सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में 21 लाख 'अवांछित' लड़कियां हैं, क्योंकि दंपति बेटे होने तक बच्चे पैदा करते हैं ।इस पक्षपातपूर्ण सोच को कैसे बदला जा सकता है? ...

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इस पक्षपातपूर्ण सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें खुद एक उदाहरण बनना होगा l हमें हमारे घर की औरतों और लड़कियों को प्रोत्साहित करना होगा ताकि वह आगे बढ़े और उनको आगे बढ़ने में मदद भी करनी पड़ेगी l उसक...जवाब पढ़िये
इस पक्षपातपूर्ण सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें खुद एक उदाहरण बनना होगा l हमें हमारे घर की औरतों और लड़कियों को प्रोत्साहित करना होगा ताकि वह आगे बढ़े और उनको आगे बढ़ने में मदद भी करनी पड़ेगी l उसके बाद हम लोगों के पास जाकर यह बता सकते हैं कि लड़की का क्या महत्व है, अगर लड़की नहीं होगी तो उनका वंश भी आगे नहीं बढ़ेगा l और उन्हें यह भी बताना होगा हम सब लड़कियों को पराया धन कहते हैं l शादी करने के बाद उन्हें पराया समजने भी लगते हैं l लेकिन लड़कियां ही होती है जो शादी के बाद भी अपने मां बाप का ख्याल रखती है, उनके पास आती है l यहां तक कि कुछ लड़कियां अपने मां-बाप को अपने साथ भी रखती है l लेकिन जिन बेटों की वजह से हम यह सब करते हैं वही बेटे उन मां बाप को वृद्धाश्रम में डाल देते हैं l तो हमें यह सब उनको समझाना होगा तभी यह पक्षपात पूर्ण सोच बदली जा सकती है lIs Pakshpatpurna Soch Ko Badalne Ke Liye Sabse Pehle Hume Khud Ek Udaharan Banana Hoga L Hume Hamare Ghar Ki Auraton Aur Ladkiyon Ko Protsahit Karna Hoga Taki Wah Aage Badhe Aur Unko Aage Badhne Mein Madad Bhi Karni Padegi L Uske Baad Hum Logon Ke Paas Jaakar Yeh Bata Sakte Hain Ki Ladki Ka Kya Mahatva Hai Agar Ladki Nahi Hogi To Unka Vansh Bhi Aage Nahi Badhega L Aur Unhen Yeh Bhi Batana Hoga Hum Sab Ladkiyon Ko Paraaya Dhan Kehte Hain L Shadi Karne Ke Baad Unhen Paraaya Samajhne Bhi Lagte Hain L Lekin Ladkiyan Hi Hoti Hai Jo Shadi Ke Baad Bhi Apne Maa Baap Ka Khayal Rakhti Hai Unke Paas Aati Hai L Yahan Tak Ki Kuch Ladkiyan Apne Maa Baap Ko Apne Saath Bhi Rakhti Hai L Lekin Jin Beton Ki Wajah Se Hum Yeh Sab Karte Hain Wahi Bete Un Maa Baap Ko Vrudhashram Mein Dal Dete Hain L To Hume Yeh Sab Unko Samajhana Hoga Tabhi Yeh Pakshapat Poorn Soch Badli Ja Sakti Hai L
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इस सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें और आपको कदम उठाने की आवश्यकता होगी l मुझे लगता है जैसे बेटा होने की खुशी में आप लोग जश्न मनाते हैं वैसा अगर जश्न बेटियों के जन्म होने पर होने लगेगा तो जरुर ही भार...जवाब पढ़िये
इस सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें और आपको कदम उठाने की आवश्यकता होगी l मुझे लगता है जैसे बेटा होने की खुशी में आप लोग जश्न मनाते हैं वैसा अगर जश्न बेटियों के जन्म होने पर होने लगेगा तो जरुर ही भारत में इस तरह की चीजें आने लगेंगी l अभी तो भारत में यह आंकड़ा दिखाया जा चुका है कि 21 लाख अवन्शिनीय लड़कियां हैं l मुझे लगता है पहले अगर इस बात की अगर इस तरह का सर्वे किया था तुझे और ज्यादा आता l हाँ, मतलब सीधा-सीधा कहने का अर्थ है कि इसमें कमी आ रही है और आज की युवा पीढ़ी की सोच बदल रही है l वह लड़कियों को बाहर जैसा नहीं महसूस करती l हालांकि जो पुराना समाज था उस से ओतप्रोत चीजे खत्म होने में, ट्रांससीशन फेज में बहुत टाइम लगेगा लेकिन जब तक इस तरह के कार्य चल रहे हैं, जब तक लड़कियों को सामान सब तरीके से नहीं दिया जाता, समान अवसर नहीं दी जाती, जब तक उनके साथ पक्षपात पूर्ण सोच को हटाया नहीं जाता तब तक मुझे लगता है इस तरह की चीजें अपनाया जाना अति आवश्यक है कि आप समाज में जाकर स्वयं का उदाहरण पेश करें ताकि समाज आपको देखकर प्रेरित हो और लड़कियों के लिए अच्छी सोच रखें l जैसे कि साउथ इंडिया में अब जाएंगे तो केरल, तमिलनाडु में वहां पर काफी इज्जत की जाती l कल्चर भी मातृ सत्तात्मक टाइप का है, वहां पर लड़के की लड़कियों की शादी होती है तो लड़की को घर पर आ जाता है l मतलब अगर इंडिया में बात, नार्थ इंडिया बात की जाए तो मुझे लगता है शायद घर जमाई वाला जो केस होता है वह सैम साउथ इंडिया में कोई स्थानों पर किया जाता है l तो इस तरह की चीजें करना थोड़ा आवश्यक है ताकि महिलाओं को थोड़ा आजादी मिली और महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार हो, समाज एक सेफ सी जगह बनाए तो महिलाओं को भी बराबर सम्मान दिया जाएगा तो मुझे लगता नहीं है कि इस तरह के डाटा जो है वह आगे बढ़ेंगे, कमी होते जाएंगे अभी भी कम हो रहे हैं द्रासटीकलि कम करने की जरूरत है, धन्यवाद lIs Soch Ko Badalne Ke Liye Sabse Pehle Hume Aur Aapko Kadam Uthane Ki Avashyakta Hogi L Mujhe Lagta Hai Jaise Beta Hone Ki Khushi Mein Aap Log Jashn Manate Hain Waisa Agar Jashn Betiyon Ke Janm Hone Par Hone Lagega To Zaroor Hi Bharat Mein Is Tarah Ki Cheezen Aane Lagengi L Abhi To Bharat Mein Yeh Aakadaa Dikhaya Ja Chuka Hai Ki 21 Lakh Avanshiniya Ladkiyan Hain L Mujhe Lagta Hai Pehle Agar Is Baat Ki Agar Is Tarah Ka Survey Kiya Tha Tujhe Aur Jyada Aata L Haan Matlab Sidhaa Sidhaa Kehne Ka Arth Hai Ki Isme Kami Aa Rahi Hai Aur Aaj Ki Yuva Pidhi Ki Soch Badal Rahi Hai L Wah Ladkiyon Ko Bahar Jaisa Nahi Mahsus Karti L Halanki Jo Purana Samaaj Tha Us Se Otprot Cheeje Khatam Hone Mein Transasishan Phase Mein Bahut Time Lagega Lekin Jab Tak Is Tarah Ke Karya Chal Rahe Hain Jab Tak Ladkiyon Ko Saamaan Sab Tarike Se Nahi Diya Jata Saman Avsar Nahi Di Jati Jab Tak Unke Saath Pakshapat Poorn Soch Ko Hataya Nahi Jata Tab Tak Mujhe Lagta Hai Is Tarah Ki Cheezen Apnaya Jana Ati Aavashyak Hai Ki Aap Samaaj Mein Jaakar Swayam Ka Udaharan Pesh Karen Taki Samaaj Aapko Dekhkar Prerit Ho Aur Ladkiyon Ke Liye Acchi Soch Rakhen L Jaise Ki South India Mein Ab Jaenge To Kerala Tamil Nadu Mein Wahan Par Kafi Izzat Ki Jati L Culture Bhi Matri Sattatmak Type Ka Hai Wahan Par Ladke Ki Ladkiyon Ki Shadi Hoti Hai To Ladki Ko Ghar Par Aa Jata Hai L Matlab Agar India Mein Baat Naarth India Baat Ki Jaye To Mujhe Lagta Hai Shayad Ghar Jamai Wala Jo Case Hota Hai Wah Sam South India Mein Koi Sthanon Par Kiya Jata Hai L To Is Tarah Ki Cheezen Karna Thoda Aavashyak Hai Taki Mahilaon Ko Thoda Azadi Mili Aur Mahilaon Ke Saath Accha Vyavhar Ho Samaaj Ek Safe Si Jagah Banaye To Mahilaon Ko Bhi Barabar Samman Diya Jayega To Mujhe Lagta Nahi Hai Ki Is Tarah Ke Data Jo Hai Wah Aage Badhenge Kami Hote Jaenge Abhi Bhi Kum Ho Rahe Hain Drasatikli Kum Karne Ki Zaroorat Hai Dhanyavad L
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