पावस ऋतु में कौन कौन से परिवर्तन आते है ? ...

वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।
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वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।Varsha Ritu Mein Mausam Badalta Rehta Hai Tez Varsha Hoti Hai Jal Pahadon Ke Neeche Ikattha Hota Hai To Darpan Jaisa Lagta Hai Parvat Maalaaon Par Anaginat Fool Khil Jaate Hain Aisa Lagta Hai Ki Anaiko Netarr Kholakar Parvat Dekh Raha Hai Parwato Par Bahte Jharane Maano Unka Gaurav Gaan Ga Rahe Hain Lambe Lambe Vriksh Aasman Ko Niharate Chintamagn Dikhai De Rahe Hain Achanak Kaale Kaale Badal Ghir Aate Hain Aisa Lagta Hai Maano Badal Rupee Pankh Lagakar Parvat Udana Chahte Hain Koharaa Dhuyein Jaisa Lagta Hai Indra Devta Badalon Ke Yaan Par Baithkar Naye Naye Jadu Dikhana Chahte Hain
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वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है | तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।
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वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है | तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।Varsha Ritu Mein Mausam Badalta Rehta Hai Tez Varsha Hoti Hai Jal Pahadon Ke Neeche Ikattha Hota Hai | To Darpan Jaisa Lagta Hai Parvat Maalaaon Par Anaginat Fool Khil Jaate Hain Aisa Lagta Hai Ki Anaiko Netarr Kholakar Parvat Dekh Raha Hai Parwato Par Bahte Jharane Maano Unka Gaurav Gaan Ga Rahe Hain Lambe Lambe Vriksh Aasman Ko Niharate Chintamagn Dikhai De Rahe Hain Achanak Kaale Kaale Badal Ghir Aate Hain Aisa Lagta Hai Maano Badal Rupee Pankh Lagakar Parvat Udana Chahte Hain Koharaa Dhuyein Jaisa Lagta Hai Indra Devta Badalon Ke Yaan Par Baithkar Naye Naye Jadu Dikhana Chahte Hain
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वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है | तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।
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वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है | तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।Varsha Ritu Mein Mausam Badalta Rehta Hai Tez Varsha Hoti Hai Jal Pahadon Ke Neeche Ikattha Hota Hai | To Darpan Jaisa Lagta Hai Parvat Maalaaon Par Anaginat Fool Khil Jaate Hain Aisa Lagta Hai Ki Anaiko Netarr Kholakar Parvat Dekh Raha Hai Parwato Par Bahte Jharane Maano Unka Gaurav Gaan Ga Rahe Hain Lambe Lambe Vriksh Aasman Ko Niharate Chintamagn Dikhai De Rahe Hain Achanak Kaale Kaale Badal Ghir Aate Hain Aisa Lagta Hai Maano Badal Rupee Pankh Lagakar Parvat Udana Chahte Hain Koharaa Dhuyein Jaisa Lagta Hai Indra Devta Badalon Ke Yaan Par Baithkar Naye Naye Jadu Dikhana Chahte Hain
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