जापान मे चुनाव की जीत क्या रही? ...

जापान संसद की 465 सीटों पर चुनाव हुए थे। चुनाव के आधिकारिक नतीजे सोमवार को ही आने की संभावना है। इस जीत से प्रधानमंत्री शिंजो आबे को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और उत्तर कोरिया पर उनके पहले से कड़े रूख को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। जापानी दैनिक ‘योमिउरी’ की वेबसाइट पर दी गई खबर में कुछ समय पहले कहा गया कि आबे भारी जीत की तरफ बढ़ रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या आबे का गठबंधन दो तिहाई सीटें जीतने में सफल होगा। दो तिहाई का मतलब 310 सीटें जीतने से है।जापान की राष्ट्रीय वहाँ की द्विसदनीय विधानपालिका है। इसकी निचली सदन को प्रतिनिधि सभा और ऊपरी सदन को पार्षद सभा कहते हैं। दोनों सदनों का चुनाव समांतर मतदान के होता है। कानून बनाने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री का चुनाव करना भी संसद की ज़िम्मेदारी है।संविधान के अनुसार संसद देश की शक्ति का सर्वोच्च अंग है। राष्ट्रीय संसद भवन नागाता-चो, चियोदा, टोक्यो में स्थित है।क़ानून बनने के लिए, संवैधानिक संशोधन को संसद और सम्राट की स्विकृति की आवश्यकता थी। इसका मतलब था, भले ही सम्राट हुक्मनामों के ज़रिए क़ानून नहीं बना सकता था, पर उसके पास संसद पर वीटो का अधिकार था। सम्राट प्रधानमंत और मंत्रीमंडल की नियुक्ति भी करता था, अर्थात् प्रधानमंत्री का चयन संसद से नहीं होता था। शाही संसद के पास बजट नियंत्रित करने की भी सीमिन क्षमता थी। संसद बजट को वीटो कर सकता था, पर किसी बजट के मंज़ूर न होने पर पिछ्ले वर्ष का बजट ही लागू रहता था। यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नए संविधान के अंतर्गत बदल दिया गया!!!
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जापान संसद की 465 सीटों पर चुनाव हुए थे। चुनाव के आधिकारिक नतीजे सोमवार को ही आने की संभावना है। इस जीत से प्रधानमंत्री शिंजो आबे को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और उत्तर कोरिया पर उनके पहले से कड़े रूख को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। जापानी दैनिक ‘योमिउरी’ की वेबसाइट पर दी गई खबर में कुछ समय पहले कहा गया कि आबे भारी जीत की तरफ बढ़ रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या आबे का गठबंधन दो तिहाई सीटें जीतने में सफल होगा। दो तिहाई का मतलब 310 सीटें जीतने से है।जापान की राष्ट्रीय वहाँ की द्विसदनीय विधानपालिका है। इसकी निचली सदन को प्रतिनिधि सभा और ऊपरी सदन को पार्षद सभा कहते हैं। दोनों सदनों का चुनाव समांतर मतदान के होता है। कानून बनाने के साथ-साथ, प्रधानमंत्री का चुनाव करना भी संसद की ज़िम्मेदारी है।संविधान के अनुसार संसद देश की शक्ति का सर्वोच्च अंग है। राष्ट्रीय संसद भवन नागाता-चो, चियोदा, टोक्यो में स्थित है।क़ानून बनने के लिए, संवैधानिक संशोधन को संसद और सम्राट की स्विकृति की आवश्यकता थी। इसका मतलब था, भले ही सम्राट हुक्मनामों के ज़रिए क़ानून नहीं बना सकता था, पर उसके पास संसद पर वीटो का अधिकार था। सम्राट प्रधानमंत और मंत्रीमंडल की नियुक्ति भी करता था, अर्थात् प्रधानमंत्री का चयन संसद से नहीं होता था। शाही संसद के पास बजट नियंत्रित करने की भी सीमिन क्षमता थी। संसद बजट को वीटो कर सकता था, पर किसी बजट के मंज़ूर न होने पर पिछ्ले वर्ष का बजट ही लागू रहता था। यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नए संविधान के अंतर्गत बदल दिया गया!!!Japan Sansad Ki 465 Siton Per Chunav Huye The Chunav K Aadhikaarik Nateeje Somwar Co Hea Aane Ki Sambhavana Hai Is Jeet Se Pradhaanmatree Shinjo Abe Co Vishwa Ki Tisri Sabse Badi Arthavyavastha Co Pateri Per Lane Aur Uttar Korea Per Unke Pehle Se Karey Rukh Co Majboot Karne Mein Madada Mill Sakti Hai Zaapaanee Dainik ‘yomiuri’ Ki Website Per They Gi Khabar Mein Kuch Samay Pehle Kaha Gaya Qi Abe Bhari Jeet Ki Tarf Barh Rahe Hain Abhi Yeh Spasht Nahin Ho PAYA Hai Qi Kya Abe Ka Gathabandhan Though Tihai Siten Jitne Mein Safal Hoga Though Tihai Ka Matlab 310 Siten Jitne Se Hai Japan Ki Rashtriya Wahaa Ki Dwisadaniya Vidhanpalika Hai Essaki Nichli Sadan Co Pratinidhi Sabha Aur Upari Sadan Co Parshd Sabha Kehte Hain Donon Sadnon Ka Chunav Samantar Matdan K Hota Hai Kanun Banaane K Sathe Sathe Pradhaanmatree Ka Chunav Krna Bhi Sansad Ki Zimmedari Hai Samvidhan K Anusar Sansad Desh Ki Shakti Ka Sarvochch Amg Hai Rashtriya Sansad Bhawan Nagata Cho Chiyoda Tokyo Mein Sthita Hai Qanun Banane K Lie Sanvaidhanik Sanshodhan Co Sansad Aur Samrat Ki Swikriti Ki Aavshyakata Thi Iska Matlab Thaa Bhale Hea Samrat Hukmanamon K Zariye Qanun Nahin Banna Sakta Thaa Per Uske Pass Sansad Per Wetto Ka Adhikar Thaa Samrat Pradhanamant Aur Mantrimandal Ki Niyukti Bhi Karata Thaa Arthat Pradhaanmatree Ka Chayan Sansad Se Nahin Hota Thaa Shahi Sansad K Pass Budget Niyantrit Karne Ki Bhi Simin Kshamta Thi Sansad Budget Co Wetto Car Sakta Thaa Per Kisi Budget K Manzur Na Hone Per Pichle Varsh Ka Budget Hea Laghu Rehta Thaa Yeh Sub Dveeteey Vishwa Yuddh K Baad Neay Samvidhan K Antargat Badal Diya Gaya
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