क्या आप धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र या कम्युनिस्टों को चाहते हैं क्योंकि जब मुझे लगता है कि संस्कृति तो मुझे विचलित कर देती है? ...

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मुझे मेरे हिसाब से जो राष्ट्र होता है नेशन तो उसका जो है धर्म में कोई भी रोल नहीं है और कोई भी टाइप का एंट्रेंस नहीं होना चाहिए और मतलब जैसे तो इसलिए मुझे भारत का जो संविधान है उसमें यह बहुत अच्छा लगता है कि हर व्यक्ति को अपनी अपनी जगह मिली है वह रखने की रखने कि अगर मैं अशिष्ट बनना चाहता हूं तुम्हें देखती रह सकता हूं मैं हिंदू बनना चाहता हूं मेरा सकता हूं ना मुस्लिम जा सकता हूं मैं जा सकता हूं मैं कृष्णा हूं मैं जो रिलीज हुआ है और इसकी ब्राइट है बे कमीनी इस देश में अफेयर्स जनरल कम्युनिस्ट गवर्मेंट अगर होती है वह देश अगर कम्युनिस्ट है तो उसमें जो है एग्जाम लिस्ट जो है ना होता है मतलब पहचाना जाता है तो उसमें जो है कोई स्टेट में अलाउड नहीं है कोई धर्म जाए प्रेक्टिस करना है टेक्निकल ऐसे मामले में तो यह भी गलत चीज है ऐसा भी नहीं होना चाहिए स्ट्रीम फॉर्म हो गया तो मेरे सबसे नहीं राजी होने चाहिए बट उनका धर्म में कोई इंटरेस्ट होना चाहिए क्योंकि धर्म की जो 24 है वह बहुत ही पर्सनल चीज़ है एक निजी मामला है एक व्यक्ति का और तो उसको किसी भी व्यक्ति को जॉब रिलेशन रखना उसको रखने दिया जाना चाहिएMujhe Mere Hisab Se Jo Rashtra Hota Hai Nation To Uska Jo Hai Dharm Mein Koi Bhi Roll Nahi Hai Aur Koi Bhi Type Ka Entrance Nahi Hona Chahiye Aur Matlab Jaise To Isliye Mujhe Bharat Ka Jo Samvidhan Hai Usamen Yeh Bahut Accha Lagta Hai Ki Har Vyakti Ko Apni Apni Jagah Mili Hai Wah Rakhne Ki Rakhne Ki Agar Main Ashisht Banana Chahta Hoon Tumhein Dekhti Rah Sakta Hoon Main Hindu Banana Chahta Hoon Mera Sakta Hoon Na Muslim Ja Sakta Hoon Main Ja Sakta Hoon Main Krishna Hoon Main Jo Release Hua Hai Aur Iski Bright Hai Be Kamini Is Desh Mein Affairs General Communist Goverment Agar Hoti Hai Wah Desh Agar Communist Hai To Usamen Jo Hai Exam List Jo Hai Na Hota Hai Matlab Pehchana Jata Hai To Usamen Jo Hai Koi State Mein Allowed Nahi Hai Koi Dharm Jaye Practice Karna Hai Technical Aise Mamle Mein To Yeh Bhi Galat Cheez Hai Aisa Bhi Nahi Hona Chahiye Stream Form Ho Gaya To Mere Sabse Nahi Raji Hone Chahiye But Unka Dharm Mein Koi Interest Hona Chahiye Kyonki Dharm Ki Jo 24 Hai Wah Bahut Hi Personal Cheese Hai Ek Niji Maamla Hai Ek Vyakti Ka Aur To Usko Kisi Bhi Vyakti Ko Job Relation Rakhna Usko Rakhne Diya Jana Chahiye
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आज जो हमारी संस्कृति में विचलन दिखाई दे रहा है परिवर्तन दिखाई दे रहा है वह धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने की वजह से नहीं पश्चिमी संस्कृति की ग्रहण किए जाने की वजह से इसमें हमारी आपकी गलतियां ना कि हमारे संविधान की संविधान के द्वारा जो धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया गया उसकी वजह से तो हमारी संस्कृति और ज्यादा पर लगी हुई है पोषित हुई है तथा परिवर्तित हो रही है मुझे लगता है कि हम पश्चिमी सभ्यता का ग्रहण कर रहे हैं पश्चिमी संस्कृति को अपना रहे हैं उतनी ज्यादा हम भौतिकता में विलीन हो रहे हैं जिससे हमारी संस्कृति का हरा भरा है क्योंकि हमारी संस्कृति सिर्फ भौतिकता को नहीं लेकर चलती है इसमें ईश्वरीय पता होना चाहिए जो बहुत ही कम होता जा रहा है आज वो ईश्वर पर हमारे धर्म पर संदेह का रहती है पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव पर मुझे लगता है कि जो हमारे राष्ट्र में जो धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है बहुत ही अच्छा है बहुत ही साथ आर्थिक है और व्यवहारिक है इसके द्वारा धर्म की वृद्धि हो ही रही है साथ ही साथ राष्ट्र की विधि सभी धर्मों में समानताएं एकता बंधुत्व की भावना विकसित की जा रही है जिससे बहुत ही अच्छा परेशानियां उत्पन्न होती है दंगे फसाद होते हैं यदि अन्य देशों से कम प्यार की जब मुक्तक कम्युनिस्टों की जो बात की जा रही है वहां तो अधिकारों को बहुत ही ज्यादा हनन होता है दूसरे जो धर्म के हैं उन्हें बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो हमें ऐसा रोशनी चाहिए हमारे राष्ट्रीय जैसा है वैसा ही है जांच अनेकता है जान भी देता है सब मैं फिर भी समानता व्याप्त है तो मुझे लगता है कि हमारे जो भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है संविधान के द्वारा जो प्राप्त किया गया वह बहुत ही अतुलनीय है और हमारा देश में हमारी संस्कृति में जो परिवर्तन हो रहा है वह हमारी वजह से हो रहा है हम अब पश्चिमी सभ्यता संस्कृति को शत-शत भारतीय संस्कृति सभ्यता और संस्कृति को एक साथ लेकर चल रहे हैं और उचित सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं तभी अच्छा होगा वरना जो संस्कृति हमारी आज विचलित हो रही है मां होती रहेगीAaj Jo Hamari Sanskriti Mein Vichalan Dikhai De Raha Hai Pariwartan Dikhai De Raha Hai Wah Dharmanirapeksh Rashtra Hone Ki Wajah Se Nahi Pashchimi Sanskriti Ki Grahan Kiye Jaane Ki Wajah Se Isme Hamari Aapki Galtiya Na Ki Hamare Samvidhan Ki Samvidhan Ke Dwara Jo Dharmanirapeksh Rashtra Banaya Gaya Uski Wajah Se To Hamari Sanskriti Aur Jyada Par Lagi Hui Hai Poshit Hui Hai Tatha Parivartit Ho Rahi Hai Mujhe Lagta Hai Ki Hum Pashchimi Sabhyata Ka Grahan Kar Rahe Hain Pashchimi Sanskriti Ko Apna Rahe Hain Utani Jyada Hum Bhautikata Mein Vilin Ho Rahe Hain Jisse Hamari Sanskriti Ka Hara Bhara Hai Kyonki Hamari Sanskriti Sirf Bhautikata Ko Nahi Lekar Chalti Hai Isme Ishwariy Pata Hona Chahiye Jo Bahut Hi Kum Hota Ja Raha Hai Aaj Vo Ishwar Par Hamare Dharm Par Sandeh Ka Rehti Hai Pashchimi Sanskriti Ke Prabhav Par Mujhe Lagta Hai Ki Jo Hamare Rashtra Mein Jo Dharmanirapeksh Rashtra Hai Bahut Hi Accha Hai Bahut Hi Saath Aarthik Hai Aur Vyavharik Hai Iske Dwara Dharm Ki Vriddhi Ho Hi Rahi Hai Saath Hi Saath Rashtra Ki Vidhi Sabhi Dharmon Mein Samantaen Ekta Bandhutwa Ki Bhavna Viksit Ki Ja Rahi Hai Jisse Bahut Hi Accha Pareshaniyan Utpann Hoti Hai Denge Fasad Hote Hain Yadi Anya Deshon Se Kum Pyar Ki Jab Muktakt Communiston Ki Jo Baat Ki Ja Rahi Hai Wahan To Adhikaaro Ko Bahut Hi Jyada Hanan Hota Hai Dusre Jo Dharm Ke Hain Unhen Bahut Jyada Pareshaaniyon Ka Samana Karna Padata Hai To Hume Aisa Roshni Chahiye Hamare Rashtriya Jaisa Hai Waisa Hi Hai Janch Anekata Hai Jaan Bhi Deta Hai Sab Main Phir Bhi Samanata Vyapt Hai To Mujhe Lagta Hai Ki Hamare Jo Bhi Dharmanirapeksh Rashtra Hai Samvidhan Ke Dwara Jo Prapt Kiya Gaya Wah Bahut Hi Atulniya Hai Aur Hamara Desh Mein Hamari Sanskriti Mein Jo Pariwartan Ho Raha Hai Wah Hamari Wajah Se Ho Raha Hai Hum Ab Pashchimi Sabhyata Sanskriti Ko Shat Shat Bhartiya Sanskriti Sabhyata Aur Sanskriti Ko Ek Saath Lekar Chal Rahe Hain Aur Uchit Samanjasya Sthapit Kar Rahe Hain Tabhi Accha Hoga Varana Jo Sanskriti Hamari Aaj Vichalit Ho Rahi Hai Maa Hoti Rahegi
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