भारत अपनी नदियों को इतना प्रदूषित क्यूँ कर रहा है और उनकी सुरक्षा क्यूँ नहीं कर रहा? ...

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देखिए न दिया जो है प्रदूषित मैं कहूंगा कि इस वजह से भी नहीं है क्योंकि नदियों को साफ करने का जिम्मा उठाया था जिन भी सरकार होने चाहिए कि गवर्नमेंट के जरिए या चाहे बाद में अब नरेंद्र मोदी हुकूमत के तरीक...
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देखिए न दिया जो है प्रदूषित मैं कहूंगा कि इस वजह से भी नहीं है क्योंकि नदियों को साफ करने का जिम्मा उठाया था जिन भी सरकार होने चाहिए कि गवर्नमेंट के जरिए या चाहे बाद में अब नरेंद्र मोदी हुकूमत के तरीके वह सिर्फ और सिर्फ कागजों में फाइलों में ही सपा हो गई और उनकी रियालिटी थी जो मैं कहूंगा कि उनका होना चाहिए था सफाई और सब नहीं हो सका सिर्फ कागजों वा फाइलों में हुआ हजारो करोड रुपए के बजट लाए गए पास किए गए और वह पैसा फेंक दिया गया बाढ़ आती है नदी खुद साफ हो जाती है उससे पहले जितना भी पैसा उन नदियों की सफाई के लिए प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया जाता है तब कहां जाता है कि मुझे गुनगुनाता है यह किसी से छिपा हुआ नहीं है
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गवर्नमेंट तो पता नहीं क्या कर रही है क्या नहीं कर रही है मंदिरी तो क्या बजट करते हैं करोड़ों करोड़ों रुपए के बजट और तमाम तरह के अपोजिट लिखिए मेरा मानना है कि नदियां कब तक फ्री नहीं होंगी उनका प्रदूषण ...
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गवर्नमेंट तो पता नहीं क्या कर रही है क्या नहीं कर रही है मंदिरी तो क्या बजट करते हैं करोड़ों करोड़ों रुपए के बजट और तमाम तरह के अपोजिट लिखिए मेरा मानना है कि नदियां कब तक फ्री नहीं होंगी उनका प्रदूषण नदियों की गंदगी तक खत्म नहीं होगी जब तक आम जनता की सोच में परिवर्तन नहीं होगा आम जनता की सोच में परिवर्तन होगा और सब ठीक है यह हमारी नदियां किस देश की संपत्ति है और इसको हम लोग पूजा पाठ करते हैं करते हैं इसके अलावा ऑपोजिट कर देने से बजट कर देने से कुछ भी नहीं होने वाला है जब तक ईमानदारी से सब लोग मिलकर
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भारत में जो लोग रह रहे हैं वह तो व्यापार चुकी बड़ा देश है हमारा 125 करोड़ लोगों की आबादी वाला है तो वहां बिजली उद्योगों के माध्यम से बहुत सारे उत्पादन बढ़ा रहे हैं इंडस्ट्री को पूरा गांव है थोड़े दिन ...
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भारत में जो लोग रह रहे हैं वह तो व्यापार चुकी बड़ा देश है हमारा 125 करोड़ लोगों की आबादी वाला है तो वहां बिजली उद्योगों के माध्यम से बहुत सारे उत्पादन बढ़ा रहे हैं इंडस्ट्री को पूरा गांव है थोड़े दिन पहले माननीय मोदी जी की सरकार ने जो भी बजाई थी कि हम नमामि गंगे और गणेश की और यह खानापूरी हो रही है बराबर खर्चा भी हो रहा है करोड़ों रुपए का खर्चा भी किया जा रहा है सफाई के नाम पर लेकिन महत्वपूर्ण बात देखने की देखने की बात है कि जो बड़ी-बड़ी भारत सरकार को साफ करने की जहां तक बात है वह प्रोग्राम बराबर दिल्ली से लेकिन बहुत सारे विभिन्न क्षेत्रों में चलते चले जा रहे हैं लेकिन जो केमिकल वाटर में आ गया है उसके लिए सरकार को अभी प्लानिंग चल गया कर लेनी चाहिए अभी तक रोकने वाली एजेंसियां रोकने के लिए प्लान कमेंट के माध्यम से के माध्यम से बहुत सारी प्राइवेट एजेंसियों को काम दिए जा रहे हैं लेकिन वाटर की सफाई की बातें हूं वहां पर निजी कंपनियां फेल हो रही है इसके बातों में भ्रष्टाचार की बू आ रही है
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बढ़ती जनसंख्या के कारण नदियां प्रदूषित हो रही है दूसरी उद्योग की स्थापना नदियों के समीप की गई है इसका जो उद्योगों से कचरा निकलता है वह नदियों में डाला जाता है भारत इसकी सुरक्षा इस कारण नहीं कर पा रहा ...
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बढ़ती जनसंख्या के कारण नदियां प्रदूषित हो रही है दूसरी उद्योग की स्थापना नदियों के समीप की गई है इसका जो उद्योगों से कचरा निकलता है वह नदियों में डाला जाता है भारत इसकी सुरक्षा इस कारण नहीं कर पा रहा है कि यहां की जनसंख्या धार्मिक प्रवृत्ति की है और एक छोटी धर्म आयोजित होते हैं उनसे जो भी प्रदूषण फैलता है वह नदी में खेला जाता है तो इस कारण हमारे प्रशासन के द्वारा कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे हैं
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भारत की सबसे प्रदूषित नदी गोमती है...
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भारत की सबसे प्रदूषित नदी गोमती है
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आज के भारत की सबसे प्रदूषित नदी कौन सी है तो विश्व में सबसे पहले नाम आता है यमुना नदी यमुना सबसे प्रदूषित नदी में जो नदी है दिल्ली से मुक्त हो जाता दिल्ली के जितने वेस्ट है जितने भी हिंदू पापुलेशन ज्य...
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आज के भारत की सबसे प्रदूषित नदी कौन सी है तो विश्व में सबसे पहले नाम आता है यमुना नदी यमुना सबसे प्रदूषित नदी में जो नदी है दिल्ली से मुक्त हो जाता दिल्ली के जितने वेस्ट है जितने भी हिंदू पापुलेशन ज्यादा है दिल्ली में दिल्ली वेस्ट है सब याद करता है बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गया है लेकिन 70% हुआ उसका जीवन पानी है पॉलिथीन है और सेकंड जो आता है गंगा नदी आता है यह भी बहुत सारे राज्यों से होकर गुजरता है यूपी-बिहार वेस्ट बंगाल से होकर गुजरता है और बहुत सारे आप्शन बैक्टीरिया यह भी बहुत ज्यादा इस नदी में प्रवाहित किया कि हर एक राज्य के तो इसके कारण भी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार से भी यह गंगा नदी जो है सबसे ज्यादा मत सेकंड मोस्ट पोलूटेड नदी में से आता है तो साबरमती नदी जो गुजरात में रहता है तो यह भी कभी पलट राजस्थान मोस्ट वांटेड रिवर ऑफ इंडियाAaj Ke Bharat Ki Sabse Pradushit Nadi Kaun Si Hai To Vishwa Mein Sabse Pehle Naam Aata Hai Yamuna Nadi Yamuna Sabse Pradushit Nadi Mein Jo Nadi Hai Delhi Se Mukt Ho Jata Delhi Ke Jitne West Hai Jitne Bhi Hindu Population Jyada Hai Delhi Mein Delhi West Hai Sab Yaad Karta Hai Bahut Jyada Pradushit Ho Gaya Hai Lekin 70% Hua Uska Jeevan Pani Hai Polythene Hai Aur Second Jo Aata Hai Ganga Nadi Aata Hai Yeh Bhi Bahut Sare Rajyo Se Hokar Gujarat Hai Up Bihar West Bengal Se Hokar Gujarat Hai Aur Bahut Sare Option Bacteria Yeh Bhi Bahut Jyada Is Nadi Mein Pravahit Kiya Ki Har Ek Rajya Ke To Iske Kaaran Bhi WHO Ki Report Ke Anusar Se Bhi Yeh Ganga Nadi Jo Hai Sabse Jyada Mat Second Most Poluted Nadi Mein Se Aata Hai To Sabarmati Nadi Jo Gujarat Mein Rehta Hai To Yeh Bhi Kabhi Palat Rajasthan Most Wanted River Of India
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भारत की सबसे पहली PDF गंदी नदी हम चाहे वह भारत की सबसे पुरानी और प्राचीन नदी जो जमुना है वह है कभी बन हमारे देश में टोटल 19 संविलियन टर्न Galaxy विश्व का पानी है गंदा पानी जो के हॉस्पिटल से फैक्ट्री स...
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भारत की सबसे पहली PDF गंदी नदी हम चाहे वह भारत की सबसे पुरानी और प्राचीन नदी जो जमुना है वह है कभी बन हमारे देश में टोटल 19 संविलियन टर्न Galaxy विश्व का पानी है गंदा पानी जो के हॉस्पिटल से फैक्ट्री से घरों से निकलता है और उन्हें सीधे नदियों में डाइट भाग दिया जाता है जिसका साथ 25% 50% जो है वह यमुना नदी के अंदर जाता है और इसी वक्त करता है तो जो सबसे पवित्र नदी जो है हमारे देश में अभी हैं वह यमुना नदी है दूसरे नंबर पर जो आती है वह हमारी दूसरी सबसे प्राचीन नदी गंगा नदी है जो सबसे ज्यादा वॉल्यूम तेज हैBharat Ki Sabse Pehli PDF Gandi Nadi Hum Chahe Wah Bharat Ki Sabse Purani Aur Prachin Nadi Jo Jamuna Hai Wah Hai Kabhi Ban Hamare Desh Mein Total 19 Sanviliyan Turn Galaxy Vishwa Ka Pani Hai Ganda Pani Jo Ke Hospital Se Factory Se Gharon Se Nikalta Hai Aur Unhen Seedhe Nadiyon Mein Diet Bhag Diya Jata Hai Jiska Saath 25% 50% Jo Hai Wah Yamuna Nadi Ke Andar Jata Hai Aur Isi Waqt Karta Hai To Jo Sabse Pavitra Nadi Jo Hai Hamare Desh Mein Abhi Hain Wah Yamuna Nadi Hai Dusre Number Par Jo Aati Hai Wah Hamari Dusri Sabse Prachin Nadi Ganga Nadi Hai Jo Sabse Jyada Volume Tez Hai
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भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से है भारत की सबसे प्राचीन नदी यानी कि यमुना नदी जो कि भारत की सबसे प्राचीन नदियों में से भी एक है यह यमुना नदी भारत की सबसे बढ़िया प्रदूषित नदी है स्कूल 1999 की कुल 1...
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भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से है भारत की सबसे प्राचीन नदी यानी कि यमुना नदी जो कि भारत की सबसे प्राचीन नदियों में से भी एक है यह यमुना नदी भारत की सबसे बढ़िया प्रदूषित नदी है स्कूल 1999 की कुल 19000 मिलियन लीटर स्वच्छ पानी दिल्ली एंड नदियों में जाता है उसमें सिसकारियों 7% जाएगा मैं आपको एक बात कहूं तो 18% जो है उसी को भेजो है जो वह भी नाली का जो पानी है वह सीधा यमुना में जाता है तो यह भारत की सबसे प्रदूषित नदी हैBharat Ki Sabse Pradushit Nadiyon Mein Se Hai Bharat Ki Sabse Prachin Nadi Yani Ki Yamuna Nadi Jo Ki Bharat Ki Sabse Prachin Nadiyon Mein Se Bhi Ek Hai Yeh Yamuna Nadi Bharat Ki Sabse Badhiya Pradushit Nadi Hai School 1999 Ki Kul 19000 Million Liter Swach Pani Delhi End Nadiyon Mein Jata Hai Usamen Siskariyon 7% Jayega Main Aapko Ek Baat Kahun To 18% Jo Hai Ussi Ko Bhejo Hai Jo Wah Bhi Nali Ka Jo Pani Hai Wah Sidhaa Yamuna Mein Jata Hai To Yeh Bharat Ki Sabse Pradushit Nadi Hai
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देखिए अगर कहा जाए तो भारत में जो सबसे प्रदूषित नदी है वह रिवर यमुना गंगा गोमती घाघरा रिवर चंबल मा नी वारता यह सभी जो है पलट ट्रिपल में जाना चाहते हैं क्योंकि इनकी जो पानी है यह हमारे आम जनता के वजह से...
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देखिए अगर कहा जाए तो भारत में जो सबसे प्रदूषित नदी है वह रिवर यमुना गंगा गोमती घाघरा रिवर चंबल मा नी वारता यह सभी जो है पलट ट्रिपल में जाना चाहते हैं क्योंकि इनकी जो पानी है यह हमारे आम जनता के वजह से ही जो खराब हुई है और इनको जो है मतलब हमारे जो बदल स्टेट गवर्नमेंट है वह भी ढंग से मैसेज नहीं करते हैं इसकी वजह से इसकी जो पानी है ना बहुत ज्यादा पढ़े तेज हो रही है और मेन कारण तो जनता है और सरकार की भी कुछ हद तक हाथ है इसमेंDekhie Agar Kaha Jaye To Bharat Mein Jo Sabse Pradushit Nadi Hai Wah River Yamuna Ganga Gomti Ghaghara River Chambal Ma Ni Varta Yeh Sabhi Jo Hai Palat Triple Mein Jana Chahte Hain Kyonki Inki Jo Pani Hai Yeh Hamare Aam Janta Ke Wajah Se Hi Jo Kharab Hui Hai Aur Inko Jo Hai Matlab Hamare Jo Badal State Government Hai Wah Bhi Dhang Se Massage Nahi Karte Hain Iski Wajah Se Iski Jo Pani Hai Na Bahut Jyada Padhe Tez Ho Rahi Hai Aur Main Kaaran To Janta Hai Aur Sarkar Ki Bhi Kuch Had Tak Hath Hai Isme
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भारत में 14 नदियाँ हैं वे सब किसी न किसी स्थान पर प्रदूषण का शिकार होती हैं। गंगा को सर्वाधिक प्रदूषित नदी माना गया है। केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण संघ द्वारा वर्ष 1984 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नदियों में 75 प्रतिशत प्रदूषण नदी किनारे स्थित छोटे-बड़े शहरों से निस्तृत अनुपचारित मल-जल से होता है और शेष 25 प्रतिशत औद्योगिक अपशिष्ट से, जो संसाधित/असंसाधित दोनों प्रकार का हो सकता है। अध्ययन में प्रदूषण के कतिपय गैर-बिन्दु स्रोतों का भी उल्लेख है जैसे खुले स्थानों पर पड़ा मल-मूत्र, कचरे के ढेर, कृषि कार्य में आने वाले खेत, बिना जले अथवा अधजले शव और पशु कंकाल आदि। इतना अवश्य है कि इन स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकी है। भारत में नदियों की सफाई का अभियान वर्ष 1985 में पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. श्री राजीव गाँधी द्वारा गंगा कार्य योजना की शुरुआत से प्रारम्भ हुआ। यह भारत सरकार के वन और पर्यावरण मन्त्रालय के तहत आने वाली पूर्णतः केन्द्र द्वारा वित्तपोषित योजना थी। अब इसे राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत देश की अन्य प्रदूषित नदियों पर भी लागू कर दिया गया है।
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भारत में 14 नदियाँ हैं वे सब किसी न किसी स्थान पर प्रदूषण का शिकार होती हैं। गंगा को सर्वाधिक प्रदूषित नदी माना गया है। केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण संघ द्वारा वर्ष 1984 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नदियों में 75 प्रतिशत प्रदूषण नदी किनारे स्थित छोटे-बड़े शहरों से निस्तृत अनुपचारित मल-जल से होता है और शेष 25 प्रतिशत औद्योगिक अपशिष्ट से, जो संसाधित/असंसाधित दोनों प्रकार का हो सकता है। अध्ययन में प्रदूषण के कतिपय गैर-बिन्दु स्रोतों का भी उल्लेख है जैसे खुले स्थानों पर पड़ा मल-मूत्र, कचरे के ढेर, कृषि कार्य में आने वाले खेत, बिना जले अथवा अधजले शव और पशु कंकाल आदि। इतना अवश्य है कि इन स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकी है। भारत में नदियों की सफाई का अभियान वर्ष 1985 में पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. श्री राजीव गाँधी द्वारा गंगा कार्य योजना की शुरुआत से प्रारम्भ हुआ। यह भारत सरकार के वन और पर्यावरण मन्त्रालय के तहत आने वाली पूर्णतः केन्द्र द्वारा वित्तपोषित योजना थी। अब इसे राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत देश की अन्य प्रदूषित नदियों पर भी लागू कर दिया गया है।Bharat Mein 14 Nadiyan Hain Ve Sab Kisi N Kisi Sthan Par Pradushan Ka Shikar Hoti Hain Ganga Ko Sarvadhik Pradushit Nadi Mana Gaya Hai Kendriy Pradushan Niyantraṇ Sangh Dwara Varsh 1984 Mein Kiye Gaye Ek Adhyayan Mein Paya Gaya Ki Nadiyon Mein 75 Pratishat Pradushan Nadi Kinare Sthit Chote Bade Shaharon Se Nistrit Anupcharit Mal Jal Se Hota Hai Aur Shesh 25 Pratishat Audhyogik Apashisht Se Jo Sansaadhit Asansadhit Dono Prakar Ka Ho Sakta Hai Adhyayan Mein Pradushan Ke Katipaya Gair Bindu Sroton Ka Bhi Ullekh Hai Jaise Khule Sthanon Par Pada Mal Mutra Kachre Ke Dher Krishi Karya Mein Aane Wali Khet Bina Jale Athwa Adhajale Shav Aur Pashu Kankal Aadi Itna Avashya Hai Ki In Sroton Se Hone Wali Pradushan Ki Matra Nirdharit Nahi Ki Ja Saki Hai Bharat Mein Nadiyon Ki Safaai Ka Abhiyan Varsh 1985 Mein Purv Pradhanmantri Sv Shri Rajeev Gandhi Dwara Ganga Karya Yojana Ki Shuruvat Se Prarambh Hua Yeh Bharat Sarkar Ke Van Aur Paryaavaran Mantralay Ke Tahat Aane Wali Purnatah Kendra Dwara Vittaposhit Yojana Thi Ab Ise Rashtriya Nadi Sanrakshan Yojana Ke Tahat Desh Ki Anya Pradushit Nadiyon Par Bhi Laagu Kar Diya Gaya Hai
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भारत की कई नदियां जैविक लिहाज से मर चुकी हैं | इसका असर पर्यावरण के साथ लोगों पर भी पड़ रहा है | वर्ल्ड रिसोर्सेज रिपोर्ट के मुताबिक 70 फीसदी भारतीय गंदा पानी पीते हैं | पीलिया, हैजा, टायफाइड और मलेरिया जैसी कई बीमारियां गंदे पानी की वजह से होती हैं | रसायनिक खाद भी भूजल को दूषित कर रही है | कारखानों और उद्योग की वजह से हालत और बुरी हो गई है |
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भारत की कई नदियां जैविक लिहाज से मर चुकी हैं | इसका असर पर्यावरण के साथ लोगों पर भी पड़ रहा है | वर्ल्ड रिसोर्सेज रिपोर्ट के मुताबिक 70 फीसदी भारतीय गंदा पानी पीते हैं | पीलिया, हैजा, टायफाइड और मलेरिया जैसी कई बीमारियां गंदे पानी की वजह से होती हैं | रसायनिक खाद भी भूजल को दूषित कर रही है | कारखानों और उद्योग की वजह से हालत और बुरी हो गई है | Bharat Ki Kai Nadiyan Jaivik Lihaj Se Mar Chuki Hain | Iska Asar Paryaavaran Ke Saath Logon Par Bhi Padh Raha Hai | World Resources Report Ke Mutabik 70 Fisadi Bharatiya Ganda Pani Pite Hain | Peeliya Haija Typhoid Aur Malaria Jaisi Kai Bimariyan Gande Pani Ki Wajah Se Hoti Hain | Rasaayanik Khad Bhi Bhujal Ko Dushit Kar Rahi Hai | Karakhanon Aur Udyog Ki Wajah Se Halat Aur Buri Ho Gayi Hai |
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भारत में जल प्रदूषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा है। भारत में जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत अनुपचारित सीवेज है। प्रदूषण के अन्य स्रोतों में कृषि अपवाह और अनियमित लघु उद्योग शामिल हैं। भारत में अधिकांश नदियाँ, झीलें और सतही जल प्रदूषित हैं। 2007 के एक अध्ययन में पाया गया कि अनुपचारित सीवेज का निर्वहन भारत में सतह और भूजल के प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में घरेलू अपशिष्ट जल के उत्पादन और उपचार के बीच एक बड़ा अंतर है। समस्या केवल यह नहीं है कि भारत में पर्याप्त उपचार क्षमता का अभाव है, बल्कि यह भी है कि जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं, वे संचालित नहीं होते हैं और न ही बनाए जाते हैं। सरकारी स्वामित्व वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में से अधिकांश अनुचित डिजाइन या खराब रखरखाव या संयंत्रों को संचालित करने के लिए विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की कमी के कारण अधिकांश समय बंद रहते हैं, साथ में अनुपस्थित कर्मचारी और खराब प्रबंधन। इन क्षेत्रों में उत्पन्न अपशिष्ट जल सामान्य रूप से मिट्टी में वाष्पीकृत हो जाता है। शहरी क्षेत्रों में अघोषित कचरा जमा होता है, जिससे अस्वास्थ्यकर स्थिति पैदा होती है और सतह और भूजल में लीच प्रदूषक जारी होते हैं। 1992 के विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन में बताया गया है कि भारत के 3,119 शहरों और शहरों में से सिर्फ 209 में आंशिक रूप से उपचार की सुविधा है, और केवल 8 में पूर्णता है। अपशिष्ट जल उपचार सुविधाएँ। नीचे की ओर, अनुपचारित पानी से प्रदूषित नदी के पानी का उपयोग पीने, नहाने और धोने के लिए किया जाता है। 1995 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 114 भारतीय शहर बिना गंदे सीवेज और आंशिक रूप से शवों को सीधे गंगा नदी में बहा रहे हैं। कई विकासशील देशों की तरह, शौचालयों और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच होता है। यह सतही जल प्रदूषण का एक स्रोत है। शहरों, कस्बों और कुछ गाँवों से निकलने वाली सीवेज भारत में जल प्रदूषण का प्रमुख कारण है। सीवेज इंडिया जेनरेट करता है और प्रति दिन सीवेज की इसकी उपचार क्षमता के बीच अंतर को पाटने के लिए निवेश की आवश्यकता है। भारत के प्रमुख शहरों में प्रति दिन 38,354 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज का उत्पादन होता है, लेकिन शहरी सीवेज उपचार क्षमता केवल 11,786 एमएलडी है। घरेलू सीवेज के निर्वहन के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में भारतीय नदियां गंभीर रूप से प्रदूषित हैं। कार्बनिक पदार्थ 2010 में पानी की गुणवत्ता की निगरानी में बीओडी के उच्च स्तर (कार्बनिक पदार्थों के साथ प्रदूषण का एक उपाय) के साथ लगभग सभी नदियाँ मिलीं। सबसे खराब प्रदूषण, घटते क्रम में, मार्कंडा नदी (490 mg / l BOD) में पाया गया, इसके बाद काली नदी (364), अमलाखड़ी नदी (353), यमुना नहर (247), दिल्ली में यमुना नदी (70) और नदी बेतवा (58)। संदर्भ के लिए, 1 और 2 मिलीग्राम ओ / एल के बीच 5-दिवसीय बीओडी के साथ एक पानी का नमूना एक बहुत साफ पानी को इंगित करता है, 3 से 8 मिलीग्राम ओ / एल मामूली साफ पानी को इंगित करता है, 8 से 20 सीमावर्ती पानी को इंगित करता है, और 20 से अधिक है एमजी ओ / एल पारिस्थितिक रूप से असुरक्षित, प्रदूषित पानी को इंगित करता है। यमुना, गंगा, गोमती, घाघरा नदी, चंबल, माही, वर्धा, गोदावरी, भारत की अन्य सबसे अधिक प्रदूषित जल निकायों में से हैं। संदर्भ के लिए, कोलीफॉर्म 104 MPN / 100 ml से नीचे होना चाहिए, सामान्य रूप से पानी का अनुपस्थित होना इसके लिए सामान्य मानव उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है, और सिंचाई के लिए जहां कोलीफॉर्म कृषि में दूषित पानी से रोग का प्रकोप पैदा कर सकता है। 2006 में, 47 प्रतिशत पानी की गुणवत्ता की निगरानी 500 MPN / 100 मिलीलीटर से ऊपर कोलीफॉर्म सघनता की सूचना दी। 2008 के दौरान, सभी जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों में से 33 प्रतिशत ने कुल कोलीफॉर्म स्तरों को उन स्तरों से अधिक बताया, जो भारत में प्रदूषण नियंत्रण बुनियादी ढांचे को जोड़ने और उपचार संयंत्रों को उन्नत करने के हालिया प्रयास का सुझाव देते हुए जल प्रदूषण की प्रवृत्ति को उलट सकता है। घरेलू सीवेज का उपचार और सिंचाई के लिए उपचारित सीवेज के बाद के उपयोग से जल निकायों के प्रदूषण को रोका जा सकता है, सिंचाई क्षेत्र में ताजे पानी की मांग को कम किया जा सकता है और सिंचाई के लिए एक संसाधन बन सकता है। 2005 से, भारतीय अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का बाजार सालाना 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत में उपचार उपकरणों और आपूर्ति का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जिसमें नई स्थापना के 40 प्रतिशत बाजार में हिस्सेदारी है। इस विस्तार की दर पर, और भारत सरकार ने अपने सुधार के मार्ग पर जारी रखा, सीवेज उपचार संयंत्रों और बिजली के बुनियादी ढांचे के विकास में प्रमुख निवेश, भारत 2015 तक अपनी जल उपचार क्षमता को लगभग तीन गुना कर देगा, और उपचार क्षमता आपूर्ति भारत के दैनिक सीवेज से मेल खाएगी। लगभग 2020 तक जल उपचार आवश्यकताओं। भारत में जल संरक्षण गति प्राप्त कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा गंगा कायाकल्प के प्रयास, यमुना की सफाई सरकार द्वारा शुरू किए गए कुछ प्रयास हैं। चेन्नई में रिवर रिस्टोरेशन ट्रस्ट के प्रयासों से कोऊम, चेन्नई में अडयार नदियों और देश में झीलों और तालाबों को साफ करने के लिए पर्यावरणविद् फाउंडेशन ऑफ इंडिया (ई.एफ.आई) जैसे संगठनों द्वारा प्रयास किए गए। गंगा गंगा नदी के किनारे 500 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं। अनुमानित 2,000,000 लोग रोज़ नदी में स्नान करते हैं, जिसे हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है। गंगा नदी प्रदूषण एक प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम है। NRGBA की स्थापना भारत सरकार की केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 (3) के तहत 20 फरवरी 2009 को की गई थी। इसने गंगा को भारत की "राष्ट्रीय नदी" भी घोषित किया था। [19] कुर्सी में भारत के प्रधान मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं जिनके माध्यम से गंगा बहती है। [२०] यमुना 2012 तक एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली की पवित्र यमुना नदी में प्रति 100cc पानी में 7,500 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया होते थे। नदी को साफ करने के लिए बड़ी संख्या में गैर-सरकारी संगठन, दबाव समूह, इको-क्लब, साथ ही नागरिकों के आंदोलन सक्रिय हैं। भले ही भारत ने सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और जल प्रबंधन को विकेंद्रीकृत करने के लिए 2002 में अपनी राष्ट्रीय जल नीति को संशोधित किया, लेकिन देश की जटिल नौकरशाही यह सुनिश्चित करती है कि यह "मंशा का एक मात्र बयान" बनी रहे। एक दर्जन से अधिक विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में बिना किसी समन्वय के पानी के मुद्दों के प्रबंधन की जिम्मेदारी खंडित है। सरकारी नौकरशाही और राज्य द्वारा संचालित परियोजना विभाग इस परियोजना पर कई साल और 140 मिलियन डॉलर खर्च करने के बावजूद समस्या को हल करने में विफल रहा है।
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भारत में जल प्रदूषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा है। भारत में जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत अनुपचारित सीवेज है। प्रदूषण के अन्य स्रोतों में कृषि अपवाह और अनियमित लघु उद्योग शामिल हैं। भारत में अधिकांश नदियाँ, झीलें और सतही जल प्रदूषित हैं। 2007 के एक अध्ययन में पाया गया कि अनुपचारित सीवेज का निर्वहन भारत में सतह और भूजल के प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में घरेलू अपशिष्ट जल के उत्पादन और उपचार के बीच एक बड़ा अंतर है। समस्या केवल यह नहीं है कि भारत में पर्याप्त उपचार क्षमता का अभाव है, बल्कि यह भी है कि जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं, वे संचालित नहीं होते हैं और न ही बनाए जाते हैं। सरकारी स्वामित्व वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में से अधिकांश अनुचित डिजाइन या खराब रखरखाव या संयंत्रों को संचालित करने के लिए विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की कमी के कारण अधिकांश समय बंद रहते हैं, साथ में अनुपस्थित कर्मचारी और खराब प्रबंधन। इन क्षेत्रों में उत्पन्न अपशिष्ट जल सामान्य रूप से मिट्टी में वाष्पीकृत हो जाता है। शहरी क्षेत्रों में अघोषित कचरा जमा होता है, जिससे अस्वास्थ्यकर स्थिति पैदा होती है और सतह और भूजल में लीच प्रदूषक जारी होते हैं। 1992 के विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन में बताया गया है कि भारत के 3,119 शहरों और शहरों में से सिर्फ 209 में आंशिक रूप से उपचार की सुविधा है, और केवल 8 में पूर्णता है। अपशिष्ट जल उपचार सुविधाएँ। नीचे की ओर, अनुपचारित पानी से प्रदूषित नदी के पानी का उपयोग पीने, नहाने और धोने के लिए किया जाता है। 1995 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 114 भारतीय शहर बिना गंदे सीवेज और आंशिक रूप से शवों को सीधे गंगा नदी में बहा रहे हैं। कई विकासशील देशों की तरह, शौचालयों और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच होता है। यह सतही जल प्रदूषण का एक स्रोत है। शहरों, कस्बों और कुछ गाँवों से निकलने वाली सीवेज भारत में जल प्रदूषण का प्रमुख कारण है। सीवेज इंडिया जेनरेट करता है और प्रति दिन सीवेज की इसकी उपचार क्षमता के बीच अंतर को पाटने के लिए निवेश की आवश्यकता है। भारत के प्रमुख शहरों में प्रति दिन 38,354 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज का उत्पादन होता है, लेकिन शहरी सीवेज उपचार क्षमता केवल 11,786 एमएलडी है। घरेलू सीवेज के निर्वहन के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में भारतीय नदियां गंभीर रूप से प्रदूषित हैं। कार्बनिक पदार्थ 2010 में पानी की गुणवत्ता की निगरानी में बीओडी के उच्च स्तर (कार्बनिक पदार्थों के साथ प्रदूषण का एक उपाय) के साथ लगभग सभी नदियाँ मिलीं। सबसे खराब प्रदूषण, घटते क्रम में, मार्कंडा नदी (490 mg / l BOD) में पाया गया, इसके बाद काली नदी (364), अमलाखड़ी नदी (353), यमुना नहर (247), दिल्ली में यमुना नदी (70) और नदी बेतवा (58)। संदर्भ के लिए, 1 और 2 मिलीग्राम ओ / एल के बीच 5-दिवसीय बीओडी के साथ एक पानी का नमूना एक बहुत साफ पानी को इंगित करता है, 3 से 8 मिलीग्राम ओ / एल मामूली साफ पानी को इंगित करता है, 8 से 20 सीमावर्ती पानी को इंगित करता है, और 20 से अधिक है एमजी ओ / एल पारिस्थितिक रूप से असुरक्षित, प्रदूषित पानी को इंगित करता है। यमुना, गंगा, गोमती, घाघरा नदी, चंबल, माही, वर्धा, गोदावरी, भारत की अन्य सबसे अधिक प्रदूषित जल निकायों में से हैं। संदर्भ के लिए, कोलीफॉर्म 104 MPN / 100 ml से नीचे होना चाहिए, सामान्य रूप से पानी का अनुपस्थित होना इसके लिए सामान्य मानव उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है, और सिंचाई के लिए जहां कोलीफॉर्म कृषि में दूषित पानी से रोग का प्रकोप पैदा कर सकता है। 2006 में, 47 प्रतिशत पानी की गुणवत्ता की निगरानी 500 MPN / 100 मिलीलीटर से ऊपर कोलीफॉर्म सघनता की सूचना दी। 2008 के दौरान, सभी जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों में से 33 प्रतिशत ने कुल कोलीफॉर्म स्तरों को उन स्तरों से अधिक बताया, जो भारत में प्रदूषण नियंत्रण बुनियादी ढांचे को जोड़ने और उपचार संयंत्रों को उन्नत करने के हालिया प्रयास का सुझाव देते हुए जल प्रदूषण की प्रवृत्ति को उलट सकता है। घरेलू सीवेज का उपचार और सिंचाई के लिए उपचारित सीवेज के बाद के उपयोग से जल निकायों के प्रदूषण को रोका जा सकता है, सिंचाई क्षेत्र में ताजे पानी की मांग को कम किया जा सकता है और सिंचाई के लिए एक संसाधन बन सकता है। 2005 से, भारतीय अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का बाजार सालाना 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत में उपचार उपकरणों और आपूर्ति का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जिसमें नई स्थापना के 40 प्रतिशत बाजार में हिस्सेदारी है। इस विस्तार की दर पर, और भारत सरकार ने अपने सुधार के मार्ग पर जारी रखा, सीवेज उपचार संयंत्रों और बिजली के बुनियादी ढांचे के विकास में प्रमुख निवेश, भारत 2015 तक अपनी जल उपचार क्षमता को लगभग तीन गुना कर देगा, और उपचार क्षमता आपूर्ति भारत के दैनिक सीवेज से मेल खाएगी। लगभग 2020 तक जल उपचार आवश्यकताओं। भारत में जल संरक्षण गति प्राप्त कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा गंगा कायाकल्प के प्रयास, यमुना की सफाई सरकार द्वारा शुरू किए गए कुछ प्रयास हैं। चेन्नई में रिवर रिस्टोरेशन ट्रस्ट के प्रयासों से कोऊम, चेन्नई में अडयार नदियों और देश में झीलों और तालाबों को साफ करने के लिए पर्यावरणविद् फाउंडेशन ऑफ इंडिया (ई.एफ.आई) जैसे संगठनों द्वारा प्रयास किए गए। गंगा गंगा नदी के किनारे 500 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं। अनुमानित 2,000,000 लोग रोज़ नदी में स्नान करते हैं, जिसे हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है। गंगा नदी प्रदूषण एक प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम है। NRGBA की स्थापना भारत सरकार की केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 (3) के तहत 20 फरवरी 2009 को की गई थी। इसने गंगा को भारत की "राष्ट्रीय नदी" भी घोषित किया था। [19] कुर्सी में भारत के प्रधान मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं जिनके माध्यम से गंगा बहती है। [२०] यमुना 2012 तक एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली की पवित्र यमुना नदी में प्रति 100cc पानी में 7,500 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया होते थे। नदी को साफ करने के लिए बड़ी संख्या में गैर-सरकारी संगठन, दबाव समूह, इको-क्लब, साथ ही नागरिकों के आंदोलन सक्रिय हैं। भले ही भारत ने सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और जल प्रबंधन को विकेंद्रीकृत करने के लिए 2002 में अपनी राष्ट्रीय जल नीति को संशोधित किया, लेकिन देश की जटिल नौकरशाही यह सुनिश्चित करती है कि यह "मंशा का एक मात्र बयान" बनी रहे। एक दर्जन से अधिक विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में बिना किसी समन्वय के पानी के मुद्दों के प्रबंधन की जिम्मेदारी खंडित है। सरकारी नौकरशाही और राज्य द्वारा संचालित परियोजना विभाग इस परियोजना पर कई साल और 140 मिलियन डॉलर खर्च करने के बावजूद समस्या को हल करने में विफल रहा है। Bharat Mein Jal Pradushan Ek Pramukh Paryavaraniy Mudda Hai Bharat Mein Jal Pradushan Ka Sabse Bada Srot Anupcharit Sivej Hai Pradushan Ke Anya Sroton Mein Krishi Upwah Aur Aniyamit Laghu Udyog Shaamil Hain Bharat Mein Adhikaansh Nadiyan Jheelen Aur Satahi Jal Pradushit Hain 2007 Ke Ek Adhyayan Mein Paya Gaya Ki Anupcharit Sivej Ka Nirvahan Bharat Mein Satah Aur Bhujal Ke Pradushan Ka Sabse Mahatvapurna Srot Hai Bharat Mein Gharelu Apashisht Jal Ke Utpadan Aur Upchaar Ke Bich Ek Bada Antar Hai Samasya Kewal Yeh Nahi Hai Ki Bharat Mein Paryapt Upchaar Kshamta Ka Abhaav Hai Balki Yeh Bhi Hai Ki Jo Sivej Treatment Plant Maujud Hain Ve Sanchalit Nahi Hote Hain Aur N Hi Banaye Jaate Hain Sarkari Swamitwa Wali Sivej Treatment Planton Mein Se Adhikaansh Anuchit Design Ya Kharab Rakharakhav Ya Sanyantron Ko Sanchalit Karne Ke Liye Viswasniya Vidyut Aapurti Ki Kami Ke Kaaran Adhikaansh Samay Band Rehte Hain Saath Mein Anupasthit Karmchari Aur Kharab Prabandhan In Kshetro Mein Utpann Apashisht Jal Samanya Roop Se Mitti Mein Vashpikrit Ho Jata Hai Shehari Kshetro Mein Aghoshit Kachra Jama Hota Hai Jisse Aswasthyakar Sthiti Paida Hoti Hai Aur Satah Aur Bhujal Mein Lich Pradushak Jaari Hote Hain 1992 Ke Vishwa Swasthya Sangathan Ke Adhyayan Mein Bataya Gaya Hai Ki Bharat Ke 3,119 Shaharon Aur Shaharon Mein Se Sirf 209 Mein Aashik Roop Se Upchaar Ki Suvidha Hai Aur Kewal 8 Mein Purnata Hai Apashisht Jal Upchaar Suvidhaen Neeche Ki Oar Anupcharit Pani Se Pradushit Nadi Ke Pani Ka Upyog Peene Nahane Aur Dhone Ke Liye Kiya Jata Hai 1995 Ki Ek Report Mein Daawa Kiya Gaya Hai Ki 114 Bharatiya Sheher Bina Gande Sivej Aur Aashik Roop Se Shavon Ko Seedhe Ganga Nadi Mein Baha Rahe Hain Kai Vikasshil Deshon Ki Tarah Shauchalayo Aur Svachchhata Suvidhaon Ke Abhaav Mein Bharat Ke Gramin Aur Shehari Kshetro Mein Khule Mein Shauch Hota Hai Yeh Satahi Jal Pradushan Ka Ek Srot Hai Shaharon Kasbon Aur Kuch Gaon Se Nikalne Wali Sivej Bharat Mein Jal Pradushan Ka Pramukh Kaaran Hai Sivej India Generate Karta Hai Aur Prati Din Sivej Ki Iski Upchaar Kshamta Ke Bich Antar Ko Paatne Ke Liye Nivesh Ki Avashyakta Hai Bharat Ke Pramukh Shaharon Mein Prati Din 38,354 Million Liter MLD Sivej Ka Utpadan Hota Hai Lekin Shehari Sivej Upchaar Kshamta Kewal 11,786 MLD Hai Gharelu Sivej Ke Nirvahan Ke Parinaamasvaroop Badi Sankhya Mein Bharatiya Nadiyan Gambhir Roop Se Pradushit Hain Carbonic Padarth Mein Pani Ki Gunavatta Ki Nigrani Mein BDO Ke Uccha Sthar Carbonic Padarthon Ke Saath Pradushan Ka Ek Upay Ke Saath Lagbhag Sabhi Nadiyan Mileen Sabse Kharab Pradushan Ghatate Kram Mein Markanda Nadi (490 Mg / L BOD) Mein Paya Gaya Iske Baad Kali Nadi (364), Amalakhdi Nadi (353), Yamuna Nehar (247), Delhi Mein Yamuna Nadi (70) Aur Nadi Betavaa Sandarbh Ke Liye 1 Aur 2 Milligram O / El Ke Bich Divasiya BDO Ke Saath Ek Pani Ka Namuna Ek Bahut Saaf Pani Ko Ingit Karta Hai 3 Se 8 Milligram O / El Mamuli Saaf Pani Ko Ingit Karta Hai 8 Se 20 Seemavarti Pani Ko Ingit Karta Hai Aur 20 Se Adhik Hai Mg O / El Paristhitik Roop Se Asurakshit Pradushit Pani Ko Ingit Karta Hai Yamuna Ganga Gomti Ghaghara Nadi Chambal Maahi Vardha Godavari Bharat Ki Anya Sabse Adhik Pradushit Jal Nikayon Mein Se Hain Sandarbh Ke Liye Kolifarm 104 MPN / 100 Ml Se Neeche Hona Chahiye Samanya Roop Se Pani Ka Anupasthit Hona Iske Liye Samanya Manav Upyog Ke Liye Surakshit Mana Jata Hai Aur Sinchai Ke Liye Jahan Kolifarm Krishi Mein Dushit Pani Se Rog Ka Prakop Paida Kar Sakta Hai 2006 Mein 47 Pratishat Pani Ki Gunavatta Ki Nigrani 500 MPN / 100 Milliliter Se Upar Kolifarm Saghanata Ki Soochna Di 2008 Ke Dauran Sabhi Jal Gunavatta Nigrani Stationo Mein Se 33 Pratishat Ne Kul Kolifarm Staron Ko Un Staron Se Adhik Bataya Jo Bharat Mein Pradushan Niyantran Buniyaadi Dhanche Ko Jodne Aur Upchaar Sanyantron Ko Unnat Karne Ke Haliya Prayas Ka Sujhaav Dete Huye Jal Pradushan Ki Pravritti Ko Ulat Sakta Hai Gharelu Sivej Ka Upchaar Aur Sinchai Ke Liye Upachaarit Sivej Ke Baad Ke Upyog Se Jal Nikayon Ke Pradushan Ko Roka Ja Sakta Hai Sinchai Shetra Mein Taje Pani Ki Maang Ko Kam Kiya Ja Sakta Hai Aur Sinchai Ke Liye Ek Sansadhan Ban Sakta Hai 2005 Se Bharatiya Apashisht Jal Upchaar Sanyantra Ka Bazar Salana 10 Se 12 Pratishat Ki Dar Se Badh Raha Hai Samyukt Rajya America Bharat Mein Upchaar Upkarno Aur Aapurti Ka Sabse Bada Apurtikarta Hai Jisme Nayi Sthapana Ke 40 Pratishat Bazar Mein Hissedaari Hai Is Vistar Ki Dar Par Aur Bharat Sarkar Ne Apne Sudhaar Ke Marg Par Jaari Rakha Sivej Upchaar Sanyantron Aur Bijli Ke Buniyaadi Dhanche Ke Vikash Mein Pramukh Nivesh Bharat 2015 Tak Apni Jal Upchaar Kshamta Ko Lagbhag Teen Guna Kar Dega Aur Upchaar Kshamta Aapurti Bharat Ke Dainik Sivej Se Mail Khaegee Lagbhag 2020 Tak Jal Upchaar Avashayaktao Bharat Mein Jal Sanrakshan Gati Prapt Kar Raha Hai Kendra Sarkar Dwara Ganga Kayakalp Ke Prayas Yamuna Ki Safaai Sarkar Dwara Shuru Kiye Gaye Kuch Prayas Hain Chennai Mein River Restoration Trust Ke Prayaso Se Koum Chennai Mein Adayar Nadiyon Aur Desh Mein Jhilon Aur Taalabon Ko Saaf Karne Ke Liye Paryavaranavid Foundation Of India Ee F I Jaise Sangathano Dwara Prayas Kiye Gaye Ganga Ganga Nadi Ke Kinare 500 Million Se Adhik Log Rehte Hain Anumaneet 2,000,000 Log Roz Nadi Mein Snan Karte Hain Jise Hinduon Dwara Pavitra Mana Jata Hai Ganga Nadi Pradushan Ek Pramukh Swasthya Jokhim Hai Ki Sthapana Bharat Sarkar Ki Kendra Sarkar Dwara Paryaavaran Sanrakshan Adhiniyam 1986 Ki Dhara 3 (3) Ke Tahat 20 February 2009 Ko Ki Gayi Thi Isane Ganga Ko Bharat Ki Rashtriya Nadi Bhi Ghoshit Kiya Tha [19] Kursi Mein Bharat Ke Pradhan Mantri Aur Rajyo Ke Mukhyamantri Shaamil Hain Jinke Maadhyam Se Ganga Behti Hai 20 Yamuna Tak Ek Anumaan Ke Mutabik Delhi Ki Pavitra Yamuna Nadi Mein Prati 100cc Pani Mein 7,500 Kolifarm Bacteria Hote The Nadi Ko Saaf Karne Ke Liye Badi Sankhya Mein Gair Sarkari Sangathan Dabaav Samuh Iko Club Saath Hi Naagrikon Ke Aandolan Sakriy Hain Bhale Hi Bharat Ne Samudayik Bhagidari Ko Protsahit Karne Aur Jal Prabandhan Ko Vikendrikrit Karne Ke Liye 2002 Mein Apni Rashtriya Jal Niti Ko Sanshodhit Kiya Lekin Desh Ki Jatil Naukarshahi Yeh Sunishchit Karti Hai Ki Yeh Mansha Ka Ek Matra Bayan Bani Rahe Ek Darjan Se 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दुनिया की किसी नदी के पास इतना समृद्ध इतिहास, संस्कृति और इतनी धार्मिक महत्ता नहीं है जितनी यमुना के पास है। फिर भी पता नहीं क्यों भारत के लोग नदियों को इतना प्रदूषित कर रहे हैं। लोंगों को नदियों की सुरक्षा और उनमें गंदगी न करने का फैसला लेना चाहिए भारत की नदियों को साफ-सुरक्षित बनाने के लिए जनता को जागरूक होना चाहिंए। भारत में ऐसा लगता है कि लोग प्रदूषण के प्रति संज्ञा-शून्य हो गए हैं और उनकी संवेदनशीलता भी कमजोर हो गई है। हमें उनकी सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहिंए।
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दुनिया की किसी नदी के पास इतना समृद्ध इतिहास, संस्कृति और इतनी धार्मिक महत्ता नहीं है जितनी यमुना के पास है। फिर भी पता नहीं क्यों भारत के लोग नदियों को इतना प्रदूषित कर रहे हैं। लोंगों को नदियों की सुरक्षा और उनमें गंदगी न करने का फैसला लेना चाहिए भारत की नदियों को साफ-सुरक्षित बनाने के लिए जनता को जागरूक होना चाहिंए। भारत में ऐसा लगता है कि लोग प्रदूषण के प्रति संज्ञा-शून्य हो गए हैं और उनकी संवेदनशीलता भी कमजोर हो गई है। हमें उनकी सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहिंए।Duniya Ki Kisi Nadi Ke Paas Itna Samriddh Itihas Sanskriti Aur Itni Dharmik Mahatta Nahi Hai Jitni Yamuna Ke Paas Hai Phir Bhi Pata Nahi Kyon Bharat Ke Log Nadiyon Ko Itna Pradushit Kar Rahe Hain Longon Ko Nadiyon Ki Suraksha Aur Unmen Gandagi N Karne Ka Faisla Lena Chahiye Bharat Ki Nadiyon Ko Saaf Surakshit Banane Ke Liye Janta Ko Jaagruk Hona Chahinye Bharat Mein Aisa Lagta Hai Ki Log Pradushan Ke Prati Sangya Shunya Ho Gaye Hain Aur Unki Samvedansheelata Bhi Kamjor Ho Gayi Hai Hume Unki Suraksha Ka Jimma Lena Chahinye
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भारत में जल प्रदूषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा है। भारत में जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत अनुपचारित सीवेज है। प्रदूषण के अन्य स्रोतों में कृषि अपवाह और अनियमित लघु उद्योग शामिल हैं। भारत में अधिकांश नदियाँ, झीलें और सतही जल प्रदूषित हैं। गंगा नदी में जल प्रदूषण का मुख्य कारण जनसंख्या घनत्व में वृद्धि, विभिन्न मानवीय गतिविधियाँ जैसे स्नान करना, कपड़े धोना, पशुओं का नहाना और विभिन्न हानिकारक औद्योगिक अपशिष्टों को नदियों में डालना है।
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भारत में जल प्रदूषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा है। भारत में जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत अनुपचारित सीवेज है। प्रदूषण के अन्य स्रोतों में कृषि अपवाह और अनियमित लघु उद्योग शामिल हैं। भारत में अधिकांश नदियाँ, झीलें और सतही जल प्रदूषित हैं। गंगा नदी में जल प्रदूषण का मुख्य कारण जनसंख्या घनत्व में वृद्धि, विभिन्न मानवीय गतिविधियाँ जैसे स्नान करना, कपड़े धोना, पशुओं का नहाना और विभिन्न हानिकारक औद्योगिक अपशिष्टों को नदियों में डालना है।Bharat Mein Jal Pradushan Ek Pramukh Paryavaraniy Mudda Hai Bharat Mein Jal Pradushan Ka Sabse Bada Srot Anupcharit Sivej Hai Pradushan Ke Anya Sroton Mein Krishi Upwah Aur Aniyamit Laghu Udyog Shaamil Hain Bharat Mein Adhikaansh Nadiyan Jheelen Aur Satahi Jal Pradushit Hain Ganga Nadi Mein Jal Pradushan Ka Mukhya Kaaran Jansankhya Ghanatva Mein Vriddhi Vibhinn Manviya Gatividhiyaa Jaise Snan Karna Kapde Dhona Pashuo Ka Nahana Aur Vibhinn Haanikarak Audhyogik Apashishton Ko Nadiyon Mein Daalna Hai
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