क्या किसानों की मांगों को पूरा करने की स्थिति में है सरकार? ...

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लेकिन मुझे नहीं लगता कि सरकार किसानों की मांग को पूरा करने की स्थिति में है कि जिस पर जब सिचुएशन बिगड़ती है तो सरकार और जून किसान नेता हो तो उनके बीच में एक सहमति बनती है कुछ मुद्दों पर कुछ मतलब नहीं बनती है मुझे लगता है कि सरकार को इस प्रकार की शिक्षण को ही नहीं आने देना चाहिए क्योंकि स्टेशन की आवश्यकता इस देश का अन्नदाता है और उस देश का रक्षक आमने-सामने लाठियों से खेल रहे हो आप भी कि जिस प्रकार के कल के हालात दिल्ली में हुए थे मुझे लगता है कहीं इस देश का सर शर्म से झुक जाता जब किस प्रकार की सिचुएशन आते किसानों का कहना है कि आई एम स्वामीनाथन का जो जो रिपोर्ट थी उसको आप लेकर आई है उसको पोस्ट कीजिए उसको लाइन के सरकारी स्कूल आना ही नहीं चाहती है
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विकी किसानों की अपनी कुछ मांगे हैं ए डेफिनिटी में यह बोला कि मांग जायज है कि कहीं ना कि मैं अभी जस्ट का न्यूज़ आर्टिकल पढ़ रहा था तो उसमें मैंने पढ़ा कि मोदी सरकार ने अभी बिजली के दाम बढ़ा दिए ताकि वहां पर अच्छी बिजली उपलब्ध हो सके तो स्टेशन अट स्कूल इसके लिए बोलना चाहूंगा कि सब्सिडी जो जो दी जाती सब्सिडाइज्ड इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट सिटी की सब्सिडी अवेलेबल होनी चाहिए काफी हद तक एंड उन लोगों का अवेलेबल होनी चाहिए सब्सिडी जी ने जरूरत है तो 1 पॉइंट सकता किसानों की कुछ अपनी मांग है जो बेसिक अभी देखने के लिए जरूरी है उसके बिना आज किसान है तो यह देश है मुझे आज भी उन आरा याद है जय जवान जय किसान जय जवान है और किसान है तभी हमें सुरक्षित बैठ कर शायद आपके सामने हम यह बात रख पा रहे हैं तो इसलिए मैं बोला जब किसानों की कुछ मांगे तो डेफिनिटी पूरी होने चाहिए और कुछ मांगों पर सम्मिलित बैठक बंद बेड बैठक होने के बाद एक डिस्कशन होना चाहिए क्या इस पर हम हल निकाल सकते हैं क्योंकि आपस में जो अभी मुठभेड़ हो रही है सरकार और पुलिसकर्मियों की झांकी निकली एक्सेप्ट टेबल नहीं है उससे कितने पब्लिक प्रॉपर्टी का नुकसान हो रहा है कितने लोगों को हानि पहुंच रही है इसमें सरकार को भी दोनों तरफ के पहलू को समझना पड़ेगा और से निर्णय पर आना पड़ेगा
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देखिए भारत में जो है किसानों की स्थिति गंभीर है और सरकार इस स्थिति में नहीं है मुझे लगता है कि वह किसानों की मांगों को पूरा कर पा रही है कोई जब हमें खाना खिलाता है तो हम पहते अन्नदाता सुखी भव भव अर्थात जो हमें अंधेरा है उसकी हमें अन्य कौन देता है हमें अन्य किसान देता अब माल्या नीरव मोदी जैसे लोग जो है ढूंढ ले कर भाग जाते हैं और यह हमारे भारतीय किसान जो है जब लोन लेते हैं ना तो इनके घर रिकवरी वाले पहुंच जाते हैं अगर टाइम टाइम लोन नहीं जाता एक घटनास्थल मैं बताऊं मैं जानता हूं कि सामने लोन लिया लोन वाले आए उसका ट्रैक्टर खींच कर ले गए और वह किसान या देखकर जो है उसको हार्ट अटैक आया और वह मर गया इस समय किसान कि वह हालत है लोग किसानों के बारे में जो है सूचना ही बंद कर दिए सरकार जो है सिर्फ नीति बनाती है ना कि उनको रुपया जो है मुहैया कराती है के लिए जो है विचार बहुत ही आवश्यक है अगर हमारे देश का किसान अगर बंद कर दें खेती करना तो हम खाएंगे क्या जो आज लोग शहरों की तरफ उन्मुख हो रहे हैं अच्छा लगा हो तो लाइक करके शेयर करिए कमेंट करके मुझको बताइए अन्य कोई कुछ ऐसा प्रोसेस जय जवान जय किसान वंदे मातरम
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विकी कल गांधी जयंती के दिन जो हिंसक व्यवहार हुआ जो भिड़ंत हुई किसानों को के बीच में और सरकार या फिर पुलिस के बीच में बहुत ही भयानक थी जो किसान है उनकी कड़ी बंजारा डांस है और सरकार अभी शक्तिमान मारने को रेडी और वह कह रहे हैं कि बाकी की जो 45 दिमाग से उनके पेपर भी सोचेंगे और मुझे कुछ ऐसे जैसे कि मनरेगा को अटैच करना फॉर्मिंग से या फिर जो डीजल व्हीकल एक्ट सजा दो पुराने तो फिर भी इस्तेमाल कर सकते हैं दिल्ली-एनसीआर में या फिर जीएसटी क्या है वह फॉर्म इन इक्विपमेंट्स से 5% तक लगाना तो यह सब चीजें हैं जिनके बारे में बात की जा सकती है काम करा सकता है बट कुछ ऐसी है जो नहीं पूरी किया क्योंकि सरकार अभी इतनी सक्षम नहीं है कर्ज माफी पॉसिबल नहीं है अभी के लिए क्योंकि बहुत ज्यादा इंडिया अभी वे शब्द ₹1 जो है वह नीचे गिर गया है सरकार के हक हाथ में है जिन्हें वह पूरा कर सकते हैं और किसान ज्यादा इंपॉर्टेंट पार्ट हमारी सोसाइटी के किसानों ने की बफ कर दिया तो हम सब भूखे मर जाएंगे तो जो भी चीज लॉजिकल है और लायक है वह करना चाहिए सरकार को क्योंकि सरकार को यह समझना होगा कि किसानों से ज्यादा इंपॉर्टेंट साइट का कोई सेक्टर नहीं होता खाने को नहीं मिलेगा तो सारी जिंदगी खत्म हो जाएगी तो जो चीज़ें कर सकते मुझे तूने करनी चाहिए
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ठीक है बीते कुछ दो दिनों में जिस तरीके से हमारे देश में हंगामा हुआ वह काफी शर्मनाक हमारे देश के लिए जो किसानों की मांग है जो उनके द्वारा पद यात्रा निकाली गई क्या उसका कोई नतीजा निकला किसानों की हालत काफी खराब है और मैं आपको बताना चाहता हूं कि बीते 15 से 20 साल में लगभग 200000 किसानों ने आत्महत्या की एक शादी आंकड़ा और भी लगा तो हालत गंभीर ही हम सब जानते हैं और हमारी सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर रही आप सभी योजनाएं लाती है लेकिन उन योजनाओं में भी घोटाला कर देती है और सहारा बेनिफिट कुदरत लेते हैं पॉलीटिशियंस और घोटाले वाले बात करते हैं क्या क्या मांग रहे थे कि कुछ मांग है जिसमें मुझे लगता है कि पूरी हो सकती है और कुछ में थोड़ा टाइम लगेगा जैसे एक डिमांड है कि किसानों को जितना भी करता है वह सब माफ किया जाए तो यह सरकार अभी उस स्थिति में नहीं है कि सब का पूरा कर्ज माफ कर सकें पूरा तो नहीं कर सकते थोड़ा समय चाहिए उसके बाद चीनी मिल कर जो पैसा है जो देना है वह बिल्कुल उनको देना चाहिए और क्या कहते हैं जो चीनी मिल के मालिक आ कर पैसा नहीं देते किसानों का उनकी फसल का तो उनके खिलाफ कंप्लेंट होनी चाहिए यह सरकार कर सकती है तू है कि बिजली के दाम कम कर सकती है सरकारी कर सकती है उसके बाद डिमांड है कि उनकी फसल के उनको सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं तो देखते हुई थी वह नहीं हो पा रहा तो सरकार कर सकती है स्वामीनाथन की रिपोर्ट जो थी उनके कॉमेडी चाहिए उसको लागू करने की बात की जा रही है वह उस पर विचार करना चाहिए और उसके बाद डीजल के दाम कम करने से किसान को बहुत नुकसान हो रहा है कुछ चीजें बिल्कुल सरकार कर सकती है क्या करना चाहिए भ्रष्टाचार के और कुछ में सोचना पड़ेगा कुछ को थोड़ा समय लगेगा
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मुझे लगता है कि यह जो भी किसानों की मांगे हैं अगर सरकार चाहे तो उन्हें पूरा कर सकती हो और इस स्थिति में भी है कि उन्हें पूरा करा जा सकता है क्योंकि नहीं कि हमारी कॉल मी हम काफी अधिक स्ट्रांग होती जा रही है और वर्ल्ड कार वर्ल्ड कॉम बीच में आकर हम देखें तुम्हारा ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स ऊपर आता जा रहा है तो कहीं ना कहीं सरकार इस स्थिति में है कि वह किसानों की मांगे पूरी कर सकती है लेकिन जो सरकार की योजनाएं बनाती है यह जो भी चीजें सोचती है करने के लिए उनको पूरी तरह से क्रियान्वित नहीं कर पाती है और ग्राउंड लेवल तक जाकर वह चीजें पूरी तरह से नहीं हो पा रही है क्योंकि सरकार ने कहा था कि जितनी भी किसान है उनका जो जो भी उनकी फसल होगी उसका क्रॉप इंश्योरेंस कराया जाएगा वह पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है पूरे लोगों सब लोगों की कृपा सर का क्रॉप इंश्योरेंस नहीं हो पाया उसके अलावा जो किसान थे उनका लोन माफ करने का भी सरकार ने वादा किया था जो वह नहीं कर पाई है और मुझे लगता है कि अगर चाहे सरकार तो उनका लोन माफ कर के सारे किसानों को एक तरह से आदि शक्ति है और तीसरा कहीं ना कहीं जितने किसान हैं उनका जो भी फसल होती है तो उसका जो हुआ सामान उनको लगाना होता जो लागत उनकी लगती है उसका घर में भी कहीं ना कहीं मदद कर सकती है सरकार उनकी और जो चीजों की प्राइस है चाहे वह बीज हो या ड्यूटी हो या खादो उन सब चीजों की भी और जो उनका नाम है वह भी कम कर सकती है किसानों के लिए ताकि उनको थोड़ी मदद हो सके और इस स्थिति में बिल्कुल है सरकार क्यों यह सब दुआ मांगी किसानों की पूरी कर सकती है लेकिन फिर भी सरकार नहीं कर रही है क्योंकि अब सरकार का कहना कि जो पैसा है वह विकास की तरफ जा रहा है लेकिन अब वो किसानों की मांगे पूरी तरह नहीं पूरी कर रही है और ही चीज कहीं ना कहीं दुखद भी है कि किसानों की वजह से हमारे देश में सभी लोगों का नाश प्राप्त हो रहा है सब लोग खा पी रहे हैं और उन्हीं के लिए सरकार नहीं कुछ कर रही
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विभिन्न संस्थाओं को सुधारकर एकीकृत करके किसानों को राहत दी जा सकती है मैं उसके लिए पूरी तरह से आर्थिक व्यवस्था में बदलाव लाना पड़ेगा ताकि किसान आत्मनिर्भर होने के साथ सरकार के प्रति जिम्मेदार भी
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किसानों की मांगे पूरी करने का वक्त आ गया है अभी किसानों की पूरी मांग होने वाली ही कही कुची कुछ ही महीनों में किसानों की हर एक मांग पर विचार विचार करने की कोशिश करने वाली है सरकार अभी अभी जो 2019 में होने वाले चुनाव में चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार हर एक नए नए तकलीफ अजमा के वोटिंग ऑटो ऑटो के लिए तकलीफ अजमा के कुछ सरकार किसानों को वर्क कम बनाना चाहती है उनको मालूम है कि सारे देश की रीड की हड्डी है मेंस जो हड्डी उसके ऊपर ही देश चलता है इसलिए उसको खुश करेंगे तो वह अपने आप अपने पास आएंगे यह सोच रखते ही रखने वाली है किसानों को एक सेक्टर का किसानों की मांगे कुछ 50 से 50% पूरा करने की कोशिश करने वाली है यही सोच ध्यान में रखते हुए सरकार आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है
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लेकिन किसानों की जो मांग है उसको सरकार किसी भी कीमत पर पूरा नहीं कर सकती है इसका देखे कई सारे कारण है एक तो जैसे कि जो लोन वेइवर की जो किसानों की डिमांड है वह भी बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि अगर आपने लोन लिया हुआ है तो आप लोग क्यों नहीं पाएंगे अगर इस तरीके से हमारे देश का सिस्टम चलने लगा कि एक सोसाइटी का तबका ऐसा हो कि जो लोन ले लिया और उसके बाद चुकाने से मना कर दे तो मैं समझता हूं कि बैंकों की हालत खस्ताहाल हो जाएगी और देश की हालत भी खस्ता हो जाएगी क्योंकि इसके बाद में फिर बाकी ग्रुप भी जो है साथ में आएंगे और वह कहेंगे सा हमारा लोन माफ कर दीजिए दूसरी जी किसानों की बात है क्योंकि जो वक्त फसलों की कीमत है उसको बढ़ा दी जाए वह भी एक मुश्किल काम है क्योंकि किसान के साथ साथ में कंज्यूमर्स कंट्रीज भी जो है वह गवर्नमेंट को देखना पड़ता है और अगर किसानों की जो खेलते हैं वह बढ़ाओ दी जाएंगी जो उनके खाने-पीने की जो सब्जियां है या फिर जो उनके जो भी सीरियल सर्विस करते हैं शादी के बाद ही आएंगे तो उसका खामियाजा जो है वह आम जनता को भुगतना पड़ेगा इस वजह से डिमांड मुझे नहीं लगता कि पूरा करने की राशि बनती है तो किसानों का जो है वह एक ही तरीका है कि वह ज्यादा ही फैशन टेक्नोलॉजी का यूज करें और ज्यादा अच्छे तरीके से आप जो है वह भाड़ खेती-बाड़ी करें वही उसी से जहां किसानों का भला हो सकता है
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