देवी सरस्वती ब्रह्मा जी की बेटी है या पत्नी ? ...

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हम सभी जानते हैं कि ब्रह्मा जी की पत्नी विद्या की देवी सरस्वती और ब्रह्मा जी की सृष्टि का रचयिता कहां जाते हैं परंतु यह बात भी सही है कि सरस्वती जी ब्रह्मा जी की पुत्री है हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ रोमांस दो ग्रंथ है सरस्वती पुराण और मत्स्य पुराण इन दोनों पुराणों में बताया गया है कि ब्रह्मा ने अपनी ही बेटी के साथ विवाह रचाया था और अब हम लोगों को भी चेक करना चाहती है कि सरस्वती माता हमार ब्रह्मा जी की पत्नी थी या बेटी थी अब यह बात हमारा अपना पर्सनल ओपिनियन पर ही रह जाती है कि हम क्या मानते हैं उनको उनका बेटी मानती है या उनकी पत्नी मानते हैंHum Sabhi Jante Hain Ki Brahma Ji Ki Patni Vidya Ki Devi Saraswati Aur Brahma Ji Ki Shrishti Ka Rachayita Kahan Jaate Hain Parantu Yeh Baat Bhi Sahi Hai Ki Saraswati Ji Brahma Ji Ki Putri Hai Hindu Dharm Ke Pramukh Granth Romance Do Granth Hai Saraswati Puran Aur Matsya Puran In Dono Puraanon Mein Bataya Gaya Hai Ki Brahma Ne Apni Hi Beti Ke Saath Vivah Rachaaya Tha Aur Ab Hum Logon Ko Bhi Check Karna Chahti Hai Ki Saraswati Mata Humaar Brahma Ji Ki Patni Thi Ya Beti Thi Ab Yeh Baat Hamara Apna Personal Opiniyan Par Hi Rah Jati Hai Ki Hum Kya Manate Hain Unko Unka Beti Maanati Hai Ya Unki Patni Manate Hain
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अजी ऐसा ब्रह्म बहुत बार लोगों को हो जाता है कि सरस्वती जी ब्रह्मा जी की पत्नी थी या पुत्री थी लेकिन जब शास्त्रों के का अध्ययन करते हैं हम तो इसमें दोनों ही बात आती है किसी कल को मैं कल बढ़ता देख समय अंतराल होता है जैसे युग होते हैं सतयुग द्वापर युग आधी उसी तरह बहुत से लोगों का एक जो समय होता है उनको कल्प कहते हैं तो किसी कल को में ब्रह्मा जी की पत्नी थी सरस्वती और किसी कल को मैं किसी अन्य कलाओं में मतलब उस उस कल्पना ने अन्य कल्प में ब्रह्मा जी की पुत्री थी माता सरस्वती माता दोनों में अंतर है और जो ऊपर मैंने कहा है कि सरस्वती माता से उनकी जब उनके पुत्र हैं ब्रह्मा जी की पुत्री सरस्वती जी से ब्रह्मा जी ने विवाह किया था इसका अर्थात आप ठीक से नहीं लगा पाई है परंपरा अनुसार यह है कि मत्स्य पुराण में इसका समाधान दिया गया है कि ब्रह्मा जी ना तो कोई मनुष्य यदि मनुष्य नहीं होने के कारण उनका किसी भी प्रकार से यह कार्य होना गलत नहीं है क्योंकि मनुष्य में सारे नियम आदि आते हैं क्योंकि वह एक शक्ति शक्ति का कोई भी मनुष्य की तरह को नियम आदि नहीं होते इसलिए ईश्वर ब्रह्मा ही विष्णु है विष्णु ही शिव है और शिव जी सरस्वती है इन में कोई भेद नहीं है बस दिखाई देता है इसी तरह खुश भगवान शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत के अंदर जवाब चर्चा करते हैं और परंपरा से जब इसको का अध्ययन करते हैं तब आपको इसका उत्तर पता चलेगा और पुराण को हमेशा शास्त्रों को विद्वान लोगों से ही सुनना चाहिए यदि आप सीधे ही पढ़ लेंगे तो आपको बहुत से भ्रम हो सकता है हर हर महादेवAji Aisa Brahma Bahut Baar Logon Ko Ho Jata Hai Ki Saraswati Ji Brahma Ji Ki Patni Thi Ya Putri Thi Lekin Jab Shashtro Ke Ka Adhyayan Karte Hain Hum To Isme Dono Hi Baat Aati Hai Kisi Kal Ko Main Kal Badhta Dekh Samay Antaral Hota Hai Jaise Yug Hote Hain Satayug Dwapar Yug Aadhi Ussi Tarah Bahut Se Logon Ka Ek Jo Samay Hota Hai Unko Kalp Kehte Hain To Kisi Kal Ko Mein Brahma Ji Ki Patni Thi Saraswati Aur Kisi Kal Ko Main Kisi Anya Kalaon Mein Matlab Us Us Kalpana Ne Anya Kalp Mein Brahma Ji Ki Putri Thi Mata Saraswati Mata Dono Mein Antar Hai Aur Jo Upar Maine Kaha Hai Ki Saraswati Mata Se Unki Jab Unke Putra Hain Brahma Ji Ki Putri Saraswati Ji Se Brahma Ji Ne Vivah Kiya Tha Iska Arthat Aap Theek Se Nahi Laga Payi Hai Parampara Anusar Yeh Hai Ki Matsya Puran Mein Iska Samadhan Diya Gaya Hai Ki Brahma Ji Na To Koi Manushya Yadi Manushya Nahi Hone Ke Kaaran Unka Kisi Bhi Prakar Se Yeh Karya Hona Galat Nahi Hai Kyonki Manushya Mein Sare Niyam Aadi Aate Hain Kyonki Wah Ek Shakti Shakti Ka Koi Bhi Manushya Ki Tarah Ko Niyam Aadi Nahi Hote Isliye Ishwar Brahma Hi Vishnu Hai Vishnu Hi Shiv Hai Aur Shiv Ji Saraswati Hai In Mein Koi Bhed Nahi Hai Bus Dikhai Deta Hai Isi Tarah Khush Bhagwan Shankaracharya Ka Advait Vedant Ke Andar Jawab Charcha Karte Hain Aur Parampara Se Jab Isko Ka Adhyayan Karte Hain Tab Aapko Iska Uttar Pata Chalega Aur Puran Ko Hamesha Shashtro Ko Vidwan Logon Se Hi Sunna Chahiye Yadi Aap Seedhe Hi Padh Lenge To Aapko Bahut Se Bharam Ho Sakta Hai Har Har Mahadev
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