मेरे दिमाग में है कि नहीं और हम गरीब है तो हमें मेहनत करनी पड़ेगी मुझे सीख मिली और मैं आज भी पिताजी महामाया में पूजा रहे हैं जिनका नाम है नदिया की कंप्लीट करके यूपीएससी का एग्जाम डेट
मेरे जीवन में एक ऐसी घटना घटी गरीबी और लाचारी और लोगों की तानाशाह जैसे कि मैं हमारे घर में पहले मेरे पिताजी बहुत दारु पीते थे और उसके बाद उसके एक गुरु ने कहा कि एक बेटा एक घर बार छोड़कर हमारे गांव के पास में एक मंदिर महामाया हथिया गांव है मेरा तो महामाया में मेरे पिताजी एक बाबा जी रहते थे उसके पास आए मुलाकात दिवस बैठने के लिए उन्होंने सलाह दी कि हर तुम जहां पूजा करने लगी और मेरे पिताजी पूजा करने लगे हम लोग गांव के लोग बोलते थे कि देखो गिरवा लगाकर जा रहे लोग ऐसे बोलते थे जब मैं पढ़ता के मेरे पिताजी मैं तो एक अच्छे आदमी बन गए तो दारू छोड़ कर मंदिर में पूजा पाठ करने लगे हालांकि काम धाम नहीं करते थे लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत काम कर लेते थे और उससे हम लोग की मंजू मन से जो खर्चा होती थी वह बगिया और उससे मेरा पढ़ाई बढ़ता गया और वह मंदिर में आता था पूजा पाठ करता था शाम को पढ़ने बैठता था मैंने कि भगवान ने मुझे आशीर्वाद दिया ऐसा कुछ होता है मन में होता है होता है कि 12वीं पास के एकदम गधा था गुरुजी में ऐसा होता है तब जाकर कुछ आगे कुछ ऐसा कर सकता मेरे दिमाग में है कि नहीं और हम गरीब है तो हमें मेहनत करनी पड़ेगी मुझे सीख मिली और मैं आज भी पिताजी महामाया में पूजा रहे हैं जिनका नाम है नदिया की कंप्लीट करके यूपीएससी का एग्जाम डेट
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मेरे जीवन में दूसरों की हंसी मुझे अपने जीवन में परिपक्व होने के लिए मजबूर कर दिया
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ऐसी कोई बात नहीं है बट हमारे संस्कार हमारे माता पिता हमारे दादा दादी हमारे जो भी घर के बड़े बुजुर्ग हैं उल्लू के संस्कार के ऊपर ही जाता है कि जिस तरह का संस्कार पब्लिक उमेले पब्लिक उसी तरह से जल जाते हैं तो मेरे साथ भी शायद ऐसा ही कुछ है ऐसे में सोच के नहीं बोल सकता कि शायद नहीं मतलब है यह मैं नहीं बोल सकता बट इतना बोल सकता हूं कि शायद मेरे घर वाले भी मुझे अच्छी सोच कर दी है जो थैंक्यू बोलते हैं अपनी महबूबा को और अपने से बड़े जितने भी बड़े हैं सबको मैं एक बात तहे दिल से धन्यवाद की सामना करता
ऐसी कोई बात नहीं है बट हमारे संस्कार हमारे माता पिता हमारे दादा दादी हमारे जो भी घर के बड़े बुजुर्ग हैं उल्लू के संस्कार के ऊपर ही जाता है कि जिस तरह का संस्कार पब्लिक उमेले पब्लिक उसी तरह से जल जाते हैं तो मेरे साथ भी शायद ऐसा ही कुछ है ऐसे में सोच के नहीं बोल सकता कि शायद नहीं मतलब है यह मैं नहीं बोल सकता बट इतना बोल सकता हूं कि शायद मेरे घर वाले भी मुझे अच्छी सोच कर दी है जो थैंक्यू बोलते हैं अपनी महबूबा को और अपने से बड़े जितने भी बड़े हैं सबको मैं एक बात तहे दिल से धन्यवाद की सामना करता
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प्यार में धोखा हुआ इसलिए विनय इस जीवन को बहुत कठिनाई से निकाला है और जिंदगी में सब कुछ करना लाइफ में कभी प्यार मत करना
प्यार में धोखा हुआ इसलिए विनय इस जीवन को बहुत कठिनाई से निकाला है और जिंदगी में सब कुछ करना लाइफ में कभी प्यार मत करना
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माता पिता की गरीबी
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खुद खुद पे डिपेंड होना दूसरे दूसरे पर डिपेंड होना यह बहुत ही गलत बात है और दूसरे पर डिपेंड होकर सारे कार्य करना यह हमें अच्छा नहीं लगता है इसलिए खुद पे डिपेंड होना ही मेरा मूल मंत्र है मैं खुद पर ही और यही कारण है कि मैं अभी परिपक्व होने की स्थिति में हूं
खुद खुद पे डिपेंड होना दूसरे दूसरे पर डिपेंड होना यह बहुत ही गलत बात है और दूसरे पर डिपेंड होकर सारे कार्य करना यह हमें अच्छा नहीं लगता है इसलिए खुद पे डिपेंड होना ही मेरा मूल मंत्र है मैं खुद पर ही और यही कारण है कि मैं अभी परिपक्व होने की स्थिति में हूं
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