हिंदुस्तान की राजनीति में कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं हो पाता ऐसा क्यों? ...

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अगर भारत देश में एक मुस्लिम प्रधानमंत्री बनता हो तो क्या यह संभव है क्या एक अच्छी राजनीति पार्टी बन सकती हैं? ...

एक प्रधानमंत्री का रिस्पांसिबिलिटीज बहुत सारा होते हैं देश के लोगों को देखने के साथ साथ बाहर जो देशों के साथ जो और रिलेशनशिप जो है वह भी बनाना पड़ता है जो बिजनेस है बिजनेस को भी आगे पढ़ाना पड़ता है जोजवाब पढ़िये
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क्या देश का प्रधानमंत्री ऐसा हो जो अपने परिवार के बारे में सोचे देश के बारे नहीं? ...

200 जब कोई इंसान देश का प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो उसकी अवसर जो कर्ता भी होता है दायित्व होता है बहुत बड़ा हो जाता है उसके लिए उसका घर परिवार ही उसका परिवार नहीं रहता सारी प्रजा उसका परिवार हो जाती हजवाब पढ़िये
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एक नेता सांसद मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को समाज के लिए क्या योगदान होना चाहिए? ...

लिखी कोई भी नेता सांसद मुख्यमंत्री या फिर कोई भी प्रधानमंत्री जो है वह समाज के लिए सिर्फ यही कर सकता है कि वह अपना जो है ज्यादा से ज्यादा वक्त समाज के काम में लगा और उसके अतिरिक्त जो है वह उसकी कभी भीजवाब पढ़िये
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भारत का प्रधानमंत्री कोई मुसलमान बन जाए तो भारत का भविष्य किस प्रकार का होगा मैं आपका विचार जानना चाहता हूं? ...

भारत का प्रधानमंत्री जो है देखिए अगर कोई मुस्लिम हो तो से कोई फर्क नहीं पड़ता है जो भारत का प्रधानमंत्री जो भी बनता है वह कास्ट के हिसाब से नहीं बनाया जाता है उसकी एबिलिटी क्या है यानी कि वह इंसान कितजवाब पढ़िये
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जब तक प्रजातंत्र में धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर योग्यता के आधार पर ठंडी नहीं होगा तब तक यह संभव नहीं जब लोग अपने धर्म और जाति समुदाय से ऊपर आकर योग्यता के आधार पर देश के हित के अनुसार जब बातें आएंगी तब यह संभव होगा राष्ट्रपति राष्ट्रपति प्रणाली की पद्धति शासन पद्धति ए डॉग की जाएगी तब यह संभव दिखता है और जब तक कि आप को मास अपनी करने की पार्टी नहीं है योग्यता नहीं है तो किसी जाति और धर्म क्या था इसलिए यह कहना कि मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में क्यों नहीं आते हैं जब तक आप अपने अपने के बांडी से बाहर नहीं निकलते हैं तब तक ऐसा सोचना बेमानी एपीजे अब्दुल कलाम उसे पहले उससे पहले डॉक्टर जाकिर हुसैन राष्ट्रपति इनकी योग्यता इनकी पढ़ाई काम आ सकूं उनके प्रति समाज और देश में एक बहुत ही सम्मानीय स्थिति गई इसकी मुख्य नृत्य मिला प्रधानमंत्री की भागवत चाहिए 542 एमपी का समर्थन चाहिए यह कलर विषय हो जाता है राष्ट्रपति शासन प्रणाली पद्धति जब हिंदुस्तान में होगी तत्सम
जब तक प्रजातंत्र में धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर योग्यता के आधार पर ठंडी नहीं होगा तब तक यह संभव नहीं जब लोग अपने धर्म और जाति समुदाय से ऊपर आकर योग्यता के आधार पर देश के हित के अनुसार जब बातें आएंगी तब यह संभव होगा राष्ट्रपति राष्ट्रपति प्रणाली की पद्धति शासन पद्धति ए डॉग की जाएगी तब यह संभव दिखता है और जब तक कि आप को मास अपनी करने की पार्टी नहीं है योग्यता नहीं है तो किसी जाति और धर्म क्या था इसलिए यह कहना कि मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में क्यों नहीं आते हैं जब तक आप अपने अपने के बांडी से बाहर नहीं निकलते हैं तब तक ऐसा सोचना बेमानी एपीजे अब्दुल कलाम उसे पहले उससे पहले डॉक्टर जाकिर हुसैन राष्ट्रपति इनकी योग्यता इनकी पढ़ाई काम आ सकूं उनके प्रति समाज और देश में एक बहुत ही सम्मानीय स्थिति गई इसकी मुख्य नृत्य मिला प्रधानमंत्री की भागवत चाहिए 542 एमपी का समर्थन चाहिए यह कलर विषय हो जाता है राष्ट्रपति शासन प्रणाली पद्धति जब हिंदुस्तान में होगी तत्सम
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ऐसा कुछ भी नहीं है कि कोई नेता प्रधानमंत्री की मुस्लिम रेस में नहीं आ सकता जन आप अगर आप हिंदुस्तान में रहते तो ऐसी सोच से दूर रहे तो बेहतर है ना कोई हिंदू है ना कोई मुसलमान हम सब भारतीय हैं और जाति धर्म में पड़े रहेंगे आप कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे आप उसी जाति धर्म में पूरी जिंदगी निकल देंगे तरक्की के रास्ते पर लाने का सबसे बड़ा दिन बनाने से पहले
ऐसा कुछ भी नहीं है कि कोई नेता प्रधानमंत्री की मुस्लिम रेस में नहीं आ सकता जन आप अगर आप हिंदुस्तान में रहते तो ऐसी सोच से दूर रहे तो बेहतर है ना कोई हिंदू है ना कोई मुसलमान हम सब भारतीय हैं और जाति धर्म में पड़े रहेंगे आप कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे आप उसी जाति धर्म में पूरी जिंदगी निकल देंगे तरक्की के रास्ते पर लाने का सबसे बड़ा दिन बनाने से पहले
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इस देश में मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में कैसे शामिल हो पाएगा आप ही बताइए इस देश ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को देश का गृहमंत्री बनाया था उसकी बेटी का प्रण हो गया 5 दुर्दांत आतंकियों को छोड़ना पड़ गुलाम नबी आजाद ज्योतिष के जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे केंद्र में मंत्री रहे उनके एक भतीजे का अपहरण हो जाता है तो आतंकियों को छोड़ना पड़ता है देश में जब एक मुसलमान गृह मंत्री बनता है तो पूरे कश्मीर से 3:30 लाख 4:00 लाख पंडितों की हत्या की जाती है उसे उसे वहां से अपने मूल घरों से बेदखल कर के भगा दिया जाता है तो इस बात का सबसे बड़ा संकट है कोई मुसलमान रितेश के महत्वपूर्ण पद पर बैठता है तो इस बात की क्या गारंटी है कि देश की संप्रभुता देश की एकता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी इस बात का बहुत बड़ा संशय है इसलिए कोई भी देश का मुसलमान अगर प्रधानमंत्री की रैली रहना चाहता है या धानमंत्री बनने का सपना देखता है तो उसे अपनी राष्ट्रपति अपनी राष्ट्रीयता अपनी सोच अपने विचार को प्रमाणित करना पड़ेगा सिद्ध करना पड़ेगा ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे कलाम ने सिद्ध किया एक मुसलमान होते हुए भी उन्होंने अपने धर्म को सम्मान देते हुए सभी धर्मों का सम्मान किया और राष्ट्र धर्म सर्वोपरि रखा और जो उन्होंने राष्ट्र को दिया है यह राष्ट्र कभी उसे भुला नहीं पाएगा इस देश के हिंदू को मुसलमान हो तो उनको अपना आदर्श मानते हैं सदैव उनको पूजेंगे उनके सम्मान देंगे
इस देश में मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में कैसे शामिल हो पाएगा आप ही बताइए इस देश ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को देश का गृहमंत्री बनाया था उसकी बेटी का प्रण हो गया 5 दुर्दांत आतंकियों को छोड़ना पड़ गुलाम नबी आजाद ज्योतिष के जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे केंद्र में मंत्री रहे उनके एक भतीजे का अपहरण हो जाता है तो आतंकियों को छोड़ना पड़ता है देश में जब एक मुसलमान गृह मंत्री बनता है तो पूरे कश्मीर से 3:30 लाख 4:00 लाख पंडितों की हत्या की जाती है उसे उसे वहां से अपने मूल घरों से बेदखल कर के भगा दिया जाता है तो इस बात का सबसे बड़ा संकट है कोई मुसलमान रितेश के महत्वपूर्ण पद पर बैठता है तो इस बात की क्या गारंटी है कि देश की संप्रभुता देश की एकता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी इस बात का बहुत बड़ा संशय है इसलिए कोई भी देश का मुसलमान अगर प्रधानमंत्री की रैली रहना चाहता है या धानमंत्री बनने का सपना देखता है तो उसे अपनी राष्ट्रपति अपनी राष्ट्रीयता अपनी सोच अपने विचार को प्रमाणित करना पड़ेगा सिद्ध करना पड़ेगा ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे कलाम ने सिद्ध किया एक मुसलमान होते हुए भी उन्होंने अपने धर्म को सम्मान देते हुए सभी धर्मों का सम्मान किया और राष्ट्र धर्म सर्वोपरि रखा और जो उन्होंने राष्ट्र को दिया है यह राष्ट्र कभी उसे भुला नहीं पाएगा इस देश के हिंदू को मुसलमान हो तो उनको अपना आदर्श मानते हैं सदैव उनको पूजेंगे उनके सम्मान देंगे
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बच्चे मैंने इस मुद्दे पर वो कल के दफ्तर में एक वीडियो रिकॉर्ड भी किया था उसे भी आप देख सकते हैं मेरे प्रोफाइल पर जाकर देखें कोई भी पक्षपात नहीं है हर कोई इस देश में प्रधानमंत्री बन सकता है बिल्कुल धर्मनिरपेक्ष संविधान है हमारा तो यह शंका तो दिमाग में होनी नहीं चाहिए दूसरी बात याद आ जाती है कि मुसलमान उस गद्दी तक क्यों नहीं पहुंच पाता सबसे बड़ी बात यह कि आप पर नजर बनाए और मुझे यह बताएं कि कितने मुस्लिम नेता है जो देश की बात करते हैं कितने ऐसे मुस्लिम नेता है जिसको उनके राज्य के बाहर कोई जानकारी है अगर आप किसी नेता की बात करते हैं तो सिर्फ दो चार जो आपको दिखेंगे अच्छे नेता वह कांग्रेस और बीजेपी में दिखेंगे जिसमें गुलाम नबी आजाद हुए वह कैबिनेट मिनिस्टर रह चुके हैं जरूरी के प्रधानमंत्री बने मुख्तार अब्बास नकवी हो शाहनवाज हुसैन हो ऐसी बात नहीं है कि इन्हें अच्छी कैबिनेट मिनिस्ट्री नहीं मिलती है प्रधानमंत्री का पद जो है वह पार्टी का डिसीजन होता और पार्टी पार्टी उसे ही डिसाइड करेगी जिससे कि उसे पूरे भारत में पार्टी की नींव बने तुम बहुत सारी बात राजनीतिक होती है जिस दिन एक मुसलमान को प्रधानमंत्री बनाने से किसी दल का बहुत भयानक राजनीतिक फायदा होता है तो वह दिन भी दूर नहीं होती ना बना देंगे तू जैसे ही एक मुस्लिम नेता पूरे देश की बात है पूरे देश में अगर उसको प्यार मिले तो मुझे इसमें कोई शंकर की थी कि वह जरूर बनेगा पर अभी ओवैसी जैसे नेताओं से आजम खान जैसे नेताओं से इस तरह की उम्मीद रखना बिल्कुल फिजूल बात है
बच्चे मैंने इस मुद्दे पर वो कल के दफ्तर में एक वीडियो रिकॉर्ड भी किया था उसे भी आप देख सकते हैं मेरे प्रोफाइल पर जाकर देखें कोई भी पक्षपात नहीं है हर कोई इस देश में प्रधानमंत्री बन सकता है बिल्कुल धर्मनिरपेक्ष संविधान है हमारा तो यह शंका तो दिमाग में होनी नहीं चाहिए दूसरी बात याद आ जाती है कि मुसलमान उस गद्दी तक क्यों नहीं पहुंच पाता सबसे बड़ी बात यह कि आप पर नजर बनाए और मुझे यह बताएं कि कितने मुस्लिम नेता है जो देश की बात करते हैं कितने ऐसे मुस्लिम नेता है जिसको उनके राज्य के बाहर कोई जानकारी है अगर आप किसी नेता की बात करते हैं तो सिर्फ दो चार जो आपको दिखेंगे अच्छे नेता वह कांग्रेस और बीजेपी में दिखेंगे जिसमें गुलाम नबी आजाद हुए वह कैबिनेट मिनिस्टर रह चुके हैं जरूरी के प्रधानमंत्री बने मुख्तार अब्बास नकवी हो शाहनवाज हुसैन हो ऐसी बात नहीं है कि इन्हें अच्छी कैबिनेट मिनिस्ट्री नहीं मिलती है प्रधानमंत्री का पद जो है वह पार्टी का डिसीजन होता और पार्टी पार्टी उसे ही डिसाइड करेगी जिससे कि उसे पूरे भारत में पार्टी की नींव बने तुम बहुत सारी बात राजनीतिक होती है जिस दिन एक मुसलमान को प्रधानमंत्री बनाने से किसी दल का बहुत भयानक राजनीतिक फायदा होता है तो वह दिन भी दूर नहीं होती ना बना देंगे तू जैसे ही एक मुस्लिम नेता पूरे देश की बात है पूरे देश में अगर उसको प्यार मिले तो मुझे इसमें कोई शंकर की थी कि वह जरूर बनेगा पर अभी ओवैसी जैसे नेताओं से आजम खान जैसे नेताओं से इस तरह की उम्मीद रखना बिल्कुल फिजूल बात है
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देखिए भारत एक हिंदू राष्ट्र है जहां 80% लोग हिंदू हैं और 18% लोग मुस्लिम है यह तो सॉरी खेत 80% हिंदू नहीं चाहेंगे कि हिंदू राष्ट्र में एक मुस्लिम का प्रधानमंत्री रेस में हुआ
देखिए भारत एक हिंदू राष्ट्र है जहां 80% लोग हिंदू हैं और 18% लोग मुस्लिम है यह तो सॉरी खेत 80% हिंदू नहीं चाहेंगे कि हिंदू राष्ट्र में एक मुस्लिम का प्रधानमंत्री रेस में हुआ
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देश का संविधान हर धर्म के लोगों को किसी भी पद के लिए कांटेक्ट करने के लिए अलाउ करता है तो वह नेता चाहे मुसलमान हो चाहे हिंदू हो जाए ऐसा ही हो इस पद के लिए अगर उपयुक्त है तो वह चुनाव जरूर लड़ सकता है हमें यह नहीं सोचना चाहिए कभी भी अपना मतदान देने के पहले कि वह किस धर्म का हमें बस इस पर ध्यान देना चाहिए कि क्या वह नेता उस पद को जस्टिफाई करता है क्या वह ऐसे काम करके दिखाएगा जो उस पद की गरिमा भर आएगा जिस दिन हम उसके धर्म के ऊपर उठकर बंधन करने लगेंगे और अपने चुनाव में मुद्दों को ज्यादा अहमियत देंगे ना कि वह किस धर्म से आता है तो हम सही मानने में अपने देश की तरक्की देख पाएंगे आप अगर देखे तो अब्दुल कलाम देश के एक ऐसे लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे हैं जो मुस्लिम वर्ग को बिलॉन्ग करते मुझे नहीं लगता कि उनसे कोई भी ज्यादा लोकप्रिय राष्ट्रपति को देश को मिल पाया है तो अगर कोई नेता बहुत अच्छा हो और उसमें वह काबिलियत हो जो सब लोगों को साथ लेकर सब की बात सबके प्रॉब्लम्स को समझ कर देशहित को अपने ऊपर और बाकी हितों के ऊपर रखकर अगर काम कर पाए तो उसका धर्म कोई एक मुद्दा नहीं है मुद्दे बहुत सारे अलग होते हैं जो देश को तरक्की की ओर ले जा सकते अगर हम उन मुद्दों पर लोगों का चुनाव करें तो हम जरूर एक सफल और एक बच्चा प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अपने देश को दे पाएंगे धन्यवाद
देश का संविधान हर धर्म के लोगों को किसी भी पद के लिए कांटेक्ट करने के लिए अलाउ करता है तो वह नेता चाहे मुसलमान हो चाहे हिंदू हो जाए ऐसा ही हो इस पद के लिए अगर उपयुक्त है तो वह चुनाव जरूर लड़ सकता है हमें यह नहीं सोचना चाहिए कभी भी अपना मतदान देने के पहले कि वह किस धर्म का हमें बस इस पर ध्यान देना चाहिए कि क्या वह नेता उस पद को जस्टिफाई करता है क्या वह ऐसे काम करके दिखाएगा जो उस पद की गरिमा भर आएगा जिस दिन हम उसके धर्म के ऊपर उठकर बंधन करने लगेंगे और अपने चुनाव में मुद्दों को ज्यादा अहमियत देंगे ना कि वह किस धर्म से आता है तो हम सही मानने में अपने देश की तरक्की देख पाएंगे आप अगर देखे तो अब्दुल कलाम देश के एक ऐसे लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे हैं जो मुस्लिम वर्ग को बिलॉन्ग करते मुझे नहीं लगता कि उनसे कोई भी ज्यादा लोकप्रिय राष्ट्रपति को देश को मिल पाया है तो अगर कोई नेता बहुत अच्छा हो और उसमें वह काबिलियत हो जो सब लोगों को साथ लेकर सब की बात सबके प्रॉब्लम्स को समझ कर देशहित को अपने ऊपर और बाकी हितों के ऊपर रखकर अगर काम कर पाए तो उसका धर्म कोई एक मुद्दा नहीं है मुद्दे बहुत सारे अलग होते हैं जो देश को तरक्की की ओर ले जा सकते अगर हम उन मुद्दों पर लोगों का चुनाव करें तो हम जरूर एक सफल और एक बच्चा प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अपने देश को दे पाएंगे धन्यवाद
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हिंदुस्तान में किसी भी संप्रदाय का लोक प्रधानमंत्री बन सकता है पर कोई पाबंदी नहीं है क्योंकि वह बहुमत दल के नेता द्वारा सीजी चुना गया है
हिंदुस्तान में किसी भी संप्रदाय का लोक प्रधानमंत्री बन सकता है पर कोई पाबंदी नहीं है क्योंकि वह बहुमत दल के नेता द्वारा सीजी चुना गया है
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हिंदुस्तान की राजनीति में मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में है कि नहीं है ऐसा सोचना भी गलत है और प्रधानमंत्री मुस्लिम हो या हिंदू है तो सोचते क्यों होना ही नहीं चाहिए अगर कोई अच्छा काम करेगा तो जरूर बढ़ कर के निकल कर के सामने आएगा सिख प्रधानमंत्री हो सकता है हिंदू हो सकता है कोई भी हो सकता है आप प्रधानमंत्री लेकिन इससे कोई ढंग का होना चाहिए खास धर्म का क्यों नहीं हो सकता यह बिल्कुल गलत बात है सही चीज है चुनाव होता है आदमी इलेक्शन होता है उसमें अपना वोटिंग के थ्रू अपना मत जाहिर करता है कि हम किस को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं यही होना भी चाहिए तो सही दिशा में चल रहा है बिल्कुल भी किसी खास धर्म को आगे प्रमोट करके ऐसा रिजर्वेशन वाला नियम नहीं होना चाहिए कि हिंदू या मुसलमान मुसलमान क्यों होना चाहिए
हिंदुस्तान की राजनीति में मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में है कि नहीं है ऐसा सोचना भी गलत है और प्रधानमंत्री मुस्लिम हो या हिंदू है तो सोचते क्यों होना ही नहीं चाहिए अगर कोई अच्छा काम करेगा तो जरूर बढ़ कर के निकल कर के सामने आएगा सिख प्रधानमंत्री हो सकता है हिंदू हो सकता है कोई भी हो सकता है आप प्रधानमंत्री लेकिन इससे कोई ढंग का होना चाहिए खास धर्म का क्यों नहीं हो सकता यह बिल्कुल गलत बात है सही चीज है चुनाव होता है आदमी इलेक्शन होता है उसमें अपना वोटिंग के थ्रू अपना मत जाहिर करता है कि हम किस को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं यही होना भी चाहिए तो सही दिशा में चल रहा है बिल्कुल भी किसी खास धर्म को आगे प्रमोट करके ऐसा रिजर्वेशन वाला नियम नहीं होना चाहिए कि हिंदू या मुसलमान मुसलमान क्यों होना चाहिए
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हिंदुस्तान की राजनीति में अब तक तो कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि इस देश के आजाद होने के बाद से लेकर आते समय तक तो एक ही परिवार का राज रहा एक ही परिवार के लोगों ने शासन किया उसके बाद भी पूंछ परिवार के जो चहेते व्यक्ति थे अब उनमें मुसलमान नहीं था था वह बात का सवाल है क्योंकि उनके जो नजदीकी थे उन लोगों को उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत करवाया उसके बाद जब बीजेपी या इंडिया सत्ता में आई तो उसके बाद इन लोगों ने अपने नेताओं को अपने जो वरिष्ठ नेता है उनको प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत किया अगर कोई भी मुस्लिम नेता है समय के साथ वरिष्ठ दम होता है किसी भी दल में और वह पार्टी अगर सबसे ज्यादा सीटें जीत ली वह मुस्लिम नेता इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता है नहीं बोलना चाहिए किस देश में राष्ट्रपति मुस्लिम बनाए हैं इस देश में कई कैबिनेट मंत्री मुस्लिम बनाए हैं गवर्नर मुस्लिम बनाए मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बन सकता है लेकिन सबसे बड़ी बाधा है धर्म आधारित राजनीति और परिवार में परिवारवाद के कारण ही नेता का पुत्र या उस नेता के चहेते जो व्यक्ति होते वही टॉप पर पहुंच पाते हैं और इसके अलावा जो धर्म आधारित राजनीति है उसके दुष्परिणाम के कारण जो बहुसंख्यक वर्ग उसी का नेता उसी वर्ग का आदमी प्रधानमंत्री या उच्च पद पर पहुंच सकता है जब निष्पक्ष रुप से जब 1 वोट करेगा और मुस्लिम नेता हिंदू में तब यह कोई भी पार्टी धर्म रूप से सीनियरिटी को ध्यान में रखकर
हिंदुस्तान की राजनीति में अब तक तो कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि इस देश के आजाद होने के बाद से लेकर आते समय तक तो एक ही परिवार का राज रहा एक ही परिवार के लोगों ने शासन किया उसके बाद भी पूंछ परिवार के जो चहेते व्यक्ति थे अब उनमें मुसलमान नहीं था था वह बात का सवाल है क्योंकि उनके जो नजदीकी थे उन लोगों को उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत करवाया उसके बाद जब बीजेपी या इंडिया सत्ता में आई तो उसके बाद इन लोगों ने अपने नेताओं को अपने जो वरिष्ठ नेता है उनको प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत किया अगर कोई भी मुस्लिम नेता है समय के साथ वरिष्ठ दम होता है किसी भी दल में और वह पार्टी अगर सबसे ज्यादा सीटें जीत ली वह मुस्लिम नेता इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता है नहीं बोलना चाहिए किस देश में राष्ट्रपति मुस्लिम बनाए हैं इस देश में कई कैबिनेट मंत्री मुस्लिम बनाए हैं गवर्नर मुस्लिम बनाए मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बन सकता है लेकिन सबसे बड़ी बाधा है धर्म आधारित राजनीति और परिवार में परिवारवाद के कारण ही नेता का पुत्र या उस नेता के चहेते जो व्यक्ति होते वही टॉप पर पहुंच पाते हैं और इसके अलावा जो धर्म आधारित राजनीति है उसके दुष्परिणाम के कारण जो बहुसंख्यक वर्ग उसी का नेता उसी वर्ग का आदमी प्रधानमंत्री या उच्च पद पर पहुंच सकता है जब निष्पक्ष रुप से जब 1 वोट करेगा और मुस्लिम नेता हिंदू में तब यह कोई भी पार्टी धर्म रूप से सीनियरिटी को ध्यान में रखकर
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हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब है अपने भाई भाई ठीक है मेरे बिना ही पड़े तो ही अच्छा है हम सब एक हैं
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब है अपने भाई भाई ठीक है मेरे बिना ही पड़े तो ही अच्छा है हम सब एक हैं
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हिंदुस्तान की राजनीति में कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री के लिए इसलिए नहीं समझ पाता क्योंकि अधिकार अधिकार अधिक जनसंख्या भारत में जो कि हिंदुओं की है और वह थोड़ा धर्म पक्ष के कारण हिंदू धर्म वाले को वाले को ही वोट देते हैं कि शिक्षा का महत्व बढ़ रहा है लेकिन फिर भी अभी कहीं ना कहीं इसकी ना कमी रह गई इसी कारण का कोई भी मुसलमान नेता प्रधानमंत्री के इसमें शामिल नहीं हो पाता है
हिंदुस्तान की राजनीति में कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री के लिए इसलिए नहीं समझ पाता क्योंकि अधिकार अधिकार अधिक जनसंख्या भारत में जो कि हिंदुओं की है और वह थोड़ा धर्म पक्ष के कारण हिंदू धर्म वाले को वाले को ही वोट देते हैं कि शिक्षा का महत्व बढ़ रहा है लेकिन फिर भी अभी कहीं ना कहीं इसकी ना कमी रह गई इसी कारण का कोई भी मुसलमान नेता प्रधानमंत्री के इसमें शामिल नहीं हो पाता है
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यह थोड़ा सा क्वेश्चन मुझे अटपटा लगा जिस दिन ए पी जे अब्दुल कलाम जैसी सोच वाला नेता इस देश को मिलेगा उस दिन अवश्य वह प्रधानमंत्री की रेस में आएगा लेकिन अभी तक ऐसा कोई लग नहीं रहा है कि ऐसी सोच वाला व्यक्ति कोई है तो जिस दिन देश को ऐसा लगेगा तो वह उसे जरूर स्वीकार करेगा चाहे वह हिंदू है चाहे वह मुस्लिम है हर एक उनका सम्मान करता है पी जे अब्दुल कलाम का आज भी ऐसे नेता की जरूरत है हमारे देश को
यह थोड़ा सा क्वेश्चन मुझे अटपटा लगा जिस दिन ए पी जे अब्दुल कलाम जैसी सोच वाला नेता इस देश को मिलेगा उस दिन अवश्य वह प्रधानमंत्री की रेस में आएगा लेकिन अभी तक ऐसा कोई लग नहीं रहा है कि ऐसी सोच वाला व्यक्ति कोई है तो जिस दिन देश को ऐसा लगेगा तो वह उसे जरूर स्वीकार करेगा चाहे वह हिंदू है चाहे वह मुस्लिम है हर एक उनका सम्मान करता है पी जे अब्दुल कलाम का आज भी ऐसे नेता की जरूरत है हमारे देश को
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दोस्त आपने सही पूछा कि हिंदुस्तान की राजनीति में कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं हो पाता क्यों आपने सही पूछा है कि कोई भी हिंदुस्तान का मुस्लिम नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं होता बिका आज आपको पता है कि हमारे यहां जाती राजनीति बहुत तीव्र गति से हावी है हम जाति राजनीति के चक्कर में पड़कर के और देश व समाज का सही विकास नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हम सही नेता का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वह हमारे जाति क्या है हमारे मजहब से है हमारे परिवार का है और हम उसी को निकाल देते हैं हम उसी को चुन लेते हैं चुनने के बाद वह क्या करता है वह सिर्फ सिर्फ वह अपनी सेवा करता है अपने बीवी बच्चों का सेवा करने लगता है उसी प्रकार से जब देश का चुनाव होता है पूरे चुनाव में जातीय जो समीकरण है जाति समीकरण के हिसाब से चुनाव हो जाता है तो सांसद भी उनके ही भर के लोग ज्यादा बनते हैं और समर्थन के लिए भी जाति और धर्म हमारे आज आज धर्म के आधार पर चुनाव होता है तो सांसद उनको ज्यादा समर्थन नहीं करते मुस्लिम नेताओं को जिसके कारण वह पीछे रह जाते हैं
दोस्त आपने सही पूछा कि हिंदुस्तान की राजनीति में कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं हो पाता क्यों आपने सही पूछा है कि कोई भी हिंदुस्तान का मुस्लिम नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं होता बिका आज आपको पता है कि हमारे यहां जाती राजनीति बहुत तीव्र गति से हावी है हम जाति राजनीति के चक्कर में पड़कर के और देश व समाज का सही विकास नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हम सही नेता का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वह हमारे जाति क्या है हमारे मजहब से है हमारे परिवार का है और हम उसी को निकाल देते हैं हम उसी को चुन लेते हैं चुनने के बाद वह क्या करता है वह सिर्फ सिर्फ वह अपनी सेवा करता है अपने बीवी बच्चों का सेवा करने लगता है उसी प्रकार से जब देश का चुनाव होता है पूरे चुनाव में जातीय जो समीकरण है जाति समीकरण के हिसाब से चुनाव हो जाता है तो सांसद भी उनके ही भर के लोग ज्यादा बनते हैं और समर्थन के लिए भी जाति और धर्म हमारे आज आज धर्म के आधार पर चुनाव होता है तो सांसद उनको ज्यादा समर्थन नहीं करते मुस्लिम नेताओं को जिसके कारण वह पीछे रह जाते हैं
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हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में इसलिए नहीं आ पाता है क्योंकि देखिए हमारे देश में वही नेता प्रधानमंत्री की रेस में होगा जिसको जनता लाइक करें कि हमें बहुमत पेश करना होता है हमें ज्यादा से ज्यादा लोकसभा की सीटें लानी होती है हमारे देश में मुसलमानों की संख्या 30 करोड़ है और हमारे देश में हिंदुओं की संख्या 100 करो मैं तो कहीं ना कहीं यह बहुत बड़ा फैक्टर है हां अगर कोई मुसलमान नेता है अगर पूरे सौ करोड़ सवा सौ करोड़ देशवासी उसे लाइक करते हैं और देशवासियों की पसंद है वह तो पक्का मुख्य प्रधानमंत्री की रेस में आएगा कांग्रेस पार्टी मुस्लिम मुस्लिम समुदाय के लोगों की शुरू से राजनीति करती आई है लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री का दावेदार कांग्रेस पार्टी ने किसी मुस्लिम लीडर को नहीं बनाया मुस्लिम लीडर की बात थोड़ी उसने अपने परिवार को छोड़कर किसी को नहीं बनाया राहुल गांधी जी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष के लायक नहीं है वह उनकी पार्टी में बहुत सारे ऐसे लीटर है जो अध्यक्ष के लायक थे उन्हें नहीं बनाया गया क्योंकि परिवारवाद की राजनीति करनी है इनको लेकिन हां अगर कोई मुस्लिम लीडर रहेगा लायक जनता उसे लाइक करेगी तो पक्का वह प्रधानमंत्री की रेस में आएगा देखिए पाकिस्तान में कोई हिंदू प्रधानमंत्री कि देश में नहीं आ पाता है उसी तरह हिंदुस्तान में कोई मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में नहीं आ पाता है धन्यवाद
हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में इसलिए नहीं आ पाता है क्योंकि देखिए हमारे देश में वही नेता प्रधानमंत्री की रेस में होगा जिसको जनता लाइक करें कि हमें बहुमत पेश करना होता है हमें ज्यादा से ज्यादा लोकसभा की सीटें लानी होती है हमारे देश में मुसलमानों की संख्या 30 करोड़ है और हमारे देश में हिंदुओं की संख्या 100 करो मैं तो कहीं ना कहीं यह बहुत बड़ा फैक्टर है हां अगर कोई मुसलमान नेता है अगर पूरे सौ करोड़ सवा सौ करोड़ देशवासी उसे लाइक करते हैं और देशवासियों की पसंद है वह तो पक्का मुख्य प्रधानमंत्री की रेस में आएगा कांग्रेस पार्टी मुस्लिम मुस्लिम समुदाय के लोगों की शुरू से राजनीति करती आई है लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री का दावेदार कांग्रेस पार्टी ने किसी मुस्लिम लीडर को नहीं बनाया मुस्लिम लीडर की बात थोड़ी उसने अपने परिवार को छोड़कर किसी को नहीं बनाया राहुल गांधी जी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष के लायक नहीं है वह उनकी पार्टी में बहुत सारे ऐसे लीटर है जो अध्यक्ष के लायक थे उन्हें नहीं बनाया गया क्योंकि परिवारवाद की राजनीति करनी है इनको लेकिन हां अगर कोई मुस्लिम लीडर रहेगा लायक जनता उसे लाइक करेगी तो पक्का वह प्रधानमंत्री की रेस में आएगा देखिए पाकिस्तान में कोई हिंदू प्रधानमंत्री कि देश में नहीं आ पाता है उसी तरह हिंदुस्तान में कोई मुसलमान प्रधानमंत्री की रेस में नहीं आ पाता है धन्यवाद
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भाई लोगों यह भारत देश में सौ पर्सेंट हिंदू की जनसंख्या है तो कोई भी नहीं चाहेगा कि कोई मुस्लिम देश का मंत्री बने लेकिन हमें धर्म और धर्म की राजनीति को छोड़ना चाहिए क्योंकि चाहिए मुद्दा होता है लेकिन आपको यह देखना चाहते हिंदू या मुस्लिम है जो भी देखे तक के लिए अच्छा काम करे उसको को चुनना चाहिए सभी दान में यह लिखा हुआ है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर जा सकता है किसी भी उसकी योग्यता के अनुसार कोई भी चुनाव लड़ सकता है और किसी भी किसी भी डिपार्टमेंट में नौकरी कर सकता है आपको यह अधिकार देता है लेकिन कुछ नेताओं ने यह सोच बना दिए कि मुस्लिम लोग देश की तरक्की नहीं कर सकते और वह यह चाहते हैं कि मुसलमानों का विकास होना नहीं चाहिए जो कि आप देख ही रहे होंगे अब क्या देख रहा है बाकी सब लोग मुस्लिम लोगों को ही नजर से देखा जाता है कि मुस्लिम लोग आतंकवादी होते हैं यह सब लोग समझते हैं कि राजनीति नहीं वह किसी भी क्षेत्र में मुस्लिम लोगों पर आज के टाइम भी कम करते हैं लोग लेकिन कुछ कि मुस्लिम लोग होते हैं जो गलत एक्टिविटी में पानी होते सभी मुस्लिम लोग एक जैसे नहीं होते और हमारे देश में हिंदुओं की राजनीति होती है कोई लोग यह तो सोचता नहीं कि कोई भी प्रधानमंत्री के रोजगार ज्यादा से ज्यादा मिले नोटबंदी के बाद से बहुत सी कंपनियां बंद हो गई लेकिन नौकरी नहीं है लोग बताओ क्या करें जो नौकरी ही नहीं आऊंगी जीएसटी जोड़ आने के बाद में देखो कितनी समय कितने दिक्कत आ रही है बड़ी बड़ी कंपनियां अंबानी जैसे कंपेयर टाटा जा रहे थे कमरे देश पर राज करती है सभी नेता चोर है और बेवकूफ बनाते हैं लेकिन मोदी जी आज के टाइम में बेवकूफ बना रहे हैं
भाई लोगों यह भारत देश में सौ पर्सेंट हिंदू की जनसंख्या है तो कोई भी नहीं चाहेगा कि कोई मुस्लिम देश का मंत्री बने लेकिन हमें धर्म और धर्म की राजनीति को छोड़ना चाहिए क्योंकि चाहिए मुद्दा होता है लेकिन आपको यह देखना चाहते हिंदू या मुस्लिम है जो भी देखे तक के लिए अच्छा काम करे उसको को चुनना चाहिए सभी दान में यह लिखा हुआ है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर जा सकता है किसी भी उसकी योग्यता के अनुसार कोई भी चुनाव लड़ सकता है और किसी भी किसी भी डिपार्टमेंट में नौकरी कर सकता है आपको यह अधिकार देता है लेकिन कुछ नेताओं ने यह सोच बना दिए कि मुस्लिम लोग देश की तरक्की नहीं कर सकते और वह यह चाहते हैं कि मुसलमानों का विकास होना नहीं चाहिए जो कि आप देख ही रहे होंगे अब क्या देख रहा है बाकी सब लोग मुस्लिम लोगों को ही नजर से देखा जाता है कि मुस्लिम लोग आतंकवादी होते हैं यह सब लोग समझते हैं कि राजनीति नहीं वह किसी भी क्षेत्र में मुस्लिम लोगों पर आज के टाइम भी कम करते हैं लोग लेकिन कुछ कि मुस्लिम लोग होते हैं जो गलत एक्टिविटी में पानी होते सभी मुस्लिम लोग एक जैसे नहीं होते और हमारे देश में हिंदुओं की राजनीति होती है कोई लोग यह तो सोचता नहीं कि कोई भी प्रधानमंत्री के रोजगार ज्यादा से ज्यादा मिले नोटबंदी के बाद से बहुत सी कंपनियां बंद हो गई लेकिन नौकरी नहीं है लोग बताओ क्या करें जो नौकरी ही नहीं आऊंगी जीएसटी जोड़ आने के बाद में देखो कितनी समय कितने दिक्कत आ रही है बड़ी बड़ी कंपनियां अंबानी जैसे कंपेयर टाटा जा रहे थे कमरे देश पर राज करती है सभी नेता चोर है और बेवकूफ बनाते हैं लेकिन मोदी जी आज के टाइम में बेवकूफ बना रहे हैं
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ऐसा कुछ नहीं है कि मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की लिस्ट में शामिल नहीं हो पाते वह होना ही नहीं चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि हिंदुस्तान में हिंदुओं की ज्यादा चलती है और शामिल नहीं होना चाहता है तो इसलिए इसमें नहीं समझाया कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी हमारे देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं जो कि एक मुसलमान थे और उनको उनकी जितनी रिस्पेक्ट है इस देश में गुटनिरपेक्ष शायद किसी और की है
ऐसा कुछ नहीं है कि मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की लिस्ट में शामिल नहीं हो पाते वह होना ही नहीं चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि हिंदुस्तान में हिंदुओं की ज्यादा चलती है और शामिल नहीं होना चाहता है तो इसलिए इसमें नहीं समझाया कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी हमारे देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं जो कि एक मुसलमान थे और उनको उनकी जितनी रिस्पेक्ट है इस देश में गुटनिरपेक्ष शायद किसी और की है
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हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान नेता इतना मजबूत नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की रेस में खड़ा हो सके यह सही बात है क्योंकि दोनों ही पार्टियां दो बड़ी पार्टियों है भाजपा और कांग्रेस भाजपा का वैसे ही रुझान जो है वह मुसलमानों के प्रति बहुत अच्छा नहीं है रही बात कांग्रेस की तो कांग्रेस में परिवारवाद हमेशा से हावी रहा है कि उस पार्टी में सुप्रीम हमेशा एक ही परिवार से होता है तो इसलिए मुसलमानों का प्रधानमंत्री की पद की रेस में शामिल होना ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है
हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान नेता इतना मजबूत नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की रेस में खड़ा हो सके यह सही बात है क्योंकि दोनों ही पार्टियां दो बड़ी पार्टियों है भाजपा और कांग्रेस भाजपा का वैसे ही रुझान जो है वह मुसलमानों के प्रति बहुत अच्छा नहीं है रही बात कांग्रेस की तो कांग्रेस में परिवारवाद हमेशा से हावी रहा है कि उस पार्टी में सुप्रीम हमेशा एक ही परिवार से होता है तो इसलिए मुसलमानों का प्रधानमंत्री की पद की रेस में शामिल होना ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है
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नहीं मैं सोच रहा हूं आप ही आप लीजिए प्रस्तुत किया है मेरी दृष्टि से भी कुछ सार्थक नहीं सही नहीं है क्योंकि आप यदि देखें तो हमारे देश का सर्वोच्च पद राष्ट्रपति का है और ना सूत्रो मेरी दृष्टि कोण है उसके अनुसार भारत के सबसे श्रेष्ठ संत सफलतम राष्ट्रपतियों का काम किया जाए तो मैं डॉक्टर अब्दुल एपीजे अब्दुल कलाम का नाम लेना चाहा राष्ट्रपति जिन्होंने देश के लिए कुछ दिया है कि भारत संसार में अपना मस्तक गर्व के साथ पूजा कर सकता है सलाम करता हूं उनकी देशभक्ति को सलाम करता हूं तो उसमें कभी भी ऐसी बात कि नहीं कि भाई हिंदू को दिया जाए या मुसलमान को यह नहीं दिया जाए यह जातियों धर्म की राजनीति तो वर्तमान की इन राजनीतिक क्यों न दूसरा हम अशिक्षा के कारण से हमारे इन राजनीतिज्ञों को समर्थन देते हैं जिसके कारण से इस प्रकार की भावनाएं भड़क जाती है वरना हमारा संविधान तो दोनों कोई सामान यह सभी धर्म वाले लोगों के लिए सभी जाति वालों के लिए समान अवसर देता है यह बात दीगर है कि हम लोगों ने गंदी गंदी राजनीति क्यों समर्थन देकर के हिंदू हिंदू नेताओं के लिए और मुसलमान मुसलमान नेताओं के लिए इस प्रकार की जो जिनकी जो को भावना के साथ में उन्होंने गंदी राजनीति फैलाई है हम उसका अनुसरण करने लगते हैं जबकि हमें ऐसा कदापि नहीं करना चाहिए भारत में तो धर्म और जाति से संबंधित कोई ऐसी बात ही महीनों से साथ-साथ रहते आए हैं और इस को स्वतंत्र कराने के लिए देश के लिए उन दोनों ने ही अपना त्याग किया है
नहीं मैं सोच रहा हूं आप ही आप लीजिए प्रस्तुत किया है मेरी दृष्टि से भी कुछ सार्थक नहीं सही नहीं है क्योंकि आप यदि देखें तो हमारे देश का सर्वोच्च पद राष्ट्रपति का है और ना सूत्रो मेरी दृष्टि कोण है उसके अनुसार भारत के सबसे श्रेष्ठ संत सफलतम राष्ट्रपतियों का काम किया जाए तो मैं डॉक्टर अब्दुल एपीजे अब्दुल कलाम का नाम लेना चाहा राष्ट्रपति जिन्होंने देश के लिए कुछ दिया है कि भारत संसार में अपना मस्तक गर्व के साथ पूजा कर सकता है सलाम करता हूं उनकी देशभक्ति को सलाम करता हूं तो उसमें कभी भी ऐसी बात कि नहीं कि भाई हिंदू को दिया जाए या मुसलमान को यह नहीं दिया जाए यह जातियों धर्म की राजनीति तो वर्तमान की इन राजनीतिक क्यों न दूसरा हम अशिक्षा के कारण से हमारे इन राजनीतिज्ञों को समर्थन देते हैं जिसके कारण से इस प्रकार की भावनाएं भड़क जाती है वरना हमारा संविधान तो दोनों कोई सामान यह सभी धर्म वाले लोगों के लिए सभी जाति वालों के लिए समान अवसर देता है यह बात दीगर है कि हम लोगों ने गंदी गंदी राजनीति क्यों समर्थन देकर के हिंदू हिंदू नेताओं के लिए और मुसलमान मुसलमान नेताओं के लिए इस प्रकार की जो जिनकी जो को भावना के साथ में उन्होंने गंदी राजनीति फैलाई है हम उसका अनुसरण करने लगते हैं जबकि हमें ऐसा कदापि नहीं करना चाहिए भारत में तो धर्म और जाति से संबंधित कोई ऐसी बात ही महीनों से साथ-साथ रहते आए हैं और इस को स्वतंत्र कराने के लिए देश के लिए उन दोनों ने ही अपना त्याग किया है
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बच्चे बहुत अच्छा प्रश्न है कि हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं हो पाता है ऐसा क्यों मुझे लगता है कि एक तो मुसलमान जितने भी नेता हुए हैं वह सिर्फ और सिर्फ अपने धर्म के लोगों की वकालत करते हैं और जो वकालत नहीं करते वह बहुत कम ऐसे नेता में छात्र मैसेज पा रहा हूं राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जाकिर हुसैन और भी लोग जो थे वह राष्ट्रपति बने दूसरी चीज एक बहुत बड़ी आबादी हिंदुओं की है तो हर हिंदू को यह लगता है कि अगर कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री बना तो कहीं ना कहीं उसका रुक अपने धर्म के लोगों के प्रति या अल्पसंख्यकों के प्रति होगा इसलिए दूसरी चीज जो मुसलमान नेता है उनका सीमित दायरा है उनकी पार्टी का विस्तार संपूर्ण भारत में नहीं है इसलिए मुझे लगता है कि मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं हो पाते हैं जिस दिन मुसलमान नेता अल्पसंख्यक नीति को छोड़कर बहुसंख्यक नीति वाला फार्मूला अपनाया गया और अपने पार्टी का विस्तार करने में लग जाएंगे हिंदुओं को भी उतरा समझेंगे जितना कि अपने मुस्लिम भाई को समझते हैं मुझे लगता है कि उस दिन कोई न कोई मुस्लिम नेता जरूर प्रधानमंत्री बनेगा और यह तभी संभव होगा जब मुस्लिमों को शक के नजरिए से ना देखा जाए मुस्लिम को अपनी वफादारी साबित करनी पड़ेगी
बच्चे बहुत अच्छा प्रश्न है कि हिंदुस्तान की राजनीति में कोई भी मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की रेस में शामिल नहीं हो पाता है ऐसा क्यों मुझे लगता है कि एक तो मुसलमान जितने भी नेता हुए हैं वह सिर्फ और सिर्फ अपने धर्म के लोगों की वकालत करते हैं और जो वकालत नहीं करते वह बहुत कम ऐसे नेता में छात्र मैसेज पा रहा हूं राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जाकिर हुसैन और भी लोग जो थे वह राष्ट्रपति बने दूसरी चीज एक बहुत बड़ी आबादी हिंदुओं की है तो हर हिंदू को यह लगता है कि अगर कोई मुसलमान नेता प्रधानमंत्री बना तो कहीं ना कहीं उसका रुक अपने धर्म के लोगों के प्रति या अल्पसंख्यकों के प्रति होगा इसलिए दूसरी चीज जो मुसलमान नेता है उनका सीमित दायरा है उनकी पार्टी का विस्तार संपूर्ण भारत में नहीं है इसलिए मुझे लगता है कि मुसलमान नेता प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं हो पाते हैं जिस दिन मुसलमान नेता अल्पसंख्यक नीति को छोड़कर बहुसंख्यक नीति वाला फार्मूला अपनाया गया और अपने पार्टी का विस्तार करने में लग जाएंगे हिंदुओं को भी उतरा समझेंगे जितना कि अपने मुस्लिम भाई को समझते हैं मुझे लगता है कि उस दिन कोई न कोई मुस्लिम नेता जरूर प्रधानमंत्री बनेगा और यह तभी संभव होगा जब मुस्लिमों को शक के नजरिए से ना देखा जाए मुस्लिम को अपनी वफादारी साबित करनी पड़ेगी
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