कैसे हमारी तेजी से लुप्त होती संस्कृति, भाषा और विचारों को बचाया जा सकता है? ...

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PK हमारी तेजी से लुप्त होती संस्कृति भाषा और विचारों को बचाने का सिर्फ एक ही तरीका है आजकल हमारे अंदर क्या चीज खुशी हुई है कि बच्चा पैदा होता है और उससे बचपन से 1 फीट करना शुरू कर देते हैं कि बेटा अंग...जवाब पढ़िये
PK हमारी तेजी से लुप्त होती संस्कृति भाषा और विचारों को बचाने का सिर्फ एक ही तरीका है आजकल हमारे अंदर क्या चीज खुशी हुई है कि बच्चा पैदा होता है और उससे बचपन से 1 फीट करना शुरू कर देते हैं कि बेटा अंग्रेजी में बात करो अंग्रेजी ही तरीके से रहो अंग्रेजी तरीके से खाना खाओ छुरी कांटे का प्रयोग करो कि हमारी भारतीय संस्कृति में नहीं है और जैसा बच्चों को बचपन से समझाया जाता सिखाया जाता है वह वैसा ही करता है उसके विचार भी ऐसे ही हो जाते हैं भारतीय संस्कृति और भारतीय दर्शन स्कूल लेना देना ही नहीं बचता है तो जो चीज हम कर सकते हैं वह तरीके से बोलिए कि अपने बच्चों को अपने छोटों को अपने ऑफिस वालों को भी यह सब सिखाना बंद करो ठीक है इंग्लिश लैंग्वेज इंपॉर्टेंट है उसमें कोई डाउट नहीं है लेकिन वह सिर्फ ऐसा नहीं उसकी मैं सर्वाइवल पॉसिबल नहीं है सर्वाइवल पॉपुलेशन अच्छा काम पानी के लिए अच्छी कोशिश करने के लिए ही यह सब सीख सकते हैं लेकिन बिना इस के भी काम चल सकता है तो यह सब चीजें सिखाना बंद करेंPK Hamari Teji Se Lupt Hoti Sanskriti Bhasha Aur Vicharon Ko Bachane Ka Sirf Ek Hi Tarika Hai Aajkal Hamare Andar Kya Cheez Khushi Hui Hai Ki Baccha Paida Hota Hai Aur Usse Bachpan Se 1 Feet Karna Shuru Kar Dete Hain Ki Beta Angrezi Mein Baat Karo Angrezi Hi Tarike Se Raho Angrezi Tarike Se Khana Khao Chhuri Kante Ka Prayog Karo Ki Hamari Bharatiya Sanskriti Mein Nahi Hai Aur Jaisa Bacchon Ko Bachpan Se Samjhaya Jata Sikhaya Jata Hai Wah Waisa Hi Karta Hai Uske Vichar Bhi Aise Hi Ho Jaate Hain Bharatiya Sanskriti Aur Bharatiya Darshan School Lena Dena Hi Nahi Bachta Hai To Jo Cheez Hum Kar Sakte Hain Wah Tarike Se Bolie Ki Apne Bacchon Ko Apne Choton Ko Apne Office Walon Ko Bhi Yeh Sab Sikhaana Band Karo Theek Hai English Language Important Hai Usamen Koi Doubt Nahi Hai Lekin Wah Sirf Aisa Nahi Uski Main Survival Possible Nahi Hai Survival Population Accha Kaam Pani Ke Liye Acchi Koshish Karne Ke Liye Hi Yeh Sab Seekh Sakte Hain Lekin Bina Is Ke Bhi Kaam Chal Sakta Hai To Yeh Sab Cheezen Sikhaana Band Karen
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वर्तमान के समय की जो भेजी है उसे हमारी जो संस्कृति है भाषा है जो हमारे विचार हैं उनको लुप्त होने से कैसे बचाया जा सकता है तो मुझे लगता है देखिए और आज कल के फास्ट वर्ल्ड में तेजी से जो चल रहा है समय उस...जवाब पढ़िये
वर्तमान के समय की जो भेजी है उसे हमारी जो संस्कृति है भाषा है जो हमारे विचार हैं उनको लुप्त होने से कैसे बचाया जा सकता है तो मुझे लगता है देखिए और आज कल के फास्ट वर्ल्ड में तेजी से जो चल रहा है समय उसको में हमारे जो संस्कार हमारी भाषा है और संस्कृति है उनको बचाने के लिए हमें थोड़ा सा रुकना होगा और यह चीजें सोच रही होंगी कि हमारे आसपास जो हो रहा है तुम्हारी संस्कृति थी वह क्यों हो रही है उसके अलावा और के हमारे इस समय पूरे समय में मनचाहे पूरे साल का समय हो पूरे महीने का समय हो इसमें कई बार एसोसिएशन आते हैं इसलिए आप समय समय आता है जब आप थोड़ा सा रुक कर अपनी पूरी जिंदगी से थोड़ा सा रुक कर अपने लिए अपने परिवार के लिए अपनी संस्कृति के लिए वक्त निकाल सकते हैं और कोशिश करें कि उस वक्त मैं आपको जो आप की संस्कृति है जो आपके विचार हैं वह अच्छे कर सकें अपने आसपास के लोगों के साथ बैठ सकें अपने और स्टारों के साथ अपने परिवार जनों के साथ बैठे ताकि जो चीजें हमारी जिंदगी से लुप्त होती जा रही हैं उन को बचाया जा सकेVartaman Ke Samay Ki Jo Bheji Hai Use Hamari Jo Sanskriti Hai Bhasha Hai Jo Hamare Vichar Hain Unko Lupt Hone Se Kaise Bachaya Ja Sakta Hai To Mujhe Lagta Hai Dekhie Aur Aaj Kal Ke Fast World Mein Teji Se Jo Chal Raha Hai Samay Usko Mein Hamare Jo Sanskar Hamari Bhasha Hai Aur Sanskriti Hai Unko Bachane Ke Liye Hume Thoda Sa Rukna Hoga Aur Yeh Cheezen Soch Rahi Hongi Ki Hamare Aaspass Jo Ho Raha Hai Tumhari Sanskriti Thi Wah Kyon Ho Rahi Hai Uske Alava Aur Ke Hamare Is Samay Poore Samay Mein Manchahe Poore Saal Ka Samay Ho Poore Mahine Ka Samay Ho Isme Kai Baar Association Aate Hain Isliye Aap Samay Samay Aata Hai Jab Aap Thoda Sa Ruk Kar Apni Puri Zindagi Se Thoda Sa Ruk Kar Apne Liye Apne Parivar Ke Liye Apni Sanskriti Ke Liye Waqt Nikal Sakte Hain Aur Koshish Karen Ki Us Waqt Main Aapko Jo Aap Ki Sanskriti Hai Jo Aapke Vichar Hain Wah Acche Kar Saken Apne Aaspass Ke Logon Ke Saath Baith Saken Apne Aur Staron Ke Saath Apne Parivar Jano Ke Saath Baithey Taki Jo Cheezen Hamari Zindagi Se Lupt Hoti Ja Rahi Hain Un Ko Bachaya Ja Sake
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लेकिन निश्चित तौर पर हमारी संस्कृति हमारी भाषा विचार संस्कारी ऐसी चीजें हैं जो लगातार लेट होती जा रही है जो नई जनरेशन है उनके संगीत इज़्ज़त होती जा रही है उसको बहुत बड़ी वजह है कि देखिए लो पहले के समय...जवाब पढ़िये
लेकिन निश्चित तौर पर हमारी संस्कृति हमारी भाषा विचार संस्कारी ऐसी चीजें हैं जो लगातार लेट होती जा रही है जो नई जनरेशन है उनके संगीत इज़्ज़त होती जा रही है उसको बहुत बड़ी वजह है कि देखिए लो पहले के समय में इन चीजों को मानते थे इन चीजों को बहुत संभाल के रखते थे एक धरोहर के तौर पर ने आगे बढ़ाते थे उनके परिवार के दो बच्चे हैं वह सीख लेते थे लेकिन स्थितियां वहीं आकर अटक गई है लोगों को उन चीजों में रूचि नहीं रहे लोगों ने अपने कंफर्ट जोन के हिसाब से चीजों का अनुवाद कर दिया है चीज़ों को ठान लिया है तो उसी कारण जीजा आगे नहीं बढ़ रही है क्योंकि उन को आगे ले जाया नहीं जा रहा है तो निश्चित तौर पर से जरूरी है इन चीजों को दोबारा ताजा किया जाए इनको अवेयरनेस फैलाई जा लोगों को ज्ञान हो कि जो संस्कृति है भाषाएं विचार है इसका कितना अनूठा महत्व है कितना इसका भी एक अलग ही मजा है उसको सांस जब तक नहीं हो तब तक स्थितियां मतलबLekin Nishchit Taur Par Hamari Sanskriti Hamari Bhasha Vichar Sanskari Aisi Cheezen Hain Jo Lagatar Let Hoti Ja Rahi Hai Jo Nayi Generation Hai Unke Sangeet Ijjat Hoti Ja Rahi Hai Usko Bahut Badi Wajah Hai Ki Dekhie Lo Pehle Ke Samay Mein In Chijon Ko Manate The In Chijon Ko Bahut Sambhaal Ke Rakhate The Ek Dharohar Ke Taur Par Ne Aage Badhate The Unke Parivar Ke Do Bacche Hain Wah Seekh Lete The Lekin Sthitiyan Wahin Aakar Atak Gayi Hai Logon Ko Un Chijon Mein Ruchi Nahi Rahe Logon Ne Apne Confort Joan Ke Hisab Se Chijon Ka Anuvad Kar Diya Hai Chizon Ko Than Liya Hai To Ussi Kaaran Jija Aage Nahi Badh Rahi Hai Kyonki Un Ko Aage Le Jaaya Nahi Ja Raha Hai To Nishchit Taur Par Se Zaroori Hai In Chijon Ko Dobara Taaza Kiya Jaye Inko Awareness Failai Ja Logon Ko Gyaan Ho Ki Jo Sanskriti Hai Bhashayen Vichar Hai Iska Kitna Anutha Mahatva Hai Kitna Iska Bhi Ek Alag Hi Maza Hai Usko Saans Jab Tak Nahi Ho Tab Tak Sthitiyan Matlab
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कोई भी शक नहीं है कि हमारे देश की शान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है लोग आजकल वेस्टर्न कल्चर को बहुत ज्यादा ऐड करें और मुझे लगता है इस बात में कोई काम नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति का प्रचार-प्रसार होना...जवाब पढ़िये
कोई भी शक नहीं है कि हमारे देश की शान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है लोग आजकल वेस्टर्न कल्चर को बहुत ज्यादा ऐड करें और मुझे लगता है इस बात में कोई काम नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति का प्रचार-प्रसार होना चाहिए आप दिल की बहुत साफ और नर है जो हमारे देश की संस्कृति को एक्सेप्ट कर रहे हैं उसको गले लगा रहे हैं आप दे कि कभी मथुरा चाहिए तो महान मथुरा में दिखी किस प्रकार फॉरेनर्स यहां के स्पेशल हो जाते हैं किस प्रकार भजनों में एकदम खो जाते हैं तो कहीं नहीं दिखाता है कि हिंदुस्तान के लोग तो जरूर इंडियन संस्कृति को भूलते जा रहे लोग हैं अपनी भाषा सभ्यता को दूर रखे हुए साथ में इंडियन सभ्यता को भी ऐड कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि इसका सबसे अच्छा तरीका यही है कि स्कूल स्तर से यानी स्कूल से हमारी संस्कृति के बारे में प्रचार प्रसार होना जरूरी है क्योंकि जब तक हम स्कूल में चीज को नहीं डालेंगे तब तक नहीं हो पाएगा क्योंकि मुझे लगता है चाहे वह कान्वेंट स्कूलों शिशु मंदिर हो चाहे किसी भी प्रकार का राज्य सरकार का या केंद्र सरकार का स्कूल और नवोदय हो हर स्कूल में कम से कम एक लेक्चर शुरू से लेकर आया नहीं फल फल से लेकर 12 तक एक इंडियन कल्चर के ऊपर होना चाहिए ताकि लोग इस देश की संस्कृति को समझें उसको उसकी वैल्यू को समझें और इस देश की संस्कृति का प्रचार-प्रसारKoi Bhi Shaq Nahi Hai Ki Hamare Desh Ki Shan Dhire Dhire Khatam Hoti Ja Rahi Hai Log Aajkal Western Culture Ko Bahut Jyada Aid Karen Aur Mujhe Lagta Hai Is Baat Mein Koi Kaam Nahi Hai Lekin Hamari Sanskriti Ka Prachar Prasaar Hona Chahiye Aap Dil Ki Bahut Saaf Aur Nar Hai Jo Hamare Desh Ki Sanskriti Ko Except Kar Rahe Hain Usko Gale Laga Rahe Hain Aap De Ki Kabhi Mathura Chahiye To Mahaan Mathura Mein Dikhi Kis Prakar Foreigners Yahan Ke Special Ho Jaate Hain Kis Prakar Bhajanon Mein Ekdam Kho Jaate Hain To Kahin Nahi Dikhaata Hai Ki Hindustan Ke Log To Jarur Indian Sanskriti Ko Bhultey Ja Rahe Log Hain Apni Bhasha Sabhyata Ko Dur Rakhe Huye Saath Mein Indian Sabhyata Ko Bhi Aid Kar Rahe Hain To Mujhe Lagta Hai Ki Iska Sabse Accha Tarika Yahi Hai Ki School Sthar Se Yani School Se Hamari Sanskriti Ke Bare Mein Prachar Prasaar Hona Zaroori Hai Kyonki Jab Tak Hum School Mein Cheez Ko Nahi Daalenge Tab Tak Nahi Ho Payega Kyonki Mujhe Lagta Hai Chahe Wah Kanwent Schoolon Shishu Mandir Ho Chahe Kisi Bhi Prakar Ka Rajya Sarkar Ka Ya Kendra Sarkar Ka School Aur Navodaya Ho Har School Mein Kam Se Kam Ek Lecture Shuru Se Lekar Aaya Nahi Fal Fal Se Lekar 12 Tak Ek Indian Culture Ke Upar Hona Chahiye Taki Log Is Desh Ki Sanskriti Ko Samajhe Usko Uski Value Ko Samajhe Aur Is Desh Ki Sanskriti Ka Prachar Prasaar
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यह सही है कि आज हमारे देश की संस्कृति और भाषा और जो पुराने विचार थे जो प्राचीन सभ्यता थी वह खत्म होती जा रही है लुप्त होती जा रही है और उसे बचाने के लिए कोशिशें हमें ही करनी पड़ेगी अगर हम कोशिश करेंगे...जवाब पढ़िये
यह सही है कि आज हमारे देश की संस्कृति और भाषा और जो पुराने विचार थे जो प्राचीन सभ्यता थी वह खत्म होती जा रही है लुप्त होती जा रही है और उसे बचाने के लिए कोशिशें हमें ही करनी पड़ेगी अगर हम कोशिश करेंगे तो शायद हमें नहीं बचा पाएंगे और अगली पीढ़ियों तक उनका थोड़ा बहुत अंश शायद उन तक पहुंचा पाएंगे संस्कृति की पहचान उसकी भाषा से होती है और हम अपनी भाषा को ही आज भूलते जा रहे हैं हम जिस क्षेत्र में रहते हैं उस भाषा को बोलने में हमें शर्म महसूस होती है जैसे अगर हम राजस्थान में रहते हैं तो हम राजस्थानी नहीं बोलते हम हिंदी और इंग्लिश ज्यादा प्रयोग में लाते हैं लेकिन हमें अपनी भाषा अपने घर में बोलनी चाहिए अपने बच्चों को सिखाने चाहिए और अपनी भाषा को गर्व से बोलना चाहिए ताकि लोग भी हमारी भाषा को सुनकर समझ सके कि हम राजस्थानी है इसी तरह से हमारी वेशभूषा हमारा खान-पान हमारी संस्कृति की झलक देता है उन्हें भी हमने काफी चेंजेस लाए हैं आज हमारा पहनावा तो बतला ही है साथ ही साथ हमारा खान-पान भी बदल गया है हम पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते अपने खानपान में भी उसे अपनाने लगे हैं जो हमारा खान-पान था शुद्ध और सात्विक और शाकाहारी वह कहीं गुम हो गया है और आज हम लोग क्यों नहीं करेगा खाना बन रहा है जिसमें पिज़्ज़ा ब्रेड यह ज्यादा है और जिसमें मेला जाता है जिसको नुकसानदायक माना जाता है वह हम ज्यादा खा रहे हैं तो हमें उस को बचाना होगा घर में हमें अपना रात्रि भोजन बनाकर बच्चों को सिखाना होगा कि खाना चाहिए और पहनावे पर भी उन्हें बताना होगा कि यह पहनावा उसके लिए सही है इस तरह की छोटी-छोटी कोशिशों से हम अपनी संस्कृति और विचारों को बचा सकते हैंYeh Sahi Hai Ki Aaj Hamare Desh Ki Sanskriti Aur Bhasha Aur Jo Purane Vichar The Jo Prachin Sabhyata Thi Wah Khatam Hoti Ja Rahi Hai Lupt Hoti Ja Rahi Hai Aur Use Bachane Ke Liye Koshishen Hume Hi Karni Padegi Agar Hum Koshish Karenge To Shayad Hume Nahi Bacha Paenge Aur Agli Peedhiyon Tak Unka Thoda Bahut Ansh Shayad Un Tak Pahuncha Paenge Sanskriti Ki Pehchaan Uski Bhasha Se Hoti Hai Aur Hum Apni Bhasha Ko Hi Aaj Bhultey Ja Rahe Hain Hum Jis Kshetra Mein Rehte Hain Us Bhasha Ko Bolne Mein Hume Sharm Mahsus Hoti Hai Jaise Agar Hum Rajasthan Mein Rehte Hain To Hum Rajasthani Nahi Bolte Hum Hindi Aur English Jyada Prayog Mein Late Hain Lekin Hume Apni Bhasha Apne Ghar Mein Bolani Chahiye Apne Bacchon Ko Sikhane Chahiye Aur Apni Bhasha Ko Garv Se Bolna Chahiye Taki Log Bhi Hamari Bhasha Ko Sunkar Samajh Sake Ki Hum Rajasthani Hai Isi Tarah Se Hamari Veshbhoosha Hamara Khan Pan Hamari Sanskriti Ki Jhalak Deta Hai Unhen Bhi Humne Kafi Changes Laye Hain Aaj Hamara Pahanava To BATLA Hi Hai Saath Hi Saath Hamara Khan Pan Bhi Badal Gaya Hai Hum Pashchayat Sanskriti Ko Apanate Apne Khanpan Mein Bhi Use Apnane Lage Hain Jo Hamara Khan Pan Tha Shudh Aur Satvik Aur Sakahari Wah Kahin Gum Ho Gaya Hai Aur Aaj Hum Log Kyon Nahi Karega Khana Ban Raha Hai Jisme Pizza Bred Yeh Jyada Hai Aur Jisme Mela Jata Hai Jisko Nukasanadayak Mana Jata Hai Wah Hum Jyada Kha Rahe Hain To Hume Us Ko Bachaana Hoga Ghar Mein Hume Apna Ratri Bhojan Banakar Bacchon Ko Sikhaana Hoga Ki Khana Chahiye Aur Pahnawe Par Bhi Unhen Batana Hoga Ki Yeh Pahanava Uske Liye Sahi Hai Is Tarah Ki Choti Choti Koshishon Se Hum Apni Sanskriti Aur Vicharon Ko Bacha Sakte Hain
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यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी संस्कृति भाषा और अपने मूलभूत विचारों को काफी पीछे छोड़ देगा इसी में वह कल इंडिया जैसे कुछ माध्यम है जो ऐसे सभी लोगों को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है जो भाष...जवाब पढ़िये
यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी संस्कृति भाषा और अपने मूलभूत विचारों को काफी पीछे छोड़ देगा इसी में वह कल इंडिया जैसे कुछ माध्यम है जो ऐसे सभी लोगों को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है जो भाषा संस्कृति और विचारों का महत्व समझते मुझे लगता है कि इस से बचाने का जो सबसे अच्छा माध्यम है उसकी शुरूआत हम खुद ही करें हमें जब कभी भी मौका मिले हम अपनी भाषा को बोलने से ना डरें अपनी संस्कृति के बारे में बताएं उम्मीद है कि आने वाली जो पीढ़ियां है उन्हें भी अपनी संस्कृति के बारे में पता होगाYeh Bahut Durbhagya Ki Baat Hai Ki Hum Apni Sanskriti Bhasha Aur Apne Mulbhut Vicharon Ko Kafi Piche Chod Dega Isi Mein Wah Kal India Jaise Kuch Maadhyam Hai Jo Aise Sabhi Logon Ko Ek Saath Jodne Ka Prayas Kar Rahi Hai Jo Bhasha Sanskriti Aur Vicharon Ka Mahatva Samajhte Mujhe Lagta Hai Ki Is Se Bachane Ka Jo Sabse Accha Maadhyam Hai Uski Shuruat Hum Khud Hi Karen Hume Jab Kabhi Bhi Mauka Mile Hum Apni Bhasha Ko Bolne Se Na Darein Apni Sanskriti Ke Bare Mein Bataen Ummid Hai Ki Aane Wali Jo Peedhiyaan Hai Unhen Bhi Apni Sanskriti Ke Bare Mein Pata Hoga
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हमारे देश की संस्कृति और भाषा और विचार एक ही विषय होते जा रहे हैं क्योंकि आज हम अपनी भाषा को बोलने से कतराते हैं अकरम राजस्थानी है तुम राजस्थानी नहीं बोलते बल्कि हिंदी और इंग्लिश पर हमारा जाता + रहता ...जवाब पढ़िये
हमारे देश की संस्कृति और भाषा और विचार एक ही विषय होते जा रहे हैं क्योंकि आज हम अपनी भाषा को बोलने से कतराते हैं अकरम राजस्थानी है तुम राजस्थानी नहीं बोलते बल्कि हिंदी और इंग्लिश पर हमारा जाता + रहता है इसी तरह से जब हमें अपने स्थानीय भाषाओं को प्रयोग में नहीं लाते हैं और बोलचाल में उनका प्रयोग नहीं करते हैं तो हमारी आने वाली जनरेशन है वह भी इस भाषा को नहीं जानती है नहीं समझती हो नहीं बोलती है और किसी भी देश के लिए उसकी संस्कृति को बनाए रखने के लिए वहां की भाषा का = प्रयुक्त होना बहुत जरूरी है तो हमें अपनी जो स्थानीय भाषा है उसको बोलचाल में रखना चाहिए और उसको बोलना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी वह भाषा समझे सुनें और बोले इसी तरह से हमारा जो पहना हुआ है हम जो पहनते सतीश में हम रहते हैं उधर सभी तरह का हमारे देश में अलग-अलग पहना हुआ है अलग-अलग खानपान है उसका हमें = उपयोग करना चाहिए हमें उन वेशभूषाओं को समय-समय पर पहनना चाहिए और हमारे जो खानपान हैं जो सदियों से हमारे प्रदेशों में अलग-अलग तरह के खानपान मशहूर है उन्हें हमें ऊपर रखना चाहिए और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बारे में बताना चाहिए उन्हें बराबर बना कर खिलाना चाहिए ताकि उन्हें उनका स्वास्थ बताओ और वह भी उनको आगे चलकर बनाने आगे बढ़ाएं तू खान पान वेशभूषा भाषा और हमारे जो विचार हैं वह अगर हम आगे की पीढ़ी तक नहीं पहुंच जाएंगे तो हम तक ही सीमित रह जाएंगे जैसे हमारे पूर्वजों ने हम को दिखाया वैसे ही हमें भी अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह सारी चीजें सिखानी चाहिए तभी यह जीवित रहेगी और आगे तकHamare Desh Ki Sanskriti Aur Bhasha Aur Vichar Ek Hi Vishay Hote Ja Rahe Hain Kyonki Aaj Hum Apni Bhasha Ko Bolne Se Katrate Hain Akaram Rajasthani Hai Tum Rajasthani Nahi Bolte Balki Hindi Aur English Par Hamara Jata + Rehta Hai Isi Tarah Se Jab Hume Apne Sthaniye Bhashaon Ko Prayog Mein Nahi Late Hain Aur Bolchal Mein Unka Prayog Nahi Karte Hain To Hamari Aane Wali Generation Hai Wah Bhi Is Bhasha Ko Nahi Jaanti Hai Nahi Samajhti Ho Nahi Bolti Hai Aur Kisi Bhi Desh Ke Liye Uski Sanskriti Ko Banaye Rakhne Ke Liye Wahan Ki Bhasha Ka = Prayukt Hona Bahut Zaroori Hai To Hume Apni Jo Sthaniye Bhasha Hai Usko Bolchal Mein Rakhna Chahiye Aur Usko Bolna Chahiye Taki Hamari Aane Wali Peedhiyaan Bhi Wah Bhasha Samjhe Sunen Aur Bole Isi Tarah Se Hamara Jo Pahana Hua Hai Hum Jo Pehente Satish Mein Hum Rehte Hain Udhar Sabhi Tarah Ka Hamare Desh Mein Alag Alag Pahana Hua Hai Alag Alag Khanpan Hai Uska Hume = Upyog Karna Chahiye Hume Un Veshbhooshaaon Ko Samay Samay Par Pahanna Chahiye Aur Hamare Jo Khanpan Hain Jo Sadiyon Se Hamare Pradeshon Mein Alag Alag Tarah Ke Khanpan Mashoor Hai Unhen Hume Upar Rakhna Chahiye Aur Apni Aane Wali Peedhiyon Ko Bhi Unke Bare Mein Batana Chahiye Unhen Barabar Bana Kar Khilana Chahiye Taki Unhen Unka Svasth Batao Aur Wah Bhi Unko Aage Chalkar Banane Aage Badhaye Tu Khan Pan Veshbhoosha Bhasha Aur Hamare Jo Vichar Hain Wah Agar Hum Aage Ki Pidhi Tak Nahi Pahunch Jaenge To Hum Tak Hi Simith Rah Jaenge Jaise Hamare Purwaajon Ne Hum Ko Dikhaya Waise Hi Hume Bhi Apni Aane Wali Peedhiyon Ko Yeh Saree Cheezen Shikhaani Chahiye Tabhi Yeh Jeevit Rahegi Aur Aage Tak
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