यदि हर विधायक को उनके निर्वाचन क्षेत्र के लिए धन आवंटित किया जाता है, तो हर इलाके में सड़के इतनी खराब क्यों हैं? ...

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लकोस्टे निर्वाचन क्षेत्र के लिए धन आवंटित किया जाता है वह बहुत ही कम होता है अब आप देखिए कि मालया उनको करीब 5 करोड़ के आसपास वाले उनको ग्रांट मिलती है 25 करोड़ रुपए में तो वह एक काम भी नहीं कर सकते वह चाहे तो 1 किलोमीटर की सड़क बनाना भीम के लिए बहुत मुश्किल काम है जबकि किसी भी विधायक का कार्य क्षेत्र होता है वह इतना विस्तृत होता है कि उसके अंदर जो है अगर आप काम करें तो आपको हजारों करोड़ों रुपए की जरूरत पड़ेगी और इसीलिए जो विधायक निधि होती है उसको जहां पर खर्चा किया जाता है वह बहुत छोटा सा ही एरिया में उसको खर्चा किया जाता है क्योंकि 5 करो रुपए कोई बहुत बड़ी है मौत होती नहीं है और इसीलिए जो है इस छोटे से अमाउंट से सड़कों को रिपेयर करना है हम को सही करना संभव नहीं होता है
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लकोस्टे निर्वाचन क्षेत्र के लिए धन आवंटित किया जाता है वह बहुत ही कम होता है अब आप देखिए कि मालया उनको करीब 5 करोड़ के आसपास वाले उनको ग्रांट मिलती है 25 करोड़ रुपए में तो वह एक काम भी नहीं कर सकते वह चाहे तो 1 किलोमीटर की सड़क बनाना भीम के लिए बहुत मुश्किल काम है जबकि किसी भी विधायक का कार्य क्षेत्र होता है वह इतना विस्तृत होता है कि उसके अंदर जो है अगर आप काम करें तो आपको हजारों करोड़ों रुपए की जरूरत पड़ेगी और इसीलिए जो विधायक निधि होती है उसको जहां पर खर्चा किया जाता है वह बहुत छोटा सा ही एरिया में उसको खर्चा किया जाता है क्योंकि 5 करो रुपए कोई बहुत बड़ी है मौत होती नहीं है और इसीलिए जो है इस छोटे से अमाउंट से सड़कों को रिपेयर करना है हम को सही करना संभव नहीं होता हैLakoste Nirvachan Shetra Ke Liye Dhan Avantit Kiya Jata Hai Wah Bahut Hi Kam Hota Hai Ab Aap Dekhie Ki Malaya Unko Karib 5 Crore Ke Aaspass Wali Unko Grant Milti Hai 25 Crore Rupaiye Mein To Wah Ek Kaam Bhi Nahi Kar Sakte Wah Chahe To 1 Kilometre Ki Sadak Banana Bhim Ke Liye Bahut Mushkil Kaam Hai Jabki Kisi Bhi Vidhayak Ka Karya Shetra Hota Hai Wah Itna Vistrit Hota Hai Ki Uske Andar Jo Hai Agar Aap Kaam Karen To Aapko Hajaron Karodo Rupaiye Ki Zaroorat Padegi Aur Isliye Jo Vidhayak Nidhi Hoti Hai Usko Jahan Par Kharcha Kiya Jata Hai Wah Bahut Chota Sa Hi Area Mein Usko Kharcha Kiya Jata Hai Kyonki 5 Karo Rupaiye Koi Bahut Badi Hai Maut Hoti Nahi Hai Aur Isliye Jo Hai Is Chote Se Amount Se Sadkon Ko Repair Karna Hai Hum Ko Sahi Karna Sambhav Nahi Hota Hai
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क्या कोई भी व्यक्ति विधयाक का चुनाव् कहि से भी लड़ सकता है या अपने विधायक क्षेत्र से लड़ सकता है? ...

दीया बिल्कुल कोई भी व्यक्ति कहीं से भी इलेक्शन लड़ सकता है MP का MLA का हो और आपने देखा भी होगा MP कलेक्शन में जो हमारे देश के प्रधानमंत्री जी हैं गुजरात से बिलॉन्ग करते हैं लेकिन इलेक्शन उन्होंने वारजवाब पढ़िये
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लूट के जलते हुए चुनावों में इस परंपरा को आमतौर पर भारत में देखा जा सकता है जो एक कृति के रूप में विकसित हो गया हमारे देश में और जब कोई व्यक्ति इस परंपरा से चुनकर के विधायक बनता है जनप्रतिनिधि बनता है तो उसका सारा ध्यान इस बार आप के ज्यादा करीब रहता है कि किस प्रकार से वह अपने खर्च की वेतन को न सिर्फ वसूले बल्कि और अपने धन की सीमा को किस प्रकार से बढ़ाए इसके लिए तमाम तरह के हथकंडे प्यार करता है एक विधायक निधि में उत्तर प्रदेश में तो हमारे यहां परिवर्तन हुआ करता था इस सरकार ने उसे तो करम कर दिया 1 वर्ष की सीमा यानी 5 वर्ष में 10 करो रुपए फिगर दिखा जा तू 10 करो रुपए पूरे विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त नहीं है लेकिन दुर्भाग्य तो तब और बढ़ जाता है जब रुपए में भी भ्रष्टाचार का कीड़ा लग जाता है और अपने निजी रिश्तेदारों को ठीक है दिया जाते हैं उसे मोटा कमीशन लेना जाता है विधायकों के द्वारा विधायक निधि का पैसा शिक्षण संस्थाओं को दान स्वरूप दिया जाता है और वापस उनसे एक मोटा हिस्सा वापस ले लिया जाता है जिसके कारण भी जो निर्माण जो भी थोड़े बहुत हो पाते हैं उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि वह चल नहीं पाता और फिर उसी कार्य के लिए पुनः धन आवंटित होता है और उस पर फिर खर्च किया जाता है यह सिलसिला साल दर्श चलता रहता है इसके लिए मुझे लगता है कि जनता भी जवाब दे है जनता जिस प्रकार के प्रतिनिधि को चुनेगी यदि उसकी जवाबदेही तय नहीं करेगी तो निश्चित रूप से यह परिस्थिति सामने आती रहेगी और आगे भी आएंगी जनता जागरुक रहेगी तो इस पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सके
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लूट के जलते हुए चुनावों में इस परंपरा को आमतौर पर भारत में देखा जा सकता है जो एक कृति के रूप में विकसित हो गया हमारे देश में और जब कोई व्यक्ति इस परंपरा से चुनकर के विधायक बनता है जनप्रतिनिधि बनता है तो उसका सारा ध्यान इस बार आप के ज्यादा करीब रहता है कि किस प्रकार से वह अपने खर्च की वेतन को न सिर्फ वसूले बल्कि और अपने धन की सीमा को किस प्रकार से बढ़ाए इसके लिए तमाम तरह के हथकंडे प्यार करता है एक विधायक निधि में उत्तर प्रदेश में तो हमारे यहां परिवर्तन हुआ करता था इस सरकार ने उसे तो करम कर दिया 1 वर्ष की सीमा यानी 5 वर्ष में 10 करो रुपए फिगर दिखा जा तू 10 करो रुपए पूरे विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त नहीं है लेकिन दुर्भाग्य तो तब और बढ़ जाता है जब रुपए में भी भ्रष्टाचार का कीड़ा लग जाता है और अपने निजी रिश्तेदारों को ठीक है दिया जाते हैं उसे मोटा कमीशन लेना जाता है विधायकों के द्वारा विधायक निधि का पैसा शिक्षण संस्थाओं को दान स्वरूप दिया जाता है और वापस उनसे एक मोटा हिस्सा वापस ले लिया जाता है जिसके कारण भी जो निर्माण जो भी थोड़े बहुत हो पाते हैं उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि वह चल नहीं पाता और फिर उसी कार्य के लिए पुनः धन आवंटित होता है और उस पर फिर खर्च किया जाता है यह सिलसिला साल दर्श चलता रहता है इसके लिए मुझे लगता है कि जनता भी जवाब दे है जनता जिस प्रकार के प्रतिनिधि को चुनेगी यदि उसकी जवाबदेही तय नहीं करेगी तो निश्चित रूप से यह परिस्थिति सामने आती रहेगी और आगे भी आएंगी जनता जागरुक रहेगी तो इस पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेLoot Ke Jalate Huye Chunavon Mein Is Parampara Ko Aamtaur Par Bharat Mein Dekha Ja Sakta Hai Jo Ek Kriti Ke Roop Mein Viksit Ho Gaya Hamare Desh Mein Aur Jab Koi Vyakti Is Parampara Se Chunkar Ke Vidhayak Banta Hai Janapratinidhi Banta Hai To Uska Saara Dhyan Is Baar Aap Ke Zyada Karib Rehta Hai Ki Kis Prakar Se Wah Apne Kharch Ki Vetan Ko N Sirf Vasule Balki Aur Apne Dhan Ki Seema Ko Kis Prakar Se Badhae Iske Liye Tamam Tarah Ke Hathkande Pyar Karta Hai Ek Vidhayak Nidhi Mein Uttar Pradesh Mein To Hamare Yahan Pariwartan Hua Karta Tha Is Sarkar Ne Use To Karam Kar Diya 1 Varsh Ki Seema Yani 5 Varsh Mein 10 Karo Rupaiye Figure Dikha Ja Tu 10 Karo Rupaiye Poore Vidhan Sabha Shetra Ke Vikash Ke Liye Paryapt Nahi Hai Lekin Durbhagya To Tab Aur Badh Jata Hai Jab Rupaiye Mein Bhi Bhrashtachar Ka Kida Lag Jata Hai Aur Apne Niji Rishtedaaro Ko Theek Hai Diya Jaate Hain Use Mota Commision Lena Jata Hai Vidhayakon Ke Dwara Vidhayak Nidhi Ka Paisa Shikshan Sasthaon Ko Daan Swaroop Diya Jata Hai Aur Wapas Unse Ek Mota Hissa Wapas Le Liya Jata Hai Jiske Kaaran Bhi Jo Nirmaan Jo Bhi Thode Bahut Ho Paate Hain Uski Gunavatta Itni Kharab Hoti Hai Ki Wah Chal Nahi Pata Aur Phir Ussi Karya Ke Liye Punh Dhan Avantit Hota Hai Aur Us Par Phir Kharch Kiya Jata Hai Yeh Silsila Saal Darsh Chalta Rehta Hai Iske Liye Mujhe Lagta Hai Ki Janta Bhi Jawab De Hai Janta Jis Prakar Ke Pratinidhi Ko Chunegi Yadi Uski Javaabadehee Tay Nahi Karegi To Nishchit Roop Se Yeh Paristhiti Samane Aati Rahegi Aur Aage Bhi Aayengi Janta Jagaruk Rahegi To Is Par Kafi Had Tak Ankush Lagaya Ja Sake
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हर विद्यायक को अलॉट किया जाता है उनके जो वोट उनके जो वोट बिलॉन्ग करते हैं पर यह लोग उसको सही तरह से इस्तेमाल नहीं करते हैं करते हैं यह नहीं कह रही कि नहीं करती पर उसमें आधा पैसा खा लेते हैं ऐसे सब स्टैंडर्ड रोड बनाते हैं मेटेरियल सप्लायर्स होता है और जो बीच में जो होता है यह जो कॉन्ट्रैक्टर्स वगैरा होते हैं वह भी बीच में खा लेते तो इसका मतलब यह है कि वह खुद ज्यादा परसेंटेज चाहिए हमारा नेता खाएंगे बाद में यह बीच में जो कॉन्ट्रैक्टर्स वह खाएंगे जो अगर ज्यादा से देखा जाए आप लोग अगर सही तरीके से जाए जब सड़क जब सड़के बनी है उसको मतलब बहुत टाइम और एक सिस्टेमेटिक तरीके से बनी पड़ती है आजकल तो चढ़ के ऐसे 1 दिन में मतलब कितने किलोमीटर लगा देते हैं और इतना सब स्टैंडर्ड भी होता है एक बारिश आ गई तो दोबारा सब गड्डी गड्डी रह जाता है तो यह सब सारा पैसा खाने की मामला है बीच का आदमी दिखाएगा और उनका ऊपर से यह लोग नेता लोग ऐसा करते हैं कि उनके जो रिश्तेदारी में कांटेक्ट दे देते हैं तो वहां पर भी पैसा खाएंगे यहां पर भी टैक्स पर अनंत में जो सफर करने वाला कौन है हम सब लोग सिटीजन सफर करते हैं
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हर विद्यायक को अलॉट किया जाता है उनके जो वोट उनके जो वोट बिलॉन्ग करते हैं पर यह लोग उसको सही तरह से इस्तेमाल नहीं करते हैं करते हैं यह नहीं कह रही कि नहीं करती पर उसमें आधा पैसा खा लेते हैं ऐसे सब स्टैंडर्ड रोड बनाते हैं मेटेरियल सप्लायर्स होता है और जो बीच में जो होता है यह जो कॉन्ट्रैक्टर्स वगैरा होते हैं वह भी बीच में खा लेते तो इसका मतलब यह है कि वह खुद ज्यादा परसेंटेज चाहिए हमारा नेता खाएंगे बाद में यह बीच में जो कॉन्ट्रैक्टर्स वह खाएंगे जो अगर ज्यादा से देखा जाए आप लोग अगर सही तरीके से जाए जब सड़क जब सड़के बनी है उसको मतलब बहुत टाइम और एक सिस्टेमेटिक तरीके से बनी पड़ती है आजकल तो चढ़ के ऐसे 1 दिन में मतलब कितने किलोमीटर लगा देते हैं और इतना सब स्टैंडर्ड भी होता है एक बारिश आ गई तो दोबारा सब गड्डी गड्डी रह जाता है तो यह सब सारा पैसा खाने की मामला है बीच का आदमी दिखाएगा और उनका ऊपर से यह लोग नेता लोग ऐसा करते हैं कि उनके जो रिश्तेदारी में कांटेक्ट दे देते हैं तो वहां पर भी पैसा खाएंगे यहां पर भी टैक्स पर अनंत में जो सफर करने वाला कौन है हम सब लोग सिटीजन सफर करते हैंHar Vidyayak Ko Allot Kiya Jata Hai Unke Jo Vote Unke Jo Vote Bilong Karte Hain Par Yeh Log Usko Sahi Tarah Se Istemal Nahi Karte Hain Karte Hain Yeh Nahi Keh Rahi Ki Nahi Karti Par Usamen Aadha Paisa Kha Lete Hain Aise Sab Standard Road Banate Hain Material Suppliers Hota Hai Aur Jo Bich Mein Jo Hota Hai Yeh Jo CONTRACTORS Vagaira Hote Hain Wah Bhi Bich Mein Kha Lete To Iska Matlab Yeh Hai Ki Wah Khud Zyada Percentage Chahiye Hamara Neta Khayenge Baad Mein Yeh Bich Mein Jo CONTRACTORS Wah Khayenge Jo Agar Zyada Se Dekha Jaye Aap Log Agar Sahi Tarike Se Jaye Jab Sadak Jab Sadake Bani Hai Usko Matlab Bahut Time Aur Ek Systematic Tarike Se Bani Padhti Hai Aajkal To Chad Ke Aise 1 Din Mein Matlab Kitne Kilometre Laga Dete Hain Aur Itna Sab Standard Bhi Hota Hai Ek Barish Aa Gayi To Dobara Sab Gaddi Gaddi Rah Jata Hai To Yeh Sab Saara Paisa Khane Ki Maamla Hai Bich Ka Aadmi Dikhaega Aur Unka Upar Se Yeh Log Neta Log Aisa Karte Hain Ki Unke Jo Rishtedari Mein Contact De Dete Hain To Wahan Par Bhi Paisa Khayenge Yahan Par Bhi Tax Par Anant Mein Jo Safar Karne Vala Kaon Hai Hum Sab Log Citizen Safar Karte Hain
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हर एक विधायक को हर एक सांसद को उनके क्षेत्रों के लिए उसके विकास के लिए बहुत सारा धन आवंटित किया जाता है लेकिन फिर भी उस क्षेत्र में सड़कें खराब रहती है इसके अलावा ड्रेनेज की सुविधा भी सही नहीं रहती तो बहुत सारी समस्याएं बनी रहती है और इसका कारण यही है कि हर एक चीज में भ्रष्टाचार व्याप्त है यानी कि अगर किसी विधायक को फंड आवंटित किया गया है तो वह सही तरीके से उसे खर्च नहीं करता जनता के विकास के लिए वह सब से कूद के विकास के बारे में सोचता है और अपना बैंक बैलेंस बनाने में लग जाता है यानी कि वह भ्रष्टाचार में लिप्त होता है अगर सही तरीके से जितने पैसे दिए जाते हैं विकास के कार्यों को करने के लिए वह किया जाए तो हर एक जगह की सड़कें बिल्कुल अच्छी हो जाएंगी वहां पर कोई भी बैठे नहीं दिखाई देंगे लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि यहां पर भी सड़के बनाई जाती है उसमें बहुत सारे लोग सम्मिलित होते हैं यानी कि कॉन्ट्रैक्टर ठेकेदार तू यह सारे लेवल पर कहीं कहीं भ्रष्टाचार जरूर होता है जिसके वजह से जगह-जगह की सड़कें खराब रहती हैं और नई सड़कें जो भी बनती है वह ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाती यानी कि उन्हें खराब क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया जाता है तो इसीलिए मुझे लगता है कि अगर भ्रष्टाचार खत्म हो जाए तब जाकर सभी जगह की सड़कें भी अच्छी हो जाएंगी
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हर एक विधायक को हर एक सांसद को उनके क्षेत्रों के लिए उसके विकास के लिए बहुत सारा धन आवंटित किया जाता है लेकिन फिर भी उस क्षेत्र में सड़कें खराब रहती है इसके अलावा ड्रेनेज की सुविधा भी सही नहीं रहती तो बहुत सारी समस्याएं बनी रहती है और इसका कारण यही है कि हर एक चीज में भ्रष्टाचार व्याप्त है यानी कि अगर किसी विधायक को फंड आवंटित किया गया है तो वह सही तरीके से उसे खर्च नहीं करता जनता के विकास के लिए वह सब से कूद के विकास के बारे में सोचता है और अपना बैंक बैलेंस बनाने में लग जाता है यानी कि वह भ्रष्टाचार में लिप्त होता है अगर सही तरीके से जितने पैसे दिए जाते हैं विकास के कार्यों को करने के लिए वह किया जाए तो हर एक जगह की सड़कें बिल्कुल अच्छी हो जाएंगी वहां पर कोई भी बैठे नहीं दिखाई देंगे लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि यहां पर भी सड़के बनाई जाती है उसमें बहुत सारे लोग सम्मिलित होते हैं यानी कि कॉन्ट्रैक्टर ठेकेदार तू यह सारे लेवल पर कहीं कहीं भ्रष्टाचार जरूर होता है जिसके वजह से जगह-जगह की सड़कें खराब रहती हैं और नई सड़कें जो भी बनती है वह ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाती यानी कि उन्हें खराब क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया जाता है तो इसीलिए मुझे लगता है कि अगर भ्रष्टाचार खत्म हो जाए तब जाकर सभी जगह की सड़कें भी अच्छी हो जाएंगीHar Ek Vidhayak Ko Har Ek Saansad Ko Unke Kshetro Ke Liye Uske Vikash Ke Liye Bahut Saara Dhan Avantit Kiya Jata Hai Lekin Phir Bhi Us Shetra Mein Sadaken Kharab Rehti Hai Iske Alava Drainage Ki Suvidha Bhi Sahi Nahi Rehti To Bahut Saree Samasyaen Bani Rehti Hai Aur Iska Kaaran Yahi Hai Ki Har Ek Cheez Mein Bhrashtachar Vyapt Hai Yani Ki Agar Kisi Vidhayak Ko Fund Avantit Kiya Gaya Hai To Wah Sahi Tarike Se Use Kharch Nahi Karta Janta Ke Vikash Ke Liye Wah Sab Se Kud Ke Vikash Ke Bare Mein Sochta Hai Aur Apna Bank Balance Banane Mein Lag Jata Hai Yani Ki Wah Bhrashtachar Mein Lipt Hota Hai Agar Sahi Tarike Se Jitne Paise Diye Jaate Hain Vikash Ke Kaaryon Ko Karne Ke Liye Wah Kiya Jaye To Har Ek Jagah Ki Sadaken Bilkul Acchi Ho Jaengi Wahan Par Koi Bhi Baithey Nahi Dikhai Denge Lekin Aisa Hota Nahi Hai Kyonki Yahan Par Bhi Sadake Banai Jati Hai Usamen Bahut Sare Log Smmilit Hote Hain Yani Ki Contractor Thekedaar Tu Yeh Sare Level Par Kahin Kahin Bhrashtachar Jarur Hota Hai Jiske Wajah Se Jagah Jagah Ki Sadaken Kharab Rehti Hain Aur Nayi Sadaken Jo Bhi Banti Hai Wah Zyada Dinon Tak Tick Nahi Pati Yani Ki Unhen Kharab Quality Ka Saamaan Istemal Kiya Jata Hai To Isliye Mujhe Lagta Hai Ki Agar Bhrashtachar Khatam Ho Jaye Tab Jaakar Sabhi Jagah Ki Sadaken Bhi Acchi Ho Jaengi
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