भारत में सबसे अधिक ऊर्जा किससे प्राप्त की जाती है? ...

भारत में सबसे अधिक ऊर्जा पानी बहता पानी और समुद्र ज्वार ऊर्जा के स्रोत हैं। जनवरी 2012 में लघु पन बिजली के संयत्रों ने ग्रिड इंटरेक्टिव क्षमता में 14% योगदान दिया । लघु पन बिजली परियोजनाओं में बड़ी परियोजनाओं पर भारी निवेश किया जाता है। हाल के वर्षों में, पनबिजली ऊर्जा (मध्यम और छोटे पनबिजली संयंत्र) का उपयोग दूरदराज के अविद्युतीकृत गांवों तक बिजली पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है। लघु जल विद्युत की अनुमानित क्षमता देश में लगभग 15,000 मेगावाट है।वर्ष 2011-12 के दौरान, लघु जल विद्युत परियोजनाओं (3MW तक) की स्थापित क्षमता 258 मेगावाट के बराबर रही है। भूतापीय ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी से उत्पन्न गर्मी है। प्रकृति में प्रचलित गर्म जल के फव्वारे हैं जो भूतापीय ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति के लिए निदेशक का काम रूप में काम करते हैं। भारत में 340 से अधिक गर्म जल के फव्वारे हैं जिनका दोहन होना अभी बाकी है। नाभिकीय ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा ऐसी ऊर्जा है जो प्रत्येक परमाणु में अंतर्निहित होती है। नाभिकीय ऊर्जा संयोजन (परमाणुओं के संयोजन से) अथवा विखंडन (परमाणु-विखंडन) प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न की जा सकती है। इनमें विखंडन की प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जाती है। नाभिकीय विखंडन प्रक्रिया के लिए यूरेनियम एक प्रमुख कच्चा पदार्थ है। दुनियाभर में यह कई स्थानों से खुदाई के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। इसे संसाधित कर छोटी गोलियों में बदला जाता है। (संवर्धित यूरेनियम अर्थात्, रेडियो सक्रिय आइसोटोप प्राप्त करने हेतु)। इन गोलियों को लंबी छ्ड़ों में भरकर ऊर्जा इकाईयों के रिएक्टर में डाला जाता है। परमाणु ऊर्जा इकाई के रिएक्टर के अंदर यूरेनियम परमाणु नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन) द्वारा विखंडित किये जाते हैं। विखंडित होकर बनने वाले अन्य पदार्थों में प्लूटोनियम तथा थोरियम शामिल हैं। किसी श्रृंखला अभिक्रिया में परमाणु के टूटने से बने कण अन्य यूरेनियम परमाणुओं पर प्रहार करते हैं तथा उन्हें विखंडित करते हैं। इस प्रक्रिया में निर्मित कण एक श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा पुनः अन्य परमाणुओं को विखंडित करते हैं। यह प्रक्रिया बड़ी तीव्र गति से न हो इसके लिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट में विखंडन को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रक रॉड का प्रयोग किया जाता है। इन्हें मंदक (मॉडरेटर) कहते हैं। श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊष्मा का प्रयोग रिएक्टर के कोर में स्थित भारी जल को गर्म करने में किया जाता है। इसलिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट परमाण्विक ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलने के लिए किसी अन्य इंधन को जलाने की बजाय, श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का प्रयोग करता है। नाभिकीय कोर के चारों तरफ फैले भारी जल को ऊर्जा प्लांट के अन्य खंड में भेजा जाता है। यहां यह जल से भरे पाइपों के दूसरे सेट को गर्म कर भाप पैदा करता है। पाइपों के इस दूसरे सेट से उत्पन्न वाष्प का प्रयोग टर्बाइन चलाने में किया जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है। नाभिकीय ऊर्जा के लाभ नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की अपेक्षाकृत कम मात्रा निकलती है। इसलिए वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) में नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण का अपेक्षाकृत कम योगदान रहता है। मात्र एक इकाई द्वारा ही बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जा सकती है।
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भारत में सबसे अधिक ऊर्जा पानी बहता पानी और समुद्र ज्वार ऊर्जा के स्रोत हैं। जनवरी 2012 में लघु पन बिजली के संयत्रों ने ग्रिड इंटरेक्टिव क्षमता में 14% योगदान दिया । लघु पन बिजली परियोजनाओं में बड़ी परियोजनाओं पर भारी निवेश किया जाता है। हाल के वर्षों में, पनबिजली ऊर्जा (मध्यम और छोटे पनबिजली संयंत्र) का उपयोग दूरदराज के अविद्युतीकृत गांवों तक बिजली पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है। लघु जल विद्युत की अनुमानित क्षमता देश में लगभग 15,000 मेगावाट है।वर्ष 2011-12 के दौरान, लघु जल विद्युत परियोजनाओं (3MW तक) की स्थापित क्षमता 258 मेगावाट के बराबर रही है। भूतापीय ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी से उत्पन्न गर्मी है। प्रकृति में प्रचलित गर्म जल के फव्वारे हैं जो भूतापीय ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति के लिए निदेशक का काम रूप में काम करते हैं। भारत में 340 से अधिक गर्म जल के फव्वारे हैं जिनका दोहन होना अभी बाकी है। नाभिकीय ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा ऐसी ऊर्जा है जो प्रत्येक परमाणु में अंतर्निहित होती है। नाभिकीय ऊर्जा संयोजन (परमाणुओं के संयोजन से) अथवा विखंडन (परमाणु-विखंडन) प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न की जा सकती है। इनमें विखंडन की प्रक्रिया व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जाती है। नाभिकीय विखंडन प्रक्रिया के लिए यूरेनियम एक प्रमुख कच्चा पदार्थ है। दुनियाभर में यह कई स्थानों से खुदाई के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। इसे संसाधित कर छोटी गोलियों में बदला जाता है। (संवर्धित यूरेनियम अर्थात्, रेडियो सक्रिय आइसोटोप प्राप्त करने हेतु)। इन गोलियों को लंबी छ्ड़ों में भरकर ऊर्जा इकाईयों के रिएक्टर में डाला जाता है। परमाणु ऊर्जा इकाई के रिएक्टर के अंदर यूरेनियम परमाणु नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन) द्वारा विखंडित किये जाते हैं। विखंडित होकर बनने वाले अन्य पदार्थों में प्लूटोनियम तथा थोरियम शामिल हैं। किसी श्रृंखला अभिक्रिया में परमाणु के टूटने से बने कण अन्य यूरेनियम परमाणुओं पर प्रहार करते हैं तथा उन्हें विखंडित करते हैं। इस प्रक्रिया में निर्मित कण एक श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा पुनः अन्य परमाणुओं को विखंडित करते हैं। यह प्रक्रिया बड़ी तीव्र गति से न हो इसके लिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट में विखंडन को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रक रॉड का प्रयोग किया जाता है। इन्हें मंदक (मॉडरेटर) कहते हैं। श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा ऊष्मा ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊष्मा का प्रयोग रिएक्टर के कोर में स्थित भारी जल को गर्म करने में किया जाता है। इसलिए नाभिकीय ऊर्जा प्लांट परमाण्विक ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलने के लिए किसी अन्य इंधन को जलाने की बजाय, श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का प्रयोग करता है। नाभिकीय कोर के चारों तरफ फैले भारी जल को ऊर्जा प्लांट के अन्य खंड में भेजा जाता है। यहां यह जल से भरे पाइपों के दूसरे सेट को गर्म कर भाप पैदा करता है। पाइपों के इस दूसरे सेट से उत्पन्न वाष्प का प्रयोग टर्बाइन चलाने में किया जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है। नाभिकीय ऊर्जा के लाभ नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की अपेक्षाकृत कम मात्रा निकलती है। इसलिए वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) में नाभिकीय ऊर्जा के निर्माण का अपेक्षाकृत कम योगदान रहता है। मात्र एक इकाई द्वारा ही बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जा सकती है।Bharat Mein Sabse Adhik Urja Pani Bahata Pani Aur Samudra Jowar Urja Ke Srot Hain January 2012 Mein Laghu Pun Bijli Ke Sanyatron Ne Grid Intarektiv Kshamta Mein 14% Yogdan Diya Laghu Pun Bijli Pariyojanaon Mein Badi Pariyojanaon Par Bhari Nivesh Kiya Jata Hai Haal Ke Varshon Mein Panbijali Urja Madhyam Aur Chhote Panbijali Sanyantra Ka Upyog Dooradaraaj Ke Avidyutikrit Gaon Tak Bijli Pahuchne Ke Liye Prayog Kiya Jata Hai Laghu Jal Vidyut Ki Anumanit Kshamta Desh Mein Lagbhag 15,000 Megawatt Hai Varsh 2011-12 Ke Dauran Laghu Jal Vidyut Pariyojanaon (3MW Tak Ki Sthapit Kshamta 258 Megawatt Ke Barabar Rahi Hai Bhutapiye Urja Bhutapiye Urja Prithvi Se Utpann Garmi Hai Prakriti Mein Prachalit Garam Jal Ke Favvare Hain Jo Bhutapiye Urja Sroton Ki Upasthitee Ke Liye Nideshak Ka Kaam Roop Mein Kaam Karte Hain Bharat Mein 340 Se Adhik Garam Jal Ke Favvare Hain Jinka Dohan Hona Abhi Baki Hai Nabhikiye Urja Nabhikiye Urja Aisi Urja Hai Jo Pratyek Parmanu Mein Antarnihit Hoti Hai Nabhikiye Urja Sanyojan Parmanuo Ke Sanyojan Se Athva Vikhandan Parmanu Vikhandan Prakriya Dwara Utpann Ki Ja Sakti Hai Inmein Vikhandan Ki Prakriya Vyapak Roop Se Prayog Mein Lai Jati Hai Nabhikiye Vikhandan Prakriya Ke Liye Uranium Ek Pramukh Kaccha Padarth Hai Duniyabhar Mein Yeh Kai Sthanon Se Khudai Ke Maadhyam Se Prapt Kiya Jata Hai Ise Sansaadhit Kar Choti Goliyon Mein Badla Jata Hai Sanvardhit Uranium Arthat Radio Sakriy Isotope Prapt Karne Hetu In Goliyon Ko Lambi Chdon Mein Bharkar Urja Ikaiyon Ke Reactor Mein Dala Jata Hai Parmanu Urja Ikai Ke Reactor Ke Andar Uranium Parmanu Niyantrit Shrinkhala Abhikriya Controlled Chain Reaction Dwara Vikhandit Kiye Jaate Hain Vikhandit Hokar Banne Wale Anya Padarthon Mein Plutonium Tatha Thorium Shaamil Hain Kisi Shrinkhala Abhikriya Mein Parmanu Ke Tutne Se Bane Kan Anya Uranium Parmanuo Par Prahaar Karte Hain Tatha Unhein Vikhandit Karte Hain Is Prakriya Mein Nirmit Kan Ek Shrinkhala Abhikriya Dwara Punh Anya Parmanuo Ko Vikhandit Karte Hain Yeh Prakriya Badi Teevr Gati Se Na Ho Iske Liye Nabhikiye Urja Plant Mein Vikhandan Ko Niyantrit Karne Ke Liye Niyantrak Rod Ka Prayog Kiya Jata Hai Inhen Mandak Moderator Kehte Hain Shrinkhala Abhikriya Dwara Ushma Urja Mukt Hoti Hai Is Ushma Ka Prayog Reactor Ke Core Mein Sthit Bhari Jal Ko Garam Karne Mein Kiya Jata Hai Isliye Nabhikiye Urja Plant Paramanwik Urja Ko Ushma Urja Mein Badalne Ke Liye Kisi Anya Indhan Ko Jalaane Ki Bajay Shrinkhala Abhikriya Dwara Utpann Urja Ka Prayog Karta Hai Nabhikiye Core Ke Charo Taraf Faile Bhari Jal Ko Urja Plant Ke Anya Khand Mein Bheja Jata Hai Yahan Yeh Jal Se Bhare Paipon Ke Dusre Set Ko Garam Kar Bhap Paida Karta Hai Paipon Ke Is Dusre Set Se Utpann Vashp Ka Prayog Tubrine Chalane Mein Kiya Jata Hai Jisse Bijli Paida Hoti Hai Nabhikiye Urja Ke Labh Nabhikiye Urja Ke Nirmaan Mein Carbon Dioxide (CO2) Ki Apekshakrit Kam Matra Nikalti Hai Isliye Vaishvik Tapan Global Warming Mein Nabhikiye Urja Ke Nirmaan Ka Apekshakrit Kam Yogdan Rehta Hai Matra Ek Ikai Dwara Hi Bade Paimane Par Bijli Paida Ki Ja Sakti Hai
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भारत में सबसे अधिक ऊर्जा ताप विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से प्राप्त की जाती है। तापीय ऊर्जा संयंत्र भारत में विद्युत के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत हैं। तापीय ऊर्जा संयंत्र में, जीवाश्म ईंधन (कोयला, ईंधन तेल एवं प्राकृतिक गैस) में स्थित रासायनिक ऊर्जा को क्रमशः तापीय ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा एवं अंततः विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।
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भारत में सबसे अधिक ऊर्जा ताप विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से प्राप्त की जाती है। तापीय ऊर्जा संयंत्र भारत में विद्युत के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत हैं। तापीय ऊर्जा संयंत्र में, जीवाश्म ईंधन (कोयला, ईंधन तेल एवं प्राकृतिक गैस) में स्थित रासायनिक ऊर्जा को क्रमशः तापीय ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा एवं अंततः विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।Bharat Mein Sabse Adhik Urja Taap Vidyut Pariyojanaon Ke Maadhyam Se Prapt Ki Jati Hai Tapiy Urja Sanyantra Bharat Mein Vidyut Ke Sabse Bade Urja Srot Hain Tapiy Urja Sanyantra Mein Jivashm Indhan Koyla Indhan Tel Evam Prakritik Gas Mein Sthit Rasayanik Urja Ko Kramash Tapiy Urja Yantrik Urja Evam Antatah Vidyut Urja Mein Parivartit Kiya Jata Hai
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