1st, 2nd क्लास के बच्चों को होमवर्क से मुक्ति, बस्ते का वजन भी तय - सरकार के इस निर्णय से क्या सच में कुछ असर पड़ेगा? यदि हाँ, तो क्या? ...

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बच्चों का बचपन किताबों के घेरे के भी ठीक हो जाता है छोटी छोटी उंगलियां जिन्हें प्लास्टिक सीन से खेलना चाहिए वे पेंसिल पकड़ना सीख दी है जिन कामों को कहानियां सुननी चाहिए गणित और हिसाब के रट्टा मारने की बात आती है तो मैं इंडिया में पड़ने वाले छोटे बच्चों को भी देखती हूं और विदेश में पढ़ते हुए छोटे जैसे लंड में पढ़ते हुए छोटे बच्चों का उत्पादन भी देखती हूं वह बच्चों को सवाल पूछना सिखाते हैं रोज एक नया सवाल का जवाब बच्चों को कहते हैं कि जाकर तुम पता करके आओ पूछो जो मर्जी वह सवाल पूछो ग्रोथ होता है जब यह बच्चे जब बच्चों का साथ मेरा सामना होता है तो मैं यह देख क्योंकि वहां के बच्चों में जिज्ञासा चीजें सीखने की समझने की नई नई बातें समझने की क्यों यह क्यों वह कैसे यह सवाल वहां के बच्चे ज्यादा करते हैं बताएं हमारे हमारे देश के बच्चे जो कि बिल्कुल ही एक स्ट्रक्चर लर्निंग के अंदर आ जाते हैं तू बच्चों को बल्कि यह सब चीजों से ग्रोथ ज्यादा होता है ना कि अक्षर लिखने और पढ़ने में बच्चों की उपयोग की रेसिपी को जिंदा करना रखना जरूरी है वरना बच्चों का बर्न आउट हो सकता है यह बच्चे आगे जाकर हमारे देश का भविष्य बनेंगे हमारे इंजीनियर का यह देखा जाता है कि प्रैक्टिकल बातों में बाकी दुनिया के हिसाब से हमारे बच्चे पीछे इसलिए कि हम शुरू से ही उन्हें इस बात का बढ़ावा नहीं देता मैं एचआरडी मिनिस्ट्री यानी सरकार के इस निर्णय से बिल्कुल सहमत हूं सीखने के लिए पूरी उम्र पड़ी है बच्चों के सामने उन्हें बचपन में क्युरिऑसिटी और अपने एनवायरमेंट को समझने का में बताना चाहिए हालांकि टीचर्स काफी नाराज है इससे कि बिना होमवर्क के कैसे पाठ पढ़ेंगे बच्चे पर मैं समझती हूं कि सब ठीक हो जाएगा पहाड़ नहीं टूट पड़ेंगे बच्चों को अपनी जिंदगी जीने दो और बचपन उनको जीने दो खुशी खुशी
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जिसका बिल्कुल असर होगा और यह फैसला बिल्कुल पूरी तरह से बच्चों के पक्ष में है हर किसी का अपना अधिकार होता है और बच्चों बच्चों की बच्चे अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ सकते इसलिए सरकार ने यह बहुत ही बेहतरीन फैसला लिया है फर्स्ट और सेकंड क्लास के बच्चों का होमवर्क देने की प्रथा है ना वह बिल्कुल गलत है क्योंकि फर्स्ट और सेकंड क्लास के बच्चे अच्छे है 7 साल का होता है या मैक्सिमो 8 साल का होता है उस से आप क्या उम्मीद करते हैं कि आप जो भी किताब का प्रश्न आएंगे वह लिखकर लाएं क्यों लाए वह उस समय बहुत ही एक ऐसी अवस्था से गुजर रहा होता है जहां उसको खेलने में ज्यादा मजा आता है उसकी जीवन से जुड़ा हुआ आप उसको मरने से आप उसे यह कहे कि आप अपने दादा दादी है उसे कहानी सुनकर आओ या आप इस खेल के बारे में पता लगा क्या आप किताब पर ही क्यों जोड़ देना चाहते किताब पर तो बाद में भी छोड़ दिया जाए सत्ता जब उसकी जगह में चूर हो जाएगा जब उसकी बुद्धि एकाग्र हो जाएगी तो हर चीज के बच्चों को एक ही तरह से बड़ा ना तो पूरी तरह से गलत है दूसरा बस्ते का बोझ बोझ कम हो गया यह तो बहुत अच्छी बात है कोई कमजोर बच्चा है पहली दूसरी क्लास में 500 साल के बच्चों को आप 1010 किताबे 10 10 कॉपी औलाद के आठ 10 किलो का बस्ता पकड़ा दे रहे हो उसकी स्कूल जाने में ही हालत खराब हो जाती है फिर क्लास में बैठकर क्या सीखेगा और क्या पड़ेगा फिर वहां से बसता लादकर ले आएगा तो बस्ती का वजन बिल्कुल कम होना चाहिए ठीक है और दूसरा कई गरीब बच्चे भी होते हैं वह सकता इतनी सारी किताब कॉपी आना खरीदना है तो इसकी कई पहलू हैं और सूचिया क्या-क्या हो सकते हैं यह सरकार का बिल्कुल स्वागत योग्य फैसला है बच्चों को बोल और होमवर्क दोनों से मुक्ति मिली बहुत जरूरी थी मौत अच्छा फैसला शुक्रिया
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