वृद्धा आश्रम में मैन बहुत से माँ बाप को देखा इसमे ज्यादातर किसका हाथ रहता है उन्हें पहुंचाने में? ...

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वृद्ध आश्रमों में बढ़ रहे हैं मां-बाप की संख्या हमारी सभ्यता व संस्कृति पर कलंक लग जाती है यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कारों में अब कभी आ रही है मछली हम युवाओं में जो हम पश्चिमी सभ्यता का ग्रहण कर रहे...जवाब पढ़िये
वृद्ध आश्रमों में बढ़ रहे हैं मां-बाप की संख्या हमारी सभ्यता व संस्कृति पर कलंक लग जाती है यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कारों में अब कभी आ रही है मछली हम युवाओं में जो हम पश्चिमी सभ्यता का ग्रहण कर रहे हैं जितना अधिक नाला रहे हैं अधिकता में विलीन हो रहे हैं जैसे जैसे हमारे बड़े बड़े ख्वाब होते जा रहे हैं इसी की वजह से ऐसा हो रहा है क्योंकि युवाओं में ही बहुत ही ज्यादा गलत चेंज हो चुका है अभी एकल परिवार की ओर बढ़ने पता नहीं क्यों पहले जॉइंट फैमिली हुआ करती थी लेकिन आजकल सभी युवा चाहते हैं शादी के बाद वाला करें और जो औरतें भी आती हैं उनकी भी बहुत गलत संस्कार मिले होते हैं वह आने के बाद पहले अलग होने का मांग करते तो मुझे लगता है संस्कारों में कुछ कमी आई है साथ ही साथ हम आज जो नए नए ख्वाब होने जा रहे हैं अपने परिवार के लिए बच्चों को उचित शिक्षा बड़े-बड़े स्कूल में शिक्षा देने का उचित सोसाइटी में रखने का जिसकी वजह से हुआ बुक संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है और लोग अपने मां-बाप को बोझ समझने लगते हैं तो हमारी सभ्यता व संस्कृति का यह राज दर्शाता है हम युवाओं को पथभ्रष्ट होना दिखाता है क्योंकि हम आज जितनी पश्चिमी सभ्यता के ग्रहण करेंगे उतना ऐसी प्रवृत्ति बढ़ती जाएगी तो मुझे लगता है कि वाक्य सुधार करने की जरूरत है इसके लिए नैतिक उत्थान के साथ-साथ गवर्नमेंट के द्वारा प्रदान किया जाना चाहिए कुछ रूल बना देना चाहिए क्योंकि आजकल बाकी जो अच्छे अमीर बच्चे भी हैं वह भी अपने मां बाप को वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं जो अच्छे स्टेटस में है वह भी ऐसा कर लेते हैं तो मुझे लगता है कि गवर्नमेंट को आकर कुछ करने की जरूरत है क्योंकि अब युवा पथ भ्रष्ट हो रहे हैं हमारा समाज गलत राह पर चल रहा है अपने मां-बाप मां-बाप की आदर नहीं करता और अपने मां-बाप को बहुत समझता है यह बहुत ही कलर कि हमारे समाज के लिए इससे कम से कम दूर करने के लिए नैतिक उत्थान बच्चों को उचित शिक्षा गवर्नमेंट द्वारा व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि यह रूक पाया जाएVriddh Aashramon Mein Badh Rahe Hain Maa Baap Ki Sankhya Hamari Sabhyata V Sanskriti Par Kulak Lag Jati Hai Yeh Darshatee Hai Ki Bhartiya Sanskaron Mein Ab Kabhi Aa Rahi Hai Machli Hum Yuvaon Mein Jo Hum Pashchimi Sabhyata Ka Grahan Kar Rahe Hain Jitna Adhik Nala Rahe Hain Adhikata Mein Vilin Ho Rahe Hain Jaise Jaise Hamare Bade Bade Khwab Hote Ja Rahe Hain Isi Ki Wajah Se Aisa Ho Raha Hai Kyonki Yuvaon Mein Hi Bahut Hi Jyada Galat Change Ho Chuka Hai Abhi Ekal Parivar Ki Oar Badhne Pata Nahi Kyun Pehle Joint Family Hua Karti Thi Lekin Aajkal Sabhi Yuva Chahte Hain Shadi Ke Baad Wala Karen Aur Jo Auraten Bhi Aati Hain Unki Bhi Bahut Galat Sanskar Mile Hote Hain Wah Aane Ke Baad Pehle Alag Hone Ka Maang Karte To Mujhe Lagta Hai Sanskaron Mein Kuch Kami Eye Hai Saath Hi Saath Hum Aaj Jo Naye Naye Khwab Hone Ja Rahe Hain Apne Parivar Ke Liye Bacchon Ko Uchit Shiksha Bade Bade School Mein Shiksha Dene Ka Uchit Society Mein Rakhne Ka Jiski Wajah Se Hua Book Sankhya Mein Bahut Jyada Ijafa Hua Hai Aur Log Apne Maa Baap Ko Bojh Samjhne Lagte Hain To Hamari Sabhyata V Sanskriti Ka Yeh Raj Darshaata Hai Hum Yuvaon Ko Pathbhrasht Hona Dikhaata Hai Kyonki Hum Aaj Jitni Pashchimi Sabhyata Ke Grahan Karenge Utana Aisi Pravritti Badhti Jayegi To Mujhe Lagta Hai Ki Vaakya Sudhaar Karne Ki Zaroorat Hai Iske Liye Naitik Utthan Ke Saath Saath Government Ke Dwara Pradan Kiya Jana Chahiye Kuch Rule Bana Dena Chahiye Kyonki Aajkal Baki Jo Acche Amir Bacche Bhi Hain Wah Bhi Apne Maa Baap Ko Vrudhashram Mein Chod Aate Hain Jo Acche Status Mein Hai Wah Bhi Aisa Kar Lete Hain To Mujhe Lagta Hai Ki Government Ko Aakar Kuch Karne Ki Zaroorat Hai Kyonki Ab Yuva Path Bhrasht Ho Rahe Hain Hamara Samaaj Galat Raah Par Chal Raha Hai Apne Maa Baap Maa Baap Ki Aadar Nahi Karta Aur Apne Maa Baap Ko Bahut Samajhata Hai Yeh Bahut Hi Color Ki Hamare Samaaj Ke Liye Isse Kum Se Kum Dur Karne Ke Liye Naitik Utthan Bacchon Ko Uchit Shiksha Government Dwara Vyavastha Ki Jani Chahiye Taki Yeh Ruk Paya Jaye
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जी आश्रम गोशाला मां बाप होते हैं लोग अफ्रीका की फैमिली में अगर वह कितनी बैठते हैं जो दूसरे उनके बेटे या उनकी बहू में उनका हाथ होता है लड़कियों के द्वारा हाथ होता है कि वह बोल दिया हम उनके साथ नहीं रह ...जवाब पढ़िये
जी आश्रम गोशाला मां बाप होते हैं लोग अफ्रीका की फैमिली में अगर वह कितनी बैठते हैं जो दूसरे उनके बेटे या उनकी बहू में उनका हाथ होता है लड़कियों के द्वारा हाथ होता है कि वह बोल दिया हम उनके साथ नहीं रह सकते हैं यह वह बहाने बनाते हैं तो इसकी वजह से जो है उनको जो है वहां पर वृद आश्रम में जाकर छोड़ आते हैं लोग उनके बेटे ही होते हैं जो उनकी बहू होती हैं कुछ होते हैं उनको बहुत लगता है बाद में बढ़िया बिल्कुल गलत बात है ऐसा नहीं करना चाहिएJi Aashram Goshala Maa Baap Hote Hain Log Africa Ki Family Mein Agar Wah Kitni Baithate Hain Jo Dusre Unke Bete Ya Unki Bahu Mein Unka Hath Hota Hai Ladkiyon Ke Dwara Hath Hota Hai Ki Wah Bol Diya Hum Unke Saath Nahi Rah Sakte Hain Yeh Wah Bahaane Banate Hain To Iski Wajah Se Jo Hai Unko Jo Hai Wahan Par Vrid Aashram Mein Jaakar Chod Aate Hain Log Unke Bete Hi Hote Hain Jo Unki Bahu Hoti Hain Kuch Hote Hain Unko Bahut Lagta Hai Baad Mein Badhiya Bilkul Galat Baat Hai Aisa Nahi Karna Chahiye
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