हम ईद उल अज़हा क्यूँ मानते हैं? ईद पर कुर्बानी क्यूँ दी जाती है? ...

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पहले कहानी फिर मैं अपने विचार बताऊंगी बकरी ब्याने ईद उल अजा का फेस्टिवल लिस्ट ऑफ सैक्रिफाइस यानी बलिदान का त्योहार कहा जाता है कहा जाता है कि अल्लाह ने इब्राहिम के वीडियोस यानी आज्ञापालन की परीक्षा लेना चाहा इब्राहिम अपने बेटे शायद उनका नाम इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे क्योंकि अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया था कथन यह है कि जब इब्राहिम ने अपने बेटे के गले को काटने का प्रयत्न किया तो बेटा स्माइल सही सलामत था और उसकी जगह एक बकरी हलाल हो हो गया था तो Wikipedia कहता है कि सैक्रिफाइस हलाल का यह तात्पर्य है कि इंसान की जान कभी नहीं लेनी चाहिए खासतौर से अल्लाह के नाम पर यहां यह भी लिखा है कि मांस का Wanted एक तिहाई हिस्सा गरीबों में बांटा जाएगा एक तिहाई रिश्तेदारों में और आखरी Wanted जो है अपने हिस्से आता है जो कि वह अपना बनाकर और खाते हैं अब मैं एक जैन हूं और हिंसा चाहे वजह कोई भी हो पशु-पक्षी इंसान मेरे लिए धर्म का प्रतीक नहीं हो सकता चाहे वह कुर्बानी अल्लाह के नाम पर हो चाहे काली मां के मंदिर में हो बेजुबान जीव की हत्या मजहब नहीं सिखा सकती मेरा यह अभिप्राय है और मैं बहुत माफी चाहूंगी अगर मेरे फ्रेंड्स किसी को भी आ मेरी बात गलत लगे बट आज उज्जैन में यह सैक्रिफाइस मेरे लिए तो बहुत मेरा दिल बहुत दुखता है जब मैं देखती हूं इन बेजुबान जीवो को मरते हुए आज के दिन
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पहले कहानी फिर मैं अपने विचार बताऊंगी बकरी ब्याने ईद उल अजा का फेस्टिवल लिस्ट ऑफ सैक्रिफाइस यानी बलिदान का त्योहार कहा जाता है कहा जाता है कि अल्लाह ने इब्राहिम के वीडियोस यानी आज्ञापालन की परीक्षा लेना चाहा इब्राहिम अपने बेटे शायद उनका नाम इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे क्योंकि अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया था कथन यह है कि जब इब्राहिम ने अपने बेटे के गले को काटने का प्रयत्न किया तो बेटा स्माइल सही सलामत था और उसकी जगह एक बकरी हलाल हो हो गया था तो Wikipedia कहता है कि सैक्रिफाइस हलाल का यह तात्पर्य है कि इंसान की जान कभी नहीं लेनी चाहिए खासतौर से अल्लाह के नाम पर यहां यह भी लिखा है कि मांस का Wanted एक तिहाई हिस्सा गरीबों में बांटा जाएगा एक तिहाई रिश्तेदारों में और आखरी Wanted जो है अपने हिस्से आता है जो कि वह अपना बनाकर और खाते हैं अब मैं एक जैन हूं और हिंसा चाहे वजह कोई भी हो पशु-पक्षी इंसान मेरे लिए धर्म का प्रतीक नहीं हो सकता चाहे वह कुर्बानी अल्लाह के नाम पर हो चाहे काली मां के मंदिर में हो बेजुबान जीव की हत्या मजहब नहीं सिखा सकती मेरा यह अभिप्राय है और मैं बहुत माफी चाहूंगी अगर मेरे फ्रेंड्स किसी को भी आ मेरी बात गलत लगे बट आज उज्जैन में यह सैक्रिफाइस मेरे लिए तो बहुत मेरा दिल बहुत दुखता है जब मैं देखती हूं इन बेजुबान जीवो को मरते हुए आज के दिनPehle Kahani Phir Main Apne Vichar Bataungi Bakri Byane Eid Ul Aja Ka Festival List Of Sacrifice Yani Balidaan Ka Tyohaar Kaha Jata Hai Kaha Jata Hai Ki Allah Ne Ibrahim Ke Videos Yani Agyaapaalan Ki Pariksha Lena Chaha Ibrahim Apne Bete Shayad Unka Naam Ismail Ki Kurbani Dene Ke Liye Taiyaar Ho Gaye The Kyonki Allah Ne Unhen Huqm Diya Tha Kathan Yeh Hai Ki Jab Ibrahim Ne Apne Bete Ke Gale Ko Katne Ka Prayatn Kiya To Beta Smile Sahi Salamat Tha Aur Uski Jagah Ek Bakri Halal Ho Ho Gaya Tha To Wikipedia Kahata Hai Ki Sacrifice Halal Ka Yeh Tatparya Hai Ki Insaan Ki Jaan Kabhi Nahi Leni Chahiye Khaasataur Se Allah Ke Naam Par Yahan Yeh Bhi Likha Hai Ki Maans Ka Wanted Ek Tihai Hissa Garibon Mein Banta Jayega Ek Tihai Rishtedaaro Mein Aur Aakhri Wanted Jo Hai Apne Hisse Aata Hai Jo Ki Wah Apna Banakar Aur Khate Hain Ab Main Ek Jain Hoon Aur Hinsa Chahe Wajah Koi Bhi Ho Pashu Pakshi Insaan Mere Liye Dharm Ka Pratik Nahi Ho Sakta Chahe Wah Kurbani Allah Ke Naam Par Ho Chahe Kali Maa Ke Mandir Mein Ho Bejuban Jeev Ki Hatya Majahab Nahi Sikha Sakti Mera Yeh Abhipray Hai Aur Main Bahut Maafi Chahungi Agar Mere Friends Kisi Ko Bhi Aa Meri Baat Galat Lage But Aaj Ujjain Mein Yeh Sacrifice Mere Liye To Bahut Mera Dil Bahut Dukhata Hai Jab Main Dekhti Hoon In Bejuban Jivo Ko Marte Huye Aaj Ke Din
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विकी ईद-उल-अजहा क्यों मनाया जाता है और ईद कुर्बानी क्यों दी जाती है तो इसी से लोग बकरीद के नाम से भी जानते हैं ना मलेश्वर चाहिए 22 अगस्त को मनाया जा रहा है खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद जो यह स्कूल मनाया जाता है जिसे जो है कई + पर बकरी ईद उल अजहा के नाम से बनाया जाता है मुसलमानों के हिसाब से यह मुसलमानों की कुर्बानी दी जाती है और स्कूल में जो है बकरे का गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है और इस्लाम धर्म का जो है पहला मुख्य त्यौहार मीठी ईद उल फितर कहा जाता है ईद पर कुर्बानी क्यों दी जाती है मैं बताता हूं तो इस्लाम धर्म के जो है बेहद ही प्रमुख पैगंबर हजरत इब्राहिम कुरान में इनका जो नाम है 10 अध्याय भी है जिससे शुद्ध नाम से जाना जाता है और कुर्बानी के चलते बकरीद के मौके पर जानवरों को जो है कोई बात नहीं की जाती है तो हजरत इब्राहिम की सबसे प्यारी चीज कुर्बानी अल्लाह के हुकुम अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बानी मांगे थे तो हजरत इब्राहिम के जो है सबसे ज्यादा प्यारा अपना एकलौता औलाद था उनका नाम से मोहम्मद भाई यह औलाद जो है काफी बुढ़ापे में पैदा हुआ था लेकिन अल्लाह के हुक्म मानते हजरत इब्राहिम जो अपने बेटे को लेकर कुर्बानी देने जा रहे थे तभी रास्ते में जो है इसका टाइम मिला उसने कहा कि वह इसे उम्र में क्यों अपने बाप बेटे की कुर्बानी देना चाहते हैं उसके मरने के बाद गुवाहाटी का काम जो उनका देखभाल करेगा यह कौन का सहारा बनेगा कितने बजे मुझे यह बात सुनकर थोड़ी सी सोच में पड़ गए हैं उनका हक भी लगा लेकिन कुछ देर बाद वह अपने आप को संभालो कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गया इसलिए अपनी आंखों पर पट्टी बांधी थी जब हमने जो अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर कुर्बानी दी पट्टी हटा तो देखा कि उनका बेटा उनके सामने जिंदा खड़ा पाया क्योंकि अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के बेटे की जगह पर बकरी को लग गया था इसलिए जो है यह बकरी ईद मनाई जाती है और बकरी का मेमना मुझे बलि दी जाती है इस फेस्टिवल में
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जैसे कि आपने पूछा कि ईद-उल-अज़हा क्यों मानते हैं तो कुर्बानी क्यों दी जाती है और बकरी एक जैसे 22 अगस्त को मनाया जाता है और यह आया ईद उल जुहा कहा जाता है अलग-अलग नामों से जाना जाता है इसे एक प्रमुख त्यौहार है और इसे तीन हिस्सों में बांटा जाता है कुर्बानी के बकरे के गोश्त गोदी में बैठ जाता है और इसके प्रमुख त्यौहार दोहे मीठी ईद है ईद उल फितर कहा जाता है कि इस पर पकवान बनाए जाते हैं मीठे उस पर कुर्बानी क्यों दी जाती उसके बीच में DJ इस्लाम धर्म की भांति प्रमुख पैगंबर से हजरत इब्राहिम और उनके निधन पर कुरान में उनके नाम पर छुरा एक अध्याय भी है इसकी सूरह इब्राहिम कहा जाता है इन्हीं के कुर्बानी के चलते बकरीद के मौके पर जानवरों पर कुर्बानी दिया कीचड़ में मतलब फास्ट के बकरे की कुर्बानी दी जाती है और हजरत इब्राहिम की सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी तो सबसे प्यारी चीज जो कुर्बानी रानी गई तो इसके लिए उनके सबसे ज्यादा प्यार होते एकलौता औलाद था इस्माइल ठीक है उसी से है यह वाला यह काफी बुढ़ापे में पैदा हुई थी इसके लिए अल्लाह की हो मानते उन्हें अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे इसी कारण से जो है कुर्बानी दी जाती है
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जैसे कि आपने पूछा कि ईद-उल-अज़हा क्यों मानते हैं तो कुर्बानी क्यों दी जाती है और बकरी एक जैसे 22 अगस्त को मनाया जाता है और यह आया ईद उल जुहा कहा जाता है अलग-अलग नामों से जाना जाता है इसे एक प्रमुख त्यौहार है और इसे तीन हिस्सों में बांटा जाता है कुर्बानी के बकरे के गोश्त गोदी में बैठ जाता है और इसके प्रमुख त्यौहार दोहे मीठी ईद है ईद उल फितर कहा जाता है कि इस पर पकवान बनाए जाते हैं मीठे उस पर कुर्बानी क्यों दी जाती उसके बीच में DJ इस्लाम धर्म की भांति प्रमुख पैगंबर से हजरत इब्राहिम और उनके निधन पर कुरान में उनके नाम पर छुरा एक अध्याय भी है इसकी सूरह इब्राहिम कहा जाता है इन्हीं के कुर्बानी के चलते बकरीद के मौके पर जानवरों पर कुर्बानी दिया कीचड़ में मतलब फास्ट के बकरे की कुर्बानी दी जाती है और हजरत इब्राहिम की सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी तो सबसे प्यारी चीज जो कुर्बानी रानी गई तो इसके लिए उनके सबसे ज्यादा प्यार होते एकलौता औलाद था इस्माइल ठीक है उसी से है यह वाला यह काफी बुढ़ापे में पैदा हुई थी इसके लिए अल्लाह की हो मानते उन्हें अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे इसी कारण से जो है कुर्बानी दी जाती हैJaise Ki Aapne Poocha Ki Eid Ul Azaha Kyon Manate Hain To Kurbani Kyon Di Jati Hai Aur Bakri Ek Jaise 22 August Ko Manaya Jata Hai Aur Yeh Aaya Eid Ul Juha Kaha Jata Hai Alag Alag Namon Se Jana Jata Hai Ise Ek Pramukh Tyohar Hai Aur Ise Teen Hisso Mein Banta Jata Hai Kurbani Ke Bakre Ke Gosht Godi Mein Baith Jata Hai Aur Iske Pramukh Tyohar Manonit Mithi Eid Hai Eid Ul Fitar Kaha Jata Hai Ki Is Par Pakvaan Banaye Jaate Hain Mithe Us Par Kurbani Kyon Di Jati Uske Bich Mein DJ Islam Dharm Ki Bhanti Pramukh Paigambar Se Hazrat Ibrahim Aur Unke Nidhan Par Quraan Mein Unke Naam Par Chura Ek Adhyay Bhi Hai Iski Surah Ibrahim Kaha Jata Hai Inhin Ke Kurbani Ke Chalte Bakrid Ke Mauke Par Jaanvaro Par Kurbani Diya Kichad Mein Matlab Fast Ke Bakre Ki Kurbani Di Jati Hai Aur Hazrat Ibrahim Ki Sabse Payari Cheez Ki Kurbani To Sabse Payari Cheez Jo Kurbani Rani Gayi To Iske Liye Unke Sabse Jyada Pyar Hote Ekalauta Aulad Tha Ismail Theek Hai Ussi Se Hai Yeh Wala Yeh Kafi Budhape Mein Paida Hui Thi Iske Liye Allah Ki Ho Manate Unhen Apne Bete Ismail Ki Kurbani Dene Ko Taiyaar Ho Gaye The Isi Kaaran Se Jo Hai Kurbani Di Jati Hai
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए की ईद पर ईद उल फितर जिसे कहते हैं बकरीद पर कुर्बानी क्यों दी जाती है तो कुर्बानी देने का स्टेज उम्मीद रीजन है यह है कि यहां हजरत इब्राहिम जो कि मुस्लिमों के बहुत बड़े पैगंबर थे तो मुझे भी उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी और उनका एक बेटा हुआ था स्माइल क्योंकि बहुत ही ज्यादा उम्र में हुआ था बहुत खूबसूरत हो गए तो हुआ था लेकिन अल्लाह ताला ने फरमाया कि उन्हें उनकी कुर्बानी चाहिए तो वह अपनी बेटी की भी उस पर कुर्बानी जो है वह देने के लिए तैयार हो गए लेकिन जब उसकी कुर्बानी दे रहे थे तो अल्लाह ने उसके बेटे को हटा के बीच में एक जानवर को ले आया तब से यह रिवाज है वह चला है कि कुर्बानी जो है वह इस वक्त दी जाती है क्योंकि अल्लाह को कोई बारे में जो है वह प्यारी है बहुत दूसरी बात कि जो कुर्बानी दी जाती है उसके बीच के तीन हिस्से होते हैं तीन हिस्से में पहला हिस्सा होता है कि जो कि खुद खाया जाता है दूसरा हिस्सा होता है जो कि गरीबों को दिया जाता है और तीसरा हिस्सा होता है जो कि बांटा जाता है अपने रिश्तेदारों में तीन हिस्से होते इस कुर्बानी के और इस्माइल की कुर्बानी दी थी इसी वजह से जानवर की 123 करवानी होगी उसी वजह से अभी भी लोग जो है वह जानवर की कुर्बानी देते हैं इसे मेन कुर्बानी जो है वह बकरे की दी जाती है ऊंट की जाती है
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देखिए की ईद पर ईद उल फितर जिसे कहते हैं बकरीद पर कुर्बानी क्यों दी जाती है तो कुर्बानी देने का स्टेज उम्मीद रीजन है यह है कि यहां हजरत इब्राहिम जो कि मुस्लिमों के बहुत बड़े पैगंबर थे तो मुझे भी उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी और उनका एक बेटा हुआ था स्माइल क्योंकि बहुत ही ज्यादा उम्र में हुआ था बहुत खूबसूरत हो गए तो हुआ था लेकिन अल्लाह ताला ने फरमाया कि उन्हें उनकी कुर्बानी चाहिए तो वह अपनी बेटी की भी उस पर कुर्बानी जो है वह देने के लिए तैयार हो गए लेकिन जब उसकी कुर्बानी दे रहे थे तो अल्लाह ने उसके बेटे को हटा के बीच में एक जानवर को ले आया तब से यह रिवाज है वह चला है कि कुर्बानी जो है वह इस वक्त दी जाती है क्योंकि अल्लाह को कोई बारे में जो है वह प्यारी है बहुत दूसरी बात कि जो कुर्बानी दी जाती है उसके बीच के तीन हिस्से होते हैं तीन हिस्से में पहला हिस्सा होता है कि जो कि खुद खाया जाता है दूसरा हिस्सा होता है जो कि गरीबों को दिया जाता है और तीसरा हिस्सा होता है जो कि बांटा जाता है अपने रिश्तेदारों में तीन हिस्से होते इस कुर्बानी के और इस्माइल की कुर्बानी दी थी इसी वजह से जानवर की 123 करवानी होगी उसी वजह से अभी भी लोग जो है वह जानवर की कुर्बानी देते हैं इसे मेन कुर्बानी जो है वह बकरे की दी जाती है ऊंट की जाती हैDekhie Ki Eid Par Eid Ul Fitar Jise Kehte Hain Bakrid Par Kurbani Kyon Di Jati Hai To Kurbani Dene Ka Stage Ummid Reason Hai Yeh Hai Ki Yahan Hazrat Ibrahim Jo Ki Muslimo Ke Bahut Bade Paigambar The To Mujhe Bhi Unki Sabse Payari Cheez Ki Kurbani Aur Unka Ek Beta Hua Tha Smile Kyonki Bahut Hi Jyada Umar Mein Hua Tha Bahut Khoobsurat Ho Gaye To Hua Tha Lekin Allah Tala Ne Farmaya Ki Unhen Unki Kurbani Chahiye To Wah Apni Beti Ki Bhi Us Par Kurbani Jo Hai Wah Dene Ke Liye Taiyaar Ho Gaye Lekin Jab Uski Kurbani De Rahe The To Allah Ne Uske Bete Ko Hata Ke Bich Mein Ek Janwar Ko Le Aaya Tab Se Yeh Rivaaj Hai Wah Chala Hai Ki Kurbani Jo Hai Wah Is Waqt Di Jati Hai Kyonki Allah Ko Koi Bare Mein Jo Hai Wah Payari Hai Bahut Dusri Baat Ki Jo Kurbani Di Jati Hai Uske Bich Ke Teen Hisse Hote Hain Teen Hisse Mein Pehla Hissa Hota Hai Ki Jo Ki Khud Khaya Jata Hai Doosra Hissa Hota Hai Jo Ki Garibon Ko Diya Jata Hai Aur Teesra Hissa Hota Hai Jo Ki Banta Jata Hai Apne Rishtedaaro Mein Teen Hisse Hote Is Kurbani Ke Aur Ismail Ki Kurbani Di Thi Isi Wajah Se Janwar Ki 123 Karavani Hogi Ussi Wajah Se Abhi Bhi Log Jo Hai Wah Janwar Ki Kurbani Dete Hain Ise Main Kurbani Jo Hai Wah Bakre Ki Di Jati Hai Unt Ki Jati Hai
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