विज्ञान और धार्मिक आप इन दोनों में से सबसे ज्यादा विश्वास किस में रखते हैं ? ...

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यदि विज्ञान और धर्म के बाद किया तो मैं विज्ञान पर ज्यादा विश्वास करता हूं क्यों विज्ञान और देता है हर किसी बात का एक अनुभव करा देता है मतलब हम से देख सकते हैं महसूस कर सकते हैं और कुछ भी कह सकते लेकिन...
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यदि विज्ञान और धर्म के बाद किया तो मैं विज्ञान पर ज्यादा विश्वास करता हूं क्यों विज्ञान और देता है हर किसी बात का एक अनुभव करा देता है मतलब हम से देख सकते हैं महसूस कर सकते हैं और कुछ भी कह सकते लेकिन धार्मिक की बात करें तो हम उसे अपने मन में अनुभव कर सकते हैंYadi Vigyan Aur Dharm Ke Baad Kiya To Main Vigyan Par Jyada Vishwas Karta Hoon Kyun Vigyan Aur Deta Hai Har Kisi Baat Ka Ek Anubhav Kra Deta Hai Matlab Hum Se Dekh Sakte Hain Mahsus Kar Sakte Hain Aur Kuch Bhi Keh Sakte Lekin Dharmik Ki Baat Karen To Hum Use Apne Man Mein Anubhav Kar Sakte Hain
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नशे की उचित विकास के लिए धर्म और विज्ञान दोनों की जरूरत है इस आधुनिकता में हम धर्म को त्याग नहीं सकते यही धर्म को त्याग देंगे तो हमारे समाज वितरण हो जाएगा को भौतिकता में विलीन हो जाएगा अधिवक्ता कि बिह...
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नशे की उचित विकास के लिए धर्म और विज्ञान दोनों की जरूरत है इस आधुनिकता में हम धर्म को त्याग नहीं सकते यही धर्म को त्याग देंगे तो हमारे समाज वितरण हो जाएगा को भौतिकता में विलीन हो जाएगा अधिवक्ता कि बिहार में बह जाएगा जिसमें से बंद गाड़ी अंधकार है चारों और बहुत परेशानियां और हो जाएंगी जो धर्म में विश्वास करते हैं उनको बहुत संतोष मिलता है यदि इनकी कोई सपने टूटते हैं किस करके ईश्वर के भरोसे भाग जी लेता है साथ ही साथ ईश्वर होते हैं और मनुष्य का जीव जानवर की प्राप्ति के लिए हुआ है यह बहुत जरूरी होता लेकिन हमारी धार्मिक के साथ यदि हम विज्ञान का अध्ययन करें तो संस्कृत आएं मिट जाएगी क्योंकि धर्म हो सके संख्या बताएं जिसकी वजह धार्मिक कल आया दंगे फसाद होते रहते तो हमें विज्ञान के साथ गर्म करते हैं एक रात बुआ विज्ञान की किताब और दूसरे हाथ में धर्म की किताब हो तो हमारे उचित विकास हो पाएगा जो समुद्र में गठबंधन करते हैं चाहे किसी भी धर्म का हिंदू धर्म की बात की जाए जिसमें किसी प्रसंग में आता है कि पहले ई रेसलमेनिया 2007 साल तक तपस्या करते थे तो जब ऐसी जब हम पढ़ते हैं तो अपने तर्क की कसौटी को सूचना चाहिए क्या 2000 साल पहले को संस्कृति थी लेकिन प्यार से बातें की हड़प्पा सभ्यता थी नजर 4000 पहले इसके पहले कुछ था ही नहीं या मानव बहुत ही कम विकास होता है तो तो ऐसी चीजों का में तुरंत समझ जाना है कि यह गलत लिखे गए हैं तो देखिए ऐसा नहीं कि उसमें तुम ऐसा नहीं करते लिखना उनके जो काली ओराली कर गई 2016 गला लिखेंगे तो ऐसे जो कुछ चीजें हैं जो हम ऋग्वेद में भगवान जानवरों के प्रति कर्तव्य सर जी यह भी गलत है क्योंकि मानव के प्रति विज्ञान के नियमों के अनुसार हुई है या नहीं केसे यहां तक पहुंचे तीन चीजों के विश्वास करके धार्मिक रहते हैं तो हमारे उचित विकास हो पाएगाNashe Ki Uchit Vikash Ke Liye Dharm Aur Vigyan Dono Ki Zaroorat Hai Is Adhunikata Mein Hum Dharm Ko Tyag Nahi Sakte Yahi Dharm Ko Tyag Denge To Hamare Samaaj Vitaran Ho Jayega Ko Bhautikata Mein Vilin Ho Jayega Adhivakta Ki Bihar Mein Buh Jayega Jisme Se Band Gaadi Andhakar Hai Charo Aur Bahut Pareshaniyan Aur Ho Jaengi Jo Dharm Mein Vishwas Karte Hain Unko Bahut Santosh Milta Hai Yadi Inki Koi Sapne Tutate Hain Kis Karke Ishwar Ke Bharose Bhag Ji Leta Hai Saath Hi Saath Ishwar Hote Hain Aur Manushya Ka Jeev Janwar Ki Prapti Ke Liye Hua Hai Yeh Bahut Zaroori Hota Lekin Hamari Dharmik Ke Saath Yadi Hum Vigyan Ka Adhyayan Karen To Sanskrit Aaen Mit Jayegi Kyonki Dharm Ho Sake Sankhya Bataen Jiski Wajah Dharmik Kal Aaya Denge Fasad Hote Rehte To Hume Vigyan Ke Saath Garam Karte Hain Ek Raat Buaa Vigyan Ki Kitab Aur Dusre Hath Mein Dharm Ki Kitab Ho To Hamare Uchit Vikash Ho Payega Jo Samudra Mein Gathbandhan Karte Hain Chahe Kisi Bhi Dharm Ka Hindu Dharm Ki Baat Ki Jaye Jisme Kisi Prasang Mein Aata Hai Ki Pehle Ee Resalameniya 2007 Saal Tak Tapasya Karte The To Jab Aisi Jab Hum Padhte Hain To Apne Tark Ki Kasouti Ko Soochna Chahiye Kya 2000 Saal Pehle Ko Sanskriti Thi Lekin Pyar Se Batein Ki Hadappa Sabhyata Thi Nazar 4000 Pehle Iske Pehle Kuch Tha Hi Nahi Ya Manav Bahut Hi Kum Vikash Hota Hai To To Aisi Chijon Ka Mein Turant Samajh Jana Hai Ki Yeh Galat Likhe Gaye Hain To Dekhie Aisa Nahi Ki Usamen Tum Aisa Nahi Karte Likhna Unke Jo Kali Orali Kar Gayi 2016 Galaa Likhenge To Aise Jo Kuch Cheezen Hain Jo Hum Rigved Mein Bhagwan Jaanvaro Ke Prati Kartavya Sar Ji Yeh Bhi Galat Hai Kyonki Manav Ke Prati Vigyan Ke Niyamon Ke Anusar Hui Hai Ya Nahi Kaise Yahan Tak Pahuche Teen Chijon Ke Vishwas Karke Dharmik Rehte Hain To Hamare Uchit Vikash Ho Payega
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देखिए विज्ञान और धर्म दोनों को मैं अलग नजरिए से देखता हूं विज्ञान हमारी प्रगति के लिए काफी और आवश्यक है और वैज्ञानिक रिसर्च जो है वह भी काफी आवश्यक है विज्ञान की उन्नति पर धर्म जो है वह हमारी आत्मिक उ...
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देखिए विज्ञान और धर्म दोनों को मैं अलग नजरिए से देखता हूं विज्ञान हमारी प्रगति के लिए काफी और आवश्यक है और वैज्ञानिक रिसर्च जो है वह भी काफी आवश्यक है विज्ञान की उन्नति पर धर्म जो है वह हमारी आत्मिक उन्नति के लिए जरूरी है जब हम अपने शहर देखते हैं संसार को तो हमें बिग ब्रदर दिखाई देगा पर जब हम स्वयं के घर अंदर देखते हैं तो वहां पर धर्म का राज है वहां पर उन्नति करने के लिए हमें धर्म की आवश्यकता पड़ती है तो दोनों ही जरूरी हैं और दोनों अलग-अलग कारणों से जरूरी हैDekhie Vigyan Aur Dharm Dono Ko Main Alag Nazariye Se Dekhta Hoon Vigyan Hamari Pragati Ke Liye Kafi Aur Aavashyak Hai Aur Vaigyanik Research Jo Hai Wah Bhi Kafi Aavashyak Hai Vigyan Ki Unnati Par Dharm Jo Hai Wah Hamari Aatmik Unnati Ke Liye Zaroori Hai Jab Hum Apne Sheher Dekhte Hain Sansar Ko To Hume Big Brother Dikhai Dega Par Jab Hum Swayam Ke Ghar Andar Dekhte Hain To Wahan Par Dharm Ka Raj Hai Wahan Par Unnati Karne Ke Liye Hume Dharm Ki Avashyakta Padhti Hai To Dono Hi Zaroori Hain Aur Dono Alag Alag Kaarno Se Zaroori Hai
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मुझे कोई आपत्ति नहीं है ऐसा भी नहीं है कि मैं धर्म में मानती नहीं हूं पर देख ऐसे कई सारे जवाब ऐसे कई सारे सवाल है मेरे चैन का धर्म आंसर नहीं दे पाता और सबसे बड़ी बात है कि कई सारे सवाल ऐसे जो धर्म की ...
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मुझे कोई आपत्ति नहीं है ऐसा भी नहीं है कि मैं धर्म में मानती नहीं हूं पर देख ऐसे कई सारे जवाब ऐसे कई सारे सवाल है मेरे चैन का धर्म आंसर नहीं दे पाता और सबसे बड़ी बात है कि कई सारे सवाल ऐसे जो धर्म की वजह से मेरे मन में उठते हैं और मैं उस चीज में बिलीव करती हूं उस चीज नहीं मैं विश्वास रखती हूं तुझसे मुझे जवाब मिलते हो और विज्ञान जो है वह मेरे सवालों का जवाब देता है इसलिए मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं पूरी तरह से विज्ञान से सहमत हूं कई सारी चीजों में मैं धर्म से ज्यादा सहमत होती हूं पर मैं तो रेडी हूं पर टाइम क्योंकि विज्ञान मेरे सवालों का जवाब दे देता है मैं उस से सहमत रहती हूंMujhe Koi Apatti Nahi Hai Aisa Bhi Nahi Hai Ki Main Dharm Mein Maanati Nahi Hoon Par Dekh Aise Kai Sare Jawab Aise Kai Sare Sawal Hai Mere Chain Ka Dharm Answer Nahi De Pata Aur Sabse Badi Baat Hai Ki Kai Sare Sawal Aise Jo Dharm Ki Wajah Se Mere Man Mein Uthte Hain Aur Main Us Cheez Mein Believe Karti Hoon Us Cheez Nahi Main Vishwas Rakhti Hoon Tujhse Mujhe Jawab Milte Ho Aur Vigyan Jo Hai Wah Mere Sawalon Ka Jawab Deta Hai Isliye Main Yeh Nahi Kahunga Ki Main Puri Tarah Se Vigyan Se Sahmat Hoon Kai Saree Chijon Mein Main Dharm Se Jyada Sahmat Hoti Hoon Par Main To Ready Hoon Par Time Kyonki Vigyan Mere Sawalon Ka Jawab De Deta Hai Main Us Se Sahmat Rehti Hoon
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बी के धार्मिक पहले आया था विज्ञान बाद में आया था तो मैं दोनों को ही मान सिंह के गीत धार्मिक अलग एक जगह लेता है जहां पर अंधविश्वास और इंसान की ब्लू जो है वह है जो है वह सभी डिपेंड करता है और जहां पर सा...
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बी के धार्मिक पहले आया था विज्ञान बाद में आया था तो मैं दोनों को ही मान सिंह के गीत धार्मिक अलग एक जगह लेता है जहां पर अंधविश्वास और इंसान की ब्लू जो है वह है जो है वह सभी डिपेंड करता है और जहां पर साइंस साइंस की बात है यह विज्ञान की बात है जहां पर इंसान जो है खुद ही सब कुछ है मैं तो काम कर रहे हैं टेक्नोलॉजी के द्वारा हुए किसी भी चीज के द्वारा हो वह फॉर्म कर रहे हैं तो आप अंधविश्वास और विज्ञान और धार्मिक में मेरे हिसाब से मैं दोनों को ही मानती हूं दोनों की अलग अलग नजरिया भी है देखने काBe Ke Dharmik Pehle Aaya Tha Vigyan Baad Mein Aaya Tha To Main Dono Ko Hi Maan Singh Ke Geet Dharmik Alag Ek Jagah Leta Hai Jahan Par Andhavishvas Aur Insaan Ki Blue Jo Hai Wah Hai Jo Hai Wah Sabhi Depend Karta Hai Aur Jahan Par Science Science Ki Baat Hai Yeh Vigyan Ki Baat Hai Jahan Par Insaan Jo Hai Khud Hi Sab Kuch Hai Main To Kaam Kar Rahe Hain Technology Ke Dwara Hue Kisi Bhi Cheez Ke Dwara Ho Wah Form Kar Rahe Hain To Aap Andhavishvas Aur Vigyan Aur Dharmik Mein Mere Hisab Se Main Dono Ko Hi Maanati Hoon Dono Ki Alag Alag Najariya Bhi Hai Dekhne Ka
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