इंसान की तरह पेड़ भी सजीव है लेकिन जो भावनाएं एक इंसान की होती है वो पेड़ो को होती है क्या वो दुःख दर्द भी उने होता है क्या? ...

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पेड़ों में तो जान होती है बट उनको इंसानों की तरह धर्म या कोई भी फीलिंग्स इस तरह की चीज नहीं रहती है
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पेड़ों में तो जान होती है बट उनको इंसानों की तरह धर्म या कोई भी फीलिंग्स इस तरह की चीज नहीं रहती हैPedon Mein To Jaan Hoti Hai But Unko Insanon Ki Tarah Dharm Ya Koi Bhi Feelings Is Tarah Ki Cheez Nahi Rehti Hai
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यह बहुत अच्छा क्वेश्चन आपका के इंसान की तरह पर भी सच्ची है लेकिन जो भावना एक इंसान की होती है वह पेड़ की होती है मुझे बिल्कुल अच्छा क्वेश्चन आपका यह इंसान की तरह पेड़ पौधे भी साथियों है लेकिन इंसान की तरह पेड़ पौधे के पास वह फीलिंग नहीं है आप में वह मूवी देखी ना रोबोट जैसे रोबोट एक मशीन था उसे सब कुछ हो काम करता था सारा काम इंसान की तरह करता था लेकिन उसके अंदर फीलिंग वह फीलिंग नहीं थी जो इंसान के अंदर होती इसलिए उसे दुखता नहीं होता था लेकिन जब वह फिल्म मुझे सिखाया गया उसके अंदर फीलिंग डाला गया तो उसे भी इंसान की तरह दफ्तर से प्यार और नफरत सा होने लगा वही हर पेट के साथ हुई है
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यह बहुत अच्छा क्वेश्चन आपका के इंसान की तरह पर भी सच्ची है लेकिन जो भावना एक इंसान की होती है वह पेड़ की होती है मुझे बिल्कुल अच्छा क्वेश्चन आपका यह इंसान की तरह पेड़ पौधे भी साथियों है लेकिन इंसान की तरह पेड़ पौधे के पास वह फीलिंग नहीं है आप में वह मूवी देखी ना रोबोट जैसे रोबोट एक मशीन था उसे सब कुछ हो काम करता था सारा काम इंसान की तरह करता था लेकिन उसके अंदर फीलिंग वह फीलिंग नहीं थी जो इंसान के अंदर होती इसलिए उसे दुखता नहीं होता था लेकिन जब वह फिल्म मुझे सिखाया गया उसके अंदर फीलिंग डाला गया तो उसे भी इंसान की तरह दफ्तर से प्यार और नफरत सा होने लगा वही हर पेट के साथ हुई हैYeh Bahut Accha Question Aapka Ke Insaan Ki Tarah Par Bhi Sachhi Hai Lekin Jo Bhavna Ek Insaan Ki Hoti Hai Wah Ped Ki Hoti Hai Mujhe Bilkul Accha Question Aapka Yeh Insaan Ki Tarah Ped Paudhe Bhi Sathiyo Hai Lekin Insaan Ki Tarah Ped Paudhe Ke Paas Wah Feeling Nahi Hai Aap Mein Wah Movie Dekhi Na Robot Jaise Robot Ek Machine Tha Use Sab Kuch Ho Kaam Karta Tha Saara Kaam Insaan Ki Tarah Karta Tha Lekin Uske Andar Feeling Wah Feeling Nahi Thi Jo Insaan Ke Andar Hoti Isliye Use Dukhta Nahi Hota Tha Lekin Jab Wah Film Mujhe Sikhaya Gaya Uske Andar Feeling Dala Gaya To Use Bhi Insaan Ki Tarah Daftaar Se Pyar Aur Nafrat Sa Hone Laga Wahi Har Pet Ke Saath Hui Hai
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इंसानों की ही तरह पेड़ भी सजीव होते हैं लेकिन नास्तिक लोगों का मानना है कि ईश्वर नहीं है कोई आत्मा नहीं है कोई चीज नहीं है इसलिए आप पशु पक्षियों को पेड़ पौधों को खा सकते हो मार सकते हो काट सकते हो लेकिन जो लोग अहिंसा का समर्थन करते हैं जो अहिंसक हैं और जो ना आते हैं वह मानते हैं कि ईश्वर है ईश्वर की बनाई हुई जो सबसे बेहतर प्रति है वह मनुष्य है और मनुष्य के अलावा पशु पक्षियों में और पेड़ पौधों में भी जीवन होता है लेकिन अगर हम इसकी गहराई में जाए तो हम महसूस करेंगे कि जब जिनके पास इंद्रियां होती है उन्हें ही दुख दर्द का एहसास होता है और मनुष्य के पास पशु पक्षियों के पास होती है इसीलिए उन्हें दुख दर्द का एहसास होता है अगर हम किसी अंधे व्यक्ति को चाहता दिखाएंगे तो उसे दुख नहीं महसूस होगा अगर किसी बाहरी व्यक्ति को अपशब्द कहेंगे तो उसे दुख नहीं महसूस होगा क्योंकि उनके पास सुनने की ओर देखने की जो इंद्रियां है वह नहीं है उसी तरह से जब हम मूर्छित अवस्था में होते हैं बेहोश होते हैं तब भी हमें कोई दुख दर्द महसूस नहीं होता है तो पेड़ पौधों को भी क्योंकि उनके पास इंद्रियां नहीं है इसलिए उन्हें दुख दर्द महसूस नहीं होता है चाहे आप उन्हें काटे चाहे उन्हें जननायक कुछ भी करें लेकिन उससे उन्हें दुख और दर्द की अनुमति नहीं होती है क्योंकि उनके पास इंद्रियां नहीं है इसलिए वह उनमें माना जाता है कि जीव है और उनको सजीव भी माना गया है लेकिन उन्हें इंसानों की तरह दुख और दर्द महसूस नहीं होता है क्योंकि वह इंद्रियों रहित है
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इंसानों की ही तरह पेड़ भी सजीव होते हैं लेकिन नास्तिक लोगों का मानना है कि ईश्वर नहीं है कोई आत्मा नहीं है कोई चीज नहीं है इसलिए आप पशु पक्षियों को पेड़ पौधों को खा सकते हो मार सकते हो काट सकते हो लेकिन जो लोग अहिंसा का समर्थन करते हैं जो अहिंसक हैं और जो ना आते हैं वह मानते हैं कि ईश्वर है ईश्वर की बनाई हुई जो सबसे बेहतर प्रति है वह मनुष्य है और मनुष्य के अलावा पशु पक्षियों में और पेड़ पौधों में भी जीवन होता है लेकिन अगर हम इसकी गहराई में जाए तो हम महसूस करेंगे कि जब जिनके पास इंद्रियां होती है उन्हें ही दुख दर्द का एहसास होता है और मनुष्य के पास पशु पक्षियों के पास होती है इसीलिए उन्हें दुख दर्द का एहसास होता है अगर हम किसी अंधे व्यक्ति को चाहता दिखाएंगे तो उसे दुख नहीं महसूस होगा अगर किसी बाहरी व्यक्ति को अपशब्द कहेंगे तो उसे दुख नहीं महसूस होगा क्योंकि उनके पास सुनने की ओर देखने की जो इंद्रियां है वह नहीं है उसी तरह से जब हम मूर्छित अवस्था में होते हैं बेहोश होते हैं तब भी हमें कोई दुख दर्द महसूस नहीं होता है तो पेड़ पौधों को भी क्योंकि उनके पास इंद्रियां नहीं है इसलिए उन्हें दुख दर्द महसूस नहीं होता है चाहे आप उन्हें काटे चाहे उन्हें जननायक कुछ भी करें लेकिन उससे उन्हें दुख और दर्द की अनुमति नहीं होती है क्योंकि उनके पास इंद्रियां नहीं है इसलिए वह उनमें माना जाता है कि जीव है और उनको सजीव भी माना गया है लेकिन उन्हें इंसानों की तरह दुख और दर्द महसूस नहीं होता है क्योंकि वह इंद्रियों रहित हैInsanon Ki Hi Tarah Ped Bhi Sajeev Hote Hain Lekin Naastik Logon Ka Manana Hai Ki Ishwar Nahi Hai Koi Aatma Nahi Hai Koi Cheez Nahi Hai Isliye Aap Pashu Pakshiyo Ko Ped Paudho Ko Kha Sakte Ho Maar Sakte Ho Kaat Sakte Ho Lekin Jo Log Ahinsha Ka Samarthan Karte Hain Jo Ahinsak Hain Aur Jo Na Aate Hain Wah Manate Hain Ki Ishwar Hai Ishwar Ki Banai Hui Jo Sabse Behtar Prati Hai Wah Manushya Hai Aur Manushya Ke Alava Pashu Pakshiyo Mein Aur Ped Paudho Mein Bhi Jeevan Hota Hai Lekin Agar Hum Iski Gehrai Mein Jaye To Hum Mahsus Karenge Ki Jab Jinke Paas Indriyan Hoti Hai Unhen Hi Dukh Dard Ka Ehsaas Hota Hai Aur Manushya Ke Paas Pashu Pakshiyo Ke Paas Hoti Hai Isliye Unhen Dukh Dard Ka Ehsaas Hota Hai Agar Hum Kisi Andhe Vyakti Ko Chahta Dikhaenge To Use Dukh Nahi Mahsus Hoga Agar Kisi Baahri Vyakti Ko Apashabd Kahenge To Use Dukh Nahi Mahsus Hoga Kyonki Unke Paas Sunane Ki Oar Dekhne Ki Jo Indriyan Hai Wah Nahi Hai Ussi Tarah Se Jab Hum Murchhit Awastha Mein Hote Hain Behosh Hote Hain Tab Bhi Hume Koi Dukh Dard Mahsus Nahi Hota Hai To Ped Paudho Ko Bhi Kyonki Unke Paas Indriyan Nahi Hai Isliye Unhen Dukh Dard Mahsus Nahi Hota Hai Chahe Aap Unhen Kaate Chahe Unhen Jannayak Kuch Bhi Karen Lekin Usse Unhen Dukh Aur Dard Ki Anumati Nahi Hoti Hai Kyonki Unke Paas Indriyan Nahi Hai Isliye Wah Unmen Mana Jata Hai Ki Jeev Hai Aur Unko Sajeev Bhi Mana Gaya Hai Lekin Unhen Insanon Ki Tarah Dukh Aur Dard Mahsus Nahi Hota Hai Kyonki Wah Indriyon Rahit Hai
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