क्यों अधिकतर नागरिक यह नहीं समझ पाते है कि राजनीति को धर्म के नजरिये से देखना देश के लिए हानिकारक है? ...

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बेटे तुम बहुत बुद्धिमान तुमने सही कहा है इस देश के नागरिक भी समझने लग जाए दाग धंधे राजनीतिज्ञों की गंदी नजर लग जाए क्योंकि यह धर्म जाति की राजनीति हमारे देश को बहुत हानिकारक है देश की एकता का विकास बह...
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बेटे तुम बहुत बुद्धिमान तुमने सही कहा है इस देश के नागरिक भी समझने लग जाए दाग धंधे राजनीतिज्ञों की गंदी नजर लग जाए क्योंकि यह धर्म जाति की राजनीति हमारे देश को बहुत हानिकारक है देश की एकता का विकास बहुत बड़ी पाठक राष्ट्रीय को बहुत बड़ी हानि पहुंचा रही है हम लोग विभिन्न समाजों में विभिन्न धर्मों में विभिन्न खेलों में बैठे हुए हैं जिससे हम जो हमारे देश के लिए बड़ा हानिकारक है कहां किस देश के नागरिक नेपाली साइड हो जाएं समझ जाएं और राजनीतिज्ञ गंदी राजनीति पार्टियों को समझा दें कि आप धर्म और जाति की राजनीति ना करें देश हमारा को बहुत नुकसान होता है देश को यह लोग अपने आप ऐसे समझ जाएंगे बिल्कुल सीधे हो जाएंगे लेकिन दुर्भाग्य कभी अपना व्यक्तिगत स्वार्थों में फंसे हुए चुनावों के लिए धर्म जाति की राजनीति के उनके अखंड हो जाते हैं और परिणाम स्वरुप यह लोग अपनी गंदी राजनीति को फैलाए हुए हैं और देश निरंतर बढ़ता जा रहा है क्या की उम्र बढ़ता जा रहा है परमं बढ़ता जा रहा है एक पंख संघर्ष कर रहा है एक का नष्ट होती जा रही है कांग्रेस की कितनी सीटें आएंगी फिल्म गंदी राजनीति विज्ञान को और तकदीर राजनीति पार्टियों से मुक्ति मिल जाएगी और वह स्थान प्राप्त कर सकेगा
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लेकिन सबसे पहले एक बात मैं आपको पता था कि राजनीति जो है इतनी आसान नहीं है जो आम आदमी की समझ में आ जाए अगर यह की आसान होती हर कोई राजा नहीं बन जाता स्टेज में खड़ा हुआ आदमी जब माइक में कोई भाषण देता है...
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लेकिन सबसे पहले एक बात मैं आपको पता था कि राजनीति जो है इतनी आसान नहीं है जो आम आदमी की समझ में आ जाए अगर यह की आसान होती हर कोई राजा नहीं बन जाता स्टेज में खड़ा हुआ आदमी जब माइक में कोई भाषण देता है और नीचे जनता बैठी रहती है उस वक्त में भी यही सोचता है कि जितने लोग नीचे बैठे हैं सब बेवकूफ है और इसी बात का फायदा जो बड़े-बड़े नेता है वह धर्म के नाम पर उठाते हैं लोगों को फल खाते हैं आम आदमी अपने मजहब को पढ़ा ही नहीं किताबों की तरह की कि नहीं किया है और वो बिचारा उस चीज में फंस जाता है वह जैसा बताते हैं वह वैसा करने लगता हूं को फॉलो करने लगता है और बेशक यह चीजें जो है यह देश के लिए हानिकारक है जब तक हर नागरिक अपने मजहब के बारे में या इतना शिक्षित तो हो कुछ तो सही और गलत में फर्क पता हो तो मेरे नजरिए से यह देश को बर्बादी की तरफ ले जाने का एक तरीका यह राजनीति है अगर आप चुनाव में खड़े होते हैं तो आपकी काबिलियत आप को वोट दिलवा दी है जवाब धर्म का नाम लेकर वोट मांगते हैं तो इससे यही पता चलता है कि आप के अंदर में क्या नीति चल रही है मगर आम आदमी को जब तू पैसा देते हैं तो वह सब भूल जाते हैं उन्हें नाथम से मतलब होता नहीं इंसानों सा मतलब होता है मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इस से देश को नुकसान है और इंसान को इसमें विचार करना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं वोट सोच समझ कर दें हम शिक्षित इंसान को जो जो समझदार कसम का हो
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देखें हर व्यक्ति इस बात को समझ आता है कि राजनीति को अगर धर्म के चश्मे से देखेंगे तो यह देश के लिए हानिकारक है समाज को तोड़ने का काम करती है देश को एक बर्बादी के रास्ते की तरफ ले जाती है समाज बढ़ जाता ...
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देखें हर व्यक्ति इस बात को समझ आता है कि राजनीति को अगर धर्म के चश्मे से देखेंगे तो यह देश के लिए हानिकारक है समाज को तोड़ने का काम करती है देश को एक बर्बादी के रास्ते की तरफ ले जाती है समाज बढ़ जाता है सांप्रदायिक उन्माद उत्पन्न होता है लेकिन हर व्यक्ति जानता है राजनीतिक व्यक्ति इस बात को जानता है लेकिन फिर भी इस चीज का फायदा जरूर उठाया जाता है क्योंकि उनको पता है जो राजनीति का मैं साम दाम दंड भेद हर चीज चलती है तो सत्ता प्राप्त करने के लिए हमारे देश के लीडर को देश को बेच सकते हैं तो यह मुझे नहीं लगता कि धर्म कितना बड़ा हो जाएगा देश के सामने सबसे बड़ा कुछ भी नहीं हो सकता धर्म जात कुछ भी नहीं लेकिन हमारे देश के नेताओं के लिए सप्ताह से बड़ा कुछ भी नहीं हैDekhen Har Vyakti Is Baat Ko Samajh Aata Hai Ki Rajneeti Ko Agar Dharm Ke Chashme Se Dekhenge To Yeh Desh Ke Liye Haanikarak Hai Samaaj Ko Todne Ka Kaam Karti Hai Desh Ko Ek Barbadi Ke Raste Ki Taraf Le Jati Hai Samaaj Badh Jata Hai Sampradayik Unmaad Utpann Hota Hai Lekin Har Vyakti Jaanta Hai Rajnitik Vyakti Is Baat Ko Jaanta Hai Lekin Phir Bhi Is Cheez Ka Fayda Jarur Uthaya Jata Hai Kyonki Unko Pata Hai Jo Rajneeti Ka Main Saam Dam Dand Bhed Har Cheez Chalti Hai To Satta Prapt Karne Ke Liye Hamare Desh Ke Leader Ko Desh Ko Bech Sakte Hain To Yeh Mujhe Nahi Lagta Ki Dharm Kitna Bada Ho Jayega Desh Ke Samane Sabse Bada Kuch Bhi Nahi Ho Sakta Dharm Jaat Kuch Bhi Nahi Lekin Hamare Desh Ke Netaon Ke Liye Saptah Se Bada Kuch Bhi Nahi Hai
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हमारे देश धर्म प्रधान देश है और धर्म को हमारे देश में बहुत ज्यादा माना जाता है और धर्म को मानने के साथ ही साथ हमारे देश में धर्म से डर भी लोग हैं कि अगर उन्होंने धर्म के अनुसार कार्य नहीं किए तो उन्हे...
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हमारे देश धर्म प्रधान देश है और धर्म को हमारे देश में बहुत ज्यादा माना जाता है और धर्म को मानने के साथ ही साथ हमारे देश में धर्म से डर भी लोग हैं कि अगर उन्होंने धर्म के अनुसार कार्य नहीं किए तो उन्हें जरूर किसी देवी शक्ति से नुकसान पहुंच सकता है और इसीलिए वह कुछ भी धर्म के विरुद्ध नहीं करना चाहते हैं उनके विचारों के हिसाब से हो जिस तरह से धर्म को समझते हैं उसी के अनुसार कार्य भी करते हैं और जब वोट देने जाते हैं तब भी हम यह देखते हैं कि जो हमारे क्षेत्र से प्रतिनिधि खड़ा हुआ है वह कौन से धर्म का है और हमें किसे वोट देना चाहिए हमें सही प्रतिनिधि नहीं सुनते हैं हम धार्मिक आधार पर एक व्यक्ति को चुनते हैं और उसे अपना प्रतिनिधि बना देते हैं इस तरह से राजनीति में भी धर्म के हिसाब से हमारे प्रतिनिधि जाते हैं क्योंकि धर्म हम अपने आप से अलग ही नहीं कर पाते हम सोच भी नहीं पाते धर्म को जुदा रखे कि उसके बिना भी हम कुछ कर सकते हैं क्या उसके बिना भी हमारा कोई वजूद है हम हर चीज में धर्म को आगे कर देते हैं और यही धर्म जातिवाद को भी बढ़ावा दे रहा है और किसी धर्म के कारण आज राजनीति में अराजकता और इतना सांप्रदायिक पाठ फैल गया है और राजनेता भी जानते हैं कि धर्म हमारे देश की जनता की कमजोरी है इसीलिए वह भी धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं और धर्म के बाद लोग धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं और जनता नहीं समझ पा रही है क्यों नहीं धर्म को और राजनीति को अलग रखना चाहिए धर्म उनका अपना है वह जिसे चाहें उस धर्म को मान सकते हैं और उसे अपने जीवन में उतार सकते हैं लेकिन राजनीति एक अलग मंच है जिस पर आपको अपना वोट देकर एक प्रतिनिधि चुनना होता हैHamare Desh Dharm Pradhan Desh Hai Aur Dharm Ko Hamare Desh Mein Bahut Jyada Mana Jata Hai Aur Dharm Ko Manane Ke Saath Hi Saath Hamare Desh Mein Dharm Se Dar Bhi Log Hain Ki Agar Unhone Dharm Ke Anusar Karya Nahi Kiye To Unhen Jarur Kisi Devi Shakti Se Nuksan Pahunch Sakta Hai Aur Isliye Wah Kuch Bhi Dharm Ke Viruddha Nahi Karna Chahte Hain Unke Vicharon Ke Hisab Se Ho Jis Tarah Se Dharm Ko Samajhte Hain Ussi Ke Anusar Karya Bhi Karte Hain Aur Jab Vote Dene Jaate Hain Tab Bhi Hum Yeh Dekhte Hain Ki Jo Hamare Kshetra Se Pratinidhi Khada Hua Hai Wah Kaun Se Dharm Ka Hai Aur Hume Kise Vote Dena Chahiye Hume Sahi Pratinidhi Nahi Sunte Hain Hum Dharmik Aadhar Par Ek Vyakti Ko Chunate Hain Aur Use Apna Pratinidhi Bana Dete Hain Is Tarah Se Rajneeti Mein Bhi Dharm Ke Hisab Se Hamare Pratinidhi Jaate Hain Kyonki Dharm Hum Apne Aap Se Alag Hi Nahi Kar Paate Hum Soch Bhi Nahi Paate Dharm Ko Juda Rakhe Ki Uske Bina Bhi Hum Kuch Kar Sakte Hain Kya Uske Bina Bhi Hamara Koi Vajud Hai Hum Har Cheez Mein Dharm Ko Aage Kar Dete Hain Aur Yahi Dharm Jaatiwad Ko Bhi Badhawa De Raha Hai Aur Kisi Dharm Ke Kaaran Aaj Rajneeti Mein Arajkata Aur Itna Sampradayik Path Fail Gaya Hai Aur Rajneta Bhi Jante Hain Ki Dharm Hamare Desh Ki Janta Ki Kamjori Hai Isliye Wah Bhi Dharm Ke Naam Par Vote Mangate Hain Aur Dharm Ke Baad Log Dharm Ke Naam Par Logon Ko Bantate Hain Aur Janta Nahi Samajh Pa Rahi Hai Kyon Nahi Dharm Ko Aur Rajneeti Ko Alag Rakhna Chahiye Dharm Unka Apna Hai Wah Jise Chahain Us Dharm Ko Maan Sakte Hain Aur Use Apne Jeevan Mein Utar Sakte Hain Lekin Rajneeti Ek Alag Manch Hai Jis Par Aapko Apna Vote Dekar Ek Pratinidhi Chunana Hota Hai
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