एक इंसान दूसरे इंसान की बुराइयां क्यों करता है ? ...

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एक इंसान दूसरे इंसान की बुराइयों क्यों करता है मेरी सबसे हर इंसान बहुत अच्छे हैं और कई बजे होती यह उस इंसान के देखने का नजरिया होता है कि वह अच्छे-अच्छे अच्छाइयों को देखो अच्छा देखने में क्या होता है बताइए जो होती है वह सेम दिखने में दिखने के लिए नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि अच्छा यह स्पष्ट होता है कि हां यह बंदा अच्छा काम किया था क्या बात है लेकिन जो बोल रही होती है वह इंसान को बहुत अच्छी तरह ट्रैक करते हैं क्योंकि इंसान खुद की जो तू प्रदर्शित नहीं कर पाता इंसटैंटली नहीं बोल पाता क्या मैंने गलत किया है तो उसके लिए बहुत आसान हो जाता है दूसरों को प्लेन करना या दूसरे में बताइए निकालना पति खुद को सेटिस्फाई कर सके तो क्या हो गया उसने भी तो गलत किया है तो मैंने भी किया तो क्या हो गया बहुत आसानी से हो जाता है और इस चीज को करते हुए ना हम कभी भी जिंदगी में कुछ भी मैं खुश नहीं हो पाती इसलिए बहुत जरूरी है कि हम मर जाए हम यह पता कर सकें पहचान सके कि सामने वाले हिंदी में इंसान बन इंसान में कितनी कौन-कौन सी अच्छा है उस अच्छाइयों को अपने में ग्रहण करने की कोशिश कर सकने में लागू करने की कोशिश दूसरी तरफ जो बोला है हम उस सामने वाले इंसान को बताएं कि आपने यह चीज की कमी है इस पर काम कर सकते हो सकते हमारी भी दी हुई चीज कर रही है तो हम क्यों नहीं उस चीज को अपने में लागू कर सके उस चीज पर काम कर सके तो इसमें सोचना जरूरी होता है
एक इंसान दूसरे इंसान की बुराइयों क्यों करता है मेरी सबसे हर इंसान बहुत अच्छे हैं और कई बजे होती यह उस इंसान के देखने का नजरिया होता है कि वह अच्छे-अच्छे अच्छाइयों को देखो अच्छा देखने में क्या होता है बताइए जो होती है वह सेम दिखने में दिखने के लिए नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि अच्छा यह स्पष्ट होता है कि हां यह बंदा अच्छा काम किया था क्या बात है लेकिन जो बोल रही होती है वह इंसान को बहुत अच्छी तरह ट्रैक करते हैं क्योंकि इंसान खुद की जो तू प्रदर्शित नहीं कर पाता इंसटैंटली नहीं बोल पाता क्या मैंने गलत किया है तो उसके लिए बहुत आसान हो जाता है दूसरों को प्लेन करना या दूसरे में बताइए निकालना पति खुद को सेटिस्फाई कर सके तो क्या हो गया उसने भी तो गलत किया है तो मैंने भी किया तो क्या हो गया बहुत आसानी से हो जाता है और इस चीज को करते हुए ना हम कभी भी जिंदगी में कुछ भी मैं खुश नहीं हो पाती इसलिए बहुत जरूरी है कि हम मर जाए हम यह पता कर सकें पहचान सके कि सामने वाले हिंदी में इंसान बन इंसान में कितनी कौन-कौन सी अच्छा है उस अच्छाइयों को अपने में ग्रहण करने की कोशिश कर सकने में लागू करने की कोशिश दूसरी तरफ जो बोला है हम उस सामने वाले इंसान को बताएं कि आपने यह चीज की कमी है इस पर काम कर सकते हो सकते हमारी भी दी हुई चीज कर रही है तो हम क्यों नहीं उस चीज को अपने में लागू कर सके उस चीज पर काम कर सके तो इसमें सोचना जरूरी होता है
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यूं तो हर इंसान में कुछ अच्छाइयां और कुछ बुराइयां होती अब जब कोई भी इंसान दूसरों में बुराइयां क्यों देखता है या दूसरों की बुराई क्यों करता है ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति अपने दूसरे की बुराइयों पर हावी हो जाता है अगर आप ठंडे दिमाग से सोच बहुत ही आलसी हो सकता है आलसी लोग किसी भी कठिन से कठिन काम आसान से आसान तरीके मुझे 10 दिन के काम है उसको 2 दिन में कैसे करें इस कोशिश में पूरा ध्यान लगा देते हैं और ज्यादातर लोग संगठन संगठन और आपके अंदर की अच्छाइयों का मनोबल बढ़ता है आपका कॉन्फिडेंस पड़ता है आपका आत्मविश्वास बढ़ता है इंसान दूसरे इंसान की बुराइयां
यूं तो हर इंसान में कुछ अच्छाइयां और कुछ बुराइयां होती अब जब कोई भी इंसान दूसरों में बुराइयां क्यों देखता है या दूसरों की बुराई क्यों करता है ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति अपने दूसरे की बुराइयों पर हावी हो जाता है अगर आप ठंडे दिमाग से सोच बहुत ही आलसी हो सकता है आलसी लोग किसी भी कठिन से कठिन काम आसान से आसान तरीके मुझे 10 दिन के काम है उसको 2 दिन में कैसे करें इस कोशिश में पूरा ध्यान लगा देते हैं और ज्यादातर लोग संगठन संगठन और आपके अंदर की अच्छाइयों का मनोबल बढ़ता है आपका कॉन्फिडेंस पड़ता है आपका आत्मविश्वास बढ़ता है इंसान दूसरे इंसान की बुराइयां
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देखिए कुछ लोगों की आदत होती है एक दूसरे की बुराई करने की और कुछ लोगों की आदत होती है एक दूसरे की आलोचना करने की आलोचक किसी चीज का मूल्य जानते हैं लेकिन उसका महत्व नहीं जानते तो यह लेकिन यह भी सत्य है कि आलोचना करने वाले ही किसी इंसान को तरक्की दिलाते हैं आगे बढ़ाते हैं देखिए गांव घर में क्या होता है अगर कोई लड़का पढ़ने के लिए निकलता है यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली आता है तो गांव वाले बैठ कर उसकी चर्चा करते हैं उसके बारे में बताते हैं कि नहीं अरे बहुत आवारा है वह पढ़ता नहीं है यह नहीं करता है वह नहीं करता है कभी उस बच्चे को लड़की को पता चलता है उसके बाद जो वह लड़का अपने धैर्य को नहीं होता है अपना कर्म करते रहता है एक दिन वह लड़का आईएएस अधिकारी बन जाता है तो फिर जाकर वही आलोचना करने वाले लोग उसकी प्रशंसा करने लगते हैं तो अगर वह आईएस बनता है तो उसके पीछे आलोचक आलोचना करने वालों का सबसे बड़ा हाथ होता है तो आलोचना करने वालों से घबराइए मत आलोचना को सकारात्मक तरीके से लीजिए आलोचना करने वाले हमारे सबसे बड़े हित ऐसी होते हैं जो हमारी प्रशंसा हमारे मुंह पर करते हैं वह बहुत खतरनाक होते हैं उनसे बच के रहिए अपने आलोचक को सही तरीके से लीजिए जब आलोचक को आप सही तरीके से लेंगे तभी आप आगे बढ़ेंगे तरक्की करेंगे धन्यवाद
देखिए कुछ लोगों की आदत होती है एक दूसरे की बुराई करने की और कुछ लोगों की आदत होती है एक दूसरे की आलोचना करने की आलोचक किसी चीज का मूल्य जानते हैं लेकिन उसका महत्व नहीं जानते तो यह लेकिन यह भी सत्य है कि आलोचना करने वाले ही किसी इंसान को तरक्की दिलाते हैं आगे बढ़ाते हैं देखिए गांव घर में क्या होता है अगर कोई लड़का पढ़ने के लिए निकलता है यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली आता है तो गांव वाले बैठ कर उसकी चर्चा करते हैं उसके बारे में बताते हैं कि नहीं अरे बहुत आवारा है वह पढ़ता नहीं है यह नहीं करता है वह नहीं करता है कभी उस बच्चे को लड़की को पता चलता है उसके बाद जो वह लड़का अपने धैर्य को नहीं होता है अपना कर्म करते रहता है एक दिन वह लड़का आईएएस अधिकारी बन जाता है तो फिर जाकर वही आलोचना करने वाले लोग उसकी प्रशंसा करने लगते हैं तो अगर वह आईएस बनता है तो उसके पीछे आलोचक आलोचना करने वालों का सबसे बड़ा हाथ होता है तो आलोचना करने वालों से घबराइए मत आलोचना को सकारात्मक तरीके से लीजिए आलोचना करने वाले हमारे सबसे बड़े हित ऐसी होते हैं जो हमारी प्रशंसा हमारे मुंह पर करते हैं वह बहुत खतरनाक होते हैं उनसे बच के रहिए अपने आलोचक को सही तरीके से लीजिए जब आलोचक को आप सही तरीके से लेंगे तभी आप आगे बढ़ेंगे तरक्की करेंगे धन्यवाद
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यह मानव के भी ऊपर डिपेंड होता है जो दो प्रकार के होते हैं नेगेटिव और पॉजिटिव पॉजिटिव वाले इंसान दूसरे इंसान ओं की कुंडा की टिक्की वाला इंसान चाहे कहीं भी चला जाए वह हमेशा दूसरे लोगों की बुराइयां ढूंढेगा जैसे की फूड को कितनी भी सुंदर हरे-भरे उसको से भरे हुए उद्यान बगीचे में भेज दो बॉस बगीचे की सुंदरता को नहीं देखेगा ना फलों से लदे हुए पेड़ों को देखेगा ना पुष्पों से लदे हुए पेड़ों को देखेगा अभी तो वह कटीली झाड़ियां ढूंढेगा इसी प्रकार से जीतने की जिद है वह दूसरों की बुराइयां खोजने में लगा रहता है जबकि पॉजिटिव वाला इंसान केवल दूसरों के गुणों को ढूंढता है एक बार क्या हुआ कि दुर्योधन और युधिष्ठिर की चलने दो नाचारी निवेदन कोई खालीपन ना दिया और कहा कि तुम इस नगरी में जाओ सामने वाली नगरी में और बड़े आदमियों की लिस्ट बनाकर लाओ और उसको कहां कि तुम भी खालीपन ना ले जाओ और तुम इस नगरी में जितने भी दुष्ट दर्जन लोग हैं उन लोगों की लिस्ट बना कर पिलाओ दोनों गए और 5 घंटे दौड़ने के बाद में दोनों ही वहां से आए दुर्योधन से पूछा कि वही कृपया पर सज्जन आदमी दुर्योधन ने कहा कि सर एक सज्जन नहीं मिला मुझे सभी दुर्जन दुर्जन मिले और सभी भारतीय लुटेरे हैं ऐसे हैं इसलिए मैं पूरा का पूरा ही खाली लिया है उसने भी मुझे कोई भी दोस्त दुर्जन नजर नहीं आया सब अच्छे अच्छे हैं इसका मतलब दोनों की पॉजिटिव और नेगेटिव थे
यह मानव के भी ऊपर डिपेंड होता है जो दो प्रकार के होते हैं नेगेटिव और पॉजिटिव पॉजिटिव वाले इंसान दूसरे इंसान ओं की कुंडा की टिक्की वाला इंसान चाहे कहीं भी चला जाए वह हमेशा दूसरे लोगों की बुराइयां ढूंढेगा जैसे की फूड को कितनी भी सुंदर हरे-भरे उसको से भरे हुए उद्यान बगीचे में भेज दो बॉस बगीचे की सुंदरता को नहीं देखेगा ना फलों से लदे हुए पेड़ों को देखेगा ना पुष्पों से लदे हुए पेड़ों को देखेगा अभी तो वह कटीली झाड़ियां ढूंढेगा इसी प्रकार से जीतने की जिद है वह दूसरों की बुराइयां खोजने में लगा रहता है जबकि पॉजिटिव वाला इंसान केवल दूसरों के गुणों को ढूंढता है एक बार क्या हुआ कि दुर्योधन और युधिष्ठिर की चलने दो नाचारी निवेदन कोई खालीपन ना दिया और कहा कि तुम इस नगरी में जाओ सामने वाली नगरी में और बड़े आदमियों की लिस्ट बनाकर लाओ और उसको कहां कि तुम भी खालीपन ना ले जाओ और तुम इस नगरी में जितने भी दुष्ट दर्जन लोग हैं उन लोगों की लिस्ट बना कर पिलाओ दोनों गए और 5 घंटे दौड़ने के बाद में दोनों ही वहां से आए दुर्योधन से पूछा कि वही कृपया पर सज्जन आदमी दुर्योधन ने कहा कि सर एक सज्जन नहीं मिला मुझे सभी दुर्जन दुर्जन मिले और सभी भारतीय लुटेरे हैं ऐसे हैं इसलिए मैं पूरा का पूरा ही खाली लिया है उसने भी मुझे कोई भी दोस्त दुर्जन नजर नहीं आया सब अच्छे अच्छे हैं इसका मतलब दोनों की पॉजिटिव और नेगेटिव थे
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एक इंसान पूरा कब बनता है इंसान पूरा तब बनता है जब वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझता है तो आज के वक्त में भी यही हो रहा है शुरू में भी यही होता अधिकतर लोगों की यही काम था कि वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते थे और यही वजह है कि एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई करता करता है वह अपने आप को दूसरों से अच्छा समझता है मगर वह यह भूल जाता है कि यह भी हो सकता है कि मैं जिस शख्स को ऐसा समझ रहा हूं वह मुझसे दो कदम आगे तो यहां पर जो बुद्धिजीवी लोग होते हैं जो समझदार किस्म के लोग होते हैं जो इनकी बातों पर कभी नहीं पड़ता क्योंकि कहावत है कि कमार उसे कभी भी चुप सलाम तक कि रखो मुझसे बहस मत करो जिस इंसान की जितनी अकल होती उससे उतनी बात की जाए तू यही मामला है भाई की एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई किस लिए करता है क्योंकि वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझता है
एक इंसान पूरा कब बनता है इंसान पूरा तब बनता है जब वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझता है तो आज के वक्त में भी यही हो रहा है शुरू में भी यही होता अधिकतर लोगों की यही काम था कि वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते थे और यही वजह है कि एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई करता करता है वह अपने आप को दूसरों से अच्छा समझता है मगर वह यह भूल जाता है कि यह भी हो सकता है कि मैं जिस शख्स को ऐसा समझ रहा हूं वह मुझसे दो कदम आगे तो यहां पर जो बुद्धिजीवी लोग होते हैं जो समझदार किस्म के लोग होते हैं जो इनकी बातों पर कभी नहीं पड़ता क्योंकि कहावत है कि कमार उसे कभी भी चुप सलाम तक कि रखो मुझसे बहस मत करो जिस इंसान की जितनी अकल होती उससे उतनी बात की जाए तू यही मामला है भाई की एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई किस लिए करता है क्योंकि वह अपने आप को दूसरों से बेहतर समझता है
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एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई है इसलिए करता है क्योंकि वह उस आदमी से जलता है और उस आदमी का बुरा चाहता है उसकी बुराई कर बुरा है बुराई करते हैं
एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई है इसलिए करता है क्योंकि वह उस आदमी से जलता है और उस आदमी का बुरा चाहता है उसकी बुराई कर बुरा है बुराई करते हैं
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एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई इसलिए करता है क्योंकि वह दूसरे इंसान की सफलताओं से जलता है तथा दोनों के बीच काफी मतभेद होते हैं या दुश्मनी होती है तो एक दूसरे की बुराई की जाती है
Romanized Version
एक इंसान दूसरे इंसान की बुराई इसलिए करता है क्योंकि वह दूसरे इंसान की सफलताओं से जलता है तथा दोनों के बीच काफी मतभेद होते हैं या दुश्मनी होती है तो एक दूसरे की बुराई की जाती हैEk Insaan Dusre Insaan Ki Burayi Isliye Karta Hai Kyonki Wah Dusre Insaan Ki Safaltaon Se Jalta Hai Tatha Dono Ke Bich Kafi Matbhed Hote Hain Ya Dushmani Hoti Hai To Ek Dusre Ki Burayi Ki Jati Hai
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