भारतीय जनता पार्टी के साथ योगी आदित्यनाथ का रिश्ता कैसा है?

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योगी और भारतीय जनता पार्टी के बीच संबंध शुरुआत में आसान नहीं था। एक दशक से भी अधिक समय तक भाजपा और योगी आदित्यनाथ के बीच एक संघर्ष था। उन्होंने अक्सर हिंदुत्व विचारधारा को कम करने के लिए बीजेपी की आलोचना की और कभी-कभी पार्टी का उपहास और निंदा की। योगी आदित्यनाथ ने भाजपा से किसी भी समर्थन के बिना उत्तर प्रदेश में अपने मजबूत और स्वतंत्र शक्ति आधार की स्थापना की। इसके बजाय उन्हें दृढ़ता से उनकी हिंदू युवा वाहिनी और गोरखनाथ मंदिर द्वारा समर्थित किया गया था। उन्हें पूरा भरोसा था कि वह भारतीय जनता पार्टी पर आदेश दे पाएंगे। लेकिन बीजेपी ने उनकी आवाज सुनी नहीं। इस लिए योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतरे और विद्रोह करने का नेतृत्व किया। योगी आदित्यनाथ काफी सफल थे जब गोरखपुर से उनके उम्मीदवार राधा मोहन दास अग्रवाल ने २००२ में बीजेपी के कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को व्यापक मार्जिन से पराजित किया था। २००७ में- आदित्यनाथ ने बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ राज्य विधानसभा के लिए 70 उम्मीदवारों को मैदान में रखने की धमकी दी लेकिन अंत में वह एक समझौता पर पहुंचे। २००९ में- एक अफवाह थी कि आदित्यनाथ ने बीजेपी उम्मीदवारों के खिलाफ अभियान चलाया था। इन विद्रोहों के बावजूद- योगी आदित्यनाथ भाजपा और आरएसएस के नेताओं की अच्छी नज़र में थे।

तत्कालीन उप प्रधान मंत्री एलके आडवाणी- आरएसएस प्रमुख राजेंद्र सिंह और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल ने गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ का दौरा किया।

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