स्वार्थ की भावना किस हद तक कर्मो को प्रभावित करती है? ...

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विकी डिपेंड करता है कि आपका नेचर कैसा है आपका जो मेंटल मेकअप कैसा है और आपकी पर्सनालिटी कैसी है अगर आप एक सेल्फिश पर्सन है जो अपने बारे में ही सोचते हैं जो अपने से आगे की सोच नहीं सकते और अपना ही भला ...जवाब पढ़िये
विकी डिपेंड करता है कि आपका नेचर कैसा है आपका जो मेंटल मेकअप कैसा है और आपकी पर्सनालिटी कैसी है अगर आप एक सेल्फिश पर्सन है जो अपने बारे में ही सोचते हैं जो अपने से आगे की सोच नहीं सकते और अपना ही भला करना चाहते हैं तो डेफिनिटी आप एक हद तक स्वार्थी हो सकते हैं कि अपना बल्ला चाहना अपना पहला दशा देना सही है बिल्कुल सही है कि हम खुश रहेंगे तू भी दूसरे को खर्च कर सकते हैं लेकिन अगर सिर्फ आप 24 घंटे और पूरी जिंदगी अपनी खुशी के बारे में देखते रहेंगे और यह सोचते हैं कि हम भी अपने को खुश कर दूसरा भी हमको ही खुश करें तो वहां जाकर थोड़ा सा हमें एक भव्य दिखता है जिसको हम बोलते हैं ना तो शुद्ध इंग्लिश में तो यह एक ऐसी कंडीशन है जहां पर लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं दूसरों के बारे में नहीं सोचते तो अगर जो लोग सेल्फिश होते हैं वह सारे काम सेल्फ मोटर सही करते हैं जहां पर उनका फायदा ना हो ऐसा काम करते नहीं हैं और जहां पर उनका फायदा ना हो ऐसे दोस्ती भी नहीं करते शादी में वैसे ही करते हैं बच्चे के पैदा होते उनको भी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं मां बाप को भी उनके सारे रिश्ते होते हैं ऑफिस में भी हर जगह वह उनके फायदे के लिए इस्तेमाल होते ऐसे लोग किसी से प्यार नहीं कर सकते किसी को केयर नहीं कर सकते किसी के लिए अच्छा नहीं सोच सकते क्योंकि यह थोड़े काफी हद तक का अपने अपनी दुनिया में रहते हैं जिनको दुख या फिर एहसास नहीं होता कि वह क्या कर रहे हैं क्योंकि वह काफी अंदर से बंद लोग होते हैं जो इनके सारे एक्शन थिंकिंग सीलिंग सारी स्वार्थ भावना सही होती है और उनके जो सारे कर्म है तो सभी से परबेस होते हैं जो काफी हद तक नेगेटिव होते हैं अगर वह दूसरों को नेगेटिव सेट करो जहां पर दूसरों का नुकसान करके खुद की खुशी में शामिल होते हैं तो बात होती है और ऐसा होता है कि जो स्वार्थी लोग होते हैं दूसरों के कॉस्ट पर अपने आप को खुश करते दूसरों को दुखी पहुंचा कर दो पहुंचा कि वह खुश होते हैं तो यह बहुत गलत बात हैVikee Depend Karta Hai Ki Aapka Nature Kaisa Hai Aapka Jo Mental Makeup Kaisa Hai Aur Aapki Personality Kaisi Hai Agar Aap Ek Selfish Person Hai Jo Apne Bare Mein Hi Sochte Hain Jo Apne Se Aage Ki Soch Nahi Sakte Aur Apna Hi Bhala Karna Chahte Hain To Definiti Aap Ek Had Tak Swaarthi Ho Sakte Hain Ki Apna Balla Chaahana Apna Pehla Dasha Dena Sahi Hai Bilkul Sahi Hai Ki Hum Khush Rahenge Tu Bhi Dusre Ko Kharch Kar Sakte Hain Lekin Agar Sirf Aap 24 Ghante Aur Puri Zindagi Apni Khushi Ke Bare Mein Dekhte Rahenge Aur Yeh Sochte Hain Ki Hum Bhi Apne Ko Khush Kar Doosra Bhi Hamko Hi Khush Karen To Wahan Jaakar Thoda Sa Hume Ek Bhavya Dikhta Hai Jisko Hum Bolte Hain Na To Shudh English Mein To Yeh Ek Aisi Condition Hai Jahan Par Log Sirf Apne Bare Mein Sochte Hain Dusron Ke Bare Mein Nahi Sochte To Agar Jo Log Selfish Hote Hain Wah Sare Kaam Self Motor Sahi Karte Hain Jahan Par Unka Fayda Na Ho Aisa Kaam Karte Nahi Hain Aur Jahan Par Unka Fayda Na Ho Aise Dosti Bhi Nahi Karte Shadi Mein Waise Hi Karte Hain Bacche Ke Paida Hote Unko Bhi Apne Fayde Ke Liye Istemal Karte Hain Maa Baap Ko Bhi Unke Sare Rishte Hote Hain Office Mein Bhi Har Jagah Wah Unke Fayde Ke Liye Istemal Hote Aise Log Kisi Se Pyar Nahi Kar Sakte Kisi Ko Care Nahi Kar Sakte Kisi Ke Liye Accha Nahi Soch Sakte Kyonki Yeh Thode Kafi Had Tak Ka Apne Apni Duniya Mein Rehte Hain Jinako Dukh Ya Phir Ehsaas Nahi Hota Ki Wah Kya Kar Rahe Hain Kyonki Wah Kafi Andar Se Band Log Hote Hain Jo Inke Sare Action Thinking Ceiling Saree Swartha Bhavna Sahi Hoti Hai Aur Unke Jo Sare Karm Hai To Sabhi Se Parbes Hote Hain Jo Kafi Had Tak Negative Hote Hain Agar Wah Dusron Ko Negative Set Karo Jahan Par Dusron Ka Nuksan Karke Khud Ki Khushi Mein Shaamil Hote Hain To Baat Hoti Hai Aur Aisa Hota Hai Ki Jo Swaarthi Log Hote Hain Dusron Ke Cost Par Apne Aap Ko Khush Karte Dusron Ko Dukhi Pahuncha Kar Do Pahuncha Ki Wah Khush Hote Hain To Yeh Bahut Galat Baat Hai
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निजी स्वार्थ की भावना हर हद तक काम को प्रभावित करती है गंदगी में साथियों ने इंपॉर्टेंट होता क्योंकि सबसे पहला को खुद के बारे में सोचना चाहिए लेकिन इतना नहीं होना चाहिए कि आप खुद की चक्कर में दूसरे को ...जवाब पढ़िये
निजी स्वार्थ की भावना हर हद तक काम को प्रभावित करती है गंदगी में साथियों ने इंपॉर्टेंट होता क्योंकि सबसे पहला को खुद के बारे में सोचना चाहिए लेकिन इतना नहीं होना चाहिए कि आप खुद की चक्कर में दूसरे को नजरअंदाज कर दो दूसरों को आप हानि पहुंचा दें जब तक खुद की खुशी की बात हो शादी होना इंपॉर्टेंट है पर जब आप अपनी वजह से किसी दूसरे को पिक करना शुरू कर दे तो आप किस बात की लिमिट खत्म हो जाती है अगर हम किसी ऐसी जॉब में गवर्नमेंट जॉब में जहां पर हम कोई एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ कर रहे हैं और हम रिश्वत ले रहे अपने स्वार्थ की वजह से और दूसरों की जिंदगी किसी का टेंडर अटका रहे हैं कि गलत कोटन दे दे रहे हैं किसी किसान का हम जमीन पास में ले रही सगरम कर रहे हैं तो हमारे जो हमारा जो व्यक्तित्व जाती है और अगर विश्वास है तो वह उसकी हर काम में रिफ्लेक्ट होती है चाहे वह अच्छा करना चाहिए अब बुरा करना चाहिए फिर वह उसका हर तरीके से झलकता हैNiji Swartha Ki Bhavna Har Had Tak Kaam Ko Prabhavit Karti Hai Gandagi Mein Sathiyo Ne Important Hota Kyonki Sabse Pehla Ko Khud Ke Bare Mein Sochna Chahiye Lekin Itna Nahi Hona Chahiye Ki Aap Khud Ki Chakkar Mein Dusre Ko Najarandaj Kar Do Dusron Ko Aap Hani Pahuncha Dein Jab Tak Khud Ki Khushi Ki Baat Ho Shadi Hona Important Hai Par Jab Aap Apni Wajah Se Kisi Dusre Ko Pic Karna Shuru Kar De To Aap Kis Baat Ki Limit Khatam Ho Jati Hai Agar Hum Kisi Aisi Job Mein Government Job Mein Jahan Par Hum Koi Edaministretiv Of Kar Rahe Hain Aur Hum Rishwat Le Rahe Apne Swartha Ki Wajah Se Aur Dusron Ki Zindagi Kisi Ka Tender Ataka Rahe Hain Ki Galat Cotton De De Rahe Hain Kisi Kisan Ka Hum Jameen Paas Mein Le Rahi Sagram Kar Rahe Hain To Hamare Jo Hamara Jo Vyaktitva Jati Hai Aur Agar Vishwas Hai To Wah Uski Har Kaam Mein Refault Hoti Hai Chahe Wah Accha Karna Chahiye Ab Bura Karna Chahiye Phir Wah Uska Har Tarike Se Jhalakta Hai
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आजकल बहुत सारे रिश्ते स्वार्थ आधारित हैं आपका कोई काम सामने वाली बत्ती से निकल रहा हो तो आप उसकी जी हुजूरी करेंगे आप उसकी हर बात का समर्थन करेंगे हर अनुचित बात का भी आप समर्थन करेंगे तो आपका काम उसे व...जवाब पढ़िये
आजकल बहुत सारे रिश्ते स्वार्थ आधारित हैं आपका कोई काम सामने वाली बत्ती से निकल रहा हो तो आप उसकी जी हुजूरी करेंगे आप उसकी हर बात का समर्थन करेंगे हर अनुचित बात का भी आप समर्थन करेंगे तो आपका काम उसे वही आप वही एक ऐसा व्यक्ति को आप का काम करा सकता है कोई भी रिश्ता बनाते हैं बनाते बरसात आधारित होता है जिसकी वजह से वह रिलेशन ज्यादा दिन तक चल नहीं पाता है जब रिलेशन ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाता तो रिलेशन रिलेशन में स्वार्थ नहीं होता है वह रिलेशन बहुत लंबे समय तक चलता हूं लॉन्ग लास्टिंग होते हैंAajkal Bahut Sare Rishte Swartha Aadharit Hain Aapka Koi Kaam Samane Wali Batti Se Nikal Raha Ho To Aap Uski G Hujuri Karenge Aap Uski Har Baat Ka Samarthan Karenge Har Anuchit Baat Ka Bhi Aap Samarthan Karenge To Aapka Kaam Use Wahi Aap Wahi Ek Aisa Vyakti Ko Aap Ka Kaam Kra Sakta Hai Koi Bhi Rishta Banate Hain Banate Barsat Aadharit Hota Hai Jiski Wajah Se Wah Relation Zyada Din Tak Chal Nahi Pata Hai Jab Relation Zyada Dinon Tak Nahi Chal Pata To Relation Relation Mein Swartha Nahi Hota Hai Wah Relation Bahut Lambe Samay Tak Chalta Hoon Long Lasting Hote Hain
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विकी बिल्कुल स्वार्थ की भावना जो है वह हमारे कर्मों को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है लेकिन जब भी हम कोई कार्य करते हैं कुछ भी हो अगर उसने अपने स्वार्थ बीच में ले आते हैं तो हमारे कार्य करने का तरीका बि...जवाब पढ़िये
विकी बिल्कुल स्वार्थ की भावना जो है वह हमारे कर्मों को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है लेकिन जब भी हम कोई कार्य करते हैं कुछ भी हो अगर उसने अपने स्वार्थ बीच में ले आते हैं तो हमारे कार्य करने का तरीका बिल्कुल ही बदल जाता है आप चाहे अपने रिलेशन को देख ले चाहे आप किसी अन्य किस को देखे अगर मैं रिश्तो की बात करूं तो काफी लोग लोगों से मतलब अलग तरीके से बात करते हैं मतलब करना है कहना कुछ और चाहते हैं लेकिन कहते कुछ और है क्योंकि कभी-कभी उनको लगता है कि नहीं मेरा इसमें फायदा नहीं होगा मुझे इस तरीके से कार्य नहीं करना चाहिए तो वह अपने स्वार्थ के लिए अपने कार्य करने का तरीका ही बदल देते हैं तो बिल्कुल कर्मों को काफी प्रभावित करता है यह सही बात है और कहीं ना कहीं जब भी हम अपने स्वार्थ को पूरा रोटी देते हैं तो हमें आगे जाकर नुक्सान ही पहुंचता है तो हर जगह में हमें स्वार्थ की भावना नहीं लानी चाहिए थी कि कभी कभी सरकम्साइज्ड में ऐसा जरूरी भी है लेकिन ऐसा नहीं है कि आप हर चीज में अपना लालच दिखाएं अपना स्वार्थ दिखाएं अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको कहीं ना कहीं उस चीज के लिए पछतावा जरूर होगाVikee Bilkul Swartha Ki Bhavna Jo Hai Wah Hamare Karmon Ko Bahut Zyada Prabhavit Karti Hai Lekin Jab Bhi Hum Koi Karya Karte Hain Kuch Bhi Ho Agar Usne Apne Swartha Bich Mein Le Aate Hain To Hamare Karya Karne Ka Tarika Bilkul Hi Badal Jata Hai Aap Chahe Apne Relation Ko Dekh Le Chahe Aap Kisi Anya Kis Ko Dekhe Agar Main Rishto Ki Baat Karun To Kafi Log Logon Se Matlab Alag Tarike Se Baat Karte Hain Matlab Karna Hai Kehna Kuch Aur Chahte Hain Lekin Kehte Kuch Aur Hai Kyonki Kabhi Kabhi Unko Lagta Hai Ki Nahi Mera Isme Fayda Nahi Hoga Mujhe Is Tarike Se Karya Nahi Karna Chahiye To Wah Apne Swartha Ke Liye Apne Karya Karne Ka Tarika Hi Badal Dete Hain To Bilkul Karmon Ko Kafi Prabhavit Karta Hai Yeh Sahi Baat Hai Aur Kahin Na Kahin Jab Bhi Hum Apne Swartha Ko Pura Roti Dete Hain To Hume Aage Jaakar Nuksan Hi Pahunchta Hai To Har Jagah Mein Hume Swartha Ki Bhavna Nahi Lani Chahiye Thi Ki Kabhi Kabhi Sarakamsaijd Mein Aisa Zaroori Bhi Hai Lekin Aisa Nahi Hai Ki Aap Har Cheez Mein Apna Lalach Dikhaen Apna Swartha Dikhaen Agar Aap Aisa Karenge To Aapko Kahin Na Kahin Us Cheez Ke Liye Pachtava Jarur Hoga
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मुझे लगता है कि अगर आपके अंदर स्वार्थ की भावना है तो आपके कर्मों को करने का तरीका पूरा का पूरा ही बदल जाता है अगर अपनी स्वार्थ होकर कुछ काम करते हैं तो आपको उसका हमसे उम्मीदें अलग होती रिजल्ट की अपेक्...जवाब पढ़िये
मुझे लगता है कि अगर आपके अंदर स्वार्थ की भावना है तो आपके कर्मों को करने का तरीका पूरा का पूरा ही बदल जाता है अगर अपनी स्वार्थ होकर कुछ काम करते हैं तो आपको उसका हमसे उम्मीदें अलग होती रिजल्ट की अपेक्षाएं अलग होती है पर अगर आप किसी काम को स्वार्थ के साथ कर रहे हैं तो क्या अपेक्षा बिल्कुल अलग होंगे और जब अपेक्षाएं अलग होती है तो जाहिर सी बात है काम को करने का तरीका भी अलग है अगर मान लीजिए कि आप के लिए लोगों को मारने से कुछ लोगों को अपने खाना खिलाने के लिए बुलाया है अगर आप स्वार्थ को ध्यान में रखते हुए बनाएंगे तो सकता है कि उनमें आप कुछ का मतलब चीजों प्रोडक्ट को अच्छे इस्तेमाल ना करें सस्ती चीजों का इस्तेमाल करें अगर किसी को खाना खिलाता है तो का इस्तेमाल कर्ता और कर्म करने का तरीका पूरा ही पूरा बदल जाता है जब आप स्वार्थी होकर किसी काम को करते हैं तो इसीलिए अगर आप साथियों करके दिखाओ को कर रहे हैं उससे मेरी बात उसका नतीजा अच्छा नहीं आज ऑफिस में काम करते हैं उनको अंदर ही अंदर बहुत खुशी मिलती है मेरा तो मानना है कि आप जो भी करें निस्वार्थ होकर करें क्योंकि इसमें सब खुश हैMujhe Lagta Hai Ki Agar Aapke Andar Swartha Ki Bhavna Hai To Aapke Karmon Ko Karne Ka Tarika Pura Ka Pura Hi Badal Jata Hai Agar Apni Swartha Hokar Kuch Kaam Karte Hain To Aapko Uska Humse Ummeden Alag Hoti Result Ki Apekshaen Alag Hoti Hai Par Agar Aap Kisi Kaam Ko Swartha Ke Saath Kar Rahe Hain To Kya Apeksha Bilkul Alag Honge Aur Jab Apekshaen Alag Hoti Hai To Jaahir Si Baat Hai Kaam Ko Karne Ka Tarika Bhi Alag Hai Agar Maan Lijiye Ki Aap Ke Liye Logon Ko Maarne Se Kuch Logon Ko Apne Khana Khilane Ke Liye Bulaya Hai Agar Aap Swartha Ko Dhyan Mein Rakhate Huye Banayenge To Sakta Hai Ki Unmen Aap Kuch Ka Matlab Chijon Product Ko Acche Istemal Na Karen Sasti Chijon Ka Istemal Karen Agar Kisi Ko Khana Khilata Hai To Ka Istemal Karta Aur Karm Karne Ka Tarika Pura Hi Pura Badal Jata Hai Jab Aap Swaarthi Hokar Kisi Kaam Ko Karte Hain To Isliye Agar Aap Sathiyo Karke Dikhaao Ko Kar Rahe Hain Usse Meri Baat Uska Natija Accha Nahi Aaj Office Mein Kaam Karte Hain Unko Andar Hi Andar Bahut Khushi Milti Hai Mera To Manana Hai Ki Aap Jo Bhi Karen Niswaarth Hokar Karen Kyonki Isme Sab Khush Hai
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स्वार्थ मानव को मानवता से अलग कर देता है एवं स्वयं के बारे में सोचते हुए समाज को परिवार को प्रत्येक व्यक्ति को भूल जाता है स्वार्थी व्यक्ति कभी भले बुरे में फर्क नहीं कर पाता है...जवाब पढ़िये
स्वार्थ मानव को मानवता से अलग कर देता है एवं स्वयं के बारे में सोचते हुए समाज को परिवार को प्रत्येक व्यक्ति को भूल जाता है स्वार्थी व्यक्ति कभी भले बुरे में फर्क नहीं कर पाता हैSwartha Manav Ko Manavta Se Alag Kar Deta Hai Evam Swayam Ke Bare Mein Sochte Huye Samaaj Ko Parivar Ko Pratyek Vyakti Ko Bhul Jata Hai Swaarthi Vyakti Kabhi Bhale Bure Mein Fark Nahi Kar Pata Hai
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निजी स्वार्थ की भावना अपने मन मस्तिष्क को प्रभावित करती है उस समय तक तो यह सुपर दीदी की है मगर धीरे-धीरे यह अपनी नजरों से ही गिराने लगती है हर भाव मानव स्वार्थी इंसान को भावना दृष्टि से देखने लगत...जवाब पढ़िये
निजी स्वार्थ की भावना अपने मन मस्तिष्क को प्रभावित करती है उस समय तक तो यह सुपर दीदी की है मगर धीरे-धीरे यह अपनी नजरों से ही गिराने लगती है हर भाव मानव स्वार्थी इंसान को भावना दृष्टि से देखने लगता है और सब उससे किनारा करने लगते हैं नहीं है भक्ति करने देती नहीं है माता पिता की सेवा करने देती लायक कोई परोपकार का कार्य करने देती परोपकार ही परम धर्म है परमार की परम धर्म है यदि किसी के मस्तिष्क में स्वास्थ्य की भावना है तो उसे तत्काल इस भावना से मुक्त होना जाना चाहिए और सबकी भले के लिए कार्य करना चाहिएNiji Swartha Ki Bhavna Apne Man Mastishk Ko Prabhavit Karti Hai Us Samay Tak To Yeh Super Didi Ki Hai Magar Dhire Dhire Yeh Apni Najaron Se Hi Girane Lagti Hai Har Bhav Manav Swaarthi Insaan Ko Bhavna Drishti Se Dekhne Lagta Hai Aur Sab Usse Kinara Karne Lagte Hain Nahi Hai Bhakti Karne Deti Nahi Hai Mata Pita Ki Seva Karne Deti Layak Koi Paropkaar Ka Karya Karne Deti Paropkaar Hi Param Dharm Hai Parmar Ki Param Dharm Hai Yadi Kisi Ke Mastishk Mein Swasthya Ki Bhavna Hai To Use Tatkal Is Bhavna Se Mukt Hona Jana Chahiye Aur Sabaki Bhale Ke Liye Karya Karna Chahiye
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