बीना पैसे के क्या इंसान खुश रह सकता है? ...

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बिना पैसे की टेंशन क्वेश्चन आ सकते हैं बहुत ही खुशी खुश रहने के लिए इंसान को किसी भी चीज की जरूरत नहीं होती खुशियां खुशी अंदर से आती है पैसा जरूरी है बहुत जरूरी है किसी इंसान को जो भेज सकती शिक्षण इन से खाना रहना कपड़े पहनना शेखर सारी चीजें होना बहुत जरूरी है कि जब तक इंसान को यह सारी भेजी थी से नहीं मिलती ना तो वो आगे नहीं बढ़ पाता आगे नहीं सोच पाता उसके आगे लिए सोच पाता डेफिनिटी के लिए पैसा बहुत इंपॉर्टेंट है कि नहीं हमारी जरूरत है इससे हमें सेटिस्फेक्शन मिलेगा अभी से 64 नहीं होता है वह होता है लेकिन इससे खुशी खुश रहने के लिए हमें सेटिस्फाई होना बहुत जरूरी होता है हमारे पास कुछ भी हो उससे हम खुश हूं क्योंकि आप देखोगे ना तो दूसरों करो उनके पास करोड़ो हैं ना वह खुश है मैं ऑनलाइन हूं जिनके पास कुछ भी नहीं होता शराब ना कुछ ना कुछ पाने की दौड़ में लगी हुई मुझे यह चाहिए वह चाहिए मुझे लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि इस वक्त मेरे पास जो कुछ भी है ना उसमें कुछ क्यों नहीं होगा तो खुश रहने की जाना बहुत जरूरी है कि मैं किसी के पीछे भाग रहा हूं खुश रहने के लिए लेकिन जिस जिस चीज के पीछे भागते हुए मैं अपनी जिंदगी के दिन गुजार दे रहा हूं बता देना मुझे वापस नहीं मिलेगा तो फिर मुझे कुछ करना है तो मुझे आज ही खुश रहना है मुझे बता जो कुछ भी उसके साथ बाद में नहीं होगा
बिना पैसे की टेंशन क्वेश्चन आ सकते हैं बहुत ही खुशी खुश रहने के लिए इंसान को किसी भी चीज की जरूरत नहीं होती खुशियां खुशी अंदर से आती है पैसा जरूरी है बहुत जरूरी है किसी इंसान को जो भेज सकती शिक्षण इन से खाना रहना कपड़े पहनना शेखर सारी चीजें होना बहुत जरूरी है कि जब तक इंसान को यह सारी भेजी थी से नहीं मिलती ना तो वो आगे नहीं बढ़ पाता आगे नहीं सोच पाता उसके आगे लिए सोच पाता डेफिनिटी के लिए पैसा बहुत इंपॉर्टेंट है कि नहीं हमारी जरूरत है इससे हमें सेटिस्फेक्शन मिलेगा अभी से 64 नहीं होता है वह होता है लेकिन इससे खुशी खुश रहने के लिए हमें सेटिस्फाई होना बहुत जरूरी होता है हमारे पास कुछ भी हो उससे हम खुश हूं क्योंकि आप देखोगे ना तो दूसरों करो उनके पास करोड़ो हैं ना वह खुश है मैं ऑनलाइन हूं जिनके पास कुछ भी नहीं होता शराब ना कुछ ना कुछ पाने की दौड़ में लगी हुई मुझे यह चाहिए वह चाहिए मुझे लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि इस वक्त मेरे पास जो कुछ भी है ना उसमें कुछ क्यों नहीं होगा तो खुश रहने की जाना बहुत जरूरी है कि मैं किसी के पीछे भाग रहा हूं खुश रहने के लिए लेकिन जिस जिस चीज के पीछे भागते हुए मैं अपनी जिंदगी के दिन गुजार दे रहा हूं बता देना मुझे वापस नहीं मिलेगा तो फिर मुझे कुछ करना है तो मुझे आज ही खुश रहना है मुझे बता जो कुछ भी उसके साथ बाद में नहीं होगा
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दोस्तों बिना पैसे के भी इंसान खुश रह सकता है परंतु मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा जरूरी नहीं जिंदगी जिंदगी में पैसा बहुत जरूरी है क्योंकि बहुत सी ऐसी चीज है जो पैसे पैसे से खरीदी जा सकती हैं मैं मेरे कहने का तात्पर्य है कि सिर्फ पैसे को अपनी खुशी का मामला इतना बनाएं जो कि पैसा कभी हो सकता है कभी नहीं किसी पर ज्यादा हो सकता है किसी के पास काम हो सकता है तो पैसा एक मापदंड बंद ही नहीं सकता खुशी का तो खुशी कम सही मापदंड होता है संतुष्टि अंदरूनी संतुष्टि अगर आप जल्दी अपनी जिंदगी में पीछे पीछे कुछ कहना के ऐसे अफसर या कोई ना कोई ऐसी घटनाएं हुई होंगी जब आपने कुछ ऐसा किया वह छोटा भी हो सकता है बड़ा भी हो सकता है किसी की मदद कर दिया आपको कुछ हासिल हुआ हो सकता है वह छोटी सी चीज चाहिए परंतु उसको करने के बाद आपको संतुष्टि हुई अपनी अंदरूनी संतुष्टि मिले यही संतुष्टि आपका खुशी का कारण बने इसके अलावा अगर हम अपने आसपास के देखे तो हमें बहुत से ऐसे इंसान बिक जाएंगे ऐसे लोग देखेंगे जो कम पैसे में भी बहुत संतुष्ट देखते हैं बहुत खुश रहते हैं कहीं ना कहीं यह जान ले कि पैसा जरूरी है काफी चीजों के लिए परंतु अगर हम सोचें कि कैसे पैसे से ही खुशी मिली कि वह गलत है पैसे का सही माप दंड हमेशा एक अंदरूनी संतुष्टि हो सकती है
दोस्तों बिना पैसे के भी इंसान खुश रह सकता है परंतु मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा जरूरी नहीं जिंदगी जिंदगी में पैसा बहुत जरूरी है क्योंकि बहुत सी ऐसी चीज है जो पैसे पैसे से खरीदी जा सकती हैं मैं मेरे कहने का तात्पर्य है कि सिर्फ पैसे को अपनी खुशी का मामला इतना बनाएं जो कि पैसा कभी हो सकता है कभी नहीं किसी पर ज्यादा हो सकता है किसी के पास काम हो सकता है तो पैसा एक मापदंड बंद ही नहीं सकता खुशी का तो खुशी कम सही मापदंड होता है संतुष्टि अंदरूनी संतुष्टि अगर आप जल्दी अपनी जिंदगी में पीछे पीछे कुछ कहना के ऐसे अफसर या कोई ना कोई ऐसी घटनाएं हुई होंगी जब आपने कुछ ऐसा किया वह छोटा भी हो सकता है बड़ा भी हो सकता है किसी की मदद कर दिया आपको कुछ हासिल हुआ हो सकता है वह छोटी सी चीज चाहिए परंतु उसको करने के बाद आपको संतुष्टि हुई अपनी अंदरूनी संतुष्टि मिले यही संतुष्टि आपका खुशी का कारण बने इसके अलावा अगर हम अपने आसपास के देखे तो हमें बहुत से ऐसे इंसान बिक जाएंगे ऐसे लोग देखेंगे जो कम पैसे में भी बहुत संतुष्ट देखते हैं बहुत खुश रहते हैं कहीं ना कहीं यह जान ले कि पैसा जरूरी है काफी चीजों के लिए परंतु अगर हम सोचें कि कैसे पैसे से ही खुशी मिली कि वह गलत है पैसे का सही माप दंड हमेशा एक अंदरूनी संतुष्टि हो सकती है
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हां रह सकता है आप अपनी आवश्यकताओं का त्याग कर दीजिए जो व्यक्ति आप लोगों ने आप स्तन वाली ली है तो इंसान बिना पैसे की भी कुछ ऐसी सभी धर्मों का समान आदर करता हूं कि तू अपने कर्मों में ऐसे ऐसे महान साधुओं के दर्शन किए हैं जिन्होंने वास्तव में जीवन में अपने दांत को माना हुआ है बे आवश्यकता से अधिक किसी वस्तुओं का संग्रह नहीं करते हैं और उन्होंने वास्तव में त्याग में जीवन जी रहे हैं मैं एक राजेश सुर्जी आंचल जैन धर्म की उनसे भी मिला हूं वास्तव में मैंने उनका जीवन कुछ देखा है मैं उनसे इतना प्रभावित हूं कि कोई चाहती है तो मैं जीवन जी सकते थे उनके पास इतनी अथाह संपत्ति थी और उस संपत्ति को त्याग करके और वह साधु बने और जैन धर्म की भी वो जैसे हमारे यहां हिंदू धर्म में शंकराचार्य का जन्म स्थान है वही जैन धर्म जैन धर्म में स्त्री का स्थान होता है रायपुर जी का स्थान है लेकिन अंशुल जी हमेशा वैभव का त्याग किया सुख समृद्धि का त्याग किया और मैंने उनको देखा कि बिना पैसे की बीवी खुश थी अर्थात पैसा तो हम लोगों के जीने का एक साधन है शादी नहीं इस आग में तप आदि लोगों ने भौतिकता वादी लोगों ने वेस्टर्न कल्चर के सलोने धन को कमाने के लिए उचित अनुचित सभी का त्याग कर दिया अन्य धर्म आदि से भी पैसा कमाना चालू कर दिया क्योंकि उनके लिए पैसा ही सर्वोपरि है इंसान का कद उनके लिए बना है पतन का कद बहुत ऊंचा है तो ऐसे स्वार्थी उनका निम्न श्रेणी की भी इंसान होते हैं बाकी दिन आ धमकी दिया जा सकता है
हां रह सकता है आप अपनी आवश्यकताओं का त्याग कर दीजिए जो व्यक्ति आप लोगों ने आप स्तन वाली ली है तो इंसान बिना पैसे की भी कुछ ऐसी सभी धर्मों का समान आदर करता हूं कि तू अपने कर्मों में ऐसे ऐसे महान साधुओं के दर्शन किए हैं जिन्होंने वास्तव में जीवन में अपने दांत को माना हुआ है बे आवश्यकता से अधिक किसी वस्तुओं का संग्रह नहीं करते हैं और उन्होंने वास्तव में त्याग में जीवन जी रहे हैं मैं एक राजेश सुर्जी आंचल जैन धर्म की उनसे भी मिला हूं वास्तव में मैंने उनका जीवन कुछ देखा है मैं उनसे इतना प्रभावित हूं कि कोई चाहती है तो मैं जीवन जी सकते थे उनके पास इतनी अथाह संपत्ति थी और उस संपत्ति को त्याग करके और वह साधु बने और जैन धर्म की भी वो जैसे हमारे यहां हिंदू धर्म में शंकराचार्य का जन्म स्थान है वही जैन धर्म जैन धर्म में स्त्री का स्थान होता है रायपुर जी का स्थान है लेकिन अंशुल जी हमेशा वैभव का त्याग किया सुख समृद्धि का त्याग किया और मैंने उनको देखा कि बिना पैसे की बीवी खुश थी अर्थात पैसा तो हम लोगों के जीने का एक साधन है शादी नहीं इस आग में तप आदि लोगों ने भौतिकता वादी लोगों ने वेस्टर्न कल्चर के सलोने धन को कमाने के लिए उचित अनुचित सभी का त्याग कर दिया अन्य धर्म आदि से भी पैसा कमाना चालू कर दिया क्योंकि उनके लिए पैसा ही सर्वोपरि है इंसान का कद उनके लिए बना है पतन का कद बहुत ऊंचा है तो ऐसे स्वार्थी उनका निम्न श्रेणी की भी इंसान होते हैं बाकी दिन आ धमकी दिया जा सकता है
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बिना पैसे के क्या इंसान खुश रह सकता है मेरा मानना है कि खुशी किसी पैसे और गरीबी की मोहताज नहीं रहती है वह इंसान के अंदर खुद है कि अगर उसके पास संतोष रूपी धन है तो वह खुश है इसके लिए उसे चाहे पैसा हो या गरीब हो वह कोई मायने नहीं रखता है बहुत आदमी है जो एक छोटा सा थोड़ा सा खाना खा कर भी खुश हैं और कई के सामने छप्पन भोग है फिर भी वह खुश नहीं है एक आदमी है कि वह अपने परिवार के साथ वन बेडरुम फॉल में भी है कि वह खुश हो संतोष और कई पांच बेडरूम पल में भी रहकर वह खुशी नहीं है क्योंकि मैं रूम में थोड़ी सोएगा लेकिन उसकी आदत है कि खुश नहीं होना क्योंकि उसको और पढ़ना है और पढ़ना है और जो उसके पास है उसमें भी वह कमी निकालता रहता है कि नहीं मेरे पास और होना चाहिए तो जो यह और की चाहत है वह उसे खुश रहने दे देती तो इसका सबसे बड़ा खुश रहने का इंसान का यह है कि ऐसा कुछ नहीं है उसके अंदर अगर खुशी है संतोष है रो के हालात से खुश हैं ना खुश नहीं है अगर वह खुश है तो वह खुशी खुश रह सकता है उसके ऊपर है कि उसको क्या रहने दुखी करना है ये खुश रहना अगर वह सोच रहा है कि नहीं मेरे किस्मत का मुझे मिल गया मैं अपनी कोशिश करता हूं लेकिन किसी को खुश नहीं की इसके कारण ही हो गया इसके कारण होगे तो इंसान खुश रह सकता है बिना पैसे की
बिना पैसे के क्या इंसान खुश रह सकता है मेरा मानना है कि खुशी किसी पैसे और गरीबी की मोहताज नहीं रहती है वह इंसान के अंदर खुद है कि अगर उसके पास संतोष रूपी धन है तो वह खुश है इसके लिए उसे चाहे पैसा हो या गरीब हो वह कोई मायने नहीं रखता है बहुत आदमी है जो एक छोटा सा थोड़ा सा खाना खा कर भी खुश हैं और कई के सामने छप्पन भोग है फिर भी वह खुश नहीं है एक आदमी है कि वह अपने परिवार के साथ वन बेडरुम फॉल में भी है कि वह खुश हो संतोष और कई पांच बेडरूम पल में भी रहकर वह खुशी नहीं है क्योंकि मैं रूम में थोड़ी सोएगा लेकिन उसकी आदत है कि खुश नहीं होना क्योंकि उसको और पढ़ना है और पढ़ना है और जो उसके पास है उसमें भी वह कमी निकालता रहता है कि नहीं मेरे पास और होना चाहिए तो जो यह और की चाहत है वह उसे खुश रहने दे देती तो इसका सबसे बड़ा खुश रहने का इंसान का यह है कि ऐसा कुछ नहीं है उसके अंदर अगर खुशी है संतोष है रो के हालात से खुश हैं ना खुश नहीं है अगर वह खुश है तो वह खुशी खुश रह सकता है उसके ऊपर है कि उसको क्या रहने दुखी करना है ये खुश रहना अगर वह सोच रहा है कि नहीं मेरे किस्मत का मुझे मिल गया मैं अपनी कोशिश करता हूं लेकिन किसी को खुश नहीं की इसके कारण ही हो गया इसके कारण होगे तो इंसान खुश रह सकता है बिना पैसे की
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