क्या पशु की बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण हो जाती है? ...

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देखिए शायद हम सभी आपके इस प्रश्न का उत्तर जानते हैं कि कभी भी किसी की हत्या करके या किसी की बलि देकर के कभी भी किसी की मनोकामना पूर्ण नहीं हो सकती लेकिन हमने अपने रीति रिवाज उस तरीके से बनाए हैं जो कि हमारे मस्तिष्क में एक पेड़ की तरह रूठ हो चुका है तो हम इसे जान कर भी मानना नहीं चाहते और ज्यादातर आप ने ओ माय गॉड मूवी देखी है उसमें एक डायलॉग बोला गया है कि यहां पर लोग इसमें की प्रेम ही नहीं हुई ईश्वर से डरे हुए भक्त ज्यादा रहते हैं तो इंसान और हमारी लाइफ में इतना स्वागत भर गया है और इतनी सारी चीजें या हमसे सब नहीं कर पाते तो जो जैसा बोलता है जैसी धारणाएं बनाता है हम मान लेते हैं और हम सी चीज में बैठकर चले जाते कि शायद ऐसा होगा तो यह सारी चीजें हमारी पूरी हो जाएगी किसी निहत्थे या नादान जब ऐसे ऐसे किसी चीज की बलि देकर कि कभी किसी के मनोकामना कैसे पूरी हो सकती है हां लोग पशुओं को मारकर की खाते हैं क्योंकि उसका उसकी वजह है कोचिंग हमारे सर कल ही वैसे बनाया गया है कि हम एक कुमार के सवाल लव स्टेटस जैसे बोला जाता है कि एक को मार करके एक खाएगा फिर दूसरे को मारकर की 30 लाख आएगा इसी तरीके से हारा की गोदी में हमारा एक वचन पूरा होता है पर बलि देने से किसी की मनोकामना पूरी कभी नहीं होती है और यह धारणा है जो लोगों के मन में एक वृक्ष की तरह पूरा रूट हो चुका है जिसको निकालना बहुत मुश्किल है और एक एक करके अगर हम इन सारी चीजों को समझना शुरू करें तो शायद धीरे-धीरे यह धरना शुरू
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देखिए शायद हम सभी आपके इस प्रश्न का उत्तर जानते हैं कि कभी भी किसी की हत्या करके या किसी की बलि देकर के कभी भी किसी की मनोकामना पूर्ण नहीं हो सकती लेकिन हमने अपने रीति रिवाज उस तरीके से बनाए हैं जो कि हमारे मस्तिष्क में एक पेड़ की तरह रूठ हो चुका है तो हम इसे जान कर भी मानना नहीं चाहते और ज्यादातर आप ने ओ माय गॉड मूवी देखी है उसमें एक डायलॉग बोला गया है कि यहां पर लोग इसमें की प्रेम ही नहीं हुई ईश्वर से डरे हुए भक्त ज्यादा रहते हैं तो इंसान और हमारी लाइफ में इतना स्वागत भर गया है और इतनी सारी चीजें या हमसे सब नहीं कर पाते तो जो जैसा बोलता है जैसी धारणाएं बनाता है हम मान लेते हैं और हम सी चीज में बैठकर चले जाते कि शायद ऐसा होगा तो यह सारी चीजें हमारी पूरी हो जाएगी किसी निहत्थे या नादान जब ऐसे ऐसे किसी चीज की बलि देकर कि कभी किसी के मनोकामना कैसे पूरी हो सकती है हां लोग पशुओं को मारकर की खाते हैं क्योंकि उसका उसकी वजह है कोचिंग हमारे सर कल ही वैसे बनाया गया है कि हम एक कुमार के सवाल लव स्टेटस जैसे बोला जाता है कि एक को मार करके एक खाएगा फिर दूसरे को मारकर की 30 लाख आएगा इसी तरीके से हारा की गोदी में हमारा एक वचन पूरा होता है पर बलि देने से किसी की मनोकामना पूरी कभी नहीं होती है और यह धारणा है जो लोगों के मन में एक वृक्ष की तरह पूरा रूट हो चुका है जिसको निकालना बहुत मुश्किल है और एक एक करके अगर हम इन सारी चीजों को समझना शुरू करें तो शायद धीरे-धीरे यह धरना शुरूDekhie Shayad Hum Sabhi Aapke Is Prashna Ka Uttar Jante Hain Ki Kabhi Bhi Kisi Ki Hatya Karke Ya Kisi Ki Bali Dekar Ke Kabhi Bhi Kisi Ki Manokamana Poorn Nahi Ho Sakti Lekin Humne Apne Riti Rivaaj Us Tarike Se Banaye Hain Jo Ki Hamare Mastishk Mein Ek Pedh Ki Tarah Rooth Ho Chuka Hai Toh Hum Ise Jaan Kar Bhi Manana Nahi Chahte Aur Jyadatar Aap Ne O My God Movie Dekhi Hai Usmein Ek Dialogue Bola Gaya Hai Ki Yahan Par Log Ismein Ki Prem Hi Nahi Hui Ishwar Se Dare Hue Bhakt Zyada Rehte Hain Toh Insaan Aur Hamari Life Mein Itna Swaagat Bhar Gaya Hai Aur Itni Saree Cheezen Ya Humse Sab Nahi Kar Paate Toh Jo Jaisa Bolta Hai Jaisi Dharnae Banata Hai Hum Maan Lete Hain Aur Hum Si Cheez Mein Baithkar Chale Jaate Ki Shayad Aisa Hoga Toh Yeh Saree Cheezen Hamari Puri Ho Jayegi Kisi Nihatthe Ya Nadan Jab Aise Aise Kisi Cheez Ki Bali Dekar Ki Kabhi Kisi Ke Manokamana Kaise Puri Ho Sakti Hai Haan Log Pashuo Ko Marakar Ki Khate Hain Kyonki Uska Uski Wajah Hai Coaching Hamare Sar Kal Hi Waise Banaya Gaya Hai Ki Hum Ek Kumar Ke Sawal Love Status Jaise Bola Jata Hai Ki Ek Ko Maar Karke Ek Khaega Phir Dusre Ko Marakar Ki 30 Lakh Aaega Isi Tarike Se Hara Ki Godi Mein Hamara Ek Vachan Pura Hota Hai Par Bali Dene Se Kisi Ki Manokamana Puri Kabhi Nahi Hoti Hai Aur Yeh Dharana Hai Jo Logon Ke Man Mein Ek Vriksh Ki Tarah Pura Root Ho Chuka Hai Jisko Nikalna Bahut Mushkil Hai Aur Ek Ek Karke Agar Hum In Saree Chijon Ko Samajhna Shuru Karein Toh Shayad Dhire Dhire Yeh Dharna Shuru
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आपने पूछा है कि पशु की बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण हो जाती है बिल्कुल नहीं आज के युग में ऐसा बिल्कुल नहीं माना जाता है कि पशु की बलि देने से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होती है लेकिन इंसान अपनी खोज चालू रखता है उसी तरह कुछ इंसान जो पुरानी खोजो है उस पर भरोसा करके पुराने करते हैं और कहते हैं कि कोई बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण होती है और कहीं-कहीं पर उन्होंने पढ़ा है पुस्तक किसने लिखी है कब लिखी है किस परिवेश में लिखी है उसका कोई ज्ञान नहीं होता है लोगों को लेकिन सिर्फ लिखी हुई चीजें सुनकर किसी के द्वारा और यह फॉलो करते हैं इसीलिए वह सोचते हैं कि बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण हो जाती है लेकिन कानून और विज्ञान यह चीज को नहीं मानता
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आपने पूछा है कि पशु की बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण हो जाती है बिल्कुल नहीं आज के युग में ऐसा बिल्कुल नहीं माना जाता है कि पशु की बलि देने से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होती है लेकिन इंसान अपनी खोज चालू रखता है उसी तरह कुछ इंसान जो पुरानी खोजो है उस पर भरोसा करके पुराने करते हैं और कहते हैं कि कोई बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण होती है और कहीं-कहीं पर उन्होंने पढ़ा है पुस्तक किसने लिखी है कब लिखी है किस परिवेश में लिखी है उसका कोई ज्ञान नहीं होता है लोगों को लेकिन सिर्फ लिखी हुई चीजें सुनकर किसी के द्वारा और यह फॉलो करते हैं इसीलिए वह सोचते हैं कि बलि देने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण हो जाती है लेकिन कानून और विज्ञान यह चीज को नहीं मानताAapne Puchha Hai Ki Pashu Ki Bali Dene Se Manushya Ki Manokamana Poorn Ho Jati Hai Bilkul Nahi Aaj Ke Yug Mein Aisa Bilkul Nahi Mana Jata Hai Ki Pashu Ki Bali Dene Se Apni Manokamnaen Poorn Hoti Hai Lekin Insaan Apni Khoj Chalu Rakhta Hai Usi Tarah Kuch Insaan Jo Purani Khojo Hai Us Par Bharosa Karke Purane Karte Hain Aur Kehte Hain Ki Koi Bali Dene Se Manushya Ki Manokamana Poorn Hoti Hai Aur Kahin Kahin Par Unhone Padha Hai Pustak Kisne Likhi Hai Kab Likhi Hai Kis Parivesh Mein Likhi Hai Uska Koi Gyaan Nahi Hota Hai Logon Ko Lekin Sirf Likhi Hui Cheezen Sunkar Kisi Ke Dwara Aur Yeh Follow Karte Hain Isliye Wah Sochte Hain Ki Bali Dene Se Manushya Ki Manokamana Poorn Ho Jati Hai Lekin Kanoon Aur Vigyan Yeh Cheez Ko Nahi Manata
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे नहीं लगता कि पशु की बलि देने से किसी मनुष्य की मनोकामना पूरी पूरी हो जाती है लोक से धर्म के नाम पर जानवरों पशु की बलि देते देते हैं देते आ रहे हैं पहले से और चीजों को फॉलो करते आ रहे तू भी कर लेकिन मनोकामना पूर्ण करने के लिए किसी भी जानवर की हत्या कर देना किसी भी गाड़ी देखनी है मुझे
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मुझे नहीं लगता कि पशु की बलि देने से किसी मनुष्य की मनोकामना पूरी पूरी हो जाती है लोक से धर्म के नाम पर जानवरों पशु की बलि देते देते हैं देते आ रहे हैं पहले से और चीजों को फॉलो करते आ रहे तू भी कर लेकिन मनोकामना पूर्ण करने के लिए किसी भी जानवर की हत्या कर देना किसी भी गाड़ी देखनी है मुझेMujhe Nahi Lagta Ki Pashu Ki Bali Dene Se Kisi Manushya Ki Manokamana Puri Puri Ho Jati Hai Lok Se Dharam Ke Naam Par Jaanvaro Pashu Ki Bali Dete Dete Hain Dete Aa Rahe Hain Pehle Se Aur Chijon Ko Follow Karte Aa Rahe Tu Bhi Kar Lekin Manokamana Poorn Karne Ke Liye Kisi Bhi Janwar Ki Hatya Kar Dena Kisi Bhi Gaadi Dekhani Hai Mujhe
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