सामाजिक भय का मूल कारण क्या है? ...

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सामाजिक भय का मूल कारण यह है कि हम हमेशा समाज पर डिपेंडेंट रहते हैं कैसे हम यह सोचते हैं कि हम अकेले नहीं रह सकते हमें हर समय कोई ना कोई चाहिए जो हमें बता सके कि हमें क्या करना है या अगर हम कभी भी दुखी हैं तो हम यह ढूंढते हैं कि कौन से लोग हमें सहारा दे सकते हैं जबकि हमें क्या करना चाहिए कि अगर हम दुखी हैं यहां में किसी भी तरीके का डर है हमें निडर होकर के खुद का सहारा बना है और खुद ही अपने आप को मोटिवेट करना है तो समाज का सबसे मेन कारण यही है टेलीविजन जोहल ने क्रिएट किया है इल्यूजन मतलब अपनी इमैजिनेशन में हमने यह सोच लिया है कि अगर हम यह करेंगे तो लोग हमारा बहिष्कार कर देंगे हमारे साथ नहीं खड़े होंगे आप पहले ही इस प्लेस पर आप क्यों ढूंढ रहे हैं कि आप लोगों का मतलब आपको सहारा क्यों चाहिए आप डिपेंडेंट ही क्यों होना चाहते हैं सबसे पहले अगर आप यह एक्सेप्ट करेंगे कि आप अकेले आए हैं और अकेले ही आप निडर होकर के सभी चीजों का सामना करेंगे तो आपको फिर कोई डर नहीं रहेगा लेकिन पता है आर्यन ई क्या है कि आजकल लोग ज्यादातर इसी ऐडमिशन में जीते हैं मैं कहूंगी कि 90 से 95% लोग ऐसे हैं जो इसे सामाजिक भय को मान करके अपनी जिंदगी के सारे इंपॉर्टेंट स्टेशन असली डालते हैं और बाद में उन्हें पछतावा होता है और एक अलग चीज है लेकिन अगर आप अपना डिसिशन सही तरीके से निभा निभा विचार हैं जो आप करना चाहते हैं अपने दिल से अगर ब्रिटिश करेंगे जो आपको चाहिए तो मुझे नहीं लगता कि आपको किसी से डरने की जरूरत है और आपको कभी पछतावा भी होगा अगर होगा भी तो आपको एक चीज यह जरूर याद रहेगी कि यह आपका डिसीजन था जो कि मुझे लगता है ज्यादा फायदेमंद है ऐसे जीने में
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सामाजिक भय का मूल कारण यह है कि हम हमेशा समाज पर डिपेंडेंट रहते हैं कैसे हम यह सोचते हैं कि हम अकेले नहीं रह सकते हमें हर समय कोई ना कोई चाहिए जो हमें बता सके कि हमें क्या करना है या अगर हम कभी भी दुखी हैं तो हम यह ढूंढते हैं कि कौन से लोग हमें सहारा दे सकते हैं जबकि हमें क्या करना चाहिए कि अगर हम दुखी हैं यहां में किसी भी तरीके का डर है हमें निडर होकर के खुद का सहारा बना है और खुद ही अपने आप को मोटिवेट करना है तो समाज का सबसे मेन कारण यही है टेलीविजन जोहल ने क्रिएट किया है इल्यूजन मतलब अपनी इमैजिनेशन में हमने यह सोच लिया है कि अगर हम यह करेंगे तो लोग हमारा बहिष्कार कर देंगे हमारे साथ नहीं खड़े होंगे आप पहले ही इस प्लेस पर आप क्यों ढूंढ रहे हैं कि आप लोगों का मतलब आपको सहारा क्यों चाहिए आप डिपेंडेंट ही क्यों होना चाहते हैं सबसे पहले अगर आप यह एक्सेप्ट करेंगे कि आप अकेले आए हैं और अकेले ही आप निडर होकर के सभी चीजों का सामना करेंगे तो आपको फिर कोई डर नहीं रहेगा लेकिन पता है आर्यन ई क्या है कि आजकल लोग ज्यादातर इसी ऐडमिशन में जीते हैं मैं कहूंगी कि 90 से 95% लोग ऐसे हैं जो इसे सामाजिक भय को मान करके अपनी जिंदगी के सारे इंपॉर्टेंट स्टेशन असली डालते हैं और बाद में उन्हें पछतावा होता है और एक अलग चीज है लेकिन अगर आप अपना डिसिशन सही तरीके से निभा निभा विचार हैं जो आप करना चाहते हैं अपने दिल से अगर ब्रिटिश करेंगे जो आपको चाहिए तो मुझे नहीं लगता कि आपको किसी से डरने की जरूरत है और आपको कभी पछतावा भी होगा अगर होगा भी तो आपको एक चीज यह जरूर याद रहेगी कि यह आपका डिसीजन था जो कि मुझे लगता है ज्यादा फायदेमंद है ऐसे जीने मेंSamajik Bhay Ka Mul Kaaran Yeh Hai Ki Hum Hamesha Samaaj Par Dependent Rehte Hain Kaise Hum Yeh Sochte Hain Ki Hum Akele Nahi Rah Sakte Hume Har Samay Koi Na Koi Chahiye Jo Hume Bata Sake Ki Hume Kya Karna Hai Ya Agar Hum Kabhi Bhi Dukhi Hain To Hum Yeh Dhoondhate Hain Ki Kaon Se Log Hume Sahara De Sakte Hain Jabki Hume Kya Karna Chahiye Ki Agar Hum Dukhi Hain Yahan Mein Kisi Bhi Tarike Ka Dar Hai Hume Nidar Hokar Ke Khud Ka Sahara Bana Hai Aur Khud Hi Apne Aap Ko Motivate Karna Hai To Samaaj Ka Sabse Main Kaaran Yahi Hai Television Johal Ne Create Kiya Hai Ilyujan Matlab Apni Imagination Mein Humne Yeh Soch Liya Hai Ki Agar Hum Yeh Karenge To Log Hamara Bahishkar Kar Denge Hamare Saath Nahi Khade Honge Aap Pehle Hi Is Place Par Aap Kyon Dhundh Rahe Hain Ki Aap Logon Ka Matlab Aapko Sahara Kyon Chahiye Aap Dependent Hi Kyon Hona Chahte Hain Sabse Pehle Agar Aap Yeh Except Karenge Ki Aap Akele Aaye Hain Aur Akele Hi Aap Nidar Hokar Ke Sabhi Chijon Ka Samana Karenge To Aapko Phir Koi Dar Nahi Rahega Lekin Pata Hai Aaryan Ee Kya Hai Ki Aajkal Log Jyadatar Isi Aidamishan Mein Jeete Hain Main Kahungi Ki 90 Se 95% Log Aise Hain Jo Ise Samajik Bhay Ko Maan Karke Apni Zindagi Ke Sare Important Station Asli Daalte Hain Aur Baad Mein Unhen Pachtava Hota Hai Aur Ek Alag Cheez Hai Lekin Agar Aap Apna Decision Sahi Tarike Se Nibha Nibha Vichar Hain Jo Aap Karna Chahte Hain Apne Dil Se Agar British Karenge Jo Aapko Chahiye To Mujhe Nahi Lagta Ki Aapko Kisi Se Darane Ki Zaroorat Hai Aur Aapko Kabhi Pachtava Bhi Hoga Agar Hoga Bhi To Aapko Ek Cheez Yeh Jarur Yaad Rahegi Ki Yeh Aapka Decision Tha Jo Ki Mujhe Lagta Hai Zyada Faydemand Hai Aise Jeene Mein
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आप एक बात बताइए मुझे अगर आपने कुछ अचीव किया है कुछ हासिल किया है अच्छे नंबर आए हैं वे प्रमोशन आया है या फिर आपने ऐसा कुछ कर दिखाया है जो बहुत ही प्रशंसनीय हो तो क्या आप यह एक्सपेक्ट करते हैं कि समाज में आपको नाम मिले आप कोई दर्जा मिले रेस्पेक्ट में ले लूंगा आपको जाने क्या आपको एक्सपेक्टेशन है अगर है तो तब जब आपका समय अच्छा नहीं चल रहा होगा या आपको कुछ ऐसा चूस करना होगा जो शायद समाज में आपको वो ना मदरसा ना दे तो मैं तो आएगा ही क्योंकि अगर अच्छे में आपको समाज की जरूरत है तो बुरे में समाज का डर तो आपको होगा ही अगर कल को आप कुछ हासिल कर लेते हैं कुछ बन जाते हैं और आपको फर्क नहीं पड़ता कि लोग आपको वह दर्जा दे या नहीं तब ऐसे लोग समाज की उतनी चिंता नहीं करते क्योंकि समाज से उनकी जिंदगी नहीं चलती उनको जो मिलता है वह अपने बलबूते पर हासिल करते हैं और उससे खुश रहते हैं 10 लोग की जय जयकार के लिए उन लोग रुकते नहीं उसके लिए हम लोग कोई काम करते नहीं तो आपके सवाल का जवाब मिल मिल चुका है कि अगर आपको अच्छे वक्त में समाज की जरूरत होती है तो बुरे वक्त में समाज का डर भी रहता है और आपको समाज की जरूरत नहीं है अच्छे वक्त में तो बुरे वक्त पर समाज का डर भी आपको नहीं रहेगा क्योंकि समाज से आप की जिंदगी नहीं चलती समाज पर आपके विचार आपकी चॉइस है वह रिप्लाई नहीं करते और आपको अपने चॉइस चुनने का और जिंदगी जीने का पूरा हक होता है बिना समाज के डर के तो समाज के डर से बचना है तो अच्छे में भी आप समाज पर डिपेंड ना कीजिए और खुद से खुश रहना सीखिए और खुद की प्रशंसा जो है वह मन ही मन कीजिए तो अच्छा है
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आप एक बात बताइए मुझे अगर आपने कुछ अचीव किया है कुछ हासिल किया है अच्छे नंबर आए हैं वे प्रमोशन आया है या फिर आपने ऐसा कुछ कर दिखाया है जो बहुत ही प्रशंसनीय हो तो क्या आप यह एक्सपेक्ट करते हैं कि समाज में आपको नाम मिले आप कोई दर्जा मिले रेस्पेक्ट में ले लूंगा आपको जाने क्या आपको एक्सपेक्टेशन है अगर है तो तब जब आपका समय अच्छा नहीं चल रहा होगा या आपको कुछ ऐसा चूस करना होगा जो शायद समाज में आपको वो ना मदरसा ना दे तो मैं तो आएगा ही क्योंकि अगर अच्छे में आपको समाज की जरूरत है तो बुरे में समाज का डर तो आपको होगा ही अगर कल को आप कुछ हासिल कर लेते हैं कुछ बन जाते हैं और आपको फर्क नहीं पड़ता कि लोग आपको वह दर्जा दे या नहीं तब ऐसे लोग समाज की उतनी चिंता नहीं करते क्योंकि समाज से उनकी जिंदगी नहीं चलती उनको जो मिलता है वह अपने बलबूते पर हासिल करते हैं और उससे खुश रहते हैं 10 लोग की जय जयकार के लिए उन लोग रुकते नहीं उसके लिए हम लोग कोई काम करते नहीं तो आपके सवाल का जवाब मिल मिल चुका है कि अगर आपको अच्छे वक्त में समाज की जरूरत होती है तो बुरे वक्त में समाज का डर भी रहता है और आपको समाज की जरूरत नहीं है अच्छे वक्त में तो बुरे वक्त पर समाज का डर भी आपको नहीं रहेगा क्योंकि समाज से आप की जिंदगी नहीं चलती समाज पर आपके विचार आपकी चॉइस है वह रिप्लाई नहीं करते और आपको अपने चॉइस चुनने का और जिंदगी जीने का पूरा हक होता है बिना समाज के डर के तो समाज के डर से बचना है तो अच्छे में भी आप समाज पर डिपेंड ना कीजिए और खुद से खुश रहना सीखिए और खुद की प्रशंसा जो है वह मन ही मन कीजिए तो अच्छा हैAap Ek Baat Bataiye Mujhe Agar Aapne Kuch Achieve Kiya Hai Kuch Hasil Kiya Hai Acche Number Aaye Hain Ve Promotion Aaya Hai Ya Phir Aapne Aisa Kuch Kar Dikhaya Hai Jo Bahut Hi Prashanshaniya Ho To Kya Aap Yeh Expect Karte Hain Ki Samaaj Mein Aapko Naam Mile Aap Koi Darja Mile Respect Mein Le Lunga Aapko Jaane Kya Aapko Expectation Hai Agar Hai To Tab Jab Aapka Samay Accha Nahi Chal Raha Hoga Ya Aapko Kuch Aisa Chus Karna Hoga Jo Shayad Samaaj Mein Aapko Vo Na Madarsa Na De To Main To Aaega Hi Kyonki Agar Acche Mein Aapko Samaaj Ki Zaroorat Hai To Bure Mein Samaaj Ka Dar To Aapko Hoga Hi Agar Kal Ko Aap Kuch Hasil Kar Lete Hain Kuch Ban Jaate Hain Aur Aapko Fark Nahi Padata Ki Log Aapko Wah Darja De Ya Nahi Tab Aise Log Samaaj Ki Utani Chinta Nahi Karte Kyonki Samaaj Se Unki Zindagi Nahi Chalti Unko Jo Milta Hai Wah Apne Balbute Par Hasil Karte Hain Aur Usse Khush Rehte Hain 10 Log Ki Jai Juicer Ke Liye Un Log Rukte Nahi Uske Liye Hum Log Koi Kaam Karte Nahi To Aapke Sawal Ka Jawab Mil Mil Chuka Hai Ki Agar Aapko Acche Waqt Mein Samaaj Ki Zaroorat Hoti Hai To Bure Waqt Mein Samaaj Ka Dar Bhi Rehta Hai Aur Aapko Samaaj Ki Zaroorat Nahi Hai Acche Waqt Mein To Bure Waqt Par Samaaj Ka Dar Bhi Aapko Nahi Rahega Kyonki Samaaj Se Aap Ki Zindagi Nahi Chalti Samaaj Par Aapke Vichar Aapki Choice Hai Wah Reply Nahi Karte Aur Aapko Apne Choice Chunane Ka Aur Zindagi Jeene Ka Pura Haq Hota Hai Bina Samaaj Ke Dar Ke To Samaaj Ke Dar Se Bachana Hai To Acche Mein Bhi Aap Samaaj Par Depend Na Kijiye Aur Khud Se Khush Rehna Sikhiye Aur Khud Ki Prashansa Jo Hai Wah Man Hi Man Kijiye To Accha Hai
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आम आदमी जब तक डरा हुआ है तब तक तो फिर भी उसके कदमों में थोड़ी सिधाई है जैसे ही तुमने उसके ऊपर से डर हटाया वह बिल्कुल ही निरंकुश मदमस्त हो जाता है समाज ने फिर घर का उपयोग जाना और को अपनी व्यवस्था में एक उपयुक्त स्थान दिया हमारी इसी आदत है कारण तो पर जरूरी हो जाता है कि हमें डरा के रखा जाए संतों को भी कहना पड़ा पारस है जिनको निर्भय होई न कोई वैसे थी कि सब करें ऐसे भक्ति हुए पार से जिनको निर्भय होई न कोई क्या हम सब आंतरिक अनुशासन गरिमा मर्यादा फुल बैठने का मतलब सिर्फ उनका हटना चाहिए जिनके भीतर पहले आंतरिक अनुशासन जग गया है अगर आंतरिक अनुशासन नहीं जाएगा और तुमने बाहर कभी तो हटा दिया तो नतीजा होगा 15 समाचार
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आम आदमी जब तक डरा हुआ है तब तक तो फिर भी उसके कदमों में थोड़ी सिधाई है जैसे ही तुमने उसके ऊपर से डर हटाया वह बिल्कुल ही निरंकुश मदमस्त हो जाता है समाज ने फिर घर का उपयोग जाना और को अपनी व्यवस्था में एक उपयुक्त स्थान दिया हमारी इसी आदत है कारण तो पर जरूरी हो जाता है कि हमें डरा के रखा जाए संतों को भी कहना पड़ा पारस है जिनको निर्भय होई न कोई वैसे थी कि सब करें ऐसे भक्ति हुए पार से जिनको निर्भय होई न कोई क्या हम सब आंतरिक अनुशासन गरिमा मर्यादा फुल बैठने का मतलब सिर्फ उनका हटना चाहिए जिनके भीतर पहले आंतरिक अनुशासन जग गया है अगर आंतरिक अनुशासन नहीं जाएगा और तुमने बाहर कभी तो हटा दिया तो नतीजा होगा 15 समाचारAam Aadmi Jab Tak Daraa Hua Hai Tab Tak To Phir Bhi Uske Kadamon Mein Thodi Sidhai Hai Jaise Hi Tumne Uske Upar Se Dar Hataya Wah Bilkul Hi Nirankush Madmast Ho Jata Hai Samaaj Ne Phir Ghar Ka Upyog Jana Aur Ko Apni Vyavastha Mein Ek Upayukt Sthan Diya Hamari Isi Aadat Hai Kaaran To Par Zaroori Ho Jata Hai Ki Hume Daraa Ke Rakha Jaye Santo Ko Bhi Kehna Pada Paras Hai Jinako Nirbhay Hoi N Koi Waise Thi Ki Sab Karen Aise Bhakti Huye Par Se Jinako Nirbhay Hoi N Koi Kya Hum Sab Aantarik Anushasan Garima Maryada Full Baithne Ka Matlab Sirf Unka Hatna Chahiye Jinke Bheetar Pehle Aantarik Anushasan Jag Gaya Hai Agar Aantarik Anushasan Nahi Jayega Aur Tumne Bahar Kabhi To Hata Diya To Natija Hoga 15 Samachar
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समाज क्या है मैंने पहले भी कहा समाज समझे समाज आप और हम हैं और कोई दूसरा नहीं है मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेले नहीं रह सकता इसलिए व समाज में रहता है और समाज हमेशा नीति और नियमों के साथ चलता है समस्या तब होती है जब नीति और नियम जल जाए और ना बदले इन्हीं व्यक्ति जो क्रांतिकारी होते हैं जो समाज की नई नीतियों का पुनर्भरण करते हैं उन्हें कहा पड़ता है पड़ता है जहां पिया वहां पर विरोध तो सामाजिक भय का ज्यादातर मोर जो है रीति रिवाजों के कारण है और दूसरा होता है कि आपने जो समाज के साथ किया है समाज आपके साथ वह करें फिर किसी के घर में बच्ची होने पर उसे घर में जाकर अपना तो बता देते हैं कोई नहीं अपना बच्चा हो जाएगा तो आपके घर में जब बच्ची होगी तो सामने वाला भी आएगा दो और व्यक्ति के साथ और तीनों का सोच बता देंगे कि कोई नहीं आप का भी अपना बच्चा हो जाएगा तो आपके साथ जब गलत चीजें होंगी तो समाज आपके साथ मिल जाएगा यह बिल्कुल परस्पर है अब अपने टाइम पर सामाजिक भय नहीं कर सकते हो दूसरे के टेंडर सामाजिक रीति रिवाज नहीं कर सकते अगर गलत होगा कर्म कर्म कर्म आने पर आपके बच्चे का कमाल
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समाज क्या है मैंने पहले भी कहा समाज समझे समाज आप और हम हैं और कोई दूसरा नहीं है मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेले नहीं रह सकता इसलिए व समाज में रहता है और समाज हमेशा नीति और नियमों के साथ चलता है समस्या तब होती है जब नीति और नियम जल जाए और ना बदले इन्हीं व्यक्ति जो क्रांतिकारी होते हैं जो समाज की नई नीतियों का पुनर्भरण करते हैं उन्हें कहा पड़ता है पड़ता है जहां पिया वहां पर विरोध तो सामाजिक भय का ज्यादातर मोर जो है रीति रिवाजों के कारण है और दूसरा होता है कि आपने जो समाज के साथ किया है समाज आपके साथ वह करें फिर किसी के घर में बच्ची होने पर उसे घर में जाकर अपना तो बता देते हैं कोई नहीं अपना बच्चा हो जाएगा तो आपके घर में जब बच्ची होगी तो सामने वाला भी आएगा दो और व्यक्ति के साथ और तीनों का सोच बता देंगे कि कोई नहीं आप का भी अपना बच्चा हो जाएगा तो आपके साथ जब गलत चीजें होंगी तो समाज आपके साथ मिल जाएगा यह बिल्कुल परस्पर है अब अपने टाइम पर सामाजिक भय नहीं कर सकते हो दूसरे के टेंडर सामाजिक रीति रिवाज नहीं कर सकते अगर गलत होगा कर्म कर्म कर्म आने पर आपके बच्चे का कमालSamaaj Kya Hai Maine Pehle Bhi Kaha Samaaj Samjhe Samaaj Aap Aur Hum Hain Aur Koi Doosra Nahi Hai Manushya Ek Samajik Prani Hai Wah Akele Nahi Rah Sakta Isliye V Samaaj Mein Rehta Hai Aur Samaaj Hamesha Niti Aur Niyamon Ke Saath Chalta Hai Samasya Tab Hoti Hai Jab Niti Aur Niyam Jal Jaye Aur Na Badle Inhin Vyakti Jo Krantikari Hote Hain Jo Samaaj Ki Nayi Nitiyon Ka Punarbharan Karte Hain Unhen Kaha Padata Hai Padata Hai Jahan Piya Wahan Par Virodh To Samajik Bhay Ka Jyadatar More Jo Hai Riti Rivajon Ke Kaaran Hai Aur Doosra Hota Hai Ki Aapne Jo Samaaj Ke Saath Kiya Hai Samaaj Aapke Saath Wah Karen Phir Kisi Ke Ghar Mein Bacchi Hone Par Use Ghar Mein Jaakar Apna To Bata Dete Hain Koi Nahi Apna Baccha Ho Jayega To Aapke Ghar Mein Jab Bacchi Hogi To Samane Vala Bhi Aaega Do Aur Vyakti Ke Saath Aur Teenon Ka Soch Bata Denge Ki Koi Nahi Aap Ka Bhi Apna Baccha Ho Jayega To Aapke Saath Jab Galat Cheezen Hongi To Samaaj Aapke Saath Mil Jayega Yeh Bilkul Paraspar Hai Ab Apne Time Par Samajik Bhay Nahi Kar Sakte Ho Dusre Ke Tender Samajik Riti Rivaaj Nahi Kar Sakte Agar Galat Hoga Karm Karm Karm Aane Par Aapke Bacche Ka Kamal
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए सामाजिक भय आज की बहुत ही विकट परिस्थिति है क्योंकि आजकल जो परिवार हैं एकल परिवार होते जा रहे हैं पहले सामुदायिक और संयुक्त परिवार रहते थे जिसमें कि किसी प्रकार की भी किसी को भी चिंता नहीं होती थी आज मन सपोर्ट करता में ही 1 कमांडो और अगर मैं अपने परिवार को अलग लेकर जाता हूं या फिर अपने परिवार से अलग हो जाता हूं तो जब मैं घर पर नहीं आऊंगा मेरी पत्नी घर पर अकेली होगी तो उसके मन में ना जाने किस किस प्रकार के भय रहेंगे भी घर में कोई घुस भी सकता है कि घर में कुछ भी हो सकता है इसके साथ वही अगर मेरा संयुक्त परिवार होता तो वह बिल्कुल बेफिक्र होती और उसे किसी प्रकार की चिंता नहीं होती तो मेरा विचार तो यही है कि सामाजिक मैं का सबसे मुख्य कारण यह है कि आजकल लोग स्वार्थी होते हैं और जो उनके अंदर दयालुता की भावना थी अपनेपन की भावना थी वह दिन प्रतिदिन नष्ट होती जा रही है इसका मुख्य कारण यह भी है कि आज का मानव टेक्नोलॉजी में और मोबाइल में गैजेट्स में इतना व्यस्त हो चला है कि उसे अपने आप से फुर्सत ही नहीं मिलती और वह सिर्फ और सिर्फ अपने और अपने परिवार तक ही सीमित हैं रिश्तेदार नाते वह भूल जा जा रहा है और यही सामाजिक भय को और अधिक और विकट और विषम परिस्थिति में लेती लेकर जा रही है मनुष्य भूल चुका है कि जो सोशलिज्म एक दूसरे के प्रति दयालु मित्रता की भावना है वह खत्म हो गई है
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देखिए सामाजिक भय आज की बहुत ही विकट परिस्थिति है क्योंकि आजकल जो परिवार हैं एकल परिवार होते जा रहे हैं पहले सामुदायिक और संयुक्त परिवार रहते थे जिसमें कि किसी प्रकार की भी किसी को भी चिंता नहीं होती थी आज मन सपोर्ट करता में ही 1 कमांडो और अगर मैं अपने परिवार को अलग लेकर जाता हूं या फिर अपने परिवार से अलग हो जाता हूं तो जब मैं घर पर नहीं आऊंगा मेरी पत्नी घर पर अकेली होगी तो उसके मन में ना जाने किस किस प्रकार के भय रहेंगे भी घर में कोई घुस भी सकता है कि घर में कुछ भी हो सकता है इसके साथ वही अगर मेरा संयुक्त परिवार होता तो वह बिल्कुल बेफिक्र होती और उसे किसी प्रकार की चिंता नहीं होती तो मेरा विचार तो यही है कि सामाजिक मैं का सबसे मुख्य कारण यह है कि आजकल लोग स्वार्थी होते हैं और जो उनके अंदर दयालुता की भावना थी अपनेपन की भावना थी वह दिन प्रतिदिन नष्ट होती जा रही है इसका मुख्य कारण यह भी है कि आज का मानव टेक्नोलॉजी में और मोबाइल में गैजेट्स में इतना व्यस्त हो चला है कि उसे अपने आप से फुर्सत ही नहीं मिलती और वह सिर्फ और सिर्फ अपने और अपने परिवार तक ही सीमित हैं रिश्तेदार नाते वह भूल जा जा रहा है और यही सामाजिक भय को और अधिक और विकट और विषम परिस्थिति में लेती लेकर जा रही है मनुष्य भूल चुका है कि जो सोशलिज्म एक दूसरे के प्रति दयालु मित्रता की भावना है वह खत्म हो गई हैDekhie Samajik Bhay Aaj Ki Bahut Hi Vikat Paristhiti Hai Kyonki Aajkal Jo Parivar Hain Ekal Parivar Hote Ja Rahe Hain Pehle Samudayik Aur Samyukt Parivar Rehte The Jisme Ki Kisi Prakar Ki Bhi Kisi Ko Bhi Chinta Nahi Hoti Thi Aaj Man Support Karta Mein Hi 1 Commando Aur Agar Main Apne Parivar Ko Alag Lekar Jata Hoon Ya Phir Apne Parivar Se Alag Ho Jata Hoon To Jab Main Ghar Par Nahi Aaunga Meri Patni Ghar Par Akeli Hogi To Uske Man Mein Na Jaane Kis Kis Prakar Ke Bhay Rahenge Bhi Ghar Mein Koi Ghus Bhi Sakta Hai Ki Ghar Mein Kuch Bhi Ho Sakta Hai Iske Saath Wahi Agar Mera Samyukt Parivar Hota To Wah Bilkul Befikra Hoti Aur Use Kisi Prakar Ki Chinta Nahi Hoti To Mera Vichar To Yahi Hai Ki Samajik Main Ka Sabse Mukhya Kaaran Yeh Hai Ki Aajkal Log Swaarthi Hote Hain Aur Jo Unke Andar Dayaaluta Ki Bhavna Thi Apanepan Ki Bhavna Thi Wah Din Pratidin Nasht Hoti Ja Rahi Hai Iska Mukhya Kaaran Yeh Bhi Hai Ki Aaj Ka Manav Technology Mein Aur Mobile Mein Gadgets Mein Itna Vyasta Ho Chala Hai Ki Use Apne Aap Se Phursat Hi Nahi Milti Aur Wah Sirf Aur Sirf Apne Aur Apne Parivar Tak Hi Simith Hain Rishtedar Naate Wah Bhul Ja Ja Raha Hai Aur Yahi Samajik Bhay Ko Aur Adhik Aur Vikat Aur Wisam Paristhiti Mein Leti Lekar Ja Rahi Hai Manushya Bhul Chuka Hai Ki Jo Socialism Ek Dusre Ke Prati Dayaalu Mitrata Ki Bhavna Hai Wah Khatam Ho Gayi Hai
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समाज में का मूल कारण क्या है इसके बहुत सताती हो सकती इसलिए क्योंकि वो काम जो हमारे लिए सही है दूसरों की नजर में वह गलत हो सकता है यह दूसरों की नजर में जो सही है वह हमारे लिए गलत हो सकता है समाज में बहुत से ऐसे काम में जॉब करना चाहती हैं लेकिन वह इस कारण भी करते हैं क्योंकि हमें भय रहता कि लोग क्या कहेंगे या फिर हमें यह डर रहता है कि पुलिस ने पकड़ ली कि ऐसे बहुत सी चीज है जीने में सामाजिक है का डर रहता है उसमें कोई भी अपराध शामिल हो सकता चाहे वह चोरी हो या कुछ भी या मर्डर हो इसीलिए समाजिक घर को किसी चीज से आम नापतोल के नहीं देख सकते हां यह जरूर कहा जा सकता है इसमें सुधार के लिए कुछ चीजें आ सकती है पर फिर भी सुधार कहां तक और कब तक इस बात के लिए सबको सोचना पड़ेगा क्योंकि सामाजिक घर की बात है और समाज में हम सवारने
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समाज में का मूल कारण क्या है इसके बहुत सताती हो सकती इसलिए क्योंकि वो काम जो हमारे लिए सही है दूसरों की नजर में वह गलत हो सकता है यह दूसरों की नजर में जो सही है वह हमारे लिए गलत हो सकता है समाज में बहुत से ऐसे काम में जॉब करना चाहती हैं लेकिन वह इस कारण भी करते हैं क्योंकि हमें भय रहता कि लोग क्या कहेंगे या फिर हमें यह डर रहता है कि पुलिस ने पकड़ ली कि ऐसे बहुत सी चीज है जीने में सामाजिक है का डर रहता है उसमें कोई भी अपराध शामिल हो सकता चाहे वह चोरी हो या कुछ भी या मर्डर हो इसीलिए समाजिक घर को किसी चीज से आम नापतोल के नहीं देख सकते हां यह जरूर कहा जा सकता है इसमें सुधार के लिए कुछ चीजें आ सकती है पर फिर भी सुधार कहां तक और कब तक इस बात के लिए सबको सोचना पड़ेगा क्योंकि सामाजिक घर की बात है और समाज में हम सवारनेSamaaj Mein Ka Mul Kaaran Kya Hai Iske Bahut Satati Ho Sakti Isliye Kyonki Vo Kaam Jo Hamare Liye Sahi Hai Dusron Ki Nazar Mein Wah Galat Ho Sakta Hai Yeh Dusron Ki Nazar Mein Jo Sahi Hai Wah Hamare Liye Galat Ho Sakta Hai Samaaj Mein Bahut Se Aise Kaam Mein Job Karna Chahti Hain Lekin Wah Is Kaaran Bhi Karte Hain Kyonki Hume Bhay Rehta Ki Log Kya Kahenge Ya Phir Hume Yeh Dar Rehta Hai Ki Police Ne Pakad Lee Ki Aise Bahut Si Cheez Hai Jeene Mein Samajik Hai Ka Dar Rehta Hai Usamen Koi Bhi Apradh Shaamil Ho Sakta Chahe Wah Chori Ho Ya Kuch Bhi Ya Murder Ho Isliye Samajik Ghar Ko Kisi Cheez Se Aam Naptol Ke Nahi Dekh Sakte Haan Yeh Jarur Kaha Ja Sakta Hai Isme Sudhaar Ke Liye Kuch Cheezen Aa Sakti Hai Par Phir Bhi Sudhaar Kahaan Tak Aur Kab Tak Is Baat Ke Liye Sabko Sochna Padega Kyonki Samajik Ghar Ki Baat Hai Aur Samaaj Mein Hum Savarane
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