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Deepak 

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सामान्यत किवी का उपयोग लाभकारी और सुरक्षित होता है। पर कुछ लोग जिन्हें इससे एलर्जी होती है। उनके लिए यह कुछ हद तक नुकसान दायक भी हो सकता है। किवी एलर्जी के लक्षणों में गले में खुजली जीभ में सूजन निगलने में परेशानी उल्‍टी आदि हो सकती है। किवी फलों का अवश्‍यक्‍ता से ज्‍यादा उपभोग आपके लिए त्‍वचा संबंधी परेशानियों को जन्‍म दे सकता है। इस फल के ज्‍यादा सेवन से आपके मुंह में जलन हो सकती है। यदि आपको इस प्रकार की कोई समस्‍या हो तो आप इसका सेवन बंद कर दे।
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हिबिस्कुस फ्लावर खूबसूरत फूलों वाला पौधा है। यह आमतौर पर ट्रॉपिकल और गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है। आयुर्वेद में हिबिस्कुस को कई बीमारियों में उपयोगी माना जाता है। 2008 में यूएसडीए के अध्ययन में पाया गया कि हिबिस्कुस का चाय पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है। इसका इस्तेमाल खांसी बालों के झड़ने और बालों के सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए किया जाता है। गुड़हल को किडनी के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। गुड़हल की पत्ती से बनी चाय को कई देशों में दवा के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। किडनी के रोगी इस चाय को बिना शक्‍कर के पियें। यह किडनी की पथरी को दूर करने में भी मदद करती है।
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लेप्रोसी यानि कुष्ठरोग या हैन्सेन का रोग एचडी चिकित्सक गेरहार्ड आर्मोर हैन्सेन के नाम पर माइकोबैक्टेरियम लेप्री और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी है। कुष्ठरोग मुख्यत ऊपरी श्वसन तंत्र के श्लेष्म और बाह्य नसों की एक ग्रैन्युलोमा संबंधी बीमारी है। त्वचा पर घाव इसके प्राथमिक बाह्य संकेत हैं। यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो कुष्ठरोग बढ़ सकता है, जिससे त्वचा नसों हाथ पैरों और आंखों में स्थायी क्षति हो सकती है। लोककथाओं के विपरीत कुष्ठरोग के कारण शरीर के अंग अलग होकर गिरते नहीं हालांकि इस बीमारी के कारण वे सुन्न तथा या रोगी बन सकते हैं।
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अगर आप प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए सबसे अच्छे समय के बारे में सोच रही है। तो आपको सुबह का समय चुनना चाहिए क्योकि गर्भावस्था हार्मोन एचसीजी सुबह अपने उच्चतम स्तर पर होता है। सबसे पहले सुबह का पहला पेसाब किसी छोटे कंटेनर या या किसी डिस्पोजल में ले लीजिये। फिर ड्रॉपर से पेसाब को लीजिये और कुछ बुँदे किट पे बने छोटे वाले होल में डालिये। फिर पाँच मिनट तक इंतजार कीजिये आपको गुलाबी लाइन दिखाई देगी। जो एक या दो गुलाबी लाइने दिखेगी आप उससे रिजल्ट का पता कर सकती है। अगर एक गुलाबी लाइन आती है तो आप गर्भवती नहीं है। अगर दो हल्की या गहरी गुलाबी लाइन आती है तो आप गर्भवती है। दोनों मेसे एक भी लाइन नहीं आती है तो आपकी किट ख़राब है।
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आंवले के रस में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जो बढ़ती उम्र का असर आपके चेहरे पर नहीं पड़ने देते हैं। इसलिए नियमित रूप से आंवला जूस पीते रहने से आप लम्बे समय तक जवां दिखाई देते हैं। इसके सेवन से आपकी स्किन चमकदार बनती हैं। प्रतिदिन आंवले के रस में शहद मिला कर पीने से आपका चेहरा चमकदार बनता हैं और चेहरे से झाइयाँ ख़त्म होने लगती हैं। आंवला जूस रोजाना पीने से पाचन क्रिया दुरुस्त बनती हैं। इसलिए आंवला रस हर रोज पीने से भयंकर से भयंकर कब्ज को दूर किया जा सकता हैं। आंवला वजन घटाने में सहायक है। क्योंकि आंवला भूख कंट्रोल और मेटाबोलिज्म पर असर करता है। जिससे आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।
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जिमीकंद एक बहुवर्षीय भूमिगत सब्जी है जिसका वर्णन भारतीय धर्मग्रंथों में भी पाया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में जिमीकंद के भिन्न भिन्न नाम ओल या सूरन हैं। पहले इसे गृहवाटिका में या घरों के अगल बगल की जमीन में ही उगाया जाता था। परन्तु अब तो जिमीकंद की व्यवसायिक खेती होने लगी है। जिमीकंद एक सब्जी ही नहीं वरन यह एक बहुमूल्य जड़ीबूटी है जो सभी को स्वस्थ एवं निरोग रखने में मदद करता है। भोज्य पदार्थों के संचन हेतु यह भूमिगत तना का रूपांतर है जिसे घनकंद कहते हैं। यह परिवर्तित तना बहुत अधिक जैसा-तैसा फूला रहता है एवं इसकी सतह पर पर्वसंधियाँ रहती हैं जिनपर शल्क पत्र लगे रहते हैं। सतह पर जहाँ तहाँ अपस्थानिक जड़ें लगी रहती हैं। अगले सिरे पर अग्रकलिका तथा शल्कपत्रों के अक्ष पर छोटी छोटी कलिकाएँ होती हैं।
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गाजर डकस कैरोटा सबप सैटिवस एक मूल सब्जी है, आमतौर पर रंग में नारंगी, हालांकि बैंगनी, काला, लाल, सफेद, और पीले रंग की किस्में मौजूद हैं। गाजर जंगली गाजर, डकस कैरोटा का एक पालतू रूप है, जो यूरोप और दक्षिणपश्चिम एशिया के मूल निवासी हैं। पौधे शायद फारस में पैदा हुआ था और मूल रूप से इसकी पत्तियों और बीजों के लिए खेती की गई थी। पौधे का सबसे अधिक खाया हिस्सा नलिका है, हालांकि उपजी और पत्तियों को भी खाया जाता है। घरेलू गाजर को अपने बड़े पैमाने पर, अधिक सुन्दर, कम वुडी बनावट वाले नलिका के लिए चुनिंदा रूप से पैदा किया गया है।
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पुरुष के वीर्य में 2 तरह के शुक्राणु होते है ये दोनों तरह के सुक्राणु ही निर्धारित करते है की गर्भ में लड़का बनेगा या लड़की अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा की ऐसा कैसा होता होगा तो चलिए समझते है सुक्राणु दो टाइप के होते है जिन्हें साइंस की भाषा में क्रोमोजोम कहते है जो एक्स क्रोमोजोम और वाई क्रोमोजोम होते है पुरुष में ये दोनों तरह के क्रोमोजोम पाए जाते है। जबकि स्त्री के अंडाशय में केवल दो एक्स एक्स क्रोमोसोम ही होते हैं जब सम्भोग के बाद वीर्य का व क्रोमोजोम वाई महिला के अंडे से मिलता है। तब लड़का पैदा होता है। और यदि गर्भाधान के समय यदि स्त्री के एक्स क्रोमोसोम पुरुष के एक्स क्रोमोसोम से मिल जाये तो लड़की का जन्म होता है
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ओटमील का सबसे अच्‍छा लाभ यह है कि इसे मिनटों में बनाया जा सकता है। जब भी आप ऑफिस के लिये लेट हो रहें तो तो इसे माइक्रोवेव में रख दें और आप पाएंगे कि यह झटपट ही तैयार हो चुका होगा। रिसर्च के अनुसार इसमें मौजूद फाइबर और एंटी ऑक्‍सीडेंट बैड कोलेस्‍ट्रॉल यानी की एलडीएल को कम करता है। शरीर में बैड कोलेस्‍ट्रॉल हार्ट की बीमारियों को दावत देता है। इसलिये अपने सुबह के नाश्‍ते में ओटमील को जरुर शामिल कीजिये। ओटमील स्‍टार्च को हजम करने में मददगार होते हैं। इस वजह से शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल भी दुरुस्‍त रहता है।
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अंजीर एक अत्यंत स्वादिष्ट फल होता है और इसका स्वाद सूख जाने के बाद और अधिक बढ़ जाता है अंजीर में कैल्शियम आयरन फास्फोरस सोडियम पोटेशियम मैगनीज जैसे खनिज तत्व पाए जाने के कारण इसे स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में जाना जाता है। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए सबसे आवश्यक तत्व कैल्शियम होता है जोकि अंजीर में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है अंजीर के सेवन करने से हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जिसमें ऑस्टियोपोरोसिस सबसे ऊपर होती है से बचा जा सकता है।
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जब भी किसी लेडी का गर्भपात होता है तो कुछ सामान्य समस्यांए जैसे उल्टी आना बुखार रहना पिरियड आना पेट में दर्द आदि होती हैं। लेकिन कई बार कुछ लेडी को गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं से कही अधिक गम्भीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की हीमोररेहेज एंडोटॉक्सिक शॉक कंवलशन गर्भाशय में चोट आदि । यदि गर्भपात के समय परेशानी अधिक न हुई हो तो महिला कुछ दिनों में स्वस्थ हो जाती है। गर्भपात के बाद योनि से बदबूदार चिपचिपा पदार्थ रिसना तेज़ बुखार आना पेट में ज़ोरों का दर्द रहना अधिक और लगातार ख़ून आना दर्द का कम न होना आदि।
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कई लोगों को प्रोटीन से एलर्जी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है कि वे इसे पचा नहीं पाते है। औऱ कई बार गैस की भी परेशानी हो सकती है। सलाह से अधिक प्रोटीन पाउडर का सेवन करने से शरीर में अधिक वसा बढ़ सकता है। चूंकि प्रोटिनेक्स में पर्याप्त कैलोरी है जिसमें आपको व्यायाम करने की ज़रूरत होती है अगर आप पाउडर सेवन की मात्रा में वृद्धि करते हैं। और आवश्यक अभ्यास नहीं करते हैं तो आपको शरीर पर वसा जमा हो सकता है। कुछ केस में देखा गया है कि लंबे समय तक प्रोटिनेक्स का इस्तेमाल करने से किडनी फेल होने का खतरा रहता है।
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डिलेवरी से पहले या प्रसव पीड़ा लेबर पेन की आरंभिक अवस्था में आपको यह महसूस हो सकता है। पीरियड आने से पहले वाली अनुभूति और ऐंठन के साथ लगातार पीठ के निचले हिस्से में या पेट में दर्द। दर्द भरे संकुचन जो नियमित और छोटे अंतराल पर होने लगते हैं और बाद में और लंबे व प्रबल हो जाते हैं। पानी की थैली फटना। एमनियोटिक द्रव के तेजी से बहने या रिसाव से आपकी झिल्ली फट सकती है। ऐसा कुछ भी हो तो अपनी डॉक्टर से संपर्क करें। भूरे या खून सी रंगत का भूरे या खून सी रंगत का म्यूकस निकलना। अगर आपकी गर्भाशय की ग्रीवा पर लगा श्लेम का डाट बाहर आ जाता है।
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आप खुद को गर्भवती होने से बचाना चाहती है। तो माहवारी होने के दौरान सेक्स न करें। गर्भवती होने से कैसे बचें सवाल काफी युवतियाँ हमेशा परेशान रहते हैं। आज कल युवतियों में सेक्स करने से लेकर सबसे ज्यादा जिज्ञासा माहवारी के समय होती है.और उनके बीच में यह जानकारी सबसे ज्यादा फैली हुई है कि मासिक धर्म होने के 13 से 16 दिन के बीच अगर आप सेक्स करते हैं तो गर्भ ठहरने की ज्यादा संभावना रहती है। और ऐसा नहीं है कि बाकी के दिनों में गर्भ नहीं ठहर रहता है।
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बेबी के दबे हुए फेयरनेस को निखारने के लिए आप उसकी नारियल तेल से मालिश करें। क्योंकि यह सिर्फ त्वचा को शरीर फेयरनेस में ही मदद नहीं करता है बल्कि इसे लगाने से बच्‍चे के में इंफेक्‍शन का भी डर नहीं रहता। साथ ही यह तेल नाजुक त्‍वचा के लिए काफी लाभकारी होता है। छोटे बेबी को नहलाने के लिए न बहुत ज्यादा ठंडे और न बहुत ज्यादा गर्म पानी की आवश्यकता है। क्योंकि उनकी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। ऐसे में अगर आप बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी का प्रयोग करेंगे तो दुष्परिणाम सामने आ सकते है।
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किनोआ एक विदेशी अनाज है। जो कि दक्षिण अमेरिका में उगाया जाता है किंतु उसकी लोकप्रियता भारत में भी अधिक है। क्योंकि इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन जो की ग्लूटेन फ्री होता है। और फाइबर की मात्रा इसको एक सुपर फूड बनाती है। आप वजन घटाने के लिए किसी सुपरफूड की खोज कर रहे हैं। तो आप अपने वजन घटाने के प्लान में क्विनोआ को शामिल कर सकते हैं यह फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत होता है। और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी अधिक होती है। जो कि हमारे शरीर में आसानी से बचाया जा सकता है। इसलिए यह आपके शरीर में अतिरिक्त चर्बी को जमा नहीं होने देता और वजन करने में सहायता प्रदान करता है।
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बायो आयल प्रेगनेंसी के दौरान उपयोग करने के लिए सुरक्षित है। प्रेगनेंसी के दौरान बायो ऑइल दूसरी तिमाही की शुरुआत से लगातार लगाया जाना चाहिए। यह पेट में पल रहे बच्चे के लिए हानी रहित है। स्तनपान के दिनों में भी अपने शरीर पर बायो ऑइल का उपयोग करें लेकिन इसे निपल्स पर ना लगायें। आप को कोई भी संदेह हो तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें। बायो ऑयल के फायदे मव यह एक मॉइस्चराइजर की तरह भी काम करता है। यह हर तरह की त्वचा पर सूट करता है। इस्तेमाल के लिए नहाने के बाद अपने हाथो पर थोड़ा सा तेल ले और अपनी त्वचा पर लगाए। ये बड़ी ही आसानी से आपकी त्वचा में समां जायेगा।
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विगोरा 100 एमजी टैबलेट। विगोरा 100 एमजी टैबलेट एक फॉस्फोडाइस्टेरेस प्रकार 5 अवरोधक है जो शरीर में रक्त वाहिकाओं को आराम करने के साथ साथ आराम करने में मदद करता है। यह शरीर के कुछ हिस्सों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में मदद करता है। पुरुषों के बीच सीधा दोष के इलाज के लिए इस दवा का उपयोग किया जा सकता है। समय के लिए वियाग्रा इच्छा के लिए रहता है, व्यक्ति से व्यक्ति में भी भिन्न होता है, लेकिन यौन उत्तेजना के साथ उपयोग किए जाने पर इसे एक समय में 5 घंटे तक काम करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, ज्यादातर पुरुषों को यह पता चल जाएगा कि गोली के प्रभाव पहले इसे लेने के 2 3 घंटे बाद पहनना शुरू कर देंगे।
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मुठ मारना हस्तमैथुन कहलाता है,हस्तमैथुन शारीरिक मनोविज्ञान से सम्बन्धित एक सामान्य प्रक्रिया का नाम है जिसे यौन सन्तुष्टि हेतु पुरुष हो या स्त्री, कभी न कभी सभी करते है। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि बुड्ढे बुड्ढे लोग भी लिंगोत्थान हेतु करते हैं इससे उन्हें यह अहसास होता है कि वे अभी भी यौन क्रिया करने में सक्षम हैं। अपने यौनांगों को स्वयं उत्तेजित करना युवा लड़कों तथा लड़कियों के लिये उस समय आवश्यक हो जाता है जब उनकी किसी कारण वश शादी नहीं हो पाती या वे असामान्य रूप से सेक्सुअली स्ट्रांग होते हैं। अब तो विज्ञान द्वारा भी यह सिद्ध किया जा चुका है कि इससे कोई हानि नहीं होती।
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फिटकारी को अंग्रेजी में पोटैश ऐलम या केवल ऐलम भी कहते हैं। यह पोटैशियम सल्फेट और ऐलुमिनियम सल्फेट का द्विलवण है। इसके चतुर्फलकीय क्रिस्टल में क्रिस्टलीय जल के 24 अणु रहते हैं। इसके क्रिस्टल अत्यंत सरलता से बनते हैं। पहले पहल फिटकरी ऐलम शेल से बनाई गई थी। यह बड़ी मात्रा में ऐलूनाइट या फिटकरी पत्थर के वायु में भंजन निक्षालन और क्रिस्टलीकरण से प्राप्त होती है। ऐलूनाइट से प्राप्त ऐलम को रोमन ऐलम भी कहते हैं। ऐलूमिनों फेरिक के विलयन पर पोटैशियम सल्फेट की क्रिया से भी फिटकारी प्राप्त हो सकती है। फेरिक ऑक्साइड के कारण इसका रंग गुलाबी होता है, यद्यपि विलेय लोहा इसमें बिल्कुल नहीं होता या केवल लेश मात्र होता है।
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अरंडी का तेल यानि कास्टर आयल का प्रयोग ब्यूटी उत्पादों साबुन में मालिश के तेल और दवाईयों में किया जाता है। अरंडी का तेल इसके बीजों से निकाला जाता है और इसका पौधा ज़्यादातर भारत और अफ्रीका में पाया जाता है। अपने फ़ायदो के कारण यह तेल पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। अरंडी के तेल से चेहरे की मालिश करने पर मुहांसों की समस्या से राहत मिलती है। अरंडी के तेल के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत हो जाती है। यह झुर्रियों व महीन रेखाओं को दूर करता है और नरम व चमकदार त्वचा प्रदान करता है।
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ज्वार और जई के बारे में दोनों अलग-अलग फसल हैं, ज्वार हिंदी शब्द का अर्थ है कि ज्वार निश्चित रूप से अनाज आता है और जौ का अर्थ है जौ जो अनाज फसलों के अंतर्गत आता है। मुझे लगता है कि दोनों अनाज के नीचे आते हैं। जौ गेहूं की तरह ऊंचाई के साथ एक पौधे है। ज्वार आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा क्यों है 7 कारण। लेकिन भारत में, ज्वार, जो अंग्रेजी में सोरघम के नाम से जाना जाता है, मुख्य रूप से देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में एक प्रमुख है जहां यह आटा में जमीन है और इसका उपयोग रोटिस, भकरी, चीला, डोसा आदि बनाने के लिए किया जाता है।
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प्रेगनेंसी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका कंडोम का इस्तेमाल माना जाता है। उसके बाद दूसरे नंबर पर गर्भ निरोधक गोलियां आती हैं। अगर आप इन दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो आप अपनी प्रेग्नेंसी को 100 प्रतिशत परसेंट नहीं रोक सकते इसमें कुछ हद तक आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना बनी रहती है। फिर भी यह तरीके काफी कारगर हैं । गर्भधारण को रोकने और प्रेगनेंसी से बचने के लिए कॉपर टी का उपयोग बहुत ही कारगर साबित होता है। इसका उपयोग भी आसान होता है। और इसे एक बार लगा लेने से आप कई सालों के लिए गर्भवती होने से बच सकती हैं। कॉपर टी एक प्रकार की छोटी सी प्लास्टिक की छड़ होती है।
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गर्भाशय स्त्री जननांग है। यह 7.5 सेमी लम्बी, 5 सेमी चौड़ी तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है। इसका वजन लगभग 35 ग्राम तथा इसकी आकृति नाशपाती के आकार के जैसी होती है। जिसका चौड़ा भाग ऊपर फंडस तथा पतला भाग नीचे इस्थमस कहलाता है। महिलाओं में यह मूत्र की थैली और मलाशय के बीच में होती है तथा गर्भाशय का झुकाव आगे की ओर होने पर उसे एन्टीवर्टेड कहते है अथवा पीछे की तरफ होने पर रीट्रोवर्टेड कहते है। गर्भाशय के झुकाव से बच्चे के जन्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
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आड़ू या सतालू अंग्रेजी नाम पीच वास्पतिक नाम प्रूनस पर्सिका प्रजाति प्रूनस जाति पर्सिका कुल रोज़ेसी का उत्पत्तिस्थान चीन है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि यह ईरान में उत्पन्न हुआ। यह पर्णपाती वृक्ष है। भारतवर्ष के पर्वतीय तथा उपपर्वतीय भागों में इसकी सफल खेती होती है। ताजे फल खाए जाते हैं तथा फल से फलपाक जैम जेली और चटनी बनती है। फल में चीनी की मात्रा पर्याप्त होती है। जहाँ जलवायु न अधिक ठंढी, न अधिक गरम हो, 15 डिग्री फा. से 100 डिग्री फा. तक के तापवाले पर्यावरण में, इसकी खेती सफल हो सकती है। इसके लिए सबसे उत्तम मिट्टी बलुई दोमट है, पर यह गहरी तथा उत्तम जलोत्सरणवाली होनी चाहिए। भारत के पर्वतीय तथा उपपर्वतीय भागों में इसकी सफल खेती होती है।
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एक गर्भावस्था परीक्षण यह निर्धारित करने का प्रयास करता है कि कोई महिला गर्भवती है या नहीं। संकेतक मार्कर रक्त और मूत्र में पाए जाते हैं, और गर्भावस्था परीक्षणों में इन पदार्थों में से एक को नमूना करने की आवश्यकता होती है। इन मार्करों में से पहला खोजा जा सकता है, मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रॉपिन एचसीजी, 1930 में उर्वरित ओवा अंडे की कोशिकाओं द्वारा उत्पादित किया गया था। जबकि एचसीजी गर्भावस्था का एक विश्वसनीय मार्कर है, लेकिन इम्प्लांटेशन के बाद तक इसका पता नहीं लगाया जा सकता है अगर गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में परीक्षण किया जाता है तो इसका परिणाम नकारात्मक नकारात्मक होता है। एचडीजी अंडे के निषेचन के 8 दिन बाद, और मूत्र में 10 दिनों के बाद रक्त के माध्यम से पता लगाया जा सकता है।
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एक प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक रिचर्ड लिन ने मानव पुरुष के लिंग के आकार पर एक शोधपत्र प्रकाशित किया। इस शोध में 113 देशों के पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के साइज का विश्लेषण किया गया है। इस आधार पर देशों की एक लिस्‍ट भी बनाई गई है। इस लिस्‍ट में भारत 110वें स्थान पर है। लिस्‍ट में 7.1 इंच के औसत साइज के साथ कांगो सबसे ऊपर है। कोरिया और कंबोडिया 3.9 इंच सबसे नीचे हैं। भारत इन्‍हीं दो देशों से ऊपर है। भारतीय पुरुषों का औसत साइज 4 इंच बताया गया है। लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं। साल 2006 में भारत में कंडोम का साइज तय करने के लिए किए गए 'साइज सर्वे' की रिपोर्ट आई थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर द्वारा कराए गए सर्वे 'स्डटी ऑन प्रापर लेंथ एंड ब्रेड्थ स्पेसिफिकेसंस फॉर कंडोम बेस्ड एंथ्रोपोमेट्रिक मेजरमेंट' के बाद यह नतीजा निकला था
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