सुभाष चन्द्र बोस ने 'दिल्ली चलो ' का नारा कब दिया? ...

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सुभाष चंद्र जी ने दिल्ली चलो का नारा सिंगापुर में उन्नीस सौ 43 में दिया था...
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सुभाष चंद्र जी ने दिल्ली चलो का नारा सिंगापुर में उन्नीस सौ 43 में दिया थाSubhash Chandra Ji Ne Delhi Chalo Ka Naara Singapore Mein Unnis Sau 43 Mein Diya Tha
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सुभाष चंद्र बोस जीना दिल्ली चलो का नारा 1947 में दिया था वह अंग्रेजों को बाहर भगाने की तरफ देश आजाद कराने की तरफ एक कदम था...
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सुभाष चंद्र बोस जीना दिल्ली चलो का नारा 1947 में दिया था वह अंग्रेजों को बाहर भगाने की तरफ देश आजाद कराने की तरफ एक कदम थाSubhash Chandra Bose Jeena Delhi Chalo Ka Naara 1947 Mein Diya Tha Wah Angrejo Ko Bahar Bhagne Ki Taraf Desh Azad Karane Ki Taraf Ek Kadam Tha
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सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में दिल्ली चलो का नारा दिया था और वह भी 1943 में दिया था...
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सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में दिल्ली चलो का नारा दिया था और वह भी 1943 में दिया थाSubhash Chandra Bose Ne Singapore Mein Delhi Chalo Ka Naara Diya Tha Aur Wah Bhi 1943 Mein Diya Tha
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सुभाष चन्द्र बोस ने 'दिल्ली चलो ' का नारा 1942 में दिया। दिल्ली चलो” का नारा भारत की आज़ादी के लिए प्रयासरत क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1942 में “आजाद हिन्द फ़ौज” को दिया आजाद हिन्द फ़ौज के मुखर नेता और मार्गदर्शक होते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने जब महसूस किया कि इंग्लैंड द्वितीय विश्व युद्ध में उलझता जा रहा है तब उस समय यह नारा देकर उन्होंने फ़ौज का मार्गदर्शन किया आज़ाद हिन्द फ़ौज को इंडियन नेशनल आर्मी के नाम से भी जाना जाता था जिसे जापान की सहायता से मिलकर संगठित किया गया था
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सुभाष चन्द्र बोस ने 'दिल्ली चलो ' का नारा 1942 में दिया। दिल्ली चलो” का नारा भारत की आज़ादी के लिए प्रयासरत क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1942 में “आजाद हिन्द फ़ौज” को दिया आजाद हिन्द फ़ौज के मुखर नेता और मार्गदर्शक होते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने जब महसूस किया कि इंग्लैंड द्वितीय विश्व युद्ध में उलझता जा रहा है तब उस समय यह नारा देकर उन्होंने फ़ौज का मार्गदर्शन किया आज़ाद हिन्द फ़ौज को इंडियन नेशनल आर्मी के नाम से भी जाना जाता था जिसे जापान की सहायता से मिलकर संगठित किया गया था Subhash Chandra Bose Ne Delhi Chalo ' Ka Naara 1942 Mein Diya Delhi Chalo” Ka Naara Bharat Ki Aazadi Ke Liye Prayasrat Krantikari Subhash Chandra Bose Ne Varsh 1942 Mein “ajad Hind Fauj” Ko Diya Azad Hind Fauj Ke Mukhar Neta Aur Margadarshak Hote Huye Subhash Chandra Bose Ne Jab Mahsus Kiya Ki England Dvitiya Vishwa Yudh Mein Ulajhtaa Ja Raha Hai Tab Us Samay Yeh Naara Dekar Unhone Fauj Ka Margdarshan Kiya Aazad Hind Fauj Ko Indian National Army Ke Naam Se Bhi Jana Jata Tha Jise Japan Ki Sahaayata Se Milkar Sangathit Kiya Gaya Tha
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सुभाष चंद्र जी ने दिल्ली चलो का नारा सिंगापुर में उन्नीस सौ 43 में दिया था
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सुभाष चंद्र जी ने दिल्ली चलो का नारा सिंगापुर में उन्नीस सौ 43 में दिया थाSubhash Chandra G Ne Delhi Chalo Ka Naara Singapore Mein Unnis Sau 43 Mein Diya Tha
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नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।
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नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।Neta G Ne 5 July 1943 Ko Singapore Ke Town Haal Ke Samane Supreme Kamandar Ke Roop Mein Sena Ko Sambadhan Karte Huye Delhi Chalo Ka Naara Diya Aur Japani Sena Ke Saath Milkar British V Commonwealth Sena Se Barma Sahit Imphal Aur Kohima Mein Ek Saath Jamakar Morcha Liya
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दिल्ली चलो” का नारा भारत की आज़ादी के लिए प्रयासरत क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1942 में “आजाद हिन्द फ़ौज” को दिया। आजाद हिन्द फ़ौज के मुखर नेता और मार्गदर्शक होते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने जब महसूस किया कि इंग्लैंड द्वितीय विश्व युद्ध में उलझता जा रहा है तब उस समय सुभाष चन्द्र बोस ने यह नारा देकर उन्होंने फ़ौज का मार्गदर्शन किया आज़ाद हिन्द फ़ौज को इंडियन नेशनल आर्मी के नाम से भी जाना जाता था जिसे जापान की सहायता से मिलकर संगठित किया गया था। सुभाष चन्द्र बोस का मानना था कि ब्रिटिश हकूमत स्वयं से कभी भी भारत को आज़ाद नही करेगी। इसके लिए ब्रिटिश हकूमत से विद्रोह कर लड़ना पड़ेगा। इसी कारण उन्होंने लगभग 40 हजार सैनिकों वाली इस सेना का नेतृत्व किया। तथा दिल्ली पर अधिक्रमण तथा ब्रिटिश सरकार को भारत से निकाल बाहर करने के उद्देश्य से सुभाष चन्द्र बोस ने दिल्ली चलो का नारा दिया l
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दिल्ली चलो” का नारा भारत की आज़ादी के लिए प्रयासरत क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1942 में “आजाद हिन्द फ़ौज” को दिया। आजाद हिन्द फ़ौज के मुखर नेता और मार्गदर्शक होते हुए सुभाष चन्द्र बोस ने जब महसूस किया कि इंग्लैंड द्वितीय विश्व युद्ध में उलझता जा रहा है तब उस समय सुभाष चन्द्र बोस ने यह नारा देकर उन्होंने फ़ौज का मार्गदर्शन किया आज़ाद हिन्द फ़ौज को इंडियन नेशनल आर्मी के नाम से भी जाना जाता था जिसे जापान की सहायता से मिलकर संगठित किया गया था। सुभाष चन्द्र बोस का मानना था कि ब्रिटिश हकूमत स्वयं से कभी भी भारत को आज़ाद नही करेगी। इसके लिए ब्रिटिश हकूमत से विद्रोह कर लड़ना पड़ेगा। इसी कारण उन्होंने लगभग 40 हजार सैनिकों वाली इस सेना का नेतृत्व किया। तथा दिल्ली पर अधिक्रमण तथा ब्रिटिश सरकार को भारत से निकाल बाहर करने के उद्देश्य से सुभाष चन्द्र बोस ने दिल्ली चलो का नारा दिया lDelhi Chalo” Ka Naara Bharat Ki Aazadi Ke Liye Prayasrat Krantikari Subhash Chandra Bose Ne Varsh 1942 Mein “ajad Hind Fauj” Ko Diya Azad Hind Fauj Ke Mukhar Neta Aur Margadarshak Hote Huye Subhash Chandra Bose Ne Jab Mahsus Kiya Ki England Dvitiya Vishwa Yudh Mein Ulajhtaa Ja Raha Hai Tab Us Samay Subhash Chandra Bose Ne Yeh Naara Dekar Unhone Fauj Ka Margdarshan Kiya Aazad Hind Fauj Ko Indian National Army Ke Naam Se Bhi Jana Jata Tha Jise Japan Ki Sahaayata Se Milkar Sangathit Kiya Gaya Tha Subhash Chandra Bose Ka Manana Tha Ki British Hakumat Swayam Se Kabhi Bhi Bharat Ko Aazad Nahi Karegi Iske Liye British Hakumat Se Vidroh Kar Ladana Padega Isi Kaaran Unhone Lagbhag 40 Hazar Sainikon Wali Is Sena Ka Netritva Kiya Tatha Delhi Par Adhikraman Tatha British Sarkar Ko Bharat Se Nikal Bahar Karne Ke Uddeshya Se Subhash Chandra Bose Ne Delhi Chalo Ka Naara Diya L
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नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।
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नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।Neta G Ne 5 July 1943 Ko Singapore Ke Town Haal Ke Samane Supreme Kamandar Ke Roop Mein Sena Ko Sambadhan Karte Huye Delhi Chalo Ka Naara Diya Aur Japani Sena Ke Saath Milkar British V Commonwealth Sena Se Barma Sahit Imphal Aur Kohima Mein Ek Saath Jamakar Morcha Liya October 1943 Ko Subhash Bose Ne Azad Hind Fauj Ke Sarvoch Senapati Ki Haisiyat Se Svatantra Bharat Ki Asthayi Sarkar Banaayi Jise Germany Japan Philippines Korea Chin Italy Manchuko Aur Ireland Ne Manyata Di Japan Ne Andaman V Nicobar Dweep Is Asthayi Sarkar Ko De Diye Subhash Un Dveepo Mein Gaye Aur Unka Naya Namakaran Kiya
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