क्या आरक्षण जातिगत वैमनस्य का कारण नही है? ...

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मुझे नहीं लगता कि जातिगत वैमनस्य का एक प्रमुख और मजबूत कारण सिर्फ आरक्षण यह आरक्षण जातिगत समस्या का कारण नहीं है इसके और भी कई महत्वपूर्ण और जरूरी कारण बन रहे हैं बनते गए हैं हमारे प्राचीन भारत में भी समाज में कई जातियां रहती थी और प्राचीन भारत में इतिहास में भी उल्लेख मिलता है कि भारत में समाज को चार वर्गों में बांटा गया था और उन्हें अलग-अलग कार्यक्रम पर गए थे आरक्षण का मुद्दा तो संविधान में तब होता जब लगाई जाती के लोग हैं उनका उपचार सर उठाना चाहिए उनको भी कुछ बुनियादी जरूरतें समान रूप से उन्हें भी मिलनी चाहिए उन्हें भी स्वावलंबी बनाना चाहिए तूतक आरक्षण संविधान में दिया गया तब उस का प्रवाधान हुआ तो आरक्षण को जातिगत मरना सिखा कारण मारना सही नहीं है उसके लिए बहुत सारे जो हमें खत्म करने होंगे हमें जानते होंगे हमें समझ रहे होंगे राजनीति ने अपने स्वार्थों के कारण इसको बढ़ावा दिया और समाज की सोच समझ में कम पढ़ा लिखा होना कम समझना जातियों में भेदभाव करना ऊंच-नीच करना इन चीजों ने इसे और बढ़ावा दिया लेकिन राजनीति तो अपने स्वार्थ के कारण इसे खत्म नहीं करना चाहेगी क्योंकि उसका वोट बैंक की जातिगत सम मतलब जातिगत उस पर आधारित रहता है लेकिन समाज को जो सबसे ज्यादा तकलीफ आता है जिससे उसे इसके बारे में सोचना चाहिए लोगों को अपना मन बड़ा करना चाहिए लोगों को देखना चाहिए कि जो नीची जाति के लोग हैं जिन्हें जरूरत है इसकी उसे इसका लाभ मिले तो यह समस्या फिर कम हो सकती है लेकिन अगर हम एक दूसरे से ही शत्रुता करेंगे तो जो स्वार्थी लोग हैं वह तो अपना स्वार्थ पूरा करेंगे ही इसलिए हमें इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए
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मुझे नहीं लगता कि जातिगत वैमनस्य का एक प्रमुख और मजबूत कारण सिर्फ आरक्षण यह आरक्षण जातिगत समस्या का कारण नहीं है इसके और भी कई महत्वपूर्ण और जरूरी कारण बन रहे हैं बनते गए हैं हमारे प्राचीन भारत में भी समाज में कई जातियां रहती थी और प्राचीन भारत में इतिहास में भी उल्लेख मिलता है कि भारत में समाज को चार वर्गों में बांटा गया था और उन्हें अलग-अलग कार्यक्रम पर गए थे आरक्षण का मुद्दा तो संविधान में तब होता जब लगाई जाती के लोग हैं उनका उपचार सर उठाना चाहिए उनको भी कुछ बुनियादी जरूरतें समान रूप से उन्हें भी मिलनी चाहिए उन्हें भी स्वावलंबी बनाना चाहिए तूतक आरक्षण संविधान में दिया गया तब उस का प्रवाधान हुआ तो आरक्षण को जातिगत मरना सिखा कारण मारना सही नहीं है उसके लिए बहुत सारे जो हमें खत्म करने होंगे हमें जानते होंगे हमें समझ रहे होंगे राजनीति ने अपने स्वार्थों के कारण इसको बढ़ावा दिया और समाज की सोच समझ में कम पढ़ा लिखा होना कम समझना जातियों में भेदभाव करना ऊंच-नीच करना इन चीजों ने इसे और बढ़ावा दिया लेकिन राजनीति तो अपने स्वार्थ के कारण इसे खत्म नहीं करना चाहेगी क्योंकि उसका वोट बैंक की जातिगत सम मतलब जातिगत उस पर आधारित रहता है लेकिन समाज को जो सबसे ज्यादा तकलीफ आता है जिससे उसे इसके बारे में सोचना चाहिए लोगों को अपना मन बड़ा करना चाहिए लोगों को देखना चाहिए कि जो नीची जाति के लोग हैं जिन्हें जरूरत है इसकी उसे इसका लाभ मिले तो यह समस्या फिर कम हो सकती है लेकिन अगर हम एक दूसरे से ही शत्रुता करेंगे तो जो स्वार्थी लोग हैं वह तो अपना स्वार्थ पूरा करेंगे ही इसलिए हमें इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहिएMujhe Nahi Lagta Ki Jaatigat Vaimanasya Ka Ek Pramukh Aur Mazboot Kaaran Sirf Aarakshan Yeh Aarakshan Jaatigat Samasya Ka Kaaran Nahi Hai Iske Aur Bhi Kai Mahatvapurna Aur Zaroori Kaaran Ban Rahe Hain Bante Gaye Hain Hamare Prachin Bharat Mein Bhi Samaaj Mein Kai Jatiyaan Rehti Thi Aur Prachin Bharat Mein Itihas Mein Bhi Ullekh Milta Hai Ki Bharat Mein Samaaj Ko Char Vargon Mein Banta Gaya Tha Aur Unhen Alag Alag Karyakram Par Gaye The Aarakshan Ka Mudda To Samvidhan Mein Tab Hota Jab Lagai Jati Ke Log Hain Unka Upchaar Sar Uthaana Chahiye Unko Bhi Kuch Buniyaadi Jarurate Saman Roop Se Unhen Bhi Milani Chahiye Unhen Bhi Svaavlambi Banana Chahiye Tutak Aarakshan Samvidhan Mein Diya Gaya Tab Us Ka Pravadhan Hua To Aarakshan Ko Jaatigat Marna Sikha Kaaran Maarna Sahi Nahi Hai Uske Liye Bahut Sare Jo Hume Khatam Karne Honge Hume Jante Honge Hume Samajh Rahe Honge Rajneeti Ne Apne Swarthon Ke Kaaran Isko Badhawa Diya Aur Samaaj Ki Soch Samajh Mein Kum Padha Likha Hona Kum Samajhna Jaatiyo Mein Bhedbhav Karna Unch Neech Karna In Chijon Ne Ise Aur Badhawa Diya Lekin Rajneeti To Apne Swartha Ke Kaaran Ise Khatam Nahi Karna Chahegi Kyonki Uska Vote Bank Ki Jaatigat Some Matlab Jaatigat Us Par Aadharit Rehta Hai Lekin Samaaj Ko Jo Sabse Jyada Takleef Aata Hai Jisse Use Iske Baare Mein Sochna Chahiye Logon Ko Apna Man Bada Karna Chahiye Logon Ko Dekhna Chahiye Ki Jo Nichi Jati Ke Log Hain Jinhen Zaroorat Hai Iski Use Iska Labh Mile To Yeh Samasya Phir Kum Ho Sakti Hai Lekin Agar Hum Ek Dusre Se Hi Shatruta Karenge To Jo Swaarthi Log Hain Wah To Apna Swartha Pura Karenge Hi Isliye Hume Is Samasya Ka Samadhan Dhundhana Chahiye
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