लाइफ में ऐसा कौन सा काम है मैं अपनी ही नजरों में गिरा देता है ? ...

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हमारी सोच माय सोचो मैं अपनी नजरों से गिरा देती है अगर हम गलत सोचेंगे तो गलत करेंगे सही सोच सही करें
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हमारी सोच माय सोचो मैं अपनी नजरों से गिरा देती है अगर हम गलत सोचेंगे तो गलत करेंगे सही सोच सही करेंHamari Soch My Socho Main Apni Najaron Se Gira Deti Hai Agar Hum Galat Sochenge Toh Galat Karenge Sahi Soch Sahi Karein
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कोई भी काम करते हुए मेरे माइंड में बहुत सारे विचार आने लगते हैं मैं क्या करूँ? ...

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DP बहुत सारे शिकवे जो भी काम करने में आपको गिल्टी फील होती है जो भी सही करनी है जिसको करने वालों को गिल्टी फील होती आपको एक बार सोचना पड़ता है कि मैं सही कर रहा हूं या नहीं करता हूं तो वह काम जो आपको अपनी नजरों में गिरा देती है
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DP बहुत सारे शिकवे जो भी काम करने में आपको गिल्टी फील होती है जो भी सही करनी है जिसको करने वालों को गिल्टी फील होती आपको एक बार सोचना पड़ता है कि मैं सही कर रहा हूं या नहीं करता हूं तो वह काम जो आपको अपनी नजरों में गिरा देती हैDP Bahut Sare Jo Bhi Kaam Karne Mein Aapko Feel Hoti Hai Jo Bhi Sahi Karni Hai Jisko Karne Walon Ko Feel Hoti Aapko Ek Bar Sochna Padata Hai Ki Main Sahi Kar Raha Hoon Ya Nahi Karta Hoon To Wah Kaam Jo Aapko Apni Najaron Mein Gira Deti Hai
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मुझे लगता है कि लाइफ में आपको कुछ भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जहां मानवता शर्मिंदा हो जाए ठीक है क्योंकि आजकल आप देखिए जिस प्रकार की कैसेट आजकल हो रहे हैं अगर मैं रेप केस की बात करता हूं ऐसे सबके सामने निकल कर आ रहे हैं 5 साल की 4 साल की बच्ची यह मानवता शर्मसार हो जाती है और उसके बाद में इन लोगों को शर्म नहीं आती तो मुझे लगता है कि लाइफ में किसी भी व्यक्ति को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जहां मानवता शर्मिंदा हो जाए तो उसका मतलब है कि उसके इंसान होने का कोई मतलब ही नहीं है वजूद ही नहीं है उससे अच्छा तो जानवर बताइए जानवरों से ज्यादा अच्छे हैं
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मुझे लगता है कि लाइफ में आपको कुछ भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जहां मानवता शर्मिंदा हो जाए ठीक है क्योंकि आजकल आप देखिए जिस प्रकार की कैसेट आजकल हो रहे हैं अगर मैं रेप केस की बात करता हूं ऐसे सबके सामने निकल कर आ रहे हैं 5 साल की 4 साल की बच्ची यह मानवता शर्मसार हो जाती है और उसके बाद में इन लोगों को शर्म नहीं आती तो मुझे लगता है कि लाइफ में किसी भी व्यक्ति को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जहां मानवता शर्मिंदा हो जाए तो उसका मतलब है कि उसके इंसान होने का कोई मतलब ही नहीं है वजूद ही नहीं है उससे अच्छा तो जानवर बताइए जानवरों से ज्यादा अच्छे हैंMujhe Lagta Hai Ki Life Mein Aapko Kuch Bhi Aisa Kaam Nahi Karna Chahiye Jahan Manavta Sarminda Ho Jaye Theek Hai Kyonki Aajkal Aap Dekhie Jis Prakar Ki Kaiset Aajkal Ho Rahe Hain Agar Main Rape Case Ki Baat Karta Hoon Aise Sabke Samane Nikal Kar Aa Rahe Hain 5 Saal Ki 4 Saal Ki Bacchi Yeh Manavta Sharmasaar Ho Jati Hai Aur Uske Baad Mein In Logon Ko Sharm Nahi Aati To Mujhe Lagta Hai Ki Life Mein Kisi Bhi Vyakti Ko Aisa Kaam Nahi Karna Chahiye Jahan Manavta Sarminda Ho Jaye To Uska Matlab Hai Ki Uske Insaan Hone Ka Koi Matlab Hi Nahi Hai Vajud Hi Nahi Hai Usse Accha To Janwar Bataiye Jaanvaro Se Jyada Acche Hain
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हर व्यक्ति की अलग तरीका होता है और हर व्यक्ति कुछ नियम-कायदे की जिंदगी में बनाता है और चीन का वह पालन भी करता है जो पौधे को बनाता है उन पर वह चलता भी है और उसके हिसाब से ही वह तय करता है कि कौन से कार्य है जो वह अच्छी तरह से कर सकता है और ऐसे कौन से कार्य है जो उसे नहीं करनी चाहिए जो गलत है और जब उन गलत कार्यों में से कोई कार्य इंसान कर लेता है भावुकता में आकर क्रोध में आकर आक्रोश में आकर तक की ही नजरों में गिर जाता है कभी-कभी इंसान कोई ऐसा गलत कार्य करना नहीं चाहता है लेकिन कभी संगत का असर यह कभी कोई उन्माद यह कभी कोई ऐसा करो या कभी कोई बदला लेने की भावना इंसान को यह सब करने के लिए प्रेरित करती है और वह वह कार्य भी कर लेता है जो अपने कभी सोचा नहीं था करने के बारे में और तब वह अपनी नजरों में गिर जाता है क्योंकि वह कार्य उसके अनुरूप नहीं था लेकिन मुझे लगता है जब भी ऐसी परिस्थितियां व्यक्ति के सामने तब उसे जरूर शांति से बैठ कर सिर्फ 5 मिनट के लिए अपने बारे में सोचना चाहिए अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए और जो कार्य को करने जा रहा है उसके बाद में क्या परिणाम होंगे उसके बारे में सोचना चाहिए अगर वह थोड़ी सी देर इतना सा चिंतन-मनन कर लेगा तो वह उस गलत कार्य को करने से बच जाएगा और अपनी ही नजरों में गिरने से बच जाएगा क्योंकि इंसान दूसरों की नजरों में गिर कर दो फिर भी जी सकता है लेकिन जब इंसान अपनी ही नजरों में गिर जाता है तो उसके लिए जीना दूभर हो जाता है और उसकी जिंदगी बेईमानी हो जाती है और उन सब का फल भुगतना पड़ता है उसके बच्चों को उसके परिवार को इसलिए कहते हैं कि बोलिए बाद में विचार यह पहले सोच पहले और करिए बाद में
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हर व्यक्ति की अलग तरीका होता है और हर व्यक्ति कुछ नियम-कायदे की जिंदगी में बनाता है और चीन का वह पालन भी करता है जो पौधे को बनाता है उन पर वह चलता भी है और उसके हिसाब से ही वह तय करता है कि कौन से कार्य है जो वह अच्छी तरह से कर सकता है और ऐसे कौन से कार्य है जो उसे नहीं करनी चाहिए जो गलत है और जब उन गलत कार्यों में से कोई कार्य इंसान कर लेता है भावुकता में आकर क्रोध में आकर आक्रोश में आकर तक की ही नजरों में गिर जाता है कभी-कभी इंसान कोई ऐसा गलत कार्य करना नहीं चाहता है लेकिन कभी संगत का असर यह कभी कोई उन्माद यह कभी कोई ऐसा करो या कभी कोई बदला लेने की भावना इंसान को यह सब करने के लिए प्रेरित करती है और वह वह कार्य भी कर लेता है जो अपने कभी सोचा नहीं था करने के बारे में और तब वह अपनी नजरों में गिर जाता है क्योंकि वह कार्य उसके अनुरूप नहीं था लेकिन मुझे लगता है जब भी ऐसी परिस्थितियां व्यक्ति के सामने तब उसे जरूर शांति से बैठ कर सिर्फ 5 मिनट के लिए अपने बारे में सोचना चाहिए अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए और जो कार्य को करने जा रहा है उसके बाद में क्या परिणाम होंगे उसके बारे में सोचना चाहिए अगर वह थोड़ी सी देर इतना सा चिंतन-मनन कर लेगा तो वह उस गलत कार्य को करने से बच जाएगा और अपनी ही नजरों में गिरने से बच जाएगा क्योंकि इंसान दूसरों की नजरों में गिर कर दो फिर भी जी सकता है लेकिन जब इंसान अपनी ही नजरों में गिर जाता है तो उसके लिए जीना दूभर हो जाता है और उसकी जिंदगी बेईमानी हो जाती है और उन सब का फल भुगतना पड़ता है उसके बच्चों को उसके परिवार को इसलिए कहते हैं कि बोलिए बाद में विचार यह पहले सोच पहले और करिए बाद मेंHar Vyakti Ki Alag Tarika Hota Hai Aur Har Vyakti Kuch Niyam Kayade Ki Zindagi Mein Banata Hai Aur Chin Ka Wah Palan Bhi Karta Hai Jo Paudhe Ko Banata Hai Un Par Wah Chalta Bhi Hai Aur Uske Hisab Se Hi Wah Tay Karta Hai Ki Kaun Se Karya Hai Jo Wah Acchi Tarah Se Kar Sakta Hai Aur Aise Kaun Se Karya Hai Jo Use Nahi Karni Chahiye Jo Galat Hai Aur Jab Un Galat Kaaryon Mein Se Koi Karya Insaan Kar Leta Hai Bhavukata Mein Aakar Krodh Mein Aakar Aakrosh Mein Aakar Tak Ki Hi Najaron Mein Gir Jata Hai Kabhi Kabhi Insaan Koi Aisa Galat Karya Karna Nahi Chahta Hai Lekin Kabhi Sangat Ka Asar Yeh Kabhi Koi Unmaad Yeh Kabhi Koi Aisa Karo Ya Kabhi Koi Badla Lene Ki Bhavna Insaan Ko Yeh Sab Karne Ke Liye Prerit Karti Hai Aur Wah Wah Karya Bhi Kar Leta Hai Jo Apne Kabhi Socha Nahi Tha Karne Ke Bare Mein Aur Tab Wah Apni Najaron Mein Gir Jata Hai Kyonki Wah Karya Uske Anurup Nahi Tha Lekin Mujhe Lagta Hai Jab Bhi Aisi Paristhiyaan Vyakti Ke Samane Tab Use Jarur Shanti Se Baith Kar Sirf 5 Minute Ke Liye Apne Bare Mein Sochna Chahiye Apne Parivar Ke Bare Mein Sochna Chahiye Aur Jo Karya Ko Karne Ja Raha Hai Uske Baad Mein Kya Parinam Honge Uske Bare Mein Sochna Chahiye Agar Wah Thodi Si Der Itna Sa Chintan Manan Kar Lega To Wah Us Galat Karya Ko Karne Se Bach Jayega Aur Apni Hi Najaron Mein Girne Se Bach Jayega Kyonki Insaan Dusron Ki Najaron Mein Gir Kar Do Phir Bhi Ji Sakta Hai Lekin Jab Insaan Apni Hi Najaron Mein Gir Jata Hai To Uske Liye Jeena Ho Jata Hai Aur Uski Zindagi Baimani Ho Jati Hai Aur Un Sab Ka Fal Bhugatana Padata Hai Uske Bacchon Ko Uske Parivar Ko Isliye Kehte Hain Ki Bolie Baad Mein Vichar Yeh Pehle Soch Pehle Aur Kariye Baad Mein
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