नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट क्या है?

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भारत को विनिर्माण केंद्र बनाने और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से उन्हें देश के भीतर अपने नए उत्पादों का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए- नरेंद्र मोदी ने २५ सितंबर- २०१४ को मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट लॉन्च किया। जो लोग उदारीकृत अर्थव्यवस्था को समर्थन करते थे उन्होंने नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए इस पहल का भी समर्थन किया। हालांकि- इस फैसले के बारे में विवाद और तर्क भी हुए थे। आलोचकों ने कहा कि यह निर्णय विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार का एक बड़ा हिस्सा पकड़ने की अनुमति देगा।

मोदी प्रशासन ने निजी इंडस्ट्रीयल कॉरिडर्ज़ के निर्माण को सक्षम करने के लिए एक भूमि सुधार बिल पास  किया- जिसने इसे निजी किसानों की सहमति के बिना निजी कृषि भूमि हासिल करने की अनुमति दी और सामाजिक प्रभाव का आकलन किए बिना।

पिछले बिल के तहत- सरकार को निजी परियोजना के लिए अधिग्रहण करने से पहले जमीन के टुकड़े के 80% मालिकों या किसी भी संपत्ति की सहमति की आवश्यकता थी। मोदी के नए भूमि सुधार बिल के बाद- इस आवश्यकता की कोई ज़रूरत नहीं पड़ी। हालांकि- कार्यकारी बिल के माध्यम से पारित होने के बावजूद इस बिल को संसद में विपक्ष का सामना करना पड़ा और इसे समाप्त करने की अनुमति दी गई।

मोदी की सरकार ने गुड्ज़ एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) लाया जो कि भारत में  आज़ादी के बाद से लेके आज तक के सबसे बड़ा कर सुधार था। इसमें लगभग १७ विभिन्न कर शामिल थे और 1 जुलाई 2017 से प्रभावी हो गए।

25 जून 2015 को- मोदी ने एक कार्यक्रम शुरू किया जिसका उद्देश्य 100 स्मार्ट शहरों को विकसित करना था। "स्मार्ट सिटीज" कार्यक्रम से यह उम्मीद थी की यह टेक्नॉलजी कंपनियों को 20 बिलियन का अतिरिक्त लाभ देगा। जून 2015 में- मोदी ने "हाउसिंग फॉर ऑल बाई 2022" प्रोजेक्ट लॉन्च किया- जिसका उद्देश्य भारत के शहरी गरीबों के लिए लगभग 20 मिलियन किफायती घरों का निर्माण करके भारत में बस्तियों को खत्म करना है।

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