क्या प्रेम मात्र आकर्षण है या और भी कुछ है? ...

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बहुत कुछ है पर आकर्षण नहीं है प्रेम की जो परिभाषा आजकल की हवा में पाई जाती है वह बॉलीवुड से आती है और वह काफी विचलित है मैं उस पर बात भी नहीं करना चाहता मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि प्रेम क्या है जो आप जो आप अपने माता-पिता से करता जो आप अपने पेट आपके जो पालतू जानवर है उसे करते हैं यह वातावरण से करते हैं इमोशन है जो ईश्वरप्रदत्त है यह इनबिल्ड आपके बॉडी में है यह किसी के साथ बुलाओ पैदा कर सकता है उस जुड़ाव के ऊपर क्या रंग हो गए गुलाब का क्या भाव हो गई जोड़ों का यह आप तय करते हैं आप कि आपका प्रेम प्रेमिका के साथ और आपका प्रेम माता पिता माता पिता के साथ दोनों दो तरह के प्रेम है लेकिन दोनों के अंदर में जो भावना है वही है वह भावना जो किसी भी जीवित प्राणी के लिए आपको एक जुड़ाव देता है ईश्वर प्रेम जो है वह किसी से भेदभाव नहीं करता मैं तो आप करते हैं आपने प्रेम की डिप्रेशन बना रखी है तो आकर्षण प्रेम हो ही नहीं सकता मैं तो मैं तुमसे मानता ही नहीं आकर्षण आकर्षण है वह खुद में एक शब्द है और प्रेम एक बिल्कुल शुद्ध इमोशन है वह स्वभाव है वह बिल्कुल अलग दुनिया ही है योगियों का योगियों को ईश्वर से प्रेम रहता है और किसी से प्रेम नहीं रहता बाकी सब को वह भूकंप आया बोलते हैं बस ट्रेन किस से बस परमेश्वर से प्रेम इस बात से है कि मुझे सत्य का ज्ञान मिल गया प्रेम जो है वह काफी सुधार है उसको हमने अपने तरीके से अलग-अलग सांचे में डालकर देखा है वह चश्मा हटाने की जरूरत है तब आप को शांति की जगह किया कर सावरिया फ्री काशी किधर है
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बहुत कुछ है पर आकर्षण नहीं है प्रेम की जो परिभाषा आजकल की हवा में पाई जाती है वह बॉलीवुड से आती है और वह काफी विचलित है मैं उस पर बात भी नहीं करना चाहता मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि प्रेम क्या है जो आप जो आप अपने माता-पिता से करता जो आप अपने पेट आपके जो पालतू जानवर है उसे करते हैं यह वातावरण से करते हैं इमोशन है जो ईश्वरप्रदत्त है यह इनबिल्ड आपके बॉडी में है यह किसी के साथ बुलाओ पैदा कर सकता है उस जुड़ाव के ऊपर क्या रंग हो गए गुलाब का क्या भाव हो गई जोड़ों का यह आप तय करते हैं आप कि आपका प्रेम प्रेमिका के साथ और आपका प्रेम माता पिता माता पिता के साथ दोनों दो तरह के प्रेम है लेकिन दोनों के अंदर में जो भावना है वही है वह भावना जो किसी भी जीवित प्राणी के लिए आपको एक जुड़ाव देता है ईश्वर प्रेम जो है वह किसी से भेदभाव नहीं करता मैं तो आप करते हैं आपने प्रेम की डिप्रेशन बना रखी है तो आकर्षण प्रेम हो ही नहीं सकता मैं तो मैं तुमसे मानता ही नहीं आकर्षण आकर्षण है वह खुद में एक शब्द है और प्रेम एक बिल्कुल शुद्ध इमोशन है वह स्वभाव है वह बिल्कुल अलग दुनिया ही है योगियों का योगियों को ईश्वर से प्रेम रहता है और किसी से प्रेम नहीं रहता बाकी सब को वह भूकंप आया बोलते हैं बस ट्रेन किस से बस परमेश्वर से प्रेम इस बात से है कि मुझे सत्य का ज्ञान मिल गया प्रेम जो है वह काफी सुधार है उसको हमने अपने तरीके से अलग-अलग सांचे में डालकर देखा है वह चश्मा हटाने की जरूरत है तब आप को शांति की जगह किया कर सावरिया फ्री काशी किधर हैBahut Kuch Hai Par Aakarshan Nahi Hai Prem Ki Jo Paribhasha Aajkal Ki Hawa Mein Payi Jati Hai Wah Bollywood Se Aati Hai Aur Wah Kafi Vichalit Hai Main Us Par Baat Bhi Nahi Karna Chahta Main Bus Itna Kehna Chahta Hoon Ki Prem Kya Hai Jo Aap Jo Aap Apne Mata Pita Se Karta Jo Aap Apne Pet Aapke Jo Paaltu Janwar Hai Use Karte Hain Yeh Vatavaran Se Karte Hain Emotion Hai Jo Hai Yeh Aapke Body Mein Hai Yeh Kisi Ke Saath Paida Kar Sakta Hai Us Judaav Ke Upar Kya Rang Ho Gaye Gulab Ka Kya Bhav Ho Gayi Jodo Ka Yeh Aap Tay Karte Hain Aap Ki Aapka Prem Premika Ke Saath Aur Aapka Prem Mata Pita Mata Pita Ke Saath Dono Do Tarah Ke Prem Hai Lekin Dono Ke Andar Mein Jo Bhavna Hai Wahi Hai Wah Bhavna Jo Kisi Bhi Jeevit Prani Ke Liye Aapko Ek Judaav Deta Hai Ishwar Prem Jo Hai Wah Kisi Se Bhedbhav Nahi Karta Main To Aap Karte Hain Aapne Prem Ki Depression Bana Rakhi Hai To Aakarshan Prem Ho Hi Nahi Sakta Main To Main Tumse Manata Hi Nahi Aakarshan Aakarshan Hai Wah Khud Mein Ek Shabdh Hai Aur Prem Ek Bilkul Shudh Emotion Hai Wah Swabhav Hai Wah Bilkul Alag Duniya Hi Hai Yogiyon Ka Yogiyon Ko Ishwar Se Prem Rehta Hai Aur Kisi Se Prem Nahi Rehta Baki Sab Ko Wah Bhukamp Aaya Bolte Hain Bus Train Kis Se Bus Parmeshwar Se Prem Is Baat Se Hai Ki Mujhe Satya Ka Gyaan Mil Gaya Prem Jo Hai Wah Kafi Sudhaar Hai Usko Humne Apne Tarike Se Alag Alag Mein Dalkar Dekha Hai Wah Chashma Hatane Ki Zaroorat Hai Tab Aap Ko Shanti Ki Jagah Kiya Kar Free Kashi Kidhar Hai
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परंतु फिर भी जुड़ाव है आकर्षण नहीं है परंतु फिर भी संबंधित हैं तो समझना प्रदेश में अंतर करना पड़ेगा कर सकता है आदत के फूल सूख कर दो शरीर एक दूसरे के साथ गले मिले हुए थे तभी मकान मिले हुए रहेंगे और आकर्षण और प्राण भी नहीं है आकर्षण नहीं है और प्राण भी नहीं है अधिकांश था मामले जो अरेंज मैरिज के होते हैं वह ऐसे होते हैं इतने करीब करीब से देखा नहीं है क्यों नहीं हो गया गंभीर आदत पड़ गई है दूसरे को देखने की आदत को होने पर एक प्रेम से प्रेम नहीं है आदत है 8:30 40 साल किसी भी चीज के साथ रहो आपको आदत पड़ जाएगी आप एक छड़ी के साथ भी 30 साल हो तो आप मुझसे बिछड़ रहे हो तो आदत पड़ जाएगी
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परंतु फिर भी जुड़ाव है आकर्षण नहीं है परंतु फिर भी संबंधित हैं तो समझना प्रदेश में अंतर करना पड़ेगा कर सकता है आदत के फूल सूख कर दो शरीर एक दूसरे के साथ गले मिले हुए थे तभी मकान मिले हुए रहेंगे और आकर्षण और प्राण भी नहीं है आकर्षण नहीं है और प्राण भी नहीं है अधिकांश था मामले जो अरेंज मैरिज के होते हैं वह ऐसे होते हैं इतने करीब करीब से देखा नहीं है क्यों नहीं हो गया गंभीर आदत पड़ गई है दूसरे को देखने की आदत को होने पर एक प्रेम से प्रेम नहीं है आदत है 8:30 40 साल किसी भी चीज के साथ रहो आपको आदत पड़ जाएगी आप एक छड़ी के साथ भी 30 साल हो तो आप मुझसे बिछड़ रहे हो तो आदत पड़ जाएगीParantu Phir Bhi Judaav Hai Aakarshan Nahi Hai Parantu Phir Bhi Sambandhit Hain To Samajhna Pradesh Mein Antar Karna Padega Kar Sakta Hai Aadat Ke Fool Sukh Kar Do Sharir Ek Dusre Ke Saath Gale Mile Huye The Tabhi Makan Mile Huye Rahenge Aur Aakarshan Aur Praan Bhi Nahi Hai Aakarshan Nahi Hai Aur Praan Bhi Nahi Hai Adhikaansh Tha Mamle Jo Arrange Marriage Ke Hote Hain Wah Aise Hote Hain Itne Karib Karib Se Dekha Nahi Hai Kyon Nahi Ho Gaya Gambhir Aadat Padh Gayi Hai Dusre Ko Dekhne Ki Aadat Ko Hone Par Ek Prem Se Prem Nahi Hai Aadat Hai 8:30 40 Saal Kisi Bhi Cheez Ke Saath Raho Aapko Aadat Padh Jayegi Aap Ek Chadi Ke Saath Bhi 30 Saal Ho To Aap Mujhse Bichhad Rahe Ho To Aadat Padh Jayegi
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नमस्कार पहले तो आपको एक चीज जान लेना चाहिए कि प्रेम और आकर्षण में बहुत अंतर होता है प्रेम में सद्भाव मिस्टर एवं त्याग की भावना रहती है और यह मन और अंतरात्मा से होता है जबकि आकर्षण इससे अलग है और यह सुंदर एवं उत्तेजना से होता है अगर आपको अपने लोगों से होगा लेकिन प्रेम सिर्फ यह क्या बहुत कम ही लोगों से होगा शायद इसलिए आपकी लाइफ में माता-पिता भाई-बहन एवं प्रियंका की जगह कोई और नहीं ले सकता है और आप सबसे ज्यादा प्यार भी उन्हीं लोगों से करते हैं जबकि आकर्षण आकर्षण में लोग समय के साथ व्यक्ति को भुला देते हैं मान लो कि एक सुंदर लड़की है वह आपका आकर्षण का केंद्र है लेकिन जैसे ही उससे अधिक कोई और सुंदर लड़की आपकी जिंदगी में आएगी या आप को देखेगी आप उसकी तरफ आकर्षित हो जाएंगे जबकि अगर आप किसी से सच्चा प्यार करते हो तो आपके सामने कितनी भी सुंदर लड़की क्यों ना जाए आपका मन कभी विचलित नहीं होगा शायद इसलिए ही आप माता-पिता से अपने सबसे ज्यादा प्यार करती हूं या यह प्यार है ना कि आकर्षण आकर्षण इससे अलग चीज होती है बस सौंदर्य से संबंधित होती है जबकि प्यार अंतरात्मा तन मन से होता है जब की सुंदरता जो आकर्षण है केवल सुंदरता पर डिपेंड करती है जबकि जो प्यार है वह आपकी लाइफ में हमेशा बना रहेगा धन्यवाद
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नमस्कार पहले तो आपको एक चीज जान लेना चाहिए कि प्रेम और आकर्षण में बहुत अंतर होता है प्रेम में सद्भाव मिस्टर एवं त्याग की भावना रहती है और यह मन और अंतरात्मा से होता है जबकि आकर्षण इससे अलग है और यह सुंदर एवं उत्तेजना से होता है अगर आपको अपने लोगों से होगा लेकिन प्रेम सिर्फ यह क्या बहुत कम ही लोगों से होगा शायद इसलिए आपकी लाइफ में माता-पिता भाई-बहन एवं प्रियंका की जगह कोई और नहीं ले सकता है और आप सबसे ज्यादा प्यार भी उन्हीं लोगों से करते हैं जबकि आकर्षण आकर्षण में लोग समय के साथ व्यक्ति को भुला देते हैं मान लो कि एक सुंदर लड़की है वह आपका आकर्षण का केंद्र है लेकिन जैसे ही उससे अधिक कोई और सुंदर लड़की आपकी जिंदगी में आएगी या आप को देखेगी आप उसकी तरफ आकर्षित हो जाएंगे जबकि अगर आप किसी से सच्चा प्यार करते हो तो आपके सामने कितनी भी सुंदर लड़की क्यों ना जाए आपका मन कभी विचलित नहीं होगा शायद इसलिए ही आप माता-पिता से अपने सबसे ज्यादा प्यार करती हूं या यह प्यार है ना कि आकर्षण आकर्षण इससे अलग चीज होती है बस सौंदर्य से संबंधित होती है जबकि प्यार अंतरात्मा तन मन से होता है जब की सुंदरता जो आकर्षण है केवल सुंदरता पर डिपेंड करती है जबकि जो प्यार है वह आपकी लाइफ में हमेशा बना रहेगा धन्यवादNamaskar Pehle To Aapko Ek Cheez Jaan Lena Chahiye Ki Prem Aur Aakarshan Mein Bahut Antar Hota Hai Prem Mein Sadbhav Mister Evam Tyag Ki Bhavna Rehti Hai Aur Yeh Man Aur Se Hota Hai Jabki Aakarshan Isse Alag Hai Aur Yeh Sundar Evam Uttejna Se Hota Hai Agar Aapko Apne Logon Se Hoga Lekin Prem Sirf Yeh Kya Bahut Kam Hi Logon Se Hoga Shayad Isliye Aapki Life Mein Mata Pita Bhai Behen Evam Priyanka Ki Jagah Koi Aur Nahi Le Sakta Hai Aur Aap Sabse Jyada Pyar Bhi Unhin Logon Se Karte Hain Jabki Aakarshan Aakarshan Mein Log Samay Ke Saath Vyakti Ko Bhula Dete Hain Maan Lo Ki Ek Sundar Ladki Hai Wah Aapka Aakarshan Ka Kendra Hai Lekin Jaise Hi Usse Adhik Koi Aur Sundar Ladki Aapki Zindagi Mein Aaegi Ya Aap Ko Aap Uski Taraf Aakarshit Ho Jaenge Jabki Agar Aap Kisi Se Saccha Pyar Karte Ho To Aapke Samane Kitni Bhi Sundar Ladki Kyon Na Jaye Aapka Man Kabhi Vichalit Nahi Hoga Shayad Isliye Hi Aap Mata Pita Se Apne Sabse Jyada Pyar Karti Hoon Ya Yeh Pyar Hai Na Ki Aakarshan Aakarshan Isse Alag Cheez Hoti Hai Bus Saundarya Se Sambandhit Hoti Hai Jabki Pyar Tan Man Se Hota Hai Jab Ki Sundarata Jo Aakarshan Hai Kewal Sundarata Par Depend Karti Hai Jabki Jo Pyar Hai Wah Aapki Life Mein Hamesha Bana Rahega Dhanyavad
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क्या प्रेम माता आकर्षण है या और कुछ भी बहुत अच्छा सवाल है या अगर हम बात करें आकर्षण और प्यार के आकर्षण प्यार नहीं है प्यार आकर्षण हो सकता है पर आकर्षण प्यार नहीं है हां यह हो सकता है आकर्षण से प्यार की शुरुआत और आकर्षण से बहुत ऊपर है इतना ऊपर के आगे कुछ है ही नहीं सबसे ऊपर प्यारे आकर्षण तो होता है जिसे हम देखते हैं वह हमें पसंद आ जाता है और उसके खो जाते हैं पर प्यार प्यार प्यार तो वह होता है जिसके तरह हम जुड़ जाते हैं आकर्षित आंखों से जो रहता है वह नहीं रहता पर प्यार एक बूंद है एक बार बंद गया तो कभी नहीं छोड़ पाता प्यार एक ऐसा जोड़ा गया वहां पर हम भी नहीं वह भी नहीं सिर्फ प्यार ही प्यार सोता है अगर आप कैसे सोच क्या तेरा पैट्रिक होते हैं मान लो कि कोई अच्छी बांसुरी बजाता है और आपको भी बांसुरी बजाने का मन होता है और आप ट्राई भी करेंगे बांसुरी बजाने का प्राप्त ना सक्सेस नहीं हो पाएंगे जितना वह बांसुरी बजाने में कक्षा से क्योंकि उसे बांसुरी से प्यार है और आपको अट्रैक्शन है यही डिफरेंस होता है प्यार और अट्रैक्शन में
क्या प्रेम माता आकर्षण है या और कुछ भी बहुत अच्छा सवाल है या अगर हम बात करें आकर्षण और प्यार के आकर्षण प्यार नहीं है प्यार आकर्षण हो सकता है पर आकर्षण प्यार नहीं है हां यह हो सकता है आकर्षण से प्यार की शुरुआत और आकर्षण से बहुत ऊपर है इतना ऊपर के आगे कुछ है ही नहीं सबसे ऊपर प्यारे आकर्षण तो होता है जिसे हम देखते हैं वह हमें पसंद आ जाता है और उसके खो जाते हैं पर प्यार प्यार प्यार तो वह होता है जिसके तरह हम जुड़ जाते हैं आकर्षित आंखों से जो रहता है वह नहीं रहता पर प्यार एक बूंद है एक बार बंद गया तो कभी नहीं छोड़ पाता प्यार एक ऐसा जोड़ा गया वहां पर हम भी नहीं वह भी नहीं सिर्फ प्यार ही प्यार सोता है अगर आप कैसे सोच क्या तेरा पैट्रिक होते हैं मान लो कि कोई अच्छी बांसुरी बजाता है और आपको भी बांसुरी बजाने का मन होता है और आप ट्राई भी करेंगे बांसुरी बजाने का प्राप्त ना सक्सेस नहीं हो पाएंगे जितना वह बांसुरी बजाने में कक्षा से क्योंकि उसे बांसुरी से प्यार है और आपको अट्रैक्शन है यही डिफरेंस होता है प्यार और अट्रैक्शन में
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आकर्षण तो सिर्फ रूप में होता है शरीर में होता है प्रेम तो एक होती है जैसे राधा कृष्ण का प्रेम प्रेम यही सत्य है जिसका जिस्म से कोई संबंध नहीं है मन से है वास्तव में आत्माओं का मिलन ही सच्चा प्रेम है सच्ची भक्ति है प्रेम में आकर्षण नहीं होता अनुभव होता है तरंग होता है होती है आनंद होता है यही राधा कृष्ण की तरह सच्चा प्रेम ही भक्ति है
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आकर्षण तो सिर्फ रूप में होता है शरीर में होता है प्रेम तो एक होती है जैसे राधा कृष्ण का प्रेम प्रेम यही सत्य है जिसका जिस्म से कोई संबंध नहीं है मन से है वास्तव में आत्माओं का मिलन ही सच्चा प्रेम है सच्ची भक्ति है प्रेम में आकर्षण नहीं होता अनुभव होता है तरंग होता है होती है आनंद होता है यही राधा कृष्ण की तरह सच्चा प्रेम ही भक्ति हैAakarshan To Sirf Roop Mein Hota Hai Sharir Mein Hota Hai Prem To Ek Hoti Hai Jaise Radha Krishan Ka Prem Prem Yahi Satya Hai Jiska Jism Se Koi Sambandh Nahi Hai Man Se Hai Vaastav Mein Aatmaon Ka Milan Hi Saccha Prem Hai Sachi Bhakti Hai Prem Mein Aakarshan Nahi Hota Anubhav Hota Hai Tarang Hota Hai Hoti Hai Anand Hota Hai Yahi Radha Krishan Ki Tarah Saccha Prem Hi Bhakti Hai
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आकर्षण अट्रैक्शन शुरुआती अवस्था एक्टिंग इन जब आप किसी से प्रभावित होंगे उसकी तरफ आकर्षित होते हैं तो इस क्रीम नहीं होता इसलिए आप उसके व्यक्तित्व से उसकी पर्सनालिटी से उसकी रूप से प्रभावित होकर आप उसकी तरफ तू अब अपने विचार बनाते हैं उसको कहते हैं अट्रैक्शन लेकिन प्लीज इसे कहीं ऊपर है प्लीज व्याकरण की दृष्टि से परम से आता है सुप्रीम प्रेम मतलब होता है पर अब सुप्रीम यानी उसके ऊपर कुछ भी नहीं सर्वोच्च सर्वशक्तिमान प्रेम जहां शांति हो जहां आप मौन हो जाए जहां विचारों का प्रधान प्रधान करने के लिए शब्दों की जरूरत ना रहे टीम का सबसे उत्कृष्ट रूप है टीम इससे कहीं और अधिक है मतलब टीम व्याकरण की दृष्टि से परम से आया तो परम मित्र थे और अब सुप्रीम होता तो उसके ऊपर कुछ है ही नहीं प्रेम के अलावा कुछ और प्राप्त करना ही नहीं है तू अट्रैक्शन एक एलिमेंट हो सकता है अब तक पहुंचने के लिए लेकिन अट्रैक्शन कोई प्रेम नहीं हो सकता अट्रैक्शन अलग चीज है प्रेम अलग चीज है थैंक यू
आकर्षण अट्रैक्शन शुरुआती अवस्था एक्टिंग इन जब आप किसी से प्रभावित होंगे उसकी तरफ आकर्षित होते हैं तो इस क्रीम नहीं होता इसलिए आप उसके व्यक्तित्व से उसकी पर्सनालिटी से उसकी रूप से प्रभावित होकर आप उसकी तरफ तू अब अपने विचार बनाते हैं उसको कहते हैं अट्रैक्शन लेकिन प्लीज इसे कहीं ऊपर है प्लीज व्याकरण की दृष्टि से परम से आता है सुप्रीम प्रेम मतलब होता है पर अब सुप्रीम यानी उसके ऊपर कुछ भी नहीं सर्वोच्च सर्वशक्तिमान प्रेम जहां शांति हो जहां आप मौन हो जाए जहां विचारों का प्रधान प्रधान करने के लिए शब्दों की जरूरत ना रहे टीम का सबसे उत्कृष्ट रूप है टीम इससे कहीं और अधिक है मतलब टीम व्याकरण की दृष्टि से परम से आया तो परम मित्र थे और अब सुप्रीम होता तो उसके ऊपर कुछ है ही नहीं प्रेम के अलावा कुछ और प्राप्त करना ही नहीं है तू अट्रैक्शन एक एलिमेंट हो सकता है अब तक पहुंचने के लिए लेकिन अट्रैक्शन कोई प्रेम नहीं हो सकता अट्रैक्शन अलग चीज है प्रेम अलग चीज है थैंक यू
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दोस्तों आजकल जो हो रहा है ना लोगों को वह प्रेम नहीं है वह अट्रैक्शन है क्योंकि आजकल जो प्यार है ना वह कई इंस्टॉलमेंट में लोगों को हो रहा है पहले एक से किया फिर कुछ समय तक चला फिर कोई दूसरा ढूंढ लेते हैं फिर दूसरे से कोई प्रॉब्लम होगी तो तीसरा ढूंढ लेते हैं तो आप मतलब आप खुद सोचें इट्स नॉट ए प्रैक्टिकल अप्रोच टो सी एनीथिंग तो आजकल जो हो रहा है ना वह आकर्षण ही है प्रेम तो किसी जमाने में हुआ करता था मतलब आप किसी से दूर रहकर भी किसी के करीब रहे वह फिल्म प्रेम में होती है आप अपनी जिंदगी भी लगानी पड़े किसी के लिए तो आप उससे पीछे नहीं हटते हैं वह प्रेम होता है मतलब आप किसी की तकलीफ की वजह कभी नहीं बनते चाहे सामने वाला आपको भाव दे या ना दे आजकल तो यह हो गया कि कोई हमारे हमसे प्यार करें तभी हम उसे प्यार करेंगे तो मतलब कितना कंडीशनिंग चीजें आजकल चल रही है तो जो प्रेम बड़े ना प्रेम वर्ड प्यार जिसको बोलते हैं वह आजकल की जो जेनरेशन है वह उसको ठीक से नहीं कर पा रही है वह एक फिजिकल अट्रैक्शन को ही कई बार प्यार मान लेती है जबकि फिजिकल अट्रैक्शन तो हमारी जो एज और हमारे जो केमिकल रिएक्शन हमारे अंदर चलते रहते हैं उसकी वजह से होता है कि एक खास उम्र में आप अपोजिट सेक्स की तरफ अट्रेक्ट होते हैं तो यह बिल्कुल आपकी फिजिकल अपीयरेंस है लेकिन प्रेम तो भी ऑन फिजिकल अपीयरेंस है वह ढूंढ आपकी इमैजिनेशन है मतलब वहां शरीर के अलावा आप मन के तल पर जिस को बोलते हैं ना मन से किसी से जुड़ ना वह एक प्रेम की चीज है जितना मैंने प्रेम को समझा हेतु प्रेमी कैसी भावना है जिसमें आप हमेशा दूसरों का अच्छा ही सोचते हैं दूसरों से जुड़ने की आपकी कोशिश रहती है लेकिन सामने वाला कर इंटरेस्टेड ना हो तो भी आप कर सकते
दोस्तों आजकल जो हो रहा है ना लोगों को वह प्रेम नहीं है वह अट्रैक्शन है क्योंकि आजकल जो प्यार है ना वह कई इंस्टॉलमेंट में लोगों को हो रहा है पहले एक से किया फिर कुछ समय तक चला फिर कोई दूसरा ढूंढ लेते हैं फिर दूसरे से कोई प्रॉब्लम होगी तो तीसरा ढूंढ लेते हैं तो आप मतलब आप खुद सोचें इट्स नॉट ए प्रैक्टिकल अप्रोच टो सी एनीथिंग तो आजकल जो हो रहा है ना वह आकर्षण ही है प्रेम तो किसी जमाने में हुआ करता था मतलब आप किसी से दूर रहकर भी किसी के करीब रहे वह फिल्म प्रेम में होती है आप अपनी जिंदगी भी लगानी पड़े किसी के लिए तो आप उससे पीछे नहीं हटते हैं वह प्रेम होता है मतलब आप किसी की तकलीफ की वजह कभी नहीं बनते चाहे सामने वाला आपको भाव दे या ना दे आजकल तो यह हो गया कि कोई हमारे हमसे प्यार करें तभी हम उसे प्यार करेंगे तो मतलब कितना कंडीशनिंग चीजें आजकल चल रही है तो जो प्रेम बड़े ना प्रेम वर्ड प्यार जिसको बोलते हैं वह आजकल की जो जेनरेशन है वह उसको ठीक से नहीं कर पा रही है वह एक फिजिकल अट्रैक्शन को ही कई बार प्यार मान लेती है जबकि फिजिकल अट्रैक्शन तो हमारी जो एज और हमारे जो केमिकल रिएक्शन हमारे अंदर चलते रहते हैं उसकी वजह से होता है कि एक खास उम्र में आप अपोजिट सेक्स की तरफ अट्रेक्ट होते हैं तो यह बिल्कुल आपकी फिजिकल अपीयरेंस है लेकिन प्रेम तो भी ऑन फिजिकल अपीयरेंस है वह ढूंढ आपकी इमैजिनेशन है मतलब वहां शरीर के अलावा आप मन के तल पर जिस को बोलते हैं ना मन से किसी से जुड़ ना वह एक प्रेम की चीज है जितना मैंने प्रेम को समझा हेतु प्रेमी कैसी भावना है जिसमें आप हमेशा दूसरों का अच्छा ही सोचते हैं दूसरों से जुड़ने की आपकी कोशिश रहती है लेकिन सामने वाला कर इंटरेस्टेड ना हो तो भी आप कर सकते
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प्रेम को पाने के लिए आकर्षण उतना ही जरूरी है जितना की बरसात के बाद जैसे लहरा हाथी फसलों का हाल होता है मानते हैं कि आकर्षण बहुत देर तक स्थिर रहने वाली चीज नहीं है दो-तीन महीने तक जब हम किसी इंसान से जुड़ते हैं तो शुरुआती दिनों में हम से आकर्षण की वजह से जुड़ते हैं परंतु जब हम उस इंसान को समझते हैं तो वास्तविक रूप से आकर्षण या तो पूरी तरह से खत्म हो चुका होता है अगर आकर्षण बना रहता है तो धीरे-धीरे को प्रेम का रूप लेने लग जाता है इस प्रकार से हम समझ सकते हैं कि आकर्षण अस्थिर चीज है और स्थिर रूप है इसका प्रेम है प्रेम के लिए सबसे जरूरी शर्त है कि पहले वह आकर्षण से होकर गुजरता है अगर आकर्षण नहीं तो बहुत मुश्किल है कह पाना कि हम किसी से प्रेम कर पाते हैं या प्रेम के लिए हम उसकी तरफ आगे बढ़ जाते हैं मेहंदी रूप से कहना है एक तरह से यह भी हो सकता है कि अगर हम किसी से प्रेम करते हैं तो सबसे पहले हम उसके लिए आकर्षण से गुजरते हैं बेसिक डिफरेंस है
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प्रेम को पाने के लिए आकर्षण उतना ही जरूरी है जितना की बरसात के बाद जैसे लहरा हाथी फसलों का हाल होता है मानते हैं कि आकर्षण बहुत देर तक स्थिर रहने वाली चीज नहीं है दो-तीन महीने तक जब हम किसी इंसान से जुड़ते हैं तो शुरुआती दिनों में हम से आकर्षण की वजह से जुड़ते हैं परंतु जब हम उस इंसान को समझते हैं तो वास्तविक रूप से आकर्षण या तो पूरी तरह से खत्म हो चुका होता है अगर आकर्षण बना रहता है तो धीरे-धीरे को प्रेम का रूप लेने लग जाता है इस प्रकार से हम समझ सकते हैं कि आकर्षण अस्थिर चीज है और स्थिर रूप है इसका प्रेम है प्रेम के लिए सबसे जरूरी शर्त है कि पहले वह आकर्षण से होकर गुजरता है अगर आकर्षण नहीं तो बहुत मुश्किल है कह पाना कि हम किसी से प्रेम कर पाते हैं या प्रेम के लिए हम उसकी तरफ आगे बढ़ जाते हैं मेहंदी रूप से कहना है एक तरह से यह भी हो सकता है कि अगर हम किसी से प्रेम करते हैं तो सबसे पहले हम उसके लिए आकर्षण से गुजरते हैं बेसिक डिफरेंस हैPrem Co Payne K Lie Aakarshan Utana Hea Zaroori Hai Jitna Ki Barsaat K Baad Jaise Lehra Haathi Faslon Ka Haal Hota Hai Maunte Hain Qi Aakarshan Bahut Their Tak Sthir Rahane Wali Chij Nahin Hai Though Tin Mahine Tak Jab Hum Kisi Insaan Se Judte Hain To Shuruaati Dino Mein Hum Se Aakarshan Ki Vajaha Se Judte Hain Parantu Jab Hum Oosh Insaan Co Samjhte Hain To Vastavik Roop Se Aakarshan Ya To Poori Turha Se Khatma Ho Chuka Hota Hai Agar Aakarshan Banna Rehta Hai To Dheere Dheere Co Prem Ka Roop Lene Lag Jaata Hai Is Prakar Se Hum Samajh Sakte Hain Qi Aakarshan Asthir Chij Hai Aur Sthir Roop Hai Iska Prem Hai Prem K Lie Sabse Zaroori Shart Hai Qi Pehle Wah Aakarshan Se Hokra Gujarata Hai Agar Aakarshan Nahin To Bahut Mushkil Hai Keh Panna Qi Hum Kisi Se Prem Car Paate Hain Ya Prem K Lie Hum Uski Tarf Aage Badh Jaate Hain Mehendi Roop Se Kahuna Hai Ek Turha Se Yeh Bhi Ho Sakta Hai Qi Agar Hum Kisi Se Prem Karte Hain To Sabse Pehle Hum Uske Lie Aakarshan Se Gujarate Hain Basic Difarens Hai
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देखिए मुझे लगता है कि प्रेम हुए मात्र आकर्षण बिल्कुल भी नहीं है प्रेम जो होता है वह आकर्षण से बहुत बढ़कर होता है लकी प्रेम में जो है वह आकर्षण होता है और प्रेम के शुरुआती आकर्षण से दूर होती है लेकिन आप प्रेम जो चीज होती हो आकर्षण से बहुत आगे की चीजें थी और बहुत गहरी चीज होती है
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देखिए मुझे लगता है कि प्रेम हुए मात्र आकर्षण बिल्कुल भी नहीं है प्रेम जो होता है वह आकर्षण से बहुत बढ़कर होता है लकी प्रेम में जो है वह आकर्षण होता है और प्रेम के शुरुआती आकर्षण से दूर होती है लेकिन आप प्रेम जो चीज होती हो आकर्षण से बहुत आगे की चीजें थी और बहुत गहरी चीज होती हैDekhie Mujhe Lagta Hai Ki Prem Huye Matra Aakarshan Bilkul Bhi Nahi Hai Prem Jo Hota Hai Wah Aakarshan Se Bahut Badhkar Hota Hai Lucky Prem Mein Jo Hai Wah Aakarshan Hota Hai Aur Prem Ke Suruaati Aakarshan Se Dur Hoti Hai Lekin Aap Prem Jo Cheez Hoti Ho Aakarshan Se Bahut Aage Ki Cheezen Thi Aur Bahut Gehri Cheez Hoti Hai
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मुझे फर्क तो है दोनों में इसको आप नकार नहीं सकते प्रेम और आकर्षण में फर्क तो माना गया है और उसका कारण सिंपल सा आप डिफरेंट उसमें देख सकते हैं यह की प्रेम में आपको आफरीन थोड़ा लंबा समय टिकता है मतलब आपको ज्यादा समय लगेगा उन्हें भुलाने में अगर आपको नहीं लगता है तो और आकर्षण ऐसा होता है कि कुछ देख ही बात होती है उसके बाद मैं आपको आदत पड़ जाती है उसके बिना रहने की ऐसा नहीं लगता आपको कि आप उसके बिना जी नहीं पाएंगे और ऐसा तभी होगा जब आप किसी इंसान की आदत पड़ जाए कई बार आप आदत को भी प्रेम समझ लेते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है तो मुझे ऐसा लगता है कि यही दोनों में क्या फर्क है जो कि ऊपर ऊपरी सतह से मैं बता सकती हूं और उसमें कुछ अगर आप गुड विषय में जाएंगे तो जाहिर है कि आपको कुछ जवाब मिलेगा और देखने के लिए आपके आंसर का वेट भी करेगा तो ऐसे ना मुझे नहीं बन सकता है
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मुझे फर्क तो है दोनों में इसको आप नकार नहीं सकते प्रेम और आकर्षण में फर्क तो माना गया है और उसका कारण सिंपल सा आप डिफरेंट उसमें देख सकते हैं यह की प्रेम में आपको आफरीन थोड़ा लंबा समय टिकता है मतलब आपको ज्यादा समय लगेगा उन्हें भुलाने में अगर आपको नहीं लगता है तो और आकर्षण ऐसा होता है कि कुछ देख ही बात होती है उसके बाद मैं आपको आदत पड़ जाती है उसके बिना रहने की ऐसा नहीं लगता आपको कि आप उसके बिना जी नहीं पाएंगे और ऐसा तभी होगा जब आप किसी इंसान की आदत पड़ जाए कई बार आप आदत को भी प्रेम समझ लेते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है तो मुझे ऐसा लगता है कि यही दोनों में क्या फर्क है जो कि ऊपर ऊपरी सतह से मैं बता सकती हूं और उसमें कुछ अगर आप गुड विषय में जाएंगे तो जाहिर है कि आपको कुछ जवाब मिलेगा और देखने के लिए आपके आंसर का वेट भी करेगा तो ऐसे ना मुझे नहीं बन सकता हैMujhe Fark To Hai Dono Mein Isko Aap Nakar Nahi Sakte Prem Aur Aakarshan Mein Fark To Mana Gaya Hai Aur Uska Kaaran Simple Sa Aap Different Usamen Dekh Sakte Hain Yeh Ki Prem Mein Aapko Aafareen Thoda Lamba Samay Tikta Hai Matlab Aapko Jyada Samay Lagega Unhen Bhulane Mein Agar Aapko Nahi Lagta Hai To Aur Aakarshan Aisa Hota Hai Ki Kuch Dekh Hi Baat Hoti Hai Uske Baad Main Aapko Aadat Padh Jati Hai Uske Bina Rehne Ki Aisa Nahi Lagta Aapko Ki Aap Uske Bina Ji Nahi Paenge Aur Aisa Tabhi Hoga Jab Aap Kisi Insaan Ki Aadat Padh Jaye Kai Bar Aap Aadat Ko Bhi Prem Samajh Lete Hain Lekin Aisa Hota Nahi Hai To Mujhe Aisa Lagta Hai Ki Yahi Dono Mein Kya Fark Hai Jo Ki Upar Upari Satah Se Main Bata Sakti Hoon Aur Usamen Kuch Agar Aap Good Vishay Mein Jaenge To Jaahir Hai Ki Aapko Kuch Jawab Milega Aur Dekhne Ke Liye Aapke Answer Ka Wait Bhi Karega To Aise Na Mujhe Nahi Ban Sakta Hai
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