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भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीची नजरों से क्यों देखा जाता है? ...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा नहीं है कि यह आराम से ही ऐसा था कि औरतों को महावारी के समय नीचे नजरों से देखा जाता था भारत में यह जो औरत को माहवारी के दिनों में अलग से रखने की प्रथा है इसके पीछे बहुत ही बड़ा साइंटिफिक वैज्ञानिक रीज़न था अगर आप अच्छे से इसको समझे क्योंकि जब लड़की को माहवारी होती है तो इतना उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है वह किसी भी तरह का इंफेक्शन कैच कर सकती है बीमार हो सकती है ऐसा माना जाता था ऐसा है कि उस समय उसकी जो बॉडी की मिलती है वह काफी लोग हो जाती है इसलिए लड़की को उस समय पूरा आराम देने के लिए यह प्रथा शुरू कर दी गई थी की उसको ज्यादा काम नहीं करने दिया जाए उसको आराम करने दिया जाए कम से कम फिजिकल रिलेशन वह करें बिना मतलब इधर उधर नहीं था उसको भेजा जाता था और इसलिए उसे आराम से एक तरफ को बैठने के लिए आराम करने के लिए कहा जाता था और दूसरा क्योंकि इतनी ज्यादा कोई सफाई के हाइजीनिक प्रोडक्ट जो साधन नहीं होते थे तो क्योंकि ऐसा हो सकता था कि वह खुद को साफ सफाई से ना रख सके तो इसलिए उसको रसोई में या कहीं और जाने से मना किया जाता था दोनों कारण है यह तो यह कि वह ज्यादा थके नहीं दूसरा यह कि वह सकता है वह साफ सफाई ना अपनी रख सके इतने अच्छे से पानी आपको पता है बहुत ज्यादा अच्छे से अभी तक भी अवेलेबल नहीं है पानी नहीं होता था सब सफाई के साधन नहीं होते थे तो इसलिए रोका जाता था कि वह ज्यादा कामों में हाथ न लगाए और अपना आराम करें लेकिन धीरे-धीरे जीवन जो कुछ इधर उधर की और बढ़ते गए अनपढ़ता बढ़ती गई लोगों में प्रथा पर्दा प्रथा भारत में शुरू हुई तो उसमें इन लोग इन चीजों को होने वाली बहन बना दिया गया कि पता नहीं उसको क्या हुआ है उसे अलग रखना है हम उसकी अस्सलाम असली महत्व जो था उसको भूल
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ऐसा नहीं है कि यह आराम से ही ऐसा था कि औरतों को महावारी के समय नीचे नजरों से देखा जाता था भारत में यह जो औरत को माहवारी के दिनों में अलग से रखने की प्रथा है इसके पीछे बहुत ही बड़ा साइंटिफिक वैज्ञानिक रीज़न था अगर आप अच्छे से इसको समझे क्योंकि जब लड़की को माहवारी होती है तो इतना उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है वह किसी भी तरह का इंफेक्शन कैच कर सकती है बीमार हो सकती है ऐसा माना जाता था ऐसा है कि उस समय उसकी जो बॉडी की मिलती है वह काफी लोग हो जाती है इसलिए लड़की को उस समय पूरा आराम देने के लिए यह प्रथा शुरू कर दी गई थी की उसको ज्यादा काम नहीं करने दिया जाए उसको आराम करने दिया जाए कम से कम फिजिकल रिलेशन वह करें बिना मतलब इधर उधर नहीं था उसको भेजा जाता था और इसलिए उसे आराम से एक तरफ को बैठने के लिए आराम करने के लिए कहा जाता था और दूसरा क्योंकि इतनी ज्यादा कोई सफाई के हाइजीनिक प्रोडक्ट जो साधन नहीं होते थे तो क्योंकि ऐसा हो सकता था कि वह खुद को साफ सफाई से ना रख सके तो इसलिए उसको रसोई में या कहीं और जाने से मना किया जाता था दोनों कारण है यह तो यह कि वह ज्यादा थके नहीं दूसरा यह कि वह सकता है वह साफ सफाई ना अपनी रख सके इतने अच्छे से पानी आपको पता है बहुत ज्यादा अच्छे से अभी तक भी अवेलेबल नहीं है पानी नहीं होता था सब सफाई के साधन नहीं होते थे तो इसलिए रोका जाता था कि वह ज्यादा कामों में हाथ न लगाए और अपना आराम करें लेकिन धीरे-धीरे जीवन जो कुछ इधर उधर की और बढ़ते गए अनपढ़ता बढ़ती गई लोगों में प्रथा पर्दा प्रथा भारत में शुरू हुई तो उसमें इन लोग इन चीजों को होने वाली बहन बना दिया गया कि पता नहीं उसको क्या हुआ है उसे अलग रखना है हम उसकी अस्सलाम असली महत्व जो था उसको भूलAisa Nahi Hai Ki Yeh Aaram Se Hi Aisa Tha Ki Auraton Ko Mahavari Ke Samay Neeche Najaron Se Dekha Jata Tha Bharat Mein Yeh Jo Aurat Ko Mahavari Ke Dinon Mein Alag Se Rakhne Ki Pratha Hai Iske Piche Bahut Hi Bada Scientific Vaigyanik Rizan Tha Agar Aap Acche Se Isko Samjhe Kyonki Jab Ladki Ko Mahavari Hoti Hai To Itna Uske Sharir Mein Kamjori Aa Jati Hai Wah Kisi Bhi Tarah Ka Infection Catch Kar Sakti Hai Bimar Ho Sakti Hai Aisa Mana Jata Tha Aisa Hai Ki Us Samay Uski Jo Body Ki Milti Hai Wah Kafi Log Ho Jati Hai Isliye Ladki Ko Us Samay Pura Aaram Dene Ke Liye Yeh Pratha Shuru Kar Di Gayi Thi Ki Usko Jyada Kaam Nahi Karne Diya Jaye Usko Aaram Karne Diya Jaye Kum Se Kum Physical Relation Wah Karen Bina Matlab Idhar Udhar Nahi Tha Usko Bheja Jata Tha Aur Isliye Use Aaram Se Ek Taraf Ko Baithne Ke Liye Aaram Karne Ke Liye Kaha Jata Tha Aur Doosra Kyonki Itni Jyada Koi Safaai Ke Hygienic Product Jo Sadhan Nahi Hote The To Kyonki Aisa Ho Sakta Tha Ki Wah Khud Ko Saaf Safaai Se Na Rakh Sake To Isliye Usko Rasoi Mein Ya Kahin Aur Jaane Se Mana Kiya Jata Tha Dono Kaaran Hai Yeh To Yeh Ki Wah Jyada Thake Nahi Doosra Yeh Ki Wah Sakta Hai Wah Saaf Safaai Na Apni Rakh Sake Itne Acche Se Pani Aapko Pata Hai Bahut Jyada Acche Se Abhi Tak Bhi Available Nahi Hai Pani Nahi Hota Tha Sab Safaai Ke Sadhan Nahi Hote The To Isliye Roka Jata Tha Ki Wah Jyada Kamon Mein Hath N Lagaye Aur Apna Aaram Karen Lekin Dhire Dhire Jeevan Jo Kuch Idhar Udhar Ki Aur Badhte Gaye Anapdhata Badhti Gayi Logon Mein Pratha Parda Pratha Bharat Mein Shuru Hui To Usamen In Log In Chijon Ko Hone Wali Behen Bana Diya Gaya Ki Pata Nahi Usko Kya Hua Hai Use Alag Rakhna Hai Hum Uski Assalam Asli Mahatva Jo Tha Usko Bhul
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यह लोगों की बीमार सोच का नतीजा है कि भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीचे नजरों से देखा जाता है| उन्हें कई तरह की भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जैसे कि पूजा के स्थानों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है उन्हें| परिवार के दूसरे लोगों से दूरी बनाकर रखने को बोला जाता है| वह अपने बाल नहीं बना सकती हैं, किसी भी प्रकार का मेकअप नहीं कर सकती हैं| उन्हें खाना भी अलग खिलाया जाता है, ऐसा लगता है जैसे कि वो घर की सदस्य नहीं है| उन्हें किचन में भी प्रवेश करना वर्जित होता है| तो मेरा ऐसा मानना है कि जब भी आप कोई भी महिला मासिक धर्म में होती है तो उसके साथ इस तरह का भेदभाव करना बिल्कुल भी उचित नहीं है| पहले के टाइम से ही हमारे यहां हिंदू समाज या दूसरी समाज में भी चलता आ रहा है| और खास करके जो लोगों अन एजुकेडेट है, बिल्कुल पढ़े-लिखे नहीं है| वही इस तरह की चीजों को और बढ़ावा देते हैं| लेकिन धीरे-धीरे हम जैसे एजुकेशन से इन सब चीजों का भी प्रभाव कम होता जा रहा है|
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यह लोगों की बीमार सोच का नतीजा है कि भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीचे नजरों से देखा जाता है| उन्हें कई तरह की भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जैसे कि पूजा के स्थानों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है उन्हें| परिवार के दूसरे लोगों से दूरी बनाकर रखने को बोला जाता है| वह अपने बाल नहीं बना सकती हैं, किसी भी प्रकार का मेकअप नहीं कर सकती हैं| उन्हें खाना भी अलग खिलाया जाता है, ऐसा लगता है जैसे कि वो घर की सदस्य नहीं है| उन्हें किचन में भी प्रवेश करना वर्जित होता है| तो मेरा ऐसा मानना है कि जब भी आप कोई भी महिला मासिक धर्म में होती है तो उसके साथ इस तरह का भेदभाव करना बिल्कुल भी उचित नहीं है| पहले के टाइम से ही हमारे यहां हिंदू समाज या दूसरी समाज में भी चलता आ रहा है| और खास करके जो लोगों अन एजुकेडेट है, बिल्कुल पढ़े-लिखे नहीं है| वही इस तरह की चीजों को और बढ़ावा देते हैं| लेकिन धीरे-धीरे हम जैसे एजुकेशन से इन सब चीजों का भी प्रभाव कम होता जा रहा है|Yeh Logon Ki Bimar Soch Ka Natija Hai Ki Bharat Mein Mahilaon Ko Maasik Dharm Ke Samay Neeche Najaron Se Dekha Jata Hai Unhen Kai Tarah Ki Bhedbhav Ka Samana Karna Padata Hai Jaise Ki Puja Ke Sthanon Mein Pravesh Nahi Karne Diya Jata Hai Unhen Parivar Ke Dusre Logon Se Doori Banakar Rakhne Ko Bola Jata Hai Wah Apne Baal Nahi Bana Sakti Hain Kisi Bhi Prakar Ka Makeup Nahi Kar Sakti Hain Unhen Khana Bhi Alag Khilaya Jata Hai Aisa Lagta Hai Jaise Ki Vo Ghar Ki Sadasya Nahi Hai Unhen Kitchen Mein Bhi Pravesh Karna Varjit Hota Hai To Mera Aisa Manana Hai Ki Jab Bhi Aap Koi Bhi Mahila Maasik Dharm Mein Hoti Hai To Uske Saath Is Tarah Ka Bhedbhav Karna Bilkul Bhi Uchit Nahi Hai Pehle Ke Time Se Hi Hamare Yahan Hindu Samaaj Ya Dusri Samaaj Mein Bhi Chalta Aa Raha Hai Aur Khas Karke Jo Logon An Ejukedet Hai Bilkul Padhe Likhe Nahi Hai Wahi Is Tarah Ki Chijon Ko Aur Badhawa Dete Hain Lekin Dhire Dhire Hum Jaise Education Se In Sab Chijon Ka Bhi Prabhav Kum Hota Ja Raha Hai
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देखिए भारत में लिटरेसी रेट बहुत ज्यादा नहीं है और जो पढ़े लिखे लोग नहीं है आज के समय में उनकी ही मानसिकता है ऐसी है कि अगर कोई महिला के मासिक धर्म चल रहे हैं तो वह और शुद्ध नहीं है वह इन सीरियल है लेकिन पहले के समय में और बल्कि आज के समय में भी कुछ जगहों पर ठोका मासिक धर्म के टाइम पर महिलाओं को रसोईघर में नहीं घुसने दिया जाता मंदिरों में तुम बहुत बिल्कुल बहन है उनका जाना ऐसे समय में और जो बहुत ही सादा रूढ़िवादी सोच रहे हो क्या को महिलाओं को एक अलग कमरे में ही रख देते जैसे कि उन्हें कोई बीमारी है क्या 8:00 से क्यों नहीं छोड़ेंगे उनके पास आएंगे तो उनको भी को बीमारी लग जाएगी बल्कि इसमें भी ऐसा नहीं होता तू ही लोगों की सोच है और बहुत गलत सोच रही थी अगर मासिक धर्म नहीं होंगे तो कोई भी जनरेशन आगे नहीं बढ़ेगी जनरेशन की फुल स्टॉप लग जाएगा सभी घरों में सबको ही बच्चे चाहिए और अगर वह मासिक धर्म को या पीड़ित को लेकर एसडीएम करेंगे तो यह उनकी मानसिकता ही डर जाता है समय के साथ-साथ चेंजेस आ रहे है लेकिन आज के समय में महिलाओं को अच्छे से ठीक नहीं किया जाता PH के टाइम पर जो कि बिल्कुल गलत है और यह बंद हो जाना चाहिए लोगों को महिलाओं को इसके बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए और बल्कि आज के लोग बहुत सारे लोगों के पास तो सेंड आपकी पुस्तक खरीदने के पैसे नहीं होते तो ऐसे ही से ऐसी कोई स्कीम या कुछ ऐसा करना चाहिए कि और महिलाओं को यह सब चीजें मिल सके आसानी से ताकि जून के दिमाग में एक नगमा है वह खत्म हो जाए
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देखिए भारत में लिटरेसी रेट बहुत ज्यादा नहीं है और जो पढ़े लिखे लोग नहीं है आज के समय में उनकी ही मानसिकता है ऐसी है कि अगर कोई महिला के मासिक धर्म चल रहे हैं तो वह और शुद्ध नहीं है वह इन सीरियल है लेकिन पहले के समय में और बल्कि आज के समय में भी कुछ जगहों पर ठोका मासिक धर्म के टाइम पर महिलाओं को रसोईघर में नहीं घुसने दिया जाता मंदिरों में तुम बहुत बिल्कुल बहन है उनका जाना ऐसे समय में और जो बहुत ही सादा रूढ़िवादी सोच रहे हो क्या को महिलाओं को एक अलग कमरे में ही रख देते जैसे कि उन्हें कोई बीमारी है क्या 8:00 से क्यों नहीं छोड़ेंगे उनके पास आएंगे तो उनको भी को बीमारी लग जाएगी बल्कि इसमें भी ऐसा नहीं होता तू ही लोगों की सोच है और बहुत गलत सोच रही थी अगर मासिक धर्म नहीं होंगे तो कोई भी जनरेशन आगे नहीं बढ़ेगी जनरेशन की फुल स्टॉप लग जाएगा सभी घरों में सबको ही बच्चे चाहिए और अगर वह मासिक धर्म को या पीड़ित को लेकर एसडीएम करेंगे तो यह उनकी मानसिकता ही डर जाता है समय के साथ-साथ चेंजेस आ रहे है लेकिन आज के समय में महिलाओं को अच्छे से ठीक नहीं किया जाता PH के टाइम पर जो कि बिल्कुल गलत है और यह बंद हो जाना चाहिए लोगों को महिलाओं को इसके बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए और बल्कि आज के लोग बहुत सारे लोगों के पास तो सेंड आपकी पुस्तक खरीदने के पैसे नहीं होते तो ऐसे ही से ऐसी कोई स्कीम या कुछ ऐसा करना चाहिए कि और महिलाओं को यह सब चीजें मिल सके आसानी से ताकि जून के दिमाग में एक नगमा है वह खत्म हो जाएDekhie Bharat Mein Literacy Rate Bahut Jyada Nahi Hai Aur Jo Padhe Likhe Log Nahi Hai Aaj Ke Samay Mein Unki Hi Mansikta Hai Aisi Hai Ki Agar Koi Mahila Ke Maasik Dharm Chal Rahe Hain To Wah Aur Shudh Nahi Hai Wah In Serial Hai Lekin Pehle Ke Samay Mein Aur Balki Aaj Ke Samay Mein Bhi Kuch Jagho Par Thokaa Maasik Dharm Ke Time Par Mahilaon Ko Rasoiighar Mein Nahi Ghusane Diya Jata Mandiro Mein Tum Bahut Bilkul Behen Hai Unka Jana Aise Samay Mein Aur Jo Bahut Hi Saada Rudhivadi Soch Rahe Ho Kya Ko Mahilaon Ko Ek Alag Kamre Mein Hi Rakh Dete Jaise Ki Unhen Koi Bimari Hai Kya 8:00 Se Kyun Nahi Chodenge Unke Paas Aayenge To Unko Bhi Ko Bimari Lag Jayegi Balki Isme Bhi Aisa Nahi Hota Tu Hi Logon Ki Soch Hai Aur Bahut Galat Soch Rahi Thi Agar Maasik Dharm Nahi Honge To Koi Bhi Generation Aage Nahi Badhegi Generation Ki Full Stop Lag Jayega Sabhi Gharon Mein Sabko Hi Bacche Chahiye Aur Agar Wah Maasik Dharm Ko Ya Peedit Ko Lekar Sdm Karenge To Yeh Unki Mansikta Hi Dar Jata Hai Samay Ke Saath Saath Changes Aa Rahe Hai Lekin Aaj Ke Samay Mein Mahilaon Ko Acche Se Theek Nahi Kiya Jata PH Ke Time Par Jo Ki Bilkul Galat Hai Aur Yeh Band Ho Jana Chahiye Logon Ko Mahilaon Ko Iske Baare Mein Shikshit Kiya Jana Chahiye Aur Balki Aaj Ke Log Bahut Sare Logon Ke Paas To Send Aapki Pustak Kharidne Ke Paise Nahi Hote To Aise Hi Se Aisi Koi Scheme Ya Kuch Aisa Karna Chahiye Ki Aur Mahilaon Ko Yeh Sab Cheezen Mil Sake Aasani Se Taki June Ke Dimag Mein Ek Nagma Hai Wah Khatam Ho Jaye
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हिंदू धर्म में मीट सेटिंग वुमन को अपवित्र और खराब माना जाता है लेकिन अपवित्रता मासिक धर्म खत्म होने के साथ ही समाप्त हो जाती है इसके अनुसार उन्हें घर पर ना रहकर पास में एक झोपड़ी या कुटिया में रहना चाहिए उन्हें अलग बर्तन में खाने को मिलेगा लेकिन वह खाना खुद नहीं बनाएगी उनके नहाने और बाल कंघी करने पर पाबंदी रहती है इसके साथ ही उंहें पूजा घर में जाने की पाबंदी रहती है लेकिन साउथ के कुछ मंदिर है जिसमें पीरियड को धूमधाम से मनाया जाता है सबसे पहले हम इस बात को स्पष्ट करना चाहिए कि इस पुरानी मान्यताओं की इन बातों का हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि अंय धर्म के लोग भी मानते हैं जहां पर महिलाओं को महावारी के समय पवित्र परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है वही ईसाई इस्लाम यहूदी और बौद्ध धर्म के लोग भी हिंदू धर्म मुकेश अंबानी महिलाओं को महावारी के सामने के समय हिंद दृष्टि से देखते हुए उन्हें हर चीज हर किसी चीजों से दूर रखते हैं मासिक धर्म में पीरियड पहले से गंदगी करीना और शानू से जुड़ा आ रहा है और जो अभी भी कंटिन्यू हो गया कल कॉलेज का कहना है कि यह सब डर और भय से भी जुड़ा होता है जिसके कारण महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार कर आ गया है मेरे साथी की एक स्त्री जाति से द्वेष का एक संकेत है जहां एक ऐसी चीज जो श्रेणी या फेमिनिन है उसे ढूंढो डिस्गस्टिंग को घोषित घोषित कर दिया गया है वह भी सारे मेल सोसायटी के लोगों लोगों से लोगों का जो जिसका असली डोमिनियन थे अभी भी सोसाइटी में
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हिंदू धर्म में मीट सेटिंग वुमन को अपवित्र और खराब माना जाता है लेकिन अपवित्रता मासिक धर्म खत्म होने के साथ ही समाप्त हो जाती है इसके अनुसार उन्हें घर पर ना रहकर पास में एक झोपड़ी या कुटिया में रहना चाहिए उन्हें अलग बर्तन में खाने को मिलेगा लेकिन वह खाना खुद नहीं बनाएगी उनके नहाने और बाल कंघी करने पर पाबंदी रहती है इसके साथ ही उंहें पूजा घर में जाने की पाबंदी रहती है लेकिन साउथ के कुछ मंदिर है जिसमें पीरियड को धूमधाम से मनाया जाता है सबसे पहले हम इस बात को स्पष्ट करना चाहिए कि इस पुरानी मान्यताओं की इन बातों का हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि अंय धर्म के लोग भी मानते हैं जहां पर महिलाओं को महावारी के समय पवित्र परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है वही ईसाई इस्लाम यहूदी और बौद्ध धर्म के लोग भी हिंदू धर्म मुकेश अंबानी महिलाओं को महावारी के सामने के समय हिंद दृष्टि से देखते हुए उन्हें हर चीज हर किसी चीजों से दूर रखते हैं मासिक धर्म में पीरियड पहले से गंदगी करीना और शानू से जुड़ा आ रहा है और जो अभी भी कंटिन्यू हो गया कल कॉलेज का कहना है कि यह सब डर और भय से भी जुड़ा होता है जिसके कारण महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार कर आ गया है मेरे साथी की एक स्त्री जाति से द्वेष का एक संकेत है जहां एक ऐसी चीज जो श्रेणी या फेमिनिन है उसे ढूंढो डिस्गस्टिंग को घोषित घोषित कर दिया गया है वह भी सारे मेल सोसायटी के लोगों लोगों से लोगों का जो जिसका असली डोमिनियन थे अभी भी सोसाइटी मेंHindu Dharm Mein Meat Setting Woman Ko Apavitra Aur Kharab Mana Jata Hai Lekin Apavitrata Maasik Dharm Khatam Hone Ke Saath Hi Samapt Ho Jati Hai Iske Anusar Unhen Ghar Par Na Rahkar Paas Mein Ek Jhopdi Ya Kutia Mein Rehna Chahiye Unhen Alag Bartan Mein Khane Ko Milega Lekin Wah Khana Khud Nahi Banaegi Unke Nahane Aur Baal Kanghi Karne Par Pabandi Rehti Hai Iske Saath Hi Unhe Puja Ghar Mein Jaane Ki Pabandi Rehti Hai Lekin South Ke Kuch Mandir Hai Jisme Period Ko Dhumadham Se Manaya Jata Hai Sabse Pehle Hum Is Baat Ko Spasht Karna Chahiye Ki Is Purani Manyataon Ki In Baaton Ka Hindu Dharm Hi Nahi Balki Any Dharm Ke Log Bhi Manate Hain Jahan Par Mahilaon Ko Mahavari Ke Samay Pavitra Parisar Mein Pravesh Karne Ki Anumati Nahi Hai Wahi Isai Islam Yahudi Aur Baudh Dharm Ke Log Bhi Hindu Dharm Mukesh Ambani Mahilaon Ko Mahavari Ke Samane Ke Samay Hind Drishti Se Dekhte Hue Unhen Har Cheez Har Kisi Chijon Se Dur Rakhate Hain Maasik Dharm Mein Period Pehle Se Gandagi Kareena Aur Shanu Se Juda Aa Raha Hai Aur Jo Abhi Bhi Continue Ho Gaya Kal College Ka Kehna Hai Ki Yeh Sab Dar Aur Bhay Se Bhi Juda Hota Hai Jiske Kaaran Mahilaon Ke Saath Aisa Vyavhar Kar Aa Gaya Hai Mere Sathi Ki Ek Stri Jati Se Dvesh Ka Ek Sanket Hai Jahan Ek Aisi Cheez Jo Shrenee Ya Feminin Hai Use Dhundho Disgasting Ko Ghoshit Ghoshit Kar Diya Gaya Hai Wah Bhi Sare Mail Sociaty Ke Logon Logon Se Logon Ka Jo Jiska Asli Dominiyan The Abhi Bhi Society Mein
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