इंसान पागल क्यों होता है? ...

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जब इंसान अपने दिमाग का मानसिक संतुलन खो बैठते तब इंसान पागल हो जाता है...
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जब इंसान अपने दिमाग का मानसिक संतुलन खो बैठते तब इंसान पागल हो जाता हैJab Insaan Apne Dimag Ka Mansik Santulan Kho Baithate Tab Insaan Pagal Ho Jata Hai
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इंसान प्यार में पागल होता है...
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इंसान प्यार में पागल होता हैInsaan Pyar Mein Pagal Hota Hai
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कम शब्दों में इस प्रश्न का उत्तर देना बड़ा ही मुश्किल है क्योंकि इसके दो दृष्टि कौन हो सकते हैं एक तो वह जो हमारे ऊपर निर्भर है हमारे नियंत्रण में है और दूसरा दे है जो हमारे नियंत्रण से बाहर है कई बार...
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कम शब्दों में इस प्रश्न का उत्तर देना बड़ा ही मुश्किल है क्योंकि इसके दो दृष्टि कौन हो सकते हैं एक तो वह जो हमारे ऊपर निर्भर है हमारे नियंत्रण में है और दूसरा दे है जो हमारे नियंत्रण से बाहर है कई बार जब बच्चा जन्म लेता है हम जन्म लेते हैं तो बहुत सारी चीज़ें जेनेटिक होती हैं जो हमारे मां-बाप से हमारे पूर्वजों से हमारे अंदर आती हैं हमारे शरीर का निर्माण होता है बुद्धि का स्तर का निर्माण होता है वहां से बहुत बार हमारे अंदर ऐसे गुणसूत्र हो जाते हैं हमारा निर्माण इस तरीके से होता है हमारी सोच और हमारे मस्तिष्क का जो कठिन होता है उस तरीके का होता है कि उसमें कहीं ना कहीं कोई विक्षिप्त उतारे जाती है उसका पूरा परिपक्व हो जो एक विकास होना था वह नहीं हो पाता वह बंद हो जाता है जिसके कारण एक व्यक्ति एक विकसित रूप लेकर के जन्म लेता है लेकिन अगर व्यक्ति का समुचित ध्यान रखा जाए तो बहुत सारी विक्षिप्त बताओ किस तरह से होते हैं जिनको की सुधारा जा सकता है यह चीज मैंने देखी भी है अगर सजगता रखें मां बाप तो बहुत हद तक किसी विक्षिप्त बच्चे को भी ठीक किया जा सकता है और दूसरा कारण यह होगा कि आजकल कि आज के दौर की भाग दौड़ भरी इस जीवन शैली में हम महत्वाकांक्षी बहुत ज्यादा हो गए हैं हम प्रतिस्पर्धा के संयुक्त जीवन जीते हैं जिसकी वजह से हम अपने आप को शांत की करने के स्थान पर हम बहुत ज्यादा उद्विग्न और हम निराश होते जा रहे हैं तो अपने अपना सही मूल्यांकन करें इस जीवन के महत्व को समझें यह समझे कि कोई भी परेशानी हमसे बड़ी नहीं हो सकती अगर हम अपने एकाग्रता को ध्यान ध्यान में रखें हम अपने दायित्वों का सही निर्वहन करें प्रतिस्पर्धा को छोड़ करके सबको सम्मति भाव से देखें वसुधैव कुटुंबकम की भावना को हम धारण करें और उसके आधार पर सभी को आत्मीयता की दृष्टि से देखें तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं का निवारण कर सकते हैं और एक सुंदर समाज का निर्माण हो सकता है तो किसी भी प्रकार की चिंता इन इक्विटी इत्यादि को अपने से दूर रखें और अध्यात्म में लगे रहें ईश्वर का नाम ले तो हम सब कुछ ठीक कर सकते हैंKam Shabdon Mein Is Prashna Ka Uttar Dena Bada Hi Mushkil Hai Kyonki Iske Do Drishti Kaon Ho Sakte Hain Ek To Wah Jo Hamare Upar Nirbhar Hai Hamare Niyantran Mein Hai Aur Doosra De Hai Jo Hamare Niyantran Se Bahar Hai Kai Baar Jab Baccha Janm Leta Hai Hum Janm Lete Hain To Bahut Saree Chizen Genetic Hoti Hain Jo Hamare Maa Baap Se Hamare Purwaajon Se Hamare Andar Aati Hain Hamare Sharir Ka Nirmaan Hota Hai Buddhi Ka Sthar Ka Nirmaan Hota Hai Wahan Se Bahut Baar Hamare Andar Aise Gunasutra Ho Jaate Hain Hamara Nirmaan Is Tarike Se Hota Hai Hamari Soch Aur Hamare Mastishk Ka Jo Kathin Hota Hai Us Tarike Ka Hota Hai Ki Usamen Kahin Na Kahin Koi Vikshipta Utare Jati Hai Uska Pura Paripakva Ho Jo Ek Vikash Hona Tha Wah Nahi Ho Pata Wah Band Ho Jata Hai Jiske Kaaran Ek Vyakti Ek Viksit Roop Lekar Ke Janm Leta Hai Lekin Agar Vyakti Ka Samuchit Dhyan Rakha Jaye To Bahut Saree Vikshipta Batao Kis Tarah Se Hote Hain Jinako Ki Sudhara Ja Sakta Hai Yeh Cheez Maine Dekhi Bhi Hai Agar Sajgta Rakhen Maa Baap To Bahut Had Tak Kisi Vikshipta Bacche Ko Bhi Theek Kiya Ja Sakta Hai Aur Doosra Kaaran Yeh Hoga Ki Aajkal Ki Aaj Ke Daur Ki Bhag Daudh Bhari Is Jeevan Shaili Mein Hum Mahatvakankshi Bahut Zyada Ho Gaye Hain Hum Pratispardha Ke Samyukt Jeevan Jeete Hain Jiski Wajah Se Hum Apne Aap Ko Shaant Ki Karne Ke Sthan Par Hum Bahut Zyada Udwign Aur Hum Nirash Hote Ja Rahe Hain To Apne Apna Sahi Mulyaankan Karen Is Jeevan Ke Mahatva Ko Samajhe Yeh Samjhe Ki Koi Bhi Pareshani Humse Badi Nahi Ho Sakti Agar Hum Apne Ekagrata Ko Dhyan Dhyan Mein Rakhen Hum Apne Dayitvo Ka Sahi Nirvahan Karen Pratispardha Ko Chod Karke Sabko Sammati Bhav Se Dekhen Vasudev Kutumbakam Ki Bhavna Ko Hum Dharan Karen Aur Uske Aadhar Par Sabhi Ko Aatmiyata Ki Drishti Se Dekhen To Hum Is Prakar Ki Sabhi Samasyaon Ka Nivaran Kar Sakte Hain Aur Ek Sundar Samaaj Ka Nirmaan Ho Sakta Hai To Kisi Bhi Prakar Ki Chinta In Equity Ityadi Ko Apne Se Dur Rakhen Aur Adhyaatm Mein Lage Rahen Ishwar Ka Naam Le To Hum Sab Kuch Theek Kar Sakte Hain
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