भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने की कैंटीन खोल रखी है ? ...

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वात्सल्य जो आपने एक प्रश्न डाला है कि भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने की कैंटीन खोल रखी है जो अपनी प्रश्न डालना है यह हमेशा चर्चा में रहा है यह सोशल मीडिया और यह काफी प...
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वात्सल्य जो आपने एक प्रश्न डाला है कि भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने की कैंटीन खोल रखी है जो अपनी प्रश्न डालना है यह हमेशा चर्चा में रहा है यह सोशल मीडिया और यह काफी पर चर्चा में रहा है तो वैसे मैं आपको एक एग्जांपल के तौर पर से मिलना चाहता हूं जैसे कि कि आपको बताया अगर हम इस गवर्नमेंट एंप्लोई को हटाकर अगर हम देखें कि जो प्राइवेट प्राइवेट कंपनी है जिसमें लोग प्राइवेट काम करते हैं उनकी सैलरी भी बहुत अच्छी होती है लेकिन फिर भी उनको ना प्राइवेट कंपनी में फूट-फूट कर आती है वह भी फ्री हो फ्री मिल पर कुछ कम नहीं हो फ्री ऑफ कॉस्ट होता है यह तो इसका मतलब यह नहीं है कि जो प्राइवेट एंप्लाइज है कि वह गरीब है ऐसा कुछ भी नहीं है इनकी रेगुलेशंस में जो उनकी कंपनी प्रोवाइड कर आती है इसी तरीके से अगर हम समझे समझे संसद को दूसरे मराठी अरे यह भी फॉलो करती हैं तो मुझे नहीं लगता है कि हम लोगों को इस पर उंगली उठाने चाहिए कुछ सवाल और जवाब करना चाहिए ऐसा मेरा मानना है तो बजे समझाऊंगा कि हर हर सेक्टर का हर को ऑफ गवर्नमेंट सेक्टर का या प्राइवेट सेक्टर का सबका अपना-अपना क्राइटेरिया है वो अपने रूल रेगुलेशन से जो वह फॉलो करते हैं जैसे आप देखो रेलवे में बहुत अच्छे-अच्छे रेलवे रेलवे स्कोर एंप्लॉय होते हैं जो रेलवे में काम करते हैं उनको तो घर भी दिया कर दिया जाता है ऐसा नहीं है कि उनकी सैलरी तो नहीं है कि वह खुद घर फोन नहीं कर सकते लेकिन फिर भी उनको घर दिया जाता है तो अब हम उस पर ऑब्जेक्ट तो नहीं लगा सकते ना क्योंकि उनके रूल्स रेगुलेशन को फॉलो करता है तो बस एक सिंपल सा फंडा है इसका भी तो हम अगर को इस तरीके समझेंगे तो शायद उसको कोई क्वेश्चन नहीं होना चाहिएVatsalya Jo Aapne Ek Prashna Dala Hai Ki Bharat Mein Kaun Sa Sansad Garib Hai Jo Ki Sansad Bhavan Mein Itne Saste Khane Ki Canteen Khol Rakhi Hai Jo Apni Prashna Daalna Hai Yeh Hamesha Charcha Mein Raha Hai Yeh Social Media Aur Yeh Kafi Par Charcha Mein Raha Hai To Waise Main Aapko Ek Example Ke Taur Par Se Milna Chahta Hoon Jaise Ki Ki Aapko Bataya Agar Hum Is Government Employee Ko Hatakar Agar Hum Dekhen Ki Jo Private Private Company Hai Jisme Log Private Kaam Karte Hain Unki Salary Bhi Bahut Acchi Hoti Hai Lekin Phir Bhi Unko Na Private Company Mein Foot Foot Kar Aati Hai Wah Bhi Free Ho Free Mil Par Kuch Kum Nahi Ho Free Of Cost Hota Hai Yeh To Iska Matlab Yeh Nahi Hai Ki Jo Private Emplaij Hai Ki Wah Garib Hai Aisa Kuch Bhi Nahi Hai Inki Reguleshans Mein Jo Unki Company Provide Kar Aati Hai Isi Tarike Se Agar Hum Samjhe Samjhe Sansad Ko Dusre Marathi Arre Yeh Bhi Follow Karti Hain To Mujhe Nahi Lagta Hai Ki Hum Logon Ko Is Par Ungali Uthane Chahiye Kuch Sawal Aur Jawab Karna Chahiye Aisa Mera Manana Hai To Baje Samajhaunga Ki Har Har Sector Ka Har Ko Of Government Sector Ka Ya Private Sector Ka Sabka Apna Apna Criteria Hai Vo Apne Rule Regulation Se Jo Wah Follow Karte Hain Jaise Aap Dekho Railway Mein Bahut Acche Acche Railway Railway Score Employee Hote Hain Jo Railway Mein Kaam Karte Hain Unko To Ghar Bhi Diya Kar Diya Jata Hai Aisa Nahi Hai Ki Unki Salary To Nahi Hai Ki Wah Khud Ghar Phone Nahi Kar Sakte Lekin Phir Bhi Unko Ghar Diya Jata Hai To Ab Hum Us Par Object To Nahi Laga Sakte Na Kyonki Unke Rules Regulation Ko Follow Karta Hai To Bus Ek Simple Sa Fanda Hai Iska Bhi To Hum Agar Ko Is Tarike Samjhenge To Shayad Usko Koi Question Nahi Hona Chahiye
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ऐसा तो नहीं है उसका संसद भवन में सिर्फ संसद ही खाना खाते हैं संसद को छोड़कर का वह बहुत दूसरे कर्मचारी भी होते हैं जो कि वहां पर खाना खाते हैं संसदों की संसद को जो पैसे मिलते होंगे जो सैलरी मिलती होगी ...
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ऐसा तो नहीं है उसका संसद भवन में सिर्फ संसद ही खाना खाते हैं संसद को छोड़कर का वह बहुत दूसरे कर्मचारी भी होते हैं जो कि वहां पर खाना खाते हैं संसदों की संसद को जो पैसे मिलते होंगे जो सैलरी मिलती होगी वह बहुत अच्छी होगी गरीबी की कोई गुंजाइश ना हो वहां पर कर्मचारी है जो कि अगर वह खाना बहुत महंगा मिले तो शायद वह ना वहां पर खा पाए यह संसद की तरफ से सबके लिए एक विनती है कि आप अब जब भी है और कल तक के अंदर आप खाना खाए कम पैसों में खाई है ऐसा नहीं है कि खाली पर संसद में है आप कोई भी दूसरी गवर्मेंट Happy मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर लीजिए कि आपकी कंपनी देती है जब भी कैंटीन में खाते हैं ऑफिस के 1 फायदे मूल्य में खाना मिलता हैAisa To Nahi Hai Uska Sansad Bhavan Mein Sirf Sansad Hi Khana Khate Hain Sansad Ko Chodkar Ka Wah Bahut Dusre Karmchari Bhi Hote Hain Jo Ki Wahan Par Khana Khate Hain Sansadon Ki Sansad Ko Jo Paise Milte Honge Jo Salary Milti Hogi Wah Bahut Acchi Hogi Garibi Ki Koi Gunjan Na Ho Wahan Par Karmchari Hai Jo Ki Agar Wah Khana Bahut Mehnga Mile To Shayad Wah Na Wahan Par Kha Paye Yeh Sansad Ki Taraf Se Sabke Liye Ek Vinati Hai Ki Aap Ab Jab Bhi Hai Aur Kal Tak Ke Andar Aap Khana Khae Kum Paison Mein Khai Hai Aisa Nahi Hai Ki Khaali Par Sansad Mein Hai Aap Koi Bhi Dusri Goverment Happy Multinational Company Mein Kaam Kar Lijiye Ki Aapki Company Deti Hai Jab Bhi Canteen Mein Khate Hain Office Ke 1 Fayde Mulya Mein Khana Milta Hai
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आपका क्वेश्चन का पॉइंट अच्छा है कि जो सांसद रहते हैं उनको इतना शक्ति हमें Candy Crush ऋतिक के ऊपर बैठकर जाते हैं तो इसका जस्ट बेसिक में क्या है कि आप कहीं पर भी काम करते हैं तो आपको वहां पर फैसिलिटी प...
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आपका क्वेश्चन का पॉइंट अच्छा है कि जो सांसद रहते हैं उनको इतना शक्ति हमें Candy Crush ऋतिक के ऊपर बैठकर जाते हैं तो इसका जस्ट बेसिक में क्या है कि आप कहीं पर भी काम करते हैं तो आपको वहां पर फैसिलिटी प्रोवाइड से जाते हैं जैसे गाड़ियां हुई है खाने का फैसिलिटी हुआ मैसेज नहीं अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में भी जाएंगे या किसी गवर्नमेंट जॉब में भी जाएंगे तो वहां का जो कंपनी का एहसास अच्छा रहता है उसमें मैसेज लिटिया खाने पीने का फैसिलिटी रहता है रहता तुम यहां पर भी जो पार्लिमेंट है क्योंकि वह किस चीज में इंटरेस्ट है हमारे कंट्री का तो वहां पर थोड़ा ज्यादा गवर्नमेंट सब्सिडी देकर फैसिलिटी प्रोवाइड की गई मेंबर ऑफ पार्लियामेंट के लिए कोई नहीं है इसको बड़ी पार्लिमेंट में है और या फिर मिलेंगे को पकड़कर बहुत दूर ले ले तू इतना कोई इंपॉर्टेंस वाली बात नहीं है यह हर ऑर्गनाइजेशन में हर कंपनी में यह फैसिलिटी दी जाती है जोAapka Question Ka Point Accha Hai Ki Jo Saansad Rehte Hain Unko Itna Shakti Hume Candy Crush Ritika Ke Upar Baithkar Jaate Hain To Iska Just Basic Mein Kya Hai Ki Aap Kahin Par Bhi Kaam Karte Hain To Aapko Wahan Par Facility Provide Se Jaate Hain Jaise Gadiyan Hui Hai Khane Ka Facility Hua Massage Nahi Agar Aap Kisi Private Company Mein Bhi Jaenge Ya Kisi Government Job Mein Bhi Jaenge To Wahan Ka Jo Company Ka Ehsaas Accha Rehta Hai Usamen Massage Litiya Khane Peene Ka Facility Rehta Hai Rehta Tum Yahan Par Bhi Jo Parliment Hai Kyonki Wah Kis Cheez Mein Interest Hai Hamare Country Ka To Wahan Par Thoda Jyada Government Subsidy Dekar Facility Provide Ki Gayi Member Of Parliament Ke Liye Koi Nahi Hai Isko Badi Parliment Mein Hai Aur Ya Phir Milenge Ko Pakadkar Bahut Dur Le Le Tu Itna Koi Importance Wali Baat Nahi Hai Yeh Har Organisation Mein Har Company Mein Yeh Facility Di Jati Hai Jo
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बहुत सारे लोगों का कहना है कि एक फैसिलिटी है टाइपिंग की फैसिलिटी उस जमाने में थी जब Politics समाज सेवा का एक हिस्सा था लेकिन अब तो पॉलिटिक्स एक प्रोफेसर नहीं हूं मैं गुड मॉर्निंग पॉलिटिशन अगर आप राजनी...
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बहुत सारे लोगों का कहना है कि एक फैसिलिटी है टाइपिंग की फैसिलिटी उस जमाने में थी जब Politics समाज सेवा का एक हिस्सा था लेकिन अब तो पॉलिटिक्स एक प्रोफेसर नहीं हूं मैं गुड मॉर्निंग पॉलिटिशन अगर आप राजनीतिक आपको बहुत पैसे निश्चित तौर पर कमाने के मौके मिलते हैं और पार्लियामेंट के अंदर जितने भी आपके रिप्रजेंटेटिव सब के सब कहीं ना कहीं अगर नॉर्मल रेट पर भी खाना मिलेगा तो आराम से एयरपोर्ट करने लायक है तो वैसे मैं अब के जमाने में इस प्रथा को चलते रहने देना मुझे लगता है फिक्स न्यूसेंस इसका कोई तर्क नहीं बनता है और अगेन बिलिंग में हमारे पॉलिटिशंस जो आज के हैं उनके अंदर उसकी कमी है वह दिखाता है अगर वह छोटी सी चीज का भी खात्मा नहीं कर सकते तो मुझे लगता है यह एक बहुत बड़ी नाकामी है तो कंटेंपरेरी पॉलिटिशंस है जो अपने आप को प्रोग्रेस से बताते हैं उन सब कीBahut Sare Logon Ka Kehna Hai Ki Ek Facility Hai Typing Ki Facility Us Jamaane Mein Thi Jab Politics Samaaj Seva Ka Ek Hissa Tha Lekin Ab To Politics Ek Professor Nahi Hoon Main Good Morning Politician Agar Aap Rajnitik Aapko Bahut Paise Nishchit Taur Par Kamane Ke Mauke Milte Hain Aur Parliament Ke Andar Jitne Bhi Aapke Representative Sab Ke Sab Kahin Na Kahin Agar Normal Rate Par Bhi Khana Milega To Aaram Se Airport Karne Layak Hai To Waise Main Ab Ke Jamaane Mein Is Pratha Ko Chalte Rehne Dena Mujhe Lagta Hai Fix Nyusens Iska Koi Tark Nahi Banta Hai Aur Again Billing Mein Hamare Politicians Jo Aaj Ke Hain Unke Andar Uski Kami Hai Wah Dikhaata Hai Agar Wah Choti Si Cheez Ka Bhi Khatma Nahi Kar Sakte To Mujhe Lagta Hai Yeh Ek Bahut Badi Nakami Hai To Contemporary Politicians Hai Jo Apne Aap Ko Progress Se Batatey Hain Un Sab Ki
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सांसद गरीबी अमेरिका की बात ही नहीं है जो आप कोई काम करते हैं आप कोई दफ्तर जाते हैं तो वहां पर आपको कुछ फैसिलिटीज दी जाती है यह वही फैसिलिटीज़ में क्या सस्ता कैंटीन है महंगा कैंटीन की बात ही नहीं है आप...
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सांसद गरीबी अमेरिका की बात ही नहीं है जो आप कोई काम करते हैं आप कोई दफ्तर जाते हैं तो वहां पर आपको कुछ फैसिलिटीज दी जाती है यह वही फैसिलिटीज़ में क्या सस्ता कैंटीन है महंगा कैंटीन की बात ही नहीं है आप खाना खा रहे हो कुछ कम पैसे दे रहे हो क्योंकि आपको फैसिलिटी देख लीजिए कोई एक रेलवे में काम करता है तो उसे घर दिया जाता है उसी प्रकार सांसद लोग को भी खाना दिया जा रहा है गरीब की बात ही नहीं हैSaansad Garibi America Ki Baat Hi Nahi Hai Jo Aap Koi Kaam Karte Hain Aap Koi Daftaar Jaate Hain To Wahan Par Aapko Kuch Faisilitij Di Jati Hai Yeh Wahi Faisilitiz Mein Kya Sasta Canteen Hai Mehnga Canteen Ki Baat Hi Nahi Hai Aap Khana Kha Rahe Ho Kuch Kum Paise De Rahe Ho Kyonki Aapko Facility Dekh Lijiye Koi Ek Railway Mein Kaam Karta Hai To Use Ghar Diya Jata Hai Ussi Prakar Saansad Log Ko Bhi Khana Diya Ja Raha Hai Garib Ki Baat Hi Nahi Hai
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एक बेहतरीन सवाल आपने पूछा है क्योंकि कई बार यह सवाल मेरे जहन में आया कि संसद में जब इंसान को और मतलब पहले से इतना ज्यादा सरकार तन्हा दे रही है तो उसके बाद इन सारी चीजों की क्या जरूरत है कि उनको इतना स...
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एक बेहतरीन सवाल आपने पूछा है क्योंकि कई बार यह सवाल मेरे जहन में आया कि संसद में जब इंसान को और मतलब पहले से इतना ज्यादा सरकार तन्हा दे रही है तो उसके बाद इन सारी चीजों की क्या जरूरत है कि उनको इतना सस्ता खाना दिया जाता है संसद के अंदर तो सीधी सी बात है अगर आप किसी भी आर्गेनाईजेशन में काम करते हो चाहे वह परम आपकी सरकारी हो या गैर सरकारी तो वहां पर उस परम के हिसाब से जो भी उसके रूप होते हैं जो भी अभिलाषाएं कन्हैया जो भी फर्क है इतना सा ताल्लुक हैं अगर आप देखोगे अगर आपको आप किसी कंपनी में अगर जॉब करते हो और उसको कंपनी आपको अलाउंस देती है खाने का और रहने का तो वह कंपनी की तरफ से आपको एक तरफ से दी गई कलावंत है तो उसी तरह से जो संसद में जो लोग काम करते हैं उनके लिए यह अलाउंस दिया गया है बाकी यह कितना गलत है कितना सही है इस बात पर टिप्पणी नहीं करुंगा क्योंकि मेरा अपना मानना कुछ अलग हो सकता है और भी कुछ चीज है जो उस पर मैटर कर सकती है लेकिन सीधी सी बात है संसद में जो काम करता है उसके लिए संसद द्वारा जो भी अलार्म्स दिया जाता है जो भी सब्सिडी दी जाती है यह उसी का एक हिस्सा है और मेरा खुद का मानना यह है कि यह सस्ता खाना जो है एक बार हमें फिर से इस बात पर गौर करना चाहिए एक बार फिर से देखना चाहिए कि यह फैसला हमने सही तरीके से लिया है या नहींEk Behtareen Sawal Aapne Poocha Hai Kyonki Kai Baar Yeh Sawal Mere Zahn Mein Aaya Ki Sansad Mein Jab Insaan Ko Aur Matlab Pehle Se Itna Jyada Sarkar Tanha De Rahi Hai To Uske Baad In Saree Chijon Ki Kya Zaroorat Hai Ki Unko Itna Sasta Khana Diya Jata Hai Sansad Ke Andar To Sidhi Si Baat Hai Agar Aap Kisi Bhi Organisation Mein Kaam Karte Ho Chahe Wah Param Aapki Sarkari Ho Ya Gair Sarkari To Wahan Par Us Param Ke Hisab Se Jo Bhi Uske Roop Hote Hain Jo Bhi Abhilashaen Kanhaiya Jo Bhi Fark Hai Itna Sa Talluk Hain Agar Aap Dekhoge Agar Aapko Aap Kisi Company Mein Agar Job Karte Ho Aur Usko Company Aapko Alauns Deti Hai Khane Ka Aur Rehne Ka To Wah Company Ki Taraf Se Aapko Ek Taraf Se Di Gayi Kelavat Hai To Ussi Tarah Se Jo Sansad Mein Jo Log Kaam Karte Hain Unke Liye Yeh Alauns Diya Gaya Hai Baki Yeh Kitna Galat Hai Kitna Sahi Hai Is Baat Par Tippani Nahi Karunga Kyonki Mera Apna Manana Kuch Alag Ho Sakta Hai Aur Bhi Kuch Cheez Hai Jo Us Par Matter Kar Sakti Hai Lekin Sidhi Si Baat Hai Sansad Mein Jo Kaam Karta Hai Uske Liye Sansad Dwara Jo Bhi Alarms Diya Jata Hai Jo Bhi Subsidy Di Jati Hai Yeh Ussi Ka Ek Hissa Hai Aur Mera Khud Ka Manana Yeh Hai Ki Yeh Sasta Khana Jo Hai Ek Baar Hume Phir Se Is Baat Par Gaur Karna Chahiye Ek Baar Phir Se Dekhna Chahiye Ki Yeh Faisla Humne Sahi Tarike Se Liya Hai Ya Nahi
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