हिंदी का प्रथम कवि कौन है ...

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हिंदी के प्रथम कवि केशव दास जी है...
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हिंदी के प्रथम कवि केशव दास जी है
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हिंदी के प्रथम कवि केशवदास ने थे...
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हिंदी के प्रथम कवि केशवदास ने थेHindi Ke Pratham Kavi Keshavadaash Ne The
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हिन्दी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे | सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं | अतः सरहपा को कोसी अंचल का कवि माना जा सकता है। सरहपा का चौरासी सिद्धों की प्रचलित तालिका में छठा स्थान है। उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म’ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं। राहुल सांकृत्यायन ने इन्हें सरह की प्रारंभिक रचनाएँ माना है, जिनमें से चौथी कृति के दो और अंशों के भिन्न अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद स्तन्-ग्युर में शामिल हैं, जिन्हें स्वतंत्र कृतियाँ मानकर राहुल जी सरह की सात संस्कृत कृतियों का उल्लेख करते हैं।
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हिन्दी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे | सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं | अतः सरहपा को कोसी अंचल का कवि माना जा सकता है। सरहपा का चौरासी सिद्धों की प्रचलित तालिका में छठा स्थान है। उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म’ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं। राहुल सांकृत्यायन ने इन्हें सरह की प्रारंभिक रचनाएँ माना है, जिनमें से चौथी कृति के दो और अंशों के भिन्न अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद स्तन्-ग्युर में शामिल हैं, जिन्हें स्वतंत्र कृतियाँ मानकर राहुल जी सरह की सात संस्कृत कृतियों का उल्लेख करते हैं।Hindi Ke Pratham Kavi Siddh Sarhapa The | Siddh Sarhapa Aatthvi Shatty Ke Dauran Hindi Ke Pratham Kavi Mane Jaate Hain | Atah Sarhapa Ko Kosi Anchal Ka Kavi Mana Ja Sakta Hai Sarhapa Ka Chaurasi Siddhon Ki Prachalit Talika Mein Chhatha Sthan Hai Unka Mul Naam ‘rahulabhadr’ Tha Aur Unke ‘sarojavajr’ ‘sharoruhavajr’ ‘padm’ Tatha ‘padmavajr’ Naam Bhi Milte Hain Rahul Saankrtyaayan Ne Inhen Sarha Ki Prarambhik Rachnaye Mana Hai Jinmein Se Chauthi Kriti Ke Do Aur Anshon Ke Bhinn Anuvadakon Dwara Kiye Gaye Anuvad Stan Gyur Mein Shaamil Hain Jinhen Swatantra Kritiyan Manakar Rahul G Sarha Ki Saat Sanskrit Kritiyon Ka Ullekh Karte Hain
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पीके हिंदी साहित्य जो है वह बहुत ही ज्यादा बढ़ा है ऐसा माना जाता है कि ब्रजभाषा में जो हिंदी के प्रथम महाकाव्य थे वे थे चंद्रवरदाई और उनका जो प्रथम महाकाव्य था वह था पृथ्वीराज रासो और उसके अलावा जो है मुस्लिम में जो पहले कभी थे उनका नाम है अब्दुल रहमान
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पीके हिंदी साहित्य जो है वह बहुत ही ज्यादा बढ़ा है ऐसा माना जाता है कि ब्रजभाषा में जो हिंदी के प्रथम महाकाव्य थे वे थे चंद्रवरदाई और उनका जो प्रथम महाकाव्य था वह था पृथ्वीराज रासो और उसके अलावा जो है मुस्लिम में जो पहले कभी थे उनका नाम है अब्दुल रहमानPk Hindi Sahitya Jo Hai Wah Bahut Hi Zyada Badha Hai Aisa Mana Jata Hai Ki Brajbhaashaa Mein Jo Hindi Ke Pratham Mahakavya The Ve The Chandravardai Aur Unka Jo Pratham Mahakavya Tha Wah Tha Prithviraj Raso Aur Uske Alava Jo Hai Muslim Mein Jo Pehle Kabhi The Unka Naam Hai Abdul Rahman
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हिन्दी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे .सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं. सिद्ध सरहपा के जन्म-स्थान को लेकर विवाद है. एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा ज़िले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है ।
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हिन्दी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे .सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं. सिद्ध सरहपा के जन्म-स्थान को लेकर विवाद है. एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा ज़िले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है । Hindi Ke Pratham Kavi Siddh Sarhapa The Siddh Sarhapa Aatthvi Shatty Ke Dauran Hindi Ke Pratham Kavi Mane Jaate Hain Siddh Sarhapa Ke Janm Sthan Ko Lekar Vivad Hai Ek Tibbati Migraine Ke Aadhar Par Unka Janm Sthan Orissa Bataya Gaya Hai Ek Migraine Saharsa Zile Ke Panchgachhiya Gram Ko Bhi Unka Janm Sthan Batati Hai
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सिद्ध सरहपा हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं। सिद्ध सरहपा को बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है। सिद्ध सरहपा का मूल नाम राहुलभद्र था | सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं | उनके जन्म-स्थान को लेकर विवाद है | एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा ज़िले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है |
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सिद्ध सरहपा हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं। सिद्ध सरहपा को बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है। सिद्ध सरहपा का मूल नाम राहुलभद्र था | सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं | उनके जन्म-स्थान को लेकर विवाद है | एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा ज़िले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है |Siddh Sarhapa Hindi Ke Pratham Kavi Mane Jaate Hain Siddh Sarhapa Ko Baudh Dharm Ki Vajrayan Aur Sahajayan Sakha Ka Prawartak Tatha Aadi Siddh Mana Jata Hai Siddh Sarhapa Ka Mul Naam Rahulbhadra Tha | Siddh Sarhapa Aatthvi Shatty Ke Dauran Hindi Ke Pratham Kavi Mane Jaate Hain | Unke Janm Sthan Ko Lekar Vivad Hai | Ek Tibbati Migraine Ke Aadhar Par Unka Janm Sthan Orissa Bataya Gaya Hai Ek Migraine Saharsa Zile Ke Panchgachhiya Gram Ko Bhi Unka Janm Sthan Batati Hai |
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हिंदी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे। सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनके जन्म-स्थान को लेकर विवाद है। एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा जिले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है। उनको बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है। उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म‘ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं। वे पालशासक धर्मपाल (770-810 ई.) के समकालीन थे।
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हिंदी के प्रथम कवि सिद्ध सरहपा थे। सिद्ध सरहपा आठवीं शती के दौरान हिन्दी के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनके जन्म-स्थान को लेकर विवाद है। एक तिब्बती जनश्रुति के आधार पर उनका जन्म-स्थान उड़ीसा बताया गया है। एक जनश्रुति सहरसा जिले के पंचगछिया ग्राम को भी उनका जन्म-स्थान बताती है। उनको बौद्ध धर्म की वज्रयान और सहजयान शाखा का प्रवर्तक तथा आदि सिद्ध माना जाता है। उनका मूल नाम ‘राहुलभद्र’ था और उनके ‘सरोजवज्र’, ‘शरोरुहवज्र’, ‘पद्म‘ तथा ‘पद्मवज्र’ नाम भी मिलते हैं। वे पालशासक धर्मपाल (770-810 ई.) के समकालीन थे। Hindi Ke Pratham Kavi Siddh Sarhapa The Siddh Sarhapa Aatthvi Shatty Ke Dauran Hindi Ke Pratham Kavi Mane Jaate Hain Unke Janm Sthan Ko Lekar Vivad Hai Ek Tibbati Migraine Ke Aadhar Par Unka Janm Sthan Orissa Bataya Gaya Hai Ek Migraine Saharsa Jile Ke Panchgachhiya Gram Ko Bhi Unka Janm Sthan Batati Hai Unko Baudh Dharm Ki Vajrayan Aur Sahajayan Sakha Ka Prawartak Tatha Aadi Siddh Mana Jata Hai Unka Mul Naam ‘rahulabhadr’ Tha Aur Unke ‘sarojavajr’ ‘sharoruhavajr’ ‘padm‘ Tatha ‘padmavajr’ Naam Bhi Milte Hain Ve Palshasak Dharmpal (770-810 Ee Ke Samkalin The
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